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                <title>Spirituality - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>रूहानियत: जब बेपरवाह साईं जी का पावन भंडारा मनाने पंजाब पहुंचे पूजनीय परम पिता जी</title>
                                    <description><![CDATA[‘गांव का नाम चुघ्घां, नाम लेकर कर दो उघ्घा, फिर बनेगा उघ्घा, फिर हो जाएगा चुघ्घा’ सच कहूँ/मनजीत नरूआणा चुघ्घे कलां/बठिंडा। कहते हैं जिस धरती पर पूर्ण मुर्शिद के पावन चरण कमल पड़ जाएं, वह धरती भागों वाली हो जाती है। गांव और ब्लॉक चुघ्घे कलां जिला बठिंडा में डेरा सच्चा सौदा सरसा की दूसरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/spirituality/article-38797"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/param-pita-shah-satnam-singh-ji.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>‘गांव का नाम चुघ्घां, नाम लेकर कर दो उघ्घा, फिर बनेगा उघ्घा, फिर हो जाएगा चुघ्घा’</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सच कहूँ/मनजीत नरूआणा<br />
<strong>चुघ्घे कलां/बठिंडा।</strong> कहते हैं जिस धरती पर पूर्ण मुर्शिद के पावन चरण कमल पड़ जाएं, वह धरती भागों वाली हो जाती है। गांव और ब्लॉक चुघ्घे कलां जिला बठिंडा में डेरा सच्चा सौदा सरसा की दूसरी <strong>(spirituality)</strong> पातशाही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने सात बार अपने पावन चरण कमल इस गांव में टिकाकर रूहानी सत्संग फरमाकर हजारों लोगों को नाम की अनमोल दात बख्शी। पूजनीय परम पिता जी ने इस गांव में पहला रूहानी सत्संग 1965 में फरमाया, जहां नाम की अनमोल दात देकर गांववासियों का उद्धार किया, उसके बाद आप जी ने 1966 में रूहानी सत्संग फरमाया, फिर उसके बाद 1967, 1968, 1969 और 1971 में रूहानी सत्संग फरमाए। 1971 में हिंद-पाक युद्ध छिड़ने के कारण डेरा सच्चा सौदा सरसा में पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का पावन जन्म भंडारा नहीं मनाया गया। जो बाद में पूजनीय परम पिता जी ने यही भंडारा दिसंबर महीने में गांव चुघ्घे कलां आकर मनाया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें</strong>: <a href="http://10.0.0.122:1245/shah-mastana-ji-maharaj-5/">मेमनों के बहाने पोते बख्शे</a></p>
<p style="text-align:justify;">पुराने सत्संगी डॉ. बलदेव सिंह इन्सां ने जानकारी देते हुए बताया एक बार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने रूहानी सत्संग दौरान कव्वाली ‘मस्तां तूं किहड़ी पीनी है’ बुलवाई तो सत्संग में बैठी साध-संगत खड़ी होकर झूमने लगी, उस समय पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए कि बेटा अभी तो ढ़क्कन ही खोला है, पिलाई तो है ही नहीं। इसके बाद पूजनीय परम पिता जी, डॉक्टर बलदेव सिंह इन्सां के घर पावन चरण कमल टिकाने के लिए पधारे, जहां उनकी माता जंगीर कौर ने पूजनीय परम पिता जी से अर्ज की कि पिता जी भूत-प्रेत परेशान करते हैं तब इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया कि जिसने नाम-शब्द ले लिया है उसके भूत-पे्रत नजदीक भी नहीं आता। जितने बार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने इस गांव में सत्संग फरमाए उतने बार आप जी का उतारा नाजर सिंह मिस्त्री, प्रीतम सिंह, अजायब सिंह और तेज सिंह मिस्त्री के घर रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार पूजनीय परम पिता जी ने सेवा समिति मैंबर बलजिन्द्र सिंह इन्सां के घर अपने पावन चरण कमल टिकाए। आखिरी बार जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज 15 जनवरी 1978 को रूहानी सत्संग फरमाने के लिए इस गांव में पधारे तो पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए कि गांव का नाम है ‘चुघ्घा, लेकर नाम कर दो उघ्घा, फिर बनेगा उघ्घा, फिर हो जाएगा चुघ्घा।’ आप की दया मेहर रहमत से ही 1994 में इस गांव का नाम और ब्लॉक चुघ्घे कलां बना।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए ब्लॉक चुघ्घे कलां की साध-संगत मानवता भलाई के 142 कार्यों में लगातार हिस्सा ले रही है। अब तक ब्लॉक के सेवादारों द्वारा मरणोंपरांत दर्जनों शरीरदान मेडीकल रिसर्च के लिए दान किए जा चुके हैं, दर्जनों जरूरतमंद परिवारों को घर बनाकर दिए जा चुके हैं। पूजनीय परम पिता जी की दया मेहर रहमत से समूह ब्लॉक के डेरा श्रद्धालु सब सुखों भरी जिंदगी व्यत्तीत कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/spirituality/article-38797</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Oct 2022 19:34:02 +0530</pubDate>
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                <title>प्यारे सतगुरू जी ने बख्शी पुत्र की दात</title>
                                    <description><![CDATA[जीवां बाई फाजिल्का जिले के नुकेरिया गांव की रहने वाली थी। वह उन दिनों अपनी शादीशुदा बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित थी क्योंकि जीवां बाई की बेटी जट्टो बाई के चार लड़कियां ही थी कोई पुत्र नहीं था। इसलिए जीवां बाई के दामाद बलवंत सिंह के सगे-संबंधी बलवंत पर दूसरी शादी का दवाब बना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/dear-satguru-ji-gave-son/article-33882"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/mastana-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवां बाई फाजिल्का जिले के नुकेरिया गांव की रहने वाली थी। वह उन दिनों अपनी शादीशुदा बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित थी क्योंकि जीवां बाई की बेटी जट्टो बाई के चार लड़कियां ही थी कोई पुत्र नहीं था। इसलिए जीवां बाई के दामाद बलवंत सिंह के सगे-संबंधी बलवंत पर दूसरी शादी का दवाब बना रहे थे। हालांकि बलवंत सिंह खुद नेक ख्यालों वाला व्यक्ति था लेकिन घरवालों के पुत्र मोह के कारण वह भी दूसरी शादी करने के लिए मजबूर था।