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                <title>Miracle - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सतगुरू जी ने जीव का भयानक कर्म कंकर में बदला</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी ओम प्रकाश, बड़ौत शहर, जिला बागपत (यूपी) से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है:- प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/charisma-of-shah-satnam-ji-maharaj/article-49467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/param-pita-shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी ओम प्रकाश, बड़ौत शहर, जिला बागपत (यूपी) से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है:-</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">3 जुलाई 1980 को जब वह बड़ौत शहर से अपना कारोबार करने के बाद शाम को अपने गांव नसौली जा रहा था। जहां कि वह पहले रहता था। रास्ते में एक सुनसान जगह पर कुछ लुटेरों ने उसे घेर लिया व उस पर एकदम चाकुओं से हमला कर दिया। उस समय वह बुरी तरह जख्मी हो गया। लुटेरों ने उसे मरा हुआ जानकर सड़क के किनारे एक गड्ढ़े में फैंक दिया और भाग गए। थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो उसने अपने आपको संभाला और किसी न किसी तरह गिरते-पड़ते अपने गांव पहुंच गया। गांव वालों ने उसे वहां से वापिस बड़ौत शहर ले जाकर अस्पताल में दाखिल करवा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय उसके शरीर पर बहुत ही गहरे कई जख्म थे और उनमें से खून बह रहा था। शरीर में से अधिक खून निकल जाने की वजह से उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी। डॉक्टरों का कहना था कि वह 6-7 महीने से पहले ठीक नहीं हो सकता। परंतु उसके गांव की साध-संगत ने सिरसा दरबार में आकर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से उपरोक्त सारी घटना का वर्णन किया तो प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’ क्योंकि यूपी दरबार में अंग्रेजी महीने के हर पहले सप्ताह (रविवार) को सत्संग होता है और सच्चे पातशाह जी ने 15 दिनों बाद यानि अगस्त महीने के पहले सप्ताह में वहां जाना</p>
<p style="text-align:justify;">था। कुल मालिक के वचनों अनुसार ठीक 15 दिनों बाद जब प्यारे सतगुरु जी डेरा सच्चा सौदा, बरनावा आश्रम में पहुंचे तो प्रेमी ओमप्रकाश भी अपने सतगुरु जी के दर्शन करने के लिए वहां पहुंच गया। प्रेमी के करीब करीब सारे जख्म भर चुके थे, परंतु उसके हाथ का एक जख्म काफी खराब हो चुका था। उस समय भी उस पर पट्टी बंधी हुई थी। दयालु दातार जी ने प्रेमी को अपने पास बुलाकर उसका हाल-चाल पूछा और उसके हाथ को अपने पवित्र हाथों में लेकर बहुत ही गौर से देखा। वह तो सच्चे पातशाह कुल मालिक का एक अनूठा खेल था। उसे स्पष्ट अनुभव हुआ कि वास्तव में पूज्य सतगुरु जी ने अपनी दृष्टि व अपार रहमत से उसके करोड़ों जन्मों के कर्मों को उन कुछ दिनों में ही काट दिया था। उस समय कुल मालिक जी ने वचन फरमाया, ‘‘भाई! उन बदमाशों को कुल मालिक स्वयं ही जल्दी सजा देगा।’’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जब ‘अंजू इन्सां अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा चंडीगढ़…" href="http://10.0.0.122:1245/body-donation-of-anju-insan-for-medical-research/">जब ‘अंजू इन्सां अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा चंडीगढ़…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/charisma-of-shah-satnam-ji-maharaj/article-49467</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 21:07:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जिस किडनी में पहले खून की तीन गांठें थी, उनकी जगह बन गए पावन स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुर की रहमत से बीमारी से मिली मुक्ति सन् 2020 की बात है, मेरे पेट में बहुत दर्द हुआ। जब गांव के डाक्टरों से आराम नहीं मिला तो शाह सतनाम जी सार्वजनिक अस्पताल श्री गुरूसर मोडिया में चैकअप करवाया। अल्ट्रासाउंंड के बाद डाक्टरों ने बताया कि लैफ्ट किडनी में खून की तीन गांठें बनी हुई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/got-freedom-from-disease-by-the-grace-of-satguru/article-47358"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/miracle.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">सतगुर की रहमत से बीमारी से मिली मुक्ति</h4>
