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                <title>World Earth Day - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>World Earth Day RSS Feed</description>
                
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                <title>Earth Day: विश्व पृथ्वी दिवस पर दशमेश पब्लिक स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम, पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[रामराज (सच कहूँ/कोमल प्रजापति)। World Earth Day: स्थित दशमेश पब्लिक स्कूल के प्रांगण में 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रधानाचार्य आमिर खान ने किया, जिसमें सभी शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/awareness-program-at-dashmesh-public-school-on-world-earth-day/article-83724"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/ramraj-news-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रामराज (सच कहूँ/कोमल प्रजापति)।</strong> World Earth Day: स्थित दशमेश पब्लिक स्कूल के प्रांगण में 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रधानाचार्य आमिर खान ने किया, जिसमें सभी शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। Ramraj News</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत पौधारोपण से की गई, जिसमें डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता और प्रबंधक सरदार जसवंत सिंह सहोता ने विद्यालय परिसर में पौधे लगाए। इस दौरान बच्चों को अपने घर और आसपास कम से कम पांच-पांच पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि पर्यावरण संरक्षण में सभी अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।प्रधानाचार्य आमिर खान ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भविष्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को “Reduce, Reuse और Recycle” के सिद्धांत को अपने जीवन में अपनाने की सलाह दी और पर्यावरण को बचाने के लिए छोटे-छोटे प्रयासों के महत्व को समझाया। Ramraj News</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्यालय के कोऑर्डिनेटर स्वाति अरोड़ा, मनजोत कौर, हर्षिका अरोड़ा, कोमल राणा, दीप्ति शर्मा, गुरजीत कौर, ज्योति, खुशबू, मोनिका, धनवीर सिंह, प्रशांत कुमार, प्रवेश कुमार, सुशील कुमार, सूरज जैन, विजय कुमार, निखिल आर्य, अशोक कुमार सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। Ramraj News</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और धरती को बचाने का संदेश दिया गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एक्शन में आए एसडीएम शिवाजी यादव, गौशालाओं में व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश" href="https://www.sachkahoon.com/sdm-shivaji-yadav-swung-into-action-directing-improvements-to-cow-shelters/">एक्शन में आए एसडीएम शिवाजी यादव, गौशालाओं में व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:31:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विश्व धरती दिवस: यूथ वीरांगनाओं ने पर्यावरण की शुद्धता के लिए लगाए पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[बठिंडा। (सच कहूँ/सुखनाम) यूथ वीरांगनाएं (रजि.) इकाई बठिंडा (Bhatinda News) द्वारा शनिवार को विश्व धरती दिवस मौके कार्यक्रम करवाकर पर्यावरण को बचाने का बड़ा संदेश दिया। इस मौके करवाए कार्यक्रम दौरान देसराज मैमोरियल प्राईमरी स्कूल पूजा वाला मौहल्ला में बने स्मार्ट आंगनवाड़ी सैंटर में स्कूल अध्यापिका हरबीर कौर के सहयोग से धरती को बचाने व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/saplings-were-planted-for-the-purity-of-the-environment-in-smart-anganwadi-center/article-46569"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/bhatinda-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा। (सच कहूँ/सुखनाम)</strong> यूथ वीरांगनाएं (रजि.) इकाई बठिंडा (Bhatinda News) द्वारा शनिवार को विश्व धरती दिवस मौके कार्यक्रम करवाकर पर्यावरण को बचाने का बड़ा संदेश दिया। इस मौके करवाए कार्यक्रम दौरान देसराज मैमोरियल प्राईमरी स्कूल पूजा वाला मौहल्ला में बने स्मार्ट आंगनवाड़ी सैंटर में स्कूल अध्यापिका हरबीर कौर के सहयोग से धरती को बचाने व पर्यावरण की शुद्धता के लिए पौधे लगाए गए। यूथ वीरांगनाओं को संबोधित करते हरबीर कौर ने कहा कि यूथ वीरांगनाओं द्वारा किए जा रहे समाज भलाई के कार्य प्रशंसनीय हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जो विशव धरती दिवस मौके संस्था द्वारा पौधे लगाए गए हैं।  