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                <title>ब्रिटेन आम चुनाव में बोरिस जॉनसन को बहुमत</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन में आम चुनाव के अब तक के 631 सीटों के प्राप्त नतीजों में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को 650 सीटों वाली संसद में 351 सीटें मिल चुकी हैं, जो बहुमत 326 से अधिक हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/boris-johnson-wins-uk-general-election/article-11751"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/boris-johnson.jpg" alt=""></a><br /><h2>जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को 351 सीटें मिल चुकी हैं | UK General Election</h2>
<ul>
<li><strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जॉनसन को स्पष्ट बहुमत मिलने पर बधाई दी</strong></li>
</ul>
<h5>Edited By Vijay/Jaswinder</h5>
<p><strong>लंदन (एजेंसी)।</strong> ब्रिटेन में आम चुनाव <strong>(UK General Election)</strong> के अब तक के 631 सीटों के प्राप्त नतीजों में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) की कंजरवेटिव पार्टी को 650 सीटों वाली संसद में 351 सीटें मिल चुकी हैं, जो बहुमत 326 से अधिक हैं। विपक्षी लेबर पार्टी को 202 सौ सीटें हासिल हुई हैं और पार्टी प्रमुख जेरेमी कोर्बिन ने चुनाव नतीजों पर निराशा व्यक्त करते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जॉनसन को स्पष्ट बहुमत मिलने पर बधाई दी है। ट्रम्प ने अबतक के नतीजों को ब्रिटेन के प्रधानममंत्री के लिए बड़ी जीत करार देते हुए ट्वीट किया, ‘बोरिस बहुत बड़ी सफलता की ओर अग्रसर हैं।’</p>
<h2>महान देश के उन सभी लोगों को शुक्रिया, जिन्होंने मतदान किया</h2>
<p>बोरिस जॉनसन ने भी शुरूआती जीत पर प्रशंसा व्यक्त करते हुए देशवासियों और अपने सहयोगियों के प्रति शुक्रिया अदा किया है। ब्रेजिक्ट मुद्दे को लेकर वीरवार को मतदान हुआ था। इससे पहले जॉनसन ने चुनावी नतीजों को तेजी से अपने पक्ष आते देख ट्वीट करके पहली प्रतिक्रिया दी। कहा, ‘हमारे महान देश के उन सभी लोगों को शुक्रिया, जिन्होंने मतदान किया, पार्टी के लिए काम किया और पार्टी के उम्मीदवार बने। हम विश्व के सबसे महान लोकतांत्रिक देश में रहते हैं।’ ब्रिटेन में लोगों ने देश के एक ऐतिहासिक और निर्णायक आम चुनाव के लिए गुरुवार को गर्मजोशी से मतदान किया।</p>
<ul>
<li><strong>कोर्बिन बोले-आगे किसी भी चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करूंगा। </strong></li>
<li><strong>हार के लिए ब्रेग्जिट को बताया मुख्य कारण</strong></li>
<li><strong>सामाजिक न्याय का मुद्दा आगे भी जारी रहेगा।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2019 13:22:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जनता के अधिकारों की जीत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित जंतर मंतर पर आंदोलनकारी, अब फिर पहले की तरह अपनी आवाज उठा सकेंगे। जंतर-मंतर और बोट क्लब पर धरना, प्रदर्शन पर लगी रोक को सर्वोच्च न्यायालय ने शर्तों के साथ हटाने का आदेश दिया है। हाल ही में इस मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि दिल्ली में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/public-rights-wins/article-5035"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/public-right.jpg" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित जंतर मंतर पर आंदोलनकारी, अब फिर पहले की तरह अपनी आवाज उठा सकेंगे। जंतर-मंतर और बोट क्लब पर धरना, प्रदर्शन पर लगी रोक को सर्वोच्च न्यायालय ने शर्तों के साथ हटाने का आदेश दिया है। हाल ही में इस मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने कहा कि भारत जैसे गुंजायमान लोकतंत्र में ये अधिकार बेहद अहम हैं। ये अधिकार इसलिए भी अहम है, क्योंकि आम नागरिक अपने विरोध के जरिये सीधे अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं और उनकी भागीदारी महसूस होती है।</p>
