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                <title>अगले साल तक खुलेगा कालेधन का पूरा चिट्ठा</title>
                                    <description><![CDATA[स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के धन में 13 साल में सबसे तेज वृद्धि नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा जमा किए गए (Complete, Blog, Black Money, Open, Till, Next, Year) कालेधन के सभी आंकड़े अगले वर्ष तक मिल जायेंगे। गोयल का यह बयान ऐसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/complete-blog-of-black-money-will-be-open-till-next-year/article-4562"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/blackmoney.jpg" alt=""></a><br /><h1>स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के धन में 13 साल में सबसे तेज वृद्धि</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा जमा किए गए <strong>(Complete, Blog, Black Money, Open, Till, Next, Year)</strong> कालेधन के सभी आंकड़े अगले वर्ष तक मिल जायेंगे। गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्विट्जरलैंड ने वीरवार को एक रिपोर्ट जारी किया, जिसके अनुसार वर्ष 2017 में भारतीय द्वारा उसके यहां जमा की गयी धनराशि 50 फीसदी से अधिक बढ़कर सात हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।</p>
<h1>अवैध लेनदेन की आशंका जताना सही नहीं</h1>
<p style="text-align:justify;">गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार के पास सभी जानकारियां हैं और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जायेगा तो उसके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी। वर्तमान समय में किसी भी व्यक्ति को देश से बाहर रुपये जमा करने का साहस नहीं है और यह सरकार के कठिन परिश्रम से संभव हुआ है। गोयल ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच एक संधि है जिसके तहत उसने भारत और कुछ अन्य देशों द्वारा दी गयी जानकारियों के आधार पर विदेशी ग्राहकों के बारे में सूचनायें साझा करना शुरू कर दिया है। एक जनवरी 2018 से 31 मार्च 2019 तक सभी डाटा उपलब्ध हो जाएंगे। उन्होंने वीरवार को जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसको अभी से कालाधन या अवैध लेनदेन की आशंका जताना सही नहीं है।</p>
<h1>राहुल का मोदी पर तंज, क्या अब ये व्हाइट मनी है!</h1>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले चार साल के दौरान स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में 50 फीसदी की वृद्धि होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए शुक्रवार को कहा कि पहले इसे कालाधन बताने वाले मोदी उसे अब उसे सही बता रहे हैं। गांधी ने ट्वीट किया, ‘उन्होंने (मोदी)2014 में कहा, ‘मैं स्विस बैंक से सारा कलाधन वापस लाऊंगा और हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए जमा करूंगा। उन्होंने 2016 में कहा, ‘नोटबंदी से देश में कालाधन खत्म हो जाएगा। वह 2018 में कह रहे हैं भारतीयों द्वारा स्विस बैंक में जमा की गयी राशि 50 फीसदी बढ़ गयी है और यह सफेद पैसा है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jun 2018 22:17:37 +0530</pubDate>
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                <title>अपने कर्त्तव्य कर्म को पूर्ण करो</title>
                                    <description><![CDATA[हर आदमी के लिए विधाता ने मनुष्यता का आवरण देकर अपने कर्त्तव्य कर्म को पूर्ण करने के लिए उसे धरा पर भेजा हुआ है। यह कर्म उसके स्वयं के लिए, घर-परिवार के लिए और समाज के लिए निहित हैंंं और इन्हीं की पूर्णता से उसके समग्र व्यक्तित्व का विकास होता है। इस कर्त्तव्य कर्म को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/complete-your-duty/article-4306"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/le.