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                <title>Bee keeping - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Bee Keeping: मधुमक्खी के परागण से बढ़ता है फसलों में उत्पादन</title>
                                    <description><![CDATA[जोबनेर यूनिवर्सिटी में मधुमक्खी पालन पर मंथन | Bee Keeping जयपुर (सच कहूं न्यूज)। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (Shri Karan Narendra Agricultural University) में वैज्ञानिक डॉ. डीपी अब्रोल ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। कुलपति डॉ. बलराज सिंह की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ। महाविद्यालय के 11 विभाग के 122 छात्रों ने मधुमक्खी पालन की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/bee-pollination-increases-crop-production/article-65804"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/jobner-univercity-hunny.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">जोबनेर यूनिवर्सिटी में मधुमक्खी पालन पर मंथन | Bee Keeping</h3>
<p style="text-align:justify;">जयपुर (सच कहूं न्यूज)। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (Shri Karan Narendra Agricultural University) में वैज्ञानिक डॉ. डीपी अब्रोल ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। कुलपति डॉ. बलराज सिंह की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ। महाविद्यालय के 11 विभाग के 122 छात्रों ने मधुमक्खी पालन की राजस्थान में संभावनाओं‌ व चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया। वक्ताओं ने कहा कि- मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन, मधुमक्खी मोम, रॉयल जेली, प्रोपोलिस आदि प्राप्त होते हैं। मधुमक्खी पालन का औषधीय और व्यावसायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मूल्य है। कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, प्रोटीन, खनिजों का स्रोत और पर्याप्त औषधीय मूल्य होने के कारण, शहद की बढ़ती खपत ने किसानों के लिए मधुमक्खी पालक बनने का अवसर पैदा किया है। Bee Keeping</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बलराज सिंह ने कहा कि मधुमक्खी पालन सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण और मानव स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा, “मधुमक्खियां परागण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं, जिससे फसलों का उत्पादन बढ़ता है। “सरसों, राई और अन्य फूलदार फसलों के लिए मधुमक्खियां परागण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मधुमक्खी के डंक के औषधीय गुणों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एपीथेरेपी नामक एक पद्धति में मधुमक्खी के डंक का उपयोग दर्द, आर्थराइटिस, सूजन, और अन्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है। यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार का विकल्प हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा-मधुमक्खियों की आजीविका तापमान से बहुत प्रभावित होती है। 13 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर और 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर मधुमक्खियों की कार्यक्षमता कम हो जाती है और वे उड़ नहीं पाती हैं। राजस्थान का अर्ध-शुष्क क्षेत्र मधुमक्खी पालन के लिए काफी उपयुक्त है क्योंकि यहां सर्दियों और गर्मियों के मौसम के अधिकांश दिनों में तापमान अनुकूल रहता है जिसके कारण इसका पालन संभव है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शहद का उपयोग | Bee Keeping</h3>
<p style="text-align:justify;">एक प्राकृतिक स्वीटनर होने और लगभग 80% कार्बोहाइड्रेट होने के कारण, शहद का उपयोग बेकरी, कन्फेक्शनरी और पेय उद्योगों में किया जा सकता है। यह न केवल खाद्य पदार्थों में स्वाद जोड़ता है बल्कि यह उच्च ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है और आसानी से पचने योग्य है। इसे टेबल शहद के रूप में सेवन किया जा सकता है या कैंडी, केक, पके हुए खाद्य पदार्थों और जूस में एक घटक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कई बीमारियों के इलाज में मददगार साबित हो सकते हैं। शहद प्राकृतिक रूप से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है और इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय तैयार करेगा एडवाइजरी एप्स</h3>
