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                <title>Banking - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Banking RSS Feed</description>
                
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                <title>बैंकिंग क्षेत्र सजग और मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[अमरीका में बैंकिंग क्षेत्र में संकट और इसके चलते अमरीकी बैंकों के शेयरों में (Banking) गिरावट के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास इस दावे को दोहरा रहे हैं कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली सुदृढ़ है, भारत में विभिन्न कारकों के चलते बैंकों का लाभ बढ़ता जा रहा है जिसमें बेहतर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/banking-sector-alert-and-strong/article-47510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/banking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमरीका में बैंकिंग क्षेत्र में संकट और इसके चलते अमरीकी बैंकों के शेयरों में (Banking) गिरावट के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास इस दावे को दोहरा रहे हैं कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली सुदृढ़ है, भारत में विभिन्न कारकों के चलते बैंकों का लाभ बढ़ता जा रहा है जिसमें बेहतर वसूली और कडी निगरानी के चलते सरकारी और निजी दोनों बैंकों की स्थिति में सुधार आया है। वस्तुत: छोटे बैंक भी अपने आपरेशन में सक्रिय हैं। बैंकिंग क्षेत्र इसलिए भी उत्साहित है कि अजय बंगा विश्व बैंक के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। आईसीआरए के वित्तीय क्षेत्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह प्रमुख अनिल गुप्ता का कहना है कि वर्तमान में अमरीकी बैंकों की तुलना में भारतीय बैंक मजबूती दिखा रहे हैं और वे विनियामक द्वारा उनके वर्तमान पूंजी स्तर, स्वस्थ परिसंपत्ति गुणवत्ता और कड़ी निगरानी बनाए रखने के चलते ऐसा कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एक ऐसा करामाती पेड़, जिसकी करोड़ों की कमाई कर देगी आपको मालामाल" href="http://10.0.0.122:1245/chandan-ki-kheti-chandan-ki-kheti-kese-kare/">एक ऐसा करामाती पेड़, जिसकी करोड़ों की कमाई कर देगी आपको मालामाल</a></p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: पिछले तीन वर्षों में दो बड़े बैंकों की विफलता के बाद भारत ने जमा पर (Banking) बीमा कवर की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति खाता कर दिया है। भारतीय ऋण दाता अमरीकी बैंकिंग क्षेत्र में उथल- पुथल से पैदा होने वाले प्रभावों को सहने में सक्षम हैं। हाल ही में यूबीएस ने स्विस बैंक के्रडिट सुशी का अधिग्रहण किया। इस संबंध में वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसवी ग्लोबल का कहना है कि सुदृढ़ वित्त पोषण प्रोफाइल, उच्च बचत दर और सरकार का समर्थन आदि ऐसे कारक हैं जो वित्तीय संस्थानों को सहायता करते हैं और उसी के आधार पर हम उनकी रेटिंग करते हैं। भारतीय बैंकों के पास अपने घाटे को कम करने के लिए सरकारी प्रतिभूति पोर्टफोलियो के रूप में पर्याप्त बफर है क्योंकि ब्याज दर में वृद्धि हो रही है। 24 मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार बैंक ऋण 136.8 करोड़ रुपये है जो एक वर्ष पूर्व की तुलना में 17.8 लाख करोड़ अधिक है। जैसा कि सभी जानते हैं कि अर्थव्यवस्था में मुद्रा स्फीति पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में पिछले वर्ष मई से 250 मूलांक की वृद्धि की है।</p>