इससे पर्यावरण शुद्ध होगा। उन्होंने कहा कि धरती की संभाल करना हमारा मुख्य फर्ज है क्योंकि जिस हिसाब से दिन प्रतिदिन वृक्षों की कटाई तेज हो रही है, उससे अनेक तरह की आपदाएं आएंगी, जो भविष्य के लिए नुक्सानदेह है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य के लिए पर्यावरण की संभाल करनी होगी व अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे। यूथ वॉलंटियर अंकिता ने कहा कि कि पैदा हो रहे प्रदूषण से बढ़ रही बीमारियों, दूषित हो रहा पानी मानवीय स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन समस्याओं से छुटकारा  (Bhatinda News) हमें पौधे लगाकर ही मिलेगा व इससे हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि धरती दिवस पर हमें प्रण लेना चाहिए कि हम अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे। इस मौके यूथ वीरांगनाएं सपना, सुनीता, अनू, सुनीता, किरना सहित अन्य मौजूद थे।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Apr 2023 20:14:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व पृथ्वी दिवस पर पर भिवानी के कलाकार ने दिया ‘पृथ्वी बचाओ’ का अनूठे तरीके से संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (एजेंसी)। आज पूरे विश्व में विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। पृथ्वी के पर्यावरण को बचाए रखने के लिए इससे वर्ष 1970 विश्व पृथ्वी दिवस बनाए जाने की शुरूआत की गई थी, जो हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी के तहत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से भिवानी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (एजेंसी)।</strong> आज पूरे विश्व में विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। पृथ्वी के पर्यावरण को बचाए रखने के लिए इससे वर्ष 1970 विश्व पृथ्वी दिवस बनाए जाने की शुरूआत की गई थी, जो हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी के तहत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से भिवानी जिले के जमालपुर गांव के कलाकार हरिओम ने अनूठे तरीके से मानवीय कलाकृतियां बनाते हुए पृथ्वी बचाओ का संदेश विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर किया। अंतरराष्ट्रीय अर्थ डे पर आर्टिस्ट हरिओम ने अपने साथियों के साथ मिलकर में एक परफार्मिंग आर्ट पेश की। इसमें कलाकार हरिओम ने ‘रोहित कुमार व मोंटी को लिखिए’ के परफार्मिंग आर्ट की।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कलाकार हरिओम ने पृथ्वी कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है, का संदेश दिया व पृथ्वी के बचाव हेतु उपाय बताएं और मनुष्य का क्या योगदान होना चाहिए, धरती को बचाने में किस प्रकार हम धरती को बचा सकते हैं, का संदेश दिया। कलाकार हरिओम ने साथियों की मदद से आसपास फैली हुई प्लास्टिक की थैलियां व कचरा, जो इन्वायरमेंट को नुकसान पहुंचाते हैं, उनके बारे में बताया और उनको इकट्ठा करके डिस्पोज किया। उन्होंने बताया कि हम पृथ्वी को सुरक्षित रखेंगे तो ही हमारा जीवन संभव है। क्योंकि पृथ्वी के अस्तित्व के कारण ही पेड़ पौधों का अस्तित्व है, जिनसे हमें आॅक्सीजन मिलती है। अगर धरती पर वातावरण मनुष्य के अनुकूल नहीं रहेगा तो मनुष्य का पृथ्वी पर रहना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने संदेश दिया कि हमें पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखना चाहिए तथा पृथ्वी को बचाए रखने के लिए पृथ्वी पर उपलब्ध संसाधनों का उचित प्रयोग करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने संदेश दिया कि पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करने से हमें बचना होगा। उन्होंने कहा कि अत्यधिक प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से मानव जीवन को नुकसान होगा और धरती की उर्वरता क्षमता भी कम होगी। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार हरिओम समय-समय पर विभिन्न विषयों पर अपनी परफॉर्मिंग के माध्यम से दुनिया को संदेश देते रहते हैं कि हमें क्या करना चाहिए। कला के माध्यम से यह दर्शातें हैं कि पृथ्वी को हम कैसे बचाते हैं, बचाना है और इसमें सबसे ज्यादा बचाने में और नुकसान करने में इंसान का ही हाथ है। अब समय की जरूरत है कि मनुष्य को अपने आप को कंट्रोल करना चाहिए। कला के माध्यम से हरिओम ने जनता को जागरूक करने की एक कोशिश की है। बिल्कुल ही प्लास्टिक को बैन करें और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए। उन्होंने कला के माध्यम से परफॉर्मिंग आर्ट का एक वीडियो परफॉर्म कर के लोगों को दिखाया।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/on-world-earth-day-bhiwanis-artist-gave-a-unique-message-of-save-the-earth/article-23113</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Apr 2021 13:36:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब जरूरत है, हर दिन मने पृथ्वी दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[तमाम तरह की सुख-सुविधाएं और संसाधन जुटाने के लिए किए जाने वाले मानवीय क्रियाकलापों के कारण आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की भयावह समस्या से त्रस्त है। इसीलिए पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने तथा पृथ्वी को बचाने के संकल्प के साथ प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को विश्वभर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/now-needed-every-day-celebrate-earth-day/article-23101"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/now-needed-every-day-celebrate-earth-day.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तमाम तरह की सुख-सुविधाएं और संसाधन जुटाने के लिए किए जाने वाले मानवीय क्रियाकलापों के कारण आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की भयावह समस्या से त्रस्त है। इसीलिए पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने तथा पृथ्वी को बचाने के संकल्प के साथ प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को विश्वभर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल कोरोना महामारी के चलते दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में लगे लॉकडाउन के दौर में थम गई मानवीय गतिविधियों के कारण यह दिवस ऐसे समय में मनाया गया था, जब दुनियाभर के लोगों को पहली बार पृथ्वी को काफी हद तक साफ-सुथरी और प्रदूषण रहित देखने का सुअवसर मिला था। हालांकि कोरोना संकट के चलते लगाए गए लॉकडाउन के कारण पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण को लेकर सोचने का बेहतरीन अवसर मिला था, जिससे दुनियाभर के तमाम देश एकजुट होकर ऐसी योजनाओं पर विचार सकें, जिनसे पर्यावरण संरक्षण में अपेक्षित मदद मिल सके लेकिन विड़म्बना देखिये कि लॉकडाउन हटते ही धरती की हालत धीरे-धीरे हर जगह पूर्ववत बदत्तर होती गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकृति कभी समुद्री तूफान तो कभी भूकम्प, कभी सूखा तो कभी अकाल के रूप में अपना विकराल रूप दिखाकर हमें निरन्तर चेतावनियां देती रही है किन्तु जलवायु परिवर्तन से निपटने के नाम पर वैश्विक चिंता व्यक्त करने से आगे हम शायद कुछ करना ही नहीं चाहते। अगर प्रकृति से खिलवाड़ कर पर्यावरण को क्षति पहुंचाकर हम स्वयं इन समस्याओं का कारण बने हैं और गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर हम वाकई चिंतित हैं तो इन समस्याओं का निवारण भी हमें ही करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ताकि हम प्रकृपि के प्रकोप का भाजन होने से बच सकें अन्यथा प्रकृति से जिस बड़े पैमाने पर खिलवाड़ हो रहा है, उसका खामियाजा