<p>अदालत ने अपना आदेश देते हुए इस बात को जरूर माना कि एनजीटी के फैसले में जो तर्क थे, वे सही हैं, लेकिन पूरी तरह से प्रदर्शन पर पाबंदी समस्या का समाधान नहीं है। जस्टिस ए.के. सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा कि धरने और प्रदर्शन का अधिकार मौलिक अधिकार है। सरकार इसमें वाजिब पाबंदी भी लगा सकती है लेकिन इसमें संतुलन की जरूरत है। प्रदर्शन के अधिकार और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लोगों के अधिकार के बीच संतुलन कायम करना होगा। धरना, प्रदर्शन इस तरह से हो कि आस-पास रहने वालों को कोई परेशानी न हो। अदालत ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे दो महीने के अंदर अन्य एजेंसी के साथ मिलकर इस संबंध में एक आदर्श आचारसंहिता और तंत्र तैयार करें, ताकि सीमित संख्या में होने वाले प्रदर्शन धरना आदि को नियंत्रित किया जा सके।</p>
<p>शीर्ष अदालत के इस फैसले से सबसे ज्यादा खुशी उन लोगों को हुई है, जो शांतिपूण ढंग से सरकार से अपनी मांगें मनवाने के लिए राजधानी दिल्ली में इकट्ठा होते हैं। जंतर-मंतर और बोट क्लब पर धरना, प्रदर्शन की पाबंदी हटने से वाकई लोकतंत्र की जीत हुई है। अदालत के इस आदेश से लोगों की आवाज अब फिर से संसद तक पहुंच सकेगी। इस आवाज को कोई दबा नहीं सकेगा।पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन और प्रदूषण का हवाला देते हुए पिछले साल अक्टूबर में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने सरकार को यहां के आयोजनों पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया था। एनजीटी के इस आदेश के बाद दशकों से तरह-तरह के आंदोलनों के स्थल रहे जंतर मंतर पर सभी तरह के धरने-प्रदर्शन बंद हो गए।</p>
<p>एनजीटी के आदेश का सहारा लेते हुए दिल्ली पुलिस ने यहां स्थित सभी टेंटों को तोड़ दिया और आंदोलनकारियों से यह जगह खाली करा ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर पाबंदी के एनजीटी के इस आदेश को चुनौती दी पूर्व सैनिकों ने। वे इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले गए और अदालत से आदेश की समीक्षा करने को कहा। अदालत ने पहले तो दोनों पक्षों की बात गंभीरता से सुनी और उसके बाद एक ऐसा फैसला दिया, जिसमें दोनों पक्षों के मौलिक अधिकारों की हिफाजत हो रही है। इस आदेश से जहां पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन और प्रदूषण नहीं होगा, तो वहीं आंदोलनकारियों के धरने-प्रदर्शन पर भी रोक नहीं लगेगी। जनसंघर्षों की अभिव्यक्ति का मंच बन गए जंतर मंतर पर रैलियों और प्रदर्शनों पर पाबंदी, निश्चित तौर पर उन लोगों के लिए निराशा का सबब थी, जो अपनी मांगे लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने उठाते रहे हैं।</p>
<p>यह ऐसा मंच था, जहां से उनकी आवाज संसद से लेकर पूरे देश में सुनाई देती थी। एक जमाना था जब राजपथ से सटे वोट क्लब पर रैलियां और प्रदर्शन हुआ करते थे। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद साल 1993 में सरकार ने जंतर-मंतर को धरना स्थल के लिए सुनिश्चित किया। करीब पांच हजार लोगों की क्षमता वाला यह ऐतिहासिक स्थल तब से कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है। चाहे निर्भया के सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के विरोध का आंदोलन हो या फिर लोकपाल की मांग को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे का आंदोलन, गोया कि ये सभी बड़े आंदोलन यहीं परवान चढ़े और कई अपने मुकाम तक भी पहुंचे। जंतर मंतर देश भर के मजदूरों, किसानों, मानवाधिकार संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध और असहमति का आंगन रहा है। यहां धरना-प्रदर्शन, आंदोलन कर वह अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाते हैं। बड़े विरोध-प्रदर्शनों के अलावा कई छोटे विरोध प्रदर्शन, धरने जंतर मंतर पर इस लिए चलते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूति से विचार करे और इनका समाधान करे। देश भर से लोग यहां तभी आते हैं, जब कहीं उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। गर यह जगह भी उनसे छिन जाएगी, तो वह कहां से अपनी आवाज सरकार के कानों तक पहुंचाएंगे।</p>
