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                <title>disease - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जीका का कहर</title>
                                    <description><![CDATA[गत 22 सितम्बर को जयपुर में जीका से पीड़ित एक मरीज सामने आया। अब तक कुछ दिनों के ही भीतर मरीजों की संख्या 50 तक पहुंच गई। बीमारी की भयानकता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जागरूकता नाम का कोई अभियान नजर नहीं आ रहा। महानगरों, बड़े शहरों में बढ़ते 80 प्रतिशत लोगों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/jika-disease/article-6321"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/jjika.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गत 22 सितम्बर को जयपुर में जीका से पीड़ित एक मरीज सामने आया। अब तक कुछ दिनों के ही भीतर मरीजों की संख्या 50 तक पहुंच गई। बीमारी की भयानकता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जागरूकता नाम का कोई अभियान नजर नहीं आ रहा। महानगरों, बड़े शहरों में बढ़ते 80 प्रतिशत लोगों को इस बीमारी की जानकारी ही नहीं है, गांवों की बात तो अभी दूर की है। जीका एक भयानक बीमारी है, जो एडीज मच्छरों से फैलता है। आंखों में जलन, सिरदर्द, जोड़ों-मासपेशियों में दर्द होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीमारी से लकवा व मौत होने की संभावना होती है। गर्भ में बच्चे पर इसका खतरनाक प्रभाव होता है, जिससे बच्चों का दिमाग अधूरा विकसित होता है। सब से चिंताजनक बात यह है कि 70-80 प्रतिशत मामलों की पहचान ही नहीं होती। इन हालातों में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है क्योंकि जीका के वायरस से बचने के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बन सकी। उधर डेंगू के बुखार का जोर है, जिससे स्पष्ट है कि बारिश के बाद मच्छरों की पैदायश रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के डेंगू के कुल मरीजों में से 42 मरीज केवल जयपुर से ही संबंधित हैं। यदि जयपुर राजधानी का यह हाल है तो छोटे शहर जो पानी की निकासी व कूड़े की समस्या से घिरे हुए हैं उनका क्या हाल होगा। हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा यहीं से ही लगाया जा सकता है कि सन 2006 में डेंगू की शुरूआत भी देश की राजधानी दिल्ली से हुई थी। राजस्थान में चुनाव का बुखार जोरों पर है इसीलिए सरकार के नुमायंदों को लोगों के डेंगू या जीका के कारण हो रहे बुखार की चिंता कम ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में जीका के पहले तीन केस 2017 में गुजरात के अहमदाबाद में मिले थे। उस वक्त उम्मीद थी कि स्वास्थ्य प्रबंधों पर हजारों-अरबों रुपए खर्च करने वाली केंद्र व राज्य सरकारें बीमारी का सामना करने के समर्थ होंगी किंतु जीका तो क्या रोकना था डेंगू, चिकनगुणिया, मलेरिया जैसी बीमारी से निजात नहीं मिली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जीका के संबंध में अलर्ट तो 2016 में ही जारी कर दिया था और एक समिति गठित कर बीमारी पर नजर रखने के लिए कहा था लेकिन बहुत कुछ घोषणाओं तक ही सीमित था। सरकार जमीनी स्तर तक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाए और बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूक अभियान चलाए।</p>
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<p>Jika, Disease</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 10:22:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>तेज रफ्तारी, जिंदगी पर भारी, यमराज से मिलने की तैयारी&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रैफिक नियमों को ताक पर रख युवा कर रहे मौत की सवारी | Fast Speed सच कहूँ-प्रदीप दलाल/कैथल। चंद सैकिंड़ों की तेजी (Fast Speed) लाखों लोगों की जिंदगी पर ब्रेक लगा देती है। जितनी मौतें प्राकृतिक आपदा और बीमारी से नहीं होती उससे कहीं अधिक मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हो रही हैं। हालांकि सड़कों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/fast-speed/article-4435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/accident-5.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ट्रैफिक नियमों को ताक पर रख युवा कर<br />