समस्त मानव जाति को अपने विनाश से चुकाना पड़ेगा। लोगों को पर्यावरण एवं पृथ्वी संरक्षण के लिए जागरूक करने के लिए साल में केवल एक दिन अर्थात 22 अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ मनाने की औपचारिकता निभाने से कुछ हासिल नहीं होगा। अगर हम वास्तव में पृथ्वी को खुशहाल देखना चाहते हैं तो यही ‘पृथ्वी दिवस’ प्रतिदिन मनाए जाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पृथ्वी दिवस को मनाए जाने का वास्तविक लाभ तभी है, जब हम आयोजन को केवल रस्म अदायगी तक ही सीमित न रखें बल्कि धरती की सुरक्षा के लिए इस अवसर पर लिए जाने वाले संकल्पों को पूरा करने हेतु हरसंभव प्रयास भी करें। हमें बखूबी समझ लेना होगा कि अगर पृथ्वी का तापमान साल दर साल इसी प्रकार बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में हमें इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ पुस्तक के अनुसार पैट्रोल, डीजल से उत्पन्न होने वाले धुएं ने वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड तथा ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है और वातावरण में पहले की अपेक्षा 30 फीसदी ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद है, जिसकी जलवायु परिवर्तन में अहम भूमिका है। पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ दशकों में वन-क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर कंक्रीट के जंगलों में तब्दील किया जाता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी पर बढ़ते दबाव का एक महत्वपूर्ण कारण बेतहाशा जनसंख्या वृद्धि भी है। जहां 20वीं सदी में वैश्विक जनसंख्या करीब 1.7 अरब थी, अब बढ़कर करीब 7.8 अरब हो चुकी है। अब सोचने वाली बात यह है कि धरती का क्षेत्रफल तो उतना ही रहेगा, इसीलिए कई गुना बढ़ी आबादी के रहने और उसकी जरूरतें पूरी करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का बड़े पैमाने पर दोहन किया जा रहा है। इससे पर्यावरण की सेहत पर जो प्रहार हो रहा है, उसी का परिणाम है कि धरती अब धधक रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कई हिस्सों में इस साल जिस प्रकार मार्च महीने में ही बढ़ते पारे का प्रकोप देखा गया, वह जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। करीब दो दशक पहले देश के कई राज्यों में जहां अप्रैल माह में अधिकतम तापमान औसतन 32-33 डिग्री रहता था, वहीं अब मार्च महीने में ही पारा 40 डिग्री तक पहुंचने लगा है। 2016 में राजस्थान के फलौदी का तापमान तो 51 डिग्री दर्ज किया गया था और इस तापमान में और वृद्धि की आशंका है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकृति कभी समुद्री तूफान तो कभी भूकम्प, कभी सूखा तो कभी अकाल के रूप में अपना विकराल रूप दिखाकर हमें चेतावनियां देती रही है किन्तु जलवायु परिवर्तन से निपटने के नाम पर वैश्विक चिंता व्यक्त करने से आगे हम शायद कुछ करना ही नहीं चाहते। हम नहीं समझना चाहते कि पहाड़ों का सीना चीरकर हरे-भरे जंगलों को तबाह कर हम कंक्रीट के जो जंगल विकसित कर रहे हैं, वह वास्तव में विकास नहीं बल्कि विकास के नाम पर हम अपने विनाश का ही मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हम चाहते हैं कि हम धरती मां के कर्ज को थोड़ा भी उतार सकें तो यह केवल तभी संभव है, जब वह पेड़-पौधों से आच्छादित, जैव विविधता से भरपूर तथा प्रदूषण से सर्वथा मुक्त हो और हम चाहें तो सामूहिक रूप से यह सब करना इतना मुश्किल भी नहीं है। बहरहाल, यह अब हमें ही तय करना है कि हम किस युग में जीना चाहते हैं? एक ऐसे युग में, जहां सांस लेने के लिए प्रदूषित वायु होगी और पीने के लिए प्रदूषित और रसायनयुक्त पानी तथा ढ़ेर सारी खतरनाक बीमारियों की सौगात या फिर ऐसे युग में, जहां हम स्वच्छंद रूप से शुद्ध हवा और शुद्ध पानी का आनंद लेकर एक स्वस्थ एवं सुखी जीवन का आनंद ले सकें।</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>योगेश कुमार गोयल</em></strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Apr 2021 21:37:43 +0530</pubDate>
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