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                <title>Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj RSS Feed</description>
                
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                <title>MSG Bhandara Month: इस तरह गाँव का नाम कैले बांदर से ‘नसीबपुरा’ पड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: सन् 1967 में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपनी जीवोद्धार यात्रा के दौरान सत्संग फरमाते हेतू गांव कैले बांदर जिला भंठिडा पहुँचे। गाँव की साध-संगत खुशी से नाच उठी। साध-संगत ने सत्संग हेतू तैयारियों में पूर्ण सहयोग दिया। सारे गांव की सफाई की गई तथा सड़को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-the-revered-father-shah-satnam-singh-ji-maharaj-arrived-in-the-village-of-kaila-bandar-in-bathinda/article-80824"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji-shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: सन् 1967 में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपनी जीवोद्धार यात्रा के दौरान सत्संग फरमाते हेतू गांव कैले बांदर जिला भंठिडा पहुँचे। गाँव की साध-संगत खुशी से नाच उठी। साध-संगत ने सत्संग हेतू तैयारियों में पूर्ण सहयोग दिया। सारे गांव की सफाई की गई तथा सड़को पर पानी छिड़का गया। रात्रि  को पहला सत्संग हुआ। भजन समाप्ति के उपरांत पूजनीय परम पिता जी ने इस भजन की सुंदर व्याख्या की। सत्संग का कार्यक्रम सारी रात चलता रहा और सभी सत्संग में इतना मंत्रमुग्ध हुए कि सुबह होने का पता ही नहीं चला। MSG Bhandara Month</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">सारी सांध-संगत प्रेम से बैठी हुई थी। सत्संग के इस प्रेम को देखते हुए परम पिता जी बहुत खुश हुए व अपने अमृतयुक्त वचनों द्वारा अनेक बख्शिशें की। दूसरे दिन फिर सत्संग प्रारंभ हुआ और पंडाल साध-संगत से भरा हुआ था सत्संग के उपरांत सतगुरु जी ने बड़ी संख्या में जीवों को ‘नाम-शब्द’ देकर भवसागर से पार किया । उक्त सत्संग के बाद पूजनीय परम पिता जी ने जब इस गांव में आगामी सत्संग फरमाया तो गांव की साध-संगत का प्रेम देखकर परम पिता जी बहुत खुश हुए और वचन फरमाया,‘‘बेटा! तुम्हारे गाँव का पहला नंबर है।’’</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">सतगुरु जी ने बहुत प्रसन्न होकर उस गाँव का नाम कैले बांदर से बदलकर ‘नसीबपुरा’ रख दिया और फरमाया,‘‘ बेटा! यह तो नसीबों वाला नगर है।’’ पूजनीय परम पिता जी ने उस समय गाई जा रही कव्वाली में यह पंक्ती जोड़ दी-‘गांव तर गया नसीबपुरा सारा गुरु के साथ तार जोड़ के।’ MSG Bhandara Month</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:46:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: एक भगत ने जब संतान प्राप्ति की मांग की तो परम पिता जी ने समझाया कि&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की सतगुरु के प्रति असीम श्रद्धा भक्ति को देखते हुए पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज गांव श्री जलालआणा साहिब में कई बार पधारे। एक बार बेपरवाह जी इस पवित्र गांव में सत्संग के बाद नाम-शब्द की युक्ति प्राप्त करने आए नए जीवों को बुराईयां त्यागने के बारे में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-a-devotee-requested-a-child-the-supreme-father-explained-that/article-80316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की सतगुरु के प्रति असीम श्रद्धा भक्ति को देखते हुए पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज गांव श्री जलालआणा साहिब में कई बार पधारे। एक बार बेपरवाह जी इस पवित्र गांव में सत्संग के बाद नाम-शब्द की युक्ति प्राप्त करने आए नए जीवों को बुराईयां त्यागने के बारे में समझा रहे थे। किसी-किसी नाम अभिलाषी से परिचय प्राप्त कर रहे थे। किसी-किसी से पूछ भी रहे थे कि तुम नाम-रास्ता क्यों लेना चाहते हो? सभी अपने-अपने तरीके से उत्तर दे रहे थे। इस प्रकार भान सिंह नामक भक्त से बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पूछा, ‘‘वरी! तू नाम क्यों लेना चाहता है?’’ उसने बताया कि सांई जी, मेरे यहां संतान नहीं है। MSG Bhandara Month</p>
<h3>‘‘असी बच्चे थोड़े ही वंडदे हां’’</h3>