<p>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में जंतर मंतर पर एकत्रित होकर धरना देने पर भले ही रोक लगा दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान जैसी वैकल्पिक जगह पर स्थानांतरित करने का सरकार को निर्देश दिया था। एनजीटी ने लाउडस्पीकर की आवाज और वायु प्रदूषण को आधार बनाते हुए जगह बदलने का फैसला दिया था, पर नई जगह पर तो पुरानी जगह से भी ज्यादा लोग रहते हैं। जंतर मंतर के पास तो काफी कम रिहायशी इलाका है। जंतर मंतर से कहीं अधिक आबादी रामलीला मैदान के पास है। सड़कें बहुत अधिक चौड़ी नहीं है। मैदान के पास एक कॉलेज, दो अस्पताल, सिविक सेंटर और कुछ स्कूल चलते हैं। बड़ी रैलियों के समय रामलीला मैदान को आसपास के क्षेत्रों से पार्किंग शिफ्ट करने के साथ, ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ता है। रोज प्रदर्शन होने की वजह से यहां ध्वनि प्रदूषण के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। गाड़ियों के जाम लगने की भी समस्या है। यहीं नहीं जंतर मंतर के आसपास खाने, रहने, पेयजल, शौचालय और सफाई की अच्छी व्यवस्था है, लेकिन यह सब रामलीला ग्राउंड में नहीं है। सैद्धांतिक तौर पर एनजीटी का आदेश भले ही अच्छा था, पर व्यावहारिक तौर पर रामलीला मैदान में भी इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं।</p>
<p>सच बात तो यह है कि ध्वनि और वायु प्रदूषण राजधानी दिल्ली में हर जगह है। गंदगी और प्रदूषण को ही आधार बनाकर बोट क्लब पर होने वाली रैलियों, धरनों-प्रदर्शनों को प्रतिबंधित कर दिया गया था और उन्हें संसद के नजदीक जंतर मंतर रोड पर अस्थायी स्थल के तौर पर इजाजत दी गई थी। यही समस्या अब रामलीला मैदान के आसपास रहने वाले रहवासियों को आ रही है। वायु प्रदूषण कानून के हिसाब से तो यहां भी धरने-प्रदर्शन नहीं हो सकते। तर्कसंगत बात तो यह होती कि संबंधित प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारियों का सही निर्वहन करते हुए धरने-प्रदर्शनों और रैलियों को व्यवस्थित करते। कोशिश करते कि जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन भी चलते रहें और वायु एवं ध्वनि प्रदूषण भी न हो। कमोबेश यही बात अब सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया आदेश में कही है। धरने-प्रदर्शनों और रैलियों को व्यवस्थित, नियंत्रित किया जाए, तो किसी को भी परेशानी नहीं आएगी। संबंधित अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी न निभाने के कारण जंतर-मंतर के लोग समस्याओं का सामना कर रहे थे। यदि वे अपनी जिम्मेदारियों का सही तरह से पालन करते, तो आज शीर्ष अदालत को इस आदेश देने की जरूरत ही नहीं पड़ती।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय का हालिया आदेश, जहां जन संघर्षों की हिफाजत करता है, वहीं जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के हक में भी है। इस आदेश से हमारे गौरवशाली लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की जीत हुई है। अदालत ने लोगों का शांतिपूर्वक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का उनका अधिकार, उन्हें दोबारा वापस दे दिया है। केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली पुलिस का गलत इस्तेमाल करते हुए जंतर-मंतर में स्थायी तौर पर धारा 144 लगवा दी थी। जो कि एक लोकतांत्रिक देश में रहने वाले नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन था। लोकतंत्र में जनता को और तमाम सामाजिक-राजनीतिक संगठनों को सत्ता के केंद्र के नजदीक जाकर अपनी आवाज उठाने और शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है और उनका यह अधिकार, उनसे कोई नहीं छीन सकता। जंतर-मंतर और वोट क्लब पर धरना, प्रदर्शन पर लगी रोक हर मायने में असंवैधानिक थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश से हटाकर देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की है। जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;">जाहिद खान</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jul 2018 05:07:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>स्वीडन पर आखिरी मिनट की जीत से जर्मनी को लाइफलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[दो गोल कर उम्मीदों को कायम रखा सोच्चि  टोनी क्रूस के इंजरी समय में आखिरी मिनट के करिश्माई गोल से गत चैंपियन जर्मनी ने ग्रुप एफ में शनिवार को स्वीडन को 2-1 से मात देकर फीफा विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के नॉकऑउट दौर में पहुंचने की उम्मीदों को जिन्दा रखा।ब्राजील में चार वर्ष पहले चैंपियन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/wins-by-germany/article-4441"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jarmany.jpg" alt=""></a><br /><h1>दो गोल कर उम्मीदों को कायम रखा</h1>
<p><strong>सोच्चि </strong></p>
<p style="text-align:justify;">टोनी क्रूस के इंजरी समय में आखिरी मिनट के करिश्माई गोल से गत चैंपियन जर्मनी ने ग्रुप एफ में शनिवार को स्वीडन को 2-1 से मात देकर फीफा विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के नॉकऑउट दौर में पहुंचने की उम्मीदों को जिन्दा रखा।ब्राजील में चार वर्ष पहले चैंपियन बनी जर्मन टीम ने अपना पहला मैच मैक्सिको के खिलाफ 0-1 से गंवा दिया था और स्वीडन के खिलाफ मुकाबले में वह पहले हाफ तक एक गोल से पिछड़ गयी थी लेकिन जर्मनी ने दूसरे हाफ में दो गोल कर अपनी उम्मीदों को कायम रखा।</p>
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<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 04:11:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आइसलैंड पर शानदार जीत से नाइजीरिया की उम्मीदें कायम</title>
                                    <description><![CDATA[नाइजीरिया ने 0-2 से जीत वोल्गोग्राद (वार्ता) फीफा विश्वकप इतिहास में अपना मात्र दूसरा मैच खेल रहा ‘नन्हा और ठंडा’ आइसलैंड शुक्रवार को गर्म अफ्रीकी देश नाइजीरिया की तेजी के सामने टिक नहीं सका और उसे ग्रुप डी मैच में 0-2 की हार का सामना करना पड़ा। नाइजीरिया ने इस जीत से अगले दौर में जाने की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/nigeria-wins-0-2/article-4395"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/nigriya.jpg" alt=""></a><br /><h1>नाइजीरिया ने 0-2 से जीत</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>वोल्गोग्राद (वार्ता) </strong></p>
<p style="text-align:justify;">फीफा विश्वकप इतिहास में अपना मात्र दूसरा मैच खेल रहा ‘नन्हा और ठंडा’ आइसलैंड शुक्रवार को गर्म अफ्रीकी देश नाइजीरिया की तेजी के सामने टिक नहीं सका और उसे ग्रुप डी मैच में 0-2 की हार का सामना करना पड़ा। नाइजीरिया ने इस जीत से अगले दौर में जाने की अपनी उम्मीदें कायम रखी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आइसलैंड ने पहली बार फुटबाल विश्वकप फाइनल्स के लिये क्वालीफाई किया है और उसने अपने पहले मैच में दो बार की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-1 के ड्रॉ पर रोक कर सबको चौंका दिया था जबकि नाइजीरिया को क्रोएशिया से 0-2 से शिकस्त