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                <title>qatar - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कतर ने कुवैत के साथ 15 साल के एलएनजी आपूर्ति सौदे पर किए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[दोहा, (एजेंसी)। कतर एनर्जी और कुवैत पेट्रोलियम कॉपोर्रेशन (केपीसी) ने सोमवार को 15 साल के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) बिक्री और खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह जानकारी कतर की कंपनी ने एक बयान में दी। कुवैत में हस्ताक्षरित सौदा, जनवरी 2025 में शुरू होने वाले कुवैत को कतर एनर्जी प्रति वर्ष 3 मिलियन टन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/qatar-signs-15-year-lng-supply-deal-with-kuwait/article-61528"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/qatar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दोहा, (एजेंसी)।</strong> कतर एनर्जी और कुवैत पेट्रोलियम कॉपोर्रेशन (केपीसी) ने सोमवार को 15 साल के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) बिक्री और खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह जानकारी कतर की कंपनी ने एक बयान में दी। कुवैत में हस्ताक्षरित सौदा, जनवरी 2025 में शुरू होने वाले कुवैत को कतर एनर्जी प्रति वर्ष 3 मिलियन टन एलएनजी की आपूर्ति करेगा। यह केपीसी के साथ कतर एनर्जी का दूसरा दीर्घकालिक एलएनजी समझौता है, 2020 में हस्ताक्षरित इसी तरह के 15 वर्षीय सौदे के बाद।</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया कि नए समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करना है। कुवैत में अत्यधिक गर्मी और बिजली की बढ़ती मांग से उत्पन्न बिजली आउटेज का समाधान करने के लिए काम कर रहा है। कुवैत के बिजली, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हाल ही में अप्रत्याशित ईंधन आपूर्ति व्यवधानों के कारण ब्लैकआउट की सूचना दी है, जिसके कारण सुबिया और पश्चिम दोहा बिजली संयंत्रों में प्रमुख जनरेटर बंद हो गए हैं। पर्याप्त तेल राजस्व के बावजूद, कुवैत बिजली आउटेज का सामना करता है, मुख्य रूप से शीतलन और पानी के विलवणीकरण की बढ़ती आवश्यकताओं और खराब अवसंरचना के रखरखाव के कारण।</p>
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                <pubDate>Tue, 27 Aug 2024 10:45:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परिजनों को औपचारिक जानकारी न देना उठा रहा कतर की मंशा पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[Death penalty in Qatar Indian marines: अरब देश कतर द्वारा भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को सजा-ए-मौत के फैसले से पूरा देश स्तब्ध है। सभी सैन्य अधिकारी कतर की राजधानी दोहा में ग्लोबल टेक्नालॉजी एंड कंसल्टेंसी नाम की निजी कंपनी में काम करते थे। यह कंपनी कतर की सेना को ट्रेनिंग और टेक्निकल कंसल्टेंसी सर्विस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/death-penalty-in-qatar-indian-marines/article-54522"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/qatar-marin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Death penalty in Qatar Indian marines: अरब देश कतर द्वारा भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को सजा-ए-मौत के फैसले से पूरा देश स्तब्ध है। सभी सैन्य अधिकारी कतर की राजधानी दोहा में ग्लोबल टेक्नालॉजी एंड कंसल्टेंसी नाम की निजी कंपनी में काम करते थे। यह कंपनी कतर की सेना को ट्रेनिंग और टेक्निकल कंसल्टेंसी सर्विस प्रोवाइड कराती है। ओमान एयरफोर्स के रिटायर्ड स्क्वॉड्रन लीडर खमिस अल अजमी इसके प्रमुख है। कतर की इंटेलिजेंस के स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरों ने इनको 30 अगस्त, 2022 को गिरफ्तार किया था।</p>
<h3>कई बार जमानत याचिकाएं लगाई लेकिन जमानत नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">कतर का आरोप है कि भारत के पूर्व सैन्य अधिकारी कतर के हाइटेक सबमरीन प्रोगाम की गोपनीय जानकारी इजरायल को दे रहे थे। इस मामले में कंपनी के मालिक को भी गिरफ्तार किया गया था जिसे बाद में रिहा कर दिया गया। दोहा में भारतीय दूतावास को करीब एक माह बाद सिंतबर के मध्य में पहली बार इनकी गिरफ्तारी के बारे में बताया गया। इसी साल मार्च में लीगल एक्शन शुरू हुआ। गिरफ्तार अधिकारियों ने कई बार जमानत याचिकाएं लगाई लेकिन जमानत नहीं मिली। अब पिछले गुरूवार को अचानक इनको दोषी मानते हुए मृत्यु दंड की सजा का ऐलान कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय दूतावास के अधिकारियों के संपर्क के बाद जिस तरह से इन अधिकारियों को काउंसलर एक्सेस (परिजनों से बात करने की सुविधा) प्रदान की तो ऐसा लग रहा था कि कतर इस मामले में नरम रुख अपना रहा है। लेकिन अब यकायक मौत की सजा का ऐलान कर भारत को सकते में डाल दिया। कतर सरकार ने आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है। न ही परिवारजनों को आरोपों की कोई औपचारिक जानकारी दी गई है। ऐसे में कतर की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। कतर का दावा है कि उसके पास पर्याप्त सबूत हैं। जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए प्राप्त किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर कतर के पास गिरफ्तार भारतीय अधिकारियों के खिलाफ कोई सबूत हैं, तो वह उसे भारत सरकार के साथ साझा क्यों नहीं कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर वास्तव में कतर सरकार के पास कोई सबूत है, तो वह इन सबूतों को विश्व समुदाय के सामने रखकर अपने खिलाफ बन रहे परसेप्शन को क्यों नहीं रोक रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमास पर भारत के रूख से क्षुब्ध होकर कतर ने यह फैंसला लिया हो। कहा तो यह भी जा रहा है कि भारत के पूर्व नौसैनिक अधिकारियों की फांसी का ऐलान कर कतर भारत के साथ सौदे-बाजी के मनसुबे पाल रहा है। कतर की ओर से पूरे मामले में जिस तरह से भारत सरकार को अंधरे में रखकर हीलाहवाली की गई उससे भी सजा के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे फैंसले के विस्तृत ब्यौरे का इंतजार हैं। और वह सभी कानूनी रास्ते तलाश रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को कतर के अधिकारियों के सामने उठाने व गिरफ्तार अधिकारियों को काउंसलर एक्सेस मिलते रहने की बात भी कही है। लेकिन अहम सवाल यह है कि भारत इस मामले में क्या कर सकता है। हालांकि, गिरफ्तार अधिकारियों को छुड़ाने के लिए भारत के पास अभी बहुत सारे कानूनी और कूटनीतिक विकल्प है, लेकिन सवाल यही है कि भारत कतर पर दबाव बना पाने में कितना सफल होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर सरकार ने चाहे भारत के पूर्व सैन्य अधिकारियों के लिए मृत्यु दंड की सजा का ऐलान कर दिया हो लेकिन सजा को लागू करना उसके लिए आसान नहीं है। भारत के पास कई विकल्प हैं। प्रथम, निचली अदालत के फैसले को भारत के राजनयिकों द्वारा वहां की ऊपरी अदालत मे चुनौती दी जा सकती हैं। राष्ट्रद्रोह के कई मामलों में कतर की सर्वोच अदालत ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला है। साल 2014 में फिलिपींस के एक नागरिक को भी इसी तरह से मौत की सजा सुनाई गई थी। फिलिपींस सरकार द्वारा कतर की सर्वोच अदालत में अपील किए जाने पर अदालत ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।</p>
<h3>खाद्य आपूर्ति मामले में कतर काफी हद तक भारत पर निर्भर</h3>
<p style="text-align:justify;">द्वितीय, कतर की अदालत के इस फैंसले को भारत इंटरनेशन कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में चैलेंज कर सकता है। कुलभुषण जाधव के मामले में भी भारत ने पाकिस्तान की अदालत के निर्णय के विरूद्ध आईसीजे में गुहार लगाई थी। कोर्ट ने जाधव की सजा पर रोक लगा दी थी। तृतीय, व्यापार संबंधों के जरिए भी भारत कतर को झुकने के लिए मजबूर कर सकता है। 2021-22 में दोनों देशों के बीच 15.03 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। भारत को स्पेशल करोबारी दोस्त के तौर पर ट्रीट करने वाला कतर भारत को 13.19 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है। जबकि कतर भारत से महज 1.83 बिलियन डॉलर का आयात करता है। कारोबारी पलड़ा कतर के पक्ष में झुका हुआ है। इसके अलावा भारत अपनी कुल आवश्यकता की 90 फीसदी गैस कतर से आयात करता है। दूसरी ओर खाद्य आपूर्ति के मामले में कतर काफी हद तक भारत पर निर्भर है। लिहाज भारत कतर पर दबाव बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चतुर्थ, पूरे मामले को भारत कूटनीति के जरिए भी हल कर सकता है। कतर के साथ भारत के अच्छे संबंध है। साल 2017 में जब गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल ने कतर पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाकर काउंसिल से बाहर कर दिया था उस वक्त भारत ने बिना किसी शर्त कतर को अनाज भेजा था। मिडिल ईस्ट के कई देशों से भरत के संबंध अच्छे है। भारत इनके जरिए भी कतर पर दबाव बना सकता है। पंचम, कतर की कुल 25 लाख की आबादी में से 6.5 लाख भारतीय है। 