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवां बाई व उसकी बेटी को यह चिंता दिन-रात घुन की तरह खाए जा रही थी। इसी दौरान जीवां बाई ने अपनी इस परेशानी के बारे में अपनी बहन को बताया जो सरसा जिले के गांव सुचान कोटली में ब्याही थी और डेरा सच्चा सौदा में श्रद्धा रखती थी। उसने अपनी बहन की परेशानी सुनकर उसे सरसा डेरे में चलने की सलाह दी और कहा कि सच्चे सौदे वाले पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज तेरी इस समस्या को अवश्य हल कर देेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुनकर जीवां बाई डेरे में आने के लिए बैचेन हो उठी और शीघ्र ही अपनी बहन के साथ आश्रम में आ गई। पूजनीय बेपरवाह जी (Satguru Ji) उस समय तेरावास के प्रांगण में थोड़ी सी साध-संगत के सम्मुख मूढ़े पर विराजमान थे। हृदय में बेटी के लिए लड़के की इच्छा लिए जीवां बाई अपनी बहन के साथ साध-संगत के पीछे ही बैठ गई। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने उस समय साध-संगत के लिए वचन फरमाया, ‘‘सारे भेद इन्सान के अंदर है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंदर कारीगर बैठा है जो तेरे शरीर का सारा इंतजाम करता है। लेकिन तुझे उसकी मेहर का पता नहीं कि उसने तेरा इंतजाम तेरे पैदा होने से पहले ही कर रखा है। जब सतगुरू की कृपा द्वारा इन्सान अपने अंदर देखता है तो वह अपने आप का आशिक हो जाता है पर तूने अपने राम का शुक्राना नहीं किया। तेरा फर्ज है कि सुबह उठकर रोज इस दुनिया के मालिक को याद किया कर।’’</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद पूजनीय बेपरवाह जी (Satguru Ji) ने पवित्र मुखारबिंद से वचन फरमाया, ‘‘यहां फाजिल्का से जो बहन आई है, वह आगे आ जाए।’’ यह बात सुनकर जीवां बाई आश्चर्य चकित रह गई और सोचने लगी कि इन्हें कैसे ज्ञात हुआ कि मैं फाजिल्का से आई हूं। उसने सोचा कि बाबा जी तो सच में ही अंतर्यामी हैं। उसका विश्वास और दृढ़ हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवां बाई ने उठकर आप जी की पावन हजूरी में अपनी सारी परेशानी बयान कर दी। जीवां बाई की सारी बातें सुनने के बाद पूजनीय बेपरवाह जी ने पास ही रखी एक टोकरी में से एक केला तथा एक सेब उठाया और जीवां बाई की झोली में डालते हुए पावन वचन फरमाया, ‘‘बेटा, ये फल अपनी लड़की को जाकर खिला देना, मालिक मेहर करेगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">फलों का प्रसाद लेकर जीवां बाई तुरंत अपनी बेटी के पास पहुंची और उसे वह प्रसाद खिला दिया। मुर्शिद जी (Satguru Ji) की रहमत हुई करीब एक साल बाद उसके घर पुत्र का जन्म हुआ। इसी तरह उनके जीवन में आया पतझड़ का मौसम एकाएक बसंत में बदल गया। आप जी की रहमत से जीवां बाई का दामाद और उसका परिवार नाम दान प्राप्त कर सत्संगी बन गया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 21:45:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’</title>
                                    <description><![CDATA[यह बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाईनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी दिन शाम को मैं सांगला गांव में एक हजार वोल्टेज पर काम कर रहा था। अचानक दुर्घटना हुई और बिजली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/param-pita-shah-satnam-singh-ji-said-son-it-was-a-terrible-karma/article-33659"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/param-pita-shah-satnam-singh-ji.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाईनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी दिन शाम को मैं सांगला गांव में एक हजार वोल्टेज पर काम कर रहा था। अचानक दुर्घटना हुई और बिजली की तार मेरे कंधे को छू गई। कपड़ों में आग लग गई और मेरा शरीर बुरी तरह झुलस गया। मैं दो दिन तक अस्पताल में बेहोश रहा। मेरी हालत गंभीर थी। इस सारी दुर्घटना की जानकारी मेरे रिश्तेदार पुरूषोत्तम लाल के माध्यम से पूजनीय परम पिता जी के पास जा पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने प्रसाद देते हुए फरमाया, ‘‘यह प्रसाद जंगीर सिंह को जाकर खिला दो।’’ उन्होंने यह प्रसाद लाकर मुझे दिया। मैंने उस प्रसाद को ग्रहण किया और लगभग बीस दिन में मैं बिल्कुल स्वस्थ हो गया, जबकि डॉक्टरों के अनुसार मुझे ठीक होने में लगभग एक वर्ष लगना था। मैं साध-संगत के सहयोग से मासिक सत्संग में पहुंचा तो प्यारे सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने वचन फरमाए, ‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मुझे नई जिंदगी बख्शी।<br />
<em><strong>श्री जंगीर सिंह, लोहाखेड़ा, फतेहाबाद(हरियाणा)</strong></em></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 20:30:05 +0530</pubDate>
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                <title>‘‘बेटा, परवाह न कर ! मालिक खुशियां बख्शेगा।’’</title>
