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                <title>Religious Congregation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Religious Congregation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सत्संग में पैदा होती है प्रभु-भक्ति की भावना</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम सब सुखों की खान है जिस इन्सान को परमात्मा का पाक-पवित्र नाम मिल जाता है वह भाग्यशाली है एवं बाद में आगे जो इसका सुमिरन करता है वह अति भाग्यशाली बन जाता है। दोनों जहान की खुशियों से लबालब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम सब सुखों की खान है जिस इन्सान को परमात्मा का पाक-पवित्र नाम मिल जाता है वह भाग्यशाली है एवं बाद में आगे जो इसका सुमिरन करता है वह अति भाग्यशाली बन जाता है। दोनों जहान की खुशियों से लबालब भर जाता है। एकमात्र मालिक का नाम ही हर तरह के दु:ख-दर्द को खत्म कर सकता है। नाम का सुमिरन ही इन्सान को भयानक बीमारियों, दु:ख-तकलीफों से बचा सकता है लेकिन नाम का सुमिरन भाग्यशाली, नसीबों वाले इन्सान ही कर पाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिनके अंदर उस प्रभु-परमात्मा को पाने की तड़प है, उसके प्यार-मोहब्बत की चाह है वही लगातार परमपिता परमात्मा के नाम का सुमिरन करते हैं। जिनके अंदर तड़प-लगन नहीं एवं दिल-दिमाग का शीशा साफ नहीं उनके अंदर मालिक की भक्ति-इबादत, दया-मेहर का संचार नहीं हो सकता लेकिन हर इन्सान परमात्मा की भक्ति करने का हकदार है। मनुष्य शरीर में ही परमात्मा ने अधिकार दिया है कि वह नाम का सुमिरन करके आवागमन से आजाद हो सकता है और इस मृत्युलोक में परमपिता परमात्मा को देख सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तभी संभव है अगर इन्सान हिम्मत करे। अगर इन्सान हिम्मत ही न करे, यह कोशिश ही न करे कि मैं मालिक के नाम का सुमिरन करूंगा, वचनों पर अमल करूंगा तो मालिक दया-मेहर कहां से हासिल करेगा। सत्संग में पैदा होती है। आप जी फरमाते हैं कि वह मालिक दया-मेहर, रहमत करता था, करता है और हमेशा करता रहेगा लेकिन जो लोग सुमिरन, भक्ति-इबादत करते हैं वही लोग मालिक की दया-मेहर, रहमत को हासिल कर पाते हैं। अगर आप मालिक का नाम जपना चाहते हैं तो आप सत्संग सुनें। तभी आपको प्रेरणा मिलेगी, आपके अंदर मालिक के नाम के प्रति लगन लगेगी। दुनिया में रहते हुए दुनियावी काम-धंधे आपको उलझाए रखेंगे और आप उनमें फंसकर उन्हीं काम-धंधों के होकर रह जाओगे। इसलिए अगर आप रूहानी सत्संग सुनते हो तो वहां पर ही आपको परमपिता परमात्मा की बात सुनने को मिलेगी और इन्सान धीरे-धीरे मालिक की दया-मेहर के काबिल बनता चला जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान को चाहिए कि जहां तक संभव हो रूहानी सत्संग में आएं, परमपिता परमात्मा की कथा-कहानी सुनें। तभी उसके दिलो-दिमाग में मालिक के प्रति भावना, लगन पैदा होगी। बिना तड़प के किए गए सुमिरन का वो फल नहीं मिलता जो मिलना चाहिए। इसलिए वास्तव में अगर आप मालिक की दया-मेहर के चाह्वान हैं, उसकी दया-दृष्टि के काबिल बनना चाहते हैं तो आप अपने अंदर परमपिता परमात्मा की भावना पैदा करो, सेवा-सुमिरन करो तभी मालिक के दर्श-दीदार के काबिल बन सकते हैंं। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर दुनियावी काम-धंधे के प्रति तड़प अपने आप पैदा हो जाती है और वह पैसे के लिए इधर-उधर दौड़ा फिरता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह दुनियावी मोह-ममता की तड़प भी अपने आप लग जाती है। लोग मोह-ममता में फंसकर एक-दूसरे के लिए पागल हुए फिरते हैं। फिर अच्छा-बुरा उन्हें नजर नहीं आता। इस तरह यह तड़प, लगन अपने आप इन्सान के अंदर पैदा हो जाती है परंतु प्रभु-परमात्मा की तड़प अपने आप इन्सान के अंदर नहीं लगती। अगर कोई मालिक का प्यारा हो तो बात अलग है, अन्यथा सत्संग में ही वो तड़प, लगन लग सकती है। इसलिए आप सत्संग सुनो, राम-नाम की चर्चा पर अमल करो तो आपके अंदर मालिक के प्रति तड़प पैदा होगी और आप एक दिन मालिक के दर्श-दीदार, मालिक की दया-मेहर के काबिल बन जाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-helps-to-do-meditation-saint-dr-msg/article-3527</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Nov 2017 06:34:52 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मन से लड़ो और सेवा-सुमिरन करो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान ने सब शरीरों में से मनुष्य को बिल्कुल अलग बनाया है। इसके अंदर जितना दिमाग, सोचने समझने की शक्ति है किसी और प्राणी में नहीं। आत्मा को मनुष्य जन्म भगवान को पाने के लिए, आत्मा को आवागमन, जन्म-मरण से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/fight-with-negative-thoughts-do-meditation/article-3328"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/guruji4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)। </strong>पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान ने सब शरीरों में से मनुष्य को बिल्कुल अलग बनाया है। इसके अंदर जितना दिमाग, सोचने समझने की शक्ति है किसी और प्राणी में नहीं। आत्मा को मनुष्य जन्म भगवान को पाने के लिए, आत्मा को आवागमन, जन्म-मरण से आजाद करवाने के लिए मिला। मनुष्य शरीर में अगर जीवात्मा प्रभु-परमात्मा का नाम ले, ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु की भक्ति-इबादत करे तो बहुत से भयानक कर्म कट जाते हैं। इन्सान सफलता की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सफलता इन्सान के कदम चूमती है, लेकिन यह तभी संभव है अगर इन्सान सत्संग में आकर अमल करे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को चुगली, निंदा, टांग खिंचाई, किसी का बुरा सोचने, करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। काम वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया में पड़कर मनुष्य जन्म को तबाह नहीं करना चाहिए बल्कि इन बुराइयों से अपने-आपको बचाना चाहिए। जैसे आप गाड़ी चला रहे हैं व आगे एक तरफ दलदल हो एवं दूसरी तरफ खड्डे हों तो आप बड़ा आराम से,ध्यान से गाड़ी चलाते हैं कि गाड़ी न तो गड्डे में जाए और न ही दलदल में फंसे।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर ध्यान से चलाएंगे तो आप सही-सलामत निकल जाएंगे। अगर लापरवाही से, इधर-उधर की बातें करते जाएंगे तो गाड़ी या तो गड्डे में गिर जाएगी या दलदल में धंस जाएगी। तो उसी तरह मन और माया काल ने बनाए हैं और जिन्दगी रूपी गाड़ी पर अगर मन सवार हैं तो इन्सान इनमें गिर जाएगा। काम वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया रूपी दलदल में आपकी आत्मा फंस जाएगी। अगर आप ध्यान से यानि सुमिरन, भक्ति-इबादत करेंगे, गुरु, पीर-फकीर जैसी ट्रेनिंग देता है वैसे ड्राइवर बनकर अगर आप जीवन जीएंगे</p>
