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                <title>Spiritual - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>रूहानी करिशमा : 15 मिनट का रहस्य</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे गांव का एक सत्संगी था, जिसे नाम लिए थोड़ा ही समय हुआ था। कुछ दिनों के बाद ही बुरी संगत में पड़कर उसने वचन यानि परहेज तोड़ दिए और मन के झांसे में आकर उसने अपने सतगुरू की निंदा करनी शुरू कर दी। वह एक दिन अपने साथी को कहने लगा कि मुझे रात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/spiritual-charisma-the-secret-of-15-minutes/article-87118"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/spirituality-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमारे गांव का एक सत्संगी था, जिसे नाम लिए थोड़ा ही समय हुआ था। कुछ दिनों के बाद ही बुरी संगत में पड़कर उसने वचन यानि परहेज तोड़ दिए और मन के झांसे में आकर उसने अपने सतगुरू की निंदा करनी शुरू कर दी। वह एक दिन अपने साथी को कहने लगा कि मुझे रात को सच्चे सौदे वाले बाबा जी ने दर्शन दिए और कहा कि तुझे परसों सुबह सवा सात बजे लेकर जाएंगे, तैयार रहना। पर मैं इस बात को नहीं मानता। निश्चित दिन आने पर सुबह-सुबह उसने अपने साथी से समय पूछा उस समय सात बज चुके थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जब पूज्य गुरु जी ने एक शख्स का दूर किया अंधविश्वास" href="http://10.0.0.122:1245/saint-dr-msg-dispelled-superstitions/">जब पूज्य गुरु जी ने एक शख्स का दूर किया अंधविश्वास</a></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-align:justify;">इस पर वह कहने लगा कि क्या मेरे जाने में 15 मिनट ही बचे हैं? उसने इसे मजाक समझ लिया और वह शौच के लिए चला गया और शौच जाने के बाद वह हाथ धो रहा था तो उस समय पूरे सवा सात बजे हुए थे। उसी वक्त पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज उसे लेकर जाने के लिए आ गए और उसके सभी रिश्तेदारों व दोस्तों ने देखा कि उसके हाथ में पानी की अंजुली भरी ही रह गई और उसने सही सवा सात बजे वहीं चोला छोड़ दिया और मालिक का नूरी स्वरूप उसको ले गया। शिष्य बेशक सतगुरू को छोड़ देता है पर सतगुरू उसका साथ कभी नहीं छोड़ता है।                                                                                                              </span><strong>-श्री दर्शन सिंह, मिड्डू खेड़ा(पंजाब)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2022 21:00:34 +0530</pubDate>
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                <title>राम-नाम का धन दोनों जहान में होता है मददगार</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मनुष्य का असली काम ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम जपना है, बाकी जितने भी कार्य दुनिया में रहता हुआ यह इन्सान करता है, सबके सब जिस्म (शरीर) से संबंधित हैं। जब शरीर ही साथ नहीं जाएगा तो शरीर से जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-wealth-of-the-name-of-ram-is-helpful-in-both-the-worlds/article-87093"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/anmol-vachan-ok1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मनुष्य का असली काम ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम जपना है, बाकी जितने भी कार्य दुनिया में रहता हुआ यह इन्सान करता है, सबके सब जिस्म (शरीर) से संबंधित हैं। जब शरीर ही साथ नहीं जाएगा तो शरीर से जो काम-धंधे ताल्लुक रखते हैं, वो साथ कैसे जा सकते हैं? दोनों जहान में सच्चा मददगार अगर कोई है तो वो एक ही है ओम, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम। वही एक मात्र ऐेसा धन है, जिसे चिता की आग जला नहीं सकती, हवा उड़ा नहीं सकती, धरती गला-सड़ा नहीं सकती। वो राम-नाम का धन, अल्लाह, वाहेगुरु की याद का धन हमेशा आत्मा के साथ रहता है और यहां-वहां दोनों जहान में सच्चा मददगार होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ईश्वर के नाम को छोड़कर बाकी सभी कार्य काल के कार्यक्षेत्र में आते हैं। हर धर्म, मजहब में मालिक के पहुंचे हुए संत, पीर-फकीर, पैगम्बर, गुरु-महापुरुषों ने यह लिखा है कि सब कुछ फनाहकारी, तबाहकारी, नाशवान है। जो आंखें देखती हैं, खत्म होने वाला है। दुनिया की तरफ से आंखें बंद करके जब इन्सान अल्लाह, वाहेगुरु, राम की तरफ अपनी आंखें लगाते हैं, तब अंदर वो आंख खुलती है और यही आंखें फिर सच देखती हैं। आप जी फरमाते हैं कि नाम लेने से इन्सान अपने आपको हल्का महसूस करता है। नाम का सुमिरन इन्सान के पाप-कर्मों को जलाकर राख कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे लाखों मण घास का ढेर होता है, उसमें छोटी-सी चिंगारी आग की डाल दें तो वो घास को जलाकर राख कर देगी, उसी तरह इन्सान के जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म हैं। अगर इन्सान अल्लाह, वाहेगुरु का नाम-सुमिरन करते हैं तो राम-नाम की वो शांतिभरी चिंगारी पाप, जुल्मों-सितम को, जो जन्मों-जन्मों से आपकी आत्मा के ऊपर ढह रहे हैं, वो राख हो जाएंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान का मन किसी काम में नहीं लगता। सुमिरन करते रहना चाहिए और बुरे लोगों का संग छोड़ दीजिए। जहां भी चुगली-निंदा, बुराई की चर्चा होती नजर आती है, वहां से कन्नी कतरा जाएं और जहां नेक लोग होते हैं, मालिक की चर्चा करते हैं, उनकी सोहबत कीजिए। भले लोगों का संग आपको भला बना देगा और बुराई का संग हमेशा बुरा बना देता है। जो लोग मालिक के नाम का सुमिरन करते हुए सेवा करते हैं तो सोने पर सुहागा है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Nov 2022 05:40:12 +0530</pubDate>
