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                <title>N. V. Ramana - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>N. V. Ramana RSS Feed</description>
                
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                <title>रमना ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना ने शनिवार को देशभर में लंबित मुकदमों के अनुपात में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के साथ ही न्यायपालिका से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर शनिवार को जोर दिया। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और राज्यों मुख्यमंत्रियों के 11 वें संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ramana-stressed-on-increasing-the-number-of-judges-strengthening-the-judicial-system/article-32844"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/n.-v.-ramana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना ने शनिवार को देशभर में लंबित मुकदमों के अनुपात में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के साथ ही न्यायपालिका से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर शनिवार को जोर दिया। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और राज्यों मुख्यमंत्रियों के 11 वें संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति रमना कहा कि बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर बढ़ाने तथा विवाद को प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझा के उपायों पर गंभीरता से विचार करना समय की मांग है। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में अन्य भाषाओं को अपनाने भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों के लिए न्यायाधीशों के 1104 स्वीकृत पदों में से 388 खाली पड़े हैं। खाली पदों को भरने के लिए उनका पहले दिन से ही प्रयास रहा है। उन्होंने एक वर्ष के दौरान विभिन्न उच्च न्यायालयों में खाली पदों का नियुक्तियों के लिए 180 सिफारिशें की हैं। इनमें से 126 नियुक्तियां हो चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए भारत सरकार को धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि 50 प्रतिक्षित प्रस्तावों को भारत सरकार शीघ्र अनुमोदन की उम्मीद की। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों ने भारत सरकार को लगभग 100 नाम भेजे हैं, जो अभी उन तक नहीं पहुंचे हैं। मुख्य न्यायाधीश रमना ने न्यायिक व्यवस्था को जिला स्तर पर मजबूत करने की अपील करते हुए कहा, “मैं माननीय मुख्यमंत्रियों से आग्रह करना चाहता हूं कि जिला न्यायपालिका को मजबूत करने के उनके प्रयास में मुख्य न्यायाधीशों को दिल से सहयोग दें।”</p>
<p style="text-align:justify;">देशभर में लगातार बढ़ते लंबित मुकदमों और न्यायाधीशों के अनुपात पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “जब हम आखिरी बार 2016 में ( संयुक्त सम्मेलन) में मिले थे, तब देश में न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 20,811 थी। अब यह 24,112 है, जो कि 6 वर्षों में 16 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं इसी अवधि में जिला न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या 2 करोड़ 65 लाख से बढ़कर 4 करोड़ 11 लाख हो गई है, जो कि 54.64 फीसदी की बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि स्वीकृत संख्या में वृद्धि कितनी अपर्याप्त है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 14:13:56 +0530</pubDate>
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                <title>मध्यस्थता से कृष्णा जल विवाद के निपटारे का मार्ग फिलहाल बंद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा जल विवाद का निपटारा मध्यस्थता के जरिये होने का रास्ता बुधवार को बंद हो गया। अब इस मामले की सुनवाई कानूनी तौर पर होगी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन शामिल नहीं होंगे। न्यायमूर्ति रमन ने दोनों राज्यों के बीच कृष्णा जल विवाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-way-to-settle-the-krishna-water-dispute-through-mediation-is-currently-closed/article-25741"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/n.-v.-ramana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा जल विवाद का निपटारा मध्यस्थता के जरिये होने का रास्ता बुधवार को बंद हो गया। अब इस मामले की सुनवाई कानूनी तौर पर होगी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन शामिल नहीं होंगे। न्यायमूर्ति रमन ने दोनों राज्यों के बीच कृष्णा जल विवाद की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, क्योंकि दोनों राज्यों की ओर से पेश वकीलों ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले का निपटारा मध्यस्थता के जरिये संभव नहीं है और वे कानूनी तौर पर इसका निपटारा चाहते हैं। दोनों राज्यों के वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को बताया कि संबंधित राज्य सरकारें मामले का कानूनी हल चाहती हैं। इसके बाद न्यायमूर्ति रमन ने कहा कि फिर वह कानूनी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमन ने पिछली सुनवाई को कहा था कि वह कानूनी मुद्दों पर मामले की सुनवाई नहीं कर सकते, बल्कि वह दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता कराने की व्यवस्था कर सकते हैं। इसके लिए दोनों राज्यों के वकील को अपनी सरकारों से निर्देश लेने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा था, ‘मैं दोनों राज्यों (अविभाजित आंध्र प्रदेश) से हूं। मुझे कानूनी मुद्दों को सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन अगर दोनों राज्य मध्यस्थता के लिए सहमत होते हैं तो वह मदद कर सकते हैं। अब दूसरी पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। आंध्र प्रदेश सरकार ने पीने और सिंच़ाई के लिए आवश्यक कृष्णा नदी का पानी रोकने का तेलंगाना पर आरोप लगाया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि तेलंगाना उन्हें पीने और सिंचाई के उद्देश्यों के लिए कृष्णा नदी के पानी के उनके वैध हिस्से से वंचित कर रहा है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Aug 2021 14:58:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जस्टिस रमन ने ली 48वें सीजेआई पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। न्यायमूर्ति एन वी रमन ने देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शनिवार को शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में न्यायमूर्ति रमन को पद की शपथ दिलायी। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-n-v-ramana-sworn-in-for-48th-cji-post/article-23160"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/n.-v.-ramana-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> न्यायमूर्ति एन वी रमन ने देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शनिवार को शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में न्यायमूर्ति रमन को पद की शपथ दिलायी। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद सहित कई केंद्रीय मंत्री एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश शामिल थे। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर संबंधित दिशानिदेर्शों का व्यापक पालन किया गया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">The Vice President, Shri M. Venkaiah Naidu at the swearing-in ceremony of Justice Nuthalapati Venkata Ramana as the 48th Chief Justice of India at Rashtrapati Bhavan today. <a href="https://t.co/Qgt2CO1q5a">pic.twitter.com/Qgt2CO1q5a</a></p>