<p style="text-align:justify;">तो आप न तो दलदल में फंसेंगे और न ही कभी खड्डों में गाड़ी अटकेगी। क्योंकि पीर-फकीर इन रास्तों के माहिर होते हैं।पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि फकीरों के वचनों पर चलना बड़ा मुश्किल भी है क्योंकि मन बड़े रोड़े अटकाता है। ऐसे-ऐसे लोग जो भक्ति में लगते हैं, बड़े भक्त लगते थे, लेकिन जब मन दांव चलाता है तो भक्ति धरी-धराई रह जाती है। क्योंकि निंदा-चुगली, व्यर्थ, फिजूल की बातें इन्सान को कहीं का नहीं छोड़ती। ऐसा जो करते हैं वो कभी भी रूहानियत में मालिक, सतगुरु की दया-मेहर के काबिल नहीं बन पाते। तो मन से लड़ो और सेवा-सुमिरन करो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/fight-with-negative-thoughts-do-meditation/article-3328</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Sep 2017 11:17:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कभी भी नहीं मिला डेरा सच्चा सौदा जितना प्यार: नूरां सिस्टर्स</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa, Jagdeep Sidhu: ‘जितना प्यार डेरा सच्चा सौदा में आकर मिला है, वह शायद ही पहले कभी मिला हो। अधिकतर लाइव शो दौरान लोग हुल्लड़बाजी करते हैं, लेकिन डेरा सच्चा सौदा में लाखों की तादाद में साध-संगत ने जिस प्रकार से शांत होकर कार्यक्रम का आनंद लिया, वो वास्तव में हैरानीजनक है। उपरोक्त शब्द डेरा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/nooran-sisters-special-interview-by-sach-kahoon/article-3121"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/nooran-sister.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa, Jagdeep Sidhu:</strong> ‘जितना प्यार डेरा सच्चा सौदा में आकर मिला है, वह शायद ही पहले कभी मिला हो। अधिकतर लाइव शो दौरान लोग हुल्लड़बाजी करते हैं, लेकिन डेरा सच्चा सौदा में लाखों की तादाद में साध-संगत ने जिस प्रकार से शांत होकर कार्यक्रम का आनंद लिया, वो वास्तव में हैरानीजनक है। उपरोक्त शब्द डेरा सच्चा सौदा में म्यूजिकल नाइट में अपनी प्रस्तुति देने पहुंची सूफी गायक नूरां सिस्टर्स (ज्योति नूरां, सुल्ताना नूरां) ने ‘सच कहूँ’ से बातचीत दौरान कहे।</p>
<h3 style="text-align:center;">पूज्य गुरु जी के बारे में बहुत सुना था, लेकिन आज अपनी आंखों से देखकर मन को सुकून मिला है</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी के बारे में बहुत सुना था, लेकिन आज अपनी आंखों से देखकर मन को सुकून मिला है। पूज्य गुरु जी से आशीर्वाद प्राप्त कर ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे जिंदगी में बहुत कुछ हासिल कर लिया हो।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सवाल के जवाब में नूरां सिस्टर्स ने कहा कि मौजूदा समय में गायकों को हथियारों, जट्टवाद, अश्लीलता इत्यादि को त्यागकर परिवार में बैठकर सुनने वाले गाने गाने चाहिए, ताकि आपका परिवार व समाज आपकी गायकी पर गर्व महसूस करे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए नूरां सिस्टर्स ने बताया कि बहुत जल्द उनका ‘ड्रीम प्रॉजैक्ट’ भी आ रहा है। कैरियर की सबसे मीठी याद के संबंध में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बॉलीवुड अदाकार शाहरुख खान की फिल्म में गाए गाने ‘जीवे सोहणया जी’ को वह अपने जीवन का सबसे खुशनुमा पल माकभी भी नहीं मिला डेरा सच्चा सौदा जितना प्यार: नूरां सिस्टर्सनती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि गायकी में अपने पिता गुलशन मीर को अपना आदर्श मानने वाली नूरां सिस्टर्स को अब तक तीन अवार्ड ‘गीमा अवार्ड्स’, ‘मिर्ची म्यूजिकल अवार्ड’, ‘स्क्रीन अवार्ड्स’ मिल चुके हैं। 1970 के दशक की मशहूर गायक स्वर्णा नूरां की पोतियां व एमटीवी के ‘साउंड ट्रिपन’ से प्रसिद्धि प्राप्त करने वाली नूरां सिस्टर्स अब तक पंजाबी व बॉलीवुड की कई फिल्मों के लिए सूफी गाने गा चुकी हैं व और भी गा रही हैं।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2017 01:25:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>स्टेज पर Dr. MSG की धमाकेदार एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[एमएसजी 9बर9 ग्रैंड इवेंट्स | Drama Night सिरसा (Sachkahoon News): 50वें गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन पर आयोजित ‘एमएसजी भंडारे’ का पहला दिन लाजवाब रहा। प्रथम दिन आयोजित ‘ड्रामा नाईट’ (Drama Night) के आरंभ में डॉ. एमएसजी ने जब स्टेज पर एंट्री की, तो हर कोई देखता ही रह गया। रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाते हुए पंडाल में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/msg-9bar9-religious-congregation-saint-dr-msg/article-3066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/7899-orginal.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">एमएसजी 9बर9 ग्रैंड इवेंट्स | Drama Night</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिरसा (Sachkahoon News):</strong> 50वें गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन पर आयोजित ‘एमएसजी भंडारे’ का पहला दिन लाजवाब रहा। प्रथम दिन आयोजित ‘ड्रामा नाईट’ (Drama Night) के आरंभ में डॉ. एमएसजी ने जब स्टेज पर एंट्री की, तो हर कोई देखता ही रह गया। रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाते हुए पंडाल में बनाए गए भव्य मनमोहक स्टेज पर फिल्मों में निभाए विभिन्न किरदारों के छह कट आऊट्स के बीच खडे डॉ. एमएसजी को देख कर हर कोई आवाक रह गया और हर कोई पूज्य गुरु जी को देखता ही रह गया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">कोरियोग्राफी ने किया कायल | Drama Night</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एक साथ सात-सात डॉ. एमएसजी को देखकर हर कोई हैरान रह गया।</li>
<li style="text-align:justify;">कटआऊट्स के बीचों बीच जिन्स, टी-शर्ट तथा सिर पर टोपी पहने डॉ. एमएसजी का अंदाज श्रद्धालुआें का दिल जीत रहा था।</li>