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                <title>गुरुमंत्र के जाप से जाग उठती हैं अंदर की शक्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संसार में यह कोई नहीं जानता था कि भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम ऐसी कोई सुप्रीम पावर है, ऐसी कोई शक्ति है, जो सबके अंदर मौजूद है और उसे बुलाया जाए तो वह इस जहान के तो क्या अगले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-inner-powers-are-awakened-by-the-chanting-of-gurumantra/article-31855"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/anmol-vachan-ok.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संसार में यह कोई नहीं जानता था कि भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम ऐसी कोई सुप्रीम पावर है, ऐसी कोई शक्ति है, जो सबके अंदर मौजूद है और उसे बुलाया जाए तो वह इस जहान के तो क्या अगले जहान के भी काज संवार देते हैं। मालिक स्वरूप गुरु, मुर्शिदे-कामिल इस दुनिया में आए, उन्होंने बताया कि ऐसी भी कोई ताकत है, जिसको इन्सान इस्तेमाल कर सकता है, जिसे वह हासिल भी कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि ऐसी ताकत, ऐसी शक्ति जो सबके अंदर है, गुरू मुर्शिद ने उससे बात करने का तरीका बताया। आप कैसे उस ताकत से बात कर सकते हैं, कैसे उस ताकत को अपने अंदर महसूस करके जिंदगी में बहारें ला सकते हैं और गम, चिंता, टेंशन, परेशानियों, बीमारियों को उड़ा सकते हैं यह समझाया। मुर्शिद ने तरीका बताया उस सुप्रीम पावर का, जिसे नाम कहते हैं, बाई नेम कि उसको कैसे बुलाना है। वो मूलमंत्र, वो युक्ति, जिसका इस्तेमाल करने से आपके अंदर उसकी शक्ति जाग जाती है और आपकी शक्ति कई गुणा बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई शक्ति से आप परमानन्द ले सकते हैं, तमाम खुशियां हासिल कर सकते हैं, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की हुई होती।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक की तमाम खुशियां हासिल करने के लिए संत, पीर-फकीर गुरुमंत्र, मैथड आॅफ मेडिटेशन बताते हैं। गुरुमंत्र का जाप करो, अभ्यास करो, तो संत जो बताते हैं उसे आप हासिल भी कर सकते हैं। संत बताते हैं कि आपके अंदर अमृत, हरिरस, आबोह्यात है और इसे आप हासिल कर सकते हैं। आपको वो तमाम खुशियां मिलेंगी, जिसकी कभी कल्पना आपने नहीं की होगी। वो परमानन्द मिलेगा, वो लज्जत मिलेगी, जो कभी खत्म नहीं होती। बस! वचनों पे अमल करो। जो लोग वचनों को मानकर अमल करते हैं, उन्हें अंदर-बाहर किसी तरह की कोई कमी नहीं रहती। आप जी फरमाते हैं कि वचन पीर, फकीरों के खुद के नहीं होते, बल्कि वो अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक के वचन सुनाते हैं। जो लोग सुनकर मान जाया करते हैं उनकी जिंदगी में बहारें छा जाती हैं और जो लोग नहीं मानते, वो दु:खी, परेशान होते रहते हैं।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 05:00:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>अच्छे कर्मों से जिंदगी में आती हैं खुशियों की बहार</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिन मेरा छोटा भाई राकेश किसी कार्यवश तेरावास में पूजनीय परम पिता जी से मिला। पूजनीय परम पिता जी ने राकेश को कहा, ‘‘बेटा, राजेश को बोलना कि उसके लिए एक अच्छा रिश्ता ढूंढ रखा है।’’ उन्हीं दिनों पूजनीय परम पिता जी ने मेरे पापा श्री पुरूषोत्तम लाल धवन को वचन किए, ‘‘राजेश की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/good-deeds-bring-happiness-in-life/article-31571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/shah-satnam-singh-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक दिन मेरा छोटा भाई राकेश किसी कार्यवश तेरावास में पूजनीय परम पिता जी से मिला। पूजनीय परम पिता जी ने राकेश को कहा, ‘‘बेटा, राजेश को बोलना कि उसके लिए एक अच्छा रिश्ता ढूंढ रखा है।’’ उन्हीं दिनों पूजनीय परम पिता जी ने मेरे पापा श्री पुरूषोत्तम लाल धवन को वचन किए, ‘‘राजेश की तो एमएससी पूरी होने से पहले ही नौकरी लग जाएगी।’’ मैं पूजनीय परम पिता जी के इन वचनों पर हैरान था। मैंने तो अभी पीएचडी करके डॉक्टर की डिग्री लेनी है। जब मैंने परीक्षा दी तो मेरे पीएचडी की परीक्षा में अंक कम रह गए। वजीफा लगने का कोई अवसर न रहा। मैं हताश हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने सोचा कि अब मैं पीएचडी में रह जाऊंगा। मैं घर से पैसा लेना नहीं चाहता था। पीएचडी करने में चार साल का समय लगता है। खर्चा बहुत होता है। उन्हीं दिनों मुझे पता चला कि जर्मन कंपनी हैक्सट में कुछ नौकरियां निकली हैं। मैंने नौकरी के लिए हैक्सट कंपनी दिल्ली को प्रार्थना पत्र भेज दिया। इसके बाद मुझे निश्चित तिथि को मुझे साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। वहां पचास से भी ज्यादा अनुभव किए हुए लोग आए हुए थे। केवल तीन अफसर ही नियुक्त करने थे। भाग्यवश उन तीनों में मेरा नाम भी था। मैं हैरान रह गया कि मेरा कोई अनुभव भी नहीं था। मेरी एमएससी पूरी होने में अभी आठ महीने का समय था। लेकिन मुझे कंपनी के आदेश के मुताबिक अचानक कार्यभार संभालना पड़ा। इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी के वचन पूरे हुए। पूजनीय परम पिता जी के वचनों के अनुसार मेरी शादी भी एक साल बाद हो गई थी।<br />
<strong>-श्री राजेश धवन, मुम्बई (महाराष्टÑ)</strong></p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>‘‘बेटा, घबराओ नहीं, हम मालिक से चार गुणा मंजूर करवाएंगे’’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सतगुरू की कृपा से हमारे घर एक लड़के ने जन्म लिया। जन्म के एक महीने बाद बच्चा अचानक बीमार हो गया और बेहोश हो गया। हमनें डॉक्टर से इलाज करवाया परंतु कुछ ही समय बाद वह लड़का शरीर छोड़ गया। आश्रम में आकर हमनें सारी बात पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज को बताई। पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, घबराओ नहीं, हम मालिक से चार गुणा मंजूर करवाएंगे।’’ इसके बाद सतगुरू की कृपा से हमारे घर चार बच्चों ने जन्म लिया और मालिक की इस रहमत से हमारा घर खुशियों से भर गया।<br />
<strong>-श्री बाबू सिंह, नसीबपुरा बठिंडा (पंजाब)</strong></p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Mar 2022 06:29:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जिज्ञासुओं के सवाल, पूज्य गुरु जी के जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[प्रश्न : भगवान का जन्म कब और कैसे हुआ? उत्तर : मालिक को बने हुए कई सदियां गुजर गए हैं। शास्त्रों के अनुसार जब इस धरती की रचना हुई तो सबसे पहले भगवान एक प्रकाश के रूप में पैदा हुए। प्रश्न : भगवान कहां हैं? उत्तर : भगवान हर जगह कण-कण में मौजूद है। आॅस्ट्रेलियाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/questions-of-the-curious-answers-of-saint-dr-msg/article-31570"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : भगवान का जन्म कब और कैसे हुआ?</strong><br />
