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                <title>Peasant Movement - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आखिरकार मान गए किसान! सरकार के प्रस्ताव को किया स्वीकार</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार के मसौदे पर किसान संगठनों में सहमति नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली की सीमा पर पिछले एक साल से चल रहे किसानों के आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से भेजे गये मसौदे पर कृषक संगठनों के बीच सहमति बन गयी है और उम्मीद है कि गुरुवार को आंदोलन वापस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/finally-the-farmer-agreed-accepted-the-proposal-of-the-government/article-28984"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/finally-the-farmer-agreed.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>सरकार के मसौदे पर किसान संगठनों में सहमति</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली की सीमा पर पिछले एक साल से चल रहे किसानों के आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से भेजे गये मसौदे पर कृषक संगठनों के बीच सहमति बन गयी है और उम्मीद है कि गुरुवार को आंदोलन वापस करने पर फैसला हो जाए। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि सरकार से एक संशोधित मसौदा प्रस्ताव प्राप्त हुआ है जिसे स्वीकार करते हुए किसान संगठनों के बीच एक आम सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार के लेटरहेड पर हस्ताक्षर किए गए औपचारिक पत्र की प्रतीक्षा है। एसकेएम कल दोपहर बारह बजे सिंघु बार्डर पर फिर से बैठक करेगा और उसके बाद मोर्चों को हटाने के लिए औपचारिक फैसला करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार की ओर से जो मसौदा है, उस पर सहमति बन गयी है। अब सरकार की तरफ से लेटरहेड पर औपचारिक पत्र आने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन स्थगित करने के निर्णय पर फैसला कल की बैठक के बाद लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस लिये जाने की घोषणा कर दी थी और सत्र के पहले दिन इन कानूनों को रद्द करने का बिल संसद से पास हो गया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 19:28:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किसान आंदोलन को बल देने के लिए महिलाओं ने नये रूप से चलाया अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ, देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र। किसान आंदोलन को शुरू हुए एक वर्ष बीत चुका है। बीते वर्ष 15 अगस्त को काला दिवस के रूप में किसानों ने मनाने का फैसला लिया था। 15 अगस्त 2020 को किसानों ने कुरुक्षेत्र में तिरंगा यात्रा निकालकर लघु सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। हालांकि भाजपा द्वारा 15 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/to-give-impetus-to-the-peasant-movement-women-launched-a-new-campaign/article-26061"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/women-launched-a-new-campaign.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ, देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र।</strong> किसान आंदोलन को शुरू हुए एक वर्ष बीत चुका है। बीते वर्ष 15 अगस्त को काला दिवस के रूप में किसानों ने मनाने का फैसला लिया था। 15 अगस्त 2020 को किसानों ने कुरुक्षेत्र में तिरंगा यात्रा निकालकर लघु सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। हालांकि भाजपा द्वारा 15 अगस्त से पहले प्रेस वार्ता कर काला दिवस मनाने वाले किसानों को देशद्रोही करार दिया था, लेकिन असर उल्टा हुआ और इन वार्ताओं के कारण किसान एकजुट हो गए थे। रोचक बात यह है कि इस बार महिलाएं विशेष रूप से अपनी भागीदारी दर्ज करवा रही हैं। अबकि बार महिलाओं ने कुरुक्षेत्र में किसान आंदोलन को बल देने के नये रूप से कार्य करना शुरू किया है। 15 अगस्त को कुरुक्षेत्र से गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा जाएगी। तिरंगा यात्रा के लिए कुरुक्षेत्र के विभिन्न गावों में महिलाएं खूब प्रचार कर रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">गीत गाकर न्योता देने जा रही घरों में</h4>
