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                <title>Kalyan Singh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने क्यों छोड़ी थी भाजपा?</title>
                                    <description><![CDATA[दलित पिछड़ों की आवाज कल्याण के दिल में बसता था राम मंदिर लखनऊ (सच कहूँ न्यूज)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन दलित पिछड़ों की राजनीति से लेकर राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान देने के कारण वह खासकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/why-did-former-up-cm-kalyan-singh-leave-bjp/article-26226"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/kalyan-singh1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">दलित पिछड़ों की आवाज कल्याण के दिल में बसता था राम मंदिर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन दलित पिछड़ों की राजनीति से लेकर राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान देने के कारण वह खासकर भाजपा के नेताओं और कार्यकतार्ओं के दिलों में सदियों तक जीवित रहेंगे। एक जमाने में हिन्दू ह्रदय सम्राट के नाम से जाने वाले कल्याण सिंह की राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। उनके मुख्यमंत्री रहते हुए छह दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरी थी और इस मामले में उन्हें एक दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था। भाजपा के सबसे पहले और सबसे सशक्त ओबीसी नेताओं में कल्याण सिंह का नाम आता है। प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल में 1990 में जब मंडल-कमंडल की राजनीति शुरू हुई, तब ही बीजेपी ने राम मंदिर निर्माण आंदोलन को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर हाथ में लिया। देश में राजनीति दो हिस्सों में बंट गई, एक तरफ मंडल की राजनीति करने वाले और दूसरे मंदिर की राजनीति के साथ,लेकिन कल्याण सिंह देश के शायद इकलौते राजनेता होगें जिन्होंने दोनों राजनीति एक साथ की। बीजेपी में सोशल इंजीनियरिंग को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में कल्याण सिंह का नाम सबसे ऊपर गिना जाता है। पिछड़ों और दलितों की आवाज उठाने के साथ कल्याण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन में परोक्ष और अपरोक्ष रूप से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कल्याण सिंह यूपी के दो बार सीएम बनें</h3>
<p style="text-align:justify;">कल्याण सिंह आठ बार विधायक भी रहे, दो बार यूपी के मुख्यमंत्री,एक बार लोकसभा सांसद और फिर राजस्थान के साथ हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की भूमिका का भी निर्वहन किया। मुख्यमंत्री के तौर पर यूपी में नकल रोकने के लिए कड़ा कानून बनाया और नाराजगी झेलनी पड़ी। उस वक्त शिक्षा मंत्री थे राजनाथ सिंह। 1991 में बीजेपी को यूपी में 425 में से 221 सीटें मिली थी,शपथ लेने के बाद पूरे मंत्रिमंडल के साथ पहुंचे अयोध्या और शपथ ली- ‘कसम राम की खाते हैं, मंदिर यहीं बनाएंगें’,अगले साल कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिरा दी और कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। तब के प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने शाम को उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया। फिर 1993 में जब चुनाव हुए तो बीजेपी की सीटें तो घट गईं, लेकिन वोट बढ़ गए। बीजेपी की सरकार नहीं बन पाई। साल 1995 में बीजेपी और बीएसपी ने मिलकर सरकार तो बनाई,लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">17 अक्टूबर 1996 को जब 13वीं विधानसभा बनी</h3>
<p style="text-align:justify;">बाद में बीजेपी ने हाथ खींच कर सरकार गिरा दी। एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहा। 17 अक्टूबर 1996 को जब 13वीं विधानसभा बनी तो लेकिन किसी को बहुमत नहीं मिला, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन सीटें 173 मिली जिससे सरकार नहीं बन सकती थी। समाजवादी पार्टी को 108, बीएसपी को 66 और कांग्रेस को 33 सीटें मिली । तब के राज्यपाल रोमेश भंडारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन छह महीने और बढ़ाने की सिफारिश कर दी । एक साल से पहले ही राष्ट्रपति शासन चल रहा था । सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए केन्द्र के राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने के निर्णय को मंजूरी दे दी। लेकिन 1997 में हिन्दुस्तान की राजनीति में नया प्रयोग हुआ अगड़ों और पिछड़ों की पार्टी ने 6-6 महीने सीएम रहने के लिए हाथ मिला लिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वाजपेयी और कांशीराम के बीच समझौता</h3>
<p style="text-align:justify;">वाजपेयी और कांशीराम के बीच हुए इस समझौते के बाद मायावती पहले छह महीने के लिए मुख्यमंत्री बनी थी, लेकिन छह महीने बाद जब कल्याण सिंह का नंबर आया तो एक महीने बाद ही बीएसपी ने समर्थन वापस ले लिया,इस कहानी के बाद क्या हुआ सब जानते हैं कि किस तरह कल्याण सिंह ने कांग्रेस और बीएसपी को तोड़कर अपनी सरकार बचा ली। वाजपेयी और बीजेपी से रिश्तों में खटास आने के बाद से कल्याण सिंह को हटाने की मांग होने लगी और 12 नवम्बर 1999 को कल्याण सिंह का इस्तीफा हो गया और रामप्रकाश गुप्त को सीएम बनाया गया। नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि पार्टी ने पहले सस्पेंड किया और फिर 09 दिसम्बर 1999 को उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कल्याण सिंह ने नई पार्टी बना ली</h3>