उत्तर : मालिक को बने हुए कई सदियां गुजर गए हैं। शास्त्रों के अनुसार जब इस धरती की रचना हुई तो सबसे पहले भगवान एक प्रकाश के रूप में पैदा हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : भगवान कहां हैं?</strong><br />
उत्तर : भगवान हर जगह कण-कण में मौजूद है। आॅस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों जॉन राईट बेजर और लिंडा राईट ने 4000 से अधिक लोगों पर 11 वर्ष तक अध्ययन कर मनुष्य के हरदम साथ-साथ रहने वाले प्रभू अर्थात अदृश्य शक्ति की पुुष्टि की है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : भगवान ने दुनिया क्यों बनाई?</strong><br />
उत्तर : अपनी मौज खुशी में आकर उस मालिक ने दुनिया साजी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : पहला इन्सान धरती पर कैसे पैदा हुआ?</strong><br />
उत्तर : मालिक की रहमत से, हुक्म से</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : शरीर में आत्मा कहां है, उसका अनुभव कैसे होगा?</strong><br />
उत्तर : आत्मा हमारे शरीर के रोम-रोम में समाई हुई है। इसके अनुभव के लिए हमें लगातार गुरूमंत्र का जाप करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : मालिक का नाम लेना क्यों जरूरी है?</strong><br />
उत्तर: नाम से आत्मविश्वास आता है, आत्मिक शांति आती है जो और किसी भी साधन से नहीं आती है। रूहानियत के अनुसार प्रभू के नाम से आत्मा आवागमन से मुक्त हो जाती है, वहीं दुनिया में रहते हुए इन्सान भगवान को देख सकतें है और दोनों जहान की खुशियां यहीं पा सकते हैं। जीवन में आने वाले भयानक कष्टों से बचा जा सकता है। इन्सान अपनी इच्छा शक्ति पर काबू पा सकता है, जिससे जानलेवा बीमारियां जैसे एड्स, कैंसर, काला पीलिया इत्यादि से बचा जा सकता है। दुनिया के हर नेक, अच्छे क्षेत्र में तरक्की हासिल की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रश्न : कर्म और धर्म के बीच क्या संबंध है?</strong><br />
उत्तर : दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।</p>
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                                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Mar 2022 06:27:18 +0530</pubDate>
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                <title>पाखंड से छुटकारा दिला सच्चे सतगुरू जी ने दिखाया सच्चा रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी कंवलजीत सिंह इन्सां सुपुत्र श्री कुलजीत सिंह इन्सां निवासी बंबीहा भाई ब्लॉक मल्ल के तहसील बाघा पुराना जिला मोगा और वर्तमान में जो कुवैत देश के जलीन नामक शहर/राज्य में रहता है। प्रेमी कंवलजीत लिखता है कि यह सन् 1992 की बात है। एक दिन मुझे स्कूल में अचानक बुखार हो गया। मैं स्कूल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/satguru-ji-showed-the-true-path-to-get-rid-of-hypocrisy/article-30808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी कंवलजीत सिंह इन्सां सुपुत्र श्री कुलजीत सिंह इन्सां निवासी बंबीहा भाई ब्लॉक मल्ल के तहसील बाघा पुराना जिला मोगा और वर्तमान में जो कुवैत देश के जलीन नामक शहर/राज्य में रहता है। प्रेमी कंवलजीत लिखता है कि यह सन् 1992 की बात है। एक दिन मुझे स्कूल में अचानक बुखार हो गया। मैं स्कूल से छुट्टी लेकर घर आ गया। उस समय भी मेरा शरीर तेज बुखार से बुरी तरह तप रहा था। मेरे पापा जी मुझे एक डॉक्टर के पास ले गए। उन्होंने बुखार आदि चैक करके मुझे एक इंजेक्शन और कुछ थोड़ी-बहुत दवाई देकर कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है, लड़का जल्दी ठीक हो जाएगा। उस दिन रात को मुझे सोए हुए बहुत ही डरावना सपना आया। सपने में मुझे दो आदमी दिखाई दिए। वह दोनों मरे पड़े थे। वह दोनों वही व्यक्ति थे, जो कुछ साल पहले हमारे स्कूल के नजदीक हुई आपसी लड़ाई में मारे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सपना देखकर मैं बहुत ही घबरा गया और मुझे बहुत ही डर लगा। उसी घबराहट में मैं उठकर बैठ गया। अगले दिन पड़ोसन चाची हमारे घर आई और मेरे मम्मी-पापा को कहने लगी कि तुम्हारे कंवलजीत को तो ‘ओपरी हवा’ (भूत-प्रेत का साया) है। उसकी यह बात सुनकर वे भी बहुत ही घबरा गए। वह मुझे वहीं नजदीक के एक गांव में एक स्याने(ओझा) के पास ले गए। चेले ने आगे हमें और भी ज्यादा फ्रिक में डाल दिया। उसने बताया तुम्हारे लड़के को दो भूत चिंबड़े हैं। उसकी यह बात सुनकर मेरे मम्मी-पापा दोनों के होश उड़ गए। मेरी मां ने कहा, बाबा, फिर इह मुंडे दा खैहिड़ा किवें छड्डणगे? बाबा ने कहा, सब भगा देगें। आप फिक्र न करो। आपको एक काला मुर्गा और एक बोतल शराब किसी नहर या चलते नाले के पास रखना होगा। उस समय हमें नाम-दान नहीं मिला था। मेरे पापा जी शराब की एक बोतल और एक काला मुर्गा मोल लेकर चेलों के द्वारा बताई गई जगह पर रख आए। परंतु ऐसा करने से भी मेरी उस बीमारी में जरा भी फर्क नजर नहीं आया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिनों बाद जैसे ही मेरी दादी को पता चला तो वह भटिंडा से हमारे घर आई। उसने पूछा कि कंवलजीत, क्या हो गया है तेरे को? मैंने कहा दादी, मुझे नहीं पता कि मुझे क्या हो गया है, पर रात को मुझे भयानक सपने बहुत ही आते हैं, बार-बार वही दो आदमी दिखाई देते हैं। वह मुझे कहते हैं कि चल हम तुझे लेने आए हैं! और मुझे बहुत ही डर लगता है। मेरी दादी जी ने कहा कि तु चल मेरे साथ भठिंडे, वहां नजदीक के गांव कोटशमीर में एक स्याना है, वह भूत-प्रेत निकालने का माहिर है, उसके पास तेरे को लेकर चलेंगे। अगले दिन मेरे पापा जी मुझे दादी के साथ भठिंडा से कोटशमीर में उस बाबा के पास ले गए। उसने अपना जंत्र-मंत्र किया और पांच पुड़ियां राख की बनाकर दे दी और कहा कि घबराओ ना, लड़का ठीक हो जाएगा। परंतु उस बाबा के जंत्र-मंत्र और उन पुड़ियों से भी मेरी बीमारी में कोई सुधार नहीं हुआ। मेरे दादा जी डेरा सच्चा सौदा के प्रेमी थे। अगले दिन भठिंडा में साध-संगत की नामचर्चा थी। वह हर नामचर्चा में जाया करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">वह मुझे भी अपने साथ ले गए। साध-संगत में बैठकर और नामचर्चा में शब्दवाणी सुनकर मुझे बहुत ही आनंद आया। मुझे विश्वास हो गया कि डेरा सच्चा सौदा वाले बाबा जी सच्चे सतगुरू हैं। अगले दिन मैं अपने गांव वापिस आ गया। रात को मुझे पूरे चैन की नींद आ गई और सपने में पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के रूप में दर्शन दिए। बिल्कुल सफेद लिबास, ऊंचा-लम्बा कद, बहुत ही सुंदर मनमोहना स्वरूप, हाथ में लम्बी शाही सुंदर सोटी। पूज्य पिता ने यह कहकर यमदूतों से मुझे छुड़ा लिया कि ‘यह तो हमारी रूह है।’ सतगुरू, दाता-प्यारे की सुंदर नूरी झलक देखकर मैं फूला नहीं समा रहा था और वह सुंदर-मनमोहक दृश्य मेरी आंखों में सुरमें की तरह बस गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अगले दिन मैंने अपने मम्मी-पापा को कहा मैं तो सरसा दरबार में सत्संग में जाना है और गुरू जी से नाम-शब्द भी लेकर आऊंगा। जब सत्संग का दिन आया, मैं गांव के उस समय के भंंगीदास के साथ दरबार में सत्संग पर पहुंच गया। सत्संग सुना और पूज्य गुरू जी से नाम-शब्द प्राप्त किया। उस दिन पूज्य पिता जी ने लगभग पूरा सत्संग मुझ पर ही किया। भूत-प्रेतों पाखंडों के बारे में पूज्य गुरू जी ने ठोस उदाहरणों सहित विस्तार से सत्संग किया। पूज्य पिता जी ने अपनी रहमत से मेरी आंखों व दिमाग पर पड़े भूत-प्रेतों व पाखंडों के बारे में वहम-भ्रमों के सारे पर्दे ही उठा दिए। नाम-शब्द लेने के बाद मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे शरीर में भार ही न हो, हौला फूल की तरह मैं हो गया।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 15 Feb 2022 09:26:23 +0530</pubDate>
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                <title>प्यारे सतगुरू जी के महान परोपकार</title>
                                    <description><![CDATA[सेवा का फल प्रेमी जंगीर सिंह निवासी लोहाखेड़ा, फतेहाबाद सतगुरु की साक्षात रहमत को इस प्रकार बयां करते हैं। ये बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाइनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था, परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी शाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/great-philanthropy-of-beloved-satguru/article-30407"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/saha-mastana-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>सेवा का फल</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">प्रेमी जंगीर सिंह निवासी लोहाखेड़ा, फतेहाबाद सतगुरु की साक्षात रहमत को इस प्रकार बयां करते हैं। ये बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाइनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था, परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी शाम को मैं सांगला गाँव में एक हजार वोल्टेज की बिजली लाइन पर काम कर रहा था। अचानक दुर्घटना हुई और बिजली की तार मेरे कन्धे से छू गई और कपड़ों में आग लग गई, जिससे मेरा शरीर बुरी तरह झुलस गया। मैं दो दिन तक अस्पताल में बेहोश रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरी हालत बेहद गंभीर थी। इस सारी दुर्घटना की जानकारी मेरे रिश्तेदार पुरुषोत्तम लाल के माध्यम से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज तक पहुँची। पूजनीय परम पिता जी ने पुरुषोत्तम लाल को प्रसाद देते हुए फरमाया, ‘‘यह प्रसाद जंगीर सिंह को जाकर खिला देना।’’ उन्होंने वह प्रसाद लाकर मुझे दे दिया। मैंने उस प्रसाद को ग्रहण किया और लगभग 20 दिन में मैं बिल्कुल स्वस्थ हो गया, जबकि डॉक्टरों के अनुसार मुझे ठीक होने में लगभग एक वर्ष लगना था। मैं साध-संगत के सहयोग से मासिक सत्संग में पहुँचा तो पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए, ‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मुझे नई जिन्दगी बख़्शी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>गुरुमंत्र लेने से पहले ही सतगुरु जी ने सुनी पुकार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मुर्शिद-ए-कामिल के साक्षात रहमोकर्म का वर्णन करते हुए गंगाराम मेहता निवासी गाँव नटार, जिला सरसा (हरियाणा) बताते हैं कि एक दिन मैं जीप पर 40 किलोमीटर प्रति घण्टा की रफ्तार से गांव भट्टूकलां जा रहा था। अचानक जीप के ऐक्सीलेटर यानि रेस वाली तार टूट जाने से जीप की रफ्तार बढ़ गई और बेकाबू हो गई। मैंने काबू करने की बहुत कोशिश की, परन्तु असफल रहा। ब्रेक भी नहीं लग रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं एकदम घबरा गया, क्योंकि मौत सामने दिखने लगी थी। जब गाड़ी सरसा आश्रम के सामने पहुँची तो एकदम मेरे दिल से पुकार निकली और मैंने ऊँची आवाज में कहा कि सच्चे सौदे वाले बाबा जी मुझे बचा लो, नहीं तो मैं आज मर जाऊंगा। इतना कहने की देर थी कि ब्रेक काम करने लग गए और गाड़ी धीरे-धीरे रुक गई। मेरी साँस में साँस आई। मैंने सतगुरु का लाख-लाख शुक्राना किया, जिसने मुझे मौत के मुंह से बचाया है। विशेष बात यह थी कि उस समय मैंने नाम भी नहीं लिया हुआ था, लेकिन पूजनीय सतगुरु जी के प्रति मेरे दिल में पूरी श्रद्धा थी। सच्ची पुकार सुनकर मालिक ने मेरी जान बचाई। इस घटना से प्रभावित होकर मैंने उसी मासिक सत्संग पर नाम शब्द ले लिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रेम निशानी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्त्यार कौर, गाँव दानेवाला जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) सच्चे दाता रहबर के परोपकार के एक वृतांत का वर्णन करते हुए बताती है कि मेरे बड़े लड़के अमरजीत सिंह की शादी को 15 वर्ष हो चुके थे, परन्तु अभी तक सन्तान नहीं हुई थी। वह मुझे अक्सर कहता था कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में सन्तान के लिए अर्ज करो, परन्तु मैं उसकी बात को यह कहकर टाल देती कि मालिक तो अंग-संग है, जब मालिक की रहमत होगी तो सन्तान हो जाएगी। सन् 1985 में पूजनीय परम पिता जी मलोट आश्रम में पधारे।</p>