<li style="text-align:justify;">हर कोई नाच-गाकर, तालियों की गड़गड़ाहट व हूटिंग से डॉ. एमएसजी का स्वागत कर रहा था।</li>
<li style="text-align:justify;">हर किसी ने अपने-अपने अंदाज में डॉ. एमएसजी को बर्थ डे की शुभकामनाएं दी।</li>
</ul>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 00:38:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालिक का नाम सुखों की खान: डॉ. एमएसजी</title>
                                    <description><![CDATA[लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत | Gods Word सरसा (आनंद भार्गव)। मालिक का नाम सुखों की खान है, (Gods Word) लेकिन वो खान ढूंढना बहुत जरूरी है। कहीं भी पता चल जाए कि इस दुनियां में सोने, चांदी, हीरे जवाहरात की खान है तो लोग दिन रात उन्हें ढूंढने में लगे रहते हैं, दिन रात […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-give-us-happiness-saint-dr-msg/article-2732"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gurmeet-ram-rahim-11.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत | Gods Word</h1>
<p><strong>सरसा (आनंद भार्गव)।</strong> मालिक का नाम सुखों की खान है, <strong>(Gods Word)</strong> लेकिन वो खान ढूंढना बहुत जरूरी है। कहीं भी पता चल जाए कि इस दुनियां में सोने, चांदी, हीरे जवाहरात की खान है तो लोग दिन रात उन्हें ढूंढने में लगे रहते हैं, दिन रात मिट्टी छानते रहते हैं। आपके अंदर ऐसी खान है, जिसको हासिल करने से आपके गम, चिंता दूर हो जाएंगी। परमानंद मिलेगा और चेहरे पर बेइंतहा खुशियां छा जाएंगी। उक्त वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम में आयोजित रूहानी सत्संग के दौरान फरमाए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">11,560 लोगों ने लिया गुरुमंत्र | Gods Word</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने 11,560 लोगों को नाम, गुरुमंत्र दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">हजारों लोगों ने जाम ए इन्सां ग्रहण कर बुराइयां त्यागने व मानवता भलाई कार्य करने का संकल्प लिया।</li>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि इंसान जरूर कोशिश करेगा कि क्यों ना ऐसी खान को हासिल किया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">हैरानी की बात है कि इसको पाने के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ता, कोई दान चढ़ावा नहीं देना पड़ता।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">जट्टू इंजीनियर की डीवीडी लांच | Gods Word</h1>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि वो खान है हरी रस, आबोहयात की खान, जो सब में मौजूद है। राम नाम की खान को पाने के लिए सुमिरन करना पड़ता है। भक्ति में समय लगाना पड़ता है तभी वो खान नसीब होती है। एक बार वो हरी रस मिल गया तो सारी जिंदगी आप बेगमपुर के बादशाह बन जाओगे। सुख- शांति- खुशियों से मालामाल हो जाओगे। इसको पाने के लिए कोई जंगल पहाड़ों में नहीं जाना पड़ता और ना ही घर बार छोड़ना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए आपके हाथ कार यानि कार्य की तरफ हों व ध्यान यार यानि प्रभु परमात्मा की तरफ हो। हाथों पैरों से कर्मयोगी बनो और जिव्हा-ख्यालों से ज्ञानयोगी बनो। पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन व माया आपके श्वासों को लूट रहे हैं। आप इनमें डूब कर खुश होते हैं। आपका हर श्वास त्रिलोकी से भी बेशकीमती है, इनमें जितने लगा दिए बर्बाद हो गए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">यारी करनी है तो परमात्मा से करो | Gods Word</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि संत कहते हैं कि संग करने से पहले हजार बार सोचो।</li>
<li style="text-align:justify;">संग सोहबत इंसान को ले डूबती है।</li>
<li style="text-align:justify;">अपनी कमियां ढूंढों, बुरा संग ना करो।</li>
<li style="text-align:justify;">यारी करनी है तो उस परमपिता परमात्मा, अल्लाह, राम से करो।</li>
<li style="text-align:justify;">उसे अपना सर्वश्रेष्ठ, बेस्ट फ्रेंड बना लो।</li>
<li style="text-align:justify;">इस दौर में अगर अंदर का खजाना हासिल करना चाहते हो तो अच्छा संग करो और सत्संग जरूर सुनो।</li>
<li style="text-align:justify;">सत्संग सुनकर मानते हो तो फायदा ज्यादा है,</li>
<li style="text-align:justify;">आप अंदर के खजाने की तरफ बढ़ते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि सबसे सच्चा दोस्त राम सतगुरु है जो आपके बडे से बडे गुनाह को कब चुटकी में माफ कर देता है</li>
<li style="text-align:justify;">आपको पता ही नहीं लगता।</li>
<li style="text-align:justify;">आपकी भक्ति व मानवता भलाई के कार्यों को देखते वो पहाड़ जैसे कर्मों को चकनाचूर कर देता है।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">बाक्सर मनोज कुमार को दी बधाई | Gods Word</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भारतीय बाक्सर मनोज कुमार द्वारा चेक गणराज्य में 48वीं ग्रां प्री उस्तीनाद लाबेम चैंपियनशिप मेें स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी है।</li>
<li style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी ने ट्विट कर बधाई देते हुए बाक्सर मनोज कुमार को शुभकामनाएं भी दी।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">4 जरूरतमंदों को दिए चैक | Gods Word</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरुजी ने शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के भलाई फंड से 4 जरूरतमंदों को सौंपे। पूज्य गुरुजी ने गुरभगत सिंह इन्सां निवासी मुक्तसर पंजाब को उसके पिता के इलाज के लिए 1 लाख, जोगिंद्र इन्सां जिला पानीपत को उसकी पत्नी के इलाज के लिए 75 हजार, बग्गा सिंह इन्सां जिला पटियाला को बेटे के इलाज के लिए 1 लाख तथा कुलविंद्र कौर इन्सां जिला फरीदकोट को पति के इलाज के लिए 40 हजार रुपए के चैक सौंपे।</p>
<h1 style="text-align:justify;">7 दिन चलेगा पावन भंडारे का कार्यक्रम | Gods Word</h1>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के दौरान पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि अगस्त माह का पावन भंडारा 7 दिनों तक चलेगा। 10 से 16 अगस्त तक चलने वाले पावन भंडारे में सातों रात भव्य रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भंडारे में आकर्षण का केंद्र मेला टाईप वातावरण होगा, जिसमें अलग अलग राज्यों की दुकानें होंगी। सत्संग के दौरान रोजाना गुरुमंत्र दिया जाएगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2017 23:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा-सुमिरन करने से कटते हैं ‘संचित कर्म’</title>
