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                <title>Mahant Narendra Giri - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Mahant Narendra Giri RSS Feed</description>
                
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                <title>नरेंद्र गिरी मौत मामले में कई अनसुलझे सवाल सीबीआई के लिए चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज (एजेंसी)। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में एक के बाद एक सवाल उठ रहे हैं। इस बीच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)ने एफआईआर दर्ज कर ली है। जल्द ही सीबीआई टीम प्रयागराज पहुंचकर जांच शुरू करने वाली है। ऐसे में एसआईटी उसके द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को सीबीआई टीम को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/many-unresolved-questions-challenge-for-cbi-in-narendra-giri-death-case/article-27180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/mahant-narendra-giri1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज (एजेंसी)।</strong> अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में एक के बाद एक सवाल उठ रहे हैं। इस बीच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)ने एफआईआर दर्ज कर ली है। जल्द ही सीबीआई टीम प्रयागराज पहुंचकर जांच शुरू करने वाली है। ऐसे में एसआईटी उसके द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को सीबीआई टीम को सौंपेगी। लेकिन देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी के लिए इस मामले को सुलझाना किसी चुनौती से कम नहीं लग रहा है। इस बीच बताया जा रहा है कि सीबीआई जांच की बात सामने आने के बाद महंत के करीबियों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जांच में ये बिन्दु अहम</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सूचना और एफआईआर में अंतर क्यों। घटना के बाद आधिकारिक सूचना दी गई कि दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे शिष्यों ने फांसी का फंदा काट कर शव नीचे उतारा। वहीं उनके शिष्य अमर गिरि ने एफआईआर दर्ज करवाई कि धक्का देकर दरवाजा खोला गया।</li>
<li style="text-align:justify;">आखिर गठिया रोग से ग्रस्त महंत बेड पर स्टूल रखकर कैसे चढ़े और उन्होंने पंखे से फांसी का फंदा कैसे लगाया?</li>
<li style="text-align:justify;">पुलिस के आने से पहले ही शव नीचे क्यों उतारा? डॉक्टर को क्यों बुलाया नहीं गया? महंत को नीचे उतारने के बाद अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?</li>
<li style="text-align:justify;">सुइसाइड नोट को वसीयत की तरह और टुकड़ों में क्यों लिखा गया? बार-बार काट-पीट क्यों की गई और हस्ताक्षर भी अलग क्यों है?</li>
<li style="text-align:justify;">आत्महत्या उस कमरे में क्यों की, जहां महंत कम रहते थे? नरेंद्र गिरी अपने विश्राम कक्ष में आराम करते थे। कमरे का एसी भी खराब था।</li>
<li style="text-align:justify;">कैंपस में दर्जन भर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अधिकांश काम कर रहे हैं, लेकिन कमरे के पास का सीसीटीवी कैमरा खराब क्यों था।</li>
<li style="text-align:justify;">महंत पर पहले भी कई आरोप लगे, लेकिन तब उन्होंने ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया, इस बार ही क्यों?</li>
<li style="text-align:justify;">अधिकांश धार्मिक लोगों का कहना है कि महंत लिखने में हिचकते थे तो इतना बड़ा सुईसाइड नोट कैसे लिखा?</li>
<li style="text-align:justify;">तथाकथित सुइसाइड नोट में उस व्यक्ति का जिक्र क्यों नहीं, जिसने उन्हें हरिद्वार से यह जानकारी दी कि वीडियो वायरल करने की तैयारी है।</li>
<li style="text-align:justify;">एफआईआर सुइसाइड नोट से अलग क्यों करवाई गई, जबकि सुइसाइड नोट घटना के तुरंत बाद ही मिल गया था।</li>