<p style="text-align:justify;">गांव किरमच में देखा जा रहा है कि तैयारियों को लेकर महिलाएं जिस प्रकार से ब्याह शादी में गीत गाए जाते हैं उसी प्रकार से गीत गाती हुई घरों में जा रही हैं व महिलाओं को तिरंगा यात्रा में दिल्ली जाने का न्यौता दे रही हैं। कुरुक्षेत्र के गांव किरमच कि ये महिलाएं अपना घर का काम खत्म कर महिलाओं को जागरूक करने के लिए निकल पड़ती है। महिलाओं का कहना है कि महिलाओं की हिस्सेदारी आंदोलन में बराबर की रही है और जब तक आंदोलन चलेगा तब तक महिलाएं भी पुरुषों के बराबर खड़ी रहेंगी। यह लड़ाई हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ी जा रही है और जब बात उनके बच्चों की हो तो महिलाएं झांसी की रानी की तरह भी लड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपने खाने-पीने व पहनने के कपड़े को बांधकर रख लिया है जैसे ही काफिला दिल्ली जाएगा हम उसमें शामिल होंगी। महिलाओं की तादाद काफिले में पुरुषों से कम नहीं होगी। महिलाओं ने ड्यूटी लगाई है कि हर पांच घर से एक महिला गांव में रुकेगी जो आंदोलन में जाने वाली महिलाओं के घर का कामकाज देखेगी। सभी महिलाएं तिरंगा लेकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। बकायदा दिल्ली जाने वाली महिलाओं के नाम भी लिखे जा रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">5 घरों में कामकाज के लिए रहेगी एक महिला: संतोष</h4>
<p style="text-align:justify;">महिला संतोष का कहना है कि वह घर घर जाकर सभी महिलाओं को कृषि कानूनों के बारे में जागरूक करेंगे और दिल्ली जाने के लिए तैयार करेंगे। 5 घरों के कामकाज के लिए एक महिला गांव में रुकेगी जो आंदोलन में जाने वाली सभी महिलाओं के घर का कामकाज देखेगी। साथ ही संतोष ने कहा कि किसी भी बीजेपी या जेजेपी के नेता को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। महिला बिमला का कहना है कि वह आंदोलन में जाने वाली महिलाओं के घर का कामकाज देखेंगे और जब तक उन्हें हक नहीं मिल जाता तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। राजबाला का कहना है कि यह लड़ाई उनकी जमीन की है और वह अपने बच्चों के हक के लिए झांसी की रानी बनने को भी तैयार हैं। राजबाला ने कहा कि यह आंदोलन चाहे 10 साल तक चले तब तक महिलाएं इस आंदोलन में पुरुषों के बराबर चलेंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दिल्ली बोर्डर जाने के लिए किए बैग तैयार: रामवती</h4>
<p style="text-align:justify;">महिला किसान रामवती का कहना है कि इस लड़ाई में वह पीछे नहीं हटेंगे चाहे उनकी जान क्यों ना चली जाए। सभी महिलाओं ने अपने बैग तैयार कर लिए हैं और अपने खाने का राशन भी साथ रख लिया है अब यह आंदोलन कितना भी लंबा चले हमें इसकी परवाह नहीं हम अपने हक लेकर ही वापस लौटेंगे। उनसे जब पूछा गया कि क्या किसानों को चुनाव लड़का चाहिए तो रामवती का कहना था कि अगर सरकार किसानों की बात नहीं सुनेगी तो उनको किसानों को ही चुनाव लड़ आना पड़ेगा और संसद तक भेजना पड़ेगा ताकि उनकी बात सुनी जा सके। किरमच के नंबरदार संजू का कहना है कि उनके गांव की महिलाओं की पहले भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही है और अब भी वह कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलनकारी किसानों के साथ खड़ी है संजू ने कहा कि अगर सरकार किसानों की बात नहीं सुनती तो चुनाव लड़ना उनकी मजबूरी बन जाएगा और वह अपने किसान भाइयों को ही चुनाव में खड़ा करेंगे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Aug 2021 20:53:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मंडलायुक्त हिसार ने किसानों से की प्रदर्शन न करने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। हिसार मंडलायुक्त चंद्रशेखर ने किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं से कहा है कि वे 24 मई को हिसार में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हुई वार्ता में किसान आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने यह भरोसा दिलाया था कि भविष्य में वे शांतिपूर्ण पूर्वक आंदोलन करेंगे और आंदोलन के