                                    <description><![CDATA[असफलता का कारण संचित कर्म | Religious Congregation सरसा। इंसान इस दुनिया में अपने कर्म-चक्कर में उलझा हुआ है। ऐसे भयानक कर्म होते हैं, इन्सान को उनका पता भी नहीं होता। चौरासी लाख जूनियों में जीवात्मा घूमते हुए आखिर में मनुष्य शरीर में आई है और जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म इस शरीर में भोगने पड़ते हैं। उक्त […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:left;">असफलता का कारण संचित कर्म | Religious Congregation</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> इंसान इस दुनिया में अपने कर्म-चक्कर में उलझा हुआ है। ऐसे भयानक कर्म होते हैं, इन्सान को उनका पता भी नहीं होता। चौरासी लाख जूनियों में जीवात्मा घूमते हुए आखिर में मनुष्य शरीर में आई है और जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म इस शरीर में भोगने पड़ते हैं। उक्त वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी ने शाह मस्ताना जी धाम में शुक्रवार को प्रात:कालीन रूहानी मजलिस <strong>(Religious Congregation)</strong> के दौरान फरमाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कई बार इंसान कहता है कि उसने कोई पाप कर्म नहीं किया, गलत कार्य नहीं किया, तो पता नहीं क्यों दु:ख आते हैं? क्यों घाटा पड़ता है? क्यों असफलता मिलती है? तो इसका कारण है ‘संचित कर्म’।</p>
<p style="text-align:justify;">मतलब कि पिछले जन्मों के पापकर्म इंसान को भोगने पड़ते हैं। आपने इस जन्म में कोई बुरा कर्म नहीं किया, लेकिन उन संचित कर्मों को खत्म करने के लिए आपने सुमिरन कितना किया? क्योंकि बिना सुमिरन वो कर्म कटते नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तक आप सुमिरन नहीं करेंगे, भक्ति नहीं करेंगे, तब तक आपके पापकर्म नहीं कटेंगे। इसलिए जब आप उन कर्मों का फल भोगते हैं, तो दु:ख-परेशानियां, असफलता आपको मिलती रहती हैं और तब आप संत, पीर-फकीरों, भगवान को दोष देते हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">सेवा-सुमिरन करोगे, तभी कर्म कटेंगे | Religious Congregation</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कई बार आप सेवा करते हैं, सुमिरन करते हैं, लेकिन आपकी औलाद, या आपके परिवार में कोई ऐसा होता है, जिसकी वजह से आप दु:खी-परेशान होते रहते हो कि मैं तो सेवा-सुमिरन करने वाला था!</p>
<p style="text-align:justify;">फिर मेरे बच्चों में ऐसा क्यों हुआ! …तो, कुछ हद तक आपका किया गया सेवा-सुमिरन आपकी पीढ़ियों को दु:ख-दर्द, परेशानियों से बचाता है, लेकिन बेहद भारी कर्म जिसे भोगने पड़ रहे हैं, यदि वह खुद सेवा-सुमिरन करेगा, तभी उसके कर्म कटेंगे। क्योंकि हर कोई अपने कर्मों का मालिक है। इसलिए आप दोष भगवान को, सतगुरु को मत दो! दोष उसका है, जो सेवा-सुमिरन नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि कर्म भोगने वाले के कर्माें का लेखा-जोखा जब होता है, तो कई कर्म इतने भयानक होते हैं कि चाहे सारा परिवार सुमिरन करता रहे, तो पांच-सात प्रतिशत असर होता है, लेकिन सौ प्रतिशत असर तभी होता है, जब वह खुद सेवा-सुमिरन करे।</p>
<p style="text-align:justify;">यही बात आप समझना नहीं चाहते। कई बार ऐसा होता है कि लोग सत्संग छोड़ देते हैं! राम का नाम छोड़ देते हैं! भक्ति करना छोड़ देते हैं, यह सोचकर कि हम तो भगवान का नाम लेने वाले थे! सत्संगी थे! तो फिर हमारे परिवार के साथ ऐसा क्यों हुआ? तो इस ‘क्यों’ का जवाब आपको बताया कि अपने कर्माें का बोझ हर किसी को उठाना पड़ता है। संतों के वचन जो मान लेता है, तो संत भगवान से प्रार्थना करके उनके कर्माें का बोझ हल्का करवा देते हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">डॉ. एमएसजी ने दी शिवरात्रि की बधाई | Religious Congregation</h1>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को देशभर में मनाए शिवरात्रि पर्व की पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर देशवासियों को बधाई देते हुए शांति की कामना की। पूज्य गुरू जी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे अच्छे कर्म व सद्भाव से इस त्यौहार को मनाएं और इससे आपको सफलता जरुर मिलेगी।</p>
<h1 style="text-align:justify;"> जो संतों की निंदा करता है, उसे दोनों जहान में दु:ख भोगने पड़ते हैं</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">संतों के वचन न मानना, सेवा-सुमिरन नहीं करना, मनमते चलना, वचनों में काट करना…</li>
<li style="text-align:justify;">यह सब करके दु:ख का कारण आप अपने आप बना रहे हो।</li>
<li style="text-align:justify;">फिर संंतों को दोष क्यों देते हो? इंसान की फितरत है कि खुद को दोष नहीं देता, परिवार को दे नहीं सकता,</li>
<li style="text-align:justify;">आस-पड़ोस के लोग झेलेंगे नहीं और संत, राम, भगवान होते हैं, जिसको जो मर्जी दोष दे दो!</li>
<li style="text-align:justify;">उसने कौन-सा कुछ गलत कहना है! पर आप भूल जाते हैं कि निंदा तो इंसान की ही बुरी होती है, मां-बाप की निंदा बुरी होती है,</li>
<li style="text-align:justify;">संत, पीर-फकीर की निंदा के बारे में पवित्र ग्रंथों में लिखा है कि जो संतों की निंदा करता है, उसे दोनों जहान में दु:ख भोगने पड़ते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">आप कहीं भी जाओगे कर्माें का लेखा-जोखा आपके साथ ही निपटेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">कर्मों से छुटकारा पाने का रास्ता राम-नाम व सत्संग के सिवाए दूसरा नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">सेवा-सुमिरन किया करो, ताकि आपके संचित कर्म कटते जाएं और आपकी जिंदगी में बहारें चारों तरफ से छा जाएं।