<p style="text-align:justify;">संतान प्राप्त करने के लिए नाम लेना चाहता हूं। सांई जी ने भान सिंह को बताया, ‘‘असी बच्चे थोड़े ही वंडदे हां’’ यह कहकर उसे बाहर भिजवा दिया। भान सिंह ने शाह सतनाम जी महाराज जी के पास जाकर उन्हें सारी बात बताई। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘अब तूने जाकर पूजनीय साईं शाह मस्ताना जी महाराज के चरणों में अरदास करनी है कि मैंने अपनी आत्मा के कल्याण के लिए नाम लेना है।’’ फिर उस भक्त ने वैसा ही किया। बेपरवाह जी ने फिर उसे नाम लेने वालों में बैठने का इशारा करते हुए फरमाया, ‘‘वरी! हमारी बात सुन। एक आदमी की कारीगर (लकड़ी का मिस्त्री) से यारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कारीगर रोज शाम को उस आदमी के पास आता है। उस आदमी के पास मंजी (चारपाई) नहीं है। उस आदमी को क्या जरूरत है कि वह कारीगर को कहे कि मुझे एक मंजी बनाकर दे। कारीगर खुद ही देखता है कि मेरा यार नीचे जमीन पर सोता है क्यों न इसे मंजी बनाकर दूं। इसी प्रकार जब तुमने नाम शब्द ले लिया है तो उसे जपो। वह मालिक तुम्हारी सभी जरूरतों को समझता है और वह बिन मांगें ही जायज मांगें पूरी करेगा। ’’ MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 10:07:34 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Bhandara Month: परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अपनी अपार दया-मेहर से बिन मांगे ही पूरी की मुराद</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मुख्त्यार कौर, गाँव दानेवाला जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) सच्चे दाता रहबर के परोपकार के एक वृतांत का वर्णन करते हुए बताती है कि मेरे बड़े लड़के अमरजीत सिंह की शादी को 15 वर्ष हो चुके थे, परन्तु अभी तक सन्तान नहीं हुई थी। वह मुझे अक्सर कहता था […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/with-his-immense-grace-and-mercy-satguru-ji-fulfilled-the-wish-after-15-years-even-without-being-asked/article-80177"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji-shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मुख्त्यार कौर, गाँव दानेवाला जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) सच्चे दाता रहबर के परोपकार के एक वृतांत का वर्णन करते हुए बताती है कि मेरे बड़े लड़के अमरजीत सिंह की शादी को 15 वर्ष हो चुके थे, परन्तु अभी तक सन्तान नहीं हुई थी। वह मुझे अक्सर कहता था कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में सन्तान के लिए अर्ज करो, परन्तु मैं उसकी बात को यह कहकर टाल देती कि मालिक तो अंग-संग है, जब मालिक की रहमत होगी तो सन्तान हो जाएगी। सन् 1985 में पूजनीय परम पिता जी मलोट डेरे में पधारे। MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">मजलिस के बाद जब पूजनीय परम पिता जी घूमने जा रहे थे तो अचानक मुझे कहने लगे, ‘‘बेटा, तेरे पोता-पोती सब ठीक हैं।’’ मैंने उदास मन से कहा-पिता जी, मेरे लड़के की शादी हुए 15 वर्ष हो गए हैं, अभी तक उनके कोई सन्तान नहीं हुई। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने मुस्कुराकर कहा, ‘‘बेटा, तुझे एक प्रेम निशानी दे रहे हैं, इसे अपने पोते-पोतियों को पहना देना।’’ उसी समय पूजनीय परम पिता जी ने मुझे एक फ्रॉक तथा कुछ अन्य कपड़े दिए। मैं यह प्रेम-निशानी लेकर फूले नहीं समा रही थी। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर से 15 वर्ष बाद मुझे एक पोता व दो पोतियों का सुख मिला। इस प्रकार सतगुरु अपने जीव की हर जायज माँग को पूरी करते हैं। MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 09:58:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Param Pita Shah Satnam Ji: &amp;#8221;आपके गांव का पहला नंबर है’’</title>
                                    <description><![CDATA[17 जून 1967 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव केले बांदर (आजकल नसीबपुरा) जिला बठिंडा में सत्संग फरमाने के लिए पधारे। पूरा गांव सत्संग की खुशी में फूले नहीं समा रहा था। इस गांव में उस समय 317 व्यक्तियों को आप जी ने नाम की अनमोल दात प्रदान की। साध-संगत के प्रेम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-the-connection-has-been-established-with-the-master-himself-what-is-left-to-worry-about/article-79966"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">17 जून 1967 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव केले बांदर (आजकल नसीबपुरा) जिला बठिंडा में सत्संग फरमाने के लिए पधारे। पूरा गांव सत्संग की खुशी में फूले नहीं समा रहा था। इस गांव में उस समय 317 व्यक्तियों को आप जी ने नाम की अनमोल दात प्रदान की। साध-संगत के प्रेम व नाम शब्द लेने वालों का उत्साह देखकर पूजनीय परम पिता जी बेअंत खुश हुए व वचन फरमाए ‘‘बेटा, आपके गांव का पहला नंबर है।’’ परम पिता जी ने गांव के बारे में वचन फरमाए, ‘‘बेटा, यह तो नसीबों वाला नगर है।’’ Param Pita Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">परम पिता जी ने सत्संग में चल रही कव्वाली में एक और तुक जोड़ दी-‘‘पिंड तर गिया नसीबपुरा सारा, गुरू दे नाल तार जोड़ के।’’ एक प्रेमी भाई ने परम पिता जी के आगे बेनती की कि, ‘‘पिता जी’’ हमारी प्रेम रूपी तार ही आप जी के चरणों के साथ हमेशा जुड़ी रहे तब परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा। आप तो सबकुछ पा गए जब तार ही मालिक से जुड़ गई तो पीछे क्या रह गया।’’ यह वचन सुनकर सारी साध-संगत खुशी से नाच उठी। Param Pita Shah Satnam Ji</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 09:36:15 +0530</pubDate>
