<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/hindi-article/tag-1954" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Hindi Article - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/1954/rss</link>
                <description>Hindi Article RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Sunita Williams: सुनीता विलियम्स का अदम्य साहस! भरी हौसलों की उड़ान, छुआ आसमान और धरती पर वापिस</title>
                                    <description><![CDATA[‘अगर देखना चाहते हो मेरे हौसलों की उड़ान, तो आसमान से कह दो कि और ऊंचा हो जाए।’ यह पंक्तियां स्पष्ट रूप से यह संदेश देती हैं कि किसी के सपने तभी पूरे होते हैं जब उसमें साहस और धैर्य हो। क्योंकि आसमान में उड़ना ऐसा लक्ष्य लगता है, जो शायद कभी पूरा न हो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sunita-williams-indomitable-courage-she-flew-with-great-courage-touched-the-sky-and-returned-to-earth/article-68768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/sunita-williams1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">‘अगर देखना चाहते हो मेरे हौसलों की उड़ान, तो आसमान से कह दो कि और ऊंचा हो जाए।’ यह पंक्तियां स्पष्ट रूप से यह संदेश देती हैं कि किसी के सपने तभी पूरे होते हैं जब उसमें साहस और धैर्य हो। क्योंकि आसमान में उड़ना ऐसा लक्ष्य लगता है, जो शायद कभी पूरा न हो सके। लेकिन जब किसी के पास संकल्प हो, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है। भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स ने यही साबित किया। अपनी साहसिकता और मेहनत से उन्होंने आकाश को छुआ और एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जो भविष्य में प्रेरणा का स्रोत बनेगा। Sunita Williams</p>
<p style="text-align:justify;">सुनीता विलियम्स का नाम आज अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में चमक रहा है। यह वही नाम है, जिसे सुनते ही अंतरिक्ष से जुड़े कई रोमांचक और प्रेरक किस्से याद आ जाते हैं। सुनीता के साथ जब अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर सहित चार लोग पृथ्वी पर लौटे, तो अमेरिका में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। वहीं, भारत में भी उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस किया, क्योंकि सुनीता भारतीय मूल की हैं, इस प्रकार उनकी उपलब्धि भारत के लिए भी गौरव का विषय बनी।</p>
<h3>सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष यात्रा केवल नौ दिन की थी</h3>
<p style="text-align:justify;">सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष यात्रा केवल नौ दिन की थी, लेकिन यह यात्रा अचानक नौ महीने और चौदह दिन की हो गई। शुरूआत में यह यात्रा थोड़ी सामान्य प्रतीत हो सकती थी, लेकिन वास्तव में यह बेहद कठिन थी। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी होती है, जिससे वहां की स्थितियां धरती से बहुत भिन्न होती हैं। सुनीता की यह तीसरी अंतरिक्ष यात्रा थी, और इस बार उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ न केवल चुनौतियों का सामना किया, बल्कि अंतरिक्ष में रहते हुए कई शोध कार्य भी किए।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष की दुनिया को एक अलग ही दृष्टिकोण से देखना पड़ता है। वहां, पृथ्वी की तरह कोई ठोस आधार नहीं होता। अंतरिक्ष में वस्तुएं तैरती रहती हैं और इंसान का शरीर भी एक अद्भुत स्थिति में रहता है, जैसे कि वह वजनहीन हो। ऐसे में चलना, बैठना और सोना सभी कार्य अत्यंत कठिन हो जाते हैं। इसके बावजूद, सुनीता और उनकी टीम ने बिना किसी परेशानी के अपना काम किया। इस दौरान उन्होंने शोध कार्यों में इतनी व्यस्तता दिखाई कि कोई भी समस्या उनके रास्ते में आकर खड़ी नहीं हुई। एक दिन, जब उनका यान समुद्र में उतरा, तो वह दृश्य वाकई में अद्भुत था। Nasa</p>
<h3>इस अभियान ने अंतरिक्ष यात्रा के नए आयाम खोले थे | Sunita Williams</h3>
<p style="text-align:justify;">नासा के इस अभियान ने अंतरिक्ष यात्रा के नए आयाम खोले थे। अंतरिक्ष यात्री अपनी यात्रा के दौरान न केवल शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत रहना पड़ता हैं। वहां के जीवन में प्रत्येक छोटी-सी बात को भी अनुकूलित करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, अंतरिक्ष में नींद लेने के लिए खुद को बेल्ट से बांधना पड़ता है और पानी पीने के लिए पसीने और पेशाब को शुद्ध करके पीते हैं। ये सब अद्भुत अनुभव थे जो इंसान की सहनशक्ति और साहस को चुनौती देते थे।</p>
<h3>नौतियों के बावजूद, सुनीता और उनके साथी मिशन में लगे रहे</h3>
<p style="text-align:justify;">इन सभी चुनौतियों के बावजूद, सुनीता और उनके साथी मिशन में लगे रहे और शोध के कार्यों को पूरा किया। नासा ने इस मिशन को सफलता से अंजाम दिया, और यह अंतरिक्ष विज्ञान में एक मील का पत्थर बन गया। भारत ने भी अपने चंद्रयान मिशन के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान में अहम योगदान दिया है, और यह साबित किया कि भारत इस क्षेत्र में किसी भी दृष्टिकोण से पीछे नहीं है। उनके जीवन में भारतीय संस्कारों की झलक मिलती है। अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले वह भगवत गीता और गणेश जी की प्रतिमा साथ लेकर गई थीं। यह उनके भारतीय संस्कारों और श्रद्धा को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनीता की इस साहसिक यात्रा ने न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को नई दिशा दी, बल्कि भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए भी यह प्रेरणा का स्रोत बनी। इस यात्रा के दौरान किए गए शोध को अंतरिक्ष विज्ञानियों के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाएगा, जो भविष्य में विज्ञान जगत के लिए प्रेरणा का कारण बनेगा। सुनीता विलियम्स का साहस और समर्पण सभी के लिए एक प्रेरणा है। यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि उन्होंने अंतरिक्ष यात्रा में नई ऊंचाइयों को छुआ और भारतीय प्रतिभा का नाम रोशन किया। Sunita Williams</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिंदुस्थानी (यह लेखक के अपने विचार हैं) </strong></p>
<p><a title="PLI Yojana: पीएलआई योजना के तहत सरकार ने किए 14,020 करोड़ रुपये वितरित" href="http://10.0.0.122:1245/the-government-distributed-rs-14020-crore-under-the-pli-scheme/">PLI Yojana: पीएलआई योजना के तहत सरकार ने किए 14,020 करोड़ रुपये वितरित</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sunita-williams-indomitable-courage-she-flew-with-great-courage-touched-the-sky-and-returned-to-earth/article-68768</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sunita-williams-indomitable-courage-she-flew-with-great-courage-touched-the-sky-and-returned-to-earth/article-68768</guid>