</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-friday-saint-dr-msg/article-2527</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2017 02:18:16 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्संग में आने से बनते हैं भाग्यशाली : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[22780 लोगों ने गुरुमंत्र की अनमोल दात प्राप्त की सरसा। सत्संग में आना बहुत बड़ी बात है। भाग्यशाली होते हैं वे जो सत्संग में चलकर आते हैं। वचनों पर अमल कमाकर और भाग्यशाली बन जाते हैं। उक्त वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंंह जी इन्सां ने रविवार को शाह सतनाम जी धाम में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-held-in-dera-sacha-sauda-on-last-sunday/article-2371"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/guru-ji.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">22780 लोगों ने गुरुमंत्र की अनमोल दात प्राप्त की</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> सत्संग में आना बहुत बड़ी बात है। भाग्यशाली होते हैं वे जो सत्संग में चलकर आते हैं। वचनों पर अमल कमाकर और भाग्यशाली बन जाते हैं। उक्त वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंंह जी इन्सां ने रविवार को शाह सतनाम जी धाम में आयोजित विशाल रूहानी सत्संग के दौरान फरमाए। इस दौरान 22780 लोगों ने गुरुमंत्र की अनमोल दात प्राप्त कर सामाजिक बुराइयों को त्यागने का प्रण लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आज कलियुग का दौर है, जिसमें इन्सान मनमते ज्यादा चलता है। काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार, मन और माया इन सब ने इन्सान को अपना गुलाम बना रखा है। आज इन्सान विषय विकारों में समय लगाता है। ठग्गी, बेईमानी, भ्रष्टाचार में समय लगाता है। झूठ बोलना उसमें समय लगाता है, चुगलियां, निंदा, गप मारना यह आजकल आम बात हो गई है। इस कलियुग में सबसे मुश्किल है राम के नाम में बैठना। राम के नाम का जाप करना। दस मिनट भी अगर प्रभु का नाम लेना पड़ जाए तो ऐसे लगता है कि जैसे बहुत सारा बोझ उठा लिया हो, ऐसे लगता है जैसे बहुत बड़ी कुर्बानी दे दी हो।</p>
<h1 style="text-align:justify;">राम-नाम की बात अलुनीसिल की तरह लगती है</h1>
<p style="text-align:justify;">दुनिया की तमाम बातें मसालेदार लगती हैं, लेकिन राम-नाम की बात अलुनीसिल की तरह लगती है कि यह तो बकबका समान है, लेकिन आप नहीं जानते कई बकबकी चीजें सेहत के लिए बहुत फायदे मंद होती है। उदाहरण:- अवोकाड़ो एक फल आया है बड़ा ही बकबका है लेकिन कहते हैं कि वह फल सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुनेन बड़ी कड़वी होती है पर सेहत के लिए बहुत ही अच्छी होती है। नीम की दातुन बड़ी कड़वी होती है लेकिन दातों के साथ मुंह की बहुत सी बीमारियों से निजात दिला देती है। नीम, करेला, जामुन, मैथी यह ऐसी चीजें है, जिसे कोई खाना पंसद नहीं करेगा लेकिन क्या आप जानते है कि यह चीजें शरीर सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है और पुरातन में लोग इन्हें खाया करते थे। गाँव में बड़ा अच्छा सा फल होता है नीम की निमौली। नीम के बीज लगते हैं, पहले वह हरे रंग की होती है और फिर बाद में पीला रंग की हो जाती है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">चीनी व नमक सबसे घातक है</h1>
<p style="text-align:justify;">फिर हल्का सा संतरा रंग हो जाता है तो जब निमौली का रंग जब पीला या संतरा होता है, तब वह खा ली या चुस ली जाए तो वह बहुत ही मीठी होती है और बड़ी ही गुणकारी होती है तो कहने का मतलब हर मीठी चीज फायदेमंद नहीं होती और हर कड़वी चीज नुक्सानदायक नहीं होती। मीठे में चीनी है और अब डॉक्टर मानने लगे हैं कि चीनी सबसे घातक है, नमक है वह भी सबसे घातक है और आप नमक मिर्च वाली बातें ही पंसद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब खाने-पीने में नमक मिर्च घातक है तो जो बातें भी नमक मिर्च वाली होती हैं, वह भी उतनी ही घातक है। चुगली करते हो, एक तरह से आप दूसरों की मैल धोते हो, एक तरह से आप दूसरों की बुराईयां अपने आप में प्रवेश करने का मौका देते हो, इसलिए निंदा चुगली कभी भी नहीं करनी चाहिए।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-held-in-dera-sacha-sauda-on-last-sunday/article-2371</link>
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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2017 01:05:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>‘इन्सान, इन्सान बने, ऐसी शिक्षा दी जाए’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम में आयोजित शुक्रवार सायंकालीन रूहानी मजलिस के दौरान फरमाया कि इंसान बेचैन है, गमगीन है, परेशान है, फैसला नहीं ले सकता, डबल मांईड रहता है, नेगिटिव ज्यादा सोचता है, खान-पान में जहर ज्यादा है और घर-परिवार की परेशानियां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/give-humanity-education-to-the-people/article-2327"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/saint-dr-msg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम में आयोजित शुक्रवार सायंकालीन रूहानी मजलिस के दौरान फरमाया कि इंसान बेचैन है, गमगीन है, परेशान है, फैसला नहीं ले सकता, डबल मांईड रहता है, नेगिटिव ज्यादा सोचता है, खान-पान में जहर ज्यादा है और घर-परिवार की परेशानियां बहुत ज्यादा हैं।</p>
<p>अगर ये सब न होता तो कलयुग कैसे होता? इसी का नाम तो कलयुग है। दरअसल ज्यों-ज्यों इंसान पढ़ाई कर रहा है, दुनियावी शिक्षा, तालीम हासिल कर रहा है, त्यों-त्यों नेगेटिविटी की दिशा और दशा बदल जाती है। लेकिन ये नहीं है कि नेगेटिविटी बदल जाए, या इंसान के अंदर की गलत सोच ही बदल जाए, क्योंकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली, पढ़ाई-लिखाई में ऐसा कुछ नहीं है।</p>
<p>आजकल वो पढ़ाया जाता है, जो पै्रक्टिकली कम इस्तेमाल में आता है। हमारे गुरुकुल होते थे, उनमें वो पढ़ाया जाता था, जिनमें पै्रक्टिकल किया जाता था। आजकल प्रैक्टिकल कुछ और होते हैं, पढ़ाया कुछ और जाता है। दिमाग पर बोझ ज्यादा है और जो पढ़ाई से सफलता की दर कम है।</p>
<p>जबकि होना ये चाहिए कि बच्चा जिस फील्ड में जाना चाहता है, उस फील्ड को चुने, अच्छी लैंग्वेज का ज्ञान ले। उसके बाद वो जीवन में लक्ष्य निर्धारित करके उसकी तरफ बढ़ता जाए, तो देश और समाज सफलता की चरम सीमा पर पहुंच सकते हैं।<br />
आपजी ने फरमाया कि कईयों को तो कॉलेज में जाते ही +2 में क्या पढ़ा था, यही याद नहीं रहता। वहीं कॉलेज पढ़ गए, तो इससे पहले की पढ़ाई याद नहीं रहती। अब सोचो, क्या उसकी जरूरत ही नहीं! जब उसकी जरूरत नहीं है, तो पढ़ाया क्यों? वास्तव में देखा जाए तो जिसकी जरूरत है, उसे बचपन से ही पढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर इंसान सफलता के झंडे गाड़ सकता है।</p>