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                <title>जब एक शख्स को खुद पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने यमों से बचाया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी भोपाल सिंह (मास्टर) गांव शाहपुर बड़ौली जिला मेरठ (यूपी) से अपने प्यारे सतगुरु जी के एक प्रत्यक्ष करिश्में का इस प्रकार वर्णन करता है। सन् 1978 की बात है, भोपाल सिंह ने उस वक्त तक नाम (गुरुमंत्र) नहीं लिया हुआ था। वह बाहरी कर्म काण्डों में ही फंसा हुआ था। एक बार वह मानसिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/satguru-ji-saved-from-eunuchs/article-87109"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/parm-pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><strong>प्रेमी भोपाल सिंह (मास्टर) गांव शाहपुर बड़ौली जिला मेरठ (यूपी) से अपने प्यारे सतगुरु जी के एक प्रत्यक्ष करिश्में का इस प्रकार वर्णन करता है।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सन् 1978 की बात है, भोपाल सिंह ने उस वक्त तक नाम (गुरुमंत्र) नहीं लिया हुआ था। वह बाहरी कर्म काण्डों में ही फंसा हुआ था। एक बार वह मानसिक रोग का शिकार हो गया। वह रोग उसके पीछे ही पड़ गया था और ठीक होने का नाम नहीं ले रहा था। उसने इस बीमारी का बहुत इलाज करवाया, लेकिन वो ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन की बात है प्रेमी भोपाल सिंह बीमारी के चलते परेशानी की हालत में अपनी चारपाई पर लेटा हुआ था। अचानक उसे महसूस हुआ जैसे कि उसका दम घुट रहा हो। एक बहुत ही भंयकर शक्ल वाला कोई उसके सामने खड़ा। उसे देखकर उसकी साँस फूल गई और आँखें पथरा गई थीं। कोई भी तो नहीं था उसे उस भंयकर स्थिति से छुड़ाने वाला। माँ-बाप, भाई-बहन कोई भी उसे नजर नहीं आ रहा था, जिसे कि वह अपनी मदद के लिए पुकारता। उसकी जीभ सुखकर तालू से लग गई थी और स्वांस रुक गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">तभी उसे अचानक एक बहुत ही सुन्दर प्रकाश दिखाई दिया। वह उस भयंकर अन्धकार से निकल कर एक नूरानी प्रकाश में आ गया। ऊँचे-लम्बे कद सफेद पोशाक में एक अति सुन्दर नूरी चेहरे वाले बुजुर्ग (बाबा जी) उसके सामने आकर खड़े हो गए। उस महान हस्ती के दर्शन उसने पहली बार ही किए थे। अपनी मदद के लिए उस बुजुर्ग को देखकर उसकी जान में जान आ गई। बाबा जी के हाथ में पकड़ी लाठी को देखकर वह यमदूत हाथ जोड़ते हुए एकदम वहां से भाग गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक उपरोक्त घटना को कई दिन बीत गए थे, परन्तु वह बाबा जी के उस सुन्दर नूरानी स्वरूप को भूला नहीं था। वह उन्हें ढूंढे तो कहां ढूंढे। तलाश करना तो उसके वश की बात नहीं थी, परन्तु उस सुन्दर इलाही स्वरूप की कशिश बराबर उसे अपनी ओर खींच रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हीं दिनों में ही शहनशाहों के शहनशाह परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने किशनपुरा बराल का सत्संग मंजूर कर दिया। यह गांव डेरा सच्चा सौदा, बरनावा के प्रबंधक रांधी साहिब का पैतृक गांव है। अचानक उसी दिन एक प्रेमी उसे कह कर अपने साथ किशनपुरा बाराल ले गया, आ जा! आज परम पिताजी से तेरी बीमारी की बात करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग पण्डाल में संगत खूब सजी हुई थी। पूज्य परम पिता जी स्टेज पर सुशोभित थे। ज्यों ही उसने सामने देखा तो अचम्भित ही रह गया। सामने स्टेज के ऊपर वही सुन्दर नूरी स्वरूप वही लिबास, वही भोली-भाली अदाएं, सब कुछ वही तो था। मेहरबान सतगुरु जी स्टेज पर विराजमान उसकी तरफ ऐसे भोले-भाले अंदाज में देख रहे थे मानो कह रहे हों, ‘‘आ गया भाई! बहुत अच्छा हुआ।’’</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चे पातशाह जी की कृपा से उसे उसी सत्संग पर ही नाम-दान मिल गया। कुल मालिक जी ने प्रत्यक्ष रहमत करके अपनी रूह के काल से बचाया। वहीं इतना धन और समय खर्च करने पर भी उसकी जो बीमारी ज्यों की त्यों थी। पूज्य परम पिता जी के दर्शन करने तथा नाम-दान प्राप्त करने से तुरंत बाद उसका मन, दिमाग व शरीर फूल से भी हल्का हो गया जैसे कि सिर पर रखे बहुत भारी बोझ को उतार कर कोई व्यक्ति राहत महसूस करता है।</p>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jan 2025 10:10:45 +0530</pubDate>
