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                <title>सेवा करो, सुमिरन करो तो बुरे विचार रूक जाएंगे: पूज्य गुरू जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जब तक अपने अत:करण को पाक-पवित्र नहीं करता, तब तक मालिक की तमाम खुशियां उसके अंदर नहीं ठहरती। अपने अंदर के विचारों का शुद्धीकरण करो। विचारों को शुद्ध करने के लिए एक मात्र तरीका है सेवा और सुमिरन। पूज्य गुरु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/do-service-do-sumiran-then-bad-thoughts-will-stop/article-87153"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/true-devotion-is-fighting-evil-thoughts.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जब तक अपने अत:करण को पाक-पवित्र नहीं करता, तब तक मालिक की तमाम खुशियां उसके अंदर नहीं ठहरती। अपने अंदर के विचारों का शुद्धीकरण करो। विचारों को शुद्ध करने के लिए एक मात्र तरीका है सेवा और सुमिरन। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सेवा करो, सुमिरन करो तो बुरे विचार, नेग्टिव विचार रुक जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सेवा, सुमिरन से ऐसा आत्मविश्वास आएगा कि आपका ध्यान मालिक की याद में लगने लगेगा, आप आत्म विश्वास से परिपूर्ण होंगे और कोई भी अच्छा-नेक कार्य करते हैं तो उसमें झिझक नहीं आएगी। आप हिम्मत से आगे बढ़ते जाएंगे। नेग्टिव थिंकिंग खत्म होगी और पॉजिटिव थिंकिंग बढ़ती जाएगी। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वचन सुनकर अमल करने से जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और इस जन्म के गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं, परेशानियां दूर हो जाया करती हैं। इसलिए संतों के वचन सुनो और अमल करो।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत क्या कहते हैं? ईश्वर के नाम का जाप करो। ईश्वर की बनाई सृष्टि से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करें, कभी भी किसी भी जीव का दिल न दुखाओ, किसी पर टोंट न कसो, जात-पात का भेदभाव न करो, कड़वा न बोलो। आप जी फरमाते हैं कि सब अपने-अपने कर्मों की खाते हैं। जैसे कर्म आप करेंगे, वैसा फल आपको भोगना होगा। बुरे कर्म करते हो तो आने वाला समय आपके लिए बुरा होगा। बबूल का पेड़ बोने से उस पर आम नहीं लगा करते।</p>
<p style="text-align:justify;">कहने का मतलब जैसे कर्म करोगे वो इसी जन्म में आपको भोगने होंगे और आगे आत्मा को दरगाह में हिसाब-किताब चुकाना होगा। इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करो। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिंदगी मिली है कहीं यूं ही न गुजर जाए, इसमें ऐसा कुछ कर डालो कि आपका जीवन एक मिसाल बन जाए कि आने वाली पीढ़ियां उस रोशनी में रास्ता देख कर चलें। वरना पशुओं की तरह आए, खाया-पिया, बच्चे पैदा किये, ऐशो आराम किया और चलते बने। लाखों-करोड़ों आ रहे हैं इस दुनिया में, और जा रहे हैं। आप जी ने फरमाते हैं कि भक्ति करो, भले कर्म करो।</p>
<p style="text-align:justify;">आज समाज में माना कि लोग स्वार्थी हैं, गर्ज को ही सलाम् है। गर्ज है तो अपने-अपने रहते हैं, गर्ज नहीं तो अपने पराये हो जाते हैं। ये संसार मतलब का है। ये देश काल का देश, काल की नगरी, स्वार्थी युग, गर्ज का युग है। यहां प्यार ही तब जताएंगे जब कुछ लेना होता है। आप जी ने फरमाते हैं कि ऐसे में भी एक ऐसा है जो कभी आपको नहीं छोड़ेगा, दुतकारेगा नहीं और वो है अल्लाह, वाहेगुरु, सतगुरु, मौला, राम।</p>
<p style="text-align:justify;">उससे आप प्यार करेंगे, बेगर्ज मोहब्बत, चाहे आप कुछ मांगते भी रहेंगे तो भी वह आपसे मुंह नहीं चुराएगा। मां तो जब बच्चा बड़ा हो जाए तो छोड़ देती है कि, बड़ा हो गया है अपने आप काम करो। पर एक गुरु, मालिक के लिए बच्चा कभी बड़ा होता ही नहीं, पता नहीं दुनिया की दलदल में वह कब फंस जाए, पता नहीं कब फिसल जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए वो हमेशा उसको अपनी अंगुली पकड़ाकर रखता है और दया, मेहर, रहमत से नवाजता रहता है। इसलिए उस सच्चे भगवान से, अल्लाह, वाहेगुरु, राम से अपनी प्रीत जोड़कर रखो, जो कभी भी हाथ नहीं छोड़ता और दोनों जहानों में खुशियों से मालामाल करता रहता है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2023 17:27:41 +0530</pubDate>
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                <title>सिनेमा मालिक का अहंकार टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने सांगला हिल (आज कल पाकिस्तान) में सभी सत्संगियों के साथ मिलकर सत्संग घर (डेरा) बनाने का विचार किया। कुछ लोगों ने डेरा बनाने का विरोध भी किया व बहुत सी अड़चनें भी पैदा की गर्इं लेकिन आप जी ने अपनी मधुर वाणी व रूहानी तेज के प्रभाव के साथ उन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/cinema-owners-ego-broken/article-87038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/spirituality.