<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/smoking/tag-192" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>smoking - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/192/rss</link>
                <description>smoking RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Quitting Smoking: धूम्रपान छोड़ने से, डायबिटीज व अन्य स्वास्थ्य जोखिमों में आएगी कमी</title>
                                    <description><![CDATA[Quitting Smoking: नशे को व्यक्ति की नाश की जड़ माना गया है। ऐसा हमारे सभी धर्मों के साथ-साथ विज्ञान भी मानता है। इसके बावजूद भी भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर नशा बढ़ता जा रहा है। नशा न सिर्फ मनुष्य का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है बल्कि यह विभिन्न प्रकार की बीमारियों की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/benefits-of-quitting-smoking/article-54844"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/smoking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Quitting Smoking: नशे को व्यक्ति की नाश की जड़ माना गया है। ऐसा हमारे सभी धर्मों के साथ-साथ विज्ञान भी मानता है। इसके बावजूद भी भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर नशा बढ़ता जा रहा है। नशा न सिर्फ मनुष्य का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है बल्कि यह विभिन्न प्रकार की बीमारियों की वजह भी बनता है। ऐसी बीमारियों में दिल व फेफड़े के रोगों के अलावा डायबिटीज रोग भी शामिल है। यदि आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो 3 साल पहले तक नशे की गिरफत में आ चुके अफगानिस्तान जैसे देश में 85 फ़ीसदी अफीम की खेती में कमी आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन भारत में नशे की खपत लगातार बढ़ती जा रही है, जो चिंता का विषय है। ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी’ के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 7.5 लाख लोगों की मौत अवैध ड्रग्स की वजह से हुई। जिनमें से वैध नशे के कारण मौतों का आंकड़ा अलग है। इनमें से लगभग 22000 मौतें भारत में हुईं। सबसे चिंताजनक यह है कि देश में पारंपरिक नशे जैसे कि तम्बाकू,शराब,अफीम के अलावा सिंथेटिक ड्रग्स स्मैक, हिरोइन, आइस, कोकीन, मारिजुआना आदि का सेवन तेज़ गति से बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ऑफिस ऑफ ड्रग एंड कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में पूरी दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कुल गांजा का 6 प्रतिशत यानी लगभग 300 टन गांजा अकेले भारत में जब्त किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं 2017 में यह मात्रा बढ़कर 353 टन पर पहुँच गया। वहीं चरस की यदि बात की जाए तो 2017 में 3.2 टन चरस जब्त की गई। वर्तमान में नशे के कारोबार का सटीक आंकड़ा उपलब्ध ही नहीं है, लेकिन विभिन्न एजेंसियों से जुड़े आंकड़ों का अनुमान है कि भारत में नशे सालाना अवैध कारोबार लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का है। यदि वैध कारोबार को इसमें शामिल कर दिया जाए तो नशे का कारोबार बड़े स्तर पर फल-फूल रहा है जिसका लाइसेंस स्वयं सरकार देती है जिम शराब भी शामिल है। वैसे तो सभी प्रकार के नशे मानव शरीर को खोखला कर देते हैं। यदि इन नशों से सिर्फ धूम्रपान को छोड़ दिया जाए तो फिर भी डायबिटीज दिल के रोगों में फेफड़े के रोगों में भारी कमी आ सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ड्रग्स के मामले में भारत की स्थिति खराब | Quitting Smoking</h3>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं भारत में ओपिओड का नशे के रूप में इस्तेमाल ग्लोबल और एशियाई औसत से भी काफी अधिक है। हालांकि कैनबिस, एटीएस और कोकीन जैसे नशे के उपयोग का चलन यहां कम है। फिर भी देश की युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में ज्यादा बढ़ गया है। प्रारंभिक तौर पर युवा नशे को शौकिया तौर पर शुरू करते हैं,जो बाद में लत के रूप में बदल जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दुनिया में 46 करोड़ से अधिक डायबिटीज के रोगी</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व भर में 