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                <title>सतगुरू जी ने जीव का भयानक कर्म कंकर में बदला</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी ओम प्रकाश, बड़ौत शहर, जिला बागपत (यूपी) से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है:- प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/charisma-of-shah-satnam-ji-maharaj/article-49467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/param-pita-shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी ओम प्रकाश, बड़ौत शहर, जिला बागपत (यूपी) से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है:-</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">3 जुलाई 1980 को जब वह बड़ौत शहर से अपना कारोबार करने के बाद शाम को अपने गांव नसौली जा रहा था। जहां कि वह पहले रहता था। रास्ते में एक सुनसान जगह पर कुछ लुटेरों ने उसे घेर लिया व उस पर एकदम चाकुओं से हमला कर दिया। उस समय वह बुरी तरह जख्मी हो गया। लुटेरों ने उसे मरा हुआ जानकर सड़क के किनारे एक गड्ढ़े में फैंक दिया और भाग गए। थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो उसने अपने आपको संभाला और किसी न किसी तरह गिरते-पड़ते अपने गांव पहुंच गया। गांव वालों ने उसे वहां से वापिस बड़ौत शहर ले जाकर अस्पताल में दाखिल करवा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय उसके शरीर पर बहुत ही गहरे कई जख्म थे और उनमें से खून बह रहा था। शरीर में से अधिक खून निकल जाने की वजह से उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी। डॉक्टरों का कहना था कि वह 6-7 महीने से पहले ठीक नहीं हो सकता। परंतु उसके गांव की साध-संगत ने सिरसा दरबार में आकर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से उपरोक्त सारी घटना का वर्णन किया तो प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’ क्योंकि यूपी दरबार में अंग्रेजी महीने के हर पहले सप्ताह (रविवार) को सत्संग होता है और सच्चे पातशाह जी ने 15 दिनों बाद यानि अगस्त महीने के पहले सप्ताह में वहां जाना</p>
<p style="text-align:justify;">था। कुल मालिक के वचनों अनुसार ठीक 15 दिनों बाद जब प्यारे सतगुरु जी डेरा सच्चा सौदा, बरनावा आश्रम में पहुंचे तो प्रेमी ओमप्रकाश भी अपने सतगुरु जी के दर्शन करने के लिए वहां पहुंच गया। प्रेमी के करीब करीब सारे जख्म भर चुके थे, परंतु उसके हाथ का एक जख्म काफी खराब हो चुका था। उस समय भी उस पर पट्टी बंधी हुई थी। दयालु दातार जी ने प्रेमी को अपने पास बुलाकर उसका हाल-चाल पूछा और उसके हाथ को अपने पवित्र हाथों में लेकर बहुत ही गौर से देखा। वह तो सच्चे पातशाह कुल मालिक का एक अनूठा खेल था। उसे स्पष्ट अनुभव हुआ कि वास्तव में पूज्य सतगुरु जी ने अपनी दृष्टि व अपार रहमत से उसके करोड़ों जन्मों के कर्मों को उन कुछ दिनों में ही काट दिया था। उस समय कुल मालिक जी ने वचन फरमाया, ‘‘भाई! उन बदमाशों को कुल मालिक स्वयं ही जल्दी सजा देगा।’’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जब ‘अंजू इन्सां अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा चंडीगढ़…" href="http://10.0.0.122:1245/body-donation-of-anju-insan-for-medical-research/">जब ‘अंजू इन्सां अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा चंडीगढ़…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 21:07:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्यारे सतगुरू जी ने बचाई नन्हें शिष्य की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी धर्मपाल सिंह, गांव नीलाखेड़ी, जिला करनाल (हरियाणा) से अपने प्यारे सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की प्रत्यक्ष मेहर का दृष्टान्त इस प्रकार बयान करता है :- सन् 1981 में मैं पूजनीय परम पिता जी के दर्शन करने व सत्संग सुनने के लिए डेरा सच्चा सौदा बरनावा (उत्तर प्रदेश) गया हुुआ था। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj-3/article-40773"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/shah-satnam-singh-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रेमी धर्मपाल सिंह, गांव नीलाखेड़ी, जिला करनाल (हरियाणा) से अपने प्यारे सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की प्रत्यक्ष मेहर का दृष्टान्त इस प्रकार बयान करता है :-</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सन् 1981 में मैं पूजनीय परम पिता जी के दर्शन करने व सत्संग सुनने के लिए डेरा सच्चा सौदा बरनावा (उत्तर प्रदेश) गया हुुआ था। मेरे पड़ोसी के घर एक अनार का बड़ा पेड़ था। उसी दिन शाम को मेरा 6 वर्षीय बेटा पड़ोसियों के घर से अनार तोड़ने के लिए अपने मकान की छत पर चढ़ गया। उसने बहुत कोशिश की, परंतु उसका हाथ अनार के पेड़ तक नहीं पहुंचा। फिर छत के बनेरे पर बैठकर आगे की और झुककर जब उसने अनार तोड़ना चाहा तो दुर्भाग्य से छत के बनेरे की ईंटें उसके पैर के नीचे से हिल गई। शरीर का वजन आगे की ओर होने के कारण वह अपने आप को संभाल न सका और धड़ाम से नीचे उनके आंगन में जा गिरा। थोड़ी देर में ही उनके पड़ोस के सभी लोग वहां इक्ट्ठे हो गए और उन्होंने आकर बच्चे को उठाया। वह सभी यह देखकर हैरान थे कि जिस जगह वह गिरा है, वहां पहले से एक तरफ ईंटें तथा दूसरी तरफ लकड़ियों का ढ़ेर लगा हुआ था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Saint Dr. MSG के मंत्रमुग्ध करने वाले सर्वश्रेष्ठ भजन" href="http://10.0.0.122:1245/gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan-new-songs/">Saint Dr. MSG के मंत्रमुग्ध करने वाले सर्वश्रेष्ठ भजन </a></p>
