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                <title>Raw clay - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>&amp;#8230;अब हाथों में कचरा नहीं, किताबों से संवार रहे भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[फोटो: कालांवाली-01-इसके अलावा साफ-सुथरा रहने और खाने पीने के बारे में भी जागरूक किया जाता है और मौसम के अनुसार बच्चों को पहनने के लिए कपड़े और जूते आदि मुहैया करवाये जाते हैं और बच्चों को खेलों के माध्यम से भी शारीरिक विकास की शिक्षा भी दी जा रही है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/no-garbage-in-your-hands-the-future-is-protected-with-books/article-21545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/raw-clay.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कूड़ा बीनने वाले बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही ‘कच्ची मिट्टी’</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><strong>संस्था द्वारा दो स्थानों पर 65 बच्चों को दी जा रही नि:शुल्क शिक्षा</strong></h3>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h3><strong>संस्था को गणतंत्र दिवस पर किया जा चुका सम्मानित</strong></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/विनोद अरोड़ा कांलावाली।</strong> ना थके कभी पैर, ना ही हिम्मत है हारी, जज्बा है परिवर्तन का, इसलिये जंग है जारी…इन्हीं शब्दों को चरितार्थ करने में जुटी है ‘कच्ची मिट्टी’। शिक्षा के दीप से गरीब बच्चों के भविष्य में उजियारा करने में जुटी ये संस्था आज समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी हुई है। सरकार द्वारा लाखों प्रयास करने के बाद भी अधिकांश स्लम एरिया बच्चे आज भी शिक्षा से वंचित हैं। (Raw clay) सड़कों पर कूड़ा बिनकर पेट की भूख मिटाने वाले इन बच्चों को पता ही नहीं शिक्षा होती क्या हैं। ऐसे बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा सामाजिक संस्था ‘कच्ची मिट्टी’ ने उठाया है। संस्था ने बच्चों को पढ़ाने के कार्य की शुरूआत 25 अगस्त 2019 को की। संस्था के सदस्यों ने बताया कि पहले सिर्फ तीन-चार सदस्यों ने बाल भवन के पीछे स्थित स्लम एरिया में प्रति दिन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसके बाद एचडीएफसी बैंक के सामने पार्क में भी बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">इनमें से कुछ बच्चों का दाखिला भी सरकारी स्कूल में करवाया।</li>
<li style="text-align:justify;">आज भी दोनों जगहों पर लगभग 65 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">संस्था के सदस्यों ने बताया कि ‘कच्ची मिट्टी’ द्वारा किये जा रहे इस कार्य को देखते हुए ।</li>
<li style="text-align:justify;">गणंतत्र दिवस पर उन्हें सम्मानित भी किया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">
<h3>कूड़ा बीनने वाले बच्चों से की शुरूआत</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">संस्था द्वारा अपने अभियान के शुरूआत में कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शामिल किया गया। लेकिन बच्चों की पढ़ाई में रूचि न होने के कारण उन्हें इन बच्चों को पढ़ाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इनकी सोच के अनुसार स्लम एरिया के बच्चों का जीवन सिर्फ कूड़े के ढेर तक ही सीमित था। इनकी सोच को बदलने के लिए पहले बच्चों के माता-पिता को जागरूक किया गया। इन लोगों को समझाया गया कि उनके बच्चे भी पढ़ लिखकर बड़े होकर पायलट, वैज्ञानिक, डॉक्टर आदि बन सकते हैं। जब माता-पिता की सोच में अंतर आया तो बच्चे अपने-आप ही पढ़ाई में रूचि दिखाने लगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संस्था के सदस्य बच्चों के साथ मनाते हैं हर खुशी व त्यौहार</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ-साथ कच्ची मिट्टी संस्था के स्दस्यों ने अपने और दोस्तों के जन्मदिन व त्यौहार पर बच्चों के साथ मनाने की शुरूआत की ताकि वंचित बच्चों के मन में जागरूकता बढ़े क्योंकि शिक्षा के बलबूते पर ही हर कोई अपना, परिवार और देश का विकास कर सकता है। लेकिन अब बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक गुणों पर भी जोर दिया जा रहा है। क्योंकि नैतिक शिक्षा से भरपूर व्यक्ति सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। नैतिक शिक्षा से न केवल आत्मनिर्भरता आती है बल्कि इसे देशवासियों के चरित्र का भी निर्माण होता है। किसी भी समाज और राष्ट्र के निर्माण में नैतिक मूल्यों का खासा योगदान होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिक्षा के साथ करवाया जाता है भ्रमण</h3>
<p style="text-align:justify;">संस्था की और से बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की जरूरत की चीजें भी मुहैया करवाने का कार्य कर रहे हंै। इसके अलावा साफ-सुथरा रहने और खाने पीने के बारे में भी जागरूक किया जाता है और मौसम के अनुसार बच्चों को पहनने के लिए कपड़े और जूते आदि मुहैया करवाये जाते हैं और बच्चों को खेलों के माध्यम से भी शारीरिक विकास की शिक्षा भी दी जा रही है। अभी हाल ही में संस्था द्वारा बच्चों को मांगेआना गांव मे बने कृषि विज्ञान केंद्र में लगी प्रदर्शनी का भ्रमण भी करवाया गया, जिसमें पौधारोपण, फसलों और खेती बाड़ी में उपयोग होने वाले औजारों के बारे में जागरूक किया गया।</p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Feb 2021 15:29:40 +0530</pubDate>
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