                                    <description><![CDATA[17जनवरी 1976 गांव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज (Satguru) शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गांव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी पक्का और सुंदर होता तो वह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/son-dont-care-satguru-will-spare-happiness/article-33631"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/param-pita-ji2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">17जनवरी 1976 गांव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज (Satguru) शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गांव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी पक्का और सुंदर होता तो वह पूजनीय परम पिता जी से अपने घर पर चरण टिकाने की प्रार्थना करा सकता। पूजनीय परम पिता जी घूमने के लिए खेतों की तरफ जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही उस फौजी भाई का घर आया तो पूजनीय परम पिता जी उसके घर जाकर वहां पर रखे एक मूढ़े पर जा बैठे। फौजी की आंखों से पे्रेम व खुशी के आंसू बहने लगे। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। पूजनीय परम पिता जी ने उसकी सच्ची तड़प को पूरा किया तथा स्वयं कहकर उससे चाय बनवाई। पूजनीय पिता जी ने वचन फरमाए, ‘‘परवाह न कर! मालिक खुशियां बख्शेगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">उस इन्सान पर प्यारे मुर्शिद दातार जी (Satguru) ने इतनी रहमत की कि उस फौजी के चार पुत्र सरकारी नौकरी पर हैं। सारा परिवार साध-संगत की सेवा में बढ़-चढ़ कर भाग लेता है। पूजनीय परम पिता जी ने पावन वचनों द्वारा उसकी निर्धनता दूर कर उसे खुशहाली बख्श दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हीं दिनों राजस्थान के एक गांव में रात का सत्संग था। पूजनीय परम पिता जी सत्संग से पहले शाम को बाहर खेतों में सैर करने के लिए निकले। शहनशाह जी एक ऊंचे टीले पर जाकर विराजमान हो गए। दलीप सिंह रागी को कोई भजन सुनाने का हुक्म फरमाया। धीरे-धीरे साध-संगत भी आ गई। अभी भजन चल ही रहे थे कि एक सेवादार ने देखा कि पश्चिम की तरफ से बहुत ही जबरदस्त तूफान उठा है और साध-संगत की तरफ आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सेवादार ने पूजनीय परम पिता जी के पास जाकर अर्ज की कि ‘‘शहनशाह जी, बहुत ही जबरदस्त तूफान आ रहा है।’’ इस पर पूजनीय परम पिताजी ने कोई ध्यान नहीं दिया। जब उस सेवादार को लगा कि यह तो बिल्कुल ही नजदीक आ गया है तो उससे रहा नहीं गया और उसने फिर दोबारा हाथ जोड़कर शहनशाह जी के पावन चरण कमलों में विनती की, ‘‘शहनशाह जी! ये तो बिल्कुल ही पास आ गया है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘ठीक है, चलो भाई!’’ इस प्रकार साध-संगत को आज्ञा प्रदान कर शहनशाह जी रात्रि विश्राम वाली जगह पर आ गए। सीढ़ियां चढ़ते हुए जब पूजनीय परम पिता जी विश्राम स्थल की ओर ऊपर जा रहे थे तो वचन फरमाया, ‘‘बे-मौसम बादल कहां से आ गया।’’ इसके बाद जब सेवादार ने मुड़कर देखा तो मीलों तक तूफान का कोई नामो निशान नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारे सतगुरू जी (Satguru) ने न जाने उसे कहां खत्म कर दिया। जबकि उस समय ऐसा स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि यह तूफान तो सभी को अपनी चपेट में ले लेगा, लेकिन वहां तो हवा का तेज झोंका भी नहीं आया। मालिक ने वो आंधी तूफान पल में ही कहीं और टालकर साध-संगत की स्वयं रक्षा की।</p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 09:00:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘‘बेटा, लड़की को पढ़ाओ, लड़की भी पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।’’</title>
                                    <description><![CDATA[मेरे घर सबसे पहले लड़की ने जन्म लिया। उसके बाद दस वर्ष तक कोई संतान नहीं हुई। इस पर हमारे रिश्तेदारों ने हमें ताने मारने शुरू कर दिए कि तुमने तो डेरा सच्चा सौदा, सरसा वाले संत जी से नाम ले रखा है, तुम्हारे लड़का क्यों नहीं हुआ? लेकिन मुझे अपने अपने सतगुरू पर पूरा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/educate-the-girl-a-girl-can-also-make-her-parents-proud/article-33404"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/param-pita-ji.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मेरे घर सबसे पहले लड़की ने जन्म लिया। उसके बाद दस वर्ष तक कोई संतान नहीं हुई। इस पर हमारे रिश्तेदारों ने हमें ताने मारने शुरू कर दिए कि तुमने तो डेरा सच्चा सौदा, सरसा वाले संत जी से नाम ले रखा है, तुम्हारे लड़का क्यों नहीं हुआ? लेकिन मुझे अपने अपने सतगुरू पर पूरा यकीन था कि वे अवश्य ही मेरी मुराद पूरी करेंगे। एक दिन हम पूजनीय परम पिता जी को मिलने आश्रम में पहुंचे। पूजनीय परम पिता जी सुबह की मजलिस में नीम के पास सुसज्जित चौकी पर विराजमान थे।</p>
<p style="text-align:left;">तब हमनें पूजनीय परम पिता जी प्रार्थना की कि पिता जी, हमारे घर एक लड़की ही है, लड़का नहीं है, दया-मेहर करो जी। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, लड़की को पढ़ाओ, लड़की भी पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।’’ जो दात मालिक ने देनी है वो देनी ही है। उसे कोई नहीं रोक सकता। इस प्रकार के पावन वचन सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि पूजनीय परम पिता जी ने हमारी अरदास मंजूर कर ली है। पूजनीय परम पिता जी के पावन वचनों के अनुसार मेरे घर सन् 1980 में लड़के ने जन्म लिया।<br />
<strong><em>श्री चरण सिंह, डूल्ट, फतेहाबाद (हरियाणा)</em></strong></p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 21:28:34 +0530</pubDate>
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                <title>पूज्य साईं जी ने स्वप्न में दर्शन देकर जीव को करवाया  गलती का अहसास</title>