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने सांगला हिल (आज कल पाकिस्तान) में सभी सत्संगियों के साथ मिलकर सत्संग घर (डेरा) बनाने का विचार किया। कुछ लोगों ने डेरा बनाने का विरोध भी किया व बहुत सी अड़चनें भी पैदा की गर्इं लेकिन आप जी ने अपनी मधुर वाणी व रूहानी तेज के प्रभाव के साथ उन सभी का मन जीत लिया व डेरा बनाने के लिए सभी को तैयार भी कर लिया। आखिर डेरा बनकर तैयार हो गया। उस समय आप जी ने अपने प्यारे मुर्शिद पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज के जन्म दिन का भंडारा मनाने का फैसला किया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन दिनों में डेरे के नजदीक ही एक चलता फिरता सिनेमाघर (रंगमंच) था। कुछ श्रद्धालुओं ने सिनेमाघर के मालिक से जन्म दिन के भंडारे के दिन एक रात के लिए सिनेमा न चलाने की विनती की। इस पर सिनेमाघर के मैनेजर ने अपनी नाराजगी जताते कहा कि उन्होंने प्रशासन से स्वीकृति ले रखी है। उसने कहा कि वह कमेटी को किराया भी दे रहा है तो फिर सिनेमा कैसे बंद किया जा सकता है। पूजनीय मस्ताना जी ने दूसरी बार कुछ श्रद्धालुओं को यह कहकर भेजा कि सिनेमा मैनेजर का जो भी वित्तीय नुक्सान होगा, वह उसकी पूरी भरपाई करेंगे। लेकिन अड़ियल सिनेमा मैनेजर नहीं माना। सत्संगियों ने उसे मनाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसके कानों पर जूं तक नहीं सरकी। जब आप जी को यह सब बताया गया कि तो आप जी ने सबकुछ अपने मुर्शिद पर छोड़ दिया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अगले दिन जब सिनेमा चलाने का समय हुआ तो सिनेमा नहीं चला। कहा जाता है कि जरनेटर सेट ही खराब हो गया। दूसरा दिन भी उसी तरह बीत गया। नया जरनेटर सेट भी लाया गया, फिर भी सिनेमा नहीं चला। इस तरह उस मैनेजर का अहंकार चकनाचूर हो गया व उसने अपने किए पर पछतावा किया। आप जी ने कई सत्संग कर उस क्षेत्र में मालिक के नाम का खूब डंका बजाया।</h6>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Mar 2023 21:00:01 +0530</pubDate>
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                <title>50-60 सालों तक काम करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने लंगर में पुड़े बनवाए व साध-संगत को खूब भोजन करवाया गया। बारिश होने से सारा वातावरण बहुत ही सुहावना हो गया
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/be-will-work-for-50-60-years/article-87047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/spirituality1.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का हुक्म मिलने पर पूज्य हजूर पिता जी अपने सच्चे मुुर्शिद-ए-कामिल के चरणों में सरसा में पधारे। पूज्य हजूर पिता जी ने परम पिता जी के वचनों में प्रार्थना की, ‘‘हे सतगुरू जी मैं इसके काबिल नहीं हूं। आप हमेशा युगों युगों तक अटल रहो जी, ऐसे ही प्यार बख्शते रहना जी।’’ यह सुनकर परम पिता जी ने फरमाया,‘‘आप चिंता न करो हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे। आप जाओ और अपना काम संभालो, कराहा आदि लाओ हम आपको बब्बर शेर बनाएंगे।’’ कुछ समय उपरांत परम पिता जी ने हजूर पिता जी को अपना गद्दीनशीन बनाकर हुक्मनामा तैयार करवाया। 21 सिंतबर 1990 दिन शुक्र्रवार शाम को परम पिता जी ने दरबार में रहने वाले सभी सत् बह्मचारी सेवादारों को तेरा वास में बुला लिया व असली बात का खुलासा करते फरमाया, ‘‘प्यारे बच्चो! जो आप पूरे वर्ष भर बैठकें करते रहे हो उसका मकसद पूरा हो गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">परसों 23 सितंबर को सभी बातें सामने आ जाएंगी, जो हम चाहते थे, बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने उससे भी कई गुणा अधिक अच्छा उत्तराधिकारी ढूंढ कर दिया है।’’ जिस तरह एक माली पौधे को कलम चढ़ना करता है। कलम चढ़ाया गया पौधा दूसरे पौधे से अधिक अच्छी किस्म का फल देता है। इसी प्रकार हम भी उसी (पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) उसी पौधे की तरफ कलम चढ़ाकर ऐसा बब्बर शेर बनाएंगे, जिसका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं कर सकेगा जो कम से कम 50-60 सालों तक काम करेगा। किसी ने भी किसी तरह की चिंता नहीं करनी है व हमारे वचनों पर सभी ने फूल चढ़ाने है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;"> यह वचन पूजनीय परम पिता जी ने तीन-चार बार दोहराये। उपरोक्त वचनों को सुनकर कई सत् ब्रह्माचारी सेवादार वैराग्य में आ गए। पूजनीय परम पिता जी ने उनको अपना भरपूर प्यार प्रदान करते हुुए फरमाया,‘‘बेटा रोना नहीं है। किसी ने भी दिल छोटा नहीं करना है, हम कहां जा रहे हैं, हम तो हमेशा आपके साथ हैं व हमेशा ही आपके साथ रहेंगे।’’ इसके बाद पूजनीय परम पिता जी ने मोहन लाल को सबकुछ समझाते हुए कहा कि श्री गुरूसर मोडिया वाले लड़के गुरमीत सिंह जी व उनके परिवार को लेकर आओ। परम पिता जी के हुक्म अनुसार मोहन लाल व सेवादार श्री गुरूसर मोडिया के लिए रवाना हो गए।</h6>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जब बुधरवाली में बरसी रहमत</strong></h3>
<h6 style="text-align:justify;">यह दरबार रेलवे लाईन हनुमानगढ़ से श्रीगंगानगर वाया सादुलशहर के साथ जुड़ा हुआ है। इस गांव को चक्क फतेह सिंह वाला रेलवे स्टेशन लगता है जो डेरे के बिल्कुल ही सामने है। पूजनीय मस्ताना जी महाराज ने साध-संगत की प्रार्थना पर इस गांव में सत्संग किया। गांव की साध-संगत की ओर से बेनती करने पर मस्ताना जी महाराज ने वहां डेरा मंजूर कर दिया। डेरे के लिए जमीन का प्रबंध भी कर लिया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पूज्य शहनशाह जी के हुक्म अनुसार डेरा का निर्माण कार्य शुरू हो गया। काफी साध-संगत श्री गंगानगर से सेवा के लिए सुबह आती और शाम को वापिस चली जाती। उस समय सड़क भी नहीं थी। एक दिन साध-संगत ने अपने सच्चे मुर्शिदे कामिल जी की पवित्र हजूरी में डेरे के पास ही रेलवे स्टेशन बनाने की प्रार्थना की, ‘‘सच्चे पातशाह जी! अगर रेलवे स्टेशन आश्रम के नजदीक बन जाए तो सेवा के लिए काफी समय बच जाएगा जी। सार्इं जी ने उनकी विनती स्वीकार की। बेपरवाह जी ने इधर तो आश्रम का निर्माण कार्य शुरू करवाया और उधर उन दिनों आंधी ऐसी चलने लगी की रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बारिश का तो नामों निशान ही नहीं था। आखिर आसपास के गांवों में चर्चा चल पड़ी कि इधर ही बारिश हो रही है और इधर ही बाबा जी ने आश्रम बनाना शुरू कर दिया है। अब न तो बारिश होगी और न ही आंधी रूकेगी। उन गांवों के कुछ लोग एकत्रित होकर आप जी के पास आए और अर्ज की,‘‘बाबा जी! कितने दिन से अंधेरी चल रही थी। आप बारिश करवा दो। हमारी फसलें ही खराब हो रही हैं।’’ दातार जी ने फरमाया, ‘‘वरी! हम यहां बारिश करवाने नहीं आए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मालिक की रजा में रहना चाहिए। बारिश हो जाए तो उसकी मर्जी और न हो तो भी उसकी मौज।’’ रेलवे स्टेशन संबंधी बेपरवाह जी ने हुक्म फरमाया, ‘‘सतगुरू के आगे प्रार्थना करेंगे कि रेलवे स्टेशन डेरा के सामने ही बन जाए ताकि श्री गंगानगर, लुधियाना, दिल्ली व सरसा से आने वाली साध-संगत बड़े ही आराम के साथ दरबार में पहुंच जाया करे।’’ पूजनीय बेपरवाह जी वचन फरमाते हुए रेलवे स्टेशन की तरफ चल पड़े। उस समय कुछ सेवादार भी पूजनीय बेपरवाह जी के साथ थे। पूजनीय दातार जी ने रेल पटड़ी के साथ-साथ चलते अचानक एक जगह पर रूक गए। आप जी ने अपने डंडे से ईशारा करते हुए वचन फरमाए,‘‘भाई! यहां स्टेशन बनेगा और गाड़ी रूका करेगी।’’ उस दिन भी बहुत ही आंधी चली। इतनी तेज आंधी में रेत के बड़े बडेÞ टीले हिल गए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">सारा आश्रम भी रेत के साथ भर गया। वहां सेवा कर रही साध-संगत को बहुत मुश्किल हुई। साध-संगत भी मन ही मन में बारिश होने के लिए अरदास करने लगी कि अगर बारिश आ जाए तो गीली रेत हटानी आसान हो जाएगी। अगर भक्त की मांग जायज हो तो मालिक जरूर पूरी करता है। थोड़ी देर बाद ही बारिश शुरू हो गई। सारा वातावरण एक दम से ठंडा हो गया। हवा भी बहुत तेज व बरसात भी मुसलाधार। रात भर बारिश होती रही। हवा भी इतनी तेज थी कि बड़Þे बड़े पेड़ भी जड़ से उखड़ गए। डेरे के सामने रेलवे लाईन की तरफ बड़े बड़े पेड़ थे। तेज हवा के कारण वह भी जड़ से उखड़ गए। उन पेड़ों के रेलवे लाईन पर गिरने से रेल यातायात भी बहुत प्रभावित हुआ।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इस तरह लगातार कई घंटों तक बारिश होती रही। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने लंगर में पुड़े बनवाए व साध-संगत को खूब भोजन करवाया गया। बारिश होने से सारा वातावरण बहुत ही सुहावना हो गया। बारिश रूकने पर चारों तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। मौसम भी एकदम से साफ हो गया। पूजनीय बेपरवाह जी मुस्कुराते हुए बाहर आए। बेपरवाह जी घूमने के लिए डेरे के बाहर रेलवे लाईन की तरफ आ गए। पवित्र कर कमलों के साथ अपना डंडा घुमाते हुए जब रेलवे पटड़ी की तरफ आगे बढ़े तो देखा कि सामने रेलवे लाईन पर बड़े बड़े पेड़ गिरे हुए थे। सामने देखा तो मटीली (सादुलशहर) की तरफ से रेलगाड़ी आ रही थी। पूजनीय बेपरवाह जी उन गिरे हुए पेड़ों के पास जाकर रूक गए। उधर से रेलगाड़ी भी धीरे-धीरे आते हुए वहां आकर रूक गई। बाद में वहीं रेलवे स्टेशन का भी निर्माण हो गया।</h6>
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                <pubDate>Mon, 06 Mar 2023 20:54:55 +0530</pubDate>
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                <title>‘भाई! कौन कहता है बच्चे को काल ले गया?</title>
                                    <description><![CDATA[5 अक्तूबर 1969 गांव कोट बख्तू (बठिंडा) में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने सत्संग फरमाया। उस समय प्यारे सतगुरू जी रात के सत्संग के समय 11-12 बजे ही स्टेज पर आया करते थे। इस सत्संग से कुछ दिन पहले गांव त्योणा पूजारियां में 10-11 साल के एक बच्चे की किसी हादसे में मौत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/brother-who-says-that-the-child-took-time/article-87039"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/spirituality-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>5 अक्तूबर 1969</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गांव कोट बख्तू (बठिंडा)</strong> में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने सत्संग फरमाया। उस समय प्यारे सतगुरू जी रात के सत्संग के समय 11-12 बजे ही स्टेज पर आया करते थे। इस सत्संग से कुछ दिन पहले गांव त्योणा पूजारियां में 10-11 साल के एक बच्चे की किसी हादसे में मौत हो गई थी। उस बच्चे ने पूजनीय परम पिता जी से नाम शब्द की अनमोल दात प्राप्त की हुई थी। मनमुखों के बहकावे में आकर उस परिवार को यह भ्रम हो गया था कि वह लड़का समय आने से पहले की मर गया है व उसे काल ले गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह परिवार हाकम सिंह निवासी संगत खुर्द को लेकर गांव बख्तू के सत्संग में पहुंचा। रात को सत्संग सुना। सत्संग बहुत ही प्रभावशाली था। सुबह पूजनीय परम पिता जी ने नाम अभिलाषी जीवों को नाम शब्द की अनमोल दात प्रदान की। सुबह विश्राम वाले घर में उस लड़के की मौत के संबंध में हाकम सिंह व उस लड़के का परिवार परम पिता जी से मिला व बच्चे संबंधी पूरी घटना बताई। इस पर परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘भाई! कौन कहता है कि उस बच्चे को काल ले गया? यह शरीर तो काल का है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें जो आत्मा है, उसका संबंध मालिक सतगुरू के साथ है। उस बच्चे की आत्मा को सतगुरू राई भर भी तकलीफ नहीं आने देंगे। बचपन व जवानी की भक्ति को मालिक पहले दर्जे की स्वीकार करता है। वह बच्चा तो उच्च श्रेणी की भक्ति कमाकर गया है, आप उसकी चिंता न करो। भाई वह तो अपने सच्चे घर, सचखंड में जा विराजा है।’’ इस तरह परम पिता जी ने उस परिवार का भ्रम दूर किया।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Dec 2022 20:59:13 +0530</pubDate>