रहे मौत की सवारी | Fast Speed</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ-प्रदीप दलाल/कैथल।</strong> चंद सैकिंड़ों की तेजी <strong>(Fast Speed)</strong> लाखों लोगों की जिंदगी पर ब्रेक लगा देती है। जितनी मौतें प्राकृतिक आपदा और बीमारी से नहीं होती उससे कहीं अधिक मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हो रही हैं। हालांकि सड़कों पर ट्रैफिक को लेकर संकेत भी अंकित है लेकिन तेज रफ्तारी मौत की सवारी बनती जा रही है। जिस कारण न जाने कितने ही परिवार जीते जी मर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे विश्व मे सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में भारत देश पहले पायदान पर है। जो बड़ी चिंता का विषय है। तेज रफ्तार के अलावा, शराब व अन्य नशे का सेवन, ट्रैफिक नियमों का पालन न करना और लापरवाही दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। सड़क दुर्घटनाओं का शिकार ऐसे लोग भी हो रहे हैं जो वाहनों को कम स्पीड में चलाते हैं लेकिन दूसरों की तेज स्पीड उनकी जिंदगी पर भी ब्रेक लगा देती है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">तेज रफ्तार से 62.2 फीसदी हादसे | Fast Speed</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">62.2 फीसदी सड़क हादसे तय सीमा से अधिक या बहुत अधिक गति से वाहन चलाने के कारण हुए।</li>
<li>सबसे अधिक 61 फीसदी मौतें भी इसी कारण से हुईं। 4.2 फीसदी हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने से हुए।</li>
<li>अधिकतर पुलिसकर्मी भी नहीं करते ट्रैफिक नियमों का पालन</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">कैथल में सैंकड़ों लोग सड़क दुर्घटना में खो चुके अपनी जिंदगी | Fast Speed</h2>
<p style="text-align:justify;">कैथल जिले में 2017 में सड़क दुर्घटना के 361 केस दर्ज हुए। जिनमें 173 लोगों की मृत्यु हो गई और 340 घायल हुए। जबकि 2018 में मई तक के सरकारी आंकड़े 146 केस रजिस्टर किए गए। जिनमें 76 लोगों की मृत्यु जबकि 112 घायल हुए। यह आंकड़े तो वो आंकड़े हैं जो रजिस्टर हैं। जबकि आंकड़ों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है। ट्रैफिक एसएचओ मनदीप कुमार ने बताया कि ट्रैफिक नियमों की पालना को लेकर लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वाले लोगों के चालान काटे जा रहे हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">छोटे बच्चे भी कर रहे हैं मौत की सवारी | Fast Speed</h1>
<p style="text-align:justify;">अभिभावक अपने बच्चों को दोपहिया वाहनों की चाबी देते हुए यह नहीं सोचते कि ऐसा करके वह अपने लाडले को मौत के मुंह में भेज रहे हैं। स्कूली बच्चों द्वारा की जा रही बेधड़क ड्राइविंग के कारण सड़क दुर्घटनाओं के मामले में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसी स्थिति में सजा किसे मिलनी चाहिए, आरटीओ, यातायात विभाग या फिर पैरेंट्स को।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकांश लोगों का मानना है कि बच्चों को गाड़ी की चॉबी थमाने वाले अभिभावक ही इसके मुख्य दोषी हैं। लिहाजा, ऐसे वाहन मालिकों के लाईसेंस निरस्त कर उन पर जुर्माना लगाना चाहिए, तभी स्थिति सुधर सकती है।</p>
<h2>दुर्घटनाओं से बचाएंगे ये उपाय | Fast Speed</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ड्राइविंग शुरू करते समय तनाव में ना रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">अपने दिमाग में चल रही परेशानियां दुर्घटना का कारण बन सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">सकारात्मक सोच रखना बहुत जरुरी है।</li>
<li style="text-align:justify;">कही भी जाने से पहले अपने वाहन को अच्छे से चेक कर ले कि उसमे कोई दिक्कत तो नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">ड्राईविंग के समय कार के ब्रेक गियर को सावधानी से लगाए।</li>
<li style="text-align:justify;">कार को रिवर्स करने के लिए पहले कार को पूरी तरह से रोके।</li>
<li style="text-align:justify;">आबादी वाले इलाकों में भी कम स्पीड में ही कार चलाए।</li>
<li style="text-align:justify;">कार में ड्राइविंग करते समय आरामदायक स्थिति में शरीर को रखें जिससे हाथ, कमर घुटनों पर तनाव ना हो।</li>
<li style="text-align:justify;">शराब व नशे का सेवन कर वाहन न चलाए।</li>
</ul>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/fast-speed/article-4435</link>
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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 18:47:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा : मलेरिया व स्वाइन फ्लू ने डराया</title>