                                    <description><![CDATA[श्री बन्ता सिंह गांव श्री जलालआणा साहिब ने बताया कि पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज (Pujya Sai ji) के हुक्म द्वारा जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज डेरा सच्चा सौदा सरसा में आकर रहने लगे तो पीछे से पूजनीय बड़ी माता जी ने एक दिन मुझे बुलाकर कहा, ‘‘बन्ता सिंह! अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/pujya-sai-ji-gave-a-vision-in-a-dream-and-made-the-person-realize-the-mistake/article-33326"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/holy-tribute-special-true-spiritual-master-of-humanity.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">श्री बन्ता सिंह गांव श्री जलालआणा साहिब ने बताया कि पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज (Pujya Sai ji) के हुक्म द्वारा जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज डेरा सच्चा सौदा सरसा में आकर रहने लगे तो पीछे से पूजनीय बड़ी माता जी ने एक दिन मुझे बुलाकर कहा, ‘‘बन्ता सिंह! अपने खेत मजदूर (सीरी) से कुछ रूपये लेने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तू जाकर उससे पता कर कि उसने जो संत जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज) को कुछ हिसाब-किताब देना है, वह दे दे।’’ जब मैंने पूजनीय माता जी के कहने पर उस नौकर से जाकर कहा कि भाई! तू पूजनीय परम पिता जी के घर का हिसाब-किताब चुकता कर दे, मुझे पूजनीय माता जी ने तेरे पास भेजा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर उसने जवाब दिया कि उसने तो पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का हिसाब-किताब चुकता कर दिया। उस पर एक पाई भी बकाया नहीं है। उस समय उस सीरी के मन ने यह विचार दिया कि सतनाम सिंह जी तो सरसा चले गए हैं। अब पीछे पूजनीय माता जी को मेरे हिसाब का क्या पता? इसलिए रूपये देने से मुकर जाओ।</p>
<p style="text-align:justify;">वह मेरा क्या बिगाड़ लेंगे? मैंने घर वापिस जाकर पूजनीय माता जी को बताया कि माता जी! उसने तो यह जवाब दिया है। उससे लगभग दो साल बाद सन् 1962 में वही मजदूर एक दिन मेरे पास आया और कहने लगा-बन्ता सिंह! आप मेरे साथ पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के पास डेरा सच्चा सौदा सरसा में चलो।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने उससे पूछा कि क्या काम है? उसने मुझे बताया कि मैं तेरे सामने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का हिसाब-किताब मुकर गया था परंतु आज रात को पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज (Pujya Sai ji) स्वयं उसके पास आए और शहनशाह जी ने सख्ती से कहा कि तूने जो रूपये देने हैं वह हराम के नहीं है। दो साल हो गए हैं तूने पैसे वापिस देने की कोई बात नहीं की और हिदायत दी कि जरूर रूपये वापिस कर देना। मैंने उसे कहा कि हम कल दरबार चलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वह कहने लगा तुम तो कल की बात करते हो लेकिन मुझे अभी भी डर लग रहा है कि यदि आज रूपये न दिये तो पूजनलीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज मेरा पता नहीं क्या हाल करेंगे। इसलिए तुम आज ही मेरे साथ चलो। वह नौकर और मैं दोनों उसी दिन ही डेरा सच्चा सौदा सरसा में पहुंच गए। दरबार में आकर हम पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">शहनशाह जी ने फरमाया, ‘‘सुना भाई! कैसे दर्शन दिए हैं?’’ इस पर उस नौकर ने बताया कि सच्चे पातशाह जी! मैंने आप जी के पांच सौ रूपये देने हैं व देने आया हूं। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘भाई! हमने तो तेरे से रूपये मांगें नहीं।’’ उस नौकर ने जवाब दिया कि शहनशाह बेपरवाह शाह मस्ताना जी ने उसे अंदर से ख्याल देकर यहां भेजा है। उन्हीं के भय से वह बन्ता सिंह को साथ लेकर रूपये देने आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात बताकर उसने पांच सौ रूपये निकाले और पूजनीय परम पिता जी ने उन रूपयों में से सौ रूपये उसको वापिस दे दिये और फरमाया, ‘‘तू गरीब आदमी है यह पैसे घर के काम में खर्च कर लेना।’’ लेकिन वह नौकर रात वाली घटना से इतना डरा हुआ था कि वह सौ रूपये वापिस नहीं ले रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के पास प्रार्थना की कि शहनशाह जी की बेपरवाह जी से मुझे बहुत डर लगता है। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘भाई! तू अब न डर। हम बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज से तुझे माफी दिला देंगे। हम उन्हीं की रजा से तुम्हें यह सौ रूपये वापिस कर रहे हैं। अब बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज तुझे कुछ नहीं कहेंगे।’’</p>
<p style="text-align:justify;">यह वचन सुनकर उसने वे सौ रूपये वापिस ले लिए। पूजनीय परम पिता जी ने उसी समय मुझे हुक्म दिया, ‘‘बन्ता सिंह! यह चार सौ रूपये ले जाकर जिम्मेवार भाई के पास जमा करवा दे, डेरे की सेवा में काम आएंगे।’’ मैंने पूजनीय परम पिता जी हुक्म द्वारा वे रूपये जिम्मेवार भाई के पास जाकर करवा दिए। इस प्रकार पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने अपने शाही परिवार से ठग्गी मारने वाले उस व्यक्ति को अहसास करवाया।</p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 21:23:09 +0530</pubDate>