<p style="text-align:justify;">मजलिस के बाद जब पूजनीय परम पिता जी घूमने जा रहे थे तो अचानक मुझे कहने लगे, ‘‘बेटा, तेरे पोता-पोती सब ठीक हैं।’’ मैंने उदास मन से कहा-पिता जी, मेरे लड़के की शादी हुए 15 वर्ष हो गए हैं, अभी तक उनके कोई सन्तान नहीं हुई। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने मुस्कुराकर कहा, ‘‘बेटा, तुझे एक प्रेम निशानी दे रहे हैं, इसे अपने पोते-पोतियों को पहना देना।’’ उसी समय पूजनीय परम पिता जी ने मुझे एक फ्रॉक तथा कुछ अन्य कपड़े दिए। मैं यह प्रेम-निशानी लेकर फूले नहीं समा रही थी। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर से 15 वर्ष बाद मुझे एक पोता व दो पोतियों का सुख मिला। इस प्रकार सतगुरु अपने जीव की हर जायज माँग को पूरी करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>निंदक जिएं युगों-युग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">एक बार पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज गाँव चोरमार डेरा निर्भयपुर धाम में चिनाई की सेवा का कार्य सम्पन्न करवा रहे थे। सत् ब्रह्मचारी सेवादारों के साथ गाँव के भी काफी भक्त प्रात: सेवा में आ जुटते एवं देर शाम वापिस अपने घरों को लौट जाते। एक बार बेपरवाह जी ने गाँव के सेवादारों को रात में घर न जाने का हुक्म फरमाते हुए बताया कि आज डेरे से कोई बाहर नहीं जाएगा। आश्रम का मुख्य द्वार बंद करवा दिया गया। थोड़ी देर बाद मिल्ट्री (सेना) की कई जीपें, ट्रक व सैनिक आने शुरू हो गए। 20-20 की लाइनों में डेरा व गाँव के मध्य में अपने वाहन लगाने लगे। खाइयाँ खोदने लगे। मोर्चे बनाने लगे। रात को तीन बजे ही उन मिल्ट्री वालों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया व वापिस जाने लगे। दो घंटों में ही सभी वापिस चले गए।</p>
<p style="text-align:justify;">निन्दकों ने बातें फैलानी शुरू कीं कि किसी गैर कानूनी गतिविधि में सच्चा सौदा वाले पकड़े गए। यह झूठी बात कुछ समाचार पत्रों में भी छपी। तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं। आसपास दूर-दराज से भी सत्संगी असलियत का पता लगाने के लिए आने लगे। सतगुरु के प्रति अथाह श्रद्धा रखने वाले सत्संगी अपने तौर पर निंदकों को कहते कि यह खबर झूठी है। ऐसा हो ही नहीं सकता। शर्तें लगने लगीं। बहुत भारी संख्या में चोरमार पहुँची साध-संगत को पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने फरमाया, ‘‘हम तो बैठे हैं, सेवाधारी तो तुम्हारे सामने बैठे हैं।’’ रोहतक के एक सत्संगी ने पूज्य सार्इं जी को कहा कि खबर झूठी छापी गई थी। अखबार वाले पर केस करवाएँगे, यह कानूनी ज़ुर्म है। बेपरवाह जी ने हँसते हुए फरमाया, ‘‘नहीं, इसने बड़ा अच्छा काम किया है। वरी, सारे देश में सच्चा सौदा मशहूर किया है। उसको 100 रुपया व मिठाई दो ताकि वह और निंदा करे। इतने रुपये में तो इतनी मशहूरी कोई न करे, निंदक जिएं युगों-युग।’’ फिर अगले दिन आप जी ने उनके पास रुपये व मिठाई भिजवाई।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सुमिरन करने वाले के साथ सतगुरु हमेशा रहता है</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘यदि तेरे अंदर परमेश्वर का नाम (गुरुमंत्र) बस गया है तो तू यकीन रख कि तेरा दिन-रात सतगुरु की सोहबत में गुजरता है। यदि सतगुरु तेरे साथ है तो तेरी रूह नाम (गुरुमंत्र) का सहारा लेकर पवित्र मंडलों को पार करती हुई अपने सतगुरु के पास पहुंच जाएगी। जिस वक्त तू नाम की अनहद धुन सुनेगा, तो तुझे ऐसी मस्ती आएगी और दिल करेगा कि यदि सौ जानें भी हों तो अपने सतगुरु पर कुर्बान कर दूं। सुमिरन करने वाले के साथ सतगुरु हमेशा रहता है और सुमिरन करने से तेरा सतगुरु तुझे नजर आवेगा।’’<br />
पूज्य शाह मस्ताना जी महाराज के पवित्र वचन।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>वचन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">गुरू भक्ति मुर्शिदे-कामिल का सत्संग करने से आ जाती है।  अगर रूह गुरू की आशिक है तो गुरू भी उसे भुलाता नहीं है। बिना कामिल फकीर के इश्क कमाने का बल नहीं आ सकता। इश्क में कामयाबी होगी तो साधू-फकीर के संग से होगी। भगत को चाहिए कि कामिल फकीर के हुक्म में चलने की कोशिश करे। गुरू भक्ति करना आशिकों का काम है, कायरों को काम नहीं है। पहली पौड़ी यही है कि पूर्ण महात्मा को मिले। फिर बेखौफ होकर कमाई करो। भाव इश्क कमाओ। गुरू की भक्ति करना, यह काम धन से नहीं होता। अगर यह काम धन के साथ होता तो गरीब आदमी तो उसको पा ही नहीं सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बच्चे की साँप से रक्षा की</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा सरसा का निर्माण आरंभिक चरण में ही था। चारों ओर काँटेदार झाड़ियों की ऊँची बाड़ लगाने के लिए धरती में खाई खोदने की सेवा चल रही थी। कुछ सेवादार कस्सियों से खुदाई की सेवा कर रहे थे। सेवा के साथ-साथ सभी सतगुरु की याद में सामूहिक शब्द भी बोल रहे थे। भक्त गुल्ला राम सैनी का 8-10 वर्ष का लड़का पास ही पक्के चबूतरे पर बैठा मस्त होकर आँख मूँदकर सभी भक्तों के साथ शब्द बोलने की धुन में मगन था। गर्मी का मौसम था। शाम के समय पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज गुफा (तेरा वास) से बाहर सेवादारों के पास आने की तैयारी में थे। खाई को और गहरा करने के लिए पुराने सत्संगी गुल्ला राम सैनी ने कस्सी से ज़मीन पर टक्क लगाया। तभी ज़मीन के नीचे से एक काला जहरीला लम्बा साँप निकला और थोड़ी दूरी पर अपनी धुन में मस्त बैठे गुल्ला राम के लड़के के पास जा पहुँचा। भक्त गुल्ला राम डर गया कि कहीं साँप उसके बच्चे को नुकसान न पहुँचा दे।</p>
<p style="text-align:justify;">अवाक् खड़े होकर गुल्ला राम दिल से सच्चे पातशाह जी से सहायता की पुकार करने लगा। उसी समय पूजनीय बेपरवाह जी गुफा (तेरा वास) से बाहर आ गए और दूर से ही भक्त गुल्ला राम को सेवा न करते देख आवाज लगाई, ‘‘गुल्ला राम, खड़ा क्यों हैं सेवा क्यों नहीं करता?’’ उसने अपने लड़के व उसके पास बैठे साँप की तरफ इशारा करते हुए आप जी से मदद की गुहार की। पूजनीय बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘घबराने की जरूरत नहीं है। इसे मारना नहीं, अपने आप चला जाएगा।’’ उसी समय वह साँप पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन पाकर अपने आप चला गया। पूजनीय बेपरवाह जी ने वचन फरमाया, ‘‘आश्रम में कभी भी, किसी भी साँप, बिच्छु आदि जहरीले जानवर को मारना नहीं बल्कि बाहर छोड़कर आना है।’’ ये जीव आश्रम की हद में किसी का कोई नुकसान नहीं करेंगे।