<p style="text-align:justify;">शोर सुनकर बच्चे की माता भी पड़ोसी के घर पहुंच गई। वह बच्चे को देखकर घबरा गई। उसने दौड़ कर अपने बच्चे को अपनी गोद में ले लिया। अपने बच्चे को बिल्कुल ठीक अवस्था में पाकर उसने राहत की सांस ली तथा प्यारे सतगुरू जी का धन्यवाद किया। परम, दयालु दाता जी ने स्वयं ही बच्चे की रक्षा की है, वरना जिस जगह वह गिरा था, वहां से बचना बहुत ही अंसभव था। क्योंकि वहां एक तरफ ईंटें और दूसरी तरफ लकड़ियों का ढ़ेर था। कुल मालिक पूजनीय परम पिता जी ने बच्चे को गिरने से पहले ही अपने पवित्र कर-कमलों में ले लिया तथा उन दोनों ढ़ेरों के बीचो-बीच पड़ी खाली जगह पर बड़े आराम से इस प्रकार लिटा दिया, जैसे बच्चा सो रहा हो। घर पहुंच कर बच्चे ने अपनी माता को बताया कि सरसा वाले बाबा जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज) ने उसे अपनी गोद में उठा लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मालिक पूजनीय परम पिता ने बच्चे का बाल भी बांका नहीं होने दिया। पूजनीय परम पिता जी सत्संग में फरमाया करते हैं, ‘‘जो भी जीव मन का मुकाबला करके, दुनिया की लोक-लाज की परवाह न करता हुआ सत्संग में आता है तो मालिक को उसकी देखभाल करनी पड़ती है।’’ हर मुसीबत के समय मालिक खुद प्र्रकट होकर अपने जीव की पूरी सहायता करता है। यही सच्चे सतगुरू जी की महानता है।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मपाल जब सत्संग सुनकर लौटा तो उसकी पत्नी ने बच्चे के बारे में सारा हाल सुनाया। यह सुनकर वह हैरान रह गया और कहने लगा कि प्यारे सतगुरू जी ने हम पर इतना बड़ा उपकार किया है कि जिसका बदला सौ जन्मों में भी नहीं चुकाया जा सकता। उसने अपने प्यारे सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का तहेदिल से धन्यवाद किया। इस प्रकार जो भी जीव अपने सच्चे सतगुरू पर पूरा विश्वास रखता हुआ दरबार में सेवा करता है तो कुल मालिक उस जीव के सारे काम स्वयं संवारता है और उसे अहसास तक भी नहीं होने देता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी सत्संग में फरमाया करते हैं, ‘‘जो भी जीव मन का मुकाबला करके, दुनिया की लोक-लाज की परवाह न करता हुआ सत्संग में आता है तो मालिक को उसकी देखभाल करनी पड़ती है।’’</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 21:00:11 +0530</pubDate>
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                <title>सतगुरू जी ने बच्चे की सुनी तड़प, दिए दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[राजेश कुमार कुरूक्षेत्र से अपने बचपन में हुई पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की कृपा का एक प्रत्यक्ष प्रमाण इस प्रकार वर्णन करता है :- सन् 1975 की बात है। जब मैं तीसरी कक्षा में पढ़ता था। एक दिन मुझे बहुत तेज बुखार हो गया। मेरी माता सत्संग पर दरबार में आई हुई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj-listened-to-the-yearning-of-the-child-gave-darshan/article-40685"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/shah-satnam-singh-ji-mahara.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>राजेश कुमार कुरूक्षेत्र से अपने बचपन में हुई पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की कृपा का एक प्रत्यक्ष प्रमाण इस प्रकार वर्णन करता है :-</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सन् 1975 की बात है। जब मैं तीसरी कक्षा में पढ़ता था। एक दिन मुझे बहुत तेज बुखार हो गया। मेरी माता सत्संग पर दरबार में आई हुई थी। सत्संग के बाद साध-संगत के दूसरे ट्रक तो अगले दिन सुबह 8-9 बजे के करीब घर पहुंच गए, परंतु वह ट्रक नहीं पहुंचा। मैं और मेरे पिता बहुत ही परेशान थे। एक तो मुझे बहुत ही तेज बुखार था और दूसरा मुझे अपनी मां की भी बहुत याद आ रही थी। मैं मालिक को याद करके सुमिरन करने लगा और अपनी आंखें बंद कर ली।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कनाडा में Saint Dr. MSG का जलवा" href="http://10.0.0.122:1245/organization-blood-donation-camp-by-dera-followers-of-canada/">कनाडा में Saint Dr. MSG का जलवा</a></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-align:justify;">उसी समय पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने मुझे दर्शन दिए और फरमाया, ‘‘बेटा! तूने घबराना नहीं, कोई चिंता की बात नहीं है। कैथल नहर के पास ट्रक का एक्सीडैंट हो गया है। तेरी माता ठीक-ठाक है। वह शाम को चार बजे घर पहुंच जाएगी।’’ उपरोक्त वचन प्रेमी ने स्पष्ट सुने और उसने कुल मालिक पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के दर्शन भी किए, जो कि बिल्कुल उसके सामने खड़े थे। पूजनीय परम पिता जी के आशीर्वाद से मेरा बुखार तुरंत उतर गया। मैं बहुत ही खुश था और मैंने यह सारी बात अपने पिता को भी बता दी।</span></p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी की दया मेहर से ठीक चार बजे मेरी मां घर पर पहुंच गई। मैंने अपनी माता के कुछ बताने से पहले ही उन्हें सब कुछ ज्यों का त्यों बता दिया। प्रेमी ने बताया कि पूजनीय परम पिता जी उसे अपने नूरी दर्शन देकर गए हैं। सच्चे पातशाह जी ने यह भी बताया था कि उस एक्सीडैंट में उसकी माता बिल्कुल ठीक है। पूजनीय परम पिता जी की दया मेहर रहमत से मेरा बुखार भी उसी समय उतर गया था। यह सब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की महानता है जो अपने बच्चों का हर समय इतना ख्याल रखते हैं।</p>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