46 करोड़ से अधिक लोग, डायबिटीज़ की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे हैं और करोड़ों अन्य पर इसकी चपेट में आने का जोखिम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन मंगलवार को ‘विश्व डायबिटीज़ दिवस’ के अवसर पर आगाह किया है कि इंसुलिन की खोज के 100 वर्ष बाद, लाखों लोगों के लिए ज़रूरी देखभाल अब भी सुलभ नहीं है, जिससे गम्भीर जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी और साँझीदार संगठनों के एक सांझे अध्ययन के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने से डायबिटीज़ की चपेट में आने और उसके स्वास्थ्य जोखिमों में कमी लाई जा सकती है। पर इसके प्रति संबंधित व्यक्ति की इच्छाशक्ति का होना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">डायबिटीज़ (मधुमेह) लम्बे समय तक जारी रहने वाली एक बीमारी है। यह शरीर में अग्नाश्य द्वारा पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन नहीं बना पाने या फिर इन्सुलिन का कारगर ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाने की वजह से होती है और धूम्रपान या अन्य नशों से यह स्थिति गंभीर बनती जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डायबिटीज़, रक्त में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ने की एक ऐसी अवस्था है, जिसका देर से पता चलने, या सही ढँग से उपचार ना किए जाने से, हृदय, रक्त धमनियों, आँखों, गुर्दों और स्नायुतन्त्रों को गम्भीर नुक़सान पहुँच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवस्था में लोगों को निरन्तर देखभाल व समर्थन की आवश्यकता होती है, ताकि इससे होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके।डायबिटीज़ के कारण दृष्टिहीनता, गुर्दे ख़राब होने, हृदयाघात होने और शरीर के कुछ अंगों को काटने समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ पेश आ सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डायबिटीज़ के दो प्रकार | Type of Diabetes</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्वभर में डायबिटीज के 2 प्रकार मिलते हैं। टाइप 2 डायबिटीज़ की रोकथाम सम्भव नहीं है,मगर स्वस्थ आहार, शारीरिक सक्रियता और तम्बाकू का सेवन नहीं करने से टाइप 2 डायबिटीज़ से बचा जा सकता है या रोग को पूरी तरह होने में देरी की जा सकती है। चिकित्सकों को भी डायबिटीज के प्रकार जाँच कर ही दवाई शुरू करनी चाहिए, ऐसा नहीं किया जाता। जिसकी वजह से डायबिटीज पीड़ित लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी जारी की है कि विश्व भर में इस बीमारी का फैलाव, 1980 के बाद से अब तक लगभग दोगुना हो चुका है। वयस्क आबादी में यह 4.7 प्रतिशत से बढ़कर 8.5 प्रतिशत तक पहुँच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये आँकड़े, अधिक वज़न होने या मोटापे की अवस्था में जीवन गुज़ारने वाले लोगों की संख्या में हुई वृद्धि को दर्शाते हैं। पिछले एक दशक में,उच्च-आय वाले देशों की तुलना में निम्न-और मध्य-आय वाले देशों में डायबिटीज़ के मामले ज़्यादा तेज़ी से बढ़े हैं। स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए कार्यालय ने डायबिटीज़ की चुनौती पर पार पाने के लिये चार उपाय अहम बताए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहला, देखभाल सेवा कवरेज में मौजूदा कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध लक्ष्यों को स्थापित किया जाना। इस क्रम में,समता को सुनिश्चित किया जाना अहम होगा।दूसरा, कारगर, किफ़ायती और सन्दर्भ के अनुरूप उपयुक्त उपायों की पहचान करते हुए, उन्हें अमल में लाया जाना होगा।तीसरा, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवा को मज़बूती प्रदान करनी होगी, ताकि समय पर निदान, जाँच, और गुणवत्तापरक देखभाल बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध व सुलभ हो। सभी देशों को राष्ट्रीय पैकेज में अति-आवश्यक दवाओं और प्राथमिकता वाले उपकरणों की सुलभता को बढ़ावा देना होगा, जिनमें इन्सुलिन भी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">धूम्रपान और डायबिटीज़ | Smoking and Diabetes</h3>