                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 14:26:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-03/sunita-williams1.jpg"                         length="26005"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Climate Change: जलवायु परिवर्तन और बढ़ता बच्चों का जीवन संकट</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की रिपोर्ट ‘लर्निंग इंटरप्टेड: ग्लोबल स्नैपशॉट ऑफ क्लाइमेट-रिलेटेड स्कूल डिसरप्शंस इन 2024’ ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली तस्वीर प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों पर होने वाले शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधित प्रभावों का गहरा विश्लेषण किया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/climate-change-and-the-growing-threat-to-childrens-lives/article-67061"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-02/new-generation-suffering-from-climate-change.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की रिपोर्ट ‘लर्निंग इंटरप्टेड: ग्लोबल स्नैपशॉट ऑफ क्लाइमेट-रिलेटेड स्कूल डिसरप्शंस इन 2024’ ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली तस्वीर प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों पर होने वाले शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधित प्रभावों का गहरा विश्लेषण किया गया है। Climate Change</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के पर्यावरणीय और कृषि पर प्रभावों के बारे में कई अध्ययन सामने आए थे, लेकिन बच्चों की शिक्षा पर इसके प्रभाव पर यह पहला गंभीर अध्ययन है, जो पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, और अभिभावकों को गंभीर चिंता में डालने के लिए पर्याप्त है। यह रिपोर्ट सरकारों पर भी दबाव डाल रही है कि वे जलवायु परिवर्तन के बच्चों और शिक्षा पर होने वाले घातक प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल प्रभावी नीतियाँ बनाएं और उन्हें लागू करें।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत में लगभग पांच करोड़ छात्रों की शिक्षा पर लू और अत्यधिक गर्मी का गंभीर असर पड़ा। ओस्लो विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान के पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो डॉ. केटलिन एम. प्रेंटिस और उनके सहकर्मियों ने जलवायु परिवर्तन के इस प्रभाव पर विस्तृत अध्ययन किया है, जो ‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में विशेष रूप से दक्षिण एशिया के देशों, जैसे भारत, बांग्लादेश, और कंबोडिया में अप्रैल महीने में आने वाली अत्यधिक गर्म हवाओं (हीटवेव) के कारण शिक्षा व्यवस्था पर पड़े नकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। भारत को जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एक अत्यधिक संवेदनशील देश माना गया है। Climate Change</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया के 85 देशों में कुल 24.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई मौसम की चरम स्थितियों के कारण प्रभावित हुई। इसका मतलब यह है कि हर सात में से एक बच्चा जलवायु संकट के कारण कभी न कभी स्कूल नहीं जा सका। शोध में यह भी बताया गया कि बढ़ती गर्मी और अधिक गर्म दिनों ने न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि उनके परीक्षा परिणामों को भी खराब किया। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इस तरह जारी रहता है, तो वर्ष 2050 तक बच्चों के अत्यधिक गर्मी और लू के संपर्क में आने की संभावना आठ गुना बढ़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन न केवल बच्चों की शिक्षा, बल्कि उनके समग्र भविष्य को भी गंभीर खतरे में डाल रहा है। अगर इस संकट से निपटने के लिए तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दीर्घकालिक परिणाम न केवल शिक्षा पर बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर भी गहरे असर डालेंगे। जलवायु परिवर्तन का बच्चों पर प्रभाव शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक दोनों दृष्टिकोणों से घातक हो सकता है। गर्मी से होने वाली बीमारियाँ और मौतों का खतरा बढ़ जाता है। Climate Change</p>
<p style="text-align:justify;">हैजा, मलेरिया, डेंगू, और जीका जैसी बीमारियाँ बच्चों के जीवन के लिए खतरनाक हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से बच्चों के जन्म के समय कम वजन होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से बच्चों के स्वास्थ्य पर और भी बुरा असर पड़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य भी इस संकट से प्रभावित होता है। बच्चों में अवसाद, चिंता, नींद संबंधी विकार और सीखने में कठिनाइयाँ जैसी समस्याएँ उभर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चे वयस्कों की तुलना में जलवायु और पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। वे बाढ़, सूखा, तूफान, और गर्मी जैसी चरम मौसम की घटनाओं से निपटने में वयस्कों से कम सक्षम होते हैं। इसके परिणामस्वरूप, बच्चों के लिए यह संकट उनके अस्तित्व, संरक्षण, विकास, और सामाजिक भागीदारी के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है। जलवायु परिवर्तन के अन्य प्रभावों में बच्चों के अनाथ होने, तस्करी, बाल श्रम, शिक्षा और विकास के अवसरों की हानि, परिवार से अलग होना, बेघर होना, और मानसिक आघात शामिल हैं। यह संकट पूरी दुनिया में मौजूद है, लेकिन विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों में इसका प्रभाव अधिक है। Climate Change</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों की कमी ने इस संकट को और भी गंभीर बना दिया है। अमीर और शक्तिशाली देशों द्वारा इस मुद्दे को नजरअंदाज करना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और बढ़ावा दे रहा है। पिछले साल में ही जलवायु परिवर्तन के घातक प्रभावों ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। अगर वैश्विक तापमान में और वृद्धि होती है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक भयानक संकट बन सकता है। भारत को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए गंभीर कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों और परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ मजबूत हों, और बच्चों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की पहचान की जाए। जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभावित देशों को बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक मंचों पर अपनी प्रतिबद्धता बढ़ानी होगी। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए व्यापक शोध और अध्ययन की आवश्यकता है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके प्रभाव दीर्घकालिक हो सकते हैं। Climate Change</p>
