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                <title>Pegasus case - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>पेगासस जासूसी मामले पर जांच समिति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश, शुक्रवार को सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति रविंद्रन समिति ने उच्चतम न्यायालय में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना, न्यायमूर्ति आर सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ समिति की अंतरिम रिपोर्ट एवं अन्य जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। इसी खंडपीठ ने पिछले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/report-of-inquiry-committee-on-pegasus-espionage-case-presented-in-supreme-court/article-31001"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/supreme-court-of-india2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति रविंद्रन समिति ने उच्चतम न्यायालय में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना, न्यायमूर्ति आर सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ समिति की अंतरिम रिपोर्ट एवं अन्य जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। इसी खंडपीठ ने पिछले साल समिति का गठन किया था। समिति द्वारा अंतरिम रिपोर्ट पेश करने की वजह से माना जाता है कि यह वह आगे की जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग अदालत से करेगी। खंडपीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 27 अक्टूबर 2021 को शीर्ष अदालत के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश आर वी रवींद्रन की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक समिति गठित थी। खंडपीठ ने समिति से आठ सप्ताह में अपनी जांच पेश करने की अपेक्षा की थी। न्यायमूर्ति रविंद्रन को सहयोग करने के लिए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी आलोक जोशी तथा डॉ संदीप ओबरॉय को समिति का सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति की देखरेख में तीन सदस्यीय विशेष तकनीकी जांच दल मामले की छानबीन कर रहा है। दल में सदस्य के तौर पर प्रो. नवीन चौधरी, प्रो. अश्विनी गुमस्ते और प्रो. पी. प्रबाहरण तकनीकी पहलुओं से जांच कर रहे हैं। प्रो. चौधरी, (साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फॉरेसिक्स), डीन- नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर गुजरात), प्रो. प्रबाहरण (स्कूल आॅफ इंजीनियरिंग) अमृत विश्व विद्यापीठम, अमृतपुरी, केरल और डॉ गुमस्ते, इंस्टिट्यूट चेयर एसोसिएट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी मुंबई से हैं। पेगासस मामला इजरायल की निजी कंपनी एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाए गए पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर भारत सरकार द्वारा कथित तौर पर खरीदने से जुड़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर को भारत समेत दुनिया भर के बड़ी संख्या में लोगों के स्मार्ट मोबाइल फोन में गुप्त तरीके से डालकर उनकी बातचीत की जासूसी की गई। याचिकाओं में भारत सरकार पर उस जासूसी सॉफ्टवेयर को खरीद कर यहां के अनेक जाने-माने राजनीतिज्ञों, खासकर विपक्षी दलों के नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिकारियों की अवैध तरीके से जासूसी करने के आरोप लगाए गए हैं। केन्द्र सरकार के इजरायल से पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर की कथित खरीद मामले में एक विदेशी अखबार के हालिया खुलासे के मद्देनजर 30 जनरी 2022 को उच्चतम न्यायालय में एक नई जनहित याचिका दायर की गई थी। इस मामले में पहली जनहित याचिका करने वाले वकील एम. एल. शर्मा ने यह याचिका दायर कर आरोपियों पर शीघ्र प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की गुहार सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश से लगायी थी। उनकी इस नई याचिका पर अभी सुनवाई होनी बाकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता शर्मा कहा कि अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई द्वारा अपनी जांच में पुष्टि तथा न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित किए जाने के बाद अब इस मामले में क्या खुलासा होना रह गया है? इस मामले में संबंधित आरोपियों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच की जानी चाहिए। गौरतलब है कि विशेष तकनीकी जांच दल ने जासूसी होने की आशंका वाले लोगों से अपने मोबाइल फोन की जानकारी साझा करने की अपील की थी। इस संबंध में समाचार पत्रों में कई बार विज्ञापन भी दिए। बताया जाता है कि बहुत ही कम संख्या में लोगों ने अपनी आशंकाएं दल के साथ साझा की हैं।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 12:13:25 +0530</pubDate>