दौरान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/divisional-commissioner-hisar-appealed-to-the-farmers-not-to-protest/article-23985"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/peasant-movement-hisar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हिसार मंडलायुक्त चंद्रशेखर ने किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं से कहा है कि वे 24 मई को हिसार में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हुई वार्ता में किसान आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने यह भरोसा दिलाया था कि भविष्य में वे शांतिपूर्ण पूर्वक आंदोलन करेंगे और आंदोलन के दौरान कोई हिंसा नहीं होगी। लेकिन वार्ता में हुए समझौते के 2 दिन के भीतर ही 26 मई को भूमणशाह चौक पर बैरिकेडिंग हटाकर उप मुख्यमंत्री आवास के 200 मीटर दूरी पर पुतला फूंक कर प्रदर्शन किया गया। हालांकि इस दौरान पुलिस व प्रशासन द्वारा सूझबूझ से काम लिया गया, जिससे स्थिति नियंत्रण में रही। उन्होंने वार्ता में शामिल सभी किसान नेताओं से यह आग्रह किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस प्रकार का घटनाक्रम दोबारा से न हो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/divisional-commissioner-hisar-appealed-to-the-farmers-not-to-protest/article-23985</link>
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                <pubDate>Fri, 28 May 2021 22:55:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि कानूनों के खिलाफ नहीं थम रहा देश के अन्नदाता का रोष</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों ने प्रदेशभर में मनाया काला दिवस पुतले फूंक और काले झंडे लहरा जताया रोष सरकार को चेताया-मांगें पूरी होने पर लौटेंगे घर चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के छह माह पूरे होने पर बुधवार को किसानों ने प्रदेश भर में काला दिवस मनाकर एकजुटता दिखाई। इस दौरान किसानों ने जहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/annadata-rage-echoed-is-not-getting-stopped-against-the-agricultural-laws/article-23919"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/peasant-movement.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>किसानों ने प्रदेशभर में मनाया काला दिवस</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>पुतले फूंक और काले झंडे लहरा जताया रोष</h4>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h4>सरकार को चेताया-मांगें पूरी होने पर लौटेंगे घर</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के छह माह पूरे होने पर बुधवार को किसानों ने प्रदेश भर में काला दिवस मनाकर एकजुटता दिखाई। इस दौरान किसानों ने जहां सरकार के पुतले फूंके। वहीं काले झंडे लहराकर सरकार को चेताया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती वे पीछे नहीं हटेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को हरियाणा के सरसा, फतेहाबाद, हिसार, जीन्द, रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद, झज्जर, कैथल, कुरुक्षेत्र और अंबाला सहित विभिन्न जिलों में किसानों ने काला दिवस मनाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान किसानों ने धरना स्थलों और अपने घरों की छतों पर काले झंडे लहराए।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि पिछले साल 26 नवंबर से कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने अपना आंदोलन शुरू किया था। भिवानी में कितलाना टोल प्लाजा पर किसान नेता कमल प्रधान व धर्मेन्द्र ने कहा कि आज सरकार को एहसास हो गया होगा कि किसान हार मानने वाला नहीं और न डरने वाला। किसानों ने केन्द्र सरकार को चेतावनी दी कि वो अपनी मांग पूरी होने तक जीत होने पर ही घर जाएंगे। साथ ही कहा कि किसान कोरोना नहीं फैलाते। किसान कोरोना के नियमों की पालना करते हुए टेस्टिंग व वैक्सीनेशन करवा रहे हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/annadata-rage-echoed-is-not-getting-stopped-against-the-agricultural-laws/article-23919</link>
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                <pubDate>Wed, 26 May 2021 19:02:11 +0530</pubDate>
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