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                <title>Child Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Monkey and Crocodile: बंदर और मगर की मित्रता</title>
                                    <description><![CDATA[Monkey and Crocodile: बंदर और मगर दोनों बड़े पुराने मित्र थे पर उनकी मित्रता अधिक नहीं निभ पाई। हुआ यह कि एक दिन मगरनी की नीयत खराब हो गई। उसने सोचा कि बंदर मीठे-मीठे फल खाता है, इसलिए उसका कलेजा भी मीठा होगा। मगरनी की जिद्द पर मगर, बंदर को धोखा देकर अपनी पीठ पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/friendship-of-monkey-and-crocodile/article-87079"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/child-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Monkey and Crocodile: बंदर और मगर दोनों बड़े पुराने मित्र थे पर उनकी मित्रता अधिक नहीं निभ पाई। हुआ यह कि एक दिन मगरनी की नीयत खराब हो गई। उसने सोचा कि बंदर मीठे-मीठे फल खाता है, इसलिए उसका कलेजा भी मीठा होगा। मगरनी की जिद्द पर मगर, बंदर को धोखा देकर अपनी पीठ पर बैठा ले गया। लेकिन बंदर भी कम चालाक नहीं था। वह उसकी चालाकी समझ गया। बोला, ‘मगर भाई, भाभी मेरा कलेजा खाना चाहती है पर वह तो पेड़ पर ही रह गया। चलो तो ले आएं।’ मगर उसकी बातों में आ गया और उसको वापस ले आया। किनारे पर आते ही बंदर उछलकर पेड़ पर चढ़ गया। मगर मुंह देखता रह गया। Monkey and Crocodile</p>
<p style="text-align:justify;">धीरे-धीरे यह बात सारे जंगल में फैल गई कि मगर ने मित्र होकर बंदर की हत्या का प्रयत्न किया। सभी सुनकर बड़े दु:खी हुए। बंदर को स्वयं बड़ा आश्चर्य हुआ। वह किसी को मुंह दिखाने योग्य नहीं था क्योंकि वह मगर की बड़ी प्रशंसा किया करता था और किसी के मुंह से उसकी बुराई नहीं सुनता था। जब अन्य जानवर बंदर को चेतावनी देते थे तो वह उन्हें फटकार देता था। जानवर उसे कहते थे, ‘तुम ठहरे पेड़ों पर रहने वाले। वह पानी में रहता है। तुम्हारी और उसकी दोस्ती की क्या तुक?’ पर वह किसी कि एक न सुनता था। अब जानवरों की बात सत्य हो गई थी। इसलिए वह अंदर ही अंदर बहुत दु:खी था। अब बंदर के परिवार के सभी सदस्य मगर पर दांत किटकिटा रहे थे। वे मगर को कच्चा चबा जाना चाहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उसका बड़ा भाई हैवीवेट चैंपियन बब्बर तो आग बबूला हो गया था। उसे इतना गुस्सा आया कि उसने कूद-कूद कर पेड़ की कई डालियां तोड़ डालीं। मस्त कलंदर हाथी भला क्यों पीछे रहता? वह बोला, ‘अरे, मैंने तो पहले ही कहा था कि इस बदमाश मगर को मार डालो पर मेरी कोई सुने भी। इस मगर के बच्चे ने एक बार मेरा भी पैर पकड़ लिया था। तब इसने माफी मांग ली थी। मैंने भी उसे बंदर का दोस्त समझकर छोड़ दिया था, नहीं तो मजा चखा देता। चीलों और कौओं ने भी मगर की शिकायतें प्रस्तुत कीं। वन मानुषों का एक बड़ा गिरोह पूरी तैयारी के साथ मैदान में आ डटा। जंगल के सारे जानवर मगर से बदला लेने को तैयार हो गए। लेकिन यह देखकर सब हैरान थे कि बंदर मगर के लिए एक भी शब्द नहीं कह रहा था। एक वृद्ध वनमानुष ने बंदर से कहा, ‘लगता है, तुुम बहुत डर गए हो। हम तो तुम्हें पहले ही कहा करते थे कि मगर की जाति का कोई भरोसा नहीं पर तुम मानते ही नहीं थे। अब हम उसे मार डालेंगे।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘नाना, मैं डर के मारे चुप नहीं हूं। आप गलत समझ रहे हैं।’ ‘फिर चुप क्यों हो? बताओ तो, ‘नाना’ वनमानुष ने पूछा।’ ‘बात यह है, नाना कि मगर मेरा पक्का मित्र था और है। उस समय वह अपनी पत्नी की जिद्द के आगे मजबूर था, इसी कारण उसने ऐसा किया। फिर, हमें जैसे के साथ तैसा नहीं होना चाहिए वरना उसमें और हम में अंतर ही क्या रहेगा? दोस्ती उसने तोड़ी है, मैंने नहीं। मैं तो अभी भी उसे दोस्त समझता हूं। कभी उसे स्वयं अपने किए पर पछतावा होगा।’ ‘वाह, महात्माजी, धन्य हो, ‘हैवीवेट चैंपियन बब्बर ने व्यंग्य से कहा और वह उछल कूद मचाने लगा। ‘अरे, हम उसे मजा चखाकर छोड़ेंगे। सुन ले कान खोलकर। बड़ा आया दोस्त की दुम। हूं……’गैंडे ने अपना नथुना हिलाया। ‘उसके सारे पानी में जहर घोल देना चाहिए ताकि वह अंदर ही मर जाए, ‘लकड़बग्घे ने सुझाव दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">‘और जहर से पानी में सभी जीव जंतु मुफ्त में मारे जाएं। क्या कहने आप की अक्ल के। आप तो बिना बोले ही शोभा देते हो, ‘बंदर ने लकड़बग्घे को घुड़की दिखाई। ‘मैं तो तुम्हारे ही हित के लिए कहता हूं नहीं तो मुझे क्या पड़ी है? तुम जानो और मगर जाने, ‘लकड़बग्घा बोला। बंदर अभी भी मगर का पक्ष ले रहा था। वह नहीं चाहता था कि कोई मगर को कुछ कहे। वह सबको छोड़कर पेड़ पर चढ़ गया। सभी इस निश्चय पर पहुंचे कि बंदर का दिमाग खराब हो गया है और उसके ये आदर्श कभी उसकी मौत का कारण बनेंगे। उसकी भविष्य में कोई मदद नहीं करनी चाहिए। सभी जानवर अपने-अपने घरों को लौट गए। इसी तरह कई महीने गुजर गए। न मगर माफी मांगने आया और न बंदर उसे समझाने गया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन भयंकर आंधी तूफान और भूकंप आया। उस समय मगर पानी के तल में विश्राम कर रहा था। एक टीला हिला और एक चट्टान पानी में गिर पड़ी। किसी प्रकार मगर बचकर निकल आया और ऊपर आकर चिल्लाया, ‘बचाओ, बचाओ, मेरे बच्चे मर जाएंगे।’ शोर सुनकर सब जानवर एकत्र हो गए पर उसकी मदद के लिए कोई नहीं गया। यह बंदर से नहीं देखा गया। वह मगर की मदद के लिए दौड़ पड़ा। अब गैंडा और हाथी भी उसकी मदद के लिए पहुंच गए। बड़ी कठिनाई के बाद मगरनी और उसके बच्चों को बाहर निकाला गया और उनकी मरहम पट्टी की गई। मगर इस उपकार के लिए बंदर के चरणों में पड़ गया। आज उसे अपने किए पर बड़ा पछतावा हो रहा था और रह रहकर वो अपनी पत्नी को कोस रहा था। Monkey and Crocodile<br />
<strong>                                                                                                            – नरेंद्र देवांगन</strong></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 15:32:57 +0530</pubDate>
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                <title>Little Genius:- चिड़िया और किसान</title>
                                    <description><![CDATA[एक गाँव में एक किसान रहता था। उसका गाँव के बाहर एक छोटा सा खेत था। एक बार फसल बोने के कुछ दिनों बाद उसके खेत में चिड़िया ने घोंसला बना लिया। कुछ समय बीता, तो चिड़िया ने वहाँ दो अंडे भी दे दिए। उन अंडों में से दो छोटे-छोटे बच्चे निकल आये। वे बड़े […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-of-the-bird-and-the-farmer/article-49736"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/little-genius.