<p style="text-align:justify;">कल्याण सिंह ने नई पार्टी बना ली ,लेकिन साल 2002 के चुनाव में उन्हें सिर्फ़ चार सीटें मिली। अगस्त 2003 में यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार में कल्याण सिंह की पार्टी शामिल हो गई। साल 2004 के चुनाव में कल्याण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने चुनाव लड़ा ,लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, पार्टी तीसरे नंबर रही फिर दोनों एक दूसरे से अलग हो गए। साल 2009 का लोकसभा चुनाव कल्याण सिंह ने एसपी के समर्थन से लड़ा और लोकसभा पहुंचे,लेकिन मुलायम सिंह को नुकसान हुआ, दोनों नेताओं के बीच दोस्ती खत्म हो गई। कल्याण सिंह फिर से अपनी पार्टी को मजबूत करने लगे ,साल 2012 में यूपी में उन्होंनें बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा ,लेकिन उनकी पार्टी हार गई और बीजेपी भी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पीएम मोदी के आने से कल्याण सिंह की भाजपा में हुई वापसी</h3>
<p style="text-align:justify;">और साल 2014 में जब बीजेपी में राष्ट्रीय स्तर पर नरेन्द्र मोदी आए तो कल्याण सिंह की एक बार फिर बीजेपी में वापसी हो गई। इस बार उन्होंने कसम खाई कि ‘जिदगी की आखिरी सांस तक अब बीजेपी का रहूंगा’। कल्याण सिंह को राज्यपाल बना कर राजस्थान भेज दिया गया। जयपुर राजभवन में भी उनका मन लखनऊ की राजनीति में लगा रहा। राजभवन के बाद वे फिर से यूपी की राजनीति में सक्रिय हो गए।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Aug 2021 12:24:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जानें, कल्याण सिंह ने 6 दिसम्बर 1992 को क्यों दिया था इस्तीफा?</title>
                                    <description><![CDATA[रामराज्य की परिकल्पना के साथ कल्याण ने किया था एसटीएफ का गठन लखनऊ (एजेंसी)। कोमल हृदय मगर राजनीति में शुचिता बरकरार रखने के लिये कठिन फैसले लेने में तनिक भी देर नहीं करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिवंगत नेता कल्याण सिंह ने अपने मुख्यमंंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश में पुलिस की स्पेशल टास्क […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/know-why-did-kalyan-singh-resign-on-6-december-1992/article-26223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/statement-the-demolition-of-babri-masjid-is-not-a-conspiracy-it-is-the-result-of-suppressing-the-sentiments-of-crores-of-hindus-kalyan-singh.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">रामराज्य की परिकल्पना के साथ कल्याण ने किया था एसटीएफ का गठन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> कोमल हृदय मगर राजनीति में शुचिता बरकरार रखने के लिये कठिन फैसले लेने में तनिक भी देर नहीं करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिवंगत नेता कल्याण सिंह ने अपने मुख्यमंंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश में पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन कर राज्य में कानून व्यवस्था के खिलाफ खिलवाड़ करने वालों को सख्त संदेश दिया था। वर्ष 1991 में प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर सिंह ने अपने करीब डेढ़ वर्ष के संक्षिप्त कार्यकाल में 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी विध्वंस के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया था। अपने दूसरे कार्यकाल में श्री सिंह ने 21 सितम्बर 1997 को शपथ ग्रहण करने के बाद चार मई 1998 को एसटीएफ का गठन कराया और उसे पहला टास्क आतंक का पर्याय बने गोरखपुर के दुर्दांत माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला की दहशत को खत्म करने का दिया था। सिंह के इस निर्णय की परिणाम जल्द सामने आया जब 22 सितंबर 1998 में गाजियाबाद में एसटीएफ ने एक मुठभेड़ में श्रीप्रकाश शुक्ला को मार गिराया। नब्बे के दशक में श्रीप्रकाश का आतंक यूपी के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार में भी था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एसटीएफ की यह मुहिम आज भी जारी</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद एसटीएफ ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई माफियाओं और दुर्दांत अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर कर प्रदेश में शांति का माहौल बनाने में अहम योगदान दिया। एसटीएफ की यह मुहिम आज भी जारी है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने बताया कि श्रीप्रकाश के खात्मे के बाद एसटीएफ ने निर्भय गुर्जर, ददुआ, ठोकिया जैसे तमाम अपराधियों का सफाया किया।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Aug 2021 11:36:12 +0530</pubDate>
