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                <title>Bird Flu - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Bird Flu RSS Feed</description>
                
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                <title>ब्राजील ने बर्ड फ्लू के कारण की 6 महीने के लिए आपातकाल की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रासीलिया (एजेंसी)। ब्राजील के पराना प्रांत ने प्रवासी पक्षियों के बीच अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के मामलों का पता चलने के कारण छह महीने के लिए पशु स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है। क्षेत्रीय सरकार ने यह जानकारी दी। क्षेत्रीय सरकार ने मंगलवार को अपने एक बयान में कहा, ‘संदिग्ध अत्यधिक रोगजनक एवियन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/brazil-declares-state-of-emergency-for-six-months-due-to-bird-flu/article-50439"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/hen-bird-flu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रासीलिया (एजेंसी)।</strong> ब्राजील के पराना प्रांत ने प्रवासी पक्षियों के बीच अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के मामलों का पता चलने के कारण छह महीने के लिए पशु स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है। क्षेत्रीय सरकार ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रीय सरकार ने मंगलवार को अपने एक बयान में कहा, ‘संदिग्ध अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) के मामले समाने आये हैं, जिससे इस बीमारी से निपटने के लिए प्रांतीय सरकार की ओर से उचित कदम उठाए जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर पराना के अधिकारी ने राज्य में कल से अगले छह महीनों (180 दिनों) के लिए पशु स्वास्थ्य आपातकाल लागू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक, पराना में प्रवासी जंगली पक्षियों में एच5एन1 के सात मामलों की पहचान की गई है। क्षेत्रीय कृषि और आपूर्ति मंत्री नॉर्बर्टो ओर्टिगारा ने बयान में कहा कि सरकार को ह्यहर संभव औद्योगिक फार्मों पर वायरस के प्रसार को रोकने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि 2022 में पराना में 19 हजार से अधिक पोल्ट्री फार्म थे, जबकि इस वर्ष की पहली छमाही में इस क्षेत्र से पोल्ट्री मांस निर्यात की मात्रा दस लाख टन से अधिक की गयी है। महीने की शुरूआत में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक समुदाय को चेतावनी दी थी कि बर्ड फ्लू तेजी से स्तनधारियों को प्रभावित कर रहा है, जिससे मनुष्यों के लिए अधिक खतरा पैदा हो रहा है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 26 Jul 2023 12:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बर्ड फ्लू का कहर: तीन लाख से अधिक मारी जाएगी मुर्गियां</title>
                                    <description><![CDATA[इस देश में बर्ड फ्लू के कारण तीन लाख से अधिक मुर्गियों को मारा जायेगा टोक्यो (एजेंसी)। जापान के आओमोरी प्रांत में बर्ड फ्लू के नए (Bird flu 2023) प्रकोप के कारण करीब तीन लाख 30 हजार मुर्गियों को मारा जायेगा। स्थानीय प्रशासन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्रशासन ने आज यहां जारी एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bird-flu-havoc-more-than-three-lakh-chickens-will-be-killed/article-45064"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/bird-flu-in-china.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">इस देश में बर्ड फ्लू के कारण तीन लाख से अधिक मुर्गियों को मारा जायेगा</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोक्यो (एजेंसी)।