<p style="text-align:justify;">समग्र रूप से, जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। अगर हमें इस संकट से बचना है, तो हमें जलवायु परिवर्तन को लेकर तत्काल कार्रवाई करनी होगी। यह केवल पर्यावरण का संकट नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अस्तित्व, विकास, और शिक्षा का संकट भी है। हमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ठोस नीतियों और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है। अगर हम अब भी चुप रहे, तो यह हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी नासमझी और अपराध साबित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ललित गर्ग (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><a title="Turmeric Milk Benefit: दूध में हल्दी डालकर पीने के हैं अनोखे फायदे, जानें क्यों है ये हेल्थ के लिए वरदान" href="http://10.0.0.122:1245/haldi-wale-doodh-ke-fayde/">Turmeric Milk Benefit: दूध में हल्दी डालकर पीने के हैं अनोखे फायदे, जानें क्यों है ये हेल्थ के लिए व…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/climate-change-and-the-growing-threat-to-childrens-lives/article-67061</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/climate-change-and-the-growing-threat-to-childrens-lives/article-67061</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 16:02:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-02/new-generation-suffering-from-climate-change.jpg"                         length="34852"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ways to Relieve Anxiety: डॉ. नवजोत सिंह सिद्धू, से जानें चिंता दूर करने के उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[Ways to Relieve Anxiety: चिंता एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन एक सीमा तक। अक्सर हम अपने आसपास यह कहते सुनते हैं, ‘तुम घबराओ मत, चिंता मत करो। मुझे बहुत घबराहट हो रही है।’ घबराहट और चिंता ऐसे भाव हैं, जो हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर एक-दूसरे से सुनते हैं। क्या चिंता एक बीमारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/learn-ways-to-relieve-anxiety-from-dr-navjot-singh-sidhu/article-64473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/dr-novjot.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ways to Relieve Anxiety: चिंता एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन एक सीमा तक। अक्सर हम अपने आसपास यह कहते सुनते हैं, ‘तुम घबराओ मत, चिंता मत करो। मुझे बहुत घबराहट हो रही है।’ घबराहट और चिंता ऐसे भाव हैं, जो हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर एक-दूसरे से सुनते हैं। क्या चिंता एक बीमारी है या हमारे शरीर की सामान्य प्रक्रिया?</p>
<p style="text-align:justify;">चिंता को अंग्रेजी में ‘एंजाइटी’ कहते हैं। यह एक सीमा तक हमारे शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, जो कई बार हमारे लिए बहुत फायदेमंद होती है। उदाहरण के लिए, जंगल में किसी खतरनाक जानवर से सामना हो जाए, तो हमारा शरीर महसूस करता है कि यहां खतरा है। इस घबराहट के कारण हम जरूरी कदम उठाकर खुद को बचाने के उपाय करते हैं। यह हमारे शरीर का संकेत है कि कुछ करने या न करने से हमें खतरा हो सकता है। जहां हमारे अस्तित्व को खतरा होता है, वहां चिंता होना स्वाभाविक है, जो कई बार हमारे लिए लाभदायक भी होती है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं और अचानक तूफान का सामना होता है। इस स्थिति में घबराहट महसूस होती है और आप गाड़ी सड़क किनारे रोक देते हैं। इस तरह आप तूफान से बचकर अपने जान-माल को सुरक्षित रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन जिस चिंता की आज हम बात कर रहे हैं, वह मनोवैज्ञानिक चिंता है। इस चिंता में नकारात्मक विचार बहुत अधिक होते हैं, जो हमारे और हमारी जिंदगी के लिए कोई महत्व नहीं रखते। ये नकारात्मक विचार हमारे अंदर डर, घबराहट और अत्यधिक सोचने की आदत पैदा करते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि घर का कोई सदस्य काम पर गया है और रात तक लौटना था, लेकिन वह समय पर नहीं लौटा। इस स्थिति में जो मनोवैज्ञानिक चिंता से पीड़ित होते हैं, वे सोचने लगते हैं कि उसे कुछ हो गया है या वह किसी हादसे का शिकार हो गया है। नकारात्मक विचारों के कारण हम अपने अंदर डर का माहौल बना लेते हैं, जो हमारी रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा डालता है। इससे शरीर में नकारात्मक रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू हो जाती हैं, जो हमें शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चिंता से आते हैं नेगेटिव विचार</h3>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी को चिंता करने की आदत पड़ जाए, तो वह छोटी-छोटी बातों पर भी चिंता महसूस करने लगता है। इससे व्यक्ति के अंदर डर और घबराहट महसूस होती है। उसकी नींद खराब रहती है, थकान महसूस होती है और धीरे-धीरे उसके स्वभाव में बदलाव आने लगता है। ऐसा व्यक्ति खुश नहीं रहता और धीरे-धीरे अवसाद की ओर बढ़ने लगता है। उसे लगता है कि उसकी जिंदगी बर्बाद हो रही है, और कई बार उसे आत्महत्या के विचार आने लगते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चिंता व घबराहट को कर सकते हैं नियंत्रित</h3>
<p style="text-align:justify;">हमारे शरीर में कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं। कुछ रासायनिक पदार्थ हमें खुश रखने वाले होते हैं। इनकी कमी से हमें चिंता, घबराहट और डर महसूस होना स्वाभाविक है। यदि हमारे शरीर में ये रसायन उचित मात्रा में मौजूद हों, तो हम बाहरी चिंता और घबराहट को आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। अच्छी नींद हमारे मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने में मुख्य भूमिका निभाती है। चिंता और घबराहट एक अच्छी और गहरी नींद से समाप्त हो सकते हैं, और इससे व्यक्ति एक तरोताजा दिन की शुरूआत करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सूरज की किरणें लेने से बढ़ते हैं खुशी वाले हार्मोन</h3>
<p style="text-align:justify;">सूरज की किरणें हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। सुबह की पहली किरणें हमारे शरीर में खुश रखने वाले हार्मोन सेरोटोनिन और डोपामाइन का उत्पादन करती हैं, जो एंटीडिप्रेसेंट का काम करते हैं। ये हमें खुश रखने में मदद करते हैं। इसलिए सुबह सूर्य की किरणें लगभग 20 मिनट तक लेनी चाहिए। सैर और व्यायाम से भी हमारी चिंता और तनाव काफी कम हो सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फॉस्ट फूड बढ़ाता है चिड़चिड़ापन</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रोबायोटिक भोजन करने से हमारे मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हमारी आंतों में लाखों की संख्या में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो हमारे पाचन तंत्र और पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हमारे पेट का स्वास्थ्य हमारे मूड पर सीधा प्रभाव डालता है। फास्ट फूड, डीप फ्राइड फूड और पैकेज्ड फूड हमारे अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा को कम करते हैं, जिससे हमारे मन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/learn-ways-to-relieve-anxiety-from-dr-navjot-singh-sidhu/article-64473</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/learn-ways-to-relieve-anxiety-from-dr-navjot-singh-sidhu/article-64473</guid>