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                <title>पेगासस जासूसी: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के लोकुर जांच आयोग पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने ‘पेगासस’ जासूसी विवाद की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जांच आयोग के गठन पर नाखुशी जाहिर करते हुए उसके कामकाज पर शुक्रवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने राज्य सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pegasus-espionage-supreme-court-stays-west-bengals-lokur-inquiry-commission/article-29214"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/pegasus-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने ‘पेगासस’ जासूसी विवाद की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जांच आयोग के गठन पर नाखुशी जाहिर करते हुए उसके कामकाज पर शुक्रवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग के कामकाज पर तत्काल रोक लगा दी। इसके साथ ही पीठ लोकुर आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता स्वयंसेवी संस्था ‘ग्लोबल विलेज फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट’ एवं अन्य की जनहित याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किया। स्वयंसेवी संस्था ने शीर्ष अदालत से राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग के कामकाज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए 27 अक्टूबर को एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से उसी मामले की जांच के लिए अलग आयोग गठित करना अनुचित है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि राज्य सरकार ने मौखिक वचन दिया था कि वह अलग से आयोग का गठन नहीं करेगी करेगी। बावजूद इसके सरकार की ओर से आयोग का गठन किया गया और बताया जा रहा है कि जांच की जा रही है। इस पर श्री सिंघवी ने कहा कि सरकार उस आयोग के कामकाज में दखल नहीं दे रही। पीठ ने पश्चिम बंगाल की इस दलील को अस्वीकार कर दिया तथा नाखुशी जाहिर करते हुए आयोग के कामकाज पर रोक के साथ-साथ उसे नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न याचिकाकर्ताओं की गुहार पर 27 अक्टूबर को पेगासस जांच के मामले में जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता स्वयंसेवी संस्था ने गुरुवार को विशेष उल्लेख के तहत पश्चिम बंगाल द्वारा गठित जांच आयोग के मामले में तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया था। पेगासस विवाद प्रमुख विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, वकीलों, नौकरशाहों, कई मंत्रियों और सत्ता से जुड़े लोगों की इजरायली जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए मोबाइल पर हुई आपसी बातचीत अवैध तरीके से सुनने के आरोपों से जुड़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जाता है कि लोकुर आयोग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी, वरिष्ठ वकील प्रशांत किशोर, दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना, बंगाल के मुख्य सचिव एच के द्विवेदी सहित 30 से अधिक लोगों को अपनी जांच में शामिल होने के लिए कहा था। शीर्ष अदालत ने कथित जासूसी के इस मामले में 27 अक्टूबर को एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इसकी निगरानी का जिम्मा सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर वी रवींद्रन को सौंपा था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 16:08:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>पेगासस जासूसी विवाद भारत का आंतरिक मामला : इजरायली राजदूत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। इजरायल ने वीरवार को कहा कि पेगासस जासूसी के आरोप और उच्चतम न्यायालय द्वारा उनकी जांच पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और इसमें उसका कोई पक्ष नहीं है। भारत में इजरायल के नये राजदूत नाओर गिलोन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पेगासस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी एनएसओ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pegasus-espionage-controversy-indias-internal-matter-israeli-envoy/article-27959"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/pegasus-case-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> इजरायल ने वीरवार को कहा कि पेगासस जासूसी के आरोप और उच्चतम न्यायालय द्वारा उनकी जांच पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और इसमें उसका कोई पक्ष नहीं है। भारत में इजरायल के नये राजदूत नाओर गिलोन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पेगासस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी एनएसओ एक निजी कंपनी है। सॉफ्टवेयर का प्रकार देखते हुए उसके लिए निर्यात लाइसेंस लेना अनिवार्यता है। हम यह देखते हैं कि इसे गैर सरकारी तत्वों को निर्यात नहीं किया जाए। यहां भारत में क्या हुआ, यह भारत का आंतरिक मामला है।</p>