<p style="text-align:justify;">यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और सांझेदार संगठनों द्वारा तैयार एक नीतिपत्र के अनुसार, धूम्रपान की आदत त्यागने से टाइप 2 डायबिटीज़ के ख़तरे को 30-40 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। बताया गया है कि धूम्रपान छोड़ने से ना केवल टाइप-2 डायबिटीज़ की चपेट में आने के जोखिम में कमी आती है, बल्कि मधुमेह से होने वाली जटिलताओं का जोखिम भी कम होता है। तथ्य दर्शाते हैं कि धूम्रपान करने से, शरीर की रक्तचाप के स्तर को नियमित करने की क्षमता प्रभावित होती है, जोकि टाइप-2 डायबिटीज़ की वजह बन सकता है। Quitting Smoking</p>
<p style="text-align:justify;">धूम्रपान से डायबिटीज़-सम्बन्धी जटिलताओं, जैसेकि हृदयवाहिनी सम्बन्धी रोग, गुर्दे ख़राब होने और दृष्टिहीनता का ख़तरा भी बढ़ जाता है, और घावों के भरने में अधिक समय लगता है। इन्हीं सभी तथ्यों व आंकड़ों पर गौर करते हुए धूम्रपान को तुरंत प्रभाव से छोड़ देना मानव शरीर के लिए उचित होगा, नहीं तो भविष्य में डायबिटीज के मरीज दुनिया भर में इतनी बढ़ जाएंगे कि इन्हें संभालना स्वास्थ्य विभाग के लिए मुश्किल हो जाएगा।                                                                                                         <strong>डॉ. संदीप सिंहमार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र लेखक।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Investment : निवेश में जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, जाने कुछ जरूरी बातें" href="http://10.0.0.122:1245/haste-investment-can-be-fatal/">Investment : निवेश में जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, जाने कुछ जरूरी बातें</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/benefits-of-quitting-smoking/article-54844</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/benefits-of-quitting-smoking/article-54844</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Nov 2023 17:21:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-11/smoking.jpg"                         length="82712"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहरी महिलाओं में धूम्रपान का फैशन चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में अगले सालों में उभरेगी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती महानगरों, टियर-1 शहरों की ज्यादा बढ़ रही समस्या सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। आज के समय में हाई क्लास जीवन जीने वाली महिलाओं में धूम्रपान (Smoking) जैसा ऐब भले ही फेशनेबल माना जाता हो। लेकिन वे अपने भविष्य के लिए कितनी बड़ी समस्या पाल रही हैं, वे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fashion-of-smoking-among-urban-women-is-worrying/article-34043"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/smoking-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>भारत में अगले सालों में उभरेगी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>महानगरों, टियर-1 शहरों की ज्यादा बढ़ रही समस्या</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम।</strong> आज के समय में हाई क्लास जीवन जीने वाली महिलाओं में धूम्रपान (Smoking) जैसा ऐब भले ही फेशनेबल माना जाता हो। लेकिन वे अपने भविष्य के लिए कितनी बड़ी समस्या पाल रही हैं, वे इससे शायद अनजान हैं। शहरी महिला आबादी में धूम्रपान की लत चिंताजनक है। महिलाओं में धूम्रपान की लत भारत में अगले कुछ सालों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर सकती है। पुरुषों के बीच धूम्रपान की लत को बड़े ही खराब नजरिये से देखा जाना लगा है। इसे ऐब की संज्ञा दी जा रही है। धूम्रपान करने वाले और पान-मसाला चबाने वाले जैसे तंबाकू का सेवन करने वाली आबादी में धूम्रपान के दुष्प्रभावों को दिखने में 10 से 20 साल का समय लग जाता है। तंबाकू से संबंधित बीमारियां, जैसे फेफड़े और सिर और गर्दन का कैंसर, अब तक पुरुषों में लगभग अनन्य रूप से बना हुआ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस तरह से पिछले 10-15 वर्षों में महिला धूम्रपान (Smoking) करने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, हम भारत में अगले दो दशकों में महिलाओं में भी इन बीमारियों की घटनाओं में भारी वृद्धि देख सकते हैं। वर्ल्ड नो टोबैको-डे पर यहां आर्टेमिस अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीत गोविंदा गुप्ता का कहना है कि आज के समय में बड़ी संख्या में शहरों में और खासकर महानगरों और टियर-1 शहरों में रहने वाली महिलाओं ने सिगरेट पीना शुरू कर दिया है। इससे इन महिलाओं में धूम्रपान का प्रभाव उनके 30 और 40 की उम्र के बाद सामने आएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दो दशकों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट होगा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में हेड एंड नेक सर्जरी चीफ डा. बिस्व ज्योति हजारिका बताती हैं कि शहरी महिलाओं द्वारा तंबाकू के बढ़ते उपयोग की चिंताजनक प्रवृत्ति अब भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है। आने वाले दो दशकों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनने जा रहा है। क्योंकि इन आबादी में तंबाकू के उपयोग से जुड़े सभी स्वास्थ्य जोखिम विकसित होते हैं। अब तक, हुक्का या बीड़ी के रूप में तंबाकू के उपयोग के कारण ज्यादातर ग्रामीण आबादी में कैंसर देखा गया था। अब यह तथ्य सामने आए हैं कि शहरी महिलाओं में सिगरेट का धूम्रपान बढ़ रहा है। Smoking</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में महिलाओं में तंबाकू के सेवन (Smoking) के कारण फेफड़ों के कैंसर या सिर और गर्दन के कैंसर के मामले भले ही कम हों, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में इसमें बदलाव होना तय है। तंबाकू दुनिया में रोकी जा सकने वाली मौतों का प्रमुख कारण है। इसका उपयोग पुरुषों में किसी न किसी रूप में व्यापक रूप से प्रचलित है। भारत में पाए जाने वाले पुरुषों के शीर्ष पांच कैंसर में से चार तंबाकू के कारण होते हैं, जिससे यह एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत में कैंसर के 10 में से 9 मामले तंबाकू के कारण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मेडिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. प्रिया तिवारी का कहना है कि तंबाकू शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है और तंबाकू उपयोगकर्ताओं को कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। भारत में फेफड़ों के कैंसर और सिर और गर्दन के कैंसर के 10 में से 9 मामले तंबाकू के कारण होते हैं। इसके अलावा हम तंबाकू से संबंधित अन्य कैंसर के मामले भी देखते हैं, जिनमें गुर्दे, अग्नाशय, मूत्राशय, पेट, यकृत और यहां तक कि रक्त कैंसर भी शामिल हैं। उनके यहां ओपीडी में कैंसर के रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। अक्सर रोगी के इतिहास से पता चलता है कि उसने लंबे समय से तंबाकू का सेवन किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कैंसर की रोकथाम को बड़ा खर्च करने में असमर्थ है देश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के कंसल्टेंट रेस्पीरेटरी डॉ. शिवांशु राज गोयल के मुताबिक देश में तंबाकू से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। भारत जैसा कम संसाधन वाला एक देश तंबाकू से होने वाले कैंसर की रोकथाम पर इतना बड़ा खर्च नहीं कर सकता है। विश्व स्तर पर बेहतर जागरुकता के कारण विकसित देशों में धूम्रपान में लगातार गिरावट आई है, जबकि भारत में यह गिरावट मामूली सी है। तंबाकू चबाने की आदत खासकर युवाओं में और युवा महिलाएं में बढ़ती जा रही है। भारत को तंबाकू के सेवन पर सख्त प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fashion-of-smoking-among-urban-women-is-worrying/article-34043</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fashion-of-smoking-among-urban-women-is-worrying/article-34043</guid>