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Feb 2022 05:13:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सांई जी ने अलौकिक खेल से बदली निंदक की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[निंदक को भेजा मिठाई का डिब्बा एक बार एक आदमी जो तावीज आदि बनाकर बेचता था। उस व्यक्ति ने सरसा शहर में जगह-जगह मुनादी करके बताया कि आज रात को सरसा के एक चौक में जलसा होगा। इस जलसे में डेरा सच्चा सौदा के बारे में बताया जाएगा कि कैसे ये लोगों को गुमराह करते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/sai-ji-changed-the-life-of-cynic-with-supernatural-game/article-29577"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/saha-mastana-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>निंदक को भेजा मिठाई का डिब्बा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">एक बार एक आदमी जो तावीज आदि बनाकर बेचता था। उस व्यक्ति ने सरसा शहर में जगह-जगह मुनादी करके बताया कि आज रात को सरसा के एक चौक में जलसा होगा। इस जलसे में डेरा सच्चा सौदा के बारे में बताया जाएगा कि कैसे ये लोगों को गुमराह करते हैं और जो इनके चक्कर में एक बार पड़ जाता है वह फिर कभी छूटता नहीं। उस ईर्ष्यालु व्यक्ति ने शाही दरबार की शान के विरूद्ध कई मनघड़ंत बातें मुनादी में बोली। सरसा शहर के कुछ सत्संगियों ने आपस में मिलकर विचार किया कि आज रात को चौक पर ये व्यक्ति डेरा सच्चा सौदा के बारे में गलत बोलेगा और शहर में माहौल बिगाड़ सकता है। इसलिए शहर के 2-3 बुजुर्ग भक्तों ने पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के पास दरबार में आकर मुनादी वाली सारी बात बताई।</p>
<p style="text-align:justify;">आप ने इस पर भक्तों को फरमाया,‘‘आप सब की यही ड्यूटी है कि जलसे के अंदर कोई भी व्यक्ति उस व्यक्ति को कुछ न कहे। जिस किसी को भी उसकी बात बुरी लगे वह उठकर अपने घर चला जाए। जलसे में कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए। जब जलसा खत्म हो जाए तब आप प्रेमपूर्वक उस व्यक्ति को आधा किलो बर्फी एवं एक किलो दूध लेकर दे देना।’’ जलसा समाप्त होते ही हुक्मानुसार उन भक्तों ने ऐसा ही किया। उस व्यक्ति ने बर्फी खाने व दूध पीने के बाद पूछा कि आप लोगों ने किस खुशी में मुझे यह सब कुछ खिलाया-पिलाया है। उसे सत्संगियों ने बताया कि आप ने जो एक घंटा जलसा किया है। उससे आपका दिमाग थक गया होगा। पूजनीय शाह मस्ताना जी ने हमें हुक्म दिया था कि जब जलसा खत्म हो जाए तो उसे बर्फी और दूध खिला-पिला देना।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के सत्संगी भाईयों का नम्रतापूर्वक व्यवहार देखकर और यह सोचकर कि मैंने जलसे में सच्चे सौदे वाले बाबा जी के खिलाफ बोला और उस सच्चे फकीर ने मेरे लिए बर्फी व दूध का हुक्म फरमाया। इस पर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। वह व्यक्ति अपने किए पर पश्चाताप करने लगा। डेरा सच्चा सौदा का प्रसाद खाने के बाद उसका हृदय पलट गया। वह व्यक्ति बोला कि मुझे पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन करवाओ।</p>
<p style="text-align:justify;">वह रात भर बैचेन रहा। दूसरे दिन वह व्यक्ति डेरा सच्चा सौदा सरसा आकर आप जी से माफी मांगने लगा। वह बोला कि बाबा जी, मुझे लगता है कि मैंने आज तक अपना जीवन पाखंडों में ही गुजार दिया। मुझे क्षमा करें जी। इस पर शहनशाह जी ने फरमाया, ‘‘आपने बहुत अच्छा किया। हम मिट्टी का एक घड़ा भी खरीदते हैं तो उसे दस बार बजाकर देखते हैं।’’ वह व्यक्ति बोला कि मेरा कल्याण कैसे होगा? मुझ पर आप जी कृपा करें। आप जी मुझे भी नाम शब्द दे दें ताकि मैं भी नाम जपकर अपना छुटकारा कर सकूं। इस पर आप जी ने फरमाया, ‘‘अगर आप मालिक से मिलने की भावना रखते हैं तो आपको कुर्बानी देनी पड़ेगी। हक-हलाल की कमाई खानी पड़ेगी फिर ही मालिक से मिल सकते हो। अपने मन में विचार करो, फिर आपको नाम दे देंगे।’’ वह व्यक्ति मान गया और नाम-शब्द की प्राप्ति कर खुशियों का हकदार बन गया।</p>
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                <pubDate>Fri, 31 Dec 2021 05:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनमोल वचन : खुदगर्ज हैं ज्यादातर दुनियावी रिश्ते-नाते</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा के अरबों नाम हैं, करोड़ों पहचान हैं, उस परमपिता परमात्मा का प्यार-मोहब्बत जीव हासिल कर ले तो जीते-जी गम, चिंता, टेंशन, परेशानियों से निजात मिल जाती है और मरणोपरांत आवागमन से मोक्ष-मुक्ति जरूर मिलती है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/sant-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan/article-28049"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/anmol-vachan-associate-good-people-in-life-pujya-guru-ji.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा के अरबों नाम हैं, करोड़ों पहचान हैं, उस परमपिता परमात्मा का प्यार-मोहब्बत जीव हासिल कर ले तो जीते-जी गम, चिंता, टेंशन, परेशानियों से निजात मिल जाती है और मरणोपरांत आवागमन से मोक्ष-मुक्ति जरूर मिलती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि दुनिया में ज्यादातर रिश्ते-नाते खुदगर्ज हैं। जब तक मतलब होता है तो हर कोई प्यार से बातें करता है और जैसे ही मतलब निकल जाता है तो तू कौन, मैं कौन? इस घोर कलियुग के स्वार्थी रिश्तों में अगर कोई दोनों जहान में साथ देने वाला है तो वो अल्लाह, वाहेगुरु, राम है।</p>
<p style="text-align:justify;">हम यह नहीं कहते कि दुनिया में प्यार न रखो। प्यार रखो लेकिन नि:स्वार्थ भावना से। जितने ज्यादा गर्ज में बंध जाओगे, उतनी ज्यादा मुश्किलें आएंगी और आप मालिक से दूर होते जाओगे। अगर इन्सान मालिक को पाना चाहता है तो वह मालिक की औलाद से, उसकी सृष्टि से बेगर्ज प्यार करे क्योंकि जो ऐसा करते हैं वो मालिक के रहमो-करम से मालामाल हो जाते हैं। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को चलते-बैठते, लेटते, काम-धन्धा करते हुए सुमिरन करते रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कहते हैं कि मालिक से जैसा प्यार लगा हो, वह बढ़ता-बढ़ता आखिर तक ओढ़ निभ जाए तो, कोहिनूर तो क्या, कोई भी उसका मुकाबला नहीं कर सकता। पर इसमें बहुत-सी दिक्कतें आती हैं। कभी मन हावी हो जाता है, कभी मनमते लोग टोकते हैं, कभी काम-वासना, कभी क्रोध, लोभ-लालच, कभी मोह-ममता, कभी अहंकार हावी हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे जब प्रीत होती है तो जीव का मालिक से ही प्यार होता है। दुनिया की तरफ कोई ध्यान नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे जैसा संग करता है वैसा रंग चढ़ता जाता है। आप जी फरमाते हैं कि लोगों की तरह-तरह की बातें सुनी तो मन ललचाता है। काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार अपना बाण चलाता है और लोग इससे घायल होकर मालिक से दूर हो जाते हैं। लोग सब कुछ भूल जाते हैं कि मेरा लक्ष्य क्या है। इस दुनिया में आने का मेरा क्या मतलब है। इसलिए आप याद रखें कि आप जीते-जी परमानन्द का अहसास करना चाहते हैं और मरणोपरांत आवागमन से मोक्ष-मुक्ति मिल जाए, कुलों का उद्धार हो जाए और मालिक आपको रहमो-करम से नवाज दे तो आप सुमिरन किया करो। मालिक से मालिक को मांगो तो मालिक अंदर-बाहर कमियां नहीं छोड़ता।