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                <title>Hijab - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Supreme Court हिजाब पहनकर परीक्षा देने की याचिका पर करेगा सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह कर्नाटक की प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में Hijab पहनकर वार्षिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग वाली छात्राओं की एक समूह की याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-will-hear-the-petition-to-give-exam-wearing-hijab/article-43755"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/for-security-reasons-prevention-of-burqa-hijab-in-sri-lanka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह कर्नाटक की प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में Hijab पहनकर वार्षिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग वाली छात्राओं की एक समूह की याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि छात्राओं की गुहार पर विचार किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शादान फरासत ने दावा किया कि उन्हें मार्च से शुरू होने वाली वार्षिक परीक्षाओं में शामिल होना है। छात्राएं Hijab पहनकर उस परीक्षा में बैठने की अनुमति चाहती हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं को पहले ही एक साल का नुकसान हो चुका है। अगर कोई राहत नहीं दी जाती है तो उनका एक साल और बर्बाद हो जाएगा।<br />
अधिवक्ता शादान फरासत ने पीठ के समक्ष तर्क देते हुए कहा कि हिसाब विवाद के कारण इन छात्राओं ने पहले ही अपना स्थानांतरण निजी कॉलेजों में करा लिया था, लेकिन उन्हें परीक्षाओं में शामिल होने के लिए सरकारी कॉलेजों में जाना पड़ता है। अधिवक्ता ने इस मामले में अंतरिम राहत देने की गुहार लगाई। छात्राओं की ओर से ऐसे ही अनुरोध 23 जनवरी को भी किया गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने 13 अक्टूबर 2022 को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब पहनने पर कर्नाटक सरकार के प्रतिबंध की वैधता पर एक खंडित फैसला दिया था। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष किया जाना था। शीर्ष न्यायालय की न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता (सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा था कि चूंकि विचारों में भिन्नता है, इसलिए इस मामले विचार के लिए एक बड़ी पीठ स्थापित करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च 2022 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें एक समुदाय को अपने धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति देना धर्मनिरपेक्षता के विपरीत माना गया था। न्यायमूर्ति गुप्ता के विपरीत न्यायमूर्ति धूलिया ने अपने फैसले में ‌अपील की अनुमति देने और पांच फरवरी 2022 को राज्य सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना को रद्द करने से असहमति जताई थी, जिसमें हिजाब पहनकर कॉलेजों में पर प्रतिबंध लगाया गया था।</p>
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                <pubDate>Wed, 22 Feb 2023 12:58:23 +0530</pubDate>
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                <title>बिना हिजाब पदक जीतने के बाद लापता हुईं ईरानी एथलीट</title>
                                    <description><![CDATA[सियोल/तेहरान (एजेंसी)। आईएफएससी विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली ईरानी महिला एल्नाज रेकाबी बिना हिजाब के दक्षिण कोरिया में प्रतिस्पर्धा करने के बाद लापता हो गई हैं। एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 33 वर्षीय रेकाबी ईरान के इस्लामी गणराज्य के अनिवार्य हिजाब नियम की अवज्ञा करने वाली दूसरी महिला एथलीट हैं। बीबीसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/iranian-athlete-elnaz-rekabi-goes-missing/article-39089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/elnaz-rekabi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सियोल/तेहरान (एजेंसी)।