<h3>बैंक लाभ चालू वित्त वर्ष के पहले नौ माहों में बढ़कर 70167 करोड़ रुपये हुआ</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय बैंकों के वर्तमान पंूजी स्तर, स्वस्थ (Banking) परिसंपत्ति गुणवत्ता को देखते हुए वे किसी भी प्रकार के तनाव और दबाव को झेलने की बेहतर स्थिति में है इसलिए इस माह रेपो रेट में कोई वृद्धि नहीं की गई है। खुशी की बात यह है कि भारतीय बैंकों द्वारा कुल दिए गए ऋण के अनुपात में सकल गैर-निष्पादनकारी संपत्तियों में गिरावट आ रही है। सितंबर 2018 में ऐसी गैर-निष्पादनकारी संपत्तियां 16.8 प्रतिशत थीं और मार्च 2022 में यह 5.9 प्रतिशत थीं और दिसंबर 2022 में यह 5.53 प्रतिशत रह गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक लाभ में है और 2021-22 में उनका समग्र लाभ 66543 करोड़ रुपये था जो चालू वित्त वर्ष के पहले नौ माहों में बढ़कर 70167 करोड़ रुपये हो गया है। यह बात वित्त राज्य मंत्री ने लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताई। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पिछले आठ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं जैसे ऋण अनुशासन जिम्मेदारी से ऋण देने, बैंकिंग प्रशासन में सुधार, प्रौद्योगिकी का प्रयोग, बैंकों का एकीकरण और निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए कदम उठाना आदि।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैकों से कहा है कि वे शीर्ष कारपोरेट ऋण खातों पर कड़ी निगरानी रखें और एक ऐसी योजना प्रस्तुत करें कि मुख्य क्षेत्रों में व्यापारिक जोखिमों से किस तरह से निपटा जाए। अतीत में भारतीय बैंकों को ऋणग्रस्त कंपनियों को ऋण देने से संकट का सामना करना पड़ता था। बैंकों से यह भी कहा गया है कि वे अपनी व्यापारिक बहियों के बारे में मार्क टू मार्केट प्रभाव पर भी निगरानी रखें क्योंकि ब्याज दरें बढ़ रही हैं और अपनी नकदी या तरलता बनाए रखें। यह बताता है कि सरकार बैंकों का लाभ बढ़ाने के लिए कड़ी निगरानी के माध्यम से अशोध्य ऋणों को रोकने के लिए कृत संकल्प है। इसके अलावा अवसंरचना पर बढ़ते व्यय, परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन और सुधारों के जारी रखने से बैंकिंग क्षेत्र को और बढ़ावा मिलेगा।</p>
<h3>भारत में डिजिटल माध्यमों से ऋण वितरण में पांच गुना वृद्धि हुई</h3>
<p style="text-align:justify;">ये सभी कारक सकारात्मक वृद्धि का संकेत देते हैं क्योंकि बढ़ते व्यवसाय (Banking) से बैंकों की ऋण आवश्यकताएं बढ़ेंगी। प्रौद्योगिकी की प्रगति से बैंकों को अपनी कार्य कुशलता बनाए रखने में सहायता मिली है। इससे भी लाभ में वृद्धि होगी। हाल के वर्षों में भारत में फिनटेक और माइक्रो फाइनेसिंग में वृद्धि हुई है। भारत में वित्तीय वर्ष 2018 में डिजिटल रिवेन्यू 75 बिलियन अमरीकी डालर था और वित्तीय वर्ष 2023 तक इसके 1 ट्रिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने की संभावना है। भारत में डिजिटल माध्यमों से ऋण वितरण में पांच गुना वृद्धि हुई है। इसके अलावा कमजोर बैंकों के सुदृढ़Þ बैंकों के साथ विलय से भी बैंकिंग क्षेत्र को बढ़ावा मिला है। धनी लोगों द्वारा बैंकों की राशि में हेराफेरी करने के घोटालों के बावजूद यह भी सच है कि बैंकों की पहुंच बढ़ी है तथा छोटे व्यापारी और विनिमार्ताओं को ऋण मिला है। उदाहरण के लिए मुद्रा ऋण बहुत कम ब्याज दरों पर छोटे उद्यमियों को दिए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यद्यपि निजीकरण सफल रहा है किंतु सरकारी क्षेत्र के बैंकों को प्रचालनात्मक स्वायत्तता और प्रशासनिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए। ये सरकारी बैंक बोर्ड द्वारा प्रशासित हों और उन पर भारतीय रिजर्व बैंक का विनियमन हो। भारतीय रिजर्व बैंक ने इंडियन बैंक एसोसिएशन से ये बदलाव करने की सिफारिश की है। सरकारी क्षेत्र के बैंकों के अशोध्य ऋणों के संबंध में सुधार की आवश्यकता है। नेशनल एसेट््स रिकंस्ट्रक्शन कंपनी के गठन के बाद आगामी वर्षों में इस समस्या का समाधान होने की संभावना है। ऋणदाताओं को ऐसे मामलों को अंतरित करने के लिए सहमत होना होगा और ऐसा करना उनके हित में भी होगा क्योंकि अशोध्य ऋणों के संभावित के्रताओं के संबंध में बैंकों को सिर्फ एक ऐसे ऋण लेने वाले के साथ संव्यवहार करना आसान होगा और इससे समस्याओं के समाधान को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<h3>सहकारी तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार करना होगा</h3>