<p style="text-align:justify;">सन् 2020 की बात है, मेरे पेट में बहुत दर्द हुआ। जब गांव के डाक्टरों से आराम नहीं मिला तो शाह सतनाम जी सार्वजनिक अस्पताल श्री गुरूसर मोडिया में चैकअप करवाया। अल्ट्रासाउंंड के बाद डाक्टरों ने बताया कि लैफ्ट किडनी में खून की तीन गांठें बनी हुई हैं। डाक्टर ने इसका पूर्ण इलाज आप्रेशन ही बताया। जब मेरे माता-पिता ने आप्रेशन करवाने में असमर्थता दिखाई तो डाक्टर ने एक महीने की दवाई देते हुए कहा कि जब फिर आओगे तो अल्ट्रासाउंड करवाना है। इधर मेरे कभी दर्द होने लग जाता तो कभी अपने आप ही बंद हो जाता। कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। एक महीने के बाद जब अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि गांठें और बड़ी हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डाक्टर ने फिर से चार महीने की दवाई दे दी। लेकिन वह दवाई खाने के बाद दर्द काफी कम हो गया और ठीक रहने लगी। परंतु काफी समय निकल जाने के बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं करवाया। दो साल बाद सन् 2022 में मेरे पेट में फिर से उसी तरह का दर्द हुआ। मैंने गांव के डाक्टर से ही दवाई ले ली, जिससे कुछ समय तक दर्द नहीं हुआ। कभी दर्द हुआ, कभी थम गया, ऐसा चलता रहा। इससे मेरे मन में हमेशा यह भय बना रहता कि पता नहीं कब दर्द होने लग जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं अपने अराध्य पूजनीय हजूर पिता जी से अर्ज करती रहती कि दवाइयों से तो आराम नहीं आ रहा, आपजी ही कृपा करो, मुझे तंदुरूस्त करो। एक रात मैं नाम का सुमिरन करती-करती ही सो गई तो सपने में मुझे पूज्य पिता जी के दर्शन हुए। पूज्य हजूर पिता जी ने मुझे प्याज की चटनी व लस्सी के साथ लंगर खिलाया और स्वयं भी खाया। उस समय पूज्य हजूर पिता जी ने वचन फरमाए- बेटा! तुम्हारे गांव में साध-संगत बहुत है, परंतु किसी कारण वश वह नीं आ रही। उसको दोबारा साध-संगत से जोड़ो। मैंने हाथ जोड़कर पूज्य पिताजी को नारा लगा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य पिताजी के दर्शनों से मुझे बहुत खुशी मिली। 23 फरवरी 2023 को मेरे पेट में फिर से बहुत जोर का दर्द उठा। दर्द असहनीय था, जिस कारण मैं ऊंची-ऊंची आवाज में रोने लगी। गांव के डाक्टर को बुलाकर दवाई दिलाई गई, उस डाक्टर ने मेरे माता-पिता को कहा कि इसको जांच के लिए किसी बड़े अस्पताल में ले जाओ। अगले दिन 24 फरवरी को मुझे श्रीगंगानगर के पारस अस्पताल में लेजाया गया। डाक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाया तो रिपोर्ट नार्मल आई। जिस किडनी में पहले खून की तीन गांठें थी, उनकी जगह अब पूज्य हजूर पिता जी के तीन पावन स्वरूप बन गए। मैं अब बिलकुल ठीक हूं। इस प्रकार पूज्य पिता जी ने मेरा मौत जैसा भयानक कर्म काट दिया। मैं पूज्य पिताजी के इस उपकार का बदला किसी भी तरह नहीं चुका पाऊंगी। पूज्य पिता जी इसी तरह अपनी दया-मेहर बनाए रखना जी।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 18:09:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>&amp;#8230;जब सतगुरू जी ने अपने वचनों से काट दी बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[सन् 2005 की बात है। मेरे गुर्दे में पत्थरी बन गई थी। मैंने इसका इलाज शुरू किया। इलाज के साथ-साथ पत्थरी का दर्द बढ़ता जा रहा था, और पत्थरी भी। जब भी हम अल्ट्रासाऊंंड करवाते तो पत्थरी पहले से भी बड़े साईज में होती। क्या देसी, क्या अंग्रेजी हर तरह की दवाईयां खाई, जैसे-जैसे डॉक्टरों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/miracle-happened-with-dera-devotee-by-saint-dr-msg/article-35954"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/saint-dr.-msg-29.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सन् 2005 की बात है। मेरे गुर्दे में पत्थरी बन गई थी। मैंने इसका इलाज शुरू किया। इलाज के साथ-साथ पत्थरी का दर्द बढ़ता जा रहा था, और पत्थरी भी। जब भी हम अल्ट्रासाऊंंड करवाते तो पत्थरी पहले से भी बड़े साईज में होती। क्या देसी, क्या अंग्रेजी हर तरह की दवाईयां खाई, जैसे-जैसे डॉक्टरों ने परहेज बताया, वैसे-वैसे ही मैं परहेज भी रखता गया, पर दर्द बिल्कुल भी कम नहीं हो रहा था। अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी चैकअप करवाया तो सभी ने यही परामर्श दिया कि जल्दी से जल्दी ऑपरेशन करवा लो। मैं ऑपरेशन करवाने के लिए सरसा के निजी अस्पताल में चला गया। डॉक्टरों ने चैकअप करके बोला कि जल्दी ऑपरेशन करवा लो, तो मैंने हामी भर दी। लेकिन डॉक्टर साहिबान ने कहा कि तुम्हारा ऑपरेशन सरसा में नहीं होगा। यह ऑपरेशन जयपुर जैसे शहर में ही संभव है। डॉक्टर से विचार-विमर्श करने के बाद हम वापिस घर आ गए। उधर उसी दिन मेरे मौसा जी मेरा हाल चाल जानने के लिए घर आए। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल की एक टीचर ने भी जयपुर से पत्थरी का ऑपरेशन करवाया है। बाद में मौसा जी उस अध्यापिका से जयपुर के उस डॉक्टर का नाम और पता ले आए। मेरी पत्नी ने मेरी जांच की सभी रिर्पोटें लिफाफे में डाल ली।</p>