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हर आदमी के लिए विधाता ने मनुष्यता का आवरण देकर अपने कर्त्तव्य कर्म को पूर्ण करने के लिए उसे धरा पर भेजा हुआ है। यह कर्म उसके स्वयं के लिए, घर-परिवार के लिए और समाज के लिए निहित हैंंं और इन्हीं की पूर्णता से उसके समग्र व्यक्तित्व का विकास होता है। इस कर्त्तव्य कर्म को पूरा करने के लिए लोग कहीं सीधे और कहीं उल्टे रास्तों का अवलम्बन करते हैं। कई लोेग जमाने की हवाओं और चकाचौंध से प्रभावित होकर अपने कर्त्तव्य को गौण बना देते हैं और दूसरी गलियों तथा चौराहों एवं सर्कलों पर पूंगी बजाते हुए लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कइयों के लिए कर्त्तव्य कर्म सबसे ऊँचा होता है जबकि कई ऐसे स्वनामधन्य महान व्यक्तित्व के धनी लोग होते हैं जिनके लिए कर्त्तव्य गौण हो जाता है या यों कहें कि उनका कद बहुत बड़ा होता है और फ्रेम बहुत छोटी। कइयों के लिए कर्त्तव्य कोई मायने नहीं रखता और ये लोग दुनिया जहान के सारे काम करते हैं सिवाय अपनी ड्यूटी के। अपने लिए निर्धारित ड्यूटी के सिवा इनसे कुछ भी करा लो, पूरे आनंद से करेंगे। लेकिन जहां ड्यूटी की बात आएगी वहां नाम सुनते ही नाक भौं सिकोडेंगे और दूर-दूर भागने लगेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इंसानों की एक ऐसी ही प्रजाति पिछले कुछ दशक से पनपी और पसरी हुई है जिसे औरों की थाली में घी दिखता है, औरों का आनंद ही स्वीकार्य लगता है और चाहते हैं कि अपना कर्तव्य कर्म और निर्धारित ड्यूटी को छोड़कर उन कामों में रमे रहें जिनमें कम समय में बहुत ज्यादा पैसा, वर्चस्व और लोकप्रियता प्राप्त होती हो। उन बाड़ों में दुबके रहें जहां कोई खास काम-धाम न हो, पूरी आरामतलबी के सारे प्रबन्ध उपलब्ध हों तथा जिनके माध्यम से वो सब कुछ पाया जा सके जो ड्यूटी से हासिल नहीं हो सकता, चाहे कितनी ही ईमानदारी और निष्ठा से अपने फर्ज क्यों न निभाते रहें। इनका एकमेव मकसद दुनिया की छाती पर छा जाने का होता है और इसके लिए वे सभी सम सामयिक स्टंटों और उखाड़-पछाड़ में माहिर होते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह बात कोई मायने नहीं रखती कि उनकी हरकतों या करतूतों से किसे कितना नुकसान हो रहा है या होने वाला है। ये सिर्फ और सिर्फ अपने फायदों की ही सोचते हैं और इसी के लिए डग आगे बढ़ाते हैं। ऐसे लोग अपने कर्त्तव्य कर्म का पूरा लाभ जरूर लेते हैं लेकिन उसे धत्ता दिखाते हुए वे सारे काम करते हैं जो उनके विहित कर्त्तव्य की परिधि में कभी नहीं रहे। ऐसे महान लोग अपनी शौहरत के फेर में हर कहीं मुँह दिखाते या निकालते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन्दगी में एक बार किसी आदमी की गाड़ी कर्त्तव्य की मुख्यधारा से भटक जाती है फिर वह कभी लाईन पर नहीं आ पाती। वह इधर-उधर भटकता ही रहता है। हमारे आस-पास ऐसे लोगों की खूब भीड़ छायी हुई है जिनके लिए अपने कर्त्तव्य से कहीं ज्यादा दूसरे काम हावी हो गए हैं। इस किस्म के भटके हुए लोग कहीं भी पाए जा सकते हैं। इनमें वे लोग भी हैं जिन्हें हुनरमन्द बनाने के लिए समाज और राज का खूब सारा धन खर्च होता है और समाज को यह आशा होती है कि क्षेत्र या विषय विशेष में दक्षता पा जाने के बाद ये समाज के काम आएंगे, अपने हुनर से नई पीढ़ी को लाभान्वित करेंगे और अपनी मेधा-प्रज्ञा और दक्षताओं का उपयोग समाज के लिए करेंगे। लेकिन यह सब मिथ्या सिद्ध होता है। इन पर खर्च हुआ सारा पैसा पानी की तरह बह निकलता है और ये किसी ऐसे बाड़े में घुस जाया करते हैं जहां इनकी सीखी हुई दक्षता और हुनर की बजाय ऐसे-ऐसे काम करने में रुचि लेते हैं जिनसे समाज का कोई भला नहीं हो सकता, केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति ही हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी खूब सारी भीड़ है जो चकाचौंध और टकसाली डेरों को देख कर भटक गई है और अब इनके जीवन का एकमेव उद्देश्य अपने स्वार्थ की पूर्ति करना ही रह गया है। सब तरफ ऐसे-ऐसे लोग हैं जिनके गठबंधन भी बन जाया करते हैं। चोर-चोर मौसेरे भाई से भी बढ़कर अब डकैत-डकैत सगे भाई का मुहावरा जन्म ले रहा है। लोग इन कर्त्तव्यहीन लोगों के बारे में सब कुछ जानते-समझते हुए भी चुप रह जाते हैं क्योंकि इस किस्म के लोग उन सभी प्रकार के समझौतों और जी-हूजूरी में माहिर होते हैं जो एक संस्कारी और शालीन व्यक्ति पूरी जिन्दगी कभी नहीं कर सकता, चाहे उसके लिए उसे कितना ही खामियाजा उठाना क्यों न पड़े। जब किसी भी व्यक्ति का नाता मूल कर्त्तव्य से छूट जाता है फिर वह जो कुछ करे, उसका अपना कर्त्तव्य हो उठता है। इसमें न कोई वर्जनाएँ हैं न कोई बंदिश। जब सब कुछ उतारकर उतर ही गए हैं नदी में तो आगे किससे लाज। सच तो यह है कि अब ऐसे-ऐसे चेहरे सामने आ रहे हैं जो मौलिक हुनर की बजाय जमाने के अनुरूप अपने नए-नए हुनर विकसित कर रहे हैं। हमेशा चाशनी में तर रहने के आदी ये लोग कभी सूखे नहीं रह सकते। इन्हें जिन्दा रहने के लिए हमेशा आर्द्रता चाहिए। फिर चाहे वह चाशनी की हो या कीचड़ की, इन्हें क्या फर्क पड़ता