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                <pubDate>Wed, 07 Dec 2022 21:01:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सच्चे सतगुरु जी की रहमत शिष्य का पक्का किया दृढ़ विश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा , जिसको मालिक पर विश्वास है, मालिक उसका जिम्मेवार है तथा उसके सारे काम स्वयं ही करता है। जो मालिक का हो जाता है, मालिक भी उसका हो जाता है।’’ एक दिन मैं अर्द्धजागृत अवस्था में सोया हुआ था। अचानक मुझे पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/param-pita-shah-satnam-singh-ji-maharaj-3/article-38664"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/shah-satnam-singh-ji-mahara.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा , जिसको मालिक पर विश्वास है, मालिक उसका जिम्मेवार है तथा उसके सारे काम स्वयं ही करता है। जो मालिक का हो जाता है, मालिक भी उसका हो जाता है।’’</strong></p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन मैं अर्द्धजागृत अवस्था में सोया हुआ था। अचानक मुझे पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के दर्शन हुए। मुझे आशीर्वाद देते हुए पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, कल तेरी बस के नीचे आकर एक आदमी ने मरना है, तुझे डरने की कोई जरूरत नहीं, उसकी मौत इसी प्रकार होनी है। हम तेरे साथ हैं।’’ इसी के साथ सारी घटना का दृश्य भी दिखा दिया। मैं डर गया परंतु मैंने इसे मात्र सपना ही समझा। अगले दिन मैं चंडीगढ़ से सरसा के लिए बस लेकर चला तो रास्ते में जीरकपुर पहुंचकर रात वाला सारा दृष्टांत मेरे सामने था। बस सवारियों से भरी हुई थी। बस स्टैंड पर पहुंचने से पहले ही एक आदमी चलती बस पर लटक गया और दूसरे वाहन की चपेट में आकर बस के पिछले टायर के नीचे आकर कुचला गया। बस में शोर मच गया। मैंने बस रोकी तो सवारियों ने कहा कि कोई व्यक्ति बस के नीचे आ गया है। मैंने देखा कि वह व्यक्ति खून से लथपथ सड़क पर पड़ा कराह रहा था। मैंने उसी बस में उसे पीजीआई अस्पताल पहुंचाया लेकिन वह दम तोड़ गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong> <a href="http://10.0.0.122:1245/naamcharcha-was-organized-in-saharsa/">बिहार में मची राम-नाम की धूम</a></p>
<p style="text-align:justify;">तब तक पुलिस भी वहाँ पहुंच गई। मैंने उस पुलिस अधिकारी को समझाया कि इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है। उसने बस में लगे पूजनीय परम पिता जी के पावन स्वरूप की तरफ देखा तो उसके बोलचाल व स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर आ गया। उसने मुझसे पूछा कि क्या तूू इन संतों का सेवक है? मैंने कहा कि जी हां, ये सच्चा सौदा, सरसा वाले संत हैं। उस पुलिस अधिकारी ने मुझे हौंसला दिलाया कि तू बिल्कुल न घबरा, तेरा कोई नुक्सान नहीं होने दिया जाएगा। बस को थाने ले जाया गया। वहां मृतक व्यक्ति के परिवार वाले भी आ गए। उस पुलिस अधिकारी ने इस प्रकार रिपोर्ट तैयार की कि उस मृतक को भी सर्विस लाभ, पैंशन व बकाया बीमा मिल सके क्योंकि वह भी एक सरकारी कर्मचारी था और मेरे बारे में लिखा कि बस ड्राईवर न तो नशा करता है और न ही बस लापरहवाही से चला रहा था। उसने हमारा राजीनामा करवा दिया। फिर उस पुलिस अधिकारी ने मुझे बताया कि रिपोर्ट लिखते समय मेरे सामने एक सफेद वस्त्र धारण किए लम्बे कद, सुंदर व आकर्षक स्वरूप में एक बाबा जी हाथ में लाठी लिए तब तक खड़े रहे, जब तक कि मैंने सब कुछ लिख नहीं दिया। उन्होंने मुझे कहा कि हमारे बच्चे का कोई नुक्सान नहीं होना चाहिए। आप पर तो बाबा जी बहुत ही मेहरबान हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने अपने दिल से पूजनीय परम पिता जी का शुक्राना किया और सोचा कि किस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मेरी जान छुड़ाई। फिर मैंने उस पुलिस अधिकारी का शुक्राना किया और सीधा सरसा आश्रम में पहुंच गया। उस समय पूजनीय परम पिता जी शाम की मजलिस में विराजमान थे। मैंने सारी घटना पूजनीय परम पिता जी को सुनाई। पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा , जिसको मालिक पर विश्वास है, मालिक उसका जिम्मेवार है तथा उसके सारे काम स्वयं ही करता है। जो मालिक का हो जाता है, मालिक भी उसका हो जाता है।’’              <strong>श्री गुरमेल सिंह, गांव गरचा, नवांशहर</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Oct 2022 21:08:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>&amp;#8230;जब सतगुरू ने गांव गिलजेवाला की धरती पर टिकाए पावन चरण</title>