<p style="text-align:justify;">जयपुर जाने की उधेड़बुन के बीच मैंने सोचा कि शाम की रूहानी मजलिस का समय हो गया है। पूज्य हजूर पिता के दर्शन करके आते हैं, और रात को गाड़ी से जयपुर चले जाएंगे। उस दिन शाह मस्ताना जी धाम में रूहानी मजलिस थी। मजलिस के दौरान मैंने देखा कि तेरावास के बाहर उन मरीजों की लाईनें लगी हुई थी जो पूज्य हजूर पिता जी से मिलना चाहते थे। मैं भी उनकी लाईन में जाकर बैठ गया। रूहानी मजलिस के उपरांत पूज्य हजूर पिता जी ने तेरावास के बाहर आकर उन सभी लोगों को दर्शन दिए जो मिलना चाहते थे। जब पूज्य हजूर पिता जी ने मेरे नजदीक आए तो मैंने भी अर्ज कर दी पिता जी! मेरे पत्थरी है, मैंने जयपुर पत्थरी का ऑपरेशन करवाने जाना है। मेरी बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि पूज्य हजूर पिता जी ने पास खड़े सेवादार को हुक्म फरमाया, ‘‘बेटा! जो नई दवाई आई है, इसको दे दो और कहो कि यह दवाई गाय के दूध की लस्सी के साथ लेनी है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">आश्रम में वैद्य आत्मा राम इन्सां ने पूज्य पिता जी के हुक्मानुसार 15 दिनों की दवाई दे दी, जो सुमिरन करके लेनी थी। मैंने कई वर्षों से नामदान लिया हुआ था। परंतु मैं कभी भी बैठकर सुमिरन नहीं करता था। दवाई लेने के लिए मैं थोड़ा सा सुमिरन करता और शाम को रूहानी मजलिस में चले जाते। ठीक तेहरवें दिन जब मैं बाथरूम गया तो पत्थरी अपने आप बिना किसी तकलीफ के बाहर निकल गई। उसके बाद मुझे कभी भी तकलीफ नहीं हुई। वाह मालिक! तेरे चोज!! कहां तो मैं जयपुर जाने को तैयार था और कहां आप जी ने मेरी बीमारी अपने पावन वचनों से ही काट दी। पिता जी, हम आप जी के परोपकारों का बदला कभी भी नहीं चुका सकते। पिता जी आप जी से हमारी यही अर्ज है कि हमें हमेशा अपने पावन चरण कमलों में लगाए रखना जी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 21:05:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>‘असीं तां कल ही रानियां गए थे, तुसीं सोए पड़े थे’</title>
                                    <description><![CDATA[सतपाल बड़ा काका इन्सां निवासी रानियां जिला सरसा, पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने ऊपर हुई अपार रहमत का वर्णन इस प्रकार करता है, जो उसने सन् 2003 में पूज्य हजूर पिता जी की पावन हजूरी में ब्यान किया है:-मेरे सोहणे दातार जी! मैं आप जी की दया मेहर से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/miracle-by-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan/article-34282"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/saint-dr.-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सतपाल बड़ा काका इन्सां निवासी रानियां जिला सरसा, पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने ऊपर हुई अपार रहमत का वर्णन इस प्रकार करता है, जो उसने सन् 2003 में पूज्य हजूर पिता जी की पावन हजूरी में ब्यान किया है:</strong>-मेरे सोहणे दातार जी! मैं आप जी की दया मेहर से यह बात पूरे दावे के साथ कहता हूं कि आप जी सिर्फ तेरावास में नहीं होते।</p>
<p style="text-align:justify;"> बल्कि जहां-जहां जीव आपको पूरी तड़प के साथ याद करते हैं, आप जी वहां-वहां जाकर जीवों को दर्शन देते हो जी। पिता जी, कई जग बीती सुनाते हैं, लेकिन मैं अपनी हड्डबीती सुना रहा हूं। मेरा सारा परिवार सेवा पर आया हुआ था। अलार्म खराब था। मैं शिखर की छत पर जाकर सो गया। मैं ख्यालों में आप जी को कह रहा था, पिता जी (पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ) चार बजे उठा देना जी , विनती बोलनी है जी, भूल न जाना जी। आज मैं घर में अकेला ही हूं जी।</p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>‘पौने चार बजे मेरी चारपाई को किसी ने जोर से हिला दिया’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यह सोचते-सोचते मैं सो गया। पौने चार बजे मेरी चारपाई को किसी ने जोर से हिला दिया। मैं नींद में कह रहा था कि दूध फ्रिज में से ले लेना, मेरी नींद क्यों खराब करता है? क्योंकि पड़ोसी का दूध हमारे फ्रिज में था। थोड़ी देर में एक और झटका लगा तो मैं उठकर बैठ गया। आसपास में देखा, कोई नहीं था। फिर ऊपर से उतर कर नीचे चौबारे में आ गया। दीवार घड़ी पर टाईम देखा तो चार बजे का टाईम था।</p>