                <pubDate>Tue, 31 May 2022 18:22:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-05/smoking-2.jpg"                         length="13143"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Smoking: खतरनाक है धूम्रपान की प्रवृत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[Smoking: इस वैधानिक चेतावनी के बावजूद कि धूम्रपान अथवा तंबाकू सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, विश्व में तंबाकू पीने व सेवन करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर वर्ष तकरीबन 6 खरब से ज्यादा सिगरेट फूंक दी जाती है। सिगरेट पीना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dangerous-is-the-tendency-of-smoking/article-3474"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/smoking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Smoking: इस वैधानिक चेतावनी के बावजूद कि धूम्रपान अथवा तंबाकू सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, विश्व में तंबाकू पीने व सेवन करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर वर्ष तकरीबन 6 खरब से ज्यादा सिगरेट फूंक दी जाती है। सिगरेट पीना महज शौक नहीं, बल्कि ऐसा न करना शान के खिलाफ समझा जाने लगा है। Smoking</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि विश्व में तंबाकू की 65 से 85 प्रतिशत तक खपत केवल सिगरेट के रूप में होती है। एक चौंकाने वाला आकलन यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में सिगरेट पीने वाली महिलाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि देखी गयी है। गौरतलब है कि पुरुषों की तुलना में खासकर महिलाएं अपनी शारीरिक संरचना के कारण धूम्रपान के प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। आज स्थिति यह है कि विश्व में हर दस सैकण्ड में एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति तंबाकू से संबंधित किसी न किसी बीमारी से मारा जाता है। यदि यह रफ्तार जारी रही तो असमय मौत की दस सैकण्ड की सीमा घटकर चार या पांच सैकण्ड तक आ सकती है। निश्चय ही यह तथ्य एक भयावह भविष्य की ओर संकेत कर रहा है।</p>
<h3>धूम्रपान की लत फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ स्तन कैंसर को भी जन्म देती है</h3>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों की राय में महिलाओं में धूम्रपान की लत फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ स्तन कैंसर को भी जन्म देती है। जो महिला स्तनपान कराती है, उसके रक्त में पाए जाने वाला निकोटिन दूध के जरिये शिशु के शरीर में पहुंच जाता है। फलस्वरूप धूम्रपान करने वाली महिलाओं के बच्चे बुखार व श्वांस संबंधी विकारों से ग्रस्त रहने लगते हैं। कम उम्र में तंबाकू का सेवन करने वाली स्त्रियों में प्रजनन क्षमता का ह्रास तथा डायबिटीज जैसे रोगों के पनपने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। अगर आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पिछले 40 सालों में विकासशील देशों में तंबाकू ग्रसित महिलाओं के मरने का प्रतिशत 2 से बढ़कर 93  तक पहुंच गया। ऐसे में इसकी भयावहता का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। Smoking</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="धर्मकांटा की दुकान में घुसे चोरों ने चुराई नकदी" href="http://10.0.0.122:1245/thieves-broke-into-the-weighing-machine-shop-and-stole-cash/">धर्मकांटा की दुकान में घुसे चोरों ने चुराई नकदी</a></p>
<p style="text-align:justify;">विकासशील देशों में सबसे अधिक धूम्रपान करने वालों की संख्या भारत में है। भारत तंबाकू उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में है। भारतीय उपमहाद्वीप में सर्वाधिक  बीड़ी है। शहरी महिलाओं को छोड़ दें तो हमारे देश में विशेषकर बिहार व उत्तरप्रदेश की ग्रामीण महिलाओं में बीड़ी पीना प्रचलित है। सस्ती व सर्वसुलभ होने के कारण महिलाओं ने बीड़ी को अपना लिया है। शुरुआती दौर में भारतीय ग्रामीण महिलाएं हुक्के में भरकर तंबाकू का सेवन करती थी। धीरे-धीरे इसमें बदलाव आया। संभ्रांत घर की महिलाएं पान अधिक खाती थीं। आज के अति आधुनिक युग में जब सिगरेट के साथ-साथ अनगिनत पान-मसालों का प्रचलन हो गया है। इसके अतिरिक्त शिक्षा के प्रसार व तंबाकू सेवन से उत्पन्न बीमारियों के जान लेने के कारण भी ग्रामीण महिलाओं में तंबाकू सेवन में कमी आयी है, जबकि कुछ महिलाओं ने इसे एक तरह का पुराना फैशन मानकर नकार दिया है।</p>