6000 से ज्यादा छोटी-बड़ी भारतीय कंपनियां कतर में कारोबार कर रही हैं। कतर के विकास और उसकी इकॉनमी में भारतीयों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में भारत कतर के साथ रिश्तों का उपयोग कर सकता है। व्यक्तिगत तौर पर कतर के अमीर के साथ हमारे प्रधानमंत्री के अच्छे संबंध है। जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। Death Penalty In Qatar</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक कतर-भारत संबंधों का सवाल है तो वर्ष 1973 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की शुरूआत हुई। दोहा में भारत का दुतावास है। जबकि कतर का नई दिल्ली में दुतावास और मुंबई में वाणिज्य दूतावास है। मार्च 2015 में कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी भारत यात्रा पर आए थे। इसके बाद जून 2016 में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी कतर गए थे। राजनयिक दृष्टि से दोनों देशों के संबंध हमेशा से मधुर रहे हैं, ऐसा भी नहीं है। जाकिर नायिक व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के मामले में दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट घुलती दिखाई दी। कुल मिलाकर कतर के साथ हमारे रिश्ते अच्छे हैं। ऐसे में भारत को कानूनी दांव पेंच से अधिक कूटनीतिक कौशल से समाधान का मार्ग तलाशना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एन.के. सोमानी, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Coconut Oil for Wrinkles: ऐसी चीज, जो रातों-रात गायब कर देगी झुर्रियां! हमेशा खिली-खिली और जवां दिखेगी त्वचा !" href="http://10.0.0.122:1245/such-a-thing-which-will-make-wrinkles-disappear-overnight/">Coconut Oil for Wrinkles: ऐसी चीज, जो रातों-रात गायब कर देगी झुर्रियां! हमेशा खिली-खिली और जवां दिखे…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 17:50:01 +0530</pubDate>
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                <title>कतर में विश्व कप कवरेज के दौरान अमेरिका के पत्रकार की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[दोहा (एजेंसी)। अमेरिका के पत्रकार ग्रांट वाहल का कतर में फीफा फुटबाल विश्व कप में कवरेज के दौरान निधन हो गया है। यूएस सॉकर ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक बयान में कहा, “पूरे यूएस सॉकर परिवार को यह जानकर दुख हुआ है कि हमने ग्रांट वाहल को खो दिया है।” “ग्रांट ने फुटबॉल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/us-journalist-dies-during-world-cup-coverage-in-qatar/article-40776"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/us-journalist.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दोहा (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के पत्रकार ग्रांट वाहल का कतर में फीफा फुटबाल विश्व कप में कवरेज के दौरान निधन हो गया है। यूएस सॉकर ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक बयान में कहा, “पूरे यूएस सॉकर परिवार को यह जानकर दुख हुआ है कि हमने ग्रांट वाहल को खो दिया है।” “ग्रांट ने फुटबॉल को अपना जीवन लिया और उनका शानदार लेखन अब हमारे साथ नहीं रहेगा।” यूएस सॉकर ने वाहल के जुनून और खेल में विश्वास की प्रशंसा की और उनकी पत्नी सेलीन गाउंडर और उनके प्रियजनों के साथ अपनी संवेदना साझा की। गाउंडर ने यूएस सॉकर के बयान को ट्विटर पर पोस्ट किया और लिखा: “मैं अपने पति ग्रांट वाहल के फुटबॉल परिवार और इतने सारे दोस्तों के समर्थन के लिए बहुत आभारी हूं, मैं पूरी तरह सदमे में हूं।”</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उनकी वेबसाइट के अनुसार वाहल ने पहले स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड के लिए फुटबॉल को कवर किया था, जिसमें 11 विश्व कप शामिल थे और खेल पर दो किताबें लिखीं। इससे पहले शुक्रवार को वाहल ने अर्जेंटीना-नीदरलैंड क्वार्टर फाइनल मैच के बारे में ट्वीट किया था। उन्होंने एलजीबीटीक्यू अधिकारों के समर्थन में एक इंद्रधनुषी टी-शर्ट पहनी हुई थी, इसलिए उन्हें विश्व कप मैच में प्रवेश से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मचारियों ने टी शर्ट बदलने के लिए कहा था क्योंकि “इसकी अनुमति नहीं है,” और उनका फोन ले लिया था। वाहल ने कहा कि उन्हें हिरासत में लेने के 25 मिनट बाद रिहा कर दिया गया। इसके लिए स्टेडियम में फीफा के एक प्रतिनिधि और सुरक्षा दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने माफी मांगी थी।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2022 10:17:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हवाई अड्डो के प्रबंधन पर कतर, तुर्की के साथ नहीं हुआ समझौता: तालिबान</title>