<p style="text-align:justify;">डिजिटलीकरण के मोर्चे पर भारत पिछले दो तीन वर्षों से तेजी से आगे बढ़ रहा है। (Banking) भारत में भुगतान और वित्तीय सेवा उत्पादों के वितरण के संबंध में अनेक वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां हैं। एक सफल नया प्रयोग यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस या यूपीआई है जिसे नेशनल पेमेंट कारपोरेशन आॅफ इंडिया ने विकसित किया है और जिसे भारत के केन्द्रीय बैंक द्वारा विनियमित किया जा रहा है। यह एक रीयल टाइम पेमेंट प्रणाली है जो विभिन्न बैंकों के बीच धन राशि के अंतरण में मोबाइल प्रयोक्ताओं को अुनमति दे रहा है। वर्तमान में प्रमुख बैंकों का 70 प्रतिशत लेनदेन डिजिटल चैनलों द्वारा किया जा रहा है। बैंकों और फिनटेक कंपनियों के बीच सहयोग से आगामी वर्षों में इस संबंध में कुछ नए प्रयोग देखने को मिलेंगे क्योंकि आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस और डाटा अनेलिसिस में प्रगति के साथ इस क्षेत्र में भी प्रगति होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय बैंकों की मजबूती अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है। बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ानी होगी तथा छोटे तथा मध्यम किसानों तथा व्यापारियों की सहायता करनी होगी ताकि उनकी आय बढ़ सके। इसके अलावा सहकारी बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार करना होगा और जनता के बीच व्यापक स्तर पर अपनी पहुंच बनानी होगी। नि:संदेह बैंकों द्वारा वित्त पोषण ग्रामीण जनसंख्या को अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से विस्तार करने में मदद करेगा और इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई भी कम होगी।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>धुर्जति मुखर्जी वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 May 2023 10:13:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घोटालों से लगा रहा बैंकिंग व्यवस्था को आघात</title>
                                    <description><![CDATA[बैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा होता है। बैंक एक ऐसी जगह है जहां आम लोग अपनी छोटी-बड़ी बचत करते हैं और भविष्य के हिसाब से योजनाएं बनाते हैं। लेकिन देश में आए दिन बैंक घोटालों के मामले सामने आते रहते हैं, ऐसे में सोचिए कि आपकी सेविंग बैंक में जमा हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/banking-system-being-hit-by-scams/article-31283"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/banks.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा होता है। बैंक एक ऐसी जगह है जहां आम लोग अपनी छोटी-बड़ी बचत करते हैं और भविष्य के हिसाब से योजनाएं बनाते हैं। लेकिन देश में आए दिन बैंक घोटालों के मामले सामने आते रहते हैं, ऐसे में सोचिए कि आपकी सेविंग बैंक में जमा हो और अचानक बैंक डूब जाए और आपका पैसा खत्म। ऐसी स्थिति में एक आम व्यक्ति या मध्यम वर्गीय परिवार की मनोदशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। खैर, ऐसी स्थिति बैंकिंग व्यवस्था के चरमराने की वजह से होती है। पिछले दिनों देश में बैंक धोखाधड़ी का एक और सबसे बड़ा मामला सामने आया है। यह घोटाला करीब 23 हजार करोड़ रुपये का है। इस घोटाले के लिए गुजरात के एबीजी शिपयार्ड कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी को जिम्मेदार ठहराया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिपयार्ड कंपनी ने देश के अलग-अलग 28 बैंकों से कारोबार के नाम पर 2012 से 2017 के बीच कुल 28,842 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इनमें एसबीआई, आईसीआईसीआई, आईडीबीआई, बैंक आॅफ बड़ौदा, बैंक आॅफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक भी शामिल हैं। सवाल है कि इन 28 बैंकों में से कितने बैंक दिवालिया हो सकते हैं और आम जमाकर्ता के पैसे पर क्या असर पड़ सकता है? जाहिर है, यह सब कोई अचानक या दो-चार दिनों में नहीं हुआ होगा। यह सच है कि बैंकिंग कारोबार में फर्जीवाड़े की घटनाएं घटित होती रहती हैं। भारत ही नहीं,वैश्विक स्तर पर भी बैंकों में धोखाधड़ी की घटनाएं घटती रहती हैं। लेकिन जिस तरह से निजी बैंक या सहकारी बैंक लगातार असफल हो रहे हैं,उससे नियामक की भूमिका पर भी सवाल उठने स्वाभाविक हैं। इसमें दो राय नहीं है कि बैंकिंग नियामक निजी और सहकारी बैंकों के कामकाज पर पैनी निगरानी रखने में असफल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि बड़े लोन एडवांस में धोखाधड़ी करना आसान नहीं होता और फिर भी ये होते हैं क्योंकि बैंक के अधिकारी लेनदारों या कभी-कभी तीसरे पक्ष जैसे कि वकीलों या चार्टर्ड एकाउंटेंट तक के साथ सांठगांठ कर लेते हैं। चिंतनीय स्थिति यह है कि देश में निजी क्षेत्र की बजाए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति बेहद दयनीय है। बैंकों में बढ़ते धोखाधड़ी के मामले निश्चित रूप से बैंकिंग व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर रहे हैं। बैंकों में आॅडिट के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और लीपापोती ही होती रही। यह ठीक है कि बैंकों में धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने व्यापक उपाय किए हैं, फिर भी धोखेबाजों को रोक पाने के लिए ये उपाय अपर्याप्त हैं। साल दर साल धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं,साथ ही इस कारण होने वाला नुकसान भी बढ़ रहा है। इससे बैंकों के सिर पर स्थायित्व कम होने का खतरा भी बढ़ रहा है। वहीं आम लोगों का भरोसा भी बैंकों से टूट रहा है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 09:52:49 +0530</pubDate>
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                <title>अकाउंट एग्रीगेटर ओपन बैंकिंग की दिशा में पहला कदम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्तीय डेटा-साझा प्रणाली ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ (एए) नेटवर्क न सिर्फ निवेश और ऋण के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है बल्कि यह ओपन बैंकिंग की दिशा में भी पहला कदम है और इसके लिए अभी चार ऐप डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं, (फिनव्यू, वनमनी, सीएएमएस फिनसर्व, और एनएडीएल) जिनके पास एए होने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/account-aggregator-first-step-towards-open-banking/article-26680"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/open-banking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वित्तीय डेटा-साझा प्रणाली ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ (एए) नेटवर्क न सिर्फ निवेश और ऋण के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है बल्कि यह ओपन बैंकिंग की दिशा में भी पहला कदम है और इसके लिए अभी चार ऐप डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं, (फिनव्यू, वनमनी, सीएएमएस फिनसर्व, और एनएडीएल) जिनके पास एए होने के लिए परिचालन लाइसेंस हैं। तीन और को (फोनपे, योडली और परफियोस) आरबीआई से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है और वे जल्द ही ऐप लॉन्च कर सकते हैं। पिछले सप्ताह इसका अनावरण किया गया था। इससे लाखों उपभोक्ताओं को अपने वित्तीय रिकॉर्ड के उपयोग पर आसान पहुंच और नियंत्रण मिल सकता है और ऋण प्रदाता तथा फिनटेक कंपनियों के लिए ग्राहकों की संभावित संख्या में अत्यधिक विस्तार हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अकाउंट एग्रीगेटर व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत वित्तीय डेटा पर नियंत्रण के साथ सशक्त बनाता है, जो डेटा सामान्यतया अलग-थलग