<h3>प्रतिवर्ष पांच लाख के करीब महिलाएं धूम्रपान के कारण मौत हो रही हैं Smoking</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरा कारण आर्थिक अक्षमता व सीमित जीवन का भी है। ग्रामीण महिलाएं आज भी लोक लाज के दायरे में कैद हैं, इसलिए वे ऐसा नहीं कर सकती जैसा कि पुरुष करते हैं। एक अन्य अनुसंधान से पता चला है कि विश्व में चालीस प्रतिशत महिलाएं जहां प्रत्यक्ष धूम्रपान की शिकार होती हैं, वहीं शेष साठ प्रतिशत परोक्ष रूप से इसकी शिकार होती हैं, क्योंकि उन औरतों में जिनके पति धूम्रपान करते हैं, फेफड़े का कैंसर होने की संभावना उन औरतों से तीन गुणा अधिक होती है, जिनके पति धूम्रपान नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">विकसित देशों में पुरुषों और महिलाओं के सेवन में पचास प्रतिशत और आठ प्रतिशत का फासला अवश्य है, लेकिन फिर भी प्रतिवर्ष पांच लाख के करीब महिलाएं धूम्रपान के कारण मौत के आगोश में समा रही हैं। विकसित एवं विकासशील देशों में महिलाओं के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट का मुख्य कारण धूम्रपान व नशे की अन्य वस्तुओं का सेवन ही है। बढ़ती धूम्रपान की आदत बेहद चिंताजनक है। Smoking                                                                                                                                                                                       –<strong>कुलविंद्र कौर</strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dangerous-is-the-tendency-of-smoking/article-3474</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dangerous-is-the-tendency-of-smoking/article-3474</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Nov 2017 06:21:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-11/smoking.jpg"                         length="15360"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब नहीं चलेंगे हुक्का-बार</title>
                                    <description><![CDATA[सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पड़ेगा महंगा स्वास्थ्य विभाग ने काटे चालान श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विश्व तंबाकू निषेध एवं माह के आखिरी दिन नो टोबेको डे पर जिलेभर में कार्रवाई की गई। इस दौरान विभाग के साथ ही पुलिस विभाग एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने भी चालान काटे। विभाग ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/now-not-run-hookah-bar/article-754"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/hooka-bar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पड़ेगा महंगा</h1>
<h3 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग ने काटे चालान</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विश्व तंबाकू निषेध एवं माह के आखिरी दिन नो टोबेको डे पर जिलेभर में कार्रवाई की गई। इस दौरान विभाग के साथ ही पुलिस विभाग एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने भी चालान काटे। विभाग ने तंबाकू उत्पाद बेचने, प्रचार-प्रसार करने वालों सहित सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के चालान काटे। तंबाकू को लेकर एक पखवाड़े तक निरंतर अभियान के तौर पर कार्रवाई होगी, जबकि इसके बाद भी नियमित कार्रवाई जारी रहेगी। विभागीय टीम ने हुक्का-बार, विभिन्न दुकानों एवं होलसेल डीलरों के यहां निरीक्षण भी किया। अनेक स्थलों से सिगरेट व तंबाकू उत्पाद संबंधी होर्डिंग व अन्य सामग्री भी उतरवाई गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">एक पखवाड़ा होगी सख्त कार्रवाई</h2>
<p style="text-align:justify;">सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस एवं नो टोबेको-डे को लेकर टीम को कार्रवाई के आदेश दिए गए, जिस पर दिन-भर कार्रवाई की गई। जवाहरनगर में हुक्का बार संचालित होने की सूचना पर तंबाकू सेल के जिला प्रभारी अजय सिंह, सहायक प्रभारी नीपेन शर्मा, सीओआईईसी विनोद बिश्नोई, डीआई श्वेता छाबड़ा, डीईओ त्रिलोकेश्वर शर्मा सहित मीरा चौक प्रभारी जयसिंह भादू पुलिस बल सहित पहुंचे। यहां चिलम हुक्काबार पर सघन तलाशी ली गई लेकिन कुछ संदिग्ध नहीं मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">मौके पर मौजूद हुक्का बार प्रतिनिधि के अनुसार विगत एक दस दिनों से हुक्काबार बंद है और किसी तरह का संचालन नहीं किया जा रहा है। हालांकि टीम ने मौके पर ही लगी सामग्री को उतरवाया और चिलम नाम को हटाने के लिए पाबंद किया। वहीं टीम ने हुक्काबार नहीं चलाने के लिए भी पाबंद किया। इसी तरह एक अन्य हुक्का बार के चलने की सूचना पर टीम शिव चौक पहुंची, लेकिन वहां कोई हुक्का बार नहीं मिला। टीम गंगवानी ट्रेडर्स का अधिनियम की धारा सात के तहत निरीक्षण किया और चालान काटा। इस दौरान टीम के साथ कोतवाली के सब इंस्पेक्टर राकेश स्वामी मौजूद रहे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">