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                <title>अपने मतलब, खुदगर्जी के लिए लोग हर हद से गिर जाते हैं : पूज्य गुरू जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जीव पर मालिक की रहमत होती है तो जीव सत्संग में चलकर आता है। उस पर परम पिता परमात्मा का रहमो-करम बरसता है। जो जीव सुनकर अमल करता है, वो जीव पूरा फायदा उठा लेता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/people-fall-from-all-limits-for-their-own-self-interest-revered-guru-ji/article-87152"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/devotion-is-necessary-to-attain-god.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जीव पर मालिक की रहमत होती है तो जीव सत्संग में चलकर आता है। उस पर परम पिता परमात्मा का रहमो-करम बरसता है। जो जीव सुनकर अमल करता है, वो जीव पूरा फायदा उठा लेता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग में आना कोई आसान काम नहीं है। इस घोर कलियुग में अपने मतलब, खुदगर्जी के लिए लोग हर हद से गिर रहे हैं। ऐसे खुदगर्ज जमाने में सत्संग में आना आत्मा के लिए संजीवनी है। चहुंओर मन की खुराक है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर तरफ लोग मनमते ही चलते नजर आ रहे हैं। ऐसे में राम-नाम ही जीव की रक्षा करता है और वह राम-नाम सत्संग में आने से प्राप्त होता है। आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में आने से जीव को यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में क्या-क्या चीजें छोड़नी है? क्या करना है और क्या नहीं करना? इनके बारे में अपने आप जीव को समझ नहीं आती। यह तभी संभव है जब जीव वचनों पर अमल करे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तक जीव वचनों पर अमल नहीं करता, सत्संग नहीं सुनता तो उसे कोई समझ नहीं आती। इस संसार में राम-नाम के अलावा सब कुछ नाशवान है। चलते-चलते कब इन्सान इस संसार से विदा हो जाता है, कब उस मालिक का बुलावा आ जाए, कोई भरोसा नहीं। इसलिए उसका बुलावा आने से पहले सेवा-सुमिरन करे तो इन्सान की चिंताएं, गम, परेशानियां दूर हो जाती हैं और वो मालिक की दया-मेहर, रहमत से मालामाल हो जाता है। आज संसार में लोग गमगीन, चिंताग्रस्त हैं। परेशानी के इस आलम में इन्सान यह सोचने लगता है कि वह क्या करे, कहां जाए?</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान व्याकुल होता है, तड़पता है। तड़पते हुए इन्सान का आधार, जो उसे बेचैनियों से बचा सके, वो आधार राम का नाम है। इसके बिना परेशानियों से निकलना मुश्किल है। ज्यों-ज्यों इन्सान काम-धन्धा करता है, भौतिकतावाद में उलझता है तो अपने चारों तरफ का मक्कड़जाल मजबूत करता जाता है और इस कदर फंस जाता है कि मालिक की दया-मेहर, रहमत से बहुत दूर हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान का मन बड़ा जालिम है और आज के समय में यह इन्सान पर बहुत ज्यादा हावी है। गुरु, पीर-फकीर के वचन जीव को अच्छे नहीं लगते और मन की राय पर जीव झट से अमल कर लेता है। जो लोग मन के हाथों मजबूर होते हैं, वो दुखी रहते हैं। इसलिए सुमिरन, परमार्थ के द्वारा मन का डटकर सामना करना चाहिए। संत, पीर-फकीरों के वचनों पर अमल करो, तभी मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन पाओगे। इस भयानक समय में अगर कोई परमानन्द हासिल कर सकता है, जिसके चेहरे पर नूर रह सकता है, वह वही है जो वचनों पर अमल करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तक इन्सान वचनों पर अमल नहीं करता, सत्संग नहीं सुनता, तो तकदीर कैसे बदलेगी? भगवान ने इन्सान को यह शक्ति दी है कि आदमी चाहे तो अपनी तकदीर बदल सकता है, मालिक की रहमत हासिल कर सकता है। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को सत्संग सुनना चाहिए, क्योंकि सत्संग एक ऐसी जगह है जहां पर आत्मशांति का स्रोत और मालिक का पता मिलता है। वह सच्चा सत्संग है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घोर कलियुग है और यहां लोग ठगी, बेईमानी करते हैं। नोटों के लिए पागल हुए रहते हैं। पैसे के लिए, जरा-जरा सी बात के लिए लोग गुमराह हो जाते हैं। तो सत्संग गम, चिंता, परेशानियों से मुक्ति दिलाने वाला आधार है। बहुत-सी बीमारियां जीव को तड़फाती हैं। कुछ जीव की खरीदी हुई होती हैं और कुछ कर्मरोग होते हैं। इनसे भी बचाने के लिए सत्संग एक ढ़ाल है। इन्सान राम का नाम जपे तो इन बीमारियों से बचा जा सकता है। अगर राम-नाम नहीं जपता तो शारीरिक बीमारियां तो लगती ही लगती हैं और आत्मिक बीमारियों से जीव ज्यादा परेशान रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि कभी काम-वासना, कभी क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, कभी मन-माया आदि जीव को गुमराह किए रहते हैं। अगर इन सबसे बचना चाहते हो तो सत्संग सुना करो और अमल किया करो। तभी मालिक की दया-मेहर, रहमत बरसेगी, दोनों जहान की खुशियों से मालामाल होंगे। अंदर खुशियां आएंगी, चेहरे पर नूर आएगा और मालिक के रहमो-करम से सब बलाएं दूर हो जाएंगी, आप खुशियों से भरपूर जरूर हो जाएंगे।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Dec 2022 05:00:45 +0530</pubDate>