</strong> आईएफएससी विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली ईरानी महिला एल्नाज रेकाबी बिना हिजाब के दक्षिण कोरिया में प्रतिस्पर्धा करने के बाद लापता हो गई हैं। एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 33 वर्षीय रेकाबी ईरान के इस्लामी गणराज्य के अनिवार्य हिजाब नियम की अवज्ञा करने वाली दूसरी महिला एथलीट हैं। बीबीसी के अनुसार, सोमवार की सुबह ईरानी टीम के दक्षिण कोरिया से रवाना होने के बावजूद रेकाबी के दोस्त रविवार रात से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रेकाबी ने फ्रांस स्थित यूरोपीय मीडिया आउटलेट यूरोन्यूज को 2016 में दिये गये साक्षात्कार में प्रतियोगिताओं के दौरान हिजाब पहनने पर कहा था, “शुरूआत में, यह अन्य एथलीटों के लिए थोड़ा विचित्र था। वे एक लड़की को लेकर उत्सुक थे जो उसके सिर पर एक स्कार्फ और एक ऐसी पोशाक पहने हुए थी जो इतने गर्म तापमान में बाहों और पैरों को ढकती थी। निश्चित रूप से गर्म मौसम में हिजाब एक समस्या बन जाता है।” उन्होंने कहा था, “प्रतियोगिता के दौरान आपके शरीर को गर्मी को बाहर निकालने की जरूरत होती है, लेकिन हमने खुद एक ऐसी पोशाक बनाने की कोशिश की है जो हिजाब का सम्मान करती है और चढ़ाई के खेल के अभ्यास के अनुकूल है।”</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 15:03:08 +0530</pubDate>
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                <title>हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बंटा दोनों जजों का फैसला, अब बड़ी बेंच को सौंपा जाएगा केस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक (Hijab Ban Case) में प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कक्षाओं में छात्राओं के हिजाब पहनने पर राज्य सरकार के प्रतिबंध लगाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को विभाजित फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-to-pronounce-verdict-on-hijab-ban-case-today/article-38931"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/supreme-court-of-india-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक (Hijab Ban Case) में प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कक्षाओं में छात्राओं के हिजाब पहनने पर राज्य सरकार के प्रतिबंध लगाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को विभाजित फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अलग-अलग राय देते हुए कहा कि इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा, ताकि सुनवाई के लिए बड़ी पीठ गठित की जा सके। उच्च न्यायालय ने 15 मार्च अपने फैसले में हिजाब पहने पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य सरकार के पांच फरवरी के आदेश को उचित ठहराया था। इसके खिलाफ शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। शीर्ष अदालत की पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति गुप्ता ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और (उच्च न्यायालय के) 15 मार्च के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया जबकि न्यायमूर्ति धूलिया ने उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया और अपीलकतार्ओं की याचिकाएं स्वीकार कर ली। न्यायमूर्ति धूलिया ने कहा, “यह (हिजाब पहनना) पसंद का मामला है, न ज्यादा और न ही कम।” शीर्ष अदालत के विभाजित फैसले के कारण राज्य सरकार का पांच फरवरी का वह आदेश लागू रहेगा, जिसमें कक्षाओं में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 10 दिनों की सुनवाई पूरी होने के बाद 22 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा, जबकि याचिकाकतार्ओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे, देवदत्त कामत, सलमान खुर्शीद, हुजेफा अहमदी, संजय हेगड़े, राजीव धवन आदि ने दलीलें पेश कीं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला:</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">छात्रों/याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने तर्क दिया कि मौलिक अधिकार, क्या पहनना है, यह चुनने की स्वतंत्रता और आस्था की स्वतंत्रता एक कक्षा के भीतर कम नहीं हो जाती। छात्रों के वकीलों – देवदत्त कामत, डॉ राजीव धवन और दिशंत दवे- ने सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत किया कि कर्नाटक राज्य सरकार ने अपने दावे का समर्थन करने के लिए सबूत का एक टुकड़ा भी प्रस्तुत नहीं किया है कि कुछ छात्र अपनी कक्षाओं में हिजाब पहने हुए हैं ,उनके संबंधित वर्दी के अलावा सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता का उल्लंघन किया। वकीलों ने आगे कहा कि कर्नाटक सरकार ने उनके इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं कराई थी कि हिजाब पहनने से अन्य छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>हाईकोर्ट का फैसला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च 2022 को