                                    <description><![CDATA[भयावह। ढ़ाई हजार से ज्यादा मलेरिया तो 67 स्वाईन फ्लू के मरीज आए सामने चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। बीमारियों के सीजन में नूंह और यमुनानगर को जहां मलेरिया ने अपनी गिरफ्त में ले रखा है, वहीं अब स्वाईन फ्लू के मरीजों ने सेहत महकमे की धड़कनें बढ़ाकर रख दी हैं। चिंता की बात यह है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/danger-of-malaria-and-swine-flu-in-haryana/article-3082"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/swine-flu.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">भयावह। ढ़ाई हजार से ज्यादा मलेरिया तो 67 स्वाईन फ्लू के मरीज आए सामने</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)।</strong> बीमारियों के सीजन में नूंह और यमुनानगर को जहां मलेरिया ने अपनी गिरफ्त में ले रखा है, वहीं अब स्वाईन फ्लू के मरीजों ने सेहत महकमे की धड़कनें बढ़ाकर रख दी हैं। चिंता की बात यह है कि साफ सुथरे कहे जाने वाले पंचूकला जिलों में सबसे ज्यादा केस स्वाईन फ्लू के सामने आ रहे हैं। प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग मान रहा है कि अभी तक स्वाईन फ्लू के 67 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा मरीज पंचकूला व फरीदाबाद जैसे जिलों में है। अभी तक एक भिवानी में एक बुजुर्ग की मौत भी हो चुकी है। जबकि बाकी जिलों में स्वाईन फ्लू के औसतन एक-एक दो-दो मरीज भी सामने आ रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वाईन फ्लू के मरीजों को अन्य मरीजों से अलग रखने के निर्देश</h3>
<p style="text-align:justify;">डायरेक्टर मलेरिया डाक्टर सूरजभान कांबोज और डिप्टी डायरेक्टर डाक्टर अपराजिता ने बताया कि राज्य के अंदर अभी तक 67 स्वाईन फ्लू के मरीजों की पुष्टि हुई है। इसमें पंचूकला और फरीदाबाद को छोड़कर बात करें, तो सभी में एक-एक दो-दो मरीज हैं। पंचकूला में अभी 19स्वाईन फ्लू के मरीजों की पुष्टि हुई है। वहीं दूसरी फरीदाबाद में 21 मरीज पाए गए हैं। अंबाला में दो, भिवानी चार फतेबाहाद में एक, हिसार में आठ, कैथल करनाल में दो-दो, कुरुक्षेत्र व पलवल में एक एक मरीज स्वाईन फ्लू के सामने आए हैं। इसी तरह से रेवाडी में एक, सरसा में दो, यमुनानगर में तीन सामने आए हैं। बहरहाल, पंचकूला और एनसीआर में मरीजों की ज्यादा संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के हाथ पैर फूले हुए हैं। ज्यादा प्रभावित जिलों में टीमें लगाकर अलग से वार्ड आदि की व्यवस्था की गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नूंह में सबसे ज्यादा 1285 मलेरिया मरीज</h2>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मुख्यालय से लिये गए ब्योरे पर नजर डालें तो मलेरिया के 2162 मरीज सामने आ चुके हैं। इस बार नूंह में सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं। यहां पर संख्या 1285 पहुंच गई है। पलवल में भी हालात ठीक नहीं है, यहां पर 208 को मलेरिया कनफर्म हो चुका है। यमुनानगर में 160 मरीज मिले हैं। पंचकूला में 107 मरीज मलेरिया के सामने आ चुके हैं। अंबाला में 11 व भिवानी में 20, फरीदाबाद में 60 मरीज जबकि फतेहाबाद में 26 मरीज मलेरिया के पाए गए हैं। गुरुग्राम में इस बार अभी 13 मरीज दर्ज हुए हैं। हिसार में 58, झज्जर में 31 मामले, जींद में 12, कैथल में 7 जबकि करनाल में 57 मामले, कुरुक्षेत्र 25, महेंद्रगढ़ में 8 पानीपत में 18, रेवाडी 7 रोहतक में 28, सिरसा 21 मरीजों की पुष्टि हो चुकी हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अभी तक दस मामले डेंगू के</h2>
<p style="text-align:justify;">डेंगू के मामले देखें तो इस बार गुरुग्राम में छह मामले सामने आए हैं। अंबाला भिवानी और हिसार, जींद सभी जिलों में एक-एक मरीज की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को इस बार एक बात का संतोष है कि गत वर्ष अगस्त की शुरूआत में जितने मरीज थे, उतने इस बार सामने नहीं आ रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सभी जिलों से रोजाना ली जा रही है रिपोर्ट</h2>