                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 17:10:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-11/dr-novjot.jpg"                         length="75053"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>India-China Agreement: भारत-चीन समझौता: भरोसे की परीक्षा का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[India-China Agreement: भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की गश्त को लेकर हाल ही में हुए समझौते को दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इस समझौते का पूरा विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाएं हैं कि इसके तहत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-china-agreement-time-to-test-trust/article-63855"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/india-china-petroling1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India-China Agreement: भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की गश्त को लेकर हाल ही में हुए समझौते को दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इस समझौते का पूरा विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाएं हैं कि इसके तहत दोनों देशों की सेनाएँ अपनी पुरानी स्थिति, यानी अप्रैल 2020 (गलवान संघर्ष से पूर्व) पर लौटेंगी। इसके साथ ही देपसांग और डेनचॉक क्षेत्रों में सैनिकों की पीछे हटने की प्रक्रिया होगी और वहाँ गश्त फिर से शुरू हो सकेगी। यह समझौता चार साल से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक अहम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया में भी इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में बताया जा रहा है। India-China News</p>
<p style="text-align:justify;">जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में ठंडक आ गई थी। इस घटना के बाद न केवल दोनों देशों के बीच संवाद सीमित हो गए थे, बल्कि उनके व्यापारिक रिश्ते भी प्रभावित हुए। गलवान में चीन द्वारा किए गए एकतरफा बदलावों के चलते दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सीमा विवाद के मूल कारणों का समाधान नहीं होगा, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।</p>
<h3>दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के सामने आ गए थे | India-China News</h3>
<p style="text-align:justify;">एलओसी पर हालात इतने नाजुक हो गए थे कि कुछ स्थानों पर दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के सामने आ गए थे, जिससे टकराव का खतरा लगातार बना हुआ था। यह तनाव न केवल भारत और चीन बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन गया था। भारत ने कई स्तरों पर सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं का सहारा लिया ताकि इस संकट का समाधान निकाला जा सके। इन वार्ताओं के अंतर्गत कोर कमांडर स्तर की 21 दौर की बातचीत के बाद आखिरकार दोनों देशों के बीच सहमति के कुछ बिंदु तय हो सकें। India-China News</p>
<p style="text-align:justify;">भारत भी पिछले कुछ समय से चीन की बढ़ती ताकत और उसके विस्तारवादी रुख का काउंटर करने की तैयारी में लगा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर, भारत ने क्वाड (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) और आईटूयूटू (अमेरिका, भारत, इजरायल, यूएई) जैसे समूहों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है और चीन पर दबाव डालने की कोशिश की है। इन समूहों के जरिए भारत न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी चीन को एक संदेश दे रहा है कि वह अकेला नहीं है।</p>
<h3>दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के सामने आ गए थे | India-China News</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, भारत ने नवंबर 2023 में मॉरीशस के अगालेगा द्वीप को सैन्य अड्डा बनाने का निर्णय लिया, ताकि अफ्रीकी गणराज्य जिबूती में चीन की उपस्थिति का मुकाबला किया जा सके। इस कदम के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में गुजरने वाले चीन के जहाजों और युद्धपोतों पर नजर रख सकेगा, जो चीन के ऊर्जा आयात-निर्यात के लिए एक प्रमुख मार्ग है। यदि चीन जिबूती में भारत को किसी भी प्रकार की चुनौती देता है, तो भारत अगालेगा से उस पर नजर रखते हुए जवाब देने में सक्षम होगा। India-China News</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार के कदमों से यह कहा जा सकता है कि मौजूदा समझौता भी भारत की ओर से विभिन्न मोर्चों पर बनाए गए दबाव का परिणाम हो सकता है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि इस समझौते में रूस का भी अप्रत्यक्ष दबाव हो सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि रूस, जो ब्रिक्स को मजबूत करने का पक्षधर है, ने इस समझौते के लिए चीन पर दबाव डाला होगा। दूसरी ओर, ताइवान का मुद्दा भी चीन की चिंता का कारण बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में ताइवान में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के विलियम लाई चिंग-ते राष्ट्रपति चुने गए, जो ताइवान की स्वतंत्रता के समर्थक और चीन के साम्राज्यवादी रुख के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रपति शी जिनपिंग का 2025 तक ताइवान पर नियंत्रण की योजना की घोषणा ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में शी जिनपिंग यह चाहते होंगे कि ताइवान मुद्दे पर भारत उनका विरोध न करे। इसी कारण, चीन ने इस समझौते के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया होगा। India-China News</p>
<h3>शी जिनपिंग चाहते होंगे कि ताइवान मुद्दे पर भारत उनका विरोध न करे</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, समझौते के बारे में स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और विपक्ष ने इसको लेकर कई सवाल उठाए हैं। कराकोरम दर्रा से लेकर चुमार तक के 65 पेट्रोलिंग पॉइंट्स में से भारत ने 26 पॉइंट्स पर पहुंच खो दी है। सवाल उठता है कि समझौते के बाद क्या भारत उन पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच सकेगा। साथ ही, समाधान की प्रक्रिया क्या लिखित रूप में है या मौखिक? विपक्ष की चिंताएँ जायज हैं, क्योंकि पिछले वर्षों में चीन ने इन क्षेत्रों में आक्रामक गतिविधियाँ की हैं, और यह मानना कठिन है कि वह इन अतिक्रमणों को आसानी से छोड़ देगा। कुल मिलाकर, भारत-चीन संबंध सुधार की प्रक्रिया आगे चुनौतिपूर्ण रहेगी, परंतु पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर विवाद के खत्म होने से जो सकारात्मक माहौल बना है, वह मौजूदा संकटग्रस्त विश्व में एक उम्मीद तो जगाता ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारत और चीन के बीच वार्ताओं के लिए विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए गए हैं। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल इस कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री जिम्मेदारी निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच औपचारिक बैठकें होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस के कजान में हुई वार्ता के दौरान मोदी ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था। उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास, सम्मान, और संवेदनशीलता दोनों देशों के रिश्तों का आधार होना चाहिए। India-China News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. एन. के. सोमानी (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><a title="Gold-Silver Price Today: दिवाली पर सोना-चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो जानें सोने-चांदी की ताजा कीमतें!" href="http://10.0.0.122:1245/know-the-latest-prices-of-gold-and-silver-today/">Gold-Silver Price Today: दिवाली पर सोना-चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो जानें सोने-चांदी की ताजा कीमत…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-china-agreement-time-to-test-trust/article-63855</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-china-agreement-time-to-test-trust/article-63855</guid>