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                <title>पूज्य हजूर पिता जी ने बच्चे को बख्शा नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां, सुपुत्र श्री हरनेक सिंह प्रीत नगर, गली नं. 12, सरसा (हरियाणा) प्रेमी जी अपने सतगुरू (Poojya Hazoor Pita ji) कुल मालिक पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की उपरोक्त अनुसार अपार रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार लिखित में बताता है:- प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां ने बताया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/poojya-hazoors-pita-ji-spared-the-child-a-new-life/article-33177"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/rama-naam-is-the-power-that-gives-will-power.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां, सुपुत्र श्री हरनेक सिंह प्रीत नगर, गली नं. 12, सरसा (हरियाणा) प्रेमी जी अपने सतगुरू (Poojya Hazoor Pita ji) कुल मालिक पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की उपरोक्त अनुसार अपार रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार लिखित में बताता है:-</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां ने बताया कि साल 2002 की बात है, उन दिनों में मेरा बड़ा लड़का गुरप्रीत सिंह यूकेजी कक्षा में पढ़ता था। उस समय वह करीब 6 वर्ष का था। एक दिन बाहर पक्की सड़क पर उसका एक तेज रफ्तार स्कूटर के साथ एक्सीडैंट हो गया। स्कूटर तेज गति में था, जोरदार टक्कर लगी, बच्चे को सड़क पर पटक दिया। उसके सिर में जबरदस्त चोट लगी, सिर फट गया। बच्चा बेहोश हो गया। इसके साथ ही उसे लकवा (अधरंग) का भी जबरदस्त अटैक हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुत ही नाजुक स्थिति में हमने उस लुधियाना के एक प्राईवेट अस्पताल में दाखिल करवा दिया। डॉक्टरों ने बच्चे की हालत को देखते ही ना -उम्मीदी बताई कि फैसला इसकी किस्मत पर है। वैसे भी 24 घंटे से पहले कुछ भी नहीं कहा जा सकता। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि अगर बच्चा बच भी गया तो मान लो एक-दो प्रसेंट, तो इसके दिमाग का आॅपरेशन करना पड़ेगा। हमने उन्हें कह दिया कि आॅपरेशन आप अभी कर दीजिए। वो कहने लगे कि बच्चे के बचने की उम्मीद बहुत ही कम है, आप पैसा क्यों बर्बाद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने बच्चे की उस नाजुक स्थिति और डॉक्टरों द्वारा ना-उम्मीदी प्रकट करने पर हमारा हौसला भी टूट गया था। अपने सतगुरू मुर्शिद प्यारे का सहारा ताकते अर्थात् अपने सतगुरू दाता (Poojya Hazoor Pita ji) से रहमत मांगते हुए हमनें वहीं से डेरा सच्चा सौदा सरसा में फोन मिलाया । फोन सत् ब्रह्मचारी सेवादार भाई मोहन लाल ने अटैंड किया। उस समय पूज्य हजूर पिता जी शाह मस्ताना जी धाम में रूहानी मजलिस में विराजमान थे। हमनें भाई मोहन लाल इन्सां को अपना नाम पता बताते हुए बच्चे के एक्सीडेंट और नाजुक स्थिति के बारे में विस्तार से बताया और जो कुछ डॉक्टर साहिबानों ने कहा था, वह भी सब कुछ बता दिया कि पूज्य गुरू जी ही बच्चे को जिंदगी बख्शें तो बख्शें, नहीं तो बच्चा तो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बचने की उम्मीद जरा भी नहीं है। बाई मोहन लाल जी ने हमें धैये बनाए रखने के लिए कहा, हौंसला दिया कि पूज्य पिता जी से अभी जाकर सारी बात अर्ज करता हूं और पूज्य शहनशाह जी जो वचन करेंगे, फोन पर बता दूंगा। थोड़े समय बाद ही ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ा, बाई जी ने फोन पर पूज्य सतगुरू सच्चे दाता पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के वचन ज्यों के त्यों हमें बता दिए कि पूज्य पिता जी ने वचन किए हैं कि ‘बच्चे का दोबारा जन्म हुआ है।’ पूज्य पिता जी ने यह भी वचन किए हैं कि ‘जब डॉक्टर आॅपरेशन करने लगें तो परिवार वालों ने सभी ने सुमिरन करना है और परिवार का एक मैंबर तो वहां पास बैठकर एकाग्रचित होकर लगातार सुमिरन करता ही रहे।’</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य दयालु दाता, हमारे सच्चे रहबर ने हमारे बच्चे की जान बख्श दी है, इसी हौंसले पर हमनें डॉक्टर साहिब को तुरंत आॅपरेशन करने के लिए राजी कर (मना) लिया। बच्चा आॅपरेशन थियेटर में था और हम सारा परिवार पूज्य मुर्शिदे कामिल के पावन वचनानुसार सुमिरन कर रहे थे। डॉक्टरों ने बताया कि आॅपरेशन सफल रहा। बच्चे के सिर की हड्डी टूटकर दिमाग में घुस गई थी, उसे सही स्थान पर तारों आदि से सैट कर दिया है और दूसरा यह कि सड़क की बजरी (एक दाना) भी उसके दिमाग में घुस गई थी, उसे भी निकाल दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने कहा कि जो कुछ भी हमारे हाथ में था, और हम जो भी कर सकते थे, हमनें पूरी ईमानदारी से प्रयास किया है, अब आगे बच्चे की किस्मत भगवान के हाथ है, परमात्मा से अरदास कीजिए। हमें तो मालिक की कृपा से अंदर से पूरा हौंसला था और दृढ़ विश्वास अपने सतगुरू पर कि मेरे सतगुरू शहनशाह जी ने हमारे बच्चे को दोबारा जन्म प्रदान किया है। आॅपरेशन के पांच दिन बाद बच्चे को थोड़ा होश आया। उपरांत उसकी आॅक्सीजन उतार दी गई। जिस तरह नवजात शिशु जन्म लेने के बाद रोता है ना, ठीक उसी तरह होश में आने के बाद हमारा बच्चा रोया। वह उस समय आईसीयू में था। हम भागकर आईसीयू में गए।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टरों और नर्सों ने हमें बधाईयां दी, ठीक उसी प्रकार जैसे बेटे के जन्म पर चारों तरफ से बधाईयां मिलती हैं। डॉक्टरों ने भी हमें यह कहा कि बच्चे का दोबारा जन्म हुआ है। ग्यारह दिन के बाद बच्चे को छुट्टी मिल गई और हम घर पर आ गए। हम बच्चे को डेरा सच्चा सौदा दरबार में ले गए। पूज्य पिता जी ने बच्चे को दोबारा जन्म बख्शा है, प्यारे सतगुरू जी का हमनें शुक्रिया अदा किया। पूज्य पिता जी के पावन वचनानुसार बच्चे को बीमारी वाला प्रसाद दिया गया। प्रसाद बूंदी का था, जबकि तब तक बच्चे को तरल पदार्थ दूध, ज्यूस इत्यादि खुराक पाईप के द्वारा दिया जा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">नवजात शिशु की तरह मुंह के द्वारा खाना पीना वह नहीं जान पाया था। हमनें प्रसाद बूंदी का पहले एक दाना उसके मुंह से लगाया कि पता नहीं खाएगा या नहीं। परंतु प्यारे सतगुरु दाता जी की रहमत का प्रत्यक्ष कमाल कि बच्चा प्रसाद का वह दाना धीरे-धीरे चबाने लगा और यह देखकर हमें और भी बहुत ज्यादा खुशी हुई कि घर पहुंचते-पहुंचते पूज्य पिता जी द्वारा दिया गया सारा प्रसाद बच्चे ने अच्छी तरह चबाकर खा लिया और