है। इनकी थूंथन इतनी तीव्र संवेदनशील होती है कि हमेशा इन्हें पूर्वाभास हो ही जाता है कि कहाँ कौनसी गंध पसरने वाली है। फिर ये लोग उसी दिशा में तेजी से लपक पड़ते हैंं। ऐसे लोग अपने अनुकूल गंध पाकर कहीं भी लपक सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके लिए कोई रास्ता वर्ज्य नहीं हुआ करता। जिस रास्ते ये चले जाते हैं वह रास्ता इनका हो जाता है। बीच में कहीं कोई बाधा दिखे तो कभी गुर्रा देते हैं तो कभी एकान्त में धीरे से दुम नीचे दबाकर विनम्रता की जीवन्त मूत्र्ति हो जाते हैं। भिड़ना हो तो कहेंगे साण्ड हैं, और झुक जाना हो तो गाय के जाये कहकर पतली गली निकाल लेते हैं। कभी-कभी तो इन पथभ्रष्टों को देख कर लगता है कि शायद कहीं उनके बीज और संस्कारों में तो कोई दोष नहीं है। क्योंकि उनके पुरखों में ऐसो कोई लक्षण नहीं देखा गया जो इनमें कूट-कूट कर भरे हुए हैं। फिर भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि ऐसे लोगों के कारण अपने इलाकों में कहीं न कहीं कुछ न कुछ हमेशा घटित होता रहता है। ऐसे लोग हर युग में रहेंगे और उनकी करतूतें भी। फिर ऐसे लोगों की वजह से वे लोग भी जिन्दा बने हुए हैं जिन्हें ऐसे ही लोेगों की जरूरत हुआ करती है जो दिन-रात उनकी परिक्रमा करते हुए जयगान करते रहें। यह जयगान ही उनके लिए विटामिन्स और न्यूट्रीन्स का काम करता है। जहां कहीं ऐसे लोग मिलें, उन्हें जीते जी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करने के सिवा हमारे पास और कोई चारा है ही नहीें। क्योंकि कहीं इनकी करतूतों की चर्चा भी होती है तो ये दूसरों की कब्र खोदने की परम्परा का निर्वाह करके ही दम लेते हैं। ऐसे लोगों की वजह से ही यह कहावत बनी है – गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास।</p>
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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 08:19:00 +0530</pubDate>
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                <title>दो महीने में प्रदूषण मानक पूरे करें डाइंग उद्योग, नहीं तो एक्शन : सोनी</title>
                                    <description><![CDATA[लुधियाना (एजेंसी)। मिशन तंदरुस्त पंजाब के तहत शुद्ध वातावरण बनाने के मकसद से सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर मंगलवार को सूबे के पर्यावरण मंत्री ओपी सोनी ने डाइंग उद्योगों के साथ सर्किट हाउस में बैठक की। बैठक में उद्यमियों की समस्या सुनने के बाद मंत्री ने कहा कि उद्योग जगत अर्थव्यवस्था की रीढ़ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dyeing-industry-if-not-complete-pollution-standard-in-two-months-sony/article-4139"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/op-soni.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> लुधियाना (एजेंसी)। </strong>मिशन तंदरुस्त पंजाब के तहत शुद्ध वातावरण बनाने के मकसद से सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर मंगलवार को सूबे के पर्यावरण मंत्री ओपी सोनी ने डाइंग उद्योगों के साथ सर्किट हाउस में बैठक की। बैठक में उद्यमियों की समस्या सुनने के बाद मंत्री ने कहा कि उद्योग जगत अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनको बंद नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन पर्यावरण को नुकसान भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोनी ने डाइंग उद्योग को अल्टीमेटम दिया कि दो माह के भीतर प्रदूषण मानक पूरे किए जाएं और गंदे पानी को सही ढंग से ट्रीट किया जाए। इसके बाद कानून के अनुसार इकाईयों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्यमियों का साथ देने वाले अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनी ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि डाइंग उद्यमी पानी को ट्रीट किए बिना ही बुड्ढे नाले में डाल रहे हैं। नतीजतन लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। सोनी ने साफ किया कि तीन कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट चलाने के लिए सरकार यत्‍‌नशील है। इन प्लांटों के लिए सरकार ने अपने हिस्से के फंड मुहैया करा दिए हैं। सोनी ने सीईटीपी लगाने के वक्त माइनिंग एवं मिट्टी में कथित हेराफेरी के मामले की जांच कराने के लिए कमेटी गठन करने का भी ऐलान किया। सीईटीपी शुरू नहीं करना तो हमारा पैसा वापस मिले</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में