हिजाब मामले पर अपना फैसला सुनाया और कहा कि हिजाब धार्मिक लिहाज से अनिवार्य नहीं है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में इसे नहीं पहना जा सकता है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस अपील को भी खारिज किया, जिसमें हिजाब को महिलाओं का मौलिक अधिकार बताया गया था। सरकार्र ो आदेश पारित करने का अधिकार भी कोर्ट ने दिया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कैसे शुरू हुआ विवाद</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कर्नाटक में कई जगहों पर 8 फरवरी 2022 को झड़पें हुई। शिमोगा का एक वीडियो आया जिसमें एक कॉलेज के छात्र तिरंगे के पोल पर भगवा झंडा लहराते दिखे। कई स्थानों से पथराव की खबरें आई। मांड्या में बुर्का पहनी एक छात्रा से बदसलूकी की गई। उसके सामने भगवा गमछा पहने छात्रों ने जय श्री राम के नारे लगाए।</p>
<p>यह भी पढ़ें – <a title="गुरुग्राम रेरा का आईएलडी बिल्डर को आदेश…फ्लैट खरीदारों का ब्याज सहित मूलधन वापस करो" href="http://10.0.0.122:1245/gurugram-real-estate-ordered-to-ild-builder/">गुरुग्राम रेरा का आईएलडी बिल्डर को आदेश…फ्लैट खरीदारों का ब्याज सहित मूलधन वापस करो</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:35:38 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट हिजाब विवाद पर होली के बाद करेगा सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने ‘हिजाब’ के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार अस्वीकार करते हुए इस पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-to-hear-hijab-controversy-after-holi/article-31550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने ‘हिजाब’ के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार अस्वीकार करते हुए इस पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि इस मामले में होली के बाद विचार किया जाएगा। वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए आज विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में हेगडे एवं अन्य के अनुरोध पर होली के बाद सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूलों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के मंगलवार के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। निबा नाज ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से एक याचिका के जरिये शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था, “हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।”अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश ह्यधार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के तहत हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था। याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंत:करण की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत संरक्षित है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 13:05:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हिजाब फैसले की मुस्लिम नेताओं ने की निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रमुख मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह ने मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले की निंदा की जिसमें हिजाब को इस्लाम का गैर-जरूरी अंग बताते हुए शिक्षण संस्थानों में प्रतिबंधित कर दिया गया। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/muslim-leaders-condemn-hijab-decision/article-31516"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/hijab-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रमुख मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह ने मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले की निंदा की जिसमें हिजाब को इस्लाम का गैर-जरूरी अंग बताते हुए शिक्षण संस्थानों में प्रतिबंधित कर दिया गया। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘यह फैसला बेहद निराशाजनक है। हम एक तरफ महिलाओं को सशक्त करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम उनसे चुनने का अधिकार छीन रहे हैं। यह सिर्फ धर्म के बारे में नहीं है, बल्कि चुनने की स्वतंत्रता से संबंधित है।</p>