</strong> जापान के आओमोरी प्रांत में बर्ड फ्लू के नए (Bird flu 2023) प्रकोप के कारण करीब तीन लाख 30 हजार मुर्गियों को मारा जायेगा। स्थानीय प्रशासन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्रशासन ने आज यहां जारी एक बयान में कहा ह्ल23 मार्च को संबंधित संस्थानो को एक फार्म पर मृत पक्षियों की संख्या में वृद्धि के बारे में एक संदेश प्राप्त हुआ। बर्ड फ्लू वायरस की मौजूदगी की जांच के बाद 13 में से 11 पक्षियों के नतीजे पॉजिटिव पाए गए।ह्व उन्होंने बताया कि तीन लाख 30 हजार मुर्गियों को मारा जायेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Bird flu 2023</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने फर्म के चारों ओर तीन किलोमीटर क्षेत्र के दायरे में मुर्गियों और अंडों के परिवहन के लिए अलग करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा अधिकारी फर्म और उपकरणों को कीटाणुरहित करेंगे। आओमोरी प्रान्त में इस मौसम में बर्ड फ्लू का यह तीसरा प्रकोप है। नवीनतम प्रकोपों ​​को ध्यान में रखते हुए जापान में इस मौसम में मारी गई मुर्गियों की संख्या एक करोड़ पचास लाख से अधिक हो गई है, जो कि देश में अब तक सबसे अधिक है। पिछले वर्ष 28 अक्टूबर से देश के 47 प्रान्तों में से 25 में बर्ड फ्लू पाया गया है। इसके अलावा वायरस के कारण चिकन और अंडे की कीमत पिछले 29 वर्षों के शिखर पर है।</p>
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                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Mar 2023 14:26:19 +0530</pubDate>
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                <title>जापान बर्ड फ्लू के प्रकोप के बीच तीन लाख से ज्यादा मुर्गियां मारेगा</title>
                                    <description><![CDATA[टोक्यो (एजेंसी)। जापान के एची प्रान्त में बर्ड फ्लू फैलने के कारण करीब 310,000 मुर्गियां मारी जाएंगी। क्योदो न्यूज एजेंसी ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि पिछले 11 सालों में यह पहला प्रकोप है। एची में एक फार्म पर रविवार को कर्मचारियों ने अचानक बड़ी संख्या में मरी हुई मुर्गियां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/more-than-three-lakh-chickens-will-be-killed-amid-japan-bird-flu-outbreak/article-40586"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/bird-flu-in-japan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टोक्यो (एजेंसी)।</strong> जापान के एची प्रान्त में बर्ड फ्लू फैलने के कारण करीब 310,000 मुर्गियां मारी जाएंगी। क्योदो न्यूज एजेंसी ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि पिछले 11 सालों में यह पहला प्रकोप है। एची में एक फार्म पर रविवार को कर्मचारियों ने अचानक बड़ी संख्या में मरी हुई मुर्गियां देखी। इन तेरह मरी हुई मुर्गियों में से छह बर्ड फ्लू से पीड़ित पाई गई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="लिविंगस्टोन चोट के कारण पाकिस्तान टेस्ट श्रृंखला से बाहर" href="http://10.0.0.122:1245/liam-livingstone-ruled-out-of-pakistan-test-series-due-to-injury/">लिविंगस्टोन चोट के कारण पाकिस्तान टेस्ट श्रृंखला से बाहर</a></p>
<p style="text-align:justify;">क्योदो के अनुसार, बर्ड फ्लू के प्रकोप के बीच कागोशिमा के प्रांत में 34,000 मुर्गियां मारी गईं। पिछले हफ्तों में जापान ने ओकायामा, कागावा, मियागी, आओमोरी, वाकायामा, टोटोरी, कागोशिमा प्रांतों के साथ-साथ होक्काइडो द्वीप पर बर्ड फ्लू का प्रकोप दर्ज किया है। गत 28 अक्टूबर को सीजन के पहले प्रकोप के बाद से देश में कुल मिलाकर लगभग 33 लाख मुर्गियां मारी जा चुकी हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 05 Dec 2022 17:29:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चिंताजनक: चीन के हेनान प्रांत में मिला बर्ड फ्लू का पहला मामला, चार वर्ष का बच्चा संक्रमित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। विश्व में पहले कोरोना ही थमने का नाम नहीं ले रहा इस बीच किसी इन्सान के अंदर पहली बार एच3एन8 बर्ड फ्लू का संक्रमण पाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन के हेनान प्रांत में बर्ड फ्लू के एच3एन8 स्ट्रेन के साथ पहला मानव संक्रमण दर्ज किया गया। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/first-case-of-bird-flu-found-in-henan-province-of-china/article-32768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/bird-flu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विश्व में पहले कोरोना ही थमने का नाम नहीं ले रहा इस बीच किसी इन्सान के अंदर पहली बार एच3एन8 बर्ड फ्लू का संक्रमण पाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन के हेनान प्रांत में बर्ड फ्लू के एच3एन8 स्ट्रेन के साथ पहला मानव संक्रमण दर्ज किया गया। इस मामले की खुद चीन के राष्टÑीय स्वास्थ्य आयोग ने पुष्टि की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">चीन के स्वास्थ्य आयोग के अनुसार जिस बच्चे में बर्ड फ्लू के एच3एन8 के स्ट्रेन मिला है। बच्चे को पहले बुखार आया जिसके बाद लड़के की स्वास्थ्य जांच की गई तो वह वायरस संक्रमित पा गया। बताया जा रहा है कि बच्चा अपने घर में पाले गए मुर्गियों एवं कौवे के संपर्क में आने से संक्रमित हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>इन्सानों में यह पहला मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यह संक्रमण पहले जानवरों में तो पाया गया है लेकिन यह इन्सानों में पहली बार पाया गया है। इसकी वजह से पक्षी के साथ इन्सानों की भी मौत हो सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है इसके लक्षण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बर्ड फ्लू में सर्दी, जुकाम, खांसी, मांसपोशियों में दर्द होना, सांस फूलना, सिर दर्द, ठंड के साथ बुखार आना आदि लक्षण है। ये बीमारी आमतौर पर बीमार पक्षी के सम्पर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षण सामने आने में लगभग 2 से 8 दिन का वक्त लग जाता है।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Apr 2022 12:38:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में प्रवासी पक्षी कुरजां पर बर्ड फ्लू का संकट छाया</title>
                                    <description><![CDATA[मंगोलिया से हजारों किमी. का सफर तय कर पहुंचते हैं ये पक्षी जोधपुर (एजेंसी)। साइबेरिया एवं मंगोलिया से हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय कर शीतकालीन प्रवास पर राजस्थान आई प्रवासी पक्षी कुरजां (डोमीइसेल क्रेन) इस बार बर्ड फ्लू की चपेट में आ गई और अब तक इससे करीब 170 कुरजां की मौत हो चुकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/bird-flu-crisis-shadows-migratory-bird-kurjan-in-rajasthan/article-28330"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/kurjan-bird1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">मंगोलिया से हजारों किमी. का सफर तय कर पहुंचते हैं ये पक्षी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>जोधपुर (एजेंसी)।</strong> साइबेरिया एवं मंगोलिया से हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय कर शीतकालीन प्रवास पर राजस्थान आई प्रवासी पक्षी कुरजां (डोमीइसेल क्रेन) इस बार बर्ड फ्लू की चपेट में आ गई और अब तक इससे करीब 170 कुरजां की मौत हो चुकी है। नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ हाई सिक्योरिटी एनीमल्स डिजीज भोपाल की रिपोर्ट में जोधपुर जिले के कापरड़ा में मरी कुरजां में बर्ड फ्लू होने की पुष्टि हुई है। पिछले सप्ताह इन पक्षियों के बीमार पड़ने एवं मरने का सिलसिला शुरू होने पर जांच के लिए मृत कुरजां के नमूने भोपाल भेजे गए थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आम लोगों को क्षेत्र से दूर रहने के निर्देश</h4>