डाइंग उद्यमी भी पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने मंत्री को बुढ्डे नाले में जमा कचरे, पाइपों के जरिए नाले में गिर रहे गंदे पानी की फोटो भी दिखाई। लुधियाना डाइंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मांग की गई कि डाइंग उद्योग सीईटीपी के लिए अलॉट जगह का अब तक चार करोड़ दस लाख रुपये किराया सरकार को दे चुके हैं, लेकिन सरकारी फंड न मिलने से सीईटीपी शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में अदा कि या किराया उद्योग को वापस दिया जाए। जो भी कमी होगी दो माह में पूरी कर लेंगे एसोसिएशन के प्रधान अशोक मक्कड़ का कहना है कि सभी इकाइयां पानी मानकों के तहत ट्रीट कर रही हैं। यदि कोई कमी है उसे दो माह में दूर कर लिया जाएगा। प्रदूषण कम करने में सरकार को पूरा सहयोग किया जाएगा। सरकार की सुस्त चाल को उद्यमियों ने किया उजागर</p>
<p style="text-align:justify;">महासचिव बॉबी जिंदल ने कहा कि सरकार ने आठ साल पहले ताजपुर रोड पर 50 मिलियन लीटर डिस्चार्ज क्षमता का सीईटीपी लगाना मंजूर किया था। इसकी कुल लागत 55 करोड़ थी। इसमें से 15 करोड़ सब्सिडी केंद्र सरकार ने देनी थी, अभी तक एक पैसा भी नहीं मिला। साढ़े सात करोड़ रुपये सूबा सरकार ने देने थे, इसमें से कुछ रकम आई है। जबकि उद्यमियों ने अपनी जेब से 10 करोड़ सीईटीपी पर खर्च किये हैं, पांच करोड़ से सीवरेज डलवाए हैं। 14 करोड़ रुपये बैंक में जमा हैं जबकि दस करोड़ का लोन पास है। यदि सरकारें अपनी हिस्सेदारी दें तो सीईटीपी को तेजी से शुरू कर इंडस्ट्री के माथे से प्रदूषण का कलंक धोया जा सकता है। इस अवसर पर के शो राम विज समेत कई उद्यमी एवं अधिकारी मौजूद रहे।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 10:46:04 +0530</pubDate>
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                <title>नवाज शरीफ मामले की सुनवाई एक माह में पूरी करने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जवाबदेही अदालत को अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई एक माह में पूरी कर लिए जाने के आदेश दिये हैं। मुख्य न्यायाधीश मियां साकिब निसार की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने रविवार को यह आदेश दिये। न्यायालय ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nawaz-sharif-case-hearing-to-complete-in-one-month/article-4088"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/untitled-1-copy-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)। </strong>पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जवाबदेही अदालत को अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई एक माह में पूरी कर लिए जाने के आदेश दिये हैं। मुख्य न्यायाधीश मियां साकिब निसार की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने रविवार को यह आदेश दिये। न्यायालय ने शरीफ और उनकी पुत्री मरियम को लंदन जाने की भी अनुमति दी है , जहां श्रीमती शरीफ का इलाज चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष जुलाई में शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य ठहरा दिया था। इसके बाद सितम्बर में राष्ट्रीय जवाबदेही अदालत में शरीफ एवं उनके परिवार के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए छह माह की समय-सीमा निर्धारित की थी, लेकिन यह अवधि मार्च में दो माह और मई में एक माह के लिए बढ़ा दी गयी, जिसकी मियाद भी रविवार को समाप्त हो गयी। बहरहाल अदाल त ने सुनवाई पूरी करने के लिए और समय दिये जाने की मांग की है। पाकिस्तान के समाचारपत्र ‘डान’ की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी किये जाने के संदर्भ में छह सप्ताह का समय दिये जाने संबंधी श्री शरीफ के वकील ख्वाजा हरीश की याचिका खारिज कर दी और एक माह के भीतर अंतिम फैसला सुनाये जाने के आदेश दिये हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Jun 2018 14:14:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जंग-ए-आजादी यादगार को संपूर्ण करने के लिए 15 करोड़ मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब दिवस के अवसर पर यादगार देश को समर्पित करने के लिए सहमति दी चंडीगड़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जालंधर में करतारपुर में स्थित जंग -ए -आजादी के दूसरे चरण को संपूर्ण करने के लिए आज 15 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने की स्वीकृत दे दी है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/15-million-approved-to-complete-jang-e-azadi-memorial/article-3234"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/money.