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                <title>Milkha Singh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जानें, कैसे पड़ा मिल्खा सिंह का नाम &amp;#8216;फ्लाइंग सिख&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान में हुई उस दौड़ की कहानी जिसके बाद ‘फ्लाइंग सिख’ कहे जाने लगे मिल्खा सिंह (Milkha Singh History) नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उड़न सिख’ के नाम से मशहूर महान भारतीय धावक मिल्खा सिंह का शुक्रवार रात को जानलेवा कोरोना वायरस के चलते निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। उनके परिवार के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/know-how-milkha-singh-got-the-name-flying-sikh/article-24568"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/bhaag-milkha-bhaag.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>पाकिस्तान में हुई उस दौड़ की कहानी जिसके बाद ‘फ्लाइंग सिख’ कहे जाने लगे मिल्खा सिंह (Milkha Singh History)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उड़न सिख’ के नाम से मशहूर महान भारतीय धावक मिल्खा सिंह का शुक्रवार रात को जानलेवा कोरोना वायरस के चलते निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। उनके परिवार के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। उनके परिवार में तीन बेटियां डॉ मोना सिंह, अलीजा ग्रोवर , सोनिया सांवल्का और एक बेटा तथा जाने माने गोल्फर जीव मिल्खा हैं। 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन और 1960 के रोम ओलम्पिक की 400 मीटर दौड़ में रिकार्ड तोड़ने के बावजूद पदक से चूके मिल्खा सिंह ने चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में शुक्रवार रात को अपनी अंतिम सांस ली। उन्होंने 1956 और 1964 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें 1959 में पद्मश्री से नवाजा गया था। मिल्खा सिंह को लोग उन्हें फ्लाइंग सिख भी कहते हैं। आईये जानते हैं कि उन्हें फ्लाइंग सिख क्यों कहा जाता है?</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने फ्लाइंग सिख का दिया था नाम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिल्खा सिंह ने गोल्ड मेडल जीता था। ये आजाद भारत का ये पहला गोल्ड मेडल था। इसके बाद आया 1960 का रोम ओलिंपिक जिसमें मिल्खा सेकेंड के 100वें हिस्से से पदक से चूक गए थे। फिर 1960 में ही उन्हें पाकिस्तान के इंटरनैशनल ऐथलीट कंपीटीशन में न्योता मिला। मिल्खा के मन में बंटवारे का दर्द उस वक्ततक था। वो पाकिस्तान जाना नहीं चाहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समझाने पर उन्होंने पाकिस्तान जाने का फैसला किया। पाकिस्तान में उस समय अब्दुल खालिक का जोर था। खालिक वहां के सबसे तेज धावक थे। दोनों के बीच जबरदस्त दौड़ हुई और मिल्खा ने खालिक को हरा दिया। पाकिस्तान में पूरा स्टेडियम अपने हीरो का जोश बढ़ा रहा था, लेकिन मिल्खा की रफ्तार के आगे खालिक टिक नहीं पाए। मिल्खा की जीत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को ‘फ्लाइंग सिख’ का नाम दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मिल्खा सिंह का संघर्ष</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">15 वर्ष की आयु में मिल्खा सिंह को भागना पड़ा था जब उनके माता-पिता की विभाजन के दौरान हत्या हो गई थी। उन्होंने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर जूते पॉलिश किए और ट्रेनों से सामान चुराकर गुजर-बसर किया। वह जेल भी गए और उनकी बहन ईश्वर ने अपने गहने बेचकर उन्हें छुड़ाया।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jun 2021 17:40:20 +0530</pubDate>
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