<p style="text-align:justify;">मलेरिया नियंत्रण विभाग हरियाणा निदेशक सूरजभान कांबोज और उपनिदेशक डाक्टर राजेश ख्यालिया ने बताया कि राज्य के सभी जिलों से रोजाना रिपोर्ट ली जा रही हैं। दवाएं और स्पेशल वार्ड आदि का इंतजाम भी किया गया है। लोगों को जनजागरण के द्वारा भी बीमारियों के बारे में बचकर रहने की अपील की जा रही है। टीमों ने घर-घर जाकर पुराने हटाने, कूलर आदि चेक करने के साथ ही सभी से मलेरिया, डेगूं आदि को लेकर जागरुक रहने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 08:25:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेशभर में खुलेंगे 55 नए स्वास्थ्य केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)। चालू वित्तवर्ष के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में 55 स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र स्थापित किये जाएंगे। इन केन्द्रों को नई बीमारियों की रोकथाम हेतू उपचार एवं प्रबंधन के लिए विशेष तौर पर तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि ये केन्द्र सरकार के सहयोग से बनाये जाएंगे, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/55-new-health-centers-will-opened-across-the-state/article-2887"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/hospital.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> चालू वित्तवर्ष के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में 55 स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र स्थापित किये जाएंगे। इन केन्द्रों को नई बीमारियों की रोकथाम हेतू उपचार एवं प्रबंधन के लिए विशेष तौर पर तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि ये केन्द्र सरकार के सहयोग से बनाये जाएंगे, जिनमें लोगों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवायी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन केन्द्रों के निर्माण हेतू स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 572.13 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। इन केन्द्रों को 1.20 लाख की आबादी पर खोला जाएगा, जिससेक्षेत्र के 25 से 30 उपकेन्द्र संबंधित होंगे। इन केन्द्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा नागरिक अस्पतालों से जोड़ा जाएगा। इनमें गुणवत्तापरकप्रजनन, स्वास्थ्य देखभाल, संचारी रोगों का प्रबंधन, ई.एन.टी., नेत्र रोग, दंत रोग तथा मानसिक रोगों की जांच एवं उपचार की सुविधा होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तकनीकी संस्थानों में 15 तक ले सकते हैं दाखिला</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के सभी तकनीकी शैक्षिक संस्थानों / विश्वविद्यालयों / पॉलिटेक्निक में वर्ष 2017-18 हेतु दाखिला के लिए अंतिम तिथि 15 अगस्त है। इसके बाद किसी भी दाखिले को वैध नहीं माना जाएगा। हरियाणा राज्य तकनीकी शिक्षा समिति के प्रवक्ता ने बताया कि सत्र 2017-18 के लिए तकनीकी शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश के लिए 15 अगस्त अंतिम तिथि है। इस प्रकार इन पाठ्यक्रमों में सभी प्रवेश, सभी परिस्थितियों में और किसी भी अपवाद के बिना 15 अगस्त तक पूर्ण किए जाने चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिशु देखभाल संस्थान खोलने के लिए मांगे आवेदन</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग ने वर्ष 2017-18 के लिए समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत सभी जिलों में शिशु देखभाल संस्थान (सीसीआई) खोलने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि केवल ऐसे संस्थान या व्यक्ति, जो अनाथ, बेसहारा बच्चों और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए सीसीआई खोलने में रूचि रखते हैं, वे अपने-अपने जिलों में जिला बाल सरंक्षण अधिकारी को 31 अगस्त तक आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 09:47:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोग भगाये, सौंदर्य बढ़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[खीरा ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही बाजारों में खीरे व ककड़ी की बहार आ जाती है। खीरे का सेवन भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक किया जाता है। खीरा देश के हर भाग में उपलब्ध है। पहाड़ों में इसका आकार बड़ा होता है। खीरा सुपाच्य, शीतल व तरावट से भरपूर होता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/disease-away-enhance-beauty/article-2356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/beauty.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">खीरा</h2>