<p>पुरातन काल में सार्इंस ऐसी थी कि तब साऊंडलेस जहाज होते थे। जब चाहा बरसात करवा ली जाती थी। परमाणु से लैस जो बेहद घातक शस्त्र होते थे, लेकिन उनको रोकने का तरीका भी उन्हें आता था। उस वक्त सार्इंस इसलिए तरक्की करती थी, क्योंकि जिसके पास जो टैलेंट, हुनर होता था, एक आयु सीमा तक उसे वो पढ़ाया जाता था। ताकि बच्चे के हुनर में निखार आ जाए और फिर एक सब्जेक्ट चुनकर उस पर पूरा ध्यान दिया जाता था और पूरे जीवन में काम आने वाले सब्जेक्ट शुरु से ही पढ़ा दिए जाते थे।<br />
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि एक ही गुरु राजा भी बनाता था, दुकानदार भी बनाता था, उसी से पढ़े हुए बिजनेसमैन भी बनते थे, मंत्री भी बनते थे। एक गुरु में इतने टैलेंट होते थे, तभी उसके शिष्यों में भी अनेक टैलेंट होते थे। अब एक टीचर एक ही सब्जेक्ट को बोझ समझ कर पढ़ा रहा है, तो बच्चे भी बोझ ही समझेंगे! इस तरह बच्चे आज के दौर में असली पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं।</p>
<h1>हमारे धर्माें में पवित्र वेदों का पाठ कराया जाता था</h1>
<p>पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमारे धर्माें में पवित्र वेदों का पाठ कराया जाता था, ताकि इंसान, इंसान जरूर बने। राम जिसके अरबों नाम पड़ गए, उससे प्यार करना सिखाया जाता था, ताकि इंसान का आत्मबल बुलंद रहे और वो दुनिया की तमाम परेशानियों, दु:ख-तकलीफों को दूर कर सके। आज वो सब्जेक्ट ही हट गया है। आजकल तो बच्चा गर्भ में होता है, मां-बाप पहले ही सोचने लग जाते हैं कि आॅफिसर बनेगा! बिजनेसमैन बनेगा! यानि नोटों की मशीन बनाना पहले शुरु कर देते हैं! वो बच्चा इंसान बनेगा या नहीं, इस पर ध्यान नहीं देते। पहले तो ये सोचा जाता था कि ये इंसान बनेगा, बाकि बाद में गुरुकुल में जो गुरु बनाएंगे, वही बनेगा।</p>
<h1>हमारी शिक्षा प्रणाली में पवित्र धर्मोें की पढ़ाई को शामिल किया जाए</h1>
<p style="text-align:justify;">पहले जो गुरुकुल के गुरु होते थे, वो टैलेंट को पहचानते थे। उस टैलेंट के अनुसार बच्चे को शिक्षा दी जाती थी और वो बच्चा पूरे देश में नाम रोशन करता था। आज तो कोई प्रतिभा नहीं है, बस जो सब्जेक्ट हैं, उसी को रटते रहो। इसलिए वो बात नहीं बन पा रही, जो पहले की संस्कृति में हुआ करती थी। इसलिए बहुत जरूरी है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में पवित्र धर्मोें की पढ़ाई को शामिल किया जाए, ताकि सबसे पहले इंसान, इंसान बने, शैतान न बने।</p>
<h1 style="text-align:justify;">कैसे कमाई की जाए?</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जो लोग ठग्गी मारते हैं, क्या वो इंसान हैं? टेबलेट से इंसान ठीक हो सकता है, उसकी जगह आॅपरेशन करते हैं, क्या वो इंसान हैं? गाड़ी में पचास-साठ रूपए का डीजल पेट्रोल जलता है और भोले-भालों से हजार रूपया किराया बताकर लूटते हैं, क्या वो इंसान हैं? क्योंकि इंसानियत तो है ही नहीं, दांव लगते ही लूटते हैं! इसकी वजह है इंसानियत का पाठ नहीं जानना। आज के बच्चों से पूछ लो कि इंसानियत क्या है? किसी ने सत्संग सुना है, तो वे बता सकते हैं। नहीं सुना, तो नहीं बता पाएंगे। क्योंकि पढ़ाई में तो कहीं आता नहीं कि इंसानियत क्या होती है? अरे, कम से कम इंसान क्या है, उसकी परिभाषा तो इंसान को सिखाओ! दूसरों के दु:ख-दर्द दूर करना, दया की भावना रखना, दूसरों की मदद करना, यही सच्ची इंसानियत है। और यही आज के बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">आजकल तो पढ़ाया जाता है कि कैसे कमाई की जाए? बहुत मास्टर-उस्ताद ऐसे होते हैं, जो दिखने में नहीं आते, लेकिन लूटना कैसे है, ये शिक्षा देते हैं।</p>
<p>हर क्षेत्र में रिश्वत लेने वाले भी हैं और न लेने वाले भी हैं, कोई भी क्षेत्र इनसे अछूता नहीं है। इसलिए भाई, जरूरी है कि ईश्वर का नाम लो और पढ़ाई में ईश्वर के नाम को शामिल किया जाए, ताकि इंसान, इंसान बने और पूरी प्रकृति का भला हो और इसांन का भला हो और घर में खुशियां आएं। अगर ऐसा होगा तो पूरे समाज में प्यार की गंगा फिर से बहने लगेगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 01:34:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘नेगेटिव कभी मत सोचो’</title>
                                    <description><![CDATA[ आप सत्संग सुनते हो तो कर्म भी आपके कटेंगे सरसा (सच कहूँ न्यूज)। सत्संग में जब इंसान चल कर आता है। तो दिलों-दिमाग में जो विचार होते हैं, भावनाएं, शंकाएं, सवाल होते हैं उनका जवाब मिल जाता है। इशारा मिल जाता है और सुनकर अमल करे तो वाकई उसकी गम, चिंता, परेशानियां दूर होते जाती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/never-ever-think-negative-saint-dr-msg/article-2304"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/gurmeet-ram-rahim-ji.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;"> आप सत्संग सुनते हो तो कर्म भी आपके कटेंगे</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सत्संग में जब इंसान चल कर आता है। तो दिलों-दिमाग में जो विचार होते हैं, भावनाएं, शंकाएं, सवाल होते हैं उनका जवाब मिल जाता है। इशारा मिल जाता है और सुनकर अमल करे तो वाकई उसकी गम, चिंता, परेशानियां दूर होते जाती हैं। संतों के सत्संग में वचन सुनकर अमल करना बहुत जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त अनमोल वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम में आयोजित वीरवार सायं की रूहानी मजलिस के दौरान फरमाए। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आधा घंटा, एक घंटा जो भी समय आप सत्संग में देते हैं, भगवान पर एहसान मत किया करो।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार आपको लगता है कि लो भाई मैं सत्ंसग में आ गया, देख भगवान! मैंने तेरा राम-नाम सुन लिया। एहसान क्यों जताते हो? आप सत्संग सुनते हो तो कर्म भी आपके कटेंगे, आपके बनेंगे तो इसमें एहसान जताने की कोई बात ही नहीं। बल्कि होना ये चाहिए कि हे मालिक मैं तेरा शुक्राना करना चाहता हूँ कि तूने कृपा की तभी मैं सत्संग में चलकर आ गया और सत्संग सुनकर मैं अपने भाग्य बदल पाऊंगा। तो उस मालिक का, राम का, ईश्वर का, वाहेगुरु का शुक्राना करना चाहिए न कि कोई एहसान जताना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:center;">कई सुबह-शाम, दिन-रात कार्य करते रहते हैं तो भी थकावट नहीं आती</h2>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने फरमाया कि इंसान कैसे कर्म करता है ये या तो वह स्वयं जानता है या फिर भगवान। इंसान कर्म करता है, उसका फल चाहिए, हर किसी को चाहिए, लेकिन ईश्वर जिस हाल में रखता है, भक्तजन उसी हाल में खुश रहते हैं। पता नहीं उसके बदले में राम, अल्लाह, प्रभु, परमात्मा क्या बख्श दे? कुछ कहा नहीं जा सकता। बस आप निगेटिव न सोचें।</p>