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक गाँव में एक किसान रहता था। उसका गाँव के बाहर एक छोटा सा खेत था। एक बार फसल बोने के कुछ दिनों बाद उसके खेत में चिड़िया ने घोंसला बना लिया। कुछ समय बीता, तो चिड़िया ने वहाँ दो अंडे भी दे दिए। उन अंडों में से दो छोटे-छोटे बच्चे निकल आये। वे बड़े मजे से उस खेत में अपना जीवन गुजारने लगे। कुछ महीनों बाद फसल कटाई का समय आ गया। गाँव के सभी किसान अपने खेतों की फसल की कटाई में लग गए। अब चिड़िया और उसके बच्चों का वह खेत छोड़कर नए स्थान पर जाने का समय आ गया था। Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन खेत में चिड़िया के बच्चों ने किसान को यह कहते सुना कि कल मैं फसल कटाई के लिए अपने पड़ोसी से पूछूंगा और उसे खेत में भेजूंगा। यह सुनकर चिड़िया के बच्चे परेशान हो गए। उस समय चिड़िया कहीं गई हुई थी। जब वह वापस लौटी, तो बच्चों ने उसे किसान की बात बताते हुए कहा, माँ, आज हमारा यहाँ अंतिम दिन है। रात में हमें दूसरे स्थान के लिए यहाँ से निकलना होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया ने उत्तर दिया, ‘इतनी जल्दी नहीं बच्चो। मुझे नहीं लगता कि कल खेत में फसल की कटाई होगी।’ चिड़िया की कही बात सही साबित हुई। दूसरे दिन किसान का पड़ोसी खेत में नहीं आया और फसल की कटाई न हो सकी। शाम को किसान खेत में आया और खेत को जैसे का तैसा देख बुदबुदाने लगा कि ये पड़ोसी तो नहीं आया। ऐसा करता हूँ कल अपने किसी रिश्तेदार को भेज देता हूँ।’ Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया के बच्चों ने फिर से किसान की बात सुन ली और परेशान हो गए। जब चिड़िया को उन्होंने ये बात बताई, तो वह बोली, ‘तुम लोग चिंता मत करो। आज रात हमें जाने की जरूरत नहीं है। मुझे नहीं लगता कि किसान का रिश्तेदार आएगा।’ठीक ऐसा ही हुआ और किसान का रिश्तेदार अगले दिन खेत नहीं पहुँचा। चिड़िया के बच्चे हैरान थे कि उनकी माँ की हर बात सही हो रही है। अगली शाम किसान जब खेत आया, तो खेत की वही स्थिति देख बुदबुदाने लगा कि ये लोग तो कहने के बाद भी कटाई के लिए नहीं आते है। कल मैं खुद आकर फसल की कटाई शुरू करूंगा।</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया के बच्चों ने किसान की ये बात भी सुन ली। अपनी माँ को जब उन्होंने ये बताया तो वह बोली, ‘बच्चो, अब समय आ गया है ये खेत छोड़ने का। हम आज रात ही ये खेत छोड़कर दूसरी जगह चले जाएंगे।’ दोनों बच्चे हैरान थे कि इस बार ऐसा क्या है, जो माँ खेत छोड़ने को तैयार है। उन्होंने पूछा, तो चिड़िया बोली, ‘बच्चो, पिछली दो बार किसान कटाई के लिए दूसरों पर निर्भर था। दूसरों को कहकर उसने अपने काम से पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इस बार उसने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। इसलिए वह अवश्य आएगा।’</p>
<h3 style="text-align:justify;">उसी रात चिड़िया और उसके बच्चे उस खेत से उड़ गए और कहीं और चले गए।</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सीख:</strong> दूसरों की सहायता लेने में कोई बुराई नहीं है। किंतु यदि आप समय पर काम शुरू करना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह समय पर पूरा हो जाए, तो उस काम की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी। दूसरे भी मदद उसी की करते हैं, जो अपनी मदद करता है। Little Genius</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों बच्चे हैरान थे कि इस बार ऐसा क्या है, जो माँ खेत छोड़ने को तैयार है। उन्होंने पूछा, तो चिड़िया बोली, ‘बच्चों, पिछली दो बार किसान कटाई के लिए दूसरों पर निर्भर था। दूसरों को कहकर उसने अपने काम से पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, इस बार उसने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। इसलिए वह अवश्य आएगा।’