<p style="text-align:justify;">ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही बाजारों में खीरे व ककड़ी की बहार आ जाती है। खीरे का सेवन भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक किया जाता है। खीरा देश के हर भाग में उपलब्ध है। पहाड़ों में इसका आकार बड़ा होता है। खीरा सुपाच्य, शीतल व तरावट से भरपूर होता है। खीरे की तासीर ठंडी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">खीरा व ककड़ी एक ही प्रजाति के फल हैं। खीरे में विटामिन बी व सी, पोटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि विद्यमान होते हैं। खीरा कब्ज से मुक्ति दिलाता है। खीरे में जल का अंश बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसलिए बार-बार प्यास लगने पर इसका सेवन हमें प्यास में राहत पहुंचाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जो लोग मोटापे से परेशान रहते हैं, उन्हें सवेरे इसका सेवन करना चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">पेट की गैस, एसिडिटी, छाती की जलन में नियमित रूप से खीरा खाना लाभप्रद होता है। जो लोग मोटापे से परेशान रहते हैं, उन्हें सवेरे इसका सेवन करना चाहिए। इससे वे पूरे दिन अपने आपको फ्रेश महसूस करेगें। खीरा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खीरे को भोजन में सलाद के रूप में अवश्य लेना चाहिए। नमक, काली मिर्च व नींबू डालकर खाने से भोजन आसानी से पचता है व भूख भी बढ़ती है। कील मुंहासों, धब्बों व झाइयों पर खीरे का रस लगाना लाभप्रद होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आंखों के नीचे काले घेरे बन गए हैं तो खीरे के गोल-गोल टुकड़े काट कर आंखों पर रखें। इससे आंखों को भी ठंडक मिलेगी व कालापन भी दूर होगा। खीरे के रस में दूध, शहद व नींबू मिलाकर चेहरे व हाथ पैर पर लगाने से त्वचा मुलायम व कांतिवान हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप यदि उदर विकार से परेशान हैं तो दही में खीरे को कसकर, उसमें पुदीना, काला नमक, काली मिर्च, जीरा व हींग डालकर रायता बनाकर खाएं। आराम मिलेगा।  घुटनों के दर्द को भी दूर भगाता है खीरे का सेवन।</p>
<p style="text-align:justify;">घुटनों के दर्द वाले व्यक्ति को खीरे अधिक खाने चाहिए तथा साथ में एक लहसुन की कली भी खा लेनी चाहिए। पथरी के रोगी को खीरे का रस दिन में दो तीन बार जरूर पीना चाहिए। इससे पेशाब में होने वाली जलन व रूकावट दूर होती हैं। खीरे के रस में नींबू मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के रंग में निखार आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">-शैली माथुर</p>
<h2 style="text-align:justify;">खीरे का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी बरतें</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>खीरा कभी भी बासी न खाएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जब भी खीरा खरीदें, यह जरूर देख लें कि वह कहीं से गला हुआ न हो।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>खीरे का सेवन रात में न करें। जहां तक हो सके, दिन में ही इसे खाएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>खीरे के सेवन के तुरंत बाद पानी न पिएं।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/disease-away-enhance-beauty/article-2356</link>
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 21:19:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निमोनिया से बचाएगी पीसीवी-13 वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द की जाएगी शुरुआत गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)। नौनिहालों को जानलेवा बीमारी निमोनिया से बचाने के लिए अब महंगी दवा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इस दवा के अभाव में किसी की जान न जाए। साथ में इस दवा के आने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट-खसोट से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/pcv13-vaccine-will-save-from-pneumonia/article-2263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/vaccine.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द की जाएगी शुरुआत</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)।