<p style="text-align:justify;"> आप जी को कहा था, आप जी ने आकर उठा दिया, परंतु मैं अपराधी पहचान न सका। बाद में मैं बहुत पछताया और सोचा, प्यारे पिता जी दस मिनट और रूक जाते, दोनों बाप-बेटा दूध में पत्ती डालकर पीते। पिता जी आप जी तो आए और गए। पिता जी, सारा परिवार सेवा करके वापिस लौटा, हमारे नीचे वाले मकान में एक मैडम किराये पर रहती है। वह मेरी पत्नी को कहने लगी, ‘दीदी ! आज सुबह मैंने चार बजे मकान की छत पर सरसे वाले आपके गुरू जी (पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) को देखा है।’</p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>‘जब आप सरसा दरबार जाया करो तो मुझे भी साथ ले जाया करो’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">वाह दयालु पिता जी, आप जी धन्य हो। आप जी ने उसको भी दर्शन दिए। कुछ दिनों के उपरांत वह मैडम हमारे साथ सरसा दरबार में आई, आप जी के दर्शन करके वैराग्य में आ गई, और रोने लगी। हमें कहने लगी, पूज्य हजूर पिता जी में से मुझे हमारे गुरू -महाराज के दर्शन हुए हैं। जब आप सरसा दरबार जाया करो तो मुझे भी साथ ले जाया करो। उसी समय के दौरान रानियां के प्रेमियों ने तेरावास में पूज्य गुरू जी के सामने अर्ज की कि पिता जी ! आप जी रानियां में चरण टिकाएं जी  तो आप जी ने फरमाया, ‘भाई! असीं तां कल ही रानियां में गए थे, तंूसी सोए पड़े थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दरबार में चारपाईयां पड़ी हुई थी। चादरें बिछी हुई थी।’ यह सुनकर सारी साध-संगत ने कान पकड़े और कहा कि हम भूल जाते हैं, आप जी अपने वायदे पर पक्के रहते हो जी। पिता जी! इन बातों से पता चलता है कि आप जी तेरावास में नहीं होते, जहां-जहां आप जी को कोई याद करता है, वहां-वहां आपजी जाकर दर्शन देते हो जी। आप जी ने फरमाया, ‘भाई हजम किया करो, दर्शन हो तो।’ पिता जी हमसे तो आप जी को बिना बताए रहा नहीं जाता। आप जाणो आपका काम जाणे। हमने तो जो देखा, लिख दिया। अब आप जाणो, आप का काम जाणे।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 19:06:09 +0530</pubDate>
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                <title>अच्छे कर्मों से जिंदगी में आती हैं खुशियों की बहार</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिन मेरा छोटा भाई राकेश किसी कार्यवश तेरावास में पूजनीय परम पिता जी से मिला। पूजनीय परम पिता जी ने राकेश को कहा, ‘‘बेटा, राजेश को बोलना कि उसके लिए एक अच्छा रिश्ता ढूंढ रखा है।’’ उन्हीं दिनों पूजनीय परम पिता जी ने मेरे पापा श्री पुरूषोत्तम लाल धवन को वचन किए, ‘‘राजेश की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/good-deeds-bring-happiness-in-life/article-31571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/shah-satnam-singh-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक दिन मेरा छोटा भाई राकेश किसी कार्यवश तेरावास में पूजनीय परम पिता जी से मिला। पूजनीय परम पिता जी ने राकेश को कहा, ‘‘बेटा, राजेश को बोलना कि उसके लिए एक अच्छा रिश्ता ढूंढ रखा है।’’ उन्हीं दिनों पूजनीय परम पिता जी ने मेरे पापा श्री पुरूषोत्तम लाल धवन को वचन किए, ‘‘राजेश की तो एमएससी पूरी होने से पहले ही नौकरी लग जाएगी।’’ मैं पूजनीय परम पिता जी के इन वचनों पर हैरान था। मैंने तो अभी पीएचडी करके डॉक्टर की डिग्री लेनी है। जब मैंने परीक्षा दी तो मेरे पीएचडी की परीक्षा में अंक कम रह गए। वजीफा लगने का कोई अवसर न रहा। मैं हताश हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने सोचा कि अब मैं पीएचडी में रह जाऊंगा। मैं घर से पैसा लेना नहीं चाहता था। पीएचडी करने में चार साल का समय लगता है। खर्चा बहुत होता है। उन्हीं दिनों मुझे पता चला कि जर्मन कंपनी हैक्सट में कुछ नौकरियां निकली हैं। मैंने नौकरी के लिए हैक्सट कंपनी दिल्ली को प्रार्थना पत्र भेज दिया। इसके बाद मुझे निश्चित तिथि को मुझे साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। वहां पचास से भी ज्यादा अनुभव किए हुए लोग आए हुए थे। केवल तीन अफसर ही नियुक्त करने थे। भाग्यवश उन तीनों में मेरा नाम भी था। मैं हैरान रह गया कि मेरा कोई अनुभव भी नहीं था। मेरी एमएससी पूरी होने में अभी आठ महीने का समय था। लेकिन मुझे कंपनी के आदेश के मुताबिक अचानक कार्यभार संभालना पड़ा। इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी के वचन पूरे हुए। पूजनीय परम पिता जी के वचनों के अनुसार मेरी शादी भी एक साल बाद हो गई थी।<br />