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मॉनसून की शुरू हुई कहानी, सरसा शहर हुआ पानी-पानी" href="http://10.0.0.122:1245/the-story-of-monsoon-started-sarsa-city-became-water-water/">मॉनसून की शुरू हुई कहानी, सरसा शहर हुआ पानी-पानी</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 17:29:07 +0530</pubDate>
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                <title>आयु बढ़ाने वाला पेड़</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार तुर्किस्तान के बादशाह को अकबर की बुद्धि की परीक्षा लेने का विचार आया। उसने एक एलची को पत्र देकर सिपाहियों के साथ दिल्ली भेजा। पत्र का मजमून कुछ इस प्रकार था-‘‘अकबरशाह! मुझे सुनने में आया है कि आपके भारत वर्ष में कोई ऐसा पेड़ होता है जिसके पत्ते खाने से मनुष्य की आयु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/child-story-of-a-megic-tree/article-49043"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/child-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक बार तुर्किस्तान के बादशाह को अकबर की बुद्धि की परीक्षा लेने का विचार आया। उसने एक एलची को पत्र देकर सिपाहियों के साथ दिल्ली भेजा। पत्र का मजमून कुछ इस प्रकार था-‘‘अकबरशाह! मुझे सुनने में आया है कि आपके भारत वर्ष में कोई ऐसा पेड़ होता है जिसके पत्ते खाने से मनुष्य की आयु बढ़ जाती है। यदि यह बात सच्ची है तो मेरे लिए उस पेड़ के थोड़े पत्ते अवश्य भिजवाएं।’’ बादशाह उस पत्र को पढ़कर विचारमग्न हो गए। फिर कुछ देर तक बीरबल से राय मिलाकर उन्होंने सिपाहियों सहित उस एलची को कैद कर एक सुदृढ़ किले में बंद करवा दिया। इस प्रकार कैद हुए उनको कई दिन बीत गए तो बादशाह अकबर बीरबल को लेकर उन कैदियों को देखने गए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="संगरूर में 15 हजार से अधिक लोगों के पास हथियार" href="http://10.0.0.122:1245/more-than-15-thousand-people-have-arms-in-sangrur/">संगरूर में 15 हजार से अधिक लोगों के पास हथियार</a></p>
<p style="text-align:justify;">बादशाह को देखकर उनको अपने मुक्त होने की आशा हुई, परन्तु यह बात निर्मूल थी। बादशाह उनके पास पहुंचकर बोले- ‘तुम्हारा बादशाह जिस वस्तु को चाहता है, वह मैं तब तक उसे नहीं दे सकूंगा जब तक कि इस सुदृढ़ किले की एक-दो र्इंट न ढह जाए, उसी वक्त तुम लोग आजाद किए जाओगे। खाने-पीने की तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी। मैंने उसका यथोचित प्रबन्ध करवा दिया है।’ इतना कहकर बादशाह चले गए, परन्तु कैदियों की चिंता और बढ़ गई। वे अपने मुक्त होने के उपाय सोचने लगे। उनको अपने स्वदेश के सुखों का स्मरण कर बड़ा दुख होता था।</p>