<p style="text-align:justify;">जोधपुर माचिया बायोलॉजिकल पार्क के डॉ. ज्ञान प्रकाश ने बताया कि भोपाल से प्राप्त रिपोर्ट में एवीयन इन्फ्लुएंजा वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई, जो एच5 एवं एन1 प्रकार का है। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद कुरजां वाले क्षेत्रों में आम लोगों को दूर रखने, बीमार कुरजां के इलाज एवं मृत पक्षियों के निस्तारण के दौरान वहां काम में लगे चिकित्सक सहित अन्य लोग पीपीई कीट पहनने तथा अन्य जरूरी सावधानी बरती जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नहीं थम रहा पक्षियों की मौत का सिलसिला</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इसका असर जोधपुर जिले के कापरड़ा, ओलवी एवं रामासनी में ज्यादा देखने को मिला और इन क्षेत्रों में अब तक 150 से अधिक कुरजां की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि जोधपुर से सटे पाली जिले में भी इन पक्षियों की मौत हुई है। पाली जिले के सरदारसमंद में शुक्रवार को करीब दस कुरजां की मृत्यु हो गई। प्रदेश में अब तक इससे लगभग 170 कुरजां की मृत्यु हो चुकी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पहले रानीखेत का था संदेह</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू की रिपोर्ट आने से पहले मृत कुरजां के पोस्टमार्टम के बाद बीमार पक्षियों को इलाज रानीखेत बीमारी मानकर किया जा रहा था, लेकिन अब स्पष्ट हो गया कि इनकी मौत बर्ड फ्लू से हुई है और अब इसके अनुसार इलाज एवं सावधानी बरती जा रही है। इससे पहले इनके बचाव के लिए इनका वैक्सीनेशन भी किया गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वाइल्ड लाइफ आॅफ इंडिया की टीम ने किया निरीक्षण</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बर्ड फ्लू को पक्षियों के लिए घातक बताते हुए कहा कि फिलहाल यह बीमारी सीमित क्षेत्र में ही है और इसके अन्य जगहों पर फैलने की सूचना नहीं है, इस कारण इसके अन्यत्र नहीं फैलने पर सप्ताह भर में इस पर काबू पा लेने की संभावना है। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवण सिंह राठौड़ ने बताया कि बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद वाइल्ड लाइफ आफ इंडिया की टीम भी मौके पर पहुंची है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">खींचन में सतर्कता बढ़ाई</h4>
<p style="text-align:justify;">उधर फलौदी से चिकित्सा अधिकारी (पक्षी) डॉ. भागीरथ ने बताया कि हजारों कुरजां के जमावड़े वाले खींचन में अभी किसी कुरजां के बीमार होने का मामला सामने नहीं आया है। हालांकि यहां भी सावधानी बरती जा रही है। इसके अलावा जोधपुर जिला प्रशासन ने ने अधिकारियों की बैठक लेकर बर्ड फ्लू से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बर्ड फ्लू से इन पक्षियों की मौत के बाद भरतपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान सहित प्रदेश के पक्षियों के डेरे वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और पशुपालन विभाग ने कुछ स्थानों से पक्षियों की बीट के नमूने भी लिए गए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मार्च में वापसी करते हैं ये पक्षी</h4>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस समय जैसलमेर एवं जोधपुर एवं पाली सहित कुछ जिलों में अलग-अलग स्थानों पर हजारों कुरजां ने डेरा डाल रखा है। साइबेरिया एवं मंगोलिया से लंबा सफर तय कर हर वर्ष सर्दी के मौसम में कुरजां राजस्थान आती है और सर्दी के बाद मार्च महीने के आखिरी में वापसी की उड़ान भरने लग जाती है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 10:28:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुग्राम के बच्चे में मिला बर्ड फ्लू, एम्स में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[गांव चकरपुर में मिला केस, सभी पोल्ट्री फार्मों की चैकिंग शुरू पशुपालन विभाग ने शुरू किया सर्वे सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। जिले में बर्ड फ्लू का पहला केस मिला है। गांव चकरपुर निवासी 11 साल के बच्चे को बर्ड फ्लू (एवियन इंफलूएंजा) संक्रमण होने के बाद उसे नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bird-flu-found-in-gurugrams-child-admitted-to-aiims/article-25388"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/bird-flu.