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Nov 2021 05:15:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘गुरू के नूरी स्वरूप में करोड़ों सूरजों का प्रकाश हैं’</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुरू जी के रूहानी नजारे प्रेमी रामफल इन्सां सुपुत्र श्री भगत राम आनंद पुरी कॉलोनी, नूरवाना रोड, लुधियाना (पंजाब)। प्रेमी जी अपने सुमिरन अभ्यास के दौरान सतगुरू के प्रत्यक्ष नूरानी दीदार तथा अन्य रूहानी नजारों के बारे में बताते हैं। प्रेमी जी लिखित में बताते हैं कि मैंने सन् 1994 में डेरा सच्चा सौदा में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/spiritual-views-of-saint/article-27914"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">सतगुरू जी के रूहानी नजारे</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रेमी रामफल इन्सां सुपुत्र श्री भगत राम आनंद पुरी कॉलोनी, नूरवाना रोड, लुधियाना (पंजाब)। प्रेमी जी अपने सुमिरन अभ्यास के दौरान सतगुरू के प्रत्यक्ष नूरानी दीदार तथा अन्य रूहानी नजारों के बारे में बताते हैं। प्रेमी जी लिखित में बताते हैं कि मैंने सन् 1994 में डेरा सच्चा सौदा में पूजनीय मौजूदा हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से नाम-शब्द (गुरूमंत्र) लिया है। प्रेमी जी लिखते हैं कि मैं पूज्य हजूर पिता जी के वचनानुसार सुबह 2 बजे ‘अमृत वेला पहर’ में सुमिरन करने के लिए उठ जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">उपरोक्त घटना सन् 1998 की है। उस रात भी मैं दो बजे अपने नियमित अभ्यास के अनुसार उठकर सुमिरन करने बैठा हुआ था। करीब अढ़ाई बजे होंगे कि पहले तो मुझे आसमानी बिजली कड़कती हुई सुनाई दी। फिर एकदम तेज रोशनी आई और बहुत ही तेज व मनमोहक प्रकाश मुझे दिखाई दिया। वो प्रकाश इतना तेज था कि हजारों क्या, लाखों कह लीजिए या करोड़ों, यानि करोड़ों सूरजों का प्रकाश भी उस प्रकाश के मुकाबले फीका था। उपरान्त उस रोशनी में मुझे मेरे सतगुरू पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के हंसते-मुस्कुराते नूरानी स्वरूप के दर्श-दीदार हुए। इसके उपरांत अचानक मैंने देखा, पूज्य पिता जी लगभग 15 फुट ऊंचे एक किसी मकान की छत पर खड़े थे। पूजनीय शहनशाह जी मुझे इशारे से कह रहे थे कि आजा! आजा! पूज्य पिता जी ने दो-तीन बार ऐसे इशारे करके फरमाया। मैं भी पूज्य पिता जी के पीछे-पीछे हो लिया। पूज्य पिता जी ऊपर की ओर तेजी से चले जा रहे थे और मेरे को भी पीछे-पीछे आने को कह रहे थे कि आजा, आजा! और इस प्रकार पूज्य पिता जी मुझे अपने साथ कोसों किलोमीटर ऊंचाई पर ले गए। बहुत तेज रोशनी और बिजली कड़कने की आवाज से मुझे डर भी लग रहा था, परंतु पूज्य हजूर पिता जी के हुक्मानुसार मैं पीछे-पीछे ही चलता गया।</p>
<p style="text-align:justify;">आगे एक जगह मैंने देखा, पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज और पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज दोनों पवित्र बाडियां मूढे पर विराजमान थी। रूहानी बादशाह के दोनों नूरी स्वरूपों को पाकर मैं धन्य हो गया। हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे जैसा कि पूज्य हजूर पिता जी अक्सर फरमाया करते हैं और मेरी आंखों के सामने मैंने इस सच्चाई को देखा व नजदीक से अनुभव भी किया है। धन्य-धन्य है दाता, सतगुरू प्यारे मुर्शिद पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, आप जी का एक-एक वचन ज्यों का त्यों सच है। ऐ मेरे प्यारे मुर्शिद, हर पल आपजी के दर्श दीदार होते रहें और आखिरी स्वास भी आपजी की पवित्र याद व सेवा-सुमिरन में ही लगे जी, आपजी से यही दुआ है जी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Oct 2021 05:00:57 +0530</pubDate>
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                <title> राम-नाम के जाप से ही सफल होगा मनुष्य जीवन : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[ शाह सतनाम जी धाम (सरसा), शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा और सलाबतपुरा डेरे में हुई नामचर्चाएं (Happy Incarnation Month)  पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को साध-संगत ने पावन अवतार माह की पवित्र नारे के रूप में दी बधाई पावन अवतार माह का आगाज, नामचर्चाओं में गूंजा राम-नाम सरसा। पूज्य गुरु […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/mans-life-will-be-successful-only-by-chanting-the-name-of-ram/article-25686"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/bad-habits-drive-humans-away-from-god-pujya-guru-ji.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong> शाह सतनाम जी धाम (सरसा), शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा और सलाबतपुरा डेरे में हुई नामचर्चाएं (Happy Incarnation Month)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को साध-संगत ने पावन अवतार माह की पवित्र नारे के रूप में दी बधाई</strong></h5>
</li>
<li>