<p style="text-align:justify;">वे कुछ देर तक इसी चिंता में डूबे रहे। अंत में वे इश्वर की वन्दना करने लगे-‘हे भगवान! क्या हम इस बंधन से मुक्त नहीं किए जाएंगे? क्या हमारा जन्म इस किले में बन्द रहकर कष्ट भोगने के लिए हुआ है? आप तो दीनानाथ हैं, अपना नाम याद कर हम असहायों की भी सुध लीजिए।’ इस प्रकार वे नित्य प्रार्थना करने लगे। ईश्वर की दयातलुता प्रसिद्ध है। एक दिन बड़े जोरों का भूकम्प आया और किले का कुछ भाग भूकम्प के कारण धराशायी हो गया। सामने का पर्वत भी टूटकर चकनाचूर हो गया। इस घटना के पश्चात एलची ने बादशाह के पास किला टूटने की सूचना भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;">बादशाह को अपनी कही हुई बात याद आ गई। इसलिए उस एलची को उसके साथियों सहित दरबार में बुलाकर बोले – ‘आपको अपने बादशाह का आशय विदित होगा और अब उसका उत्तर भी तुमने समझ लिया है। यदि न समझा हो तो सुनो, मैं उसे और भी स्पष्ट किए देता हूं।’ देखो, तुम लोग गणना में केवल सौ हो और तुम्हारी आह से ऐसा सुदृढ़ किला ढह गया, फिर जहां हजारों मनुष्यों पर अत्याचार हो रहा हो, वहां के बादशाह की आयु कैसे बढ़ेगी? उसकी तो आयु घटती ही चली जाएगी और लोगों की आह से उसका शीघ्र ही पतन हो जाएगा। हमारे राज्य में अत्याचार नहीं होता, गरीब प्रजा पर अत्याचार न करना और भलीभांति पोषण करना ही आयुवर्धक वृक्ष है। बाकी सारी बातें मिथ्या हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार समझा-बुझाकर बादशाह ने उस एलची को उसके साथियों सहित स्वदेश लौट जाने की आज्ञा दी और उनका राह-खर्च भी दिया। उन्होंने तुर्किस्तान में पहुंचकर यहां की सारी बातें अपने बादशाह को समझाईं। अकबर की शिक्षा लेकर बादशाह दरबारियों सहित उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगा।</p>
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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 13:28:57 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों ने समझाई, होली खेलने की खुशी</title>
                                    <description><![CDATA[चाचा करोड़ीमल हमारे मोहल्ले के सबसे वृद्ध व्यक्ति हैं। शरीर पर वस्त्र के नाम पर एक अदद धोती, और कंधे से कमर तक एक बड़ा सा जनेऊ पड़ा रहता है । वह जहाँ कहीं भी जाते हैं , उनकी प्यारी प्यारी लाठी, परछाई की तरह उनके साथ ही जाती है। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-of-the-joy-of-playing-holi/article-22497"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/holi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चाचा करोड़ीमल हमारे मोहल्ले के सबसे वृद्ध व्यक्ति हैं। शरीर पर वस्त्र के नाम पर एक अदद धोती, और कंधे से कमर तक एक बड़ा सा जनेऊ पड़ा रहता है । वह जहाँ कहीं भी जाते हैं , उनकी प्यारी प्यारी लाठी, परछाई की तरह उनके साथ ही जाती है। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो वह गांधी जी के शुद्ध चेले हों। उनका नाम तो करोड़ीमल है, लेकिन हैं वह एक नंबर के कंजूस! उनकी धोती की अन्टी में से रूपए निकलवाना एक बहुत बड़ी बात है। किसी भी त्योहार आदि में लोग उनसे मिलने जाते हैं, तो चच्चा उनका स्वागत तो बहुत अच्छे ढंग से करते हैं, लेकिन मिठाई या पकवान से नहीं, बल्कि अपनी मीठी मीठी बातों से सबका मन जीतते हैं। उन्हें होली के हुड़दंग से सख्त नफरत है । इसलिए वह उस दिन अपने घर से बाहर ही नहीं निकलते।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी होली आई। होली वाले दिन चच्चा अपनी आदत के अनुसार घर की चारदीवारी में कैद हो गए। परन्तु इस बार मोहल्ले भर के बच्चों ने मिलकर एक योजना बनाई थी कि किसी भी कीमत पर चच्चा को होली के हुड़दंग के दर्शन अवश्य कराएँगे । रंग चलना शुरू हुए दो घंटे बीत चुके थे। सूरज धीरे-धीरे सिर के ऊपर आ रहा था। परन्तु चच्चा अभी भी अपनी चारपाई पर पसरे मीठ-मीठे सपनों की दुनिया में सैर कर रहे थे। एकाएक बाहर से आवाज आई,-‘चच्चा …चच्चा….बचाओ…ये लोग मुझे कींचड़ में डुबोने जा रहे हैं ….!’</p>