<li style="text-align:justify;">सुइसाइड नोट में तीन लोगों पर आरोप होने के बाद भी एफआईआर में सिर्फ आनंद गिरि का ही नाम क्यों?</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Sep 2021 11:35:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंत नरेन्द्र गिरी की मौत का रहस्य और गहराया, गर्दन के चारों ओर मिले काले निशान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज (एजेंसी)। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और श्री मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरी की मौत का राज दिन ब दिन गहराता जा रहा है। हालांकि मामले में प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। वहीं सीबीआई की 5 सदस्यीय टीम ने प्रयागराज पहुंच जांच भी शुरू कर दी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-mystery-of-mahant-narendra-giri-death/article-27142"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/mahant-narendra-giri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज (एजेंसी)।</strong> अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और श्री मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरी की मौत का राज दिन ब दिन गहराता जा रहा है। हालांकि मामले में प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। वहीं सीबीआई की 5 सदस्यीय टीम ने प्रयागराज पहुंच जांच भी शुरू कर दी है। महंत की मौत के बाद के वीडियो में फंदा बनी नायलॉन की रस्सी के तीन टुकड़े और पंखे के चलते रहने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। इसके साथ ही महंत की गर्दन पर चारों तरफ पड़े काले निशान संदेह को बढ़ा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार महंत नरेन्द्र गिरि के गले पर चारों तरफ काले निशान मिलने की बात सामने आ रही है। अखाड़ा परिषद के सचिव महंत हरी गिरि और निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र पुरी महाराज ने ये दावा किया है कि नरेन्द्र की गर्दन पर चारों ओर काले निशान मिले हैं। विशेषज्ञों की मानें तो फांसी के अधिकतर मामलों में वी मार्क बनता है। गले के चारों ओर निशान सिर्फ तभी पड़ते हैं, जब गला रस्सीनुमा चीज से घोंटा गया हो।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>लैपटॉप से विडियो बरामद</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने आनंद गिरि के लैपटॉप से वो विडियों भी ढूंढ लिया है, जिसका जिक्र महंत नरेंद्र गिरि के तथाकथित सुइसाइट नोट में था। इसी विडियो के आधार पर ब्लैकमेल की बात कही गई थी। एसआईटी ने महंत नरेंद्र गिरि के दोनों मोबाइल फोन की कॉल डिटेल के आधार पर लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। दूसरी ओर, निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर की बैठक हुई। हालांकि इसमें उत्तराधिकारी को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 24 Sep 2021 10:24:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिष्य का खुलासा : महंत नरेन्द्र गिरी से कोई मिलने आने वाला था</title>
                                    <description><![CDATA[एक शिष्य और दो पुजारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया प्रयागराज। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत अभी पुलिस के लिए अनसुलझी पहेली बनी हुई है। बता दें कि सोमवार को बाघंबरी मठ में उनका शव मिला था। हालांकि शुरूआती जांच में इसे खुदकुशी कहा जा रहा था। नरेंद्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/disciple-anand-giri-in-custody-in-mahant-giri-suicide-case-police/article-27045"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/disciple-anand-giri-in-custody.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">एक शिष्य और दो पुजारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत अभी पुलिस के लिए अनसुलझी पहेली बनी हुई है। बता दें कि सोमवार को बाघंबरी मठ में उनका शव मिला था। हालांकि शुरूआती जांच में इसे खुदकुशी कहा जा रहा था। नरेंद्र गिरि की मौत से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम पर उनके शिष्य निर्भय द्विवेदी ने नया खुलासा किया है। निर्भय द्विवेदी का कहना है महंत नरेन्द्र गिरी की दैनिक दिनचर्या जैसे होती थी, सुबह 5 बजे चाय पीना, 7 बजे तक नीचे आ जाना। मैं सुबह 7.30 बजे उठा, 8 बजे उनको प्रणाम करके मंदिर चला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">द्विवेदी ने आगे बताया कि शाम को जब वो लौटा तो मालूम हुआ कि महंत जी ने सभी के साथ भोजन किया, 12 बजे भोजन करने के बाद वो ऊपर चले गए। अपने कमरे में करीब आधा घंटा रूकने के बाद वे फिर से नीचे आ गए। नीचे आकर वह बगल वाले कमरे में आराम करने के लिए गए, तब महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि मुझसे कोई मिलने आ रहा है, इसलिए यही रहूंगा। महंत जी ने सभी से कहा था कि आज कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। हालांकि, वो मिलने वाला कौन था, इस बारे में निर्भय द्विवेदी ने कुछ नहीं बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि सोमवार को ही प्रयागराज से महंत नरेंद्र गिरि की मौत की खबर सभी के सामने आई थी। मठ के आवास में नरेंद्र गिरि का शव लटका हुआ मिला था, जब बाद में पुलिस ने तलाशी ली तो एक सुसाइड नोट भी मिला। ये सुसाइड नोट करीब 6-7 पेज का बताया जा रहा है। प्रयागराज पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। वहीं सुसाइड नोट में जिस शिष्य आनंद गिरि का ज़िक्र मिला, उसे हरिद्वार से हिरासत में ले लिया। वहीं प्रयागराज से भी दो पुजारियों को हिरासत में लेने की खबरें हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>प्री प्लांड जैसी सुसाइड नोट की भाषा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना स्थल से मिले सुसाइड नोट को पढ़कर ऐसे लग रहा है जैसे यह सब पहले से तय हो और कई दिनों से इसको लेकर मंथन चल रहा हो। कई महंतों का दावा है कि महंत जी बहुत नहीं लिखते थे। वहीं प्रयागराज अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के महा सचिव जीतेंद्रानंद सरस्वती ने दावा किया है कि वह इतना बड़ा सुसाइड नोट लिख ही नहीं सकते। महंत जी सिर्फ हस्ताक्षर और काम चलाऊ लिखना जानते थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>शिष्य ही लिखते-पढ़ते थे नरेंद्र गिरी के पत्र</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गंगा सफाई आंदोलन में कानपुर के श्रमिक नेता रामजी त्रिपाठी के साथ नरेंद्र गिरी भी शामिल हुए थे। रामजी त्रिपाठी का दावा है कि नरेंद्र गिरी को कुछ भी पढ़ना लिखना नहीं आता था। उन्होंने बताया कि एक बार उनके सामने एक पत्र को पढ़ना था। तो नरेंद्र गिरी ने अपने शिष्य को बुलाया और पत्र पढ़वाया। इस पर रामजी त्रिपाठी के पूछने पर उन्होंने बताया था कि वह लिखना पढ़ना नहीं जानते हैं। राम जी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा सफाई आंदोलन में लिखे गये पत्रों में उनका नाम अंकित कर दिया जाता था। प्रयागराज में नरेंद्र गिरी के शिष्य सतीश शुक्ल का कहना है कि महंत जी पिछले कुछ सालों में सिर्फ हस्ताक्षर करना सीख पाये थे। लेकिन वह 7-8 पन्ने लिख नहीं सकते थे। उनके हस्ताक्षर से आत्महत्या में लिखे पत्र का मिलान बेहद जरूरी है। सतीश दावा करते हैं कि वे एक लाइन नहीं लिख सकते थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आरोपी शिष्य आनंद गिरी का दावा महंत नहीं लिखते थे</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">नरेंद्र गिरी के आरोपी शिष्य का दावा है कि महंत नरेंद्र गिरी को लिखना-पढ़ना नहीं आता था। सुसाइड नोट में आनंद गिरि का नाम आने के बाद उन्होंने हरिद्वार से सुसाइड नोट पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फंदे पर मिला था शव, पास में था सल्फास का डिब्बा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पुलिस जांच टीम के अनुसार हत्या की सूचना मिलने पर सर्वप्रथम जार्ज टाउन इंस्पेक्टर महेश सिंह पुलिस टीम के साथ पहुंचे। कमरे में महंत नरेंद्र गिरि का शव पंखे से लटका हुआ था। पास ही सल्फास का बंद डिब्बा रखा था। सुसाइड नोट भी बिस्तर के पास रखा था। उनके शिष्य बबलू ने ही सबको घटना की सूचना दी। बबलू का कहना है कि रविवार को गेहूं में रखने के लिए महंत जी ने सल्फास की गोलियां मंगाई थी। पुलिस ने मौके से उनके मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही सोमवार सुबह से आने व मिलने वालों की सूची पुलिस ने लेकर पूछताछ आरंभ कर दी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आनंद गिरी ने तीन करीबियों पर उठाई उंगली</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं आरोपी शिष्य आनंद गिरी ने इसे हत्या करार देते हुए इसके पीछे सिपाही अजय सिंह (गनर) के साथ ही मनीष शुक्ल, विवेक व अभिषेक मिश्र पर आरोप लगाया है। यह लोग प्रापर्टी का काम करते हैं और महंत के करीबी बताए जा रहे हैं। वहीं बताया जा रहा है कि पुलिस की एक टीम इनसे भी पूछताछ में जुटी है।</p>
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                <pubDate>Tue, 21 Sep 2021 09:28:35 +0530</pubDate>
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