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">पंजाब दिवस के अवसर पर यादगार देश को समर्पित करने के लिए सहमति दी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगड़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जालंधर में करतारपुर में स्थित जंग -ए -आजादी के दूसरे चरण को संपूर्ण करने के लिए आज 15 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने की स्वीकृत दे दी है। इस यादगार का निर्माण कर रही पंजाब फ्रीडम मूवमैंट मेमोरियल फाउंडेशन की मीटिंग के पश्चात एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक नवंबर को पंजाब दिवस के अवसर पर यह यादगार देश को समर्पित करने की सहमति दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन अमरिंदर सिंह जो फाउंडेशन के चेयरमैन भी हैं, ने पंजाब बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड (पी.आई.डी.बी) को इस यादगार के निर्माण और रखरखाव के लिए 8.12 करोड़ रुपए के अप्रयोग फंड फाउंडेशन को प्रयोग की इजाजत देने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यादगार हमारी आज की पीढ़ी को अपनी पृष्टभूमि के साथ जोड़ेगी। पर्यटन मंत्री नवजोत सिद्धू ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का कार्य जून, 2017 में पूरा किया जा चुका है और दूसरे चरण का काम भी आगामी दो महीनों में मुकमल करने का भरोसा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस से पहले फाउंडेशन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के आगे प्रोजेक्ट के पहले पड़ाव की संपूर्णता पर प्रस्तुति दी। फाउंडेशन के सदस्य सचिव डा. बरजिंदर सिंह हमदर्द ने कहा कि इस यादगार ने भारतीय आजादी संघर्ष के महान योद्धाओं भाई महाराज सिंह से लेकर शहीद भगत सिंह की महानता को फिर बयान करने का विशेष मौका प्रदान किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 23:54:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जल्द सुलझे ‘नीट’ मामला, ताकि एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो</title>
                                    <description><![CDATA[नीट, यानी नेशनल इलिजिबिलिटी एंड इंट्रेंस टेस्ट, 2017 परीक्षा परिणाम की घोषणा का मार्ग प्रशस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने परिणामों की घोषणा पर रोक संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को स्थगित कर दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक परीक्षा परिणाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/soon-solution-neat-case-so-that-admission-process-is-complete/article-1231"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/neat-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीट, यानी नेशनल इलिजिबिलिटी एंड इंट्रेंस टेस्ट, 2017 परीक्षा परिणाम की घोषणा का मार्ग प्रशस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने परिणामों की घोषणा पर रोक संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को स्थगित कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक परीक्षा परिणाम का एलान, काउंसिलिंग और दाखिला करें। न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2011 में दिए उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें यह निर्धारित किया गया था</p>
<p style="text-align:justify;">कि ‘‘मेडिकल परीक्षा शेड्यूल को हाई कोर्ट नजरअंदाज नहीं कर सकता।’’ मौजूदा शेड्यूल के तहत सीबीएसई को 24 जून के पहले रिजल्ट जारी करना है। पीठ का इस बारे में साफ कहना था कि ‘‘मद्रास हाई कोर्ट का अंतरिम निर्णय आशीष रंजन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए आदेश के विपरीत है। लिहाजा वह इस अंतरिम आदेश को स्थगित करती है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">अलबत्ता परीक्षा परिणाम की घोषणा और उसके बाद होने वाली काउंसिलिंग और दाखिला न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के फैसले के अधीन होगा। यानी काउंसलिंग और दाखिला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। इसके साथ ही अदालत ने देश के सभी 24 हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि वे नीट परीक्षा 2017 से संबंधित किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है कि अदालत का हालिया आदेश, परीक्षा में शामिल हुए देश भर के 12 लाख अभ्यर्थियों के लिये राहत बनकर आया है। ये छात्र, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। फैसले के बाद उम्मीद बंधी है कि सीबीएसई दो हफ्ते के अंदर रिजल्ट जारी कर देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने नीट परीक्षा में समान प्रश्न पत्र नहीं दिये जाने और अंग्रेजी तथा तमिल भाषाओं के प्रश्न-पत्र अलग-अलग होने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पिछले महीने 24 मई को अपने एक फैसले में एमबीबीएस और बीडीएस पाठयक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली नीट परीक्षा परिणाम की घोषणा पर अंतरिम स्थगन लगा दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में उसने सीबीएसई को रिजल्ट का ऐलान नहीं करने का निर्देश दिया था। इस फैसले को सीबीएसई ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। अदालत में इस आदेश के खिलाफ सीबीएसई ने अपना पक्ष रखते हुए दलील दी कि ‘‘मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश की वजह से परीक्षा परिणाम घोषित करने और उसके बाद दाखिले की प्रक्रिया रूक गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही यह आदेश, उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले तय प्रक्रिया के साथ टकराव की स्थिति में है।’’ इस दलील को सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया। उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन आदेश देते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हम सिर्फ एक आधार पर उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन लगा रहे हैं। यह आदेश, परोक्ष तौर पर उच्चतम न्यायालय द्वारा तय कार्यक्रम को कमजोर कर रहा हैं।’’बहरहाल ग्रीष्मावकाश के बाद मामले में अगली सुनवायी होगी, जिसमें यह तय होगा कि कौन सही है और कौन गलत ?</p>
<p style="text-align:justify;">नीट का आयोजन मेडिकल, डेंटल कॉलेज, आयुष और वेटेरिनरी में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस संयुक्त प्रवेश परीक्षा के द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल आॅफ इंडिया और डेंटल कांउसिल आॅफ इंडिया द्वारा संचालित किए जाते हैं। इससे पहले यह परीक्षा आॅल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) कहलाती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह परीक्षा भी देश भर में एक साथ आयोजित होती थी। इस परीक्षा में आए अंकों के आधार पर ही छात्रों को केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मेडिकल संस्थानों में प्रवेश दिया जाता था। सर्वोच्च न्यायालय के एक अहम् फैसले के बाद सरकार ने पिछले साल ही पारदर्शिता व मेडिकल शिक्षा में उच्च मानक स्थापित करने और छात्रों को कई परीक्षाओं के बोझ से बचाने के लिए, देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक परीक्षा ‘नीट’ आयोजित कराने का फैसला लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल 7 मई को देश भर के करीब 104 शहरों में पहली बार यह परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें पूरे देश से तकरीबन 11 लाख 39 हजार छात्रों ने नीट की परीक्षा दी। इस साल नीट का इम्तिहान हिंदी और अंग्रेजी के अलावा दीगर 8 भारतीय भाषाओं में भी हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा पूरी तरह से पारदर्शी हो, इसके लिए सीबीएसई ने कड़े नियम बनाए, जिसमें ड्रेस कोड से लेकर पेन, पेंसिल को लेकर तक कई नियम शामिल थे। सीबीएसई की यह सख्ती काम आई और इतनी बड़ी परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुर्ई। लेकिन बाद में कुछ विवाद पैदा हो गए। मसलन कुछ लोगों का कहना था कि परीक्षा होने से पहले पेपर लीक हो गया था। वहीं दूसरा विवाद, स्थानीय भाषा में पेपर को लेकर था।</p>
<p style="text-align:justify;">मद्रास हाई कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट में कुछ छात्रों ने अलग-अलग याचिका दाखिल कर कई सवाल उठाए। इन याचिकाओं में यह बात कही गई कि स्थानीय भाषाओं तमिल और गुजराती में पूछे गए सवाल अंग्रेजी के मुकाबले कठिन थे और उनके साथ नाइंसाफी हुई है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि एक ही परीक्षा के अलग-अलग प्रश्नपत्र बनाकर सीबीएसई ने संविधान के अनुच्छेद-14 के तहत छात्रों के समानता के अधिकार का उल्लंघन किया है। नीट के तहत यह चयन, समान कौशल का परीक्षण नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा अदालत, नीट 2017 को रद्द कर, एक समान प्रश्नपत्र के साथ नए सिरे से परीक्षा आयोजित कराए। जब मामला ज्यादा बढ़ गया और इस संबंध में मद्रास हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा परिणाम की घोषणा पर अंतरिम स्थगन लगा दिया, तो सीबीएसई हरकत में आई और उसने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई।</p>
