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                <title>Labour - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आक्रोशित मजदूरों ने फैक्ट्री समक्ष लगाया धरना</title>
                                    <description><![CDATA[कार्य करते घायल हुए मजदूर के इलाज का खर्च देने से मुकरने का आरोप हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। फैक्ट्री में कार्य करते समय ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए मजदूर के इलाज पर होने वाला खर्च उठाने से इन्कार करने से नाराज मजदूरों ने गुरुवार को सीटू के बैनर तले जंक्शन के रीको […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/angry-workers-staged-a-sit-in-in-front-of-the-factory/article-51092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/factory-labour.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कार्य करते घायल हुए मजदूर के इलाज का खर्च देने से मुकरने का आरोप</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> फैक्ट्री में कार्य करते समय ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए मजदूर के इलाज पर होने वाला खर्च उठाने से इन्कार करने से नाराज मजदूरों ने गुरुवार को सीटू के बैनर तले जंक्शन के रीको एरिया फर्स्ट में स्थित काली इंडिया फैक्ट्री के बाहर धरना लगा दिया। सीटू पदाधिकारियों ने घायल मजदूर को न्याय न मिलने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी। मांग न माने जाने पर फैक्ट्री गेट पर ताला जड़ने की भी चेतावनी दी। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">सीटू जिला महासचिव शेरसिंह शाक्य ने बताया कि हमीरपुर बिजनौर उत्तर प्रदेश निवासी मुनेश कुमार नाम का मजदूर जंक्शन की काली इंडिया फैक्ट्री में काम करता है। मुनेश कुमार आठ अगस्त को फैक्ट्री में मशीन पर कार्य करते समय अचानक नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे राजकीय जिला चिकित्सालय ले जाया गया। हालत नाजुक होने के कारण चिकित्सकों ने हायर सेंटर कर दिया। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">जब मुनेश कुमार को बीकानेर ले जाया जा रहा था तब फैक्ट्री मालिकों ने आश्वस्त किया था कि इलाज पर होने वाला तमाम खर्चा वे खुद उठाएंगे। लेकिन फैक्ट्री मालिकों ने कोई मदद नहीं की। इस पर रुपए न होने पर परिजन मुनेश कुमार को बीकानेर से वापस ले आए। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को जब मुनेश कुमार के परिजन मुनेश कुमार के साथ काली इंडिया फैक्ट्री पहुंचे तो उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया गया और धक्का मारकर बाहर निकाल दिया। साथ ही फैक्ट्री मालिकों ने पुलिस बुला ली। शेरसिंह शाक्य ने बताया कि सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे और जांच करवाने के लिए मुनेश कुमार को निजी अस्पताल भिजवाया।</p>
<p style="text-align:justify;">शेरसिंह शाक्य ने कहा कि फैक्ट्री एक्ट की बात करें तो जो मजदूर जिस फैक्ट्री में काम करता है, वहां कोई घटना-दुर्घटना होने पर उस फैक्ट्री मालिक की ओर से आर्थिक मदद करने का प्रावधान है। लेकिन काली इंडिया फैक्ट्री के मालिकों ने जिस तरह का व्यवहार मुनेश कुमार व उसके परिजनों के साथ किया है वह मानवता से परे है। उन्होंने कहा कि जब तक मजदूर को न्याय नहीं मिलता तब तक वे फैक्ट्री के बाहर धरने पर बैठे रहेंगे। अगर सुनवाई नहीं हुई तो फैक्ट्री के गेट पर तालाबंदी की जाएगी। इस मौके पर सरपंच बलदेव सिंह, बहादुर सिंह चौहान सहित कई अन्य मजदूर नेता व मजदूर मौजूद थे। Hanumangarh News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सभी जिला मुख्यालयों पर नर्सेज ने रैली निकाल जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किए" href="http://10.0.0.122:1245/nurses-took-out-a-rally-and-demonstrated-at-the-district-collectorate/">सभी जिला मुख्यालयों पर नर्सेज ने रैली निकाल जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किए</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2023 18:49:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विश्व भर में, आधुनिक दासता के शिकार हैं पांच करोड़ लोग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दुनिया में आधुनिक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा, तकरीबन पांच करोड़ लोग आधुनिक दासता के शिकार हैं जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और संबंधित संगठनों की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा उन घरेलू श्रमिकों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/worldwide-there-are-50-million-victims-of-modern-slavery/article-37730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/labour.