और आसान पहुँच से बाहर रहते हैं। यह भारत में ओपन बैंकिंग की व्यवस्था शुरू करने की दिशा में पहला कदम है, जो लाखों ग्राहकों को सुरक्षित और कुशल तरीके से अपने वित्तीय डेटा तक डिजिटल रूप में पहुँचने और इसे अन्य संस्थानों के साथ साझा करने के लिए सशक्त बनाता है। बैंकिंग में अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली, भारत के आठ सबसे बड़े बैंकों के साथ शुरू की गई है। अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली ऋण और धन प्रबंधन को बहुत तेज और किफायती बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अकाउंट एग्रीगेटर आरबीआई द्वारा विनियमित एक ऐसी इकाई है, (एनबीएफसी-एए लाइसेंस के साथ) जो किसी व्यक्ति को सुरक्षित और डिजिटल रूप में एक वित्तीय संस्थान से प्राप्त अपने खाते की जानकारी को एए में शामिल किसी अन्य विनियमित वित्तीय संस्थान के साथ साझा करने में मदद करती है। व्यक्ति की सहमति के बिना डेटा को साझा नहीं किया जा सकता है। ऐसी सुविधा देने वाले कई अकाउंट एग्रीगेटर होंगे और उपभोक्ता जिसे चाहे उसे चुन सकता है। अकाउंट एग्रीगेटर आपके डेटा के प्रत्येक उपयोग के लिए ‘रिक्त चेक’ स्वीकृति के लंबे नियम और शर्तों के बदले एक संक्षिप्त, चरण-दर-चरण अनुमति और नियंत्रण का प्रस्ताव देता है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 10 Sep 2021 12:04:51 +0530</pubDate>
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                <title>बैंकिंग सेवायें पूरे देश में रहीं प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। चेकों का निपटारा, नगद लेनदेन, ऋण और बैंकों से जुड़ी तमाम सेवाओं समेत सभी बैंकिंग सेवायें सोमवार को पूरे देश में प्रभावित रहीं क्योंकि दो सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय आंदोलन के पहले दिन बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों ने इसमें भाग लिया। आल इंडिया बैंक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/banking-services-were-affected-all-over-the-country/article-22334"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/banking-services-were-affected-all-over-the-country.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। चेकों का निपटारा, नगद लेनदेन, ऋण और बैंकों से जुड़ी तमाम सेवाओं समेत सभी बैंकिंग सेवायें सोमवार को पूरे देश में प्रभावित रहीं क्योंकि दो सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय आंदोलन के पहले दिन बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों ने इसमें भाग लिया। आल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने दावा किया है कि हड़ताल का पहला दिन ‘पूरी तरह सफल’ रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक कहीं भी बैंकिंग कामकाज नहीं हुआ तथा बैंकिंग अभियान पूरी तरह ठप रहा। औसतन, लगभग 16,500 करोड़ रुपये के लगभग दो करोड़ चेक / उपकरण क्लीयरेंस के लिए पड़े रह गए हैं। शीर्ष संघ नेता ने कहा कि सरकारी खजाने के संचालन भी प्रभावित हुए हैं। आईसीआईसीआई, एचडीएफसी बैंक और एक्सीस जैसे निजी क्षेत्रों के बैंकों में हड़ताल का कोई असर नहीं देखा गया और इन बैंकों में सामान्य दिनों की तरह ही कामकाज हो रहा था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है पूरा मामला:</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि हड़ताल का आह्वान नौ बैंक यूनियनों को मिलाकर गठित की गयी यूनाइटेड फोरम आल बैंक यूनियन की ओर से किया गया है। केंद्र ने अपनी विनिवेश योजना के तहत दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की घोषणा की है जिसके विरोध में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की गयी है।</p>
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                <pubDate>Mon, 15 Mar 2021 21:14:53 +0530</pubDate>
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