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                <title>भयानक पाप-कर्मों से बचाता है संतों का सत्संग</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। आप जी फरमाते हैं कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/satsang-of-saints-saves-from-terrible-sin-deeds/article-87055"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/guruji4.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)</strong>। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। आप जी फरमाते हैं कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा कितना बड़ा है, इसके बारे में कुछ भी लिख-बोलकर नहीं बताया जा सकता, लेकिन यह हकीकत है कि जीव सत्संग सुनकर अमल करे तो जीव अपने भयानक से भयानक पाप-कर्मों से बच जाता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग सुनकर अमल करने का मतलब है कि आप नाम जपो, मालिक की औलाद से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो, कभी भी किसी का दिल न दुखाओ। अहंकारवश, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, मन-मायावश जब जीव किसी का दिल दुखाता है तो उसकी भक्ति कटती है, वह खुद दुखी होता है और मालिक से दूर हो जाता है। इसलिए कभी किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। जब इतने बड़े महापुरुष, संत, पीर-फकीरों ने यह लिख दिया कि ‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय। जिन ऐसा कर मानेया, मीत हमारा सोय।।’ कहने का मतलब है कि कहने को कोई भी कह देगा कि मैं ये हूं, वो हूं लेकिन जो लोग ऐसा मान लेते हैं कि मैं दूसरों को बुरा क्यों कहूं और वो वाकई किसी को बुरा नहीं कहता, बल्कि अपने आपको ही बुरा कहता है तो जो ऐसा कहकर मान लेते हैं, वो मालिक के मीत, प्यारे, अति प्यारे हो जाया करते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में जीव को समझ आती है, लेकिन यह जरूरी है कि आदमी सुनकर अमल करे। तभी खुशियां हासिल होती हैं। सुनना अच्छी बात है। जैसे पत्थर गर्मी में रहते हैं तो किसी का पांव सड़ा देते हैं। उस पर थोड़ा पानी गिरता रहे तो वो ठंडे रहते हैं। सत्संग सुनने से जीव चाहे अमल न करे फिर भी न सुनने वाले से तो बेहतर हैं लेकिन सुनकर अमल करने से ही खुशियां आती हैं, वरना किए कर्मों का भुगतान करना पड़ता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग में संत जीवों को शिक्षा देते हैं कि मानो भाई, अमल करो और जो सुनकर अमल कर लिया करते हैं, वो ही दोनों जहान की खुशियों के हकदार बनते हैं। उन्हीं के अंदर पवित्रता आती है, चेहरे पर नूर आता है। वो एक दिन मालिक के दर्श-दीदार के काबिल जरूर बन जाया करते हैं।</h6>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Dec 2022 21:00:55 +0530</pubDate>
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                <title>सेवा-सुमिरन से मिलती हैं तमाम बरकतें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्यार, उसकी मुहब्बत एक ऐसी लगन है जिसको ये लगन लग जाती है उसके जन्मो-जन्मों के पाप-कर्म कैसे कट जाते है, उसे खुद मालूम नहीं होता। अल्लाह, वाहेगुरू से जो सच्चा प्यार, मुहब्बत करते हैं, तो परमात्मा कदम-कदम पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/selfless-service-and-meditation-can-bring-prosperity/article-87075"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/precious-words-by-saint-dr.-msg.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का प्यार, उसकी मुहब्बत एक ऐसी लगन है जिसको ये लगन लग जाती है उसके जन्मो-जन्मों के पाप-कर्म कैसे कट जाते है, उसे खुद मालूम नहीं होता। अल्लाह, वाहेगुरू से जो सच्चा प्यार, मुहब्बत करते हैं, तो परमात्मा कदम-कदम पर उनकी राह से कांटे चुगकर मखमल बिछा देते हैं। ज्यों-ज्यों आदमी का दृढ़ यकीन बढ़ता जाता है, त्यों-त्यों उनके दिमाग से तमाम टेंशन व परेशानियां दूर होती जाती है। आदतें बदलती जाती है और वो मालिक के और करीब होता चला जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग सुनो और सेवा-सुमिरन पर ध्यान दो ताकि मालिक की तमाम बरकतें आपकी झोली में आएं। जो इंसान मालिक से प्रेम करता है तो मालिक उसे तमाम बरकतें देता है, जो उसके भाग्य में लिखी होती है और जो नहीं भी लिखी होती वो भी बख्श देता है। बस दृढ़ यकीन होना चाहिए। दृढ यकीन के साथ-साथ इंसान मालिक की खुशियों का अधिकारी बनता जाता है। किसी की बातों की परवाह ना करो। आप खुश हैं, आपको खुशी मिल रही है। उसे देखकर कोई-कोई खुश होता है। अधिकतर लोग तो उनकी खुशी को सहन नहीं करते और टांग खिंचाई में लग जाते हैं कि इसको गिराएं कैसे। इसकी खुशियों को गम में बदले कैसे इत्यादि। ज्यादातर लोग टांग खिंचाई करते है और बुरा सोचते है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी खुशी में जो खुश है, आपका साथी वो ही है। आप कोई गलत कार्य करते है तो कोई रोकता है तो आपका सच्चा मित्र वो ही है। लेकिन जो आपकी खुशी देखकर जल जाता है, आपको ऐसी-ऐसी बातें कहकर आपका दिल दुखाता है या आपको खुशियों से महरूम कर देता है, वो आपका दोस्त नहीं बल्कि आपका दुश्मन है। वो आपसे खुश नहीं होता। इसीलिए आप किसी की बातों में ना आएं और अपने मालिक को खुश रखें ताकि वो आपके आने वाले समय को तमाम खुशियों से लबरेज कर दें। इंसान का अपने मालिक पर दृढ़ यकीन होना चाहिए तो अंदर-बाहर कमी नहीं रहती।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Nov 2022 05:00:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रूहानियत: जब बेपरवाह साईं जी का पावन भंडारा मनाने पंजाब पहुंचे पूजनीय परम पिता जी</title>