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>गांव चकरपुर में मिला केस, सभी पोल्ट्री फार्मों की चैकिंग शुरू</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>पशुपालन विभाग ने शुरू किया सर्वे</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम।</strong> जिले में बर्ड फ्लू का पहला केस मिला है। गांव चकरपुर निवासी 11 साल के बच्चे को बर्ड फ्लू (एवियन इंफलूएंजा) संक्रमण होने के बाद उसे नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग और पशु पालन विभाग ने बर्ड फ्लू का केस मिलने के बाद गांव के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में सर्वे शुरू कर दिया है। ताकि किसी अन्य में ऐसे लक्षण मिलते हैं तो उन्हें समय से पहचाना जा सके। इस दौरान लोगों से बर्ड फ्लू के लक्षणों के बारे में पूछताछ कर डाटा एकत्रित किया जा रहा है। एम्स में 11 वर्षींय बच्चे की जांच में बच्चे को बर्ड फ्लू (एवियन इंफलूएंजा) संक्रमण होने की पुष्टि हुई है। पशुपालन विभाग की उप-निदेशक डा. पुनीता गहलावत के मुताबिक पशुपालन विभाग द्वारा जिला के पोल्ट्री फार्मों की भी लगातार चैकिंग करवाई जा रही है। गांव चकरपुर व आसपास के 10 किलोमीटर के दायरे में सर्वे के लिए 17 टीमें अलग से काम कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपायुक्त डा. यश गर्ग ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि बीमार अथवा मरे हुए पक्षी की सूचना तत्काल पशुपालन विभाग को दें। पक्षियों के पंख, म्यूकस और बींठ को ना छूएं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jul 2021 17:35:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिंताजनक: चीन में बर्ड फ्लू से संक्रमित हुआ इंसान</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के वॉचडाग ने इंसान में एच10एन3 बर्ड फ्लू के पहले मामले की पुष्टि की बीजिंग (एजेंसी)। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने मंगलवार को चीन के पूर्वी प्रांत जियांग्सू में बर्ड फ्लू के एच10एन3 के पहले मानव मामले की पुष्टि की है। स्वास्थ्य आयोग ने एक बयान में बताया कि 41 साल के एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/worrying-man-infected-with-bird-flu-in-china/article-24076"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/bird-flu-in-china.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>चीन के वॉचडाग ने इंसान में एच10एन3 बर्ड फ्लू के पहले मामले की पुष्टि की</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग (एजेंसी)।</strong> चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने मंगलवार को चीन के पूर्वी प्रांत जियांग्सू में बर्ड फ्लू के एच10एन3 के पहले मानव मामले की पुष्टि की है। स्वास्थ्य आयोग ने एक बयान में बताया कि 41 साल के एक व्यक्ति में गत 23 अप्रैल को लक्षण नजर आये थे और हालत बिगड़ने पर 28 अप्रैल को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले महीने 28 मई को उसके एच10एन3 स्ट्रैन से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। अब उसकी हालत स्थिर है और अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। उसके करीबी संपर्कों में संक्रमण का कोई अन्य मामला सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग ने कहा है कि वायरस के जीनोम के विश्लेषण के मुताबिक यह एवियन मूल का है और मनुष्य पर प्रभावी रूप से असर नहीं डालता। विशेषज्ञों का मत है कि विश्व में एच10एन3 से मानव के संक्रमित होने का पहले कोई मामला सामने नहीं आया है। यह नया मामला पक्षी से मानव में वायरस के अचानक संक्रमण को चिह्नित करता है, हालांकि इसके व्यापक स्तर पर फैलने का खतरा कम ही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">चीन में एवियन इंफ्लुएंजा के अलग-अलग रूप</h4>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा कि गया इससे पहले दुनिया में बर्ड फ्लू के स्ट्रेन एच10एन3 से किसी इंसान के संक्रमित होने का मामला अभी सामने नहीं आया था। एच10एन3 को बर्डफ्लू का अपेक्षाकृत कमजोर स्ट्रेन माना जाता है और इसका बड़े पैमाने पर फैलने का खतरा भी कम होता है। चीन में एवियन इंफ्लुएंजा के अलग-अलग स्ट्रेन पाए जाते हैं। पोल्ट्री में काम करने वाले इंसान समय समय पर इन स्ट्रेन से संक्रमित होते रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पक्षियों के लिए काफी खतरनाक है एच5एन8 स्ट्रेन</h4>
