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                <title>Monsoon Season 2021 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>राज्यों को मिला ओबीसी सूची बनाने का अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राज्यसभा ने आज 105वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया जिससे अब राज्यों को फिर से अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की सूची बनाने का अधिकार मिल गया है। लोकसभा इस विधेयक को पहले की पारित कर चुकी है और इस तरह से इस संविधान संशोधन विधेयक पर संसद की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/states-got-the-right-to-make-obc-list/article-25967"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/rajya-sabha1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राज्यसभा ने आज 105वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया जिससे अब राज्यों को फिर से अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की सूची बनाने का अधिकार मिल गया है। लोकसभा इस विधेयक को पहले की पारित कर चुकी है और इस तरह से इस संविधान संशोधन विधेयक पर संसद की मुहर लग गयी है। इस विधेयक के पक्ष में 187 मत पड़े जबकि विरोध में शून्य। राज्यसभा में करीब पांच घंटे तक चली चर्चा का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार द्वारा जवाब देने के बाद सदन ने इसे मत विभाजन के जरिये पारित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इस पर मतदान करना पड़ा क्योंकि इस तरह के विधेयक के लिए सदन में उपस्थित दो तिहाई सदस्यों की सहमति की जरूरत होती है। हालांकि सभी राजनीतिक दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया था और इसे पारित कराने का आश्वासन दिया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सरकार को मिला विपक्ष का साथ</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विधेयक को पारित करने से पूर्व संविधान (127 वें संशोधन) विधेयक के नाम को बदल कर संविधान (105वां संशोधन) विधेयक किया गया। चर्चा का जवाब देते हुए डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य सरकारों की सूची के अनुसार ओबीसी समुदाय के लोगों को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा एवं कल्याणकारी योजनाओं के लाभ मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ओबीसी समुदाय के हितों की रक्षा को लेकर सरकार की नीति और नीयत दोनों साफ हैं। वर्ष 2018 में 102वें संविधान संशोधन के समय सबने उसका समर्थन किया था और विसंगति को लेकर कोई इशारा नहीं किया था। इस विधेयक से राज्यों के जो अधिकार खत्म हो गये थे, उन्हें बहाल किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ. कुमार ने कहा कि आरक्षण को लेकर सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी जिस पर अदालत ने साफ किया था कि 102वें संशोधन से संविधान के बुनियादी ढांचे और संघीय व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक जुलाई को उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण याचिका रद्द किये जाने के बाद सरकार ने विधेयक लाने का फैसला किया। इस विधेयक के पारित होने से महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों को भी फायदा होगा। इसके बाद पीठासीन अधिकारी सस्मित पात्रा ने इस विधेयक को मत विभाजन के जरिये पारित कराया। कुछ सदस्यों ने इसमें संशोधन के प्रस्ताव दिये थे जिसे मत विभाजन और ध्वनिमत से निरस्त कर दिये गये।</p>
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</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 18:41:23 +0530</pubDate>
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                <title>रक्षा कंपनियों में हड़ताल, तालाबंदी, छंटनी पर रोक वाला विधेयक पारित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। लोकसभा में विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 आज पारित हो गया जिसमें जिसमें रक्षा सेवाओं में संलग्न इकाइयों में असैन्य कर्मचारियों की हड़ताल, तालाबंदी और छंटनी पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान किये गए हैं। दो बार के स्थगन के बाद सदन के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bill-passed-to-ban-strike-lockout-layoffs-in-defense-companies/article-25714"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/monsoon-season.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> लोकसभा में विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 आज पारित हो गया जिसमें जिसमें रक्षा सेवाओं में संलग्न इकाइयों में असैन्य कर्मचारियों की हड़ताल, तालाबंदी और छंटनी पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान किये गए हैं। दो बार के स्थगन के बाद सदन के समवेत होने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदल, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल आदि विपक्षी दलों के सदस्य सदन के बीचोंबीच आ कर पेगासस जासूसी कांड, किसानों की समस्याओं एवं महंगाई को लेकर नारेबाजी करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने स्थान पर बैठें और सदन की कार्यवाही चलने दें। वह हर सदस्य को बोलने का पूरा अवसर देंगे लेकिन शोरशराबा नहीं थमा। अध्यक्ष के कहने पर रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 को सदन में चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>देश की रक्षा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखकर लाया है विधेयक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भट्ट ने विधेयक के बारे में सदन को आश्वस्त किया कि इसमें किसी भी श्रमिक अधिकारों एवं सुविधाओं का हनन नहीं किया गया है। सात रक्षा उपक्रमों में निगमीकरण के विरोध में कर्मचारियों के हड़ताल करने की नोटिस दिये जाने के बाद देश की उत्तरी सीमाओं की स्थिति को देखते हुए ऐहतियात के रूप में सरकार को जून में अध्यादेश लाना पड़ा और उसके स्थान पर ये विधेयक लाया गया है जिसे केवल तब ही इस्तेमाल किया जायेगा जब ऐसी स्थिति निर्मित होगी। देश की रक्षा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह विधेयक लाया गया है क्योंकि कोई नहीं चाहेगा कि देश की सीमाओं पर गोलाबारूद हथियारों एवं अन्य साजोसामान की आपूर्ति में कोई व्यवधान हो।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) के समाप्त होने के कारण इस विधेयक को लाने की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी हड़ताल की नोटिस नहीं देते तो इस अध्यादेश या विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इस विधेयक से किसी के लोकतांत्रिक अधिकारों का कोई संकट नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>रंजन चौधरी ने इस विधेयक को क्रूर कानून बताया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">शोरशराबे के बीच रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन ने इस विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इस विधेयक से रक्षा इकाइयों में करीब 84 हजार असैन्य कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की शर्तों का हनन होता है। उन्होंने हंगामे के बीच इतने महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने की सरकार की कोशिश का पुरजोर विरोध किया और कहा कि यह तरीका कतई उचित नहीं है। सरकार को इसे पारित नहीं कराना चाहिए। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस विधेयक को क्रूर कानून बताते हुए कहा कि यह कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने वाला विधेयक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारियों के हितों को रौंदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम हर मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि इसकी शुरूआत पेगासस जासूसी मामले पर चर्चा से हो। लेकिन इस हंगामे की स्थिति में यह विधेयक पारित नहीं किया जाए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सभी की सहमति बनने पर लाया है ये विधेयक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस के प्रो. सौगत राय ने भी इसे गैरलोकतांत्रिक और श्रमिक विरोधी विधेयक बताते हुए इसका विरोध किया। बसपा के नेता कुंवर दानिश अली ने भी विधेयक के विरोध में नारे लगाये। इसबीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आॅर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड के कर्मचारियों की यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ सौहार्द्रपूर्ण बातचीत में सहमति बनने के बाद ही इस विधेयक को लाया गया है। यह तभी प्रभावी होगा जब इसकी जरूरत होगी और यह देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर एक वर्ष के लिए बनाया गया है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Aug 2021 16:07:39 +0530</pubDate>
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