                                    <description><![CDATA[काबुल। तालिबान ने काबुल और अफगानिस्तान के अन्य शहरों के हवाई अड्डों के संयुक्त रूप से प्रबंधन के लिए कतर और तुर्की के साथ समझौता होने की बात से इनकार किया है। तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु ने इससे पहले जानकारी दी थी कि अफगानिस्तान के पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को संचालित करने की योजना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/no-agreement-with-qatar-turkey-on-airport-management-taliban/article-29443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/taliban1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काबुल।</strong> तालिबान ने काबुल और अफगानिस्तान के अन्य शहरों के हवाई अड्डों के संयुक्त रूप से प्रबंधन के लिए कतर और तुर्की के साथ समझौता होने की बात से इनकार किया है। तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु ने इससे पहले जानकारी दी थी कि अफगानिस्तान के पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को संचालित करने की योजना को लेकर तालिबान ने कतर और तुर्की के साथ समझौता किया है और इस पर आने वाले दिनों में संयुक्त तकनीकी समूहों की बैठक होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रिपोर्ट के बाद टोलो समाचार एजेंसी ने तालिबान के परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता इमामुद्दीन अहमदी के हवाले से बताया कि गुरुवार को तालिबान के साथ दोनों देशों के वार्ताकारों की बैठक के बाद भी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। अहमदी ने कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत जारी रहेगी।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/no-agreement-with-qatar-turkey-on-airport-management-taliban/article-29443</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Dec 2021 10:58:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कतर के प्रधानमंत्री मक्का सम्मेलन में होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[दोहा  (एजेंसी) कतर के प्रधानमंत्री अब्दुल्लाह बिन नासीर बिन खलीफा अल तानी इस सप्ताह मक्का में होने वाले गल्फ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कतर दो साल के प्रतिबंध के बाद पहली बार किसी हाई लेवल बैठक में हिस्सा ले रहा है। अल जज़ीरा के अनुसार कतर के प्रधानमंत्री और सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारियों के बीच […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>दोहा  (एजेंसी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कतर के प्रधानमंत्री अब्दुल्लाह बिन नासीर बिन खलीफा अल तानी इस सप्ताह मक्का में होने वाले गल्फ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कतर दो साल के प्रतिबंध के बाद पहली बार किसी हाई लेवल बैठक में हिस्सा ले रहा है। अल जज़ीरा के अनुसार कतर के प्रधानमंत्री और सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारियों के बीच बुधवार को बैठक होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में संयुक्त अरब अमीरत, बेहरीन तथा अन्य देश सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ईरान, अमेरिका और खाड़ी सहयोगी देशों के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा है। सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ ने इस सप्ताह के शुरू में क़तर के प्रधानमंत्री को गल्फ सहयोग सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><div>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/qatars-prime-minister-mecca-will-attend-the-conference/article-9377</link>
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                <pubDate>Thu, 30 May 2019 10:58:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलवामा हमला: कतर ने मोदी को भेजा संवेदना संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[दोहा (एजेंसी)। कतर के प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री शेख अब्दुल्ला बिन नासीर बिन खलीफा अल-थानी (Qatar Prime Minister) ने पुलवामा हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संवेदना संदेश भेजा है। कतर न्यूज एजेंसी के अनुसार कतर के प्रधानमंत्री (Qatar Prime Minister) ने मोदी को भेजे संदेश में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>दोहा (एजेंसी)।</strong> कतर के प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री शेख अब्दुल्ला बिन नासीर बिन खलीफा अल-थानी (Qatar Prime Minister) ने पुलवामा हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संवेदना संदेश भेजा है। कतर न्यूज एजेंसी के अनुसार कतर के प्रधानमंत्री (Qatar Prime Minister) ने मोदी को भेजे संदेश में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा अंजाम दिये गये आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।</p>