<strong>-श्री राजेश धवन, मुम्बई (महाराष्टÑ)</strong></p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>‘‘बेटा, घबराओ नहीं, हम मालिक से चार गुणा मंजूर करवाएंगे’’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सतगुरू की कृपा से हमारे घर एक लड़के ने जन्म लिया। जन्म के एक महीने बाद बच्चा अचानक बीमार हो गया और बेहोश हो गया। हमनें डॉक्टर से इलाज करवाया परंतु कुछ ही समय बाद वह लड़का शरीर छोड़ गया। आश्रम में आकर हमनें सारी बात पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज को बताई। पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, घबराओ नहीं, हम मालिक से चार गुणा मंजूर करवाएंगे।’’ इसके बाद सतगुरू की कृपा से हमारे घर चार बच्चों ने जन्म लिया और मालिक की इस रहमत से हमारा घर खुशियों से भर गया।<br />
<strong>-श्री बाबू सिंह, नसीबपुरा बठिंडा (पंजाब)</strong></p>
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                <pubDate>Fri, 18 Mar 2022 06:29:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सतगुरु जी की रहमत से भयानक बीमारी हुई ठीक</title>
                                    <description><![CDATA[बहन दविंदर कौर इन्सां पत्नी प्रेमी जसवीर सिंह इन्सां पुत्र प्रेमी जीवन राम इन्सां, निवासी गाँव बनूड़, तहसील राजपुरा, जिला पटियाला (पंजाब) ने स्वयं पर हुए पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन रहमो-करम को इस प्रकार बयान करती है- सन् 2013 की बात है। मुझे बहुत दर्द होता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/due-to-the-mercy-of-saint-dr-msg-a-terrible-disease-was-cured/article-27719"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/hajur-pita-ji-6-scaled.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बहन दविंदर कौर इन्सां पत्नी प्रेमी जसवीर सिंह इन्सां पुत्र प्रेमी जीवन राम इन्सां, निवासी गाँव बनूड़, तहसील राजपुरा, जिला पटियाला (पंजाब) ने स्वयं पर हुए पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन रहमो-करम को इस प्रकार बयान करती है-</p>
<p style="text-align:justify;">सन् 2013 की बात है। मुझे बहुत दर्द होता था। मैंने चेकअप करवाया तो डॉक्टरों ने बताया कि बच्चेदानी मेंं रसोली है। तीन डॉक्टरों से अलग-अलग चेकअप करवाया, सभी की एक ही राय थी कि बच्चेदानी में रसोली है और इसका आॅपरेशन करवाना पड़ेगा। इसके अलावा अन्य कोई इलाज नहीं है। उस दौरान मेरे पति जिस कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करत थे, उस कंपनी ने किसी और के पैसे देने थे। मेरे पति दो लाख रुपए का घी लेकर अमृतसर में देने गए। जिस व्यक्ति ने वो घी लेना था और उसके बदले में दो लाख रुपए देने थे, उन्होंने घी अपनी गाड़ी में लोड करवाया और बिना पैसे दिए ही वहां से भाग निकले। इस दो लाख रुपए का इल्जाम मेरे पति पर लग गया। कंपनी ने मेरे घर वाले पर केस कर दिया कि इन्होंने दो लाख रुपए की गड़बड़ी की है। उस झगड़े में मेरे पति कभी कहीं जाते, कभी कहीं। इसी चक्कर में हमारे पास जो भी थोड़ी-बहुत पूंजी थी, वो सारी खत्म हो गई। हम कंगाल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय मैं अपनी बीमारी, पति के झगड़े और गरीबी की वजह से बहुत ही परेशान थी। मैं अपने सतगुरु परम पूजनीय हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को अपना दु:ख दूर करने के लिए विनती करने वास्ते 29 अप्रैल 2013 को डेरा सच्चा सौदा, सरसा दरबार में चली गई। उस दिन डेरा सच्चा सौदा में ‘रूहानी स्थापना दिवस’ व ‘जाम-ए-इन्सां गुरु का’ की वर्षगांठ के उपलक्ष में पावन भंडारे का कार्यक्रम था। मैं शाही स्टेज के बिल्कुल नजदीक जाकर बैठ गई। सत्संग शुरू हो गया। पूज्य गुरु जी सत्संग फरमाने के लिए शाही स्टेज पर विराज हुए। पूज्य गुरु जी के दर्शन करके मुझे वैराग्य आ गया। मुझे इतना रोना आया जिसको शब्दों में लिखा नहीं जा सकता। मैंने पिता जी के चरण-कमलों में विनती की कि हे दीनदयाल पिता जी! मेरे दोनों बच्चे बड़े आॅपरेशन से हुए हैं, इसलिए मैं आॅपरेशन नहीं करवा सकती। आपको तो मेरी हालत का पता ही है। मेरे पास इलाज के लिए पैसे भी नहीं हैं। अगर मैं बगैर इलाज के मर गई, तो मेरे बच्चे रुल जाएंगे। इन्हें माँ नहीं मिलेगी। पिता जी, मुझको आपने ही ठीक करना है। मैंने आॅपरेशन नहीं करवाना। मुझ पर रहमत करो। पिता जी, मुझे आप जी ने ही ठीक करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय पिता ने शाही स्टेज से वचन फरमाया कि जो मरीज हैं, उन्होंने 10 नंबर कमरे से दवाई लेनी है और आधा घंटा सुमिरन करके दवाई खानी है। मैं 10 नंबर कमरे से दवाई ले आई। वहां वैद्य जी ने मुझे एक महीने की दवाई दी। दवाई लेकर मैं अपने घर आ गई। एक रात को प्यारे सतगुरु जी ने मुझे सपने में दर्शन दिए। पूज्य पिता जी कुर्सी पर विराजमान थे और मैं पिता जी के चरण-कमलों में बैठी थी। पिता जी ने मेरे सिर पर हाथ रखा और वचन फरमाया कि ‘बेटा, अल्ट्रासाउंड करवाओ।’ उस समय मुझे जो खुशी हुई, उसका लिख-बोलकर वर्णन नहीं हो सकता। पिता जी ने तो उसी रात मेरा कष्ट काट दिया था, परन्तु मैंने वैद्य जी के कहे अनुसार महीनाभर दवाई खाई और उसके बद जब अल्ट्रासाउंड करवाया तो उसमें कुछ भी नहीं आया। यानि कि बिना आॅपरेशन करवाए ही मेरे मुर्शिद दाता प्यारे पिता जी ने मेरी उस रसौली का खात्मा कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सतगुरु जी ने मुझ पर इतना बड़ा उपकार किया कि अगर मैं लाखों जन्म ले लूं तो भी अपने सतगुरु का देन नहीं दे सकती। मेरे पति ने तब तक रूहानी जाम नहीं पीया था। जब उनको मुझ पर हुई सतगुरु जी की रहमत का पता चला, तो उन्हें भी सतगुरु जी पर पूर्ण विश्वास हो गया। अगले सत्संग पर उन्होंने भी रूहानी जाम पी लिया। मेरे पति द्वारा जाम पीने पर सतगुरु जी की रहमत शुरू हो गई। जो व्यक्ति दो लाख रुपए का घी लेकर भागा था, वह अपने आप ही पेश हो गया और इस तरह हमारा वो केस भी निपट गया।</p>
<p> </p>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 05:00:05 +0530</pubDate>
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                <title>सच्चे सतगुरु जी ने सेवादार को सांप से बचाया</title>
                                    <description><![CDATA[‘‘हमनें तो पहले ही कहा था कि भक्त को कहीं सांप न खा जाए। इसलिए तेरे पास आए हैं, तेरा सतगुरू साथ है।’’ एक बार खेतों में दो सेवादारों के साथ पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज जी पैदल दूर तक निकल गए। एक सेवादार ने बाबा जी से कहा कि सांई जी, हम काफी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/shah-mastana-ji-maharaj-saved-the-servant-from-the-snake/article-27262"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/mastana-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>‘‘हमनें तो पहले ही कहा था कि भक्त को कहीं सांप न खा जाए। इसलिए तेरे पास आए हैं, तेरा सतगुरू साथ है।’’</strong></p>
<p style="text-align:justify;">एक बार खेतों में दो सेवादारों के साथ पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज जी पैदल दूर तक निकल गए। एक सेवादार ने बाबा जी से कहा कि सांई जी, हम काफी दूर आ गए हैं। अब वापिस चलना चाहिए। इस पर दयालु दातार ने फरमाया, ‘‘नाहर सिंह आगे लकड़ियां लेने गया है, कहीं उसे सांप न काट खाए, कौन जिम्मेदार होगा।’’ थोड़ी देर बाद सामने से भक्त नाहर सिंह लंगर के लिए लकड़ियों की गठरी बांधे अपने सिर पर रखकर लाता हुआ मिला। उस गठरी में लकड़ियों में एक सांप लिपटा हुआ था। जब सांप की पूंछ उसने लटकती देखी तो गठरी नीचे फैंक दी और आप जी से कहा कि सांई जी, इसमें तो सांप है। सच्चे पातशाह जी ने फरमाया, ‘‘हमनें तो पहले ही कहा था कि भक्त को कहीं सांप न खा जाए। इसलिए तेरे पास आए हैं, तेरा सतगुरू साथ है।’’ फिर उस सांप को छोड़ दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Sep 2021 05:15:06 +0530</pubDate>
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                <title>जब ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ के नारे से मृत देह में आ गई जान</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का हर कार्य मानवता भलाई को समर्पित रहा है। जब भी चाहे देश की बात हो या किसी जरूरतमंद की मदद की, आपजी ने सर्वप्रथम मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। मानवता पर अनगिनत उपकार करने के बावजूद आज तक आपजी ने इसे कभी नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/power-of-slogan-of-dhan-dhan-satguru-tera-hi-aasra/article-25943"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/msgtips-e1617526079523.