<p>— Vice-President of India (@VPIndia) <a href="https://twitter.com/VPIndia/status/1385860374663073796?ref_src=twsrc%5Etfw">April 24, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<h4 style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमन ने न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे का स्थान लिया</h4>
<p style="text-align:justify;">कोविंद ने संविधान के अनुच्छेद 124 के उपबंध-दो में प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति रमन को नया सीजेआई नियुक्त किया। न्यायमूर्ति रमन ने न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे का स्थान लिया है जिनका कार्यकाल कल समाप्त हो गया। न्यायमूर्ति रमन ने विज्ञान एवं कानून में स्नातक करने के बाद 10 फरवरी 1983 से वकालत पेशे की शुरूआत की। अपने वकालत पेशे के दौरान उन्होंने न केवल आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय बल्कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) तथा उच्चतम न्यायालय में भी प्रैक्टिस की।</p>
<h4 style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमन 26 अगस्त 2022 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">सत्ताइस जून 2000 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त होने के बाद वह 13 मार्च से 20 मई 2013 तक उसी उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। बाद में उन्हें पदोन्नति देकर दो सितम्बर 2013 को दिल्ली उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। सत्रह फरवरी 2014 को वह शीर्ष अदालत में पदोन्नत किए गए। न्यायमूर्ति रमन 26 अगस्त 2022 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-n-v-ramana-sworn-in-for-48th-cji-post/article-23160</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Apr 2021 16:08:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जस्टिस एन.वी. रमण देश के अगले मुख्य न्यायाधीश नियुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. रमण (नूतलपाटि वेंकटरमण) को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) नियुक्त कर दिया। इससे पूर्व 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति रमण के नाम की सिफारिश की थी। जस्टिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-n-v-ramana-appointed-as-the-next-chief-justice-of-the-country/article-22699"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/n.-v.-ramana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. रमण (नूतलपाटि वेंकटरमण) को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) नियुक्त कर दिया। इससे पूर्व 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति रमण के नाम की सिफारिश की थी। जस्टिस रमण 24 अप्रैल को देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">किसान परिवार में हुआ जन्म</h4>
<p style="text-align:justify;">आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पुन्नावरम गांव में किसानों के एक विनम्र परिवार में एन.वी. रमण का जन्म हुआ। वे एक छात्र नेता बनकर एक शैक्षणिक वर्ष का त्याग करते हुए 1975 में राष्ट्रव्यापी आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता के लिए लड़े। एक समय ऐसा भी था जब न्यायमूर्ति रमण को उनके पिता ने जून 1975 में आपातकाल के खिलाफ एक सार्वजनिक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद शहर छोड़ने के लिए कह दिया था। जस्टिस रमण ने जनवरी में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, ‘मैंने देखा कि इतने सारे युवाओं ने मानवाधिकारों के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। ऐसे में मुझे कॉलेज के एक साल खोने का कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, मेरे पिता को यकीन था कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।’</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसा रहा सफर</h4>
<p style="text-align:justify;">1980 में एक लॉ कॉलेज में दाखिला लेने से पहले, न्यायमूर्ति एन.वी. रमण ने दो साल तक एक क्षेत्रीय समाचार पत्र के लिए एक पत्रकार के रूप में काम किया। न्यायमूर्ति रमन ने विज्ञान एवं कानून में स्नातक करने के बाद 10 फरवरी 1983 से वकालत पेशे की शुरूआत की। अपने वकालत पेशे के दौरान उन्होंने न केवल आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय बल्कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) तथा उच्चतम न्यायालय में भी प्रैक्टिस की।</p>
<p style="text-align:justify;">27 जून 2000 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त होने के बाद वह 13 मार्च से 20 मई 2013 तक उसी उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। बाद में उन्हें पदोन्नति देकर 2 सितम्बर 2013 को दिल्ली उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 17 फरवरी 2014 को वह शीर्ष अदालत में पदोन्नत किए गए। न्यायमूर्ति रमन 26 अगस्त 2022 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। शीर्ष अदालत में सीजेआई समेत न्यायाधीशों की अनुमोदति संख्या 34 है। वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में 29 न्यायाधीश हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अहम फैसले</h4>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस एनवी रमण ने उस बेंच का नेतृत्व किया, जिसने पिछले साल जनवरी में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में दूरसंचार ब्लैकआउट पर कहा था कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना मौलिक अधिकार है। पीठ ने तब जम्मू-कश्मीर प्रशासन को आदेश दिया कि वह दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं पर अंकुश लगाने से संबंधित सभी आदेशों की समीक्षा करे और उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में रखे। कश्मीर प्रतिबंधों पर याचिकाओं के एक समूह को मानते हुए न्यायमूर्ति रमना की पीठ ने प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व को भी रेखांकित किया था। पीठ की तरफ से कहा गया कि जिम्मेदार सरकारों को हर समय प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमण ने कर्नाटक विधानसभा मामले में एक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उन्होंने विधायकों को अयोग्य ठहराने के स्पीकर के फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस्तीफा देने से स्पीकर के अधिकार खत्म नहीं हो जाते हैं। हालांकि, अयोग्यता के मामले में विधायकों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। कोर्ट ने अयोग्य विधायकों को राहत देते हुए उनको विधानसभा उपचुनाव लड़ने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि विधायकों को विधानसभा के पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Apr 2021 12:06:30 +0530</pubDate>
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