मिली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्राइकर अहमद मूसा ने दूसरे हाफ में 49 वें और 75 वें मिनट में दो गोल दागकर नाइजीरिया की उम्मीदों को कायम रखा। इस परिणाम ने ग्रुप डी में नाइजीरिया, अर्जेंटीना और आइसलैंड के लिए अगले दौर में जाने के रास्ते खोल दिए हैं। क्रोएशिया अपने दोनों मैच जीतकर नॉकऑउट दौर के लिए क्वालीफाई कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्जेंटीना को अब नाइजीरिया के खिलाफ और आइसलैंड को क्रोएशिया के खिलाफ अगले सप्ताह अपने अपने मैच जीतने होंगे जबकि नाइजीरिया जीता तो वह अगले दौर में चला जाएगा और गत उपविजेता अर्जेंटीना विश्व कप से बाहर हो जाएगा। मौजूदा विश्व कप में किसी अफ्रीकी देश की यह दूसरी जीत है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/nigeria-wins-0-2/article-4395</link>
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                <pubDate>Fri, 22 Jun 2018 23:50:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बोपन्ना ने जीता अपना पहला ग्रैंड स्लेम खिताब</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट पेरिस (एजेंसी)। भारत के शीर्ष युगल खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने ग्रैंड स्लेम जीतने का अपना सपना आखिर पूरा कर लिया है। बोपन्ना ने वीरवार को वर्ष के दूसरे ग्रैंड स्लेम फ्रेंच ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीत लिया। बोपन्ना और कनाडा की गैबरिएला डाबरोवस्की की सातवीं सीड जोड़ी ने जर्मनी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/rohan-bopanna-wins-his-first-grand-slam-title/article-1027"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/bopanna.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पेरिस (एजेंसी)।</strong> भारत के शीर्ष युगल खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने ग्रैंड स्लेम जीतने का अपना सपना आखिर पूरा कर लिया है। बोपन्ना ने वीरवार को वर्ष के दूसरे ग्रैंड स्लेम फ्रेंच ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीत लिया। बोपन्ना और कनाडा की गैबरिएला डाबरोवस्की की सातवीं सीड जोड़ी ने जर्मनी की एना लीना ग्रोएनफील्ड और कोलंबिया के रॉबर्ट फराह की जोड़ी को एक घंटे छह मिनट के कड़े संघर्ष में 2-6, 6-2, 12-10 से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया। 37 वर्षीय बोपन्ना का यह पहला ग्रैंड स्लेम खिताब है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह वर्ष 2010 में यूएस ओपन के पुरुष युगल के फाइनलिस्ट रहे थे। उसके सात साल बाद जाकर बोपन्ना किसी ग्रैंड स्लेम के फाइनल में पहुंचे और इस बार उन्होंने खिताब को अपने हाथ से फिसलने नहीं दिया। बोपन्ना इस साल के शुरु में आस्ट्रेलियन ओपन के मिश्रित युगल के क्वार्टरफाइनल में पहुंचे थे और फ्रेंच ओपन में उन्होंने खिताब जीत लिया। बोपन्ना और डाबरोवस्की की जोड़ी ने पहला सेट बेहद आसानी से 2-6 से गंवा दिया। लेकिन दूसरे सेट में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 6-2 से जीत हासिल की। मैच अब सुपरटाईब्रेक में चला गया। सुपरटाईब्रेक में बोपन्ना-डाबरोवस्की ने 12-10 से जीत हासिल कर खिताब अपने नाम किया। दोनों जोड़ियों ने तीन-तीन बार एक-दूसरे की सर्विस तोड़ी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ग्रैंड स्लेम खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय</h2>