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दुनिया में आधुनिक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा, तकरीबन पांच करोड़ लोग आधुनिक दासता के शिकार हैं जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और संबंधित संगठनों की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा उन घरेलू श्रमिकों का है, जोकि अनौपचारिक रोजगार पर निर्भर हैं। वर्ष 2021 में पाँच करोड़ लोग दासता के आधुनिक रूपों में रहने के लिये मजबूर थे और पिछले पांच वर्षों में इस संख्या में वृद्धि हुई है। इनमें से दो करोड़ 80 लाख लोग जबरन श्रम और दो करोड़ 20 लाख जबरन विवाह के पीड़ित हैं। रिपोर्ट के अनुसार आधुनिक दासता के शिकार लोगों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2021 में एक करोड़ अतिरिक्त लोग आधुनिक दासता का शिकार हुए हैं। महिलाएं और बच्चे इस समस्या से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र श्रम संस्थान अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन और ‘वाक फ्री’ नामक मानवाधिकार संगठन ने साझा रूप से ‘ वैश्विक आधुनिक दासता ‘ नामक रिपोर्ट प्रकाशित की है। आधुनिक दासता से तात्पर्य, शोषण की उन परिस्थितियों से है जहाँ कोई व्यक्ति धमकियों, हिंसा, दबाव, धोखे या ताकत के दुरुपयोग के कारण न तो काम से मना कर सकते हैं और न ही काम छोड़ कर जा सकते हैं। रिपोर्ट बताती है कि आधुनिक दासता के मामले विश्व के लगभग हर देश में सामने आते हैं और ये जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक सीमाओं से परे हैं। जबरन श्रम के कुल मामलों में से 52 प्रतिशत और जबरन विवाह के करीब 25 फीसदी मामले, ऊपरी-मध्य आय या उच्च-आय वाले देशों में दर्ज किये गए हैं। अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय राइडर ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह स्तब्धकारी है कि आधुनिक दासता के हालात में सुधार नहीं हो रहा है। बुनियादी मानवाधिकारों के साथ इस दुर्व्यवहार को किसी भी प्रकार से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>वर्ष 2016 की तुलना में 66 लाख की वृद्धि को दर्शाता है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जबरन श्रम जबरन श्रम के अधिकांश मामले 86 प्रतिशत निजी क्षेत्र में सामने आते हैं। धन के लेनदेन से जुड़े यौन शोषण से इतर अन्य क्षेत्र में जबरन श्रम, ऐसे कुल मामलों का 63 प्रतिशत है। धन के लेनदेन वाले यौन शोषण के लिये मजबूर किये जाने के मामले, सभी जबरन श्रम मामलों का 23 प्रतिशत है और इनमें हर पाँच में चार पीड़ित महिलाएँ या लड़कियाँ हैं। जबरन श्रम का शिकार लोगों की कुल संख्या में से करीब 14 फीसदी, सरकारों की थोपी जाने वाली जबरन मजदूरी का शिकार हैं। जबरन मजदूरी के हर आठ मामलों में से एक पीड़ित बच्चा है, जिनमें से आधे से अधिक मामले धन के लेनदेन वाले यौन शोषण से जुड़े हैं। जबरन विवाह रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में करीब दो करोड़ 20 लाख लोग जबरन विवाहित के रूप में अपना जीवन गुजार रहे थे, जोकि वर्ष 2016 की तुलना में 66 लाख की वृद्धि को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों ने जबरन विवाह के वास्तविक मामलों की संख्या, वर्तमान अनुमान से कहीं अधिक होने की आशंका जताई है। विशेष रूप से 16 वर्ष और उससे कम उम्र के बच्चों के लिये यह अधिक है। बाल विवाह को जबरन कराई गई शादी के तौर पर देखा जाता है, चूँकि कोई भी बच्चे कानूनी रूप से अपनी शादी के लिये सहमति नहीं दे सकते हैं। जबरन विवाह के लिये लम्बे समय से चले आ रहे पितृसत्तात्मक रवैयों और प्रथाओं को जिÞम्मेदार बताया गया है और इनमें से अधिकांश मामले पारिवारिक दबाव के कारण होते हैं। क्षेत्रीय आबादी के