इस तरह कुछ दिनों के बाद खुराक वाली वह पाईप भी डॉक्टरों ने उतार दी। बिल्कुल नवजात शिशु की तरह हमनें उसे बैठना सिखाया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ महीनों बाद वह अपने आप चारपाई से नीचे उतरने लगा, अपने आप धीरे-धीरे घुटनों बल रिढ़ने लगा। कभी चारपाई को पकड़कर खड़ा हो जाता तो कभी उसकी के सहारे कदम, दो कदम चल भी लेता। कभी-कभी हम भी उसके हाथ के सहारे से दो-चार कदम चलाते। लगभग एक साल के बाद बच्चे ने धीरे-धीरे मम्मी-पापा बोलना शुरू कर दिया और प्यारे सतगुरू दाता पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां मेरे सच्चे दाता रहबर की हम पर ऐसी रहमत हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चे परवरदिगार पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां मेरे मालिक ने मेरे बच्चे पर, हमारे पूरे परिवार पर अपनी दया-मेहर रहमत भरा हाथ रखा, हमारे बच्चे को मौत के मुंह में से निकालकर पूज्य पिता जी ने दोबारा नया जन्म दिया है। इससे बड़ा मालिक का करिश्मा और क्या हो सकता है, पूज्य पिता जी ने बिल्कुल हथेली पर सरसों जमा कर दिखा दी। हमारा बच्चा सही सलामत हमें लौटा दिया। हमारा एक-एक स्वास अपने सतगुरू और राम-नाम की सेवा में लग जाए, हम हमेशा अपने मुर्शिद के दर से जुड़ रहें, यही अपने दाता प्यारे की हजूरी में हमारी यही अरदास है।</p>
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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 21:48:12 +0530</pubDate>
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                <title>प्यारे सतगुरू जी की रहमत, जीव का दु:ख किया दूर</title>
                                    <description><![CDATA[यह सन् 1967 की बात है। उन दिनों मेरे पांव में फोड़ा निकला हुआ था, जिसके कारण मैं चलने-फिरने में असमर्थ था। पूजनीय परम पिता जी उस दिन सत्संग फरमाने के लिए रामां मंडी होेते हुए गांव भागी वांदर पधारे। मुझे गांव के कुछ सत्संगियों ने बताया कि पूजनीय परम पिता जी (Satguru ji’s Mercy) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/dear-satguru-jis-mercy-took-away-the-sorrow-of-the-soul/article-33006"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/parm-pita-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह सन् 1967 की बात है। उन दिनों मेरे पांव में फोड़ा निकला हुआ था, जिसके कारण मैं चलने-फिरने में असमर्थ था। पूजनीय परम पिता जी उस दिन सत्संग फरमाने के लिए रामां मंडी होेते हुए गांव भागी वांदर पधारे। मुझे गांव के कुछ सत्संगियों ने बताया कि पूजनीय परम पिता जी (Satguru ji’s Mercy) अपने गांव से होकर जाएंगे। यह खबर सुनकर मैं वैराग्य में आ गया और रोने लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंदर से मुझे ख्याल आया कि पूजनीय परम पिता जी मुझसे मिलने जरूर आएंगे। अगर बेटा बीमार हो तो उसका बाप उसे मिले बिना कैसे जा सकता है। यह सोचकर मैं और फूट-फूट कर रोने लगा। उस समय के दु:ख का अहसास शायद मेरे सतगुरू के सिवाय और किसी को नहीं था। सत्संग की समाप्ति के बाद पूजनीय परम पिता जी की जीप अचानक हमारे घर के पास आकर रूकी। हमारे सारे परिवार की खुशियों की कोई सीमा नहीं रही। पूजनीय परम पिता जी पलंग पर विराजमान हो गए। मैं उनके चरणों में बैठकर रोने लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा रो मत। बता, क्या तकलीफ है?’’ मैंने अपने फोड़े के बारे में पूजनीय परम पिता जी को बताया। फिर मैंने कहा, ‘‘पिता जी, आपके दर्शन हो गए हैं, अब सारी तकलीफ दूर हो गई है।’’ मेरे पैर पर निकला हुआ फोड़ा कुछ दिनों में अपने आप ही ठीक हो गया। इस प्रकार दयालु दातार जी (Satguru ji’s Mercy) ने मेरी तड़प को देखते हुए हमारे घर पधारकर दर्शन दिए व भयंकर रोग से मुक्ति दिलाई।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>श्री इन्द्र सिंह, जज्जल, बठिंडा (पंजाब)</strong></p>
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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 21:55:17 +0530</pubDate>
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                <title>सुमिरन, सेवा और दृढ़ यकीन रूहानियत के गहने</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इंसान जब उस परमपिता परमात्मा, सतगुरु, मौला के प्यार में, उसकी मोहब्बत में खो जाता है तो दुनिया उसके लिए कोई मायने नहीं रखती। इतना मस्त हो जाता है, बेफिक्र हो जाता है, बे-गम हो जाता है उसे लगता नहीं कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/meditation-services-and-conviction-are-the-jewels-of-spirituality/article-31578"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इंसान जब उस परमपिता परमात्मा, सतगुरु, मौला के प्यार में, उसकी मोहब्बत में खो जाता है तो दुनिया उसके लिए कोई मायने नहीं रखती। इतना मस्त हो जाता है, बेफिक्र हो जाता है, बे-गम हो जाता है उसे लगता नहीं कि वो मृत्युलोक में जी रहा है, यूं लगता है हर पल सचखंड में गुजर रहा हो, निजधाम में गुजर रहा हो। इंसान जब दुनिया में रहता है, दुनियादारी के काम-धंधे, दुनियादारी की उलझनें उसे ऐसा उलझा देती हैं कि उसे यूं लगता है शायद जिंदगी इसी का नाम है। गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियां चहूं ओर से उसे घेरकर रखती हैं,परेशानी से लबरेज रहता है पर सतगुरु मौला से जब प्यार करता है, इश्क कर लेता है तो पता ही नहीं चलता कि गम, दु:ख, चिंता,परेशानियां किधर चली जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दृढ़ यकीन हो, दृढ यकीन के साथ जब इंसान अपने पीरों, मुर्शिद-ए-कामिल के वचनों पर चलता है अल्लाह, वाहेगुरु, राम से इश्क करता है तो यकीनन उसके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं मालिक खुद उठा लेते हैं। वो बेफिक्र, बेपरवाह हो जाता है उसे फिर दुनिया की जिंदगी कुछ भी नहीं लगती। बड़े सुख होते हैं लोगों के पास, ऐशो आराम के साधन होते हैं बहुत कुछ होता है, लेकिन मालिक के इश्क के सामने, उसके प्यार, मोहब्बत के सामने सब कुछ फिका-फिका और बेस्वाद लगने लग जाता है। यही है इश्क, इसी का नाम है सच्चा इश्क और इश्क कोई अलग चीज का नाम नहीं है। फिलिंग चेंज हो जाती हैं, इंसान बे-गम हो जाता है, एक अलग तरह का आनंद, एक अलग तरह की लज्जत आने लगती है और दर्श दीदार से सब कुछ हासिल होता है। दर्श दीदार नहीं होता तो बिन पानी की मछली की तरह तड़पता रहता है और उस तड़प में भी एक ऐसा मजा होता है जिसे दुनियादारी के लोग सोच भी नहीं सकते।