<p style="text-align:justify;">गिलोन से पूछा गया था कि क्या भारत सरकार ने इस मामले की जांच को लेकर इजरायल की सरकार से कोई संपर्क किया है, जो उनके बयान से स्पष्ट नहीं हुआ। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित कर जांच कराने के आदेश दिये। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.वी. रविंद्रन को सौंपी गई है। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी आलोक जोशी और डॉ. संदीप ओबरॉय न्यायमूर्ति रविंद्र का सहयोग करेंगे। अदालत ने कहा है कि न्यायमूर्ति रविंद्रन की देखरेख में साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञों की तीन सदस्यों वाली एक टेक्निकल कमेटी पूरे मामले की छानबीन करेगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                <pubDate>Thu, 28 Oct 2021 13:57:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>पेगासस केस में केंद्र सरकार को झटका! जवाब न मिलने पर SC ने बना दी जांच कमेटी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/shock-to-the-central-government-in-the-pegasus-case/article-27930"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/supreme-court-of-india3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. वी. रविंद्रन, पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी आलोक जोशी तथा डॉ संदीप ओबरॉय की अगुवाई में साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञों की तीन सदस्यों वाली एक टेक्निकल कमेटी से जांच कराने का आदेश दिया है। आलोश जोशी 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी है। डॉ. ओबरॉय चेयरमैन सब कमेटी (इंटरनेशनल आॅगेर्नाइजेशन आॅफ स्टैंडरडाइजेशन/ इंटरनेशनल इलेक्ट्रो-टेक्निकल कमिशन/ जॉंइट टेक्निकल) हैं। यह कमेटी अगले आठ सप्ताह के अंदर अपनी अंतरिम रिपोर्ट देगी। पीठ ने कहा है कि टेक्निकल कमेटी के सदस्य के तौर पर आईआईटी बाम्बे के प्रोफेसर डॉ अश्विनी अनिल के अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर नवीन कुमार चौधरी और डॉक्टर प्रबाहरण पी. सदस्य होंगे। डॉक्टर चौधरी, (साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फॉरेसिक्स), डीन- नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर गुजरात), डॉक्टर प्रबाहरण पी., प्रोफेसर (स्कूल आॅफ इंजीनियरिंग) अमृत विश्व विद्या पीठम, अमृतपुरी, केरल और डॉ अश्विनी अनिल गुमस्ते, इंस्टिट्यूट चेयर एसोसिएट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी मुंबई से हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नागरिकों के निजता के अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता</h3>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘नागरिकों के निजता के अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता। उनकी स्वतंत्रता को बरकरार रखने की जरूरत है। शीर्ष अदालत इस मामले में आठ सप्ताह बाद सुनवाई करेगी इस बीच कमेटी को अंतरिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। शीर्ष अदालत ने पेगासस जासूसी मामले में विभिन्न जनहित याचिकाओं की सुनवाई पूरी करने के बाद 13 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला इजरायल की एक निजी कंपनी के स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर से भारत के प्रमुख पत्रकारों, वकीलों, कई विपक्षी दलों के नेताओं के फोन के माध्यम से कथित तौर पर उसकी जासूसी करने से जुड़ा हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गये गए हैं कि अवैध तरीके से लोगों की बातचीत एवं अन्य जानकारी ली गई है। जो उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Oct 2021 13:25:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेगासस जासूसी केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-अब हमें आदेश देना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय में सोमवार को पेगासस जासूसी केस पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने कहा कि इस केस पर एफिडेविट दाखिल नहीं करने जा रही है। इसकी वजह बताते हुए केन्द्र सरकार ने कहा कि ऐसे केसों में एफिडेविट दाखिल नहीं किया जा सकता। लेकिन वह जासूसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-strict-on-pegasus-espionage-case/article-26783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/pegasus-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय में सोमवार को पेगासस जासूसी केस पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने कहा कि इस केस पर एफिडेविट दाखिल नहीं करने जा रही है। इसकी वजह बताते हुए केन्द्र सरकार ने कहा कि ऐसे केसों में एफिडेविट दाखिल नहीं किया जा सकता। लेकिन वह जासूसी के आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित करने को राजी है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमा ने कहा कि आखिर सरकार इस केसी में कर क्या रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमें लगता है कि अब हमें आदेश देना ही होगा। गौरतलब हैं कि पहले की सुनवाई में केन्द्र सरकार ने हल्फनामा दाखिल करने के लिए दो बार वक्त लिया था, लेकिन अब उसने सीधे तौर पर इन्कार कर दिया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र ने क्या कहा…</h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जासूसी के लिए किसी खास सॉफ्टवेयर का प्रयोग हुआ या नहीं, यह पब्लिक डोमेन का केस नहीं है। इस केसी में स्वतंत्र डोमेन विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा जांच की जा सकती है और इसे उच्चतम न्यायाल में दाखिल किया जा सकता है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Sep 2021 13:21:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पेगासस जासूसी मामला : विशेष जांच संबंधी याचिका पर केंद्र को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने कथित पेगासस जासूसी मामले की विशेष जांच संबंधी याचिकाओं पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pegasus-espionage-case-notice-to-center-on-special-investigation-petition/article-26109"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/pegasus-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने कथित पेगासस जासूसी मामले की विशेष जांच संबंधी याचिकाओं पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने का अनुरोध किया है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि वह पेगासस जासूसी मामले में कोई अतिरिक्त हलफनामा दायर नहीं करना चाहती, क्योंकि इसमें राष्ट्र की सुरक्षा का मामला शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खंडपीठ को अवगत कराया कि वह पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए गठित होने वाली विशेषज्ञ समिति के समक्ष विस्तृत ब्योरा रखने को तैयार है। न्यायमूर्ति रमन ने कहा कि वह इस मामले में केंद्र का पक्ष भी जानना चाहेंगे। इसके बाद आगे वह विचार करेंगे। केंद्र सरकार ने सोमवार को न्यायालय में हलफनामा दायर कर कहा था कि याचिकाओं में लगाए गए सभी आरोप निराधार और बेबुनियाद हैं। केंद्र ने कहा था कि विशेषज्ञों की एक समिति इस पूरे मामले की जांच करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं में वरिष्ठ पत्रकार एन. राम, शशि कुमार, माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, पत्रकार प्रंजय गुहा ठकुराता, एसएनएम आब्दी, प्रेम शंकर झा, रुपेश कुमार एवं इप्शा शताक्षी, सामाजिक कार्यकर्ता जगदीप छोकर, नरेन्द्र कुमार मिश्रा और एडिटर्स गिल्ड और उच्चतम न्यायालय के वकील मनोहर लाल शर्मा शामिल हैं। श्री शर्मा ने इस मामले में सबसे पहले याचिका दायर की थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Aug 2021 14:31:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेगासस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार तक टली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी है और केंद्र सरकार से पूछा कि वह पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है? मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी है और केंद्र सरकार से पूछा कि वह पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है? मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह जानना चाहती है कि क्या केंद्र सरकार पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल पर अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है? खंडपीठ ने केंद्र सरकार से यह स्पष्टीकरण आज दायर दो पृष्ठों के संक्षिप्त हलफनामे के परिप्रेक्ष्य में मांगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं-वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं अन्य याचिकाकतार्ओं के वकीलों ने भी सुनवाई के दौरान एक ही सवाल खड़े किए कि केंद्र सरकार इस सवाल का जवाब देने से बच रही है कि क्या उसकी किसी एजेंसी ने कभी भी पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने न्यायालय से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दे। सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और केवल एक हलफनामे के जरिए इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता। करीब दो घंटे की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने मामले की सुनवाई कल तक के लिए टालते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह अतिरिक्त हलफनामा दायर करने को लेकर अपना हृदय परिवर्तन कर सकती है?