<p style="text-align:justify;">एच5एन8 इंफ्लुएंजा का एक सब-टाइप है जिसे बर्ड फ्लू वायरस के रूप में भी जाना जाता है। जबकि एच5एन8 स्ट्रेन से इंसानों को थोड़ा खतरा रहता है। बर्ड फ्लू के इस स्ट्रेन को पक्षियों एवं पोल्ट्री जीवों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। गत अप्रैल में चीन के उत्तरपूर्व शेनयांग शहर में पक्षियों में एच5एन6 एवियन फ्लू पाया गया।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jun 2021 17:50:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या यह केवल बर्ड फ्लू है?</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार को इस बात को समझना होगा कि सामाजिक क्षेत्र में सुधार के बिना आर्थिक सुधार अपने आप में अभिशाप बन सकते हैं क्योंकि यदि सामाजिक क्षेत्र कमजोर होगा तो पूरी प्रणाली धराशायी हो सकती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/is-it-only-bird-flu/article-21100"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/bird-flu-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="color:#000000;">देश में रोगियों की संख्या के अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं नहंी हैं। एक आईसीयू बिस्तर पर कई बार दो-तीन रोगी देखने को मिल जाते हैं। इसके अलावा अस्पतालों में स्वच्छता का अभाव है। कई बार नवजात शिशुओं के पास आपको चूहे और आवारा कुत्ते घूमते मिल जाएंगे किंतु अब इस पर लोग हैरान नहंी होते क्योंकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों में यह आम बात बन गयी है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#000000;"> इसके अलावा चिकित्सा उदासीनता, संसाधनों की कमी, चिकित्सा कर्मियों की कमी, डॉक्टरों की कमी और जो उपकरण उपलब्ध हैं उनमें से 70 प्रतिशत उपकरणों में खराबी, मेडिकल उपकरणों की कमी आदि अनेक समस्याएं स्वास्थ्य क्षेत्र में हैं। </span>गता है भगवान नाराज हैं। जहां एक ओर सारा देश कोरोना महामारी के टीके की प्रतीक्षा कर रहा है तो दूसरी ओर बर्ड फ्लू का प्रकोप फैलने लगा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल, केरल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ, जम्मू कश्मीर और दिल्ली में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं<span style="color:#000000;">।</span></p>
<p style="text-align:justify;">और इन राज्यों में मुर्गी, कौवे तथा प्रवासी पक्षियों की मौत हो रही है। राज्यों को सतर्क कर दिया गया है। पशु पालन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार स्थिति भयावह है। किंतु क्या यह पर्याप्त है? क्या इससे सरकार द्वारा विलंब से कदम उठाने और कुपबंधन को नजरंदाज किया जा सकता है? पशु पालन राज्य मंत्री बलियान के अनुसार यह बीमारी केवल कुछ राज्यों में स्थानीय स्तर पर फैली है। यह बडा खतरा नहीं है। यह कोई नई बात नहीं है। 2015 से हर वर्ष ऐसा हो रहा है। क्या वास्तव में ऐसा है? आप किसे बेवकूफ बना रहे हैं? शायद उन्हें बर्ड फ्लू कहां से फैला, इसकी जानकारी नहंी है।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में 2006 में बर्ड फ्लू के फैलने की खबरें आयी थी। ओडिशा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में पालतू और वन्य पक्षियों में इसके प्रकोप की खबरें आती रहती हैं। 2006 से 2018 के बीच देश में बर्ड फ्लू संक्रमण के 225 केन्द्र रहे हैं और इस दौरान 83.49 लाख पक्षियो को मारना पडा। न केवल इस संक्रमण के प्रति अपितु अन्य बीमारियों के प्रति भी सरकार का ढुलमुल रवैया रहा है और यह बताता है<span style="color:#000000;">।</span></p>