                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 15:48:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-10/india-china-petroling1.jpg"                         length="81641"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Struggle and Passion: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के छोटे से कस्बे की गरीब परिवार की बेटी नारी जगत के लिए बनी प्रेरणा</title>
                                    <description><![CDATA[हॉकी की ‘गोल मशीन’ के संघर्ष व सफलता की कहानी प्रतिभा और मेधा किसी की बपौती नहीं होती। जोश, जुनून और पक्के इरादे के साथ-साथ बेहतर मार्गदर्शन मिले, तो साधारण से साधारण व्यक्ति भी न केवल अपने लिए बल्कि अपने देश और समाज के लिए बहुत कुछ कर गुजरता है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/kurukshetras-daughter-from-a-poor-family-became-an-inspiration-for-women/article-63765"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/rani-rampal-hockey.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">हॉकी की ‘गोल मशीन’ के संघर्ष व सफलता की कहानी</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रतिभा और मेधा किसी की बपौती नहीं होती। जोश, जुनून और पक्के इरादे के साथ-साथ बेहतर मार्गदर्शन मिले, तो साधारण से साधारण व्यक्ति भी न केवल अपने लिए बल्कि अपने देश और समाज के लिए बहुत कुछ कर गुजरता है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के छोटे से कस्बे शाहबाद मारकंडा में 1994 में बहुत ही गरीब परिवार में पैदा हुई बेटी रानी रामपाल ने गरीबी, तंगहाली और समाज के तानों का मुंह तोड़ते हुए अपना ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन किया और नारी जगत के लिए प्रेरणा बनी। Struggle and Passion</p>
<p style="text-align:justify;">बात महिला हाकी टीम की पूर्व कप्तान और हाकी की ‘गोल मशीन’ कही जाने वाली रानी रामपाल की है, जिन्होंने गत 24 अक्टूबर को हाकी से संन्यास लेने की घोषणा की है। याद रहे, उन्होंने हाकी खेलने से संन्यास लिया है, हाकी खिलाने से नहीं, क्योंकि वह इस समय भारत की जूनियर महिला हाकी टीम की कोच हैं। अब रानी रामपाल गोल नहीं करेंगी, बल्कि नई गोल मशीन तैयार करने का काम करेंगी। रानी रामपाल जिस त्याग, तपस्या और कठोर परिश्रम के बाद इस मुकाम पर पहुंची हैं, वह आज के युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनके पिता रामपाल ठेला-रेहड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे, और उनकी माता लोगों के घरों में काम करती थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">रानी रामपाल कहती हैं कि बचपन में उनके घर में गरीबी के चलते कई बार जब एक समय की रोटी मिल जाती, तो दूसरे समय की रोटी की आस नहीं होती थी। इस प्रकार से वह बचपन में कुपोषण का शिकार भी रहीं। इसके कारण ही बचपन में रानी रामपाल शरीर से बहुत दुबली-पतली थीं। उन्होंने पड़ोसी के घर पर टीवी पर हाकी मैच देखा, तो उनके मन में हाकी के प्रति जुनून पैदा हो गया। अगले ही दिन शाहबाद मारकंडा के हॉकी स्टेडियम में हाकी खेलने के लिए द्रोणाचार्य अवार्डी कोच बलदेव सिंह के पास पहुंची। तब कोच बलदेव सिंह ने कहा था कि आप बहुत दुबली-पतली हैं, हॉकी कैसे खेल पाओगी। फिर भी, कोच बलदेव सिंह ने उन्हें हौसला दिया और उत्साहित किया। इसके बाद रानी ने हॉकी स्टिक पकड़ी और अपने कोच बलदेव सिंह से हॉकी की बारीकियां सीखी।</p>
<h3>संघर्ष और जुनून: बेटियों को उनके सपने पूरे करने का अवसर दें</h3>
<p>रानी रामपाल का कहना है कि बलदेव सिंह ने उनकी जिंदगी बदल दी, और उनके द्वारा सिखाए गए हाकी के गुर की बदौलत उन्हें 14 वर्ष की आयु में 2008 में इंडियन जर्सी पहनने का मौका मिला और हॉकी में डेब्यू किया। यह हर भारतीय खिलाड़ी का सपना होता है। इसके बाद रानी रामपाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2010 में भारत की जूनियर हाकी टीम में देश के लिए खेली। 2017 के एशियन कप में गोल्ड, 2018 में सिल्वर और 2020 में इंडिया के लिए मेडल जीते। भारतीय टीम की कप्तान के रूप में टोकियो ओलंपिक 2020 में भाग लिया। हालांकि, भारतीय महिला हॉकी टीम मेडल जीतने से चूक गई और टीम को चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">रानी रामपाल आगे कहती हैं कि जीवन में उन्हें सबसे ज्यादा गर्व तब हुआ जब 2020 में वह अपने पिता के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिली थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मेरे पिता को सीने से लगाकर कहा था, “मुझे रानी से भी ज्यादा आप पर गर्व है, क्योंकि जो आपने अपनी बेटी के लिए किया है, वो हर बाप अपनी बेटी के लिए करे।” रानी को अपने जीवन में खेल के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">शुरूआती दौर में इंजरी के चलते लोगों ने यहां तक कह डाला था कि रानी शायद ही अब हाकी खेल पाए। इतना ही नहीं, समाज के कई प्रकार के ताने सहने पड़े। इसके बावजूद, उन्होंने हाकी खेली और 254 बेहतरीन हाकी मैच खेले तथा अंतरराष्ट्रीय मैचों में 205 गोल किए। तभी तो रानी रामपाल को हाकी की गोल मशीन कहा जाता है। रानी रामपाल को 2020 में भारत सरकार द्वारा मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसी वर्ष, देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया। अपनी इस सफलता में रानी रामपाल उड़ीसा, हरियाणा और भारत सरकार के साथ-साथ भारतीय खेल प्राधिकरण का भी महत्वपूर्ण योगदान मानती हैं और धन्यवाद प्रकट करती हैं।</p>
<h3>16 साल के खेल करियर के बाद संन्यास लेने की घोषणा कर सबको चौंका दिया</h3>
<p style="text-align:justify;">रानी ने गत 24 अक्टूबर को 30 साल की उम्र में 16 साल के खेल करियर के बाद भावुक होते हुए हाकी खेल से संन्यास लेने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। उन्होंने महिला हाकी इंडिया लीग में कोच के रूप में नई पारी का आगाज करने का भी ऐलान किया है। हाकी की गोल मशीन कही जाने वाली रानी रामपाल अब खुद मशीन न बनकर नई गोल मशीन तैयार करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">रानी रामपाल का कहना है कि जब वे अपने शाहबाद मारकंडा आती हैं, तो लोग अपनी बेटियों को कहते हैं कि तुम्हें भी रानी जैसा बनना है। यह सुनकर ऐसा लगता है कि मैं अपने मकसद में कामयाब हो गई हूं। उनका कहना है कि वे हर माता-पिता से यही गुजारिश करेंगी कि वे अपनी बेटियों को उनके सपने पूरे करने का अवसर दें। एक दिन आपको उन पर गर्व होगा, और इस प्रकार से आगे और कई रानी पैदा होंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>                                                                         सतीश मेहरा (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><a title="Haryana-Rajasthan Roadways: महिला पुलिसकर्मी ने 50 रुपये का बस टिकट नहीं लिया तो राजस्थान-हरियाणा के बीच चालान की जंग शुरू" href="http://10.0.0.122:1245/challan-war-between-rajasthan-and-haryana/">Haryana-Rajasthan Roadways: महिला पुलिसकर्मी ने 50 रुपये का बस टिकट नहीं लिया तो राजस्थान-हरियाणा के…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/kurukshetras-daughter-from-a-poor-family-became-an-inspiration-for-women/article-63765</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/kurukshetras-daughter-from-a-poor-family-became-an-inspiration-for-women/article-63765</guid>