<p style="text-align:justify;">आपने दिमाग में सोच लिया कि मैं नहीं थकूंगा तो आप थकते नहीं, और सोच लिया कि मैं थक गया तो बैठे-बैठे थक जाओगे। कई खाली रहते-रहते थक जाते हैं। कई सुबह-शाम, दिन-रात कार्य करते रहते हैं तो भी थकावट नहीं आती। कईयों के चारपाई पर करवट बदलते समय मसल्ज़ खिंच जाते हैं और कई सारा दिन फावड़ा चलाते हैं व पता ही नहीं चलता।</p>
<h2 style="text-align:center;">यदि थोड़ी बहुत परेशानी है तो सोचें कि मेरा मालिक जाने, उसका काम जाने</h2>
<p style="text-align:justify;">इसलिए दिमाग की इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। आप सोच लेते हैं कि आप कभी तरक्की नहीं करेंगे तो नहीं करोगे और अगर आप सोच लेते हैं कि मैं हारी बाजी जीतकर दिखाऊंगा तो आप जीत जाते हैं। इसलिए नेगेटिव न सोचा करो और मालिक के प्यारे को तो बिल्कुल भी नहीं सोचना चाहिए। आपके साथ तो राम, अल्लाह, सतगुरु होता है। यदि थोड़ी बहुत परेशानी है तो सोचें कि मेरा मालिक जाने, उसका काम जाने। अच्छे कर्म करते चलो, सतगुरु-मौला जरूर फल बख्शेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर आप टेंशन लेते रहते हो। भैंस ने एक टाईम दूध नहीं दिया तो आप चारपाई पर लेट जाते हो, उससे क्या भैंस ज्यादा दूध देने लग जाएगी। बच्चा बीमार हो गया तो कहते हो ये क्या हो गया? जिंदगी में उतार-चढ़ाव चलता रहता है, इसमें टेंशन वाली क्या बात है? कई लोग बडे सेंसेटिव टाईप के होते हैं, बात-बात पर टेंशन लेते हैं। लेकिन भ्रम और निगेटिविटी दो चीजें जब आदमी के अदंर बैठ जाती हैं तो जिंदगी नर्क हो जाती है।</p>
<h1 style="text-align:center;">‘पहले से तू अच्छा लग रहा है’</h1>
<p style="text-align:justify;">सफाई रखना कोई भ्रम नहीं होता, अच्छे कर्म करना कोई भ्रम नहीं होता। सुमिरन करके दर्श-दीदार हों या सपने में या फिर प्रत्यक्ष तौर पर वो भी भ्रम नहीं होता। इसलिए टेंशन न लिया करो, कोई कुछ कह दे, निगेटिविटी को पकड़ा न करो। ये अच्छे-भले बंदे को बीमार कर देते हैं। हमने देखा है, माता-बहनें किसी बीमार का पता लेने जाएंगी, तो उसको कहेंगी- तू तो आगे से पीला हो गया। लाल हो तो भी पीला हो जाए बेचारा। और आदमी कहते हैं- यार कल से तो ठीक लग रहा है, चाहे सेहत पीली क्यों न पड़ी हो फिर भी लाली आ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप किसी का पता लेने जाओ तो उसे कभी भी गलत न कहो, चाहे वो बिल्कुल कमजोर हो गया हो। ‘पहले से तू अच्छा लग रहा है।’ आपके ये दो शब्द किसी को जिदंगी जीने की इच्छा पैदा कर देंगे। और हो सकता है वो बीमारी से लड़कर जीत जाए। हर किसी को यही चाहिए कि वो कभी निगेटिव न सोचे।</p>
<h1 style="text-align:justify;">लड़ो अपने मन से जो आपको गलत विचार देता है</h1>
<p style="text-align:justify;">लेकिन कई होते ही निगेटिव हैं, जैसे मैं खड़ा नहीं हो सकता, चल नहीं सकता, खा नहीं सकता, जबकि सबकुछ कर रहे होते हैं। नेगिटिविटी पालने की बजाय आप उन चीजों से लड़ो, जो आपको जिंदगी में पीछे ले जा रही हैं। लड़ो अपने मन से जो आपको गलत विचार देता है। लड़ो उन बुराईयों से जो आप के ऊपर हावी होना चाहती हैं। लड़िए उन गलत ख्यालों से, जो आपको कहीं का नहीं छोड़ना चाहती और जीत जाईए जिंदगी की बाजी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दुनिया से सभी को एक न एक दिन जाना है। लेकिन कई आते हैं और जिंदगी का दिया बुझा कर चले जाते हैं। वहीं कई आते हैं और दूसरों के लिए मशाल की तरह काम करते हैं और आने वाले समय में दुनिया उनकी दिखाई मशाल तले मार्ग तय करती है। आप मानो न मानो, चाहो न चाहो जन्म भी होता है और मरण भी होता है। आपकी इच्छा से कुछ होने वाला नहीं, आपके टालने से कुछ टलने वाला नहीं। इसलिए जो समय आपको मिला है, उसमें अच्छे कर्म करो। हिम्मत से आगे बढ़ो और नेकी भलाई करते हुए अल्लाह, वाहेगुरु राम के गुण गाते हुए खुशियां हासिल करो। हर समय आदमी की मन इच्छा पूरी नहीं होती।</p>
<h2 style="text-align:center;">‘सोचां बंदे दियां हुंदियां नहीं पूरियां, सोचदा है बहुत, पर रहिंदियां अधूरियां’</h2>
<p style="text-align:justify;">परम पिता जी वचन फरमाया करते, ‘सोचां बंदे दियां हुंदियां नहीं पूरियां, सोचदा है बहुत, पर रहिंदियां अधूरियां’ बहुत ज्यादा सोच लेता है, इसलिए अधूरी रह जाती हैं। फिर मन अंदर से मरोड़ा देता है- हो गई तेरी इच्छा पूरी, कुछ नहीं हुआ, सतगुरु कुछ नहीं करता। पर जो सौ इच्छाएं पहले पूरी हुई हैं, उनको साफ कर देता है। पहले बच्चे फट्टी लिखा करते थे और टीचर के ओके कहने पर पानी मार के साफ कर देते। तो मन ओके कहने ही नहीं देता पहले ही फट्टी साफ कर देता है, सतगुरु मौला ने पता नहीं क्या-क्या बख्शना होता है? पर अंहंकार, बेवजह मान-बड़ाई की बातें इंसान को बहुत पीछे ले जाती हैं। इसलिए दीनता, नम्रता का पल्ला कभी न छोड़ो, राम का नाम जपते रहो और सब का भला मांगो।</p>
<h1 style="text-align:justify;">मालिक की खुशियां आपको मिल सकें</h1>
<p style="text-align:justify;">निगेटिविटी से नाता तोड़ कर रखो। क्यों नहीं होता आपसे अच्छा कर्म? आपसे पहले भी लोगों ने किया है वे भी माँ के पेट से जन्में हैं, आप भी माँ के पेट से जन्मे हैं। वो आगे निकल सकते हैं तो आप क्यों नहीं आगे बढ़ सकते। जरूर बढ़ सकते हैं, बस मन से लड़िए, सुमिरन, सेवा करिए और सबका भला मांगिए, ऐसा करते-करते जैसे आगे बढ़ोगे मालिक झोलियां भरेंगे। जब आदमी सेल्फिश हो जाता है तो न खुद को खुशियां, न परिवार का भला। मालिक से मालिक की भक्ति मांगो, मालिक से बंदों को जोड़ो, तोड़ोगे तो आपकी पीढ़ियां रुल सकती है आपकी कुलें बर्बाद हो सकती हैं। इसलिए जोड़ने की कोशिश करो ताकि मालिक की खुशियां आपको मिल सकें।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2017 01:17:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>सत्संग में आने से भाग्यशाली बनते हैं जीव: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/religious-congregation-change-the-life-saint-dr-msg/article-1966"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा कितना बड़ा है, इसके बारे में कुछ भी लिख-बोलकर नहीं बताया जा सकता,</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन यह हकीकत है कि जीव सत्संग सुनकर अमल करे तो जीव अपने भयानक से भयानक पाप-कर्मों से बच जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग सुनकर अमल करने का मतलब है कि आप नाम जपो, मालिक की औलाद से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो, कभी भी किसी का दिल न दुखाओ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय’</h2>