</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Aug 2021 16:10:06 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हंगामे के चलते दो दिन पहले ही लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पेगासस जासूसी मामले, किसानों के मुद्दे और महंगाई को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका और लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित तिथि से दो दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11:00 बजे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/lok-sabha-adjourned-indefinitely-two-days-ago-due-to-uproar/article-25948"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/monsoon-session-of-parliament1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पेगासस जासूसी मामले, किसानों के मुद्दे और महंगाई को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका और लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित तिथि से दो दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11:00 बजे जैसे ही शुरू हुई अध्यक्ष ओम बिरला ने पिछले दिनों सदन के चार पूर्व सदस्यों के निधन की जानकारी सदस्यों को दी। सदन ने उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा। उसके बाद बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने की औपचारिक घोषणा की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने विपक्ष के गतिरोध के कारण सदन का कामकाज प्रभावित होने को लेकर गहरा दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस सत्र में गतिरोध के कारण केवल 17 बैठकें हुर्इं और केवल 21 घंटे 24 मिनट का कामकाज ही हो सका, जो कुल निर्धारित अवधि का महज 22 फीसदी है। अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों के हंगामे के कारण 74 घंटे 46 मिनट कामकाज बाधित हुआ। उन्होंने इस सत्र में पारित ओबीसी की सूची से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सहित विभिन्न विधेयकों का भी जिक्र किया। तत्पश्चात अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और ज्यादातर केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे। विपक्ष की दीर्घा में कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी उपस्थित थीं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 12:07:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट बोला- यह गंभीर मुद्दा, सोशल मीडिया नहीं कोर्ट में हो बहस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को भी सीमा नहीं लांघनी चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं से एनवी रमन्ना ने कहा, ‘किसी को को भी अपनी सीमा नहीं पार करनी चाहिए और सभी को इस केस में अवसर प्रदान किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-said-on-pegasus-case-this-is-a-serious-issue/article-25920"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को भी सीमा नहीं लांघनी चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं से एनवी रमन्ना ने कहा, ‘किसी को को भी अपनी सीमा नहीं पार करनी चाहिए और सभी को इस केस में अवसर प्रदान किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत की निगरानी में इस मामले की जांच की मांग वाली अर्जी पर अगली सुनवाई 16 अगस्त तय कर दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका दायर करने वालों को सिस्टम में भरोसा रखना चाहिए और समानांतर रूप से सोशल मीडिया पर किसी तरह की बहस से बचना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जासूसी मामले पर दोनों सदनों में हंगामा</h4>