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद रुपयों के लिए, औलाद के लिए, जमीन-जायदाद के लिए लोग रोते देखे हैं पर जब सतगुरु, अल्लाह, मौला, राम के लिए आंखों से आंसू आते हैं तो तमाम, गम,दु:ख, चिंताओं को धो डालते हैं। ये आसुओं का आना कोई मामूली बात नहीं होती। हमारे दिलो-दिमाग में वो चोट लगी है मालिक के इश्क की, उसके प्यार मोहब्बत की। उनके अंदर ही ये सब कुछ संभव है। जो इस इश्क के बारे में जानते नहीं जिनको इसका मालूम नहीं, उन्हें नहीं पता कि मालिक का इश्क क्या चीज होता है। इश्क अंदर जलवे दिखाता है। इश्क इंसान को बाहर से पवित्र बना देता है। इंसान अपनी आदतें जो सोचता है कभी बदलेंगी नहीं जब सतगुरु मौला का इश्क लगता है आदतें बुरी किधर चली गई कुछ पता ही नहीं चलता। जब इंसान रोगी होता है, परेशान होता है, दु:खी होता है सतगुरु से प्यार रखे, सेवा सुमिरन करता रहे, दृढ यकीन रखे यकीन मानिये पता ही नहीं चलता वों बीमारियां कहां चली गई पर उसके लिए दृढ यकीन होना जरूरी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Mar 2022 05:44:58 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : भक्ति-इबादत से साफ होता है अंत:करण</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम इस जलते-बलते भट्ठ, इस कलियुग में आत्मा के लिए मृत संजीवनी है। मर रही इन्सानियत, तड़प रही इन्सानियत को अगर कोई जिंदा रख सकता है तो वो है ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम। उस ईश्वर का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/devotional-worship-clears-the-mind/article-26673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम इस जलते-बलते भट्ठ, इस कलियुग में आत्मा के लिए मृत संजीवनी है। मर रही इन्सानियत, तड़प रही इन्सानियत को अगर कोई जिंदा रख सकता है तो वो है ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम। उस ईश्वर का नाम जिसने सारी सृष्टि को साजा है, उस मालिक का नाम जिसने सारी त्रिलोकी को बनाया है, सारी त्रिलोकियों को दोनों जहानों को बनाने वाला वह कण-कण में, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि उस मालिक का नाम अगर इन्सान जपेगा, भक्ति-इबादत करेगा तो यकीनन इन्सान जीते-जी बहार जैसी जिंदगी जी पाएगा</p>
<p style="text-align:justify;">और मरणोपरांत आवागमन से मोक्ष मुक्ति हासिल करके परम पिता परमात्मा की गोद में जा समाएगा। इसलिए ईश्वर के नाम की भक्ति-इबादत अति जरूरी है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ये घोर कलियुग का समय है, इसमें जब तक इन्सान मालिक को याद नहीं करता, उसकी भक्ति इबादत नहीं करता अंत:करण की मैल साफ नहीं होती और जब तक अंदर की मैल साफ नहीं होती संत, पीर-फकीर की कोई भी बात समझ नहीं आती।</p>
<p style="text-align:justify;">जब इन्सान के अंदर मैल होती है, इन्सान के अंदर गलत विचार होते हैं तो वो गलत ही सोचता रहता है,अच्छी बात उसे भाती नहीं। पुज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संतों के वचनों को भी तरोड़-मरोड़ कर अपने हिसाब से लोग इस्तेमाल करते हैं जोकि बिल्कुल गलत है। ऐसा नहीं करना चाहिए। ये शैतान दिमाग का काम होता है। संतों के वचनों को जो कोई तरोड़-मरोड़ कर पेश करता है, वो दु:खी रहता है, गमगीन रहता है, रोगों का घर बन जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर के वचन नहीं होते वो तो अल्लाह, वाहेगुरु, राम की चर्चा करते हैं, वचन तो परम पिता परमात्मा के होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए पीर, फकीर की बात सुनो, अमल करो, उसके अनुसार चलो तो जिंदगी के आदर्श की प्राप्ति का बीमा हो जाता है। दुनिया में बीमा पॉलिसी बहुत हैं, लेकिन राम नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की भक्ति इबादत की बीमा पॉलिसी ऐसी है, जिसको अगर आदमी अपने जीवन में अपना ले, तो यहां व अगले जहान में भी उस आत्मा का बीमा पक्का हो जाता है, कि वो गम, दु:ख, दर्द, चिंताओं से बचेगी और मालिक की गोद में बैठकर निजधाम जरूर जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए सुमिरन का पक्का होना अति जरूरी है और जो सुमिरन करते हैं वो बात-बात पर भड़का नहीं करते, ये उनकी निशानियां होती हैं। उन्हें कामवासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार तंग नहीं करते, उनके अंत:करण में परमार्थ, इन्सानियत हमेशा जिंदा रहती है, वो उस परम पिता परमात्मा से बढ़कर किसी को नहीं मानते, अपनी आंखों में भगवान के अलावा किसी और को नहीं लेकर आते, आपने फर्ज, कर्त्तव्य का निर्वाह सही तरीके से करते हैं और मालिक के नाम का सुमिरन करते हुए मालिक से ओढ़ निभाते हैं। उनको किसी से कोई लेना-देना नहीं होता, बस परम पिता परमात्मा से ही जुड़ाव रहता है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Sep 2021 09:30:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>दूसरों की बुराई देखने की बजाय, खुद में निगाह मारो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दूसरों की गलतियां देखने की बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों की तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनकी गलतियां देखता है जबकि उसे चाहिए कि वह अपने अंदर निगाह मारकर देखे। अगर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/instead-of-seeing-the-evil-of-others-look-into-yourself/article-23374"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/instead-of-seeing-the-evil-of-others-look-into-yourself.