<p style="text-align:justify;">नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके उमर अब्दुल्लाह ने कहा, ‘फैसले से बहुत निराश हूं। आप हिजाब के बारे में जो भी सोचते हों, बात सिर्फ एक कपड़े की नहीं है, बात एक महिला के यह चुनने के अधिकार की है कि वह क्या पहनना चाहती है। यह उपहासजनक है कि अदालत ने इस मूल अधिकार की रक्षा नहीं की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फैसले ने मूलभूत अधिकारों को समाप्त किया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (मीम) अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उन्हें आशा है कि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने फैसले को बदनीयत बताते हुए अपने विचार के पीछे कई कारण गिनाये। ्रउन्होंने कहा कि फैसले ने ‘धर्म, संस्कृति और अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकारों को समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा,‘एक धार्मिक मुसलमान के लिए हिजाब एक प्रकार की आराधना है। अनिवार्य धार्मिक व्यवहार परीक्षा को कसौटी पर रखने का समय आ गया है। एक धार्मिक व्यक्ति के लिए सब कुछ अनिवार्य है और नास्तिक के लिए कुछ अनिवार्य नहीं है। एक धार्मिक हिन्दू ब्राह्मण के जनेऊ अनिवार्य है मगर एक गैर-ब्राह्मण के लिए अनिवार्य नहीं है। यह हास्यास्पद है कि न्यायाधीश अनिवार्यता निर्धारित कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ओवैसी ने कहा, ‘एक ही धर्म के दूसरे लोगों को अनिवार्यता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। यह एक व्यक्ति और ईश्वर के बीच का मामला है। राज्य को इन धार्मिक अधिकारों में दखल देने की अनुमति सिर्फ तब होनी चाहिए जब यह किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाते हों। हिजाब किसी को हानि नहीं पहुंचाता। ओवैसी ने कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध लगाना मुस्लिम महिलाओं और उनके परिवारों के लिये हानिकारक है क्योंकि यह उन्हें शिक्षा हासिल करने से रोकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हिजाब और पगड़ी को पहनने की अनुमति दी जा सकती है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘दलील दी जा रही है कि वर्दी से एकरूपता सुनिश्चित होगी। कैसे? क्या बच्चों को यह पता नहीं चलेगा कि कौन अमीर परिवार से है और कौन गरीब परिवार से? क्या जातिगत नाम बच्चों के वर्ग की तरफ इशारा नहीं करेंगे? जब आयरलैंड में हिजाब और सिख पगड़ी को अनुमति देने के लिए पुलिस की वर्दी में बदलाव किये गए थे तो मोदी सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">देश और विदेश के लिए दोहरे मानदंड क्यों? स्कूल की वर्दी के रंग के हिजाब और पगड़ी को पहनने की अनुमति दी जा सकती है। ओवैसी ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि यह फैसला हिजाबी महिलाओं के उत्पीड़न को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एक व्यक्ति उम्मीद कर ही सकता है। बैंकों, अस्पतालों व बस-मेट्रो में इस तरह की घटनाओं के शुरू होने पर निराश होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 16:00:55 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूल कॉलेजों में हिजाब की इजाजत नहीं, याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पिछले दिनों हिजाब मामले का तूल पूरे देश में फैल गया था। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। सभी राजनीतिक पार्टियां हिजाब मामले पर अपना-अपना पक्ष रख रहे थे। इस बीच आज कर्नाटक हाईकोर्ट का इस मामले पर बड़ा फैसला आया है। हाईकोर्ट की तीन मेंबर वाली बेंच ने कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/karnataka-high-court-hijab-is-not-allowed-in-school-colleges-petition-dismissed/article-31510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/hijab-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पिछले दिनों हिजाब मामले का तूल पूरे देश में फैल गया था। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। सभी राजनीतिक पार्टियां हिजाब मामले पर अपना-अपना पक्ष रख रहे थे। इस बीच आज कर्नाटक हाईकोर्ट का इस मामले पर बड़ा फैसला आया है। हाईकोर्ट की तीन मेंबर वाली बेंच ने कहा कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्कूल कॉलेज में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इन्कार कर दिया है। इस फैसले कई मुस्लिम संगठनों को बड़ा झटका लगा है। हिजाब मामले की सभी याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। वहीं हाईकोर्ट के फैसे से पहले चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। इस मामले को लेकर कर्नाटक में धारा 144 लागू कर दी गई थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हिजाब विवाद की बड़ी बातें</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मुस्लिम छात्राओं द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें शिक्षण अवधि के दौरान कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की गयी थी।</li>