<h5><strong>पावन अवतार माह का आगाज, नामचर्चाओं में गूंजा राम-नाम</strong></h5>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अवतार माह अगस्त के आगमन की खुशी में रविवार को शाह सतनाम जी धाम (सरसा), शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (यूपी) और शाह सतनाम जी रूहानी धाम राजगढ़-सलाबतपुरा, भटिंडा (पंजाब) में आॅनलाइन नामचर्चाओं का आयोजन किया गया। नामचर्चाओं का शुभारंभ पवित्र नारा ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ से व पूज्य गुरु जी को पावन अवतार माह की बधाई के साथ हुआ। इसके पश्चात कविराजों ने ‘‘अज आए सतगुरु जी, अगस्त माह में रूहों ने खुशियां मनाई’’, ‘‘जी सतगुरु जग विच आए ने, रूहों ने तड़प बुलाए ने’’, ‘‘अगस्त में छाई बहार, की इसमें आए सिरजणहार’’ आदि विभिन्न भक्तिमय भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">नामचर्चाओं में कोरोना के मद्देनजर सरकार और प्रशासन द्वारा निर्धारित सोशल डिस्टेसिंग, सेनेटाइजेशन और थर्मल स्कैनिंग आदि नियमों का पूर्णत: पालन किया गया। इस अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रिकॉर्डिड पावन वचन चलाए गए। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मनुष्य शरीर हीरा अनमोल है; बाकी जितने भी शरीर हैं, हालांकि दुर्लभ हैं, लेकिन आत्मा के लिए जो शरीर सबसे दुर्लभ है, जिसे किसी भी मोल पर कहीं से भी खरीदा नहीं जा सकता, वो मनुष्य शरीर है। मनुष्य शरीर को दुर्लभ इसलिए कहा गया कि आत्मा को ओउम, हरि, अल्लाह, राम से बिछुड़े हुए सदियां गुजर गर्इं, युग बीत गए। मालूम नहीं कब से आत्मा तड़फ रही है, व्याकुल है और तड़पती हुई और व्याकुल आत्मा को आवागमन यानि जन्म-मरण से आजादी का मौका किसी जन्म में मिला है तो वो जन्म है मनुष्य शरीर, मनुष्य जन्म। बाकी जितने भी शरीर हैं, उनमें आत्मा आवागमन से आजाद नहीं हो सकती। लेकिन ये संभव तभी है जब सुमिरन, भक्ति की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने फरमाया कि जब तक जीवात्मा मनुष्य शरीर में ओउम, अल्लाह, राम की भक्ति इबादत नहीं करती, तब तक आवागमन से आजाद नहीं हो सकती। जन्म-मरण का चक्कर बड़ा लंबा है। धर्मों में हमने पढ़ा, सदियां गुजर गर्इं आत्मा को भटकते हुए। युग बीत गए। अलग-अलग धर्मों में भाषा जरूर अलग-अलग है, लेकिन सभी का मतलब यही है कि आत्मा को बिछुड़े हुए युग हो गए, सदियां बीत गई, बहुत समय हो गया। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि एक जन्म-मरण का दु:ख भयानक है। और 84 लाख बार जन्म लेना और 84 लाख बार मरना, उसका दर्द कितना आत्मा को सहना पड़ता होगा, कहने-सुनने से परे है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि धर्मों में ये भी लिखा है कि आत्मा शरीर को ऐसे भी छोड़ती है, जैसे हम कपड़ा बदल लेते हैं। ये कब संभव है? इसके लिए ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, राम के नाम से जुड़ना जरूरी है। उस औंकार, जिसने ब्रह्मा, विष्णु, महेश को बनाया। उस नूरे जलाल, अल्लाह ताल्हा, जिसने सारी सृष्टि, खलकत, फरिश्तों को बनाया। वो एक औंकार, वाहेगुरू जिसने सब कुछ बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">वो सुप्रीम पावर गॉड जिसने सब कुछ बनाया, तैयार किया। उसका नाम जपोगे तो मौत के समय चेहरे पर ज्यादा नूर आ जाता है और आदमी कई तो बताकर जाते हैं कि मैं फला टाइम पर जाऊंगा, मेरा मालिक लेने आया है। ऐसी खुशी होती है, जो ज़िंदगी में कभी हुई नहीं होती, दर्द तो दूर की बात है। सो राम-नाम, भगवान की भक्ति में इतनी शक्ति है। इसलिए मालिक का नाम लेना चाहिए। मालिक की भक्ति करनी चाहिए। मालिक की भक्ति से 84 लाख जन्म-मरण का चक्कर भी खत्म हो जाता है। इस जन्म में मौत का डर तो होता ही नहीं बल्कि आगे से भी जन्म-मरण का जो दर्द है, वो हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। ऐसा है अल्लाह, वाहेगुरू, हरि, ओउम, राम का नाम। इसलिए मालिक का नाम लेने में हिचक नहीं करनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Aug 2021 15:29:32 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : निंदा करने वालों से सदा बचकर रहो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आमतौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करुंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/always-stay-away-from-the-slanderers/article-25256"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/anmol-vachan-associate-good-people-in-life-pujya-guru-ji1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आमतौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करुंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो मालिक आपकी जायज मांग सुनते भी रहेंगे और पूरी भी करते रहेंगे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हमेशा अपने दिल में ये श्रद्धा-भावना बैठा कर रखनी चाहिए कि मालिक का रहमो-कर्म तो बरसेगा ही बरसेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जब लोग चहूं ओर मालिक का रहमो-कर्म बरसते देख रहे हैं, तो नाम लेवा जीव को यह सोचना चाहिए कि मुझ पर मालिक का रहमो-कर्म क्यों वहीं बरस रहा। फिर जीव को सोचना चाहिए कि मेरा काम है कि मैं नाम का सुमिरन करुं, भक्ति करुं। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान निंदा-चुगली, बुराइयों व झूठ-फरेब से जितना बच सकें, उतना ही अच्छा है। बेपरवाह सच्चे दाता-रहबर (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज व बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज) फरमाया करते कि निंदक की तो परछाई भी बुरी होती है,</p>
<p style="text-align:justify;">और लोग अपनी बुराइयां छुपाने के लिए ही दूसरों की निंदा करते हैं। इस पर आप जी फरमाते हैं कि अकबर-बीरबल के समय में एक बार किसी दरबारी ने कोई सामान चुरा लिया। बीरबल ने लोगों को इकट्ठा किया और बादशाह से कहा कि मुझे पता चल गया है कि चोर कौन है। बादशाह ने पूछा कि बताओ कौन है? तो बीरबल ने कहा कि बादशाह! आप निगाह मारो, चोर की दाढ़ी में तिनका है। इतने कहते ही जो चोर था, वो पहले ही अपनी दाढ़ी में हाथ मारकर देखने लगा कि कहीं मेरी दाढ़ी में तिनका तो नहीं लगा। बीरबल ने कहा कि ये रहा चोर।</p>
<p style="text-align:justify;">कहने का मतलब है कि जो निंदा-चुगली करते हैं, असल में वो खोखले होते हैं। वो अपने तिनके छुपाने के लिए दूसरों पर तिनकों की बौछार करते रहते हैं। इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए। जो भी निंदा करता है, बुराई गाता है, उससे जितना कन्नी कतरा कर रहोगे, उतने की सुखी रहोगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि आज घोर कलियुग का समय है। अपने मुंह से खुद अपनी बुराइयां, अपनी कमियां कोई नहीं गाता और जो लोग बुराई करने वालों के पीछे लगते हैं, उनका भी बुरा हाल होता है। इसलिए इन्सान को अपने गिरहेबान में निगाह मारनी चाहिए और अपने अंत:करण में जो कमियां नजर आती हैं, उन्हें राम-नाम के सुमिरन, परमार्थ के द्वारा निकाल डालो, तो यकीनन मालिक की दया-रहमत आप पर मूसलाधार बरसेगी ही बरसेगी।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jul 2021 06:05:19 +0530</pubDate>
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