                                    <description><![CDATA[गिद्दड़बाहा (राजविन्द्र बराड़)। कहते हैं जिस धरती पर संतों-महात्माओं के पवित्र चरण टिक जाएं उस धरती के भाग ही जाग जाते हैं। गांव गिलजेवाला (जिला श्री मुक्तसर साहिब) की धरती तब धन्य हो गई जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने यहां दो बार सत्संग फरमाया। इस उपरांत साध-संगत ने तीसरी बार सत्संग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/ruhani-vachan-of-param-pita-shah-satnam-ji-maharaj/article-37675"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/param-pita-shah-satnam-singh-ji.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गिद्दड़बाहा (राजविन्द्र बराड़)।</strong> कहते हैं जिस धरती पर संतों-महात्माओं के पवित्र चरण टिक जाएं उस धरती के भाग ही जाग जाते हैं। गांव गिलजेवाला (जिला श्री मुक्तसर साहिब) की धरती तब धन्य हो गई जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने यहां दो बार सत्संग फरमाया। इस उपरांत साध-संगत ने तीसरी बार सत्संग फरमाने की अर्ज की। पूजनीय परम पिता जी ने गांव में पावन चरण कमल टिकाए और सत्संग कर लगभग 260 नये जीवों ने नाम की अनमोल दात प्रदान की। गांव गिलजेवाला पर प्यारे सतगुरू जी की अपार रहमत से गांव के चार सेवादार पक्के तौर पर दरबार में सेवा निभा रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा की स्टेट समिति हरचरण सिंह 45 मैंबर पंजाब का भी इसी गांव में जन्म हुआ है। इस गांव में ब्लॉक कोटभाई की ब्लॉक स्तरीय सेवा कर रहे 15 मैंबर जगरूत सिंह इन्सां और पृथी सिंह इन्सां भी गांव गिलजेवाला से हैं। इस गांव के भंगीदास प्रगट सिंह इन्सां जो लगातार 12 सालों से भंगीदास की सेवा निभा रहे हैं और ब्लॉक में भी अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लॉक कोटभाई के गांव गिलजेवाला की साध-संगत हमेशा ही पूज्य गुरू जी द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई के 142 कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेती आ रही है। जिस तरह वर्ष 2021-22 में भी मानवता भलाई के कार्य कर जरूरतमंदों की मदद की। गांव गिलजेवाला से कई मृत शरीर मेडीकल रिसर्च के लिए दान किए जा चुके हैं। इस गांव की साध-संगत द्वारा रक्तदान के क्षेत्र में, पौधे लगाने की मुहिम, जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी करवाना, हादसों में घायल हुए लोगों को आर्थिक मदद देना इत्यादि मानवता भलाई के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। साध-संगत ने कोरोना काल दौरान पूरी ईमानदारी से सेवा निभाते हुए मुफ्त मास्क बांटे और 40 यूनिट रक्तदान भी किया। लगभग 60 बच्चों को खिलौने बांटे, गर्म कपड़े वितरित किए। 100 जरूरतमंद परिवारों को राशन दिया। कोरोना काल दौरान काम करने वाले अधिकारियों को फ्रूट की टोकरियां देकर उनको सम्मानित किया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़े:-</strong> </span><a href="http://10.0.0.122:1245/you-should-have-firm-faith-in-your-guru-pujya-guru-ji/">आपको किसी और के आगे झोली फैलाने ही नहीं देंगे : पूज्य गुरु जी</a></p>
<p style="text-align:justify;">सरपंच निर्मल सिंह ने डेरा सच्चा सौदा की मानवता भलाई के कार्यों की प्रशंसा करते कहा कि गांव में डेरा श्रद्धालु हमें बहुत ही सहयोग दे रहे हैं। गांव में जो भी मानवता भलाई के सांझे कार्य हैं उनमें डेरा श्रद्धालु हमारा पूरा साथ दे रहे हैं। मैं डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू जी और गांव गिलजेवाला की साध-संगत का तहेदिल से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने गांव में मानवता भलाई के कार्य कर गांव को सुंदर बनाने में मेरा साथ दिया। गांव गिलजेवाला के क्लब के प्रधान गुरविन्द्र सिंह बराड़ ने कहा कि गांव में डेरा श्रद्धालु बहुत ही प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव की गतिविधियों में पूर्ण सहयोग देने पर डेरा श्रद्धालुओं का तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी डेरा श्रद्धालु इसी तरह गांव के विकास कार्यों में सहयोग देते रहेंगे।</p>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Sep 2022 20:44:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>‘‘बेटा, अब इसे दवाई मत खिलाओ। सभी सुमिरन करो, मालिक सब ठीक करेगा।’’</title>