<li style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के फैसले से कई मुस्लिम संगठनों को झटका।</li>
<li style="text-align:justify;">हिजाब की मांग करने वाले छात्रों को हाईकोर्ट का झटका।</li>
<li style="text-align:justify;">हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में रिवाज जरूरी नही।</li>
<li style="text-align:justify;">स्कूल तय करेंगे यूनिफार्म।</li>
<li style="text-align:justify;">फैसले के बाद स्कूल कॉलेजों पर हिजाब बैन रहेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कर्नाटक में हिजाब का विवाद दिसंबर 2021 में एक कॉलेज से शुरू हुआ था, जब एक कॉलेज में क्?लास के भीतर हिजाब पहनने के लिए मना कर दिया था। इस पर 8 मुस्लिम छात्राओं ने विरोध किया और कहा कि कॉलेज उन्?हें हिजाब पहनने से नहीं रोक सकता क्?योंकि ये उनकी धार्मिक स्?वतंत्रता है। इसके बाद हिजाब के विरोध में कुछ बच्चों ने भगवा गमछे या शॉल पहनने शुरू कर दिए, जिससे विवाद और बढ़ गया। इसके बाद यह विवाद कई अन्य कॉलेजों में शुरू हो गया। हाल ही में कुछ कॉलेज ने छुट्टी करके इसका हल निकाला तो एक कॉलेज में हिजाब पहनी लड़कियों को अलग बैठा दिया गया। वहीं, इस मामले को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन भी जारी है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 12:14:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>साम्प्रदायिक व धार्मिक विवाद दुर्भाग्यपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज से शुरू हुए हिजाब के मुद्दे ने देशभर को गरमा दिया है। मामला सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्र-छात्राओं से कहा है कि फिलहाल वे शिक्षण-संस्थानों में धार्मिक पहचान वाली पोशाक न पहनें। इस व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/communal-and-religious-dispute-unfortunate/article-30785"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/for-security-reasons-prevention-of-burqa-hijab-in-sri-lanka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज से शुरू हुए हिजाब के मुद्दे ने देशभर को गरमा दिया है। मामला सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्र-छात्राओं से कहा है कि फिलहाल वे शिक्षण-संस्थानों में धार्मिक पहचान वाली पोशाक न पहनें। इस व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि कोई सांविधानिक अदालत अपने अंतरिम आदेश से अनुच्छेद 15, 19, 21 और 25 के तहत नागरिक को प्राप्त मौलिक-अधिकारों पर रोक कैसे लगा सकती है? याचिका दायर करने वालों का कहना है कि केरल हाईकोर्ट ने माना है कि हिजाब अनिवार्य धार्मिक पहनावा है। कर्नाटक के एजुकेशन एक्ट में यूनिफॉर्म व पेनल्टी को लेकर कोई प्रावधान नहीं है। उसे पहनने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कानूनी अधिकारों के अलावा इस मामले के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक सवाल जुड़े हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साम्प्रदायिक कट्टरता, संकीर्णता एवं उन्माद अक्सर हिंसा, तनाव, बिखराव एवं विध्वंस का कारण बनता रहा है। इन स्थितियों को आधार बनाकर शिक्षण संस्थानों में तनाव, अराजकता एवं बिखराव का जहर घोलना चिन्तनीय है। कट्टरवादी शक्तियां इन घटनाओं को तूल देकर राजनीति स्वार्थ को सिद्ध करने का खेल खेल रही है, जो राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के लिये घातक है। बेवजह के इस तरह के साम्प्रदायिक एवं धार्मिक विवादों का दावानल बन जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विवाद ऐसे वक्त में शुरू हुआ है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। उत्तर और दक्षिण की राजनीतिक परिघटनाएं एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। पहली नजर में ध्रुवीकरण की योजनाबद्ध गतिविधि नजर आती है। यह केवल राष्ट्रीय नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय-मुद्दा भी बना है। अमेरिका के आॅफिस आॅफ इंटरनेशनल रिलीजस फ्रीडम (आईआरएफ) ने बयान जारी करके कहा है कि हिजाब पर रोक धार्मिक-स्वतंत्रता का उल्लंघन है। स्त्रियों और लड़कियों को हाशिए पर डालने की कोशिश है।</p>