                                    <description><![CDATA[‘गांव का नाम चुघ्घां, नाम लेकर कर दो उघ्घा, फिर बनेगा उघ्घा, फिर हो जाएगा चुघ्घा’ सच कहूँ/मनजीत नरूआणा चुघ्घे कलां/बठिंडा। कहते हैं जिस धरती पर पूर्ण मुर्शिद के पावन चरण कमल पड़ जाएं, वह धरती भागों वाली हो जाती है। गांव और ब्लॉक चुघ्घे कलां जिला बठिंडा में डेरा सच्चा सौदा सरसा की दूसरी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/spirituality/article-38797"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/param-pita-shah-satnam-singh-ji.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>‘गांव का नाम चुघ्घां, नाम लेकर कर दो उघ्घा, फिर बनेगा उघ्घा, फिर हो जाएगा चुघ्घा’</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सच कहूँ/मनजीत नरूआणा<br />
<strong>चुघ्घे कलां/बठिंडा।</strong> कहते हैं जिस धरती पर पूर्ण मुर्शिद के पावन चरण कमल पड़ जाएं, वह धरती भागों वाली हो जाती है। गांव और ब्लॉक चुघ्घे कलां जिला बठिंडा में डेरा सच्चा सौदा सरसा की दूसरी <strong>(spirituality)</strong> पातशाही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने सात बार अपने पावन चरण कमल इस गांव में टिकाकर रूहानी सत्संग फरमाकर हजारों लोगों को नाम की अनमोल दात बख्शी। पूजनीय परम पिता जी ने इस गांव में पहला रूहानी सत्संग 1965 में फरमाया, जहां नाम की अनमोल दात देकर गांववासियों का उद्धार किया, उसके बाद आप जी ने 1966 में रूहानी सत्संग फरमाया, फिर उसके बाद 1967, 1968, 1969 और 1971 में रूहानी सत्संग फरमाए। 1971 में हिंद-पाक युद्ध छिड़ने के कारण डेरा सच्चा सौदा सरसा में पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का पावन जन्म भंडारा नहीं मनाया गया। जो बाद में पूजनीय परम पिता जी ने यही भंडारा दिसंबर महीने में गांव चुघ्घे कलां आकर मनाया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें</strong>: <a href="http://10.0.0.122:1245/shah-mastana-ji-maharaj-5/">मेमनों के बहाने पोते बख्शे</a></p>
<p style="text-align:justify;">पुराने सत्संगी डॉ. बलदेव सिंह इन्सां ने जानकारी देते हुए बताया एक बार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने रूहानी सत्संग दौरान कव्वाली ‘मस्तां तूं किहड़ी पीनी है’ बुलवाई तो सत्संग में बैठी साध-संगत खड़ी होकर झूमने लगी, उस समय पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए कि बेटा अभी तो ढ़क्कन ही खोला है, पिलाई तो है ही नहीं। इसके बाद पूजनीय परम पिता जी, डॉक्टर बलदेव सिंह इन्सां के घर पावन चरण कमल टिकाने के लिए पधारे, जहां उनकी माता जंगीर कौर ने पूजनीय परम पिता जी से अर्ज की कि पिता जी भूत-प्रेत परेशान करते हैं तब इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया कि जिसने नाम-शब्द ले लिया है उसके भूत-पे्रत नजदीक भी नहीं आता। जितने बार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने इस गांव में सत्संग फरमाए उतने बार आप जी का उतारा नाजर सिंह मिस्त्री, प्रीतम सिंह, अजायब सिंह और तेज सिंह मिस्त्री के घर रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार पूजनीय परम पिता जी ने सेवा समिति मैंबर बलजिन्द्र सिंह इन्सां के घर अपने पावन चरण कमल टिकाए। आखिरी बार जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज 15 जनवरी 1978 को रूहानी सत्संग फरमाने के लिए इस गांव में पधारे तो पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए कि गांव का नाम है ‘चुघ्घा, लेकर नाम कर दो उघ्घा, फिर बनेगा उघ्घा, फिर हो जाएगा चुघ्घा।’ आप की दया मेहर रहमत से ही 1994 में इस गांव का नाम और ब्लॉक चुघ्घे कलां बना।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए ब्लॉक चुघ्घे कलां की साध-संगत मानवता भलाई के 142 कार्यों में लगातार हिस्सा ले रही है। अब तक ब्लॉक के सेवादारों द्वारा मरणोंपरांत दर्जनों शरीरदान मेडीकल रिसर्च के लिए दान किए जा चुके हैं, दर्जनों जरूरतमंद परिवारों को घर बनाकर दिए जा चुके हैं। पूजनीय परम पिता जी की दया मेहर रहमत से समूह ब्लॉक के डेरा श्रद्धालु सब सुखों भरी जिंदगी व्यत्तीत कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/spirituality/article-38797</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Oct 2022 19:34:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्यारे सतगुरू जी ने बख्शी पुत्र की दात</title>
                                    <description><![CDATA[जीवां बाई फाजिल्का जिले के नुकेरिया गांव की रहने वाली थी। वह उन दिनों अपनी शादीशुदा बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित थी क्योंकि जीवां बाई की बेटी जट्टो बाई के चार लड़कियां ही थी कोई पुत्र नहीं था। इसलिए जीवां बाई के दामाद बलवंत सिंह के सगे-संबंधी बलवंत पर दूसरी शादी का दवाब बना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/dear-satguru-ji-gave-son/article-33882"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/mastana-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवां बाई फाजिल्का जिले के नुकेरिया गांव की रहने वाली थी। वह उन दिनों अपनी शादीशुदा बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित थी क्योंकि जीवां बाई की बेटी जट्टो बाई के चार लड़कियां ही थी कोई पुत्र नहीं था। इसलिए जीवां बाई के दामाद बलवंत सिंह के सगे-संबंधी बलवंत पर दूसरी शादी का दवाब बना रहे थे। हालांकि बलवंत सिंह खुद नेक ख्यालों वाला व्यक्ति था लेकिन घरवालों के पुत्र मोह के कारण वह भी दूसरी शादी करने के लिए मजबूर था।