<p style="text-align:justify;">इस मामले पर दोनों सदनों में अब तक विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाहीं नहीं चल पाई है। राज्यसभा और लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेगासस जासूसी कांड को लेकर भारी शोरगुल और हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखे जाने के बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने पेगासस जासूसी मामले को लेकर अपनी सीट से एक साथ जोर-जोर से बोलने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस की महिला सदस्य सदन के बीच में आ गई और हंगामा करने लगी, बाद में कांग्रेस के सदस्य भी सदन के बीच में आ गये। इस दौरान कई विपक्षी दलों के सदस्य अपनी सीट के निकट खड़े थे। सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय और सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कई अन्य सदस्यों ने नियम 267 के तहत पेगासस मामले पर कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया है। इन सदस्यों को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया था लेकिन वे नहीं आये इसलिए इस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Aug 2021 12:27:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पेगासस मानवाधिकार विरोधी</title>
                                    <description><![CDATA[कभी इजरायल की सरकार जिस पेगासस स्पाईवेयर को अपनी उपलब्धि बताकर दुनिया भर के देशों को बेचा करती थी, अब उसे ही पेगासस बनाने वाली कंपनी के दफ्तरों पर छापा डालना पड़ रहा है। फ्रांस की सरकार ने जिस तरह से इस मसले पर अपना विरोध जताया, उसके बाद इजरायल सरकार के पास कोई विकल्प […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/pegasus-anti-human-rights/article-25815"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/hackers.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी इजरायल की सरकार जिस पेगासस स्पाईवेयर को अपनी उपलब्धि बताकर दुनिया भर के देशों को बेचा करती थी, अब उसे ही पेगासस बनाने वाली कंपनी के दफ्तरों पर छापा डालना पड़ रहा है। फ्रांस की सरकार ने जिस तरह से इस मसले पर अपना विरोध जताया, उसके बाद इजरायल सरकार के पास कोई विकल्प भी नहीं था। दुनिया भर में इजरायल के समर्थन में खड़ी होने वाली सरकारें वैसे ही बहुत कम हैं। ऐसे में, पश्चिमी यूरोप के एक महत्वपूर्ण देश को अपना विरोधी बनाना उसे महंगा पड़ सकता था। यह संकट कितना बड़ा था, इसे इससे भी समझा जा सकता है कि बात ज्यादा न बिगड़े, इसके लिए इजरायल को अपने रक्षा मंत्री को पेरिस भेजना पड़ा। फ्रांस का विरोध भी पूरी तरह जायज था। तो क्या इजरायल सरकार की ताजा सक्रियता से पेगासस पीड़ित लोग या देश और निजता व मानवाधिकारों की चिंता करने वाले कोई उम्मीद बांध सकते हैं? शायद नहीं। वैसे उम्मीद बांधने का एक और कारण मौजूद है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव को इन दिनों फिर से झाड़-पोंछकर निकाला गया है, जो इस तरह के स्पाईवेयर, यानी जासूसी सॉफ्टवेयर को खरीदने-बेचने पर पाबंदी लगाने की बात करता है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के ऐसे प्रस्ताव अगर वाकई किसी काम के होते, तो दुनिया में आतंकवाद कब का खत्म हो गया होता और कहीं भी न अंतरराष्ट्रीय रंजिशें होतीं और न हथियारों की होड़। इस पूरे मामले की जटिलता को समझने के लिए हमें पेगासस को समझना होगा। पेगासस एक व्यावसायिक स्पाईवेयर है, जिसे एनएसओ नाम की इजरायली कंपनी बनाती और दुनिया भर में बेचती है। ऐसी कंपनियों की बहुत सी बातें सार्वजनिक होती हैं, जैसे उनके स्वामित्व की जानकारी, उनके लाभ-हानि का खाता आदि। फिर ऐसी कंपनियों को ज्यादा बिक्री करने और ज्यादा लाभ कमाने के लिए अपना लगातार प्रचार करना होता है। ऐसे में, बहुत सारी बातें छिपी नहीं रह सकतीं, बावजूद तमाम सावधानियों के। लेकिन स्पाईवेयर के सभी मामलों में ऐसा नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">पेगासस सरकारी एजेंसी न होकर एक निजी कंपनी है, इसलिए विवाद उठते ही उसके बारे में बहुत कुछ पता चल गया। यह भी मालूम हो गया कि उसके स्पाईवेयर की कीमत कितनी है और यह भी कि जिन स्मार्टफोन की इससे जासूसी की जा रही है, यह उन सबकी कुल कीमत से भी हजारों गुना महंगा है। पहली नजर में यह धंधा काफी मुनाफे वाला लगता है, और इसलिए संभव है कि दुनिया भर की अन्य कंपनियां भी इस कारोबार में कूदने की कोशिश करें। पेगासस का मामला दरअसल एक ऐसी दुनिया में आया है, जो निजता के हनन के खिलाफ अपनी लड़ाई लगभग हार चुकी है। आपकी निजता हर क्षण बड़े पैमाने पर दुनिया भर के बड़े-बड़े सर्वरों के हवाले हो रही है। इसका एक मुकम्मल बाजार विकसित हो चुका है, जहां हमारी-आपकी निजता की बोली भी लगती है और इसकी खरीद-फरोख्त भी होती है। भारत सरकार को तुरंत सरकार को आईटी विशेषज्ञों से सलाह लेकर इस प्रकार की कंपनियों पर नकेल कसनी चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/pegasus-anti-human-rights/article-25815</link>