<p style="text-align:justify;">बोपन्ना-डाबरोवस्की ने तीन एस लगाने के अलावा तीन विनर्स भी लगाए। विपक्षी जोड़ी ने चार डबल फाल्ट किए और चार बेजां भूलें की। बोपन्ना अपने करियर में पुरुष युगल में चार बार आस्ट्रेलियन ओपन के तीसरे दौर में, दो बार फ्रेंच ओपन के क्वार्टरफाइनल में, दो बार विम्बलडन के सेमीफाइनल में और एक बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचे थे। उन्होंने मिश्रित युगल में चार बार आस्ट्रेलियन ओपन के क्वार्टरफाइनल और एक एक बार विम्बलडन तथा यूएस ओपन के क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई। भारतीय खिलाड़ी पहली बार फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंचे और 37 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला ग्रैंड स्लेम खिताब जीत लिया। बोपन्ना के करियर का यह 17वां युगल खिताब है। बोपन्ना इस तरह कोई ग्रैंड स्लेम खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय बन गए। इससे पहले यह उपलब्धि लिएंडर पेस, महेश भूपति और सानिया मिर्जा के नाम थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2017 09:37:01 +0530</pubDate>
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                <title>प्रणीत ने जीता ग्रां प्री खिताब</title>
                                    <description><![CDATA[थाईलैंड ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट  भारतीय खिलाड़ी की लगातार दूसरी खिताबी जीत बैंकाक (एजेंसी)। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बी साई प्रणीत ने यहां पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी को हराकर 120000 डालर इनामी थाईलैंड ओपन के पुरुष एकल का खिताब जीत लिया। तीसरे वरीय भारतीय ने एक घंटे और 11 मिनट चले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/sai-praneeth-wins-thailand-grand-prix-gold-title/article-892"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/badmiton-11.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">थाईलैंड ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong> भारतीय खिलाड़ी की लगातार दूसरी खिताबी जीत </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बैंकाक (एजेंसी)।</strong> भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बी साई प्रणीत ने यहां पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी को हराकर 120000 डालर इनामी थाईलैंड ओपन के पुरुष एकल का खिताब जीत लिया। तीसरे वरीय भारतीय ने एक घंटे और 11 मिनट चले फाइनल मुकाबले में इंडोनेशिया के चौथे वरीय खिलाड़ी को 17-21, 21-18, 21-19 से हराया। प्रणीत की यह लगातार दूसरी खिताबी जीत है। इससे पहले उन्होंने सिंगापुर ओपन का खिताब जीता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहला ग्रां प्री खिताब जीता</h3>
<p style="text-align:justify;">हैदराबाद के 24 वर्षीय प्रणीत का यह पहला ग्रां प्री खिताब है। सिंगापुर ओपन उनका पहला सुपर सीरीज खिताब था। प्रणीत इस वर्ष सैय्यद मोदी इंटरनेशनल ग्रां प्री गोल्ड टूर्नामेंट में समीर वर्मा से हारकर उपविजेता रहे थे। दुनिया के 24वें नंबर के खिलाड़ी प्रणीत की फाइनल में शुरूआत अच्छी नहीं रही और उन्हें पहले गेम में हार का सामना करना पड़ा। इंडोनेशिया के खिलाड़ी ने पहले गेम में 3-0 की बढ़त बनाई लेकिन प्रणीत ने जल्द ही स्कोर 4-4 कर दिया जिसके बाद 7-7 तक कड़ा मुकाबला रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्रिस्टी ने इसके बाद 14-11 की बढ़त बनाई लेकिन प्रणीत ने लगातार तीन अंक के साथ 14-14 पर फिर बराबरी हासिल कर ली। कुछ करीबी अंकों के बाद क्रिस्टी ने 18-17 की बढ़त बनाई और फिर लगातार तीन अंक के साथ गेम जीत लिया। दूसरा गेम भी अपने नाम करके तीसरे और निर्णायक गेम में उतार चढ़ाव के बाद स्कोर 17-17 से बराबर था जिसके बाद प्रणीत ने दो अहम अंक के साथ स्कोर 19-17 किया। क्रिस्टी ने हालांकि अगले जो अंक जुटाकर 19-19 से बराबरी हासिल की लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अगले दो अंक जीतकर गेम, मैच और खिताब अपने नाम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2017 08:49:50 +0530</pubDate>
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