<p style="text-align:justify;">इच्छा का परिधान व्यावहारिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। सेना, पुलिस या बहुत से कार्यस्थलों में यूनिफॉर्म की संगठनात्मक अनिवार्यता होती है। वहाँ इच्छा नहीं चलती। इच्छा के परिधान का अधिकार संस्थान के यूनिफॉर्म तय करने के अधिकार के ऊपर नहीं होता। सांस्कृतिक और धार्मिक-वरीयताओं को ध्यान में भी रखना होता है। अफगानिस्तान और ईरान में बुर्के और हिजाब के खिलाफ लड़कियाँ आंदोलन कर रही हैं, वहीं भारत के प्रगतिशील लोगों का एक वर्ग हिजाब का समर्थन कर रहा है। दूसरी तरफ एक तबका मानता है कि यह कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि राष्ट्रहित पर धार्मिक पहचान भारी न पड़े। अच्छा होगा, हम लड़कियों को खूब पढ़ाएं और उनके परदे का फैसला उनके विवेक पर ही छोड़ दें। लेकिन अभी तो जो हो रहा है, वह उनमें से कुछ के पढ़ने के रास्ते ही बंद कर सकता है, महिलाओं के जीवन में एक नये अंधेरे का कारण बन सकता है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Feb 2022 09:56:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक हिजाब मुद्दे पर अन्य देशों की टिप्पणी अवांछित : भारत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत ने कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर कुछ देशों की टिप्पणियों को देश के आंतरिक मामलों में अवांछित दखल करार दिया है और कहा है कि भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसे मुद्दों के समाधान की व्यवस्था है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शनिवार को यहां मीडिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/comments-from-other-countries-on-karnataka-hijab-issue-unsolicited/article-30746"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/arindam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत ने कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर कुछ देशों की टिप्पणियों को देश के आंतरिक मामलों में अवांछित दखल करार दिया है और कहा है कि भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसे मुद्दों के समाधान की व्यवस्था है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शनिवार को यहां मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि कर्नाटक में कुछ शैक्षणिक संस्थानों में पहनावे को लेकर एक मुद्दा कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा के अधीन है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी संवैधानिक प्रणाली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसे मुद्दों पर समुचित विचार विमर्श और समाधान की कारगर व्यवस्था है। बागची ने कहा कि जो भारत को जानते हैं, वे इन वास्तविकताओं की सराहना करते हैं। भारत के आंतरिक मामलों में किसी भावना से प्रेरित टिप्पणियों का हम कतई स्वागत नहीं करते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 12:12:01 +0530</pubDate>
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                <title>हिजाब विवाद : सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि हिजाब विवाद पर उसकी नजर है तथा वह संबंधित याचिकाओं पर उचित समय पर सुनवाई कर सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगा। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hijab-controversy-will-hear-when-right-time-comes-supreme-court/article-30716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/supreme-court-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि हिजाब विवाद पर उसकी नजर है तथा वह संबंधित याचिकाओं पर उचित समय पर सुनवाई कर सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगा। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की गुहार को ठुकराते हुए कहा कि वह उचित समय पर इस मामले में सुनवाई करेगी। कामत ने इस मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने की गुहार लगाई थी। कामत ने ‘विशेष उल्लेख’ के दौरान कर्नाटक उच्च न्यायालय के वीरवार के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई की गुहार लगायी। उन्होंने विद्यार्थियों की परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होने के अलावा कई अन्य संवैधानिक पहलुओं का जिक्र करते हुए दलीलें दीं और ‘विशेष अनुमति’ याचिका पर शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम फैसले में विद्यार्थियों को धार्मिक पोशाक पहनने पर जोर नहीं देने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति रमन ने वरिष्ठ वकील कामत से कहा,‘संवैधानिक अधिकार सभी के लिए हैं और यह अदालत इसकी रक्षा करेगी। हम उचित समय पर सूचीबद्ध करेंगे।”</p>