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवां बाई व उसकी बेटी को यह चिंता दिन-रात घुन की तरह खाए जा रही थी। इसी दौरान जीवां बाई ने अपनी इस परेशानी के बारे में अपनी बहन को बताया जो सरसा जिले के गांव सुचान कोटली में ब्याही थी और डेरा सच्चा सौदा में श्रद्धा रखती थी। उसने अपनी बहन की परेशानी सुनकर उसे सरसा डेरे में चलने की सलाह दी और कहा कि सच्चे सौदे वाले पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज तेरी इस समस्या को अवश्य हल कर देेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुनकर जीवां बाई डेरे में आने के लिए बैचेन हो उठी और शीघ्र ही अपनी बहन के साथ आश्रम में आ गई। पूजनीय बेपरवाह जी (Satguru Ji) उस समय तेरावास के प्रांगण में थोड़ी सी साध-संगत के सम्मुख मूढ़े पर विराजमान थे। हृदय में बेटी के लिए लड़के की इच्छा लिए जीवां बाई अपनी बहन के साथ साध-संगत के पीछे ही बैठ गई। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने उस समय साध-संगत के लिए वचन फरमाया, ‘‘सारे भेद इन्सान के अंदर है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंदर कारीगर बैठा है जो तेरे शरीर का सारा इंतजाम करता है। लेकिन तुझे उसकी मेहर का पता नहीं कि उसने तेरा इंतजाम तेरे पैदा होने से पहले ही कर रखा है। जब सतगुरू की कृपा द्वारा इन्सान अपने अंदर देखता है तो वह अपने आप का आशिक हो जाता है पर तूने अपने राम का शुक्राना नहीं किया। तेरा फर्ज है कि सुबह उठकर रोज इस दुनिया के मालिक को याद किया कर।’’</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद पूजनीय बेपरवाह जी (Satguru Ji) ने पवित्र मुखारबिंद से वचन फरमाया, ‘‘यहां फाजिल्का से जो बहन आई है, वह आगे आ जाए।’’ यह बात सुनकर जीवां बाई आश्चर्य चकित रह गई और सोचने लगी कि इन्हें कैसे ज्ञात हुआ कि मैं फाजिल्का से आई हूं। उसने सोचा कि बाबा जी तो सच में ही अंतर्यामी हैं। उसका विश्वास और दृढ़ हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवां बाई ने उठकर आप जी की पावन हजूरी में अपनी सारी परेशानी बयान कर दी। जीवां बाई की सारी बातें सुनने के बाद पूजनीय बेपरवाह जी ने पास ही रखी एक टोकरी में से एक केला तथा एक सेब उठाया और जीवां बाई की झोली में डालते हुए पावन वचन फरमाया, ‘‘बेटा, ये फल अपनी लड़की को जाकर खिला देना, मालिक मेहर करेगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">फलों का प्रसाद लेकर जीवां बाई तुरंत अपनी बेटी के पास पहुंची और उसे वह प्रसाद खिला दिया। मुर्शिद जी (Satguru Ji) की रहमत हुई करीब एक साल बाद उसके घर पुत्र का जन्म हुआ। इसी तरह उनके जीवन में आया पतझड़ का मौसम एकाएक बसंत में बदल गया। आप जी की रहमत से जीवां बाई का दामाद और उसका परिवार नाम दान प्राप्त कर सत्संगी बन गया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 21:45:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’</title>
                                    <description><![CDATA[यह बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाईनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी दिन शाम को मैं सांगला गांव में एक हजार वोल्टेज पर काम कर रहा था। अचानक दुर्घटना हुई और बिजली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/param-pita-shah-satnam-singh-ji-said-son-it-was-a-terrible-karma/article-33659"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/param-pita-shah-satnam-singh-ji.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाईनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी दिन शाम को मैं सांगला गांव में एक हजार वोल्टेज पर काम कर रहा था। अचानक दुर्घटना हुई और बिजली की तार मेरे कंधे को छू गई। कपड़ों में आग लग गई और मेरा शरीर बुरी तरह झुलस गया। मैं दो दिन तक अस्पताल में बेहोश रहा। मेरी हालत गंभीर थी। इस सारी दुर्घटना की जानकारी मेरे रिश्तेदार पुरूषोत्तम लाल के माध्यम से पूजनीय परम पिता जी के पास जा पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने प्रसाद देते हुए फरमाया, ‘‘यह प्रसाद जंगीर सिंह को जाकर खिला दो।’’ उन्होंने यह प्रसाद लाकर मुझे दिया। मैंने उस प्रसाद को ग्रहण किया और लगभग बीस दिन में मैं बिल्कुल स्वस्थ हो गया, जबकि डॉक्टरों के अनुसार मुझे ठीक होने में लगभग एक वर्ष लगना था। मैं साध-संगत के सहयोग से मासिक सत्संग में पहुंचा तो प्यारे सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने वचन फरमाए, ‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मुझे नई जिंदगी बख्शी।<br />
<em><strong>श्री जंगीर सिंह, लोहाखेड़ा, फतेहाबाद(हरियाणा)</strong></em></p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 20:30:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>‘‘बेटा, परवाह न कर ! मालिक खुशियां बख्शेगा।’’</title>