<p style="text-align:justify;">अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग पेपर को लेकर जो विवाद है, उसके संबंध में सीबीएसई का कहना है कि सभी पेपरों को मडरेटरों ने तय करके एक ही लेवल का निकाला था और सभी भाषाओं में पेपर का डिफिकल्टी लेवल एक जैसा ही था। यही नहीं स्थानीय भाषाओं में पेपर का अनुवाद करने से ज्यादा लोग पूरी प्रक्रिया में जुड़ेंगे और इससे पेपर लीक होने की संभावना बढ जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा उसने स्थानीय भाषा में अलग पेपर बनवाए। सीबीएसई की इन बातों में दम भी है। इस साल नीट के इम्तिहान में सिर्फ 9.25 फीसदी छात्रों ने ही स्थानीय भाषा में परीक्षा दी, बाकी छात्र हिंदी और अंग्रेजी भाषा के साथ परीक्षा में बैठे। अगर स्थानीय भाषा का कोई पेपर लीक भी हो जाता, तो ऐसी स्थिति में अन्य 90 फीसदी छात्रों की दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ती।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल सर्वोच्च न्यायालय, सीबीएसई की इन दलीलों से कितना सहमत होता है, यह तो अगली सुनवाई में ही तय होगा। पर उसके हालिया आदेश से उन लाखों छात्रों ने जरूर राहत की सांस ली है, जो परीक्षा देने के बाद से ही रिजल्ट का इंतजार दिन-रात कर रहे थे। नीट परीक्षा से पचास हजार छात्रोंं का भविष्य जुड़ा हुआ है। जितनी जल्दी ये मामला सुलझेगा, उतनी ही जल्दी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया पूरी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-जाहिद खान</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2017 23:20:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमा ए सच लिखणीया सै भाई ‘सच कहूँ’</title>
                                    <description><![CDATA[आस-पास की खबरां कै गेल्यां बतावै सै दुनिया का हाल कुरुक्षेत्र(देवीलाल बारना)। एक बात सै भाई रूलदू, जद तै दैनिक सच कहूँ अखबार लोगां के बीच मंै पहुंचण लाग्या सै। तब तै बालक पूरे चाव तै अखबार पढ़ण लागे सैं। इतना ही नहीं सच कहूँ बालकां की पढ़ाई के साथ-साथ मनोरजंन भी कराण का काम करैं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/fifteen-years-complete-of-sach-kahoon/article-1121"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/chopal-1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">
<h2><strong>आस-पास की खबरां कै गेल्यां बतावै सै दुनिया का हाल</strong></h2>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र(देवीलाल बारना)। </strong>एक बात सै भाई रूलदू, जद तै दैनिक सच कहूँ अखबार लोगां के बीच मंै पहुंचण लाग्या सै। तब तै बालक पूरे चाव तै अखबार पढ़ण लागे सैं। इतना ही नहीं सच कहूँ बालकां की पढ़ाई के साथ-साथ मनोरजंन भी कराण का काम करैं सै। या बात दैनिक सच कहूँ पढते होए चौपाल मै बैठया ताऊ रामलाल रूलदूं गेल्या बतलाण लाग रया था। ताऊ की बात सुणकै नै दो साल पहलां इंजिनियर बणया वैभव भी ताऊ के धोरै आकै बोल्या के ताऊ ठीक कह सै।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इसतै भी खुशी की बात तो या सै के आज दैनिक सच कहूं नै शुरू होए नै पूरे 15 साल हो लिए। 15 साल की बात सुणकै नै ताऊ रामलाल अचंभित होकै बोल्या के अच्छा भाई, अखबार शुरू होए नै 15 साल हो लिए! जमाए कल की बात लागै सै भाई। घणा लंबा सफर तय कर ग्या भाई इब तो सच कहूँ। वैभव फेर बोल्या के आज तै 15 साल पहलां जिब सच कहूँ साप्ताहिक अखबार के रूप मैं शुरू होया था। तब मै सातवीं कक्षा मैं पढ़या करता। पूज्य गुरु जी नै सच कहूँ अखबार शुरू करवा कै लोगां पै उपकार करण का काम करया सै। पूज्य गुरु जी द्वारा सच कहूँ के रूप मै लगाया गया छोटा सा पौधा आज उनकी रहमत तै जमा फल-फूल रहया सै।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आज दैनिक सच कहूँ की अनेकों शाखाएं पाठकां तार्इं नई-नई सामग्री देवण का काम कर री सैं</h3>