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                <pubDate>Sat, 07 Aug 2021 09:43:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जब अखबार की कतरनों पर आधारित याचिका के लिए वकील की हुई खिंचाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में समाचार पत्रों की कतरनों के आधार पर याचिका दायर करने वाले वकील मनोहर लाल शर्मा की गुरुवार को जबरदस्त खिंचाई की। शर्मा पेगासस मामले में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले पहले याचिकाकर्ता हैं। उनके बाद ही एन राम सहित अन्य पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकतार्ओं ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/when-a-lawyer-pulled-up-for-a-petition-based-on-newspaper-clippings/article-25782"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/supreme-court-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में समाचार पत्रों की कतरनों के आधार पर याचिका दायर करने वाले वकील मनोहर लाल शर्मा की गुरुवार को जबरदस्त खिंचाई की। शर्मा पेगासस मामले में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले पहले याचिकाकर्ता हैं। उनके बाद ही एन राम सहित अन्य पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकतार्ओं ने याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान शर्मा से कहा कि उनकी जनहित याचिका अखबारों की कतरनों पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने यह भी कहा कि शर्मा की याचिका में प्रतिवादियों के नाम दिये गये हैं और वह (न्यायालय) इस प्रकार नाम से कोई नोटिस जारी नहीं कर सकता। शर्मा ने पेगासस जासूसी मामले की अदालत की निगरानी वाली विशेष जांच संबंधी याचिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को प्रतिवादी बनाया है। खंडपीठ ने कहा, ‘आपने कुछ व्यक्तियों (प्रधानमंत्री और गृह मंत्री) को याचिका में प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है। हम इस तरह से नोटिस जारी नहीं कर सकते।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, ‘यह पीआईएल दायर करने का तरीका नहीं है। न्यूजपेपर क्लिपिंग के अलावा अन्य सामग्री कहां है? शर्मा ने दलील दी कि उनकी याचिका तथ्यों पर आधारित है, न कि केवल समाचार पत्रों की कतरन पर। पीठ द्वारा उनकी याचिका में व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाने पर आपत्ति जताए जाने के बाद, शर्मा ने अपनी याचिका को संशोधित किये जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Aug 2021 19:57:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पेगासस जासूसी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-आरोप गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में याचिकाओं की प्रतियां केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश देते हुए गुरुवार को कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सही हैं, तो आरोप काफी गंभीर हैं। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए अगले मंगलवार की तारीख मुकर्रर की, लेकिन केंद्र सरकार को कोई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pegasus-espionage-case-hearing-continues-in-supreme-court/article-25765"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले में याचिकाओं की प्रतियां केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश देते हुए गुरुवार को कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सही हैं, तो आरोप काफी गंभीर हैं। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए अगले मंगलवार की तारीख मुकर्रर की, लेकिन केंद्र सरकार को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने सभी याचिकाकतार्ओं के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें निर्देश दिया कि वे याचिकाओं की प्रति केंद्र सरकार को सौंपे। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में केंद्र सरकार की मौजूदगी के बिना खंडपीठ आगे की सुनवाई नहीं कर सकती। हालांकि न्यायालय ने मामले में फिलहाल औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकतार्ओं की जासूसी का मुद्दा अहम है। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही है, तो यह आरोप काफी गंभीर है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मीडिया संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ने खुलासा किया है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के जासूसी साफ्टवेयर के जरिए भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हैक किए गए हैं। हालांकि सरकार ने अपने स्तर पर खास लोगों की निगरानी संबंधी आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने कहा कि इसका कोई ठोस आधार नहीं है या इससे जुड़ी कोई सच्चाई नहीं है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 05 Aug 2021 11:50:04 +0530</pubDate>
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