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का हर कार्य मानवता भलाई को समर्पित रहा है। जब भी चाहे देश की बात हो या किसी जरूरतमंद की मदद की, आपजी ने सर्वप्रथम मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। मानवता पर अनगिनत उपकार करने के बावजूद आज तक आपजी ने इसे कभी नहीं जताया। साध-संगत के अनेक भारी कर्मों को काटकर आपजी ने उनके जीवन को खुशियों से महकाया है। सतगुरु जी के उपकार की एक ऐसी ही सच्ची साखी आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#3366ff;"><strong>प्रेमी धर्मवीर गाँव खिन्दौड़ जिला मेरठ (यूपी) से सर्व-सामर्थ सतगुरु जी की महान शक्ति का एक प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार बयान करता है :-</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;">बात अप्रैल 1993 की है। उन दिनों प्रेमी धर्मवीर कुछ दिनों के लिए डेरा सच्चा सौदा शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) में सेवा पर आया हुआ था। अचानक पीछे से उसके बुजुर्ग पिता जी की तबीयत खराब हो गई और वो चोला छोड़ गए। जैसे ही परिवार वालों को इस बारे में पता चला तो घर में रोना-पीटना शुरू हो गया, जिससे आस-पड़ोस के काफी लोग उनके घर पर इकट्ठे हो गए। इस दु:ख की घड़ी के चलते परिवार वालों ने उसी समय अपने सभी रिश्तेदारों को शोक समाचार भिजवा दिया और धर्मवीर को भी यूपी दरबार से घर बुला लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">चोला छोड़ने के बाद धर्मवीर के पिता जी को नीचे जमीन पर उतार लिया गया। उनके रिश्तेदार तथा आस-पड़ोस के कुछ लोग मृतक देह के चारों तरफ बैठ गए। उनमें से कुछ लोग अफसोस में डूबे हुए थे। वहीं कुछ उस दिवंगत आत्मा के गुणों को लेकर आपस में बातें कर रहे थे और घर में माता-बहनों और परिजनों का रोना-पीटना जारी था।</p>
<p style="text-align:justify;">शोक की इस घड़ी के बीच तभी अचानक धर्मवीर का बेटा जितेन्द्र उठा और कमरे में से पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का पावन स्वरूप उठा लाया। तब वहां मौजूद सभी लोग उस मासूम को बड़े ध्यान से देखने लगे। जितेन्द्र पूजनीय परम पिता जी का स्वरूप (फोटो) लेकर अपने दादा जी की पार्थिव देह के पास आकर बैठ गया। वो उनके कान में जोर से ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ का नारा बोलकर कहने लगा, ‘‘दादा! तुम भी सतगुरु का नारा लगाओ और परम पिता जी के दर्शन कर लो।’’ इतने में बुजुर्ग के मृतक शरीर में कुछ हरकत महसूस हुई। हरकत देख वहां मौजूद लोगों ने उनके मुँह में पानी डाला तो वो उठकर बैठ गए तथा ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ का नारा लगाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मवीर बताते हैं कि उनके पिता जी ने बताया कि मैं परम पिता जी के पास था और पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने ही मुझे जिन्दा किया है। कुल मालिक का वह अद्भुत चमत्कार देखकर सभी लोग हैरान रह गए। वहां मौजूद लोगों में से कुछ ऐसे भी थे, जो नाम की महान शक्ति को नहीं मानते थे। वो अक्सर निंदा-चुगली ही किया करते थे। लेकिन कुल मालिक की रहमत के उस हैरान कर देने वाले साक्षात् सच को देखकर इतने प्रभावित हुए कि वो भी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की महिमा गाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य सतगुरु जी की दया मेहर से उनमें से किसी के पास भी किन्तु – परन्तु करने की लेश मात्र भी गुंजाइश नहीं थी। क्योंकि उन सभी उपस्थित लोगों ने प्रभु परमात्मा का वह अलौकिक खेल स्वयं अपनी आँखों से सामने देख लिया था। वाली दो जहान पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के उस अलौकिक करिश्में से प्रभावित होकर गांव के बहुत से जीवों ने अगले मासिक रूहानी सत्संग पर आकर ही नाम दान प्राप्त कर लिया। उन अधिकारी जीवों में से कुछ वे रिश्तेदार भी थे, जो पहले सतगुरु जी के मार्ग के हमेशा उल्ट चला करते थे। उस गांव के बहुत से सूझवान लोग अब भी सतगुरु जी की उस अद्भुत लीला का जिक्र करना नहीं भूलते।</p>
<p style="text-align:justify;">उपरोक्त करिश्में के संबंध में धर्मवीर ने जब पूज्य हजूर पिता जी के पवित्र चरण कमलों में प्रार्थना की तो वाली दो जहान दातार जी ने अपने पवित्र मुख से फरमाया, ‘‘भाई! सतगुरु जी का नारा वैसे ही नहीं लगाना। किसी विशेष अवसर पर अथवा मालिक ने अपनी ऐसी रूहों को प्रभु-भक्ति में लगाना हो तब धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का यह नारा लगवाना पड़ता है।’’</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#333399;"><em><strong>इससे स्पष्ट है कि पूर्ण सतगुरु सर्व-सामर्थ हैं। वह स्वयं कुल मालिक हैं। सतगुरु के नारे का तो बहाना बना। असल में सतगुरु जी ने अपनी अपार कृपा-दृष्टि व रहमत से लाखों पापी, अपराधी तथा कम बुद्धि जीवों को नाम दान बख्श कर संसार सागर तथा चौरासी के चक्कर से मुक्त किया है और लगातार कर रहे हैं।</strong></em></span></p>