<p style="text-align:justify;">आज दैनिक सच कहूँ की अनेकों शाखाएं पाठकां तार्इं नई-नई सामग्री देवण का काम कर री सैं। साप्ताहिक शुरू हो या सच कहूँ अखबार पहलां 12 पेज का दैनिक अखबार बणया, इसके बाद चार पेज रंगीन बणे, अर इब 6 पेज रंगीन होगे सैं। ताऊ मेरे आज भी याद सै जिब मै दसवीं कक्षा मै पढ़या करता तो दैनिक सच कहूँ ने ही मेरे अंदर कलम चलाण का जज्बा भरया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उस टैम दैनिक सच कहूँ मैं आपकी सोच एक कॉलम शुरू करया था। जिसमें पाठक अपणे-अपणे विचार भेज्या करते। उन पाठकां मै वैभव भी एक नाम था। उस टैम की लिखण की आदत आज मेरी सफलता का बहुत बड़ा कारण सै। आज मंै जो इंजीनियर बणया सूृँ, इसमैं कहीं ना कहीं सच कहूँ का बहुत बड़ा हाथ सै। इब ताऊ रूलदू बोल्या के ठीक कह सै भाई रामलाल सच कहूँ जिब तै घरां मे आवण लागया सै।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दैनिक सच कहूँ मैं तै रूहानी मजलिस पढ़ कै नै सारा टाबर खुशी तै झूमै सै</h3>
<p style="text-align:justify;">घर मंै खुशी का माहौल रह सै। दैनिक सच कहूँ मैं तै रूहानी मजलिस पढ़ कै नै सारा टाबर खुशी तै झूमै सै। सच कहूँ आस-पास की खबरां दिखावण के साथ-साथ विश्व का पूरा हाल बतावै सै। नौजवानां नै करियर गाइडस के माध्यम तै सही राह दिखावै सै। किसान भाई भी कृषि जगत पढ़कै आधुनिक खेती की राह पै चालण लाग रे सैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हारी-बिमारी भी सारे घरां मैं गेल्यां लाग री सैं, इसके लिए भी स्वास्थ्य के टिप्स दिए जा सैं। घर की लुगाईयां ताईं घर-रसोई के टिप्स दिए जा सैं। सच कहूँ का साहित्य जगत पेज पढ़कै साहित्य का भी बोध होवै सै। इसके अलावा भी शनिवार नै जिब तुतलाती जुबाँ पेज सच कहूँ मैं आवै सै तो घर के बालकां का तो ठिकाना ही ना रहता। आजकल एक फोटो कैप्शन प्रतियोगिता चला राखी सै जिसके माध्यम तै कविता लिखण का जोश युवाओं मैं भरण लाग रया सै। भाई साची, सच कहूँ तो जमाए काम की चीज सै।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/fifteen-years-complete-of-sach-kahoon/article-1121</link>
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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2017 01:32:42 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने चुनावी वायदों को पूरा नहीं किया: राम सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[9 को प्रदेश भर में डीसी दफ्तर घेरेंगे किसान मानसा (सच कहूँ न्यूज)। चुनाव के समय कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा किए गए वायदों को लागू करवाने को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता उगरांहा 9 जून को प्रदेश के समूह डीसी कार्यालय के आगे एक दिवसीय धरना देने का ऐलान किया है। जानकारी देते जिला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">9 को प्रदेश भर में डीसी दफ्तर घेरेंगे किसान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> चुनाव के समय कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा किए गए वायदों को लागू करवाने को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता उगरांहा 9 जून को प्रदेश के समूह डीसी कार्यालय के आगे एक दिवसीय धरना देने का ऐलान किया है। जानकारी देते जिला प्रधान राम सिंह भैणीबाघा ने कहा कि जत्थेबंदी किसानों के सिर चढ़े कर्ज को खत्म करवाने व नौजवानों के लिए रोजगार की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष करती आ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव मैनिफेस्टों में जो वायदे किए गए थे कि किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा, नौजवानों को रोजगार दिया जाएगा लेकिन कैप्टन सरकार बने तीन माह से ज्यादा का समय हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब कि कर्ज खत्म करने के लिए कमेटियां बना कर टाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि तीन माह के दौरान दर्जनों किसान आत्महत्या कर चुके है । किसान नेताओं ने कहा कि किसानों सिर चढे कर्ज को तुरंत खत्म करवाने ,किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या को रोकने व बेरोजगारी की मार झेल रहे नौजवानों को रोजगार की मांग को लेकर 9 जून को समूह डीसी कार्यालय के समक्ष धरने लगाकर सरकार की टाल मटोल वाली नीति के खिलाफ रोष प्रकट किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2017 07:40:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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