आधार पर, जबरन शादी कराए जाने के दो-तिहाई (65 प्रतिशत) मामले एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में दर्ज हुए हैं, मगर अरब देश इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं। इस क्षेत्र में हर एक हजार में 4.8 लोग जबरन विवाहित हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कोविड-19 महामारी कारण हुए बेरोजगार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार कोविड-19 महामारी के कारण घरेलू कर्मचारियों के लिये स्थिति और भी कठिन हुई है। प्रवासियों के लिये जोखिम अध्ययन के अनुसार, प्रवासी कामगारों पर जबरन मजदूरी का शिकार होने का जोखिम, अन्य वयस्क कामगारों की तुलना में तीन गुना अधिक होता है। बताया गया है कि श्रमिकों के प्रवासन से व्यक्तियों, घर-परिवारों, समुदायों और समाजों पर सकारात्मक असर हुआ है, मगर प्रवासियों के लिये जबरन मजदूरी और तस्करी का शिकार होने का जोखिम अधिक होता है। रिपोर्ट में अनेक सिफारिशें भी प्रस्तुत की गई है, जिनके जरिये आधुनिक दासता का अन्त करने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें श्रम निरीक्षण और कानूनों में सुधार और बेहतर ढंग से लागू करना, सरकार की थोपी गई जबरन मजदूरी का अन्त किया जाना, व्यवसाय और आपूर्ति श्रृंखला में जबरन श्रम और तस्करी से निपटने के लिये मजबूत उपाय अपनाना, सामाजिक संरक्षा के दायरे में विस्तार और कानूनी संरक्षण को मजबूती देना, विवाह के लिये कानूनी आयु को बिना किसी अपवाद के 18 वर्ष तक बढ़ाना शामिल हैं। अन्य उपायों में, प्रवासी कामगारों के लिये जबरन श्रम और तस्करी के जोखिम से मुकाबले के लिये उपाय सुझाए गए हैं। इसके तहत, निष्पक्ष और उचित भर्ती प्रक्रिया तथा महिलाओं, लड़कियों एवं निर्बल व्यक्तियों के लिये समर्थन बढ़ाना होगा।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Sep 2022 12:47:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निजी हो या सरकारी कर्मचारी, सबको बड़े लाभ की तैयारी!</title>
                                    <description><![CDATA[1 अक्तूबर से लेबर कोड में बदलाव की तैयारी नई दिल्ली। केन्द्र की मोदी सरकार 1 अक्टूबर से देश में लेबर कोड के नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस कानून में परिवर्तन होते ही कर्मचारियों के टेक होम सैलरी और पीएफ ढांचा बदल जाएगा। इससे जहां कर्मचारियों की टेक होम सैलरी घटेगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/be-it-private-or-government-employees-everyone-is-preparing-for-big-benefits/article-25599"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/employment.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">1 अक्तूबर से लेबर कोड में बदलाव की तैयारी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केन्द्र की मोदी सरकार 1 अक्टूबर से देश में लेबर कोड के नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस कानून में परिवर्तन होते ही कर्मचारियों के टेक होम सैलरी और पीएफ ढांचा बदल जाएगा। इससे जहां कर्मचारियों की टेक होम सैलरी घटेगी। वहीं भविष्य निधि यानी पीएफ में ज्यादा पैसा जमा होगा। दरअसल, केन्द्र सरकार चारों श्रम कानूनों को जल्द लागू करना चाहती है। बताया जा रहा है कि पहले 1 जुलाई से लेबर कोड नियमों को लागू किया जाना था। लेकिन इसके लिए राज्य सरकारें राजी नहीं हुर्इं। इन चारों संहिताओं के अंतर्गत केंद्र और राज्यों दोनों को इन नियमों को अधिसूचित करना होगा, तभी संबंधित राज्यों में ये कानून लागू होंगे। श्रम कानून लागू होने से वेतन ढांचे में कई बदलाव होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">नए कानून से कर्मचारियों के मूल वेतन (बेसिक) और भविष्य निधि की गणना के तरीके में उल्लेखनीय बदलाव आएगा। श्रम मंत्रालय औद्योगिक संबंध, वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यवसायिक और स्वास्थ्य सुरक्षा, तथा कार्यस्थिति को लेकर नया नियम लागू करने की तैयारी में है। चार श्रम संहिताओं के तहत 44 केंद्रीय श्रम कानूनों में सुधार होगा। बदलाव के बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये से बढ़कर 21000 रुपये हो सकती है। नई वेतन संहिता के तहत भत्तों को 50 फीसदी पर सीमित रखा जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों के कुल वेतन का 50 फीसदी मूल वेतन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भविष्य निधि की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के आधार पर की जाती है, इसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ता शामिल रहता है। अभी नियोक्ता वेतन को कई तरह के भत्तों में बांट देते हैं। इससे मूल वेतन कम रहता है, जिससे भविष्य निधि और आयकर में योगदान भी नीचे रहता है। नई वेतन संहिता में भविष्य निधि योगदान कुल वेतन के 50 प्रतिशत के हिसाब से तय किया जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है फायदा</h4>
<p style="text-align:justify;">नए बदलाव के बाद बेसिक सैलरी 50 फीसदी या उससे भी ज्यादा हो सकती है। वहीं पीएफ बेसिक सैलरी के आधार पर ही कैलकुलेट किया जाता है, तो उसमें अब कंपनी और कर्मचारी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा। ग्रैच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में इजाफा होगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jul 2021 11:50:18 +0530</pubDate>
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                <title>बेबसी: 21वीं सदी में भी मजदूरों की स्थिति क्यों नहीं बदली</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में 2 माह से बंधक 19 मजदूरों को कराया मुक्त दमोह (एजेंसी)। आज हम 21वीं सदी में आ गए है लेकिन मजदूरों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। सरकार के प्रयास के बाद भी मजदूरों को बंधक बनाने के मामले बंद नहीं हो रहे हैं। ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश के दमोह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-situation-of-labourer-did-not-change-even-in-the-21st-century/article-21666"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/labour.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">महाराष्ट्र में 2 माह से बंधक 19 मजदूरों को कराया मुक्त</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>दमोह (एजेंसी)।</strong> आज हम 21वीं सदी में आ गए है लेकिन मजदूरों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। सरकार के प्रयास के बाद भी मजदूरों को बंधक बनाने के मामले बंद नहीं हो रहे हैं। ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश के दमोह जिले के 5 बच्चों सहित 14 मजदूरों को मजदूरी के नाम पर महाराष्ट्र में 45 दिन से बंधक बनाए रखने के मामले में जिला प्रशासन ने सक्रियता के साथ कार्यवाही करते हुए उन्हें ठेकेदार के चंगुल से मुक्त कराया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक जानकारी के अनुसार दमोह जिले कि बटियागढ़ तहसील के आलमपुर गांव के निवासी इन मजदूरों को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। इन मजदूरों से 20 घंटे तक कार्य कराया जा रहा था और उन्हें मजदूरी भी नहीं दी जा रही थी तथा खाना भी पर्याप्त मात्रा में नहीं दिया जा रहा था। कुछ कहने पर मजदूरों से मारपीट भी की जाती थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पुलिस ने आरोपी पर 8 धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया</h4>
<p style="text-align:justify;">इसकी जानकारी कलेक्टर तरुण राठी को लगने पर उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की टीम बनाकर इन मजदूरों को मुक्त कराने के लिए उन्हें कोल्हापुर भेजा था। जहां से महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से इन मजदूरों को मुक्त कराया गया। मजदूरों ने बताया है कि उन्होंने 45 दिनों तक काम किया है, लेकिन मजदूरी नही मिली है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी ठेकेदार बाबा सैयद पर 8 धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है। मजदूरों ने दमोह आकर जिला प्रशासन का आभार जताया है। कलेक्टर तरुण राठी द्वारा तत्काल ही गई कार्यवाही पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कलेक्टर और जिला प्रशासन की तारीफ की है।</p>
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                <pubDate>Thu, 11 Feb 2021 11:07:59 +0530</pubDate>
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