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)</strong>। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दूसरों की गलतियां देखने की बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों की तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनकी गलतियां देखता है जबकि उसे चाहिए कि वह अपने अंदर निगाह मारकर देखे। अगर इन्सान दूसरों की बुराई करने की बजाय अपने बुरे विचारों को त्याग दे तो मालिक जरूर उसे खुशियों से मालामाल कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि बुराई आपको हमेशा मुश्किलों, बीमारियों, टेंशन आदि की ओर ले जाने का काम करती है। भक्तजनों को चाहिए कि वे अपनी हर बुरी आदत को त्यागें तथा मालिक से नाता जोड़ें। मालिक को प्राप्त करने के लिए भक्त अपनी हर प्रिय वस्तु को छोड़ देता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ईश्वर का नाम सुखों का खजाना है। इन्सान में इतनी ताकत है कि वह सही तरीके से ईश्वर के नाम का सुमिरन कर स्वयं इन्सान से भगवान बन सकता है और यह ताकत प्रत्येक व्यक्ति के पास है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी इस रूहानी ताकत को पहचाने और ईश्वर के सुमिरन में अपना ध्यान लगाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मनुष्य को रोटी खाने में तो मेहनत करनी पड़ती है जबकि सुमिरन करने के लिए तो कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती। मन में केवल विचार आएं और जीभा को राम की तरफ हिलाएं, यही पर्याप्त है। यह नहीं हो सकता तो केवल ख्यालों से ही सुमिरन करें तो भी उत्तम है। हर भक्त को चाहिए कि वह बुराइयों को छोड़े, इसके लिए दृढ़ संकल्प की जरूरत है। एक दिन आएगा जब ईश्वर के नाम, सुमिरन से ही मनुष्य के सभी दु:ख दूर होंगे और वह खुशियों से मालामाल हो जाएगा।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 May 2021 06:00:49 +0530</pubDate>
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                <title>वचनों पर अमल करने से ही खुशियां मिलती हैं</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह है यहां इन्सान जब भी चल कर आता है, तो उसके इस जन्म के पाप कर्म और संचित पाप कर्म खत्म हो जाते हैं। पर पूर्णत: खत्म तभी होते हैं जब इन्सान सत्संग पर अमल करता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/happiness-comes-only-by-following-vachan/article-23348"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/happiness-comes-only-by-following-vachan.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong>। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग एक ऐसी जगह है यहां इन्सान जब भी चल कर आता है, तो उसके इस जन्म के पाप कर्म और संचित पाप कर्म खत्म हो जाते हैं। पर पूर्णत: खत्म तभी होते हैं जब इन्सान सत्संग पर अमल करता है। वचन सुनना बहुत बड़ी बात है, पर सुनकर मान लेना सबसे बड़ी बात है। पूज्य जी फरमाते हैं कि कामवासना, क्रोध, मोह, लोभ, अंहकार, मन व माया इन सातों का ऐसा चक्रव्यूह है, मजाल नहीं कि इन्सान इससे निकल सके। दुनिया इन सातों में बुरी तरह से उलझी हुई है। मालिक का प्यार, मोहब्बत को हासिल करना हो, तो इन्सान सत्संग में चल कर आए। पीर-फकीर, गुरु, मुर्शिद-ए-कामिल सत्संग में परमपिता परमात्मा की बात सुनाते हैं, जो इन्सान बात सुन कर अमल कर लेते हैं, उन्हें अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिसका दसवां द्वार खुलता है, उसे आत्मिक शांति बेइंतहा आ जाती है, इतना आत्मबल पैदा हो जाता है कि वो कभी कामवासना, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार, मन व माया में नहीं उलझता। इतना बलवान हो जाता है कि वह मन को अपने ऊपर हावी नहीं होने देता, शांतचित रहता है। शांतचित रहता हुआ, अपनी मंजिल पर आगे बढ़ता रहता है। उसके अंदर सहन शक्ति बेहद बढ़ जाती है, सहनशक्ति का बढ़ना आत्मबल का ही एक रूप है। आप जी फरमाते हैं कि यह घोर कलियुग का समय है और इस घोर कलियुग में आदमी हद से ज्यादा गिरते जा रहे हैं। दिखने में कुछ और करने में कुछ और, आज आम इन्सानों की ये फितरत बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं बुरे कर्म करना, भक्ति को खत्म करता है, इसलिए बुरे कर्म न करो। इन्सान पीर-फकीर के वचनों पर 100 प्रतिशत अमल करता है तो राख की चुटकी भी उसके लिए हीरे-जवाहरात बन जाया करती है। जो वचनों पर अमल नहीं करता तो हीरे-डायमंड भी राख बन जाया करते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि घोर कलियुग के समय में इन्सान सुमिरन का पक्का बने, सुबह-शाम नियमित सुमिरन करे, सेवा करे, दृढ़ यकीन रखे, वचनों पर अमल करे तो खुशियां अपने-आप चली आती हैं। इसलिए सेवा किया करो, सुमिरन किया करो, सत्संग में आया करो व सत्संग सुनकर अमल कमाया करो। ताकि जीवन के आदर्श की प्राप्ति हो, आत्मा, परमात्मा का मेल हो और जीते-जी आप परमानंद की प्राप्ति कर सकें।</p>
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</p><p style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 03 May 2021 09:15:59 +0530</pubDate>
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