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                <title>कल्याण सिंह की सेहत में सुधार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। लखनऊ के संजय गांधी स्नानाकोत्तर आर्युविज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हालत नाजुक बनी हुई है। संस्थान के निदेशक प्रो आर के धीमान ने रविवार को बताया कि पिछले कुछ दिनो से सिंह की हालत गंभीर बनी हुई है जिसके चलते उन्हे जीवन रक्षक प्रणाली पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/kalyan-singh-health-does-not-improve/article-25483"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/kalyan-singh-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> लखनऊ के संजय गांधी स्नानाकोत्तर आर्युविज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हालत नाजुक बनी हुई है। संस्थान के निदेशक प्रो आर के धीमान ने रविवार को बताया कि पिछले कुछ दिनो से सिंह की हालत गंभीर बनी हुई है जिसके चलते उन्हे जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। चिकित्सक बुजुर्ग नेता के स्वास्थ्य पर पैनी नजर रखे हुये है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह को पिछली चार जुलाई को एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत में सुधार हो रहा था लेकिन 17 जुलाई को सांस की तकलीफ के कारण उन्हे नान इनवेसिव वेंटिलेशन पर रखा गया था। हालत में सुधार नहीं होने के कारण उन्हे जीवन रक्षक प्रणाली पर ले जाया गया था। प्रो. धीमान ने कहा कि सीसीएम कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी,न्यूरोलाजी और इंडोक्रिनोलाजी के विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम सिंह के स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी कर रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सिंह की सेहत को लेकर प्रधानमंत्री चिंतित</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को तीन जुलाई को लखनऊ के डा राममनोहर लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया था जहां हालत में सुधार नहीं होने पर अगले दिन यानी चार जुलाई को उन्हे एसजीपीजीआई में ट्रांसफर किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार अस्पताल पहुंच कर कल्याण सिंह के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब तीन बार अस्पताल आकर बुजुर्ग नेता का हालचाल ले चुके है। सिंह की सेहत को लेकर चिंतित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके पुत्र राजवीर सिंह से बात की थी जबकि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सिंह को देखने अस्पताल आये थे।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 25 Jul 2021 16:09:51 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह के निधन की उड़ी अफवाह, डॉक्टरों ने कहा-उनकी हालत पहले से बेहतर</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हालत पहले से बेहतर है। संस्थान ने शुक्रवार सुबह एक विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी जिसमें कहा गया है कि श्री सिंह आईसीयू की क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती है और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-news-of-the-death-of-former-governor-kalyan-singh-in-social-media-is-false/article-25008"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/kalyan-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हालत पहले से बेहतर है। संस्थान ने शुक्रवार सुबह एक विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी जिसमें कहा गया है कि श्री सिंह आईसीयू की क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती है और उनकी सेहत स्थिर बनी हुयी है। उनके स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हो रहा है और उनके महत्वपूर्ण पैरामीटर स्थिर है। वह अब लोगों को पहचानने लगे है और बात करने की कोशिश कर रहे है। उनका इलाज कार्डियोलाजी,न्यूरोलाजी,इंडोक्रिनोजाली और नेफ्रोलाजी के विशेष चिकित्सकों की देखरेख में हो रहा है। वहीं सोशल मीडिया में कल्याण सिंह के निधन को लेकर जो भी खबरें चल रही हैं वो झूठी हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बुजुर्ग नेता को शरीर में सूजन की वजह से पहले डा राममनोहर लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया था जहां उनकी हालत गंभीर होने पर एसजीपीजीआई ट्रांसफर किया गया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरूवार देर शाम अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी और चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी हासिल की थी। इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी भाजपा के वरिष्ठ नेता को देखने यहां आ चुके है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अस्पताल पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की निरंतर जानकारी ले रहे है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 09 Jul 2021 10:32:25 +0530</pubDate>
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