<p style="text-align:justify;">कुलपति डॉ. बलराज सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय मधुमक्खी पालकों के लिए जल्द ही एक एडवाइजरी एप्स लॉन्च करेगा। इस एप्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। “इस ऐप में मधुमक्खी पालन की उन्नत तकनीकों व बीमारियों के नियंत्रण संबंधित जानकारी मिलेगी। साथ ही यह मोबाइल एप्स किसानों को मधुमक्खी पालन को और अधिक लाभदायक बनाने में मदद करेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">15 जिलों में मधुमक्खी पालन की संभावनाएं | Bee Keeping</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 15 जिलों में मधुमक्खी पालन की अपार संभावना देखी हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में रेपसीड और सरसों का उत्पादन अधिक होता है। सरसों में मधुमक्खियां 20-25 % तक उपज में वृद्धि करती है। राजस्थान में मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग जैविक खेती, औषधीय उत्पादों और सौंदर्य प्रसाधनों में बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत में लगभग 2.5 लाख मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जबकि देश की क्षमता 200 लाख कॉलोनियों तक की है। यह दर्शाता है कि मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस दौरान डॉ. आईएम खान, डॉ. केसी शर्मा, डॉ. शैलेश गोदिका, डॉ. आरएन शर्मा, डॉ. बीएस बधाला, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. संतोष देवी सामोता, डॉ. हीना सहीवाला मौजूद रहे। Bee Keeping</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Dec 2024 16:30:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Honey Bee Farming : प्रगतिशील किसान ने 14 वर्ष में लाखों तक पहुंचाया कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[मधुमक्खी पालन: शहद से जिंदगी में घुली आनन्द की मिठास || Honey Bee Farming भगत सिंह। किसान खेती के साथ अन्य सहायक कार्य करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही कार्य कर दिखाया है हरियाणा प्रदेश के गांव गिगोरानी के किसान सोमवीर ने। दरअसल सरसा जिले के गांव गिगोरानी निवासी किसान सोमवीर ने खेती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/honey-bee-farming/article-55520"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/honey-bee-farming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>मधुमक्खी पालन: शहद से जिंदगी में घुली आनन्द की मिठास || Honey Bee Farming</strong></h3>
<div style="text-align:justify;"><strong>भगत सिंह।</strong> किसान खेती के साथ अन्य सहायक कार्य करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही कार्य कर दिखाया है हरियाणा प्रदेश के गांव गिगोरानी के किसान सोमवीर ने। दरअसल सरसा जिले के गांव गिगोरानी निवासी किसान सोमवीर ने खेती के साथ मधुमक्खी पालन (Honey Bee Farming) करना शुरू किया है। उसने बताया कि पहले कभी सोचा नहीं था कि मधुमक्खी पालन से इतनी आमदनी बढ़ेगी। सोमवीर घर पर लोगों को शहद उपलब्ध करवा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर शहद खरीदने वालों की डिमांड लगातार बढ़ रही है। वह शहद बेचकर प्रतिवर्ष करीबन दस लाख रुपये की आमदनी ले रहा है। शहद के कारोबार ने सोमवीर की किस्मत ही बदल दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">किसान सोमबीर ने बताया कि पहले 12 एकड़ भूमि पर फसल बिजाई करता था। कई बार फसलों में बीमारी की वजह से अच्छी आमदनी नहीं हो रही थी। इसके बाद वर्ष 2010 में रिश्तेदार के कहने पर मधुमक्खी पालन करने का कार्य शुरू किया। खेत में 30 बाक्स से मधुमक्खी पालन शुरू किया। मधुमक्खी पालन कर कंपनियां को शहद बेचने लगा। शहद से आमदनी होने पर मधुमक्खी के बाक्से बढ़ाकर 250 कर दिए, जिससे वर्तमान में बड़े स्तर पर शहद तैयार कर रहा है। सोमबीर ने चार साल पहले अपने स्तर पर शहद बेचने का प्लान तैयार किया। जिसे अब अपने बेटे ध्रुव के नाम पर ब्रांड के रूप में पेश कर दिया है।</div>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इंटरनेट से आते हैं ऑर्डर </strong></h3>
<div style="text-align:justify;">प्रगतिशील किसान सोमवीर ने बताया कि शहद बेचने के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया। बारहवीं कक्षा तक पढ़े सोमवीर इंटरनेट मीडिया से जुड़े रहते हैं। इससे शहद खरीदने वालों के अब इंटरनेट से अलग-अलग स्थानों से आर्डर आते हैं। इसके लिए शहद को अच्छे तरीके से साफ करने व पैकिंग अपने स्तर पर ही करते हैं। किसान सोमवीर लोगों को घर पर ही 300 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से शहद उपलब्ध करवाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Mar 2024 10:32:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश के 10 हजार किसान होंगे लाभान्वित : मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार दे रही मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन | CM Ashok Gehlot किसानों को बी-कीपिंग किट तथा अन्य उपकरणों के लिए मिलेगा अनुदान | CM Ashok Gehlot जयपुर। राज्य सरकार (CM Ashok