</strong> नौनिहालों को जानलेवा बीमारी निमोनिया से बचाने के लिए अब महंगी दवा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इस दवा के अभाव में किसी की जान न जाए। साथ में इस दवा के आने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट-खसोट से भी लोग बच जाएंगे। खुद प्रशासनिक अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि निजी अस्पताल इस दवा की एक डोज तीन से साढ़े तीन हजार रुपए में लगाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए तीन डोज लगवानी जरूरी होती है। पीसीवी-13 नामक वैक्सीन को लेकर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग तत्परता से कार्य कर रहा है। यह दवा बच्चों को निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने में रामबाण का काम करेगी। पीसीवी-13 वैक्सीन के आने के बाद बच्चों को निमोकोकल बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाया जा सकता है, जोकि निमोनिया होने का मुख्य कारण होता है। यह वैक्सीन शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">निमोनिया भी हो सकती है मौत</h3>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक न्यूमोकोकल बैक्टीरिया कई बीमारियों में प्रमुख होता है। निमोनिया एक मरीज से दूसरे मरीज में फैल सकता है। निमोकोकल बैक्टीरिया से निमोनिया के अलावा दिमागी बुखार भी हो सकता है। यह बुखार आमतौर पर गर्दन में अकड़न और मानसिक भ्रम के साथ होता है जिससे दीर्घकालीन समस्याएं जैसे सुनाई न देना अथवा मृत्यु तक हो जाना आदि हो सकती है। इस बुखार के लक्षणों में बच्चे को बिना स्त्राव के कान दर्द शामिल हैं जिससे बार-बार होने वाले मामलों में श्रवण शक्ति समाप्त हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 01:36:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तम स्वास्थ्य के लिए टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[यूँ रहें स्वस्थ आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हम यहाँ दे रहे कुछ टिप्स जिन पर अमल करके आप अपने आपको चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं। सुबह-शाम ताजा भोजन करें। निश्चित समय पर भोजन करें। अनियमित भोजन से दूर रहें। पानी ज्यादा से ज्यादा पिएँ। रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले अवश्य कर लें। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/tips-for-better-health/article-2179"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/yoga.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">यूँ रहें स्वस्थ</h2>
<p style="text-align:justify;">आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हम यहाँ दे रहे कुछ टिप्स जिन पर अमल करके आप अपने आपको चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सुबह-शाम ताजा भोजन करें।</li>
<li style="text-align:justify;">निश्चित समय पर भोजन करें।</li>
<li style="text-align:justify;">अनियमित भोजन से दूर रहें।</li>
<li style="text-align:justify;">पानी ज्यादा से ज्यादा पिएँ।</li>
<li style="text-align:justify;">रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले अवश्य कर लें।</li>
<li style="text-align:justify;">खाना खाने के बाद 10 मिनट वज्रासन में अवश्य बैठें।</li>
<li style="text-align:justify;">केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।</li>
<li style="text-align:justify;">भोजन से पहले व तुरंत बाद पानी पीना हानिकारक है।</li>
<li style="text-align:justify;">गरिष्ठ, तले, मसालेदार, खटाईयुक्त भोजन से परहेज करें।</li>
<li style="text-align:justify;">अंकुरित अन्न, सलाद, सूप का समावेश भोजन व नाश्ते में अवश्य करें।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">
बरसात में बीमारी से बचाएंगे ये 5 पेय पदार्थ</h2>
<p style="text-align:justify;">बरसात के मौसम में बीमारियों का प्रकोप अधिक होता है और आसानी से इनकी चपेट में आ जाते हैं। इन 5 प्रकार के पेय पदार्थों का सेवन आपको बरसात की बीमारियों से बचा सकता है, जानिए-</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>1. गर्म पानी :</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे आसान और सुलभ तरीका है गर्म पानी पीना, जो गर्म होने पर कीटाणु रहित भी होता है पाचन व इम्यून पावर को दुरुस्त करता है, जिसे आप बीमारियों से बच सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. चाय :</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्रीन टी हो, ब्लैक टी या फिर अदरक और दालचीनी वाली गर्म चाय, आपको बारिश में बीमार पड़ने से जरूर बचा सकती हैं, इसलिए इनका सेवन करने से परहेज न करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">3 सूप :</h3>
<p style="text-align:justify;">सूप हमेशा से ही हेल्थ के लिए एक बेहतरीन विकल्प रहा है, इसलिए आप बेझिझक अपनी पसंद के गर्मागर्म सूप का सेवन करें, और बरसात में स्वस्थ रहें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4 दालचीनी का पानी:</h3>