<p> </p>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 10:37:41 +0530</pubDate>
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                <title>जब सतगुरु ने जान बख्शकर नौ बर नौ कर दी थी आँखों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[डेरा सच्चा सौदा दरबार सरसा से सत् ब्रह्मचारी सेवादार गुरबख्श सिंह जी अपने सतगुरु प्यारे की अपार बख्शिश का एक प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है। सन् 1969 में मुझे नाम की बख्शिश हुई। उन दिनों मैं रतिया में अपने घर में रहा करता था। सन् 1970 में एक बार जब मैं साध-संगत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा दरबार सरसा से सत् ब्रह्मचारी सेवादार गुरबख्श सिंह जी अपने सतगुरु प्यारे की अपार बख्शिश का एक प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है। सन् 1969 में मुझे नाम की बख्शिश हुई। उन दिनों मैं रतिया में अपने घर में रहा करता था। सन् 1970 में एक बार जब मैं साध-संगत के साथ भूूतने गाँव से नाम चर्चा के बाद वापिस रतिया आ रहा था तो रास्ते में एक जम्प पर मैं ट्रैक्टर के मडगार्ड से उछल कर नीचे जा गिरा और ट्राली का एक टायर मेरी पीठ पर से गुजर गया। संगत ने तुरंत मुझे संभाला। मैं बेहोश था। मुझे टोहाना अस्पताल में दाखिल करवाया गया। डॉक्टरों ने यह कहकर जवाब दे दिया कि मरीज की पसलियां बैठ गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए यह केस हमारी समझ से बाहर है और न ही यहां पर इतना इन्तजाम हो सकता है। मैं उस समय भी बेहोश था। मुझे अपने आप का कुछ भी पता नहीं था। मुझे अपने सतगुरु पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के दर्शन होते रहे। मुझे आखिर वापिस रतिया मेरे घर पर लाया गया। एक दिन मैं बहुत परेशान था। मुझे परम पिता जी के दर्शन हुए। कुल मालिक जी ने वचन फरमाया, ‘‘बेटा! घबरा ना! तेरा कुछ नहीं बिगड़ता। जल्दी ठीक हो जाएगा।’’ बस! फिर क्या देर थी। कुल मालिक के वचनों के अनुसार मैं एक हफ्ते के अन्दर ही लाठी का सहारा लेकर चलने लग गया और कुछ ही दिनों में बिल्कुल स्वस्थ हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य परम पिता जी कृपा हुई। सन् 1974 में मैंने पक्के तौर पर दरबार में सेवा करनी आरम्भ कर दी। मैं सिलाई की सेवा किया करता। सन् 1970 में मेरे डेढ़ नम्बर की ऐनक लगी हुई थी। सिलाई तुरपाई आदि जितना भी बारीक काम था। वह ऐनक लगा कर ही किया करता था। ऐनक लगाए बिना तो मैं सुई में धागा भी नहीं डाल सकता था। सन् 1980 की बात है। एक बार मैं शहनशाही गुफा में बैठा काम कर रहा था। गर्म-कपड़ों की सिलाई की सेवा चल रही थी। काम बहुत बारीकी का था। मेरी ऐनक बार-बार नीचे को लुढ़क जाती, इस प्रकार ऐनक से मैं बहुत परेशान हो गया था, परन्तु मजबूरी थी कि ऐनक लगाए बिना तो मैं एक टांका भी नहीं लगा सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक अन्तर्यामी दयालु दातार जी मेरे पास आकर विराजमान हो गए। शहनशाह जी ने बारी-बारी से सभी सेवादारों की कुशलता के बारे में पूछकर उन्हें अत्यंत खुशी प्रदान की। फिर मुझ से हंसते हुए फरमाया, ‘‘भाई! तेरी ऐनक कैसे कभी नीचे हो जाती है और कभी ऊपर हो जाती है।’’ इस पर मैंने अपने मन की बात अपने प्यारे प्रियतम के चरणों में इस प्रकार बयान कर दी। पिता जी! ऐनक से यह काम ठीक नहीं आता। यह बार-बार गिर जाती है। बेपरसाई सार्इं जी ने फरमाया, ‘‘फिक्र न कर। ऐनक की जरूरत हीं नहीं रहेगी। ऐनक के बिना ही काम चल जाया करेगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मालिक का वचन सदा अटल है। अपने प्यारे दिलबर पूज्य परम पिता जी के प्रति मेरा दृढ़ विश्वास था। मालिक स्वयं ही अपने जीव को विश्वास करवाता है। मैंने उसी दिन ही ऐनक को उतार दिया, तब मेरी आयु लगभग 63-64 वर्ष की थी। मैं सिलाई, तुरपाई आदि का बारीक से बारीक काम भी बिना ऐनक लगाए कर लेता। पूज्य परम पिता जी के वचनों के अनुसार मुझे फिर कभी भी ऐनक लगाने की जरूरत महसूस नहीं हुई। यहां तक कि सुई में धागा डालना तथा बारीक तुरपाई आदि का काम भी मैं बिना ऐनक लगाए बड़ी सुगमता से कर लेता। एक बार मैंने एक स्पैशलिस्ट डॉक्टर से अपनी नजर टैस्ट करवाई। मेहरबान शहनशाह जी के वचनानुसार मेरी नजदीक व दूर दोनों तरह से दृष्टि ज्यों की त्यों बरकरार थी। यह सब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के पवित्र मुख वचनों के द्वारा ही संभव हुआ।</p>
<p> </p>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Aug 2021 13:12:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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