<p style="text-align:justify;">वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस खंडपीठ के समक्ष हिजाब विवाद से संबंधित याचिकाओं को कर्नाटक उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित कर संबंधित याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने की अपील की थी। मुख्य न्यायाधीश ने दलीलें सुनने के बाद कहा था, ‘यह मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पहले वहां सुनवाई होने दें। इसके बाद हम इस पर विचार करेंगे।’ सिब्बल ने ‘विशेष उल्लेख’ के दौरान शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता बताते हुए कहा था, ‘परीक्षा होने वाले हैं। स्कूल-कॉलेज बंद हैं। लड़कियों पर पथराव किए जा रहे हैं। यह विवाद देश भर में फैल रहा है। इस मुद्दे पर तत्काल विचार किया जाना चाहिए।’ मुख्य न्यायाधीश ने मद्रास उच्च न्यायालय में इस मामले के विचाराधीन होने और सुनवाई का जिक्र करते कहा था, ‘पहले उन्हें इस मामले पर विचार करने दें।’</p>
<p style="text-align:justify;">यह विवाद कर्नाटक में पिछले दिनों तब शुरू हुआ था जब एक शिक्षण संस्थान में छात्राओं को हिजाब उतार कर कक्षाओं में आने के लिए कहा गया था, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था। छात्राओं की ओर से इस मामले में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। याचिकाकतार्ओं का कहना है कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है तथा इससे उन्हें नहीं रोका जा सकता। गौरतलब है कि इस विवाद को लेकर पिछले दिनों कर्नाटक के उडुपी में हिंसक घटनाएं हुई थीं। हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ छात्र समूहों की ओर से इससे संबंधित प्रतीकात्मक झंडे लेकर प्रदर्शन किए गए थे। कई राजनीतिक दल और धार्मिक संगठन इस मामले के समर्थन में जबकि कई अन्य विरोध में हैं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Feb 2022 13:01:43 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का हिजाब विवाद पर सुनवाई का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। कर्नाटक के हिजाब विवाद को लेकर गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई गई। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आज ‘विशेष उल्लेख’ के तहत इस मुद्दे को अति आवश्यक बताते हुए शीघ्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-hints-at-hearing-on-hijab-controversy/article-30685"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/supreme-court-of-india-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कर्नाटक के हिजाब विवाद को लेकर गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई गई। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आज ‘विशेष उल्लेख’ के तहत इस मुद्दे को अति आवश्यक बताते हुए शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद कहा, ‘यह मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पहले वहां सुनवाई होने दें। इसके बाद हम इस पर विचार करेंगे।’ सिब्बल ने तत्काल सुनवाई की आवश्यकता बताते हुए दलील देते हुए कहा, ‘परीक्षा होने वाले हैं। स्कूल-कॉलेज बंद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लड़कियों पर पथराव हो रहे हैं। इस मुद्दे पर तत्काल विचार किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस अदालत से इस याचिका को सूचीबद्ध करने की गुहार लगा रहा हूं।’ मुख्य न्यायाधीश द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई का इंतजार करने के लिए कहने पर श्री सिब्बल ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय आज आदेश पारित नहीं करता है तो शीर्ष अदालत इसे स्वयं स्थानांतरित कर सुनवाई कर सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘हम विचार करेंगे।’ यह विवाद कर्नाटक में पिछले दिनों तब शुरू हुआ था, जब एक शिक्षण संस्थान में छात्राओं को हिजाब उतार कर कक्षाओं में आने के लिए कहा गया था, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्राओं की ओर से इस मामले में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। याचिकाकतार्ओं का कहना है कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है तथा इससे उन्हें नहीं रोका जा सकता। गौरतलब है इस विवाद को लेकर पिछले दिनों कर्नाटक के उडुपी में हिंसक घटनाएं हुई थीं। कई राजनीतिक दल और धार्मिक संगठन इस मामले के समर्थन में जबकि कई अन्य विरोध में हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Feb 2022 12:18:46 +0530</pubDate>
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