Gehlot) प्रदेश के किसानों को आय के नए स्रोत उपलब्ध करवाकर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में निरन्तर कार्य कर रही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ten-thousand-farmers-of-the-state-will-be-benefited/article-49700"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/ashok-gehlot2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">राज्य सरकार दे रही मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन | CM Ashok Gehlot</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong> किसानों को बी-कीपिंग किट तथा अन्य उपकरणों के लिए मिलेगा अनुदान | CM Ashok Gehlot</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर।</strong> राज्य सरकार (CM Ashok Gehlot) प्रदेश के किसानों को आय के नए स्रोत उपलब्ध करवाकर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में निरन्तर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को अनुदान, किट एवं प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने हेतु 25.67 करोड़ रूपए के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री (CM Ashok Gehlot) के इस निर्णय से प्रदेश के भरतपुर, श्रीगंगानगर, अलवर, धौलपुर सहित विभिन्न जिलों के 10 हजार किसान लाभान्वित होंगे। प्रस्ताव के अनुसार, 2500 किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रति किसान 50 मधुमक्खी बॉक्स एवं 50 मधुमक्खी कॉलोनी हेतु लागत राशि का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, प्रति किसान एक बी-किपिंग किट के लिए अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अतिरिक्त 7500 किसानों को मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा मधुक्रान्ति पोर्टल पर मधुमक्खी पालक के रूप में उनका पंजीकरण किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों को प्रशिक्षण, अनुदान व किट उपलब्ध करवाने के लिए राशि किसान कल्याण कोष से उपलब्ध करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से एक ओर जहां प्रदेश में मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन मिलेगा वहीं इस लाभकारी व्यवसाय से जुड़ने से किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि गहलोत द्वारा इस संबंध में वर्ष 2023-24 के बजट में घोषणा की गई थी। इस घोषणा की क्रियान्विति में यह मंजूरी दी गई है। Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सीएम की कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, महंगाई भत्ते में किया इजाफा" href="http://10.0.0.122:1245/cm-increased-dearness-allowance-of-employees/">सीएम की कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, महंगाई भत्ते में किया इजाफा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ten-thousand-farmers-of-the-state-will-be-benefited/article-49700</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 17:05:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों को मधुमक्खी पालन रास तो आ रहा, पर कम भाव से मायूसी</title>
                                    <description><![CDATA[किसान बोले : शहद को भावंतर योजना में शामिल करना चाहिए | (Bee keeping) 85 प्रतिशत अनुदान दे रही सरकार ओढां, राजू। किसानों ने खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन (Bee keeping) को विकल्प के रूप में चुना था। वहीं सरकार की ओर से भी इस व्यवसाय पर अच्छा अनुदान दिया जाता है। ये व्यवसाय किसानों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-are-enjoying-beekeeping-but-disappointed-due-to-low-price/article-49157"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/jind.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किसान बोले : शहद को भावंतर योजना में शामिल करना चाहिए | (Bee keeping)</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:left;"><strong>85 प्रतिशत अनुदान दे रही सरकार</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां, राजू। </strong>किसानों ने खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन (Bee keeping) को विकल्प के रूप में चुना था। वहीं सरकार की ओर से भी इस व्यवसाय पर अच्छा अनुदान दिया जाता है। ये व्यवसाय किसानों को रास तो आ रहा है, लेकिन इस समय शहद के भाव कम होने के चलते उनके चेहरे पर मायूसी देखी जा रही है। भाव के इंतजार में व्यवसायियों ने शहद का स्टॉक कर रखा है, लेकिन आर्थिक स्थिति के चलते अधिक समय तक स्टॉक कर पाना उनके लिए मुश्किल है। Bee keeping</p>