                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 10:37:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-10/rani-rampal-hockey.jpg"                         length="51495"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रकृति से खिलवाड़, परिणामस्वरूप सुरंग हादसा!</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखण्ड के जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू और बड़कोट के बीच सिल्क्यारा के नजदीक निमार्णाधीन करीब 4531 मीटर लम्बी सुरंग है जिसमें सिल्क्यारा की तरफ से 2340 मीटर और बड़कोट की तरफ से 1600 मीटर निर्माण हो चुका है। यहां बीती 12 नवम्बर, सुबह करीब पांच बजे सिल्क्यारा की तरफ से करीब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/playing-with-nature-resulting-in-tunnel-accident/article-55039"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/tunner-accident-pic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तराखण्ड के जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू और बड़कोट के बीच सिल्क्यारा के नजदीक निमार्णाधीन करीब 4531 मीटर लम्बी सुरंग है जिसमें सिल्क्यारा की तरफ से 2340 मीटर और बड़कोट की तरफ से 1600 मीटर निर्माण हो चुका है। यहां बीती 12 नवम्बर, सुबह करीब पांच बजे सिल्क्यारा की तरफ से करीब 270 मीटर अन्दर, करीब 30 मीटर क्षेत्र में ऊपर से मलबा सुरंग में गिरने की वजह से 41 लोग फंस गये थे। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">यह टनल चार धाम रोड प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही है, जो हर मौसम में खुली रहेगी। टनल कटिंग का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हाल ही में अधिकारियों ने दावा किया था कि टनल के अंदर दिसंबर तक वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी. मजदूरों के फंस जाने की खबर से देशवासी चिंतित हैं। मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य जारी हैं। इस दुर्घटना का सबसे दुखद पक्ष यह है कि इस सुरंग का एक हिस्सा 2019 में भी धंसा था। संयोग है कि उस वक्त कोई मजदूर उसमें नहीं फंसा था। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">इस हादसे ने एक बार फिर दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों के स्याह पक्ष को रेखांकित किया है। यह स्याह पक्ष है विकास परियोजनाओं के चलते कुछ ही देर की तेज बरसात से पहाड़ों के भरभरा कर गिरने और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं का। कमजोर होते पहाड़ों की वजह से जब-तब आने वाली आपदा का। उत्तरकाशी की मिट्टी बहुत नर्म है। इसके चलते ऊपर से चट्टानें, मिट्टी आदि लगातार नीचे गिर रही है। इसके कारण भी बचाव कार्य में बड़ी दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<h3>संतुलन कायम करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत | Uttarkashi Tunnel Collapse</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ सडकों और पनबिजली योजनाओं के जरिए उत्तराखंड जैसे राज्य के दुर्गम और विकास से अछूते क्षेत्रों की आर्थिक विकास को संभव बनाने का उजला पक्ष भी है। जाहिर है कि इस उजले और स्याह पक्ष के बीच संतुलन कायम करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। यह जरूरत इसलिए भी है क्योंकि पहाड़ ही नहीं बचेंगे तो सडकों के बिछते जाल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं जुटाने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">संतुलन भी तभी संभव है जबकि किसी भी तरह की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने से पहले उनसे जुड़े नफा-नुकसान का पूर्व आकलन ठीक से कर लिया जाए। जान जोखिम में डालकर निर्माण कार्यों में जुटे श्रमिकों की सुरक्षा भी हर मोर्चे पर सुनिश्चित करनी होगी। ऐसा तब ही संभव होगा जब तमाम एहतियाती कदम भी उठा लिए जाएं। सवाल यही है कि आखिर निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता प्रबंधन की ‘शून्य दोष’ अवधारणा सिर्फ किताबों तक ही सीमित क्यों रहे? यह सही है कि आपदा कभी कह कर नहीं आती और न ही ऐसे हादसों का पूवार्नुमान संभव है। लेकिन इस हादसे में तो आपदा प्रबंधन में जुटे अधिकारियों ने भी माना है कि यदि बेहतर सुरक्षा उपाय और अलार्म सिस्टम होता तो मजदूर इस तरह से सुरंग में नहीं फंसते।</p>
<h3>पूरी हिमालयीन पर्वत श्रृंखला अपेक्षाकृत पृथ्वी पर होने वाला नया प्राकृतिक निर्माण</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर हादसे होने के बाद ही तकनीकी खामियां उजागर होती हैं, पहले इनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। बाद में लकीर पीटने का काम जरूर होता है। ऐसे हादसों की वजह संबंधित एजेंसी का कमजोर तकनीकी पक्ष तो है ही, भू-वैज्ञानिकों की चेतावनियों की अनदेखी भी इसके लिए जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत पूरी हिमालयीन पर्वत श्रृंखला अपेक्षाकृत पृथ्वी पर होने वाला नया प्राकृतिक निर्माण है। कुछ ही स्थलों को छोड़ दें तो कम आयु की यह पर्वतमाला ज्यादातर स्थलों पर कच्ची है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार इसका निर्माण अब भी जारी है। उसमें भी उत्तराखंड की मिट्टी तो और भी भुरभुरी होने के कारण पृथ्वी की परतों के नीचे होने वाली हलचलों का असर हिमाचल प्रदेश के साथ इसी क्षेत्र में सर्वाधिक पड़ता है। नेपाल में बार-बार आने वाले भूकम्पों का कारण भी यही भूगर्भीय हलचलें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहाड़ों के साथ जैसा बर्ताव मानव जाति की ओर से हो रहा है उसका एक और उदाहरण इस हादसे के रूप में सबके सामने है। अब यह सोचने का वक्त आ गया है कि किस तरीके से पहाड़ों में विकास कार्य किये जायें कि प्रकृति को न्यूनतम नुकसान हो और कम से कम ऐसे दर्दनाक हादसे तो न ही घटें। उल्लेखनीय है कि इसी साल की जनवरी में जोशीमठ में कई जगहों पर जमीनों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं। अनेक घरों में भी दरारें आई हैं जिसके कारण सैकड़ों लोगों ने जोशीमठ ही छोड़ दिया है। उन्हें अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी। आज भी यहां के लगभग 700 मकानों में दरारें देखी जा सकती हैं। यह कस्बा एक तरह से खाली हो गया है।</p>