<p style="text-align:justify;">दालचीनी को पानी के साथ उबालकर तैयार किए गए पानी का उपयोग बारिश के मौसम में आपको बीमारियों से बचाता है, तो यह एक अच्छा विकल्प है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5 तुलसी का काढ़ा –</h3>
<p style="text-align:justify;">बारिश में भीग चुके हैं, तो सर्दी लगना या बीमार पड़ना तय है। लेकिन तुलसी का काढ़ा आपको बीमार पड़ने से बचा सकता है। अप चाहें तो इसमें गुड़, अदरक या लौंग का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन मात्रा कम ही रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/tips-for-better-health/article-2179</link>
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 02:56:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश भर में डेंगू के 18,760 मामले सामने आए, केरल सबसे ज्यादा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। देश में इस साल अब तक डेंगू के 18,760 मामले सामने आए और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इनके मामलों में तेजी आने की एक वजह मानसून के जल्दी आने को बताया है। सबसे ज्यादा मामले केरल में दर्ज हुए जहां दो जुलाई तक 9,104 लोगों इस बीमारी से ग्रस्त पाए गए। दूसरे स्थान पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/18760-cases-of-dengue-appear-in-the-country-kerala-is-most-affected/article-1926"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/dengue.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> देश में इस साल अब तक डेंगू के 18,760 मामले सामने आए और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इनके मामलों में तेजी आने की एक वजह मानसून के जल्दी आने को बताया है। सबसे ज्यादा मामले केरल में दर्ज हुए जहां दो जुलाई तक 9,104 लोगों इस बीमारी से ग्रस्त पाए गए। दूसरे स्थान पर तमिलनाडु रहा जहां 4,174 लोगों में यह बीमारी पाई गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने यहां इस संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा के लिए बुलाई बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद नड्डा ने बताया कि हमने दो समीक्षाएं की, एक दिल्ली के लिए और दूसरी बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए। और मैं यह कह सकता हूं कि हम अपनी तैयारी से संतुष्ट हैं। हम इस मुद्दे पर पहले ही तीन वीडियो कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं और 13 परामर्श जारी कर चुके हैं। सचिव जल्द ही अन्य राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस करेंगे। सचिव मिश्रा ने कहा कि मानसून के पहले पहुंचने की वजह से केरल डेंगू, मलेरिया और ऐसी दूसरी बीमारियों की मार झेल रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">देशभर में चिकुनगुनिया के 10,952 मामले दज</h2>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक दो जुलाई तक, कर्नाटक में 1945 मामले, गुजरात में 616 मामले, आंध्र प्रदेश में 606 मामले और पश्चिम बंगाल में 469 मामले दर्ज किए गए। दिल्ली में दर्ज डेंगू के मामलों का आंकड़ा करीब 100 पहुंच रहा है। दो जुलाई तक देशभर में चिकुनगुनिया के 10,952 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 4047 मामले कर्नाटक में दर्ज किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/18760-cases-of-dengue-appear-in-the-country-kerala-is-most-affected/article-1926</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 06:28:14 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई में स्वाइन फ्लू से तीन और मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। मुंबई में स्वाइन फ्लू ने तीन और मरीजों की जान ले ली। इसी के साथ इस साल इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। नगर निकाय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीन मौतें पिछले हफ्ते वायु जनित बीमारी के कारण हुई। मुंबई में संक्रमण के कारण एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/three-more-deaths-in-mumbai-from-swine-flu/article-1570"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/swine-flu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई।</strong> मुंबई में स्वाइन फ्लू ने तीन और मरीजों की जान ले ली। इसी के साथ इस साल इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। नगर निकाय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीन मौतें पिछले हफ्ते वायु जनित बीमारी के कारण हुई। मुंबई में संक्रमण के कारण एक जनवरी से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मानसून के शुरूआत के साथ ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका इस बीमार के प्रसार को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। बीएमसी के एक बयान के मुताबिक, इस साल शहर में स्वाइन फ्लू के 285 मामलों की पुष्टि हुई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पुणे में 58 मौतें</h3>