<p>कतर के प्रधानमंत्री के अलावा विश्वभर के नेताओं ने संवेदना व्यक्त करते हुए आतंकवाद का सामना करने के लिए अपना सहयोग देने की बात कही है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/qatar-prime-minister-sent-sentiments-message-to-modi/article-7715</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Feb 2019 17:43:21 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब हज पर जा सकेंगे लोग, सऊदी अरब ने कतर के हज यात्रियों के लिए खोला बॉर्डर</title>
                                    <description><![CDATA[कारियो । सऊदी अरब ने कतर के उन श्रद्धालुओं के लिए बॉर्डर खोल दिया है, जो इस साल हज के लिए आना चाहते हैं। सऊदी सरकार ने बुधवार को कहा कि वो इस साल हज करने के लिए सऊदी अरब में कतरी तीर्थयात्रियों का स्वागत करेंगे। दरअसल सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/saudi-arabia-opens-border-for-hajj-pilgrims-of-qatar/article-3179"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/qatar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कारियो ।</strong> सऊदी अरब ने कतर के उन श्रद्धालुओं के लिए बॉर्डर खोल दिया है, जो इस साल हज के लिए आना चाहते हैं। सऊदी सरकार ने बुधवार को कहा कि वो इस साल हज करने के लिए सऊदी अरब में कतरी तीर्थयात्रियों का स्वागत करेंगे। दरअसल सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने 5 जून को कतर के साथ राजनयिक और कारोबारी संबंध तोड़ लिए थे। ऐसे में उस वक्त शुरू हुए राजनयिक संकट के बीच यह बहुत ही अहम निर्णय है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक विवाद के बीच जून से दोनों देशों के बीच परिवहन और राजनयिक संबंध फिलहाल टूटे हुए हैं। सऊदी की आधिकारिक प्रेस एजेंसी के एक बयान में कहा गया है कि सलवा बॉर्डर कतरी नागरिकों के लिए खुलेगा, जो हज यात्रा पर आना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सऊदी न्यूज एजेंसी के मुताबिक सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान और दोहा के दूत के बीच मुलाकात में सीमा संबंधी निर्णय लिए गए हैं, जिसमें शाह सलमान ने आदेश दिया कि कतर के सभी तीर्थयात्रियों को ‘हज के लिए सीमा पार करके सऊदी अरब में प्रवेश की’ इजाजत होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> कतर में 80% विदेशी रहते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">सऊदी की आधिकारिक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान और दोहा के दूत के बीच मुलाकात के बाद सीमा संबंधी यह निर्णय लिया गया। शाह ने आदेश दिया है कि कतर के तीर्थयात्रियों को तीर्थयात्रा करने के लिए सलवा बॉर्डर पार करके सऊदी अरब में प्रवेश की अनुमति होगी। उन्होंने यह भी आदेश दिया था कि सऊदी विमानन कंपनी के निजी विमानों को दोहा हवाईअड्डा भेजा जाए, ताकि सभी कतरी तीर्थयात्रियों को उसके खर्चे पर लाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सऊदी अरब और उसके अरब सहयोगियों ने दोहा पर ‘आतंकवादियों’ का समर्थन करने और ईरान के बहुत करीब होने का आरोप लगाया था, जिसके चलते कतर के साथ हवाई, समुद्री और जमीनी रिश्ते खत्म कर दिए थे और साथ ही आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। कतर ने इन आरोपों से इनकार करते हुए खाड़ी देशों पर उसकी अर्थव्यवस्था का दम घोंटने की कोशिश का आरोप लगाया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, 26 लाख की जनसंख्या वाले कतर में 80% विदेशी रहते हैं। यह प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से दुनिया का सबसे अमीर देश है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2017 06:20:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कतर की बढ़ सकती हैं और मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[चार अरब देश लगा सकते हैं प्रतिबंध दुबई (एजेंसी)। कतर पर अन्य अरब देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि इनके बीच संकट समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। चार अरब देश कतर पर आतंकवाद से संबंध होने का आरोप लगाते हुए पहले ही उससे संबंध तोड़ चुके हैं। इन देशों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/difficulty-will-increase-for-qatar/article-1874"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/qatar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चार अरब देश लगा सकते हैं प्रतिबंध</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>दुबई (एजेंसी)।