<p style="text-align:justify;">अहंकारवश, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, मन-मायावश जब जीव किसी का दिल दुखाता है तो उसकी भक्ति कटती है, वह खुद दुखी होता है और मालिक से दूर हो जाता है। इसलिए कभी किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। जब इतने बड़े महापुरुष, संत, पीर-फकीरों ने यह लिख दिया कि ‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन ऐसा कर मानेया, मीत हमारा सोय।।’ कहने का मतलब है कि कहने को कोई भी कह देगा कि मैं ये हूं, वो हूं लेकिन जो लोग ऐसा मान लेते हैं कि मैं दूसरों को बुरा क्यों कहूं और वो वाकई किसी को बुरा नहीं कहता, बल्कि अपने आपको ही बुरा कहता है तो जो ऐसा कहकर मान लेते हैं, वो मालिक के मीत, प्यारे, अति प्यारे हो जाया करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जो सत्संग सुनकर अमल करते हैं, वह खुशियों के हकदार बनते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में जीव को समझ आती है, लेकिन यह जरूरी है कि आदमी सुनकर अमल करे, तभी खुशियां हासिल होती हैं। सुनना अच्छी बात है। जैसे पत्थर गर्मी में रहते हैं तो किसी का पांव सड़ा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर थोड़ा पानी गिरता रहे तो वो ठंडे रहते हैं। सत्संग सुनने से जीव चाहे अमल न करे फिर भी न सुनने वाले से तो बेहतर हैं लेकिन सुनकर अमल करने से ही खुशियां आती हैं, वरना किए कर्मों का भुगतान करना पड़ता है। इसलिए आप सत्संग सुनो, अमल करो और जो सुनकर अमल कर लिया करते हैं, वो ही दोनों जहान की खुशियों के हकदार बनते हैं। उन्हीं के अंदर पवित्रता आती है, चेहरे पर नूर आता है। वो एक दिन मालिक के दर्श-दीदार के काबिल जरूर बन जाया करते हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2017 05:47:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परस्पर नि:स्वार्थ प्रेम से रहो</title>
                                    <description><![CDATA[जिसके पास मालिक के प्यार-मोहब्बत की दौलत है वो दुनिया में सबसे खुशनसीब इन्सान हैं सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो लोग आपस में बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्यार किया करते हैं, अल्लाह, वाहेगुरु,सतगुरु, रहबर से वही खुशियों के खजाने लिया करते हैं। जिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">जिसके पास मालिक के प्यार-मोहब्बत की दौलत है वो दुनिया में सबसे खुशनसीब इन्सान हैं</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो लोग आपस में बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्यार किया करते हैं, अल्लाह, वाहेगुरु,सतगुरु, रहबर से वही खुशियों के खजाने लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस घर में रहने वालों का आपस में प्रेम है, मालिक से प्रेम है तो घास-फूस की झोपड़ी भी महलों से कई गुणा बढ़कर खुशियां देने वाली है, स्वर्ग-जन्नत का नमूना है और वो आलिशान महल, बड़े-बड़े घर जिनमें प्यार-मोहब्बत नहीं है वो श्मशान भूमि, कब्रिस्तान की तरह सन्नाटे के अलावा कुछ भी नहीं होते। इसलिए जिसके पास मालिक के प्यार-मोहब्बत की दौलत है वो दुनिया में सबसे खुशनसीब इन्सान हैं। वही सबसे अच्छा, नेक इंसान है। वो ही मालिक के रहमो-कर्म का हकदार बनता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">पाप-जुल्म की कमाई से आप गाड़ियां, मोटर सब कुछ खरीद सकते हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि पाप-जुल्म की कमाई से आप गाड़ियां, मोटर सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन जब घर में बेचैनी आ गई, परेशानी आ गई तो सारा पैसा धरा-धराया रह जाएगा, सुख-शांति से महरूम हो जाओगे, खाली हो जाओगे। इसलिए कभी बिको न। अरे बिकना है तो अल्लाह, वाहेगुरु, राम के हाथों बिको क्योंकि वो तुझे खरीदकर अनमोल कर देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/live-with-love-and-selfless-saint-dr-msg/article-1924</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2017 01:00:32 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सुमिरन को बनाओ आदत</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में है। जिस इन्सान ने उसकी मौजूदगी का अहसास मान लिया और यह मान लिया कि वह हर जगह है, तो यकीनन उसे हर जगह एक न एक दिन मालिक नजर भी जरूर आने लगता है। जैसे सुमिरन आपका […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमात्मा कण-कण में है। जिस इन्सान ने उसकी मौजूदगी का अहसास मान लिया और यह मान लिया कि वह हर जगह है, तो यकीनन उसे हर जगह एक न एक दिन मालिक नजर भी जरूर आने लगता है।</p>
<h1>जैसे सुमिरन आपका रूटीन है और फिर रुचि से सुमिरन करो</h1>
<p>जैसे रूटीन है कि आप खाना खाते हैं, आपका ध्यान एकाग्र होता है, उसके लिए अलग से ध्यान नहीं जमाना पड़ता। कपड़े पहनते हैं, नहाते हैं, कंघा वगैरह करते हैं, शेविंग करते हैं, तो आप देखते जरूर हैं, लेकिन उसके लिए इतना ध्यान एकाग्र नहीं करना पड़ता कि कहीं इधर-उधर न चला जाए। नेच्युरैली आपका हाथ घूमता रहता है, क्योंकि यह आपका रूटीन है।</p>
<p>ऐसा ही रूटीन अगर अल्लाह, वाहेगुरु, राम के नाम का बन जाए, तो यकीनन मालिक भी कण-कण में नजर आने लग जाए। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप सुमिरन करने की आदत बना लो।</p>
<p>फिर न जोर लगाना पड़े, न अलग से परेशान होना पड़े, न ऐसा लगे कि अलग से कोई बोझ उठा रहा हूं। बस इस तरह से आदत बना लो कि जैसे सुमिरन आपका रूटीन है और फिर रुचि से सुमिरन करो।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/make-habit-of-meditation-saint-dr-msg/article-1529</link>
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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2017 04:04:23 +0530</pubDate>
                
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