<p style="text-align:justify;">मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करने वाले किसानों का कहना है कि अगर सरकार शहद को अन्य फसलों की भांति भावंतर योजना के अंतर्गत लेती है तो उनका यह व्यवसाय चलता रहेगा। किसानों का कहना है कि शहद के दाम लागत मूल्य से अधिक 200 रुपये प्रति किलो होने चाहिए। इसके अलावा मिलावटी शहद पर रोक लगाई जाए, चाइना से आयतित सिरप या भारत में तैयार होने वाली सिरप पर प्रतिबंध लगाया जाए, सरसों के शहद को मिड-डे-मील योजना में शामिल किया जाए तथा मधुमक्खी पालकों को क्रेडिट कार्ड सुविधा दी जाए। Bee keeping</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूपी व दक्षिणी राजस्थान मेंं ले जा रहे बॉक्स:-</h3>
<p style="text-align:justify;">इस समय हरियाणा-पंजाब में मधुमक्खियों का आॅफ सीजन है। ऐसे में मक्खियों को बचाने के लिए व्यवसायियों को मक्खियों के डिब्बों को यूपी व दक्षिणी राजस्थान में ले जाना पड़ रहा है। वहां इस समय तिल व बाजरे की खेती है। वहां पर 2 माह रखने के बाद वापस आ जाएंगे। उस समय बेरी के वृक्षों पर फूल आ जाएंगे। इसके अलावा उन्हें सीजन के हिसाब से डिब्बों को अलग-अलग राज्यों में ले जाना पड़ता है। लेकिन इस समय शहद के भाव में मंदी के चलते मधुमक्खी पालक मधुमक्खियों को बचाने के लिए चीनी की फीड से जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। अगर शहद के भाव की बात करें तो हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी व महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में कहीं भी 60-70 रुपये किलो से अधिक भाव नहीं है। ऐसे में किसानों को लागत मूल्य भी वापस आता दिखाई नहीं दे रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्टॉक तो कर रखा है, लेकिन भाव नहीं:-</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव चोरमारखेड़ा निवासी जगसीर सिंह रुहल ने ये व्यवसाय करीब 10 वर्ष पूर्व शुरू किया था। उसका कहना है कि पिछली बार कच्चे शहद के दाम 160 रुपये थे, लेकिन इस बार रेट काफी कम है। उसने बताया कि इस समय शहद का स्टॉक भी कर रखा है, लेकिन अगर मौजूदा रेट पर शहद बेचते हैं तो उनका लागत खर्च भी पूरा नहीं होगा। जो जमा हुआ शहद है उसका रेट कम होने के कारण बिका नहीं तथा जो तरल शहद है वो इस बार बिल्कुल भी नहीं निकला। यही कारण है कि उनकी स्थिति कमजोर है।</p>
<p style="text-align:justify;">जगसीर सिंह ने बताया कि व्यवसायियों ने कोल्ड स्टोर में शहद का भंडारण कर रखा है। उसका खर्च भी पड़ रहा है। वहीं गांव नुहियांवाली निवासी जोनी रोज ने 6 वर्ष पूर्व यह व्यवसाय शुरू किया था। उसके मुताबिक उसने इस व्यवसाय में पहले तो अच्छा मुनाफा था, लेकिन इस बार काफी मंदी है। उसने इस समय तकरीबन 40 क्विंटल के आसपास शहद का स्टॉक कर रखा है। इसके अलावा धर्मवीर व सुभाष सहित अन्य व्यवसायियों ने भी व्यवसाय पर मंदी की मार बताते हुए सरकार से मदद की गुहार लगाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय पर योजना चलाई है। इसके तहत 50 डिब्बों पर 85 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। ओढां खंड में करीब 50 किसान यह व्यवसाय कर रहे हैं। किसानों का इस ओर रुझान बढ़ रहा है। क्योंकि इसके लिए किसानों को स्वयं की भूमि की जरूरत नहीं हैं और दूसरा इसमें खर्च भी कम है। सर्दी के मौसम में शहद के दामों में बढ़ोतरी आती है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>महावीर प्रसाद, उद्यान विकास अधिकारी (ओढां)। </strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2023 14:43:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मधुमक्खी पालन शुरू कर राज कुमार कमा रहा 14 लाख सालाना</title>
                                    <description><![CDATA[Bee keeping
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/rajkumar-started-earning-1-4-million-a-year-from-beekeeping/article-21760"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/beekeeping.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>मधुमक्खी पालन ने बदली एक छोटे किसान की तस्वीर (Bee keeping)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा अबोहर।</strong> अबोहर विधानसभा क्षेत्र के गांव पंजकोसी के प्रगतिशील किसान राजिन्द्र कुमार उर्फ राजू घोड़ेला ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय कर न केवल लाखों की आमदनी ली है, बल्कि अपने जीवन स्तर में भी सुधार किया है। यह किसान दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बना हुआ है। पढ़ाई में ग्रेजुएट इस किसान ने बताया कि 5 एकड़ की खेती के साथ-साथ मधुपालन के लिए उसने सन्न 2006 में 10 बक्से खरीदे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आज वे तकरीबन 1250 बक्सों से 14 लाख रुपये सालाना कमा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">एक किसान से सफल व्यवसायी बन चुके राजू घोड़ेला ने बताया कि उनके इस व्यवसाय से जिलेभर के