<p style="text-align:justify;">चीख को सुनकर चच्चा तुरंत सपनों की दुनियां से पृथ्वी पर आ गिरे। अभी वह अपनी आँखें मलते मलते यह सोच ही रहे थे कि कहीं वह अभी भी सपना तो नहीं देख रहे हैं, कि चीख फिर गूंजी। अब तो उन्हें विश्वास हो गया कि यह सपना नहीं, सच्चाई है। वह तुरंत अपनी चारपाई से उठे और उस संकट में पड़े बच्चे की सहायता करने चल पड़े। लेकिन वह कुछ कदम चलकर अचानक रुक गए। उन्हें ध्यान आया कि यदि वह घर से बाहर निकले तो रंग दिए जाएंगे। अब एक ओर तो उन्हें रंग जाने का डर था वहीं दूसरी ओर एक बच्चे की सहायता का प्रश्न था। बेचारे चच्चा समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें? मन ही मन इन कींचड़ उछालने वालों को कोसते हुए सोच रहे थे,-‘पता नहीं कैसे कैसे लोग हैं? यदि किसी की आंख में कीचड़ चला जाए तो…? क्षणिक मनोरंजन के लिए सारी जिन्दगी किसी को अंधा कर देना कहाँ की बुद्धिमानी है भला? लेकिन इन मूर्खों को कौन समझाए? ऐसा भी तो हो सकता है कि ठंडे ठंडे पानी से किसी को सर्दी लगकर निमोनिया हो जाए।’</p>
<p style="text-align:justify;">अभी वह यह सब बातें सोच ही रहे थे कि बाहर से फिर चीख उनके कानों से आकर टकराई। अब तो वह बहुत घबराए। उन्होंने सोचा,-‘इस बच्चे के साथ भी वही हुआ जो कि अभी मेरे दिमाग ने सोचा था, तब तो बड़ा अनर्थ हो जाएगा।’ उनका दिल मोम की तरह पिघल चुका था। उन्होंने बिना कोई पल खोए दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलने की देर थी कि बच्चों की टोली ने उन पर रंगों से भरी पिचकारियाँ दागनी शुरू कर दीं। बेचारे चच्चा अपनी ऐनक सँभालते हुए अन्दर भागे। उनके पीछे पीछे बच्चों की टोली भी ‘बुरा न मनिओ चच्चा….आज तो होली है…के नारे लगाते हुए अन्दर पहुंच गए। अन्दर जाकर बच्चों ने उनको चारो ओर से घेर लिया। और फिर चच्चा की वो हालत हुई कि पूछो मत! कुछ ही मिनटों में वह किसी भूत से कम नहीं नजर आ रहे थे। लेकिन इतने सारे बच्चों के सामने अकेले चच्चा की कैसे चल सकती थी? बेचारे चुपचाप खड़े खड़े विभिन्न रंगों से स्नान करते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब बच्चों के पास सारा रंग खत्म हो गया तो वे चच्चा के सामने चुपचाप खड़े हो गए। कुछ क्षण बाद उनमें से एक छोटी सी लड़की पिंकी ने धीरे से अपनी तोतली भाषा में कहा,-‘तत्ता दी, हमें माफ तर देना। हम लोदों ने आपतो धोखा दिया। लेतिन हम तब इतते बिना आपते होली नहीं खेल सतते थे। नन्हें मुख से नन्हीं-सी बात को सुनकर चच्चा फूलकर कुप्पा हो गए। अपने पोपले मुँह पर हल्की सी मुस्कान बिखेरते हुए बोले,-‘अरे बच्चों, इसमें माफी की कोई बात नहीं है। तुम लोगों ने आज मुझे यह समझा दिया है कि होली खेलने की खुशी क्या होती है? इसीलिए मैं तुम सबको रूपए देता हूँ। शाम को लल्लू हलवाई के यहाँ जाकर मिठाई खा लेना। और वास्तव में चच्चा करोड़ीमल ने अपनी अंटी में से रूपए निकालकर बच्चों को बाँटना शुरू कर दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                                                   <strong>– डॉ. देशबन्धु ‘शाहजहांपुरी’</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Mar 2021 14:39:39 +0530</pubDate>
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