                                    <description><![CDATA[17जनवरी 1976 गांव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज (Satguru) शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गांव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी पक्का और सुंदर होता तो वह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/son-dont-care-satguru-will-spare-happiness/article-33631"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/param-pita-ji2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">17जनवरी 1976 गांव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज (Satguru) शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गांव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी पक्का और सुंदर होता तो वह पूजनीय परम पिता जी से अपने घर पर चरण टिकाने की प्रार्थना करा सकता। पूजनीय परम पिता जी घूमने के लिए खेतों की तरफ जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही उस फौजी भाई का घर आया तो पूजनीय परम पिता जी उसके घर जाकर वहां पर रखे एक मूढ़े पर जा बैठे। फौजी की आंखों से पे्रेम व खुशी के आंसू बहने लगे। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। पूजनीय परम पिता जी ने उसकी सच्ची तड़प को पूरा किया तथा स्वयं कहकर उससे चाय बनवाई। पूजनीय पिता जी ने वचन फरमाए, ‘‘परवाह न कर! मालिक खुशियां बख्शेगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">उस इन्सान पर प्यारे मुर्शिद दातार जी (Satguru) ने इतनी रहमत की कि उस फौजी के चार पुत्र सरकारी नौकरी पर हैं। सारा परिवार साध-संगत की सेवा में बढ़-चढ़ कर भाग लेता है। पूजनीय परम पिता जी ने पावन वचनों द्वारा उसकी निर्धनता दूर कर उसे खुशहाली बख्श दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हीं दिनों राजस्थान के एक गांव में रात का सत्संग था। पूजनीय परम पिता जी सत्संग से पहले शाम को बाहर खेतों में सैर करने के लिए निकले। शहनशाह जी एक ऊंचे टीले पर जाकर विराजमान हो गए। दलीप सिंह रागी को कोई भजन सुनाने का हुक्म फरमाया। धीरे-धीरे साध-संगत भी आ गई। अभी भजन चल ही रहे थे कि एक सेवादार ने देखा कि पश्चिम की तरफ से बहुत ही जबरदस्त तूफान उठा है और साध-संगत की तरफ आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सेवादार ने पूजनीय परम पिता जी के पास जाकर अर्ज की कि ‘‘शहनशाह जी, बहुत ही जबरदस्त तूफान आ रहा है।’’ इस पर पूजनीय परम पिताजी ने कोई ध्यान नहीं दिया। जब उस सेवादार को लगा कि यह तो बिल्कुल ही नजदीक आ गया है तो उससे रहा नहीं गया और उसने फिर दोबारा हाथ जोड़कर शहनशाह जी के पावन चरण कमलों में विनती की, ‘‘शहनशाह जी! ये तो बिल्कुल ही पास आ गया है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘ठीक है, चलो भाई!’’ इस प्रकार साध-संगत को आज्ञा प्रदान कर शहनशाह जी रात्रि विश्राम वाली जगह पर आ गए। सीढ़ियां चढ़ते हुए जब पूजनीय परम पिता जी विश्राम स्थल की ओर ऊपर जा रहे थे तो वचन फरमाया, ‘‘बे-मौसम बादल कहां से आ गया।’’ इसके बाद जब सेवादार ने मुड़कर देखा तो मीलों तक तूफान का कोई नामो निशान नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारे सतगुरू जी (Satguru) ने न जाने उसे कहां खत्म कर दिया। जबकि उस समय ऐसा स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि यह तूफान तो सभी को अपनी चपेट में ले लेगा, लेकिन वहां तो हवा का तेज झोंका भी नहीं आया। मालिक ने वो आंधी तूफान पल में ही कहीं और टालकर साध-संगत की स्वयं रक्षा की।</p>
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                                                            <category>अध्यात्म</category>
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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 09:00:37 +0530</pubDate>
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                <title>‘‘बेटा, लड़की को पढ़ाओ, लड़की भी पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।’’</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/educate-the-girl-a-girl-can-also-make-her-parents-proud/article-33404"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/param-pita-ji.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मेरे घर सबसे पहले लड़की ने जन्म लिया। उसके बाद दस वर्ष तक कोई संतान नहीं हुई। इस पर हमारे रिश्तेदारों ने हमें ताने मारने शुरू कर दिए कि तुमने तो डेरा सच्चा सौदा, सरसा वाले संत जी से नाम ले रखा है, तुम्हारे लड़का क्यों नहीं हुआ? लेकिन मुझे अपने अपने सतगुरू पर पूरा यकीन था कि वे अवश्य ही मेरी मुराद पूरी करेंगे। एक दिन हम पूजनीय परम पिता जी को मिलने आश्रम में पहुंचे। पूजनीय परम पिता जी सुबह की मजलिस में नीम के पास सुसज्जित चौकी पर विराजमान थे।</p>
<p style="text-align:left;">तब हमनें पूजनीय परम पिता जी प्रार्थना की कि पिता जी, हमारे घर एक लड़की ही है, लड़का नहीं है, दया-मेहर करो जी। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, लड़की को पढ़ाओ, लड़की भी पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।’’ जो दात मालिक ने देनी है वो देनी ही है। उसे कोई नहीं रोक सकता। इस प्रकार के पावन वचन सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि पूजनीय परम पिता जी ने हमारी अरदास मंजूर कर ली है। पूजनीय परम पिता जी के पावन वचनों के अनुसार मेरे घर सन् 1980 में लड़के ने जन्म लिया।<br />
<strong><em>श्री चरण सिंह, डूल्ट, फतेहाबाद (हरियाणा)</em></strong></p>
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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 21:28:34 +0530</pubDate>
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