अन्य कई किसान प्रेरणा लेकर इस व्यवसाय में अपना हाथ आजमा रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जब कोई उनके इस व्यवसाय को देखता है तो हर कोई मधुमक्खी पालन की बारिकियों की जानकारी ले रहा है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मधुमक्खी पालन से शहद ही नहीं अन्य चीजों से भी ली जा रही आमदनी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">किसान राजिन्द्र कुमार का कहना है कि अमूमन किसान मधुमक्खी पालन सेसिर्फ शहद का ही व्यवसाय कर पा रहा है। उसके अनुसार इससे शहद के अलावा भी अन्य चीजें प्राप्त कर व्यवसाय में दोहरा लाभ कमा रहा है। उसने बताया कि मक्खियों के बक्सों को विभिन्न स्थानों पर सीजन के मुताबिक ले जाना पड़ता है। <strong> (Bee keeping) </strong>जैसे मार्च-अप्रैल में श्रीमुक्तसर साहिब, अमृतसर के क्षेत्र में सफेदा, टाली, बरसीम आदि के लिए व मई जून के माह में सूरजमुखी की भरपूर पैदावार होने के चलते और साथ ही जून-जुलाई व अगस्त माह में पहाड़ी क्षेत्रों जिनमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और साथ ही अगस्त माह में भरतपुर, अलवर, रेवाड़ी में बाजरे की भरपुर पैदावार के चलते इसके अलावा बाकी शेष बचे माह में अपने क्षेत्र में हो रही फसलों जैसे सरसों इत्यादि जगहों पर जाना पड़ता है ताकि शहद और पालन के उत्पादन में कई गुणा बढ़ोतरी की जा सके।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सीजन के मुताबिक एक बक्सा करीबन 3 हजार औसत के चलते कमाई देता है।</li>
<li style="text-align:justify;">शहद के अलावा भी मधुमक्खियों से सात प्रकार की कमाई कर सकते हैं, जिसमें पोलन, परिपोलिस, वैक्स, मक्खी जहर, रॉयल जैली आदि प्राप्त कर आमदनी में वृद्धि की जा सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">वह भी इन चीजों का व्यवसाय कर सालाना 14 लाख करीबन कमाई कर रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके साथ खुद व्यवसाय शुरू कर अन्यों को भी रोजगार प्रदान कर रहा है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बी पॉलन बहुत उपयोगी, शहद से भी दोगुनी आमदन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">राजू घोड़ेला ने बी पॉलन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जिस प्रकार से शहद का व्यवसाय मधुपालन से होता है। ठीक उसी तरह दूसरी ओर से इनसे बी पॉलन भी प्राप्त किया जाता जोकि अच्छे भाव में बिकता है और उसके फायदों के बारे में अभी भी बहुत कम लोग जानते हैं। बी पॉलन मधुमक्खियों द्वारा इकठ्ठा किया गया फूलों के परागकण का ढेर होता है, वैसे ये उनके आहार के रूप में काम आता है। इसमें उनके बताए अनुसार लगभग 100 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है और इसके अलावा इसमें पोषक तत्वों की मात्रा काफी ज्यादा होती है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसका सेवन इन्सानों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।</li>
<li style="text-align:justify;">यह इन्फ्लेमेशन कम करने में मददगार, मांसपेशियों की मजबूती, एंटी-आॅक्सीडेंट से भरपूर, इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार, ट्यूमर से बचाव, जले हुए घाव को ठीक करता हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके इलावा बॉडी ग्रोथ के लिए बहुत लाभकारी होता है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>रानी होती है, इनके परिवार की मुख्य सदस्य</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मधुमक्खियां भी एक परिवार की तरह काम करती है। एक बक्से में इनके परिवार में एक रानी होती है और उसका जो आकार होता है वो अन्य मक्खी से काफी बड़ा होता है। क्योंकि उसके उदर में अंडे भरे होते है। वो केवल अपने बक्से में ही रहती है, अपने जीवनकाल में एक बार उड़ान भरती है। जब उसको निषेचन की जरूरत पड़ती है। इसमें नर सदस्य होते है, इनका भी काम खाना होता है और निषेचन करना होता है। इनके परिवार में सबसे बड़ा काम है, वो श्रमिक मक्खियों का होता है। इनके उम्र के हिसाब से इनके कार्य का अलग-अलग विभाजन होता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">यह पहरेदारी का काम करती है।</li>
<li style="text-align:justify;">अपने छत्तों का निर्माण करती है और बाहर से जाकर जो पराग और पुष्परस है, उसको इकट्ठा करके ले आती है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस तरह से इनका काम विभाजित होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस तरह इनके सामाजिक संगठन को अच्छी तरह समझा जा सकता है और मधुमक्खियों के बारे में यह कहा जाता है कि इनकी बड़ी रहस्यमयी दुनिया है।</li>
</ul>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Feb 2021 15:57:45 +0530</pubDate>
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