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                <title>Quad Group - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका पर क्वाड की पैनी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन के बीच द्विपक्षीय शिखर बैठक तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर स्थापित चतुष्कोणीय फ्रेमवर्क (क्वाड) की शिखर बैठक में अफगानिस्तान की स्थिति, कट्टरवाद एवं आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीरता से विचार विमर्श किया गया। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने आज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/quad-keeping-a-close-eye-on-pakistans-role-in-afghanistan/article-27178"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/quad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन (एजेंसी)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन के बीच द्विपक्षीय शिखर बैठक तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर स्थापित चतुष्कोणीय फ्रेमवर्क (क्वाड) की शिखर बैठक में अफगानिस्तान की स्थिति, कट्टरवाद एवं आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीरता से विचार विमर्श किया गया। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी माना कि अफगानिस्तान में वर्तमान सरकार समावेशी नहीं है। अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं की भागीदारी नहीं है। मानवाधिकारों से जुड़े मसले हैं। इसलिए इसे वास्तव में लोकतांत्रिक नहीं माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी क्वाड देशों में एक राय थी कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान खुद को जिस तरह से पेश करने की कोशिश कर रहा है, इसे बहुत सावधानी से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्वाड की बैठक में अफगानिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2593 को लागू करने पर भी चर्चा हुई, जिसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान की धरती से किसी अन्य देश पर हमला करने या इसकी साजिश रचने की इजाजत नहीं देने की बात कही गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रृंगला ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता विशेष रूप से अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत के कदम की सराहना की गयी। बिडेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह महसूस करते हैं कि सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। विदेश सचिव के अनुसार दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा कोविड के टीके को लेकर था। क्वाड के अनुरोध पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जानसन एंड जानसन के 80 लाख टीके भारत में बनाएगा और ये अगले माह तक तैयार हो जाएंगे तथा इनका निर्यात किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों बैठकों में भारत की टीका पहल एवं निर्यात खोलने की घोषणा की काफी सराहना की गई। भारतीय वैक्सीन गुणवत्तापूर्ण होने के साथ ही सस्ती है और उसकी उपलब्धता एवं विकासशील देशों में इसे मुहैया कराने को लेकर व्यवस्थागत की सुधार की जरूरत व्यक्त की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रृंगला ने एक सवाल पर यह भी कहा कि भारत एवं अमेरिका स्वास्थ्य एवं बायोमेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग खासकर महामारी से निपटने की तैयारियों, महामारी के खतरे से बचने के लिए बायोमेडिकल अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की बात है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने भारतीय पेशेवरों के प्रवेश खासकर एच1बी वीसा के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। व्यापार एवं आर्थिक संबंधों के विस्तार पर जोर दिया गया। दोनों नेता इस बारे में दोनों देशों के मंत्रियों को आवश्यक निर्देश देंगे। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अमेरिकी सरकार एवं लोगों द्वारा एकजुटता दिखाने के लिए धन्यवाद दिया जबकि बिडेन ने दवाइयों एवं टीकों को दुनिया के अन्य देशों को उपलब्ध कराने के लिए भारत की भूमिका की सराहना की।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Sep 2021 10:23:57 +0530</pubDate>
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                <title>क्वॉड पर रूसी चिंताओं को दूर करे भारत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका व रूस के साथ एक साथ संबंध कायम रखने में भारत को आगे परेशानियां आने वाली हैं। रूस, भारत का बहुत लंबे वक्त तक व विश्वस्त सहयोगी रहा है। आज भी रूस भारत के लिए चीन के साथ विवादों में अहम मध्यस्थ है। 1962 से लेकर डोकलाम विवाद हो या लद्दाख में चीनी घुसपैठ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/india-should-remove-russian-worries-on-quad/article-20812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/countries-quad-group.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका व रूस के साथ एक साथ संबंध कायम रखने में भारत को आगे परेशानियां आने वाली हैं। रूस, भारत का बहुत लंबे वक्त तक व विश्वस्त सहयोगी रहा है। आज भी रूस भारत के लिए चीन के साथ विवादों में अहम मध्यस्थ है। 1962 से लेकर डोकलाम विवाद हो या लद्दाख में चीनी घुसपैठ हर बार भारत ने रूस को याद किया और रूस ने भी कभी भारत को निराश नहीं किया। लेकिन इस साल भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन के रद्द हो जाने से दोनों देशों के आपसी रिश्तों में ठंडापन आने के आसार दिख रहे हैं क्योंकि पिछले 20 साल में कभी भी कोई ऐसा मौका नहीं आया जब भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन नहीं हुआ हो। दरअसल भारत जब से जापान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया के साथ क्वॉड समूह का हिस्सा बना है तब से रूस कुछ निराश है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि क्वॉड समूह दक्षिण चीन सागर में अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए अस्तित्व में आया है। पिछले कई सालों से दक्षिण चीन सागर में बढ़ रहा चीनी हस्तक्षेप क्वॉड देशों को परेशान कर रहा है। आस्टेÑेलिया-जापान-अमेरिका भारत इनकी दक्षिण चीन सागर के व्यापारिक मार्ग पर काफी ज्यादा निर्भरता है। अमेरिका की चीन प्रतिद्वंदिता के चलते भारत में रूचि बढ़ रही है फिर पाकिस्तान एवं चीन के साथ तनावपूर्ण सम्बंधों के चलते अमेरिका, भारत की सुरक्षा खरीद पर भी नजर रख रहा है। चूंकि अभी तक भारत के सुरक्षा साजो सामान की आपूर्ति में रूस महत्वपूर्ण सहयोगी देश रहा है। आर्थिक उदारीकरण के दौर में अमेरिका भारत की आर्थिक साझेदारी भी बढ़ रही है, जिसके कारण रूसी हितों के प्रभावित होने की रूस को आशंकाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस की सबसे बड़ी फिक्र क्वॉड को लेकर हुई है। रूस-अमेरिका संबंध कभी भी सामान्य नहीं हो सके एवं क्वॉड को रूस अपने विरुद्ध एक अमेरिकी घेराबंदी समझ रहा है, जिसका कि भारत औपचारिक सदस्य बन चुका है। इतना ही नहीं भारत-अमेरिका के साथ हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में सैन्य अभ्यास की भी तैयारी में है हिन्द महासागर क्षेत्र में ही रूसी फ्लीट है जिस कारण भारत का बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी रूस भारत से कहीं न कहीं दूर हो रहा है। भारत आर्थिक एवं कूटनीतिक तौर पर ‘बहुसहभागीदारी’ के सिद्धांत पर चलने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">परन्तु वर्तमान विश्व अभी भी दो शक्तियों के बीच विभक्त है, ऐसे में रूस नहीं चाहता कि विश्व में उसे कोई देश अमेरिका से कम आंके। भारत को अब रूस के साथ रक्षा कूटनीति के अलावा सांस्कृतिक, आर्थिक मामलों में संबंधों को संतुलित करने के प्रयास तेज करने होंगे। अमेरिका के उस किसी भी प्लान का हिस्सा बनने से भारत को बचना चाहिए जो रूस विरोधी है। स्पष्ट तौर पर भारत को हिंद प्रशांत महासागर में रूसी हितों की भी फिक्र करनी चाहिए। हालांकि भारत अपनी विदेश नीति में एक संप्रभु राष्टÑ है, जिसके लिए भारत को किसी से निर्देश या श्रुतलेख लेने की आवश्यकता नहीं फिर भी भारत विदेश नीति में अपने पुराने मित्रों को सम्मानजनक स्थान अवश्य दे।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 25 Dec 2020 09:48:12 +0530</pubDate>
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