<p style="text-align:justify;">कि हमारे शासक इनके बारे में गंभीर नहीं रहे हैं। हमारे देश में मानव जीवन के प्रति राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता देखने को मिलती है। उनके लिए नागरिक केवल एक संख्या है। यह तथ्य इससे स्पष्ट हो जाता है कि देश में गरीब लोग विशेषकर बच्चे ऐसी बीमारियों के कारण काल का ग्रास बन जाते हैं जो पूर्णतया उपचार योग्य हैं। देश में लगभग 6 लाख डाक्टरों तथा 20 लाख नर्सों की कमी है। ये आंकडे सेन्टर फोर डिसीज डायनेमिक्स, इकानोमिक्स एंड पोलिसीज के हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों मे जो लोग स्वयं को डाक्टर कहते हैं उनमें से केवल 58 प्रतिशत के पास और ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 19 प्रतिशत लोगों के पास चिकित्सा डिग्री है और अधिकतर 10वीं, 12वीं पास हैं। यही नहीं देश में 1,00189 लोगों पर केवल एक एलोपैथिक डॉक्टर है। 2036 व्यक्तियों पर एक बिस्तर और 90343 लोगों पर एक सरकारी अस्पताल है। देश मे 130 करोड लोगों के लिए केवल 10 लाख एलोपैथिक डॉक्टर हैं। देश में प्रतिदिन कुपोषण के कारण 3000 बच्चों की मौत होती है। हमारे देश मे 14.9 प्रतिशत जनसंख्या कुपोषित है और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाआें की कमी के कारण प्रतिवर्ष यहां लगभग 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु यदि राज्य सरकार डाक्टरों की शिक्षा के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराए तो अधिक डॉक्टर बन सकते हैं। सरकार ऐसा क्यों नहीं करती और इसके लिए मतदाता उन्हें दंडित क्यों नहीं करते? इसका कारण यह है कि शायद हमारे नेताओं और राजनीतिक दलों के लिए स्वास्थ्य कोई मुद्दा ही नहीं है क्योंकि उन्हें जाति और धर्म के आधार पर वोट मिल जाते हैं इसलिए वे धनराशि का उपयोग मतदाताओं को तुष्ट करने और विद्यमान पहचान आधारित धुव्रीकरण पर खर्च कर देते हैं और इस तरह वे स्वास्थ्य नीति की उपेक्षा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हमारे नेतागणों को यह भय होता कि स्वास्थ्य क्षेत्र का विकास न करने के कारण उन्हें दंडित किया जाएगा तो वे इस क्षेत्र में सुधार के लिए कदम उठाते। हमारे देश में आर्थिक पिछड़ेपन का संबंध जाति प्रथा से भी है। सामाजिक स्तर पर सबसे निचले क्रम मे आने वाले लोगों को खराब स्वास्थ्य सेवा का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। गरीब घरों, अनुसूचिति जाति, अनुसूचित जनजाति के परिवारों में बाल मृत्यु दर सबसे अधिक है जबकि उच्च जातियों और धनी वर्ग के लोगों में कम है। भारत की स्वास्थ्य प्रणाली जर्जर हो चुकी है। इसके कारण यहां बीमारियों का खतरा बना रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को इस बात को समझना होगा कि सामाजिक क्षेत्र में सुधार के बिना आर्थिक सुधार अपने आप में अभिशाप बन सकते हैं क्योंकि यदि सामाजिक क्षेत्र कमजोर होगा तो पूरी प्रणाली धराशायी हो सकती है। यह समझना कठिन नहंी है कि अशिक्षित कामगार अधिक उत्पादक नहीं होेते हैं। कुपोषण और रोगों के कारण उच्च बाल मृत्यु दर है। यह सच है कि भाजपा सरकार ने आयुष्मान भारत के अंतर्गत एक अच्छी शुरूआत की है किंतु प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख के लिए उसने भी ठोस कदम नहीं उठाए हैं हालांकि देश में डेढ लाख स्वास्थ्य केन्द्र खोले जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु प्रत्येक केन्द्र के लिए एक लाख रूपए से कम का बजट आवंटन करने के कारण केवल विद्यमान प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मामूली सुधार किया जा सकता है। कुछ में नि:शुल्क दवाओं की व्यवस्था की गयी है किंतु यह सफल नहीं हुआ है। ये केन्द्र हमेशा खुले भी नहीं रहते हैं। उनमें अक्सर डॉक्टर और नर्सें गायब रहते हैं और यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं देने वालों में चिकित्सा योग्यता नहीं होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">तथापि