                                    <description><![CDATA[यह बात सन् 1967 की है। मेरी पत्नी प्रकाशी बहुत ही ज्यादा बीमार हो गई। बहुत ईलाज करवाया परंतु आराम नहीं आया। डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करवाने को कहा। इस पर मुझे ख्याल आया कि क्यों न इस बारे में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से पूछ लिया जाए। उस समय गांव किशनपुर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj/article-36432"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/shah-satnam-singh-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह बात सन् 1967 की है। मेरी पत्नी प्रकाशी बहुत ही ज्यादा बीमार हो गई। बहुत ईलाज करवाया परंतु आराम नहीं आया। डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करवाने को कहा। इस पर मुझे ख्याल आया कि क्यों न इस बारे में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से पूछ लिया जाए। उस समय गांव किशनपुर बराल में सत्संग था। वहां पर मैंने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से अपनी पत्नी की बीमारी के बारे में प्रार्थना की और कहा कि पिता जी, इसे दवाईयां दिलवा-दिलवाकर थक गया हूँ। अब आप जी का ही सहारा है। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, अब इसे दवाई मत खिलाओ। सभी सुमिरन करो, मालिक सब ठीक करेगा।’’ पूजनीय परम पिता जी के पावन वचनानुसार मेरी पत्नी बिना दवाई के ही ठीक हो गई तथा उसका आॅपरेशन भी नहीं करवाना पड़ा।<br />
<strong>डॉ. राम सिंह, बड़ौत, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश)</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">कर्मों का लेखा-जोखा</h3>
<p style="text-align:justify;">हे मन ! तू हमारी इस सच्ची शिक्षा को ध्यान देकर सुन कि मृत्यु के बाद तेरे से तेरे किए कर्मों का हिसाब मांगा जाएगा। जिस तरह साहूकार अपने किसान के साथ बही खोलकर लेन-देन का हिसाब करता है, ठीक इसी प्रकार तेरे से भी भले-बुरे कर्मों का हिसाब पूछा जाएगा। जिस जीव की तरफ कर्मों का कर्जा बढ़ जाता है यानि धर्मराज की बाकी निकलती है, उसे धर्मराज उसी समय बुलाता है तथा मौत का फरिश्ता अजरायल जीव को लेने के लिए आ खड़ा होता है। फिर इसे कुछ भी नहीं सूझता कि किधर जाऊं? जीव उनसे किसी भी तरह से बच नहीं सकता, क्योंकि वे इसके गले में कस कर फंदा डाल देते हैं। इस झूठे काल के देश का सब सामान, यहीं पर ही पड़ा रह जाता है और अंत समय कोई भी सहायता नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">आदि से अंत तक सदा एक सच (गुरूमंत्र) ही कायम रहता है और वही अंत समय जीव के काम आता है यानि उसकी सहायता करता है। मौत के बाद जब धर्मराज लेखा मांगता है तो बुरे कर्मों का कर्जा अधिक होने से जीवात्मा को बांधकर उसके दरबार में ले जाया जाता है। पांच किसान काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार जो इस शरीर रूपी भूमि में विषयों की खेती, यानि बुरे बुरे कर्म करते रहे तथा मन के अनुसार सब काम करते रहे, जीव के प्राण त्यागते ही वे सब भाग गए। कर्मों की सजा केवल आत्मा को ही भुगतनी पड़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन पांच वैरियों ने रूह को साथ तो क्या देना था, बल्कि ये तो जीव को नरकों में ले जाने का काम करते हैं। हे प्राणी! तू मन में ये धारण किए हुए है कि मैं जो भी जुल्म अपराध तथा कोई नीच कर्म करता हूं, उसे कोई भी नहीं देखता। हे भाई! यह मत भूल क्योंकि देखने वाला मालिक तो सब कुछ अच्छा या बुरा तेरे अंदर बैठा ही देख रहा है। मृत्यु के बाद जब तुझे धर्मराज के दरबार में पेश किया जाएगा तो चित्र व गुप्त तेरे सब कर्मों का हिसाब करेंगे।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 20:16:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्यारे सतगुरू जी ने बसाया कल्याण नगर</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने इस नगर की स्थापना 1974 में की। इस नगर का नाम कल्याण रखते हुए फरमाया, ‘‘जो कोई इस नगर में रहते हुए अपने प्यारे सतगुरू के वचनों पर अमल कमाएगा, उसका कल्याण हो जाएगा।’’ यहां के नगरवासियों में सेवा का जज्बा भरा हुआ है और इसके चप्पे-चप्पे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/pyare-satguru-ji-established-kalyan-nagar/article-33810"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/pujya-param-pita-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने इस नगर की स्थापना 1974 में की। इस नगर का नाम कल्याण रखते हुए फरमाया, ‘‘जो कोई इस नगर में रहते हुए अपने प्यारे सतगुरू के वचनों पर अमल कमाएगा, उसका कल्याण हो जाएगा।’’ यहां के नगरवासियों में सेवा का जज्बा भरा हुआ है और इसके चप्पे-चप्पे पर पूजनीय परम पिता जी ने अपने पावन चरण टिकाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने लोगों की समस्याओं के हल के लिए सन् 1979 में एक पंचायत भी बनाई और वचन फरमाए, ‘‘भाई इस नगर निवासियों की सभी समस्याओं का हल आपने ही करना है, कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।’’ पूजनीय परम पिताजी ने अपनी पावन हजूरी में अनेक मकान बनवा कर दिए। पूजनीय परम पिता जी सारा-सारा दिन सेवांदारों के पास खड़े होकर सेवा करवाते। यहां की साध-संगत अपने प्यारे मुर्शिद का जन्म दिन बहुत ही श्रद्धा व धूमधाम से मनाती है और ब्लॉक कल्याण नगर की साध-संगत हमेशा मानवता भलाई के कार्यों में आगे रहती है।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 22:09:10 +0530</pubDate>
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