धूम्रपान करने वालों के 154 चालान काटे</h2>
<p style="text-align:justify;">सहायक प्रभारी नीपेन शर्मा ने बताया कि टीम सहित खण्ड मुख्यालयों पर भी नो टोबेको-डे पर तंबाकू उत्पाद बेचने वालों और सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के 154 चालान काटे गए। वहीं 17 जगहों का निरीक्षण किया गया और दस जगहों पर प्रचार-प्रसार सामग्री उतरवाई गई। करीब 100 शपथ पत्र भरवाए गए। उन्होंने बताया कि आगामी एक पखवाड़े के दौरान कार्रवाई जारी रहेगी और तंबाकू उत्पाद के प्रचार-प्रसार पर पूर्णत: पाबंदी लगवाई जाएगी। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए निरंतर चालान काटे जाएंगे। पुलिस विभाग भी आगामी दिनों में चालान काटकर कार्रवाई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/now-not-run-hookah-bar/article-754</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/now-not-run-hookah-bar/article-754</guid>
                <pubDate>Thu, 01 Jun 2017 06:39:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/hooka-bar.jpg"                         length="97650"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धूम्रपान का एक आैर हानिकारक परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[– नहीं छोड़ेंगे स्मोकिंग तो बदल सकता है आपका डीएनए नई दिल्ली: धूम्रपान सेहत के लिए खतरनाक है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन हाल ही में प्रकाशित किए गए अध्ययन में इसको लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वो बेहद चौंकाने वाली है। दरअसल, धूम्रपान से कैंसर होता है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/smoking-cigarettes-may-change-your-dna-permanently/article-276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/smoking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>– नहीं छोड़ेंगे स्मोकिंग तो बदल सकता है आपका डीएनए</strong></p>
<p><span class="city"><b>नई दिल्ली: </b></span>धूम्रपान सेहत के लिए खतरनाक है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन हाल ही में प्रकाशित किए गए अध्ययन में इसको लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वो बेहद चौंकाने वाली है।<br />
दरअसल, धूम्रपान से कैंसर होता है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि धूम्रपान का असर शरीर के उन हिस्सों में भी होता है, जहां धुंआ सीधा नहीं पहुंचता। यानि शोधकर्ताओं को संकेत मिले हैं कि बीड़ी-सिगरेट का धुंआ मानव के डीएनए पर हमला बोलता है। एक छपे लेख के मुताबिक, ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट सांगर इंस्टीट्यूट और अमेरिका के लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेट्री के शोधकर्ताओं ने पांच हजार ट्यूमर्स का अध्ययन किया। अध्ययन में धूम्रपान करने वाले लोगों के ट्यूमर की तुलना उन लोगों के ट्यूमर से की गई, जिन्होंने कभी भी धूम्रपान नहीं किया था।</p>
<div style="text-align:justify;"> शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान करने वालों के डीएनए में कुछ ऐसे निशान थे, जो दूसरों में नहीं थे। वैसे इस अध्ययन से पहले यह पता चला चुका था कि धुंआ शरीर के अंदर की कोशिकाओं से छेड़छाड़ करता है, लेकिन अब पता चला है कि इसका असर अप्रत्यक्ष तौर पर भी होता है और यह डीएनए में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। एजेंसी</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/health/smoking-cigarettes-may-change-your-dna-permanently/article-276</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/health/smoking-cigarettes-may-change-your-dna-permanently/article-276</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Nov 2016 12:49:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2016-11/smoking.jpg"                         length="35543"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        