कुछ राज्यों ने स्वास्थ्य क्षेत्रों में अच्छा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश और केरल इसके उदाहरण हैं। केरल ने स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर ध्यान दिया जबकि उत्तर प्रदेश में नहीं दिया गया। इसलिए देश में बढती जनसंख्या और स्थानीय वातावरण पर इसके प्रभाव शहरों में झुग्गी-झोंपडी बस्तियों का विस्तार, पर्यावरण प्रदूषण आदि दशाएं बीमारियों को फैलने में मदद करती हैं। इसके अलावा औषधियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होना और बदलती जीवन शैली भी रोगों के प्रसार में यागदान दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश को रोगों के निवारण और प्रसार को रोकने के लिए वैज्ञानिक प्रगति के लाभों का उपयोग करना चाहिए और इस क्षेत्र में उदासीनता को हावी होने देना उचित नहंी होगा। लोक स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए हमेशा सजग रहना ही शासन करना है। सरकार को अनौपचारिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों को मान्यता देनी होगी और उन्हें प्रशिक्षित करना होगा, एमबीबीएस डाक्टरों, प्रशिक्षित नर्सो की संख्या बढानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च स्वास्थ्य सेवाएं उपलध्ब कराने के लिए इंटरमीडिएट डिग्री की व्यवस्था करनी होगी। चिकित्साकर्मियों के लिए सेलफोन आधारित चेकलिस्ट विकसित करनी होगी। कुल मिलाकर हमें स्वास्थ्य के बारे में बुनियादी बाते सीखनी होंगी। बीमारियों के प्रसार पर रोक लगाने के प्रयासों के बिना हम बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहंी करा सकते हैं। सरकार को प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रखने के लिए गर्भ से कब्र तक की नीति का अनुसरण करना होगा।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jan 2021 16:09:33 +0530</pubDate>
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                <title>शिवराज ने बर्ड फ्लू को लेकर स्थिति की समीक्षा की</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल। मध्यप्रदेश में अनेक जिलों में बर्ड फ्लू के प्रकोप की सूचनाओं के बीच आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चौहान ने इंदौर रवाना होने के पहले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/shivraj-reviewed-the-situation-regarding-bird-flu/article-21013"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/cm-shivraj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> मध्यप्रदेश में अनेक जिलों में बर्ड फ्लू के प्रकोप की सूचनाओं के बीच आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चौहान ने इंदौर रवाना होने के पहले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें राज्य में बर्ड फ्लू से बचाव, रोकथाम और नियंत्रण के प्रयासों की समीक्षा की गयी। बैठक में श्री चौहान को अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में ऐसी समस्या नहीं है, लेकिन एेहतियातन आवश्यक कदम उठाए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइडलाइंस से जिलों को अवगत करवाया गया है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से सीमित अवधि के लिए मुर्गे आदि का व्यापार प्रतिबंधित रहेगा। यह अस्थाई रोक एेहतियातन लगाई गई है। प्रदेश के तीन स्थान इंदौर, आगरमालवा और मंदसौर जिलों में कुछ कौओं की मृत्यु के पश्चात सावधानी के तौर पर ये कदम उठाए गए हैं। चौहान ने जिलों में गाइडलाइन का पालन करवाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पशुपालन विभाग और सहयोगी एजेंसियों को इस मामले में सजग रहने और आमजनों को आवश्यक जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस स्थान से पक्षियों की मृत्यु की जानकारी मिली है, सावधानी के तौर पर पोल्ट्री फार्म पर भी नजर रखी जाए। बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jan 2021 13:35:00 +0530</pubDate>
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