<h3>पिछले साल 34 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी | Uttarkashi Tunnel Collapse</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल अक्टूबर में उत्तरकाशी के ही भटवाड़ी इलाके में द्रौपदी के डांडा-2 पर्वत शिखर पर जोरदार बर्फीला तूफान आया था। इससे 34 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। इनमें 25 प्रशिक्षु थे जबकि 2 प्रशिक्षक थे। अक्टूबर 1991 में जोरदार भूकंप आया था जिससे करीब एक हजार लोग मारे गये थे। हजारों मकान भी पूरी तरह से बर्बाद हो गये थे। तब यह अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे ही, काफी पहले पिथौरागढ़ जिले का माल्पा गांव भूस्खलन के चलते पूरी तरह से उजड़ गया था। इस हादसे में 255 लोगों की मौत हुई थी जिनमें कैलाश मानसरोवर जाने वाले 55 से ज्यादा श्रद्धालु थे। चमोली जिले में रिएक्टर स्केल पर 6.8 की तीव्रता वाले भूकंप के चलते 100 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इससे सटे हुए जिले रुद्रप्रयाग में भी भारी नुकसान हुआ था और अनेक घरों, सड़कों तथा जमीनों में दरारें आई थीं। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">सुरंग में फंसे श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं। और उम्मीद है कि सभी श्रमिक सकुशल बाहर निकलेंगे। बता दें कि इस तरह की घटना कहीं भी घटती है तो बचाव कार्य में समय लगता है। इससे पहले 2018 में थाईलैंड में इस तरह की एक घटना हुई थी। इस दौरान थाईलैंड में फुटबॉल टीम के 12 बच्चे और एक कोच था। इसके बाद सभी को 18 दिन बाद जाकर लोगों को टनल से निकाला गया था।</p>
<h3>परिणाम ऐसी ही त्रासदियों एवं हादसों के रूप में सामने आ रहे हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">बीते कई सालों में सरकारों द्वारा नयी सड़कें या उनका चौड़ीकरण, पुल, सुरंग आदि का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसके लिये होने वाले विस्फोटों व मशीनों के कारण भी पहाड़ों को भारी नुकसान होता है। इससे जलवायु में भी परिवर्तन हो रहा है। अब तो पहाड़ों के ऋ तु चक्र में तक बदलाव दर्ज हो रहे हैं। ऊपरी इलाकों में स्थित ग्लेशियरों के पिघलने के कारण इन पहाड़ों से निकलने वाली नदियों का जल स्तर बढ़ने तथा भूगर्भीय जल के कारण सतह के ऊपर बड़ी टूट-फूट हो रही है। नये-नये निर्माण कार्यों के परिणाम ऐसी ही त्रासदियों एवं हादसों के रूप में सामने आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न केवल उत्तराखंड बल्कि दूसरे पहाड़ी राज्यों में बीते वर्षों में सडक निर्माण या जलविद्युत परियोजना से जुड़ी सुरंगों के धंसने के कई हादसे हुए हैं। 2013 की केदारनाथ त्रासदी की भयावहता की कल्पना करते ही सिहरन हो उठती है। यह हाल के वर्षों में उत्तराखंड की सर्वाधिक बड़ी त्रासदी मानी जाती है जिसमें पता नहीं कितने लोगों की मौत हो गई थी। आज तक यह ठीक-ठीक नहीं बताया जा सका है कि कितने लोग मारे गये।</p>
<p style="text-align:justify;">विकास की आवश्यकता से कोई इंकार नहीं कर सकता लेकिन इन त्रासदियों एवं हादसों को देखते हुए नियंत्रित व वैज्ञानिक तरीके से निर्माण किये जाने चाहिये। दोनों पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तबाही के मंजर को हम प्राकृतिक आपदा का नाम भले ही देते हों लेकिन प्रकृति के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने की मानवीय प्रवृत्ति ही ऐसे हादसों को न्योता देती है, यह सबको समझना होगा। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:right;"><strong>आशीष वशिष्ठ, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="FD Scheme: बैंक ग्राहकों के लिए खुशखबरी, भारतीय स्टेट बैंक की इस स्कीम में डबल हो जाएंगे आपके पैसे" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-for-bank-customers-your-money-will-be-doubled-in-this-scheme-of-state-bank-of-india/">FD Scheme: बैंक ग्राहकों के लिए खुशखबरी, भारतीय स्टेट बैंक की इस स्कीम में डबल हो जाएंगे आपके पैसे</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/playing-with-nature-resulting-in-tunnel-accident/article-55039</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/playing-with-nature-resulting-in-tunnel-accident/article-55039</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Nov 2023 13:15:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-11/tunner-accident-pic.jpg"                         length="114825"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WMO ALERT: संयुक्त राष्ट्र के मौसम वैज्ञानिकों ने दी पूरी दुनिया को चेतावनी!</title>
                                    <description><![CDATA[WMO ALERT: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) व प्रशांत महासागर में बने अलनीनो का प्रभाव (El Nino effect) भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक तौर पर देखने को मिल रहा है। जिसकी वजह से विश्व में किसी देश में सूखे जैसी स्थिति है तो कोई देश बाढ़ की चपेट में है। जिन देशों में अब तक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/un-meteorologists-warned-the-whole-world/article-54739"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/el-nino-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">WMO ALERT: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) व प्रशांत महासागर में बने अलनीनो का प्रभाव (El Nino effect) भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक तौर पर देखने को मिल रहा है। जिसकी वजह से विश्व में किसी देश में सूखे जैसी स्थिति है तो कोई देश बाढ़ की चपेट में है। जिन देशों में अब तक सर्दी का मौसम बन जाना था, वह देश भी अब तक गर्म बने हुए हैं, जिनमे भारत भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र के मौसम वैज्ञानिकों की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस बार अक्टूबर महीना सबसे गर्म रहा है ऐसा 2020-21 के बाद पहली बार हुआ है। El Nino Effect</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र के मौसम वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा कि वर्ष 2023 अन्य वर्षो की तुलना में गर्म रहने की ही संभावना है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन डब्ल्यूएमओ (WMO) ने अपने सन्देश में कहा है कि अल नीनो प्रभाव अगले वर्ष भी जारी रहेगा, जिससे तापमान वृद्धि के जारी रहने की संभावना बनी रहेगी संगठन ने कहा है कि इस वर्ष अभी तक, वैश्विक औसत तापमान, अभी तक के रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे ऊँचा है, जोकि पूर्व-औद्योगिक स्तरों से, 1.43 डिग्री सैल्सियस ऊपर है।</p>