</strong> कतर पर अन्य अरब देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि इनके बीच संकट समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। चार अरब देश कतर पर आतंकवाद से संबंध होने का आरोप लगाते हुए पहले ही उससे संबंध तोड़ चुके हैं। इन देशों ने कतर को विभिन्न मांगों को मानने को कहा था, जिसकी समय सीमा समाप्त हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कतर ने चार अन्य अरब देशों द्वारा की गई विभिन्न मांगों को खारिज करते हुए कहा कि उनके अल्टीमेटम का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना नहीं बल्कि उसकी संप्रभुता को कम करना है। कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने रोम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनका देश अभी भी बातचीत करने और अपने पड़ोसी देशों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिस्र, बहरीन, सऊदी अरब और सयुंक्त अरब अमीरात ने कतर पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है। इन देशों ने 13 मांगों से जुड़ी एक डेडलाइन निर्धारित करते हुए इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। इनकी मांगों में आतंकवादी समूहों के साथ संबंध तोड़ने, अल जजीरा चैनल को बंद करने, कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान के साथ संबंधों को कम करना और कतर में एक तुर्की हवाई अड्डे को बंद करना शामिल है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 06:29:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कतर में फंसे अपने लोगों को एयरलिफ्ट करेगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[कतर के साथ राजनयिक संबंध खत्म नई दिल्ली। कतर में फंसे अपने नागरिकों को भारत एयरलिफ्ट के जरिए निकालेगा। इसके लिए अगले सप्ताह से विशेष अभियान चलाया जाएगा। हाल ही में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन समेत सात मुस्लिम राष्ट्रों ने कतर के साथ राजनयिक संबंध खत्म कर लिए थे, जिससे खाड़ी क्षेत्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/india-will-airlift-indian-peoples-from-qatar/article-1492"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/airlift.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कतर के साथ राजनयिक संबंध खत्म</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कतर में फंसे अपने नागरिकों को भारत एयरलिफ्ट के जरिए निकालेगा। इसके लिए अगले सप्ताह से विशेष अभियान चलाया जाएगा। हाल ही में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन समेत सात मुस्लिम राष्ट्रों ने कतर के साथ राजनयिक संबंध खत्म कर लिए थे, जिससे खाड़ी क्षेत्र में संकट गहरा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कतर में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा 25 जून से आठ जुलाई तक केरल और दोहा के बीच विशेष उड़ानें संचालित की जाएंगी। इन भारतीयों को वापस स्वदेश लाने के लिए 186 सीटों वाली बोइंग 737 का इस्तेमाल किया जाएगा। बृहस्पतिवार और शुक्रवार को जेट एयरवेज मुंबई से दोहा के बीच अतिरिक्त उड़ानें शुरू करेगा। उधर उड्डयन मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय को आश्वस्त किया कि कतर से भारतीय नागरिकों को समय से वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 05:13:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कतर पर प्रतिबन्ध के मायने</title>