<p style="text-align:justify;">पुणे में अब तक 58 मौतें हो चुकी हैं। नासिक में 30, औरंगाबाद में 20, अहमदनगर में 19 और नागपुर में 17 लोगों की मौत हुई है।इनके अलावा अमरावती, अकोला, बुल्धाना, कोल्हापुर, सोलापुर, सतारा, ठाणे, मुंबई, बीड़, लातूर समेत कई दूसरे जिलों में भी स्वाइन फ्लू से मौतें हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 05:39:59 +0530</pubDate>
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                <title>गर्मी के साथ बढ़ रहा ओजोन का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[खतरा: गर्म मौसम के साथ मिलकर विषैली गैसें बना रही कॉकटेल दमा व श्वसन जैसी बीमारियां हो सकती हैं उग्र सीएसई ने जारी की रिपोर्ट नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन के साथ अपरिहार्य बन चुकी तेज गर्मी और बढ़ते तापमान से घातक ओजोन प्रदूषण के खतरे बढ़ रहे हैं जिससे दमा और श्वसन संबंधी बीमारियां उग्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">खतरा: गर्म मौसम के साथ मिलकर विषैली गैसें बना रही कॉकटेल</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>दमा व श्वसन जैसी बीमारियां हो सकती हैं उग्र</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीएसई ने जारी की रिपोर्ट</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जलवायु परिवर्तन के साथ अपरिहार्य बन चुकी तेज गर्मी और बढ़ते तापमान से घातक ओजोन प्रदूषण के खतरे बढ़ रहे हैं जिससे दमा और श्वसन संबंधी बीमारियां उग्र रूप ले सकती हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था ‘सेंटर फार साइंस एंड एनवारयरमेंट’(सीएसई) ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्ट में कहा है कि वाहनों और उद्योगों से उत्सर्जित होने वाली विषैली गैसें गर्म तापमान में सूर्य की किरणों के साथ मिलकर जो ‘कॉकटेल’ बना रही है उससे ओजोन गैस के बनने में मदद मिल रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूरे देश में मंडरा रहा खतरा, ओजोन गैस में बढ़ोतरी</h3>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में केंद्र सरकार के विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीईसी) द्वारा किए गए नवीनतम शोध का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस बार प्रचंड गर्मी से पूरे देश और खासकर दिल्ली में ओजोन में काफी बढ़ोतरी हुई है। सीईसी का यह शोध 2016 की गर्मियों और 2017 के दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के प्रमुख निगरानी केन्द्र से ‘वास्तविक समय वायु गुणवत्ता’ के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कहा गया है कि ग्राउंड-लेवल ओजोन सीधे किसी भी स्रोत से नहीं निकलती, यह तब बनती है जब नाइट्रोजन के आक्साइड (एनओएक्स) और मुख्य रूप से वाहनों और अन्य स्रोतों से निकलने वाली विषैली गैसों की एक किस्म, सूर्य के प्रकाश में एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं। गर्म और स्थिर हवा में ओजोन का निर्माण बढ़ जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली व एनसीआर प्रदूषक तत्वों की गिरफ्त में</h3>
<p style="text-align:justify;">सीईसी की प्रदूषण निगरानी कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधरी के अनुसार दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र कई किस्म के प्रदूषक तत्वों की गिरफ्त में हैं। पर्टिक्युलेट मैटर की समस्या से निबटने का काम अभी पूरा भी नहीं हुआ है कि ओजोन के खतरे ने अपना सिर उठाना शुरू कर दिया है। समय रहते इससे निबटने की प्रभावी नीति नहीं बनाई गई तो यह खतरा भीषण रूप ले सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/dangers-of-ozone-growing-with-heat/article-877</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2017 06:28:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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