                                    <description><![CDATA[खाड़ी देशों में एक अजीब घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के आरोप में सऊदी अरब सहित कई मध्य एशियाई इस्लामिक देशों ने कतर पर प्रतिबन्ध लगा दिए हैं। इस प्रतिबन्ध के दूरगामी असर भारत पर भी दिखने के असार हैं। दरअसल कतर की चर्चा उसकी संपदा, उसकी दौलत के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/reason-for-restrictions-on-qatar/article-1156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/qatar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खाड़ी देशों में एक अजीब घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद के आरोप में सऊदी अरब सहित कई मध्य एशियाई इस्लामिक देशों ने कतर पर प्रतिबन्ध लगा दिए हैं। इस प्रतिबन्ध के दूरगामी असर भारत पर भी दिखने के असार हैं। दरअसल कतर की चर्चा उसकी संपदा, उसकी दौलत के चलते ही होती है, लेकिन खाड़ी देशों ने कूटनीतिक संबंध खत्म कर अब इसी कतर को अलग-थलग कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनयिक संबंध खत्म करने वाले देशों में सउदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, यमन और लीबिया शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन ने कतर के लिए हवाई, जमीनी और समुद्री रास्ते भी बंद कर दिए हैं। इन देशों ने एक सुर में कतर पर आरोप लगाया कि वो क्षेत्र में कथित इस्लामिक स्टेट और चरमपंथ को बढ़ावा दे रहा है, जबकि कतर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोपों का खंडन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले इन आरोपों में कितना दम है, इस मुद्दे पर तमाम अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार यह मान रहे हैं कि सऊदी के लिए आरोप लगाना तो बेहद आसान है, लेकिन क्या सउदी अरब तमाम तरह की फंडिंग करने में लिप्त नहीं है? यह एक विमर्श का मुद्दा है कि सऊदी अरब और अन्य देशों ने जिस तरह से कतर से राजनयिक संबंध तोड़े हैं, इसकी तात्कालिक वजह क्या रही है,</p>
<p style="text-align:justify;">इसे चरमपंथ से जोड़कर देखा जाए या मध्य एशिया में कोई अन्य मुद्दा कतर को अलग-थलग करने की वजह बना। यदि मध्य-एशिया के सऊदी सहित अन्य इस्लामिक देश आतंकवाद के विरुद्ध इतना कड़ा रुख अपनाते हैं कि वर्षों तक साथ रहने वाले कतर से भी आतंक के नाम पर किनारा कर लेते हैं, तो इसे अच्छा संकेत मानना चाहिए। क्योंकि जब तक खुद इस्लामिक देश आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाते, तब तक आतंक का खात्मा संभव नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">तात्कालिक वजह में कतर की ईरान के प्रति बढ़ती घनिष्टता को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। कुछ दिन पूर्व कतर के शेख ने एक विवादित सन्देश दिया था, जिसमें उन्होंने जिक्र किया कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए ईरान बेहद जरुरी है, लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब कतर से इस्लामी दुनिया के देशों ने संपर्क तोड़े हों। 2014 के मार्च महीने में भी सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर पर उनके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाते हुए अपने राजदूत वापस बुला लिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कतर और सऊदी अरब के मध्य विवाद का पहलू समय-समय पर बदलता रहता है। पहले अरब और फारस का विवाद था, बाद में शिया सुन्नी विवाद बना और अब ये कतर सउदी अरब की शक्ल में है। कतर पहले से ही ईरान का समर्थक रहा है, जबकि सऊदी और ईरान के मध्य सम्बन्ध बेहतर नहीं हैं। ईरान से सउदी अरब की असुरक्षा की भावना अब सामने आ रही है।” और अरब देशों ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब खाड़ी देशों और उनके पड़ोसी ईरान के बीच तनाव बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया अरब यात्रा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे। इस घटना को अमरीका के दोस्त कहे जाने वाले ताकतवर खाड़ी देशों के बीच एक बड़ी दरार की तरह देखा जा रहा है। इस पूरे मामले को अमेरिकी और खाड़ी देशों के मध्य सम्बन्ध संतुल्लित करने के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि कतर पहले भी इस तरह के प्रतिबंधों का सामना कर चुका है और ना तो कतर इन देशों पर निर्भर है और ना ही ये देश कतर पर निर्भर हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान के खिलाफ जिन 54 देशों को एकजुट करने की कोशिश हो रही थी, उसमें ये पहली दरार है। इस्लामी देशों के राजनयिक संपर्क तोड़ने और तमाम प्रतिबंधों के बाद क्या वाकई कतर दुनिया में अलग थलग पड़ जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर के पास क्या विकल्प हैं इस संकट का, भविष्य क्या है, इस बात की समीक्षा भी कुछ समय अंतराल के बाद ही की जायेगी। लेकिन जानकार इस बात का कयास लगा रहे हैं कि ये संकट जल्द सुलझ जाना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा न हुआ और ईरान के साथ कतर ने रणनीतिक साझेदारी कर ली, तो खाड़ी देशों के लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही अगर कतर ने चीन के साथ साझेदारी कर ली, तो फिर अमेरिका, सऊदी के साथ मिलकर भी क्या करेगा। हालांकि, कतर और सऊदी अरब के बीच इस संकट को हल करने का प्रयास लगातार जारी है। कुवैत के अमीर इन देशों के बीच मध्यस्थता का नेतृत्व कर रहे हैं। कतर पर लगने वाले प्रतिबंधों की भारत पर प्रभाव की बात करें, तो प्रवासियों के मुल्क कतर में सबसे ज्यादा प्रवासी लोगों की संख्या भारत से गए लोगों की है। कतर पर पाबंदी लगने के बाद साफ है कि उनके हित भी प्रभावित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर में बसे भारतीयों में से काफी लोग ऐसे भी हैं, जो कतर में व्यापार करते हैं और वो अन्य खाड़ी मुल्कों सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिश्र में भी फैला हुआ है। ऐसे में अब उन लोगों के सामने दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। कतर के साथ भारत की ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में कई संधियां हैं। कतर को निर्यात करने वाला भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। प्रतिबंधों का असर कतर के व्यापार पर भी पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त खाड़ी का यह मुल्क भारत को बड़ी मात्रा में एलएनजी गैस सप्लाई करता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत अपनी जरूरत की 65 फीसदी गैस कतर से ही आयात करता है। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां भी कतर के साथ समय समय पर गैस का अनुबंध करती रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भारत कतर से एथलीन, प्रोपलीन, अमोनिया, यूरिया और पोलिथिन का आयाता करता है। इसलिए व्यापार का संतुलन कतर के पक्ष में भारी रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार साल 2014-15 में कतर के लिए भारत का निर्यात 1 अरब डॉलर से अधिक था। हालांकि कुछ समय पहले कतर के निर्यात में गिरावट के कारण द्विपक्षीय व्यापार में काफी कमी आई है। ऐसे में भारत को काफी सोच-समझ कर इस पूरे मामले में आगे बढ़ने की जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– पार्थ उपाध्याय</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2017 22:50:17 +0530</pubDate>
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                <title>सऊदी समेत 4 अरब देशों ने तोड़ा कतर से रिश्ता</title>
                                    <description><![CDATA[रियाद: सऊदी अरब, बहरीन, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई) और मिस्र ने कतर से डिप्लोमैटिक रिलेशन खत्म कर दिए। इन देशों ने कतर पर आतंकवाद को समर्थन को देने का आरोप लगाया। आतंकवाद और कट्टरपंथ से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी सऊदी अरब ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सऊदी को आतंकवाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/qatar-accused-supporting-terrorism/article-899"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/qatar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रियाद:</strong> सऊदी अरब, बहरीन, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई) और मिस्र ने कतर से डिप्लोमैटिक रिलेशन खत्म कर दिए। इन देशों ने कतर पर आतंकवाद को समर्थन को देने का आरोप लगाया।</p>
<h1>आतंकवाद और कट्टरपंथ से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी</h1>
<p>सऊदी अरब ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सऊदी को आतंकवाद और कट्टरपंथ से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। सऊदी ने कहा कि देश के साम्राज्य को बचाने के लिए ये कदम उठाया गया है।</p>
<p>वहीं बहरीन ने कहा है कि वह कतर की राजधानी दोहा से 48 घंटे के अंदर अपने राजनयिक मिशन को वापस बुला रहा है और इसी अवधि में कतर के सभी राजनयिकों को बहरीन छोड़ देना चाहिए।</p>
<h1 style="text-align:center;">सभी बंदरगाह बंद करने का ऐलान</h1>
<p>मिस्त्र ने कतर के साथ हवाई रिश्ते और सभी बंदरगाह बंद करने का ऐलान किया। मिस्त्र ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर ये फैसला लेने का दावा किया।</p>
<p>सऊदी प्रेस एजेंसी की खबर के मुताबिक, कतर लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहा था। साथ ही सऊदी में विरोधी ताकतों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा था. जिसके चलते ये एक्शन लिया गया।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 01:13:25 +0530</pubDate>
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