<h3>अल नीनो जलवायु रुझान अप्रैल 2024 तक जारी रहेगा</h3>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, अंटार्कटिक में समुद्री हिम का स्तर रिकॉर्ड निम्न है यूएन मौसम विज्ञान संगठन की अपेक्षा के अनुसार, गर्माता अल नीनो जलवायु रुझान,अप्रैल 2024 तक जारी रहेगा जिससे,तापमान में और अधिक वृद्धि होगी। इसे भारत जैसे देश के लिए एक चेतावनी के रूप में समझ जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संगठन के अध्यक्ष पैटेरी टालस ने कहा कि वैसे तो अल नीनो प्रभाव प्राकृतिक रूप से घटता है,मगर यह जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में होता है जिसे, मानव गतिविधियों के परिणाम स्वरूप गर्मी को सोख़ने वाली ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते जमाव से बढ़ावा मिलता है। जिसका असर पूरी मानव जाति के साथ-साथ प्रकृति पर भी पड़ता है। उन्होंने आगाह किया कि ताप लहरें, सूखा, जंगली आग, भारी वर्षा और बाढ़ जैसी मौसम की अत्यन्त चरम घटनाएँ, कुछ क्षेत्रों में और भी बदतर होंगी। पैटेरी टालस ने कहा, ‘इसीलिए, विश्व मौसम संगठन, ज़िन्दगियों को बचाने और आर्थिक नुक़सान कम करने के लिए, सभी के लिए पूर्व चेतावनी पहल, के लिए प्रतिबद्ध है।’</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलनीनो का प्रभाव पूरे विश्व भर में देखने को मिला था। जिसमें असाधारण रूप से मज़बूत अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा हाथ रहा था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">0.40 फीसदी अधिक रहा तापमान</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि इस वर्ष अक्टूबर महीना, रिकॉर्ड पर अभी का सबसे गर्म महीना रहा है, जोकि 1991-2020 के औसत तापमान से 0.85 डिग्री सैल्सियस, और अतीत में सर्वाधिक गर्म रहे अक्टूबर महीने से, 0.40 डिग्री सैल्सियस अधिक रहा।अक्टूबर ऐसा लगातार छठा महीना रहा है, जिसमें अंटार्कटिक समुद्र में हिम विस्तार रिकॉर्ड निम्न स्तर पर रहा। आर्कटिक समुद्र का हिम विस्तार, अक्टूबर के लिए,अपने सातवें निम्न बिन्दु पर पहुँचा। संगठन का कहना है कि अक्टूबर 2023 में, कुल बारिश या नमी, लगभग पूरे योरोप में, औसत से ऊपर रही।</p>
<p style="text-align:justify;">बाबेट तूफ़ान ने उत्तरी योरोप में दस्तक दी,और ऐलीन तूफ़ान ने, पुर्तगाल और स्पेन को प्रभावित किया,जिस दौरान भारी बारिश हुई और बाढ़ें आईं। ध्यान रहे कि दक्षिण पश्चिम मानसून की शुरुआत से ही भारत में भी बिपरजाय चक्रवात ने पूरे मॉनसून चक्र को बिगाड़ कर छोड़ दिया था। जिसकी वजह से राजस्थान जैसे इलाके में भी बाढ़ के हालात देखने को मिले व हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड जैसे राज्यों में बादल फटने के कारण हिमस्खलन हुआ तो हरियाणा ऐसा राज्य बना जिसके हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, जींद, भिवानी, चरखी-दादरी जिलों में सूखे जैसे हालात बने।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्तर भारत मे बदला मौसम,प्रदूषण से मिली राहत | El Nino Effect</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा राज्य सहित दिल्ली एनसीआर में पश्चिमिविक्षोभ के आंशिक प्रभाव से 9 नवंबर रात्रि से मौसम बदल चुका है। इस बदलाव के बाद 9 नवंबर रात्रि से ही बदलवाई बनी हुई है। दिल्ली एनसीआर में रात भर से हो रही बूंदाबांदी के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभागाध्यक्ष डॉ मदन खीचड़ ने 10 नवंबर को कहीं कहीं गरजचमक व हवाओं के साथ छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना जताई है। हरियाणा में कहीं कहीं पर हल्की बूंदाबांदी की शुरुआत हो भी चुकी है। इस बूंदाबांदी के बाद वायुमंडल की परत में बने प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट की संभावना है। इसके बाद 11 नवंबर से मौसम खुश्क तथा उत्तरपश्चिमी हवाएं चलने से रात्रि तापमान में गिरावट की संभावना बनी रहेगी। El Nino Effect</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Gold-Silver Price Today : धनतेरस पर सोना-चांदी सस्ता, जानें आज के भाव!" href="http://10.0.0.122:1245/gold-is-cheap-on-dhanteras-know-todays-price/">Gold-Silver Price Today : धनतेरस पर सोना-चांदी सस्ता, जानें आज के भाव!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/un-meteorologists-warned-the-whole-world/article-54739</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/un-meteorologists-warned-the-whole-world/article-54739</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Nov 2023 17:35:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-11/el-nino-1.jpg"                         length="14456"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Mahua Moitra: फोन हैकिंग का बाजार फिर गरम</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) समेत विपक्ष के 8 से ज्यादा नेताओं ने 31 अक्टूबर को केंद्र सरकार पर फोन हैकिंग का आरोप लगाया है। मामले में आईटी मंत्रालय की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी एपल को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। 31 अक्टूबर को महुआ मोइत्रा के अलावा कांग्रेस सांसद शशि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/phone-hacking-market-hot-again/article-54712"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/43-mobile-apps-banned.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) समेत विपक्ष के 8 से ज्यादा नेताओं ने 31 अक्टूबर को केंद्र सरकार पर फोन हैकिंग का आरोप लगाया है। मामले में आईटी मंत्रालय की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी एपल को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। 31 अक्टूबर को महुआ मोइत्रा के अलावा कांग्रेस सांसद शशि थरूर, पवन खेड़ा, आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर आईफोन का अलर्ट मैसेज पोस्ट कर लिखा- सरकार उनके फोन और ईमेल को हैक करवाने की कोशिश कर रही है। कुछ घंटे बाद राहुल गांधी भी कांग्रेस कार्यालय पहुंचे और कहा कि एपल की ओर से जो अलर्ट आया है, वो मेरे ऑफिस में सभी को मिला है।</p>
<h3>कथित तौर पर 300 से ज्यादा हस्तियों के फोन हैक किए</h3>
<p style="text-align:justify;">साल 2021 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी पर स्पाईवेयर पेगासस के जरिए जासूसी करने का आरोप लगाया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल और फॉरबिडेन स्टोरीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर से भारत में कथित तौर पर 300 से ज्यादा हस्तियों के फोन हैक किए थे। इनमें राजनेताओं, पत्रकारों और कई पूर्व प्रोफेसरों के फोन शामिल थे। राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने 2006 में यूपीए सरकार और सोनिया गांधी पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था इंटेलीजेंस ब्यूरो उनका फोन टैप कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने मामले में जॉर्ज सोरोस फंडेड एक्सेस नाउ और आईफोन नोटिफिकेशन के बीच संबंध का संकेत दिया। बीजेपी आईटी विभाग प्रमुख अमित मालवीय मालवीय ने एक्स पर एक नेटिजन का पोस्ट किया गया थ्रेड भी शेयर किया। कहा कि यह एक दिलचस्प थ्रेड है जो जॉर्ज सोरोस फंडेड एक्सेस नाउ और ऐप्पल नोटिफिकेशन के बीच एक लिंक खींचता है। नोटिफिकेशन केवल विपक्षी नेताओं को मिला है। इसमें एक्सेस नाउ की भूमिका दिखाई देती है। मालवीय ने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी सब कुछ छोड़ कर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने दौड़ पड़े। मालवीय ने कहा यहां भयावह साजिश देखें। थ्रेड में एक्सेस नाउ के भारत में बनाए गए नेटवर्क की डिटेल भी है। भाजपा नेता ने एक्स पर लिखा कि यदि आप परियों की कहानियों में भरोसा करते हैं, तो क्या आप सोचेंगे कि यह सब कुछ संयोग है।</p>
<h3>अलर्ट 150 देशों में भी भेजा गया</h3>
<p style="text-align:justify;">असल में, बहुराष्ट्रीय कंपनी एप्पल ने विपक्ष के कुछ नेताओं को अलर्ट भेजा कि आपके आईफोन हैक किए जा सकते हैं। हमलावर आपके फोन के संवेदनशील डाटा, कैमरे और माइक्रोफोन आदि तक पहुंचने की कोशिश भी कर सकते हैं। एप्पल ने यह अलर्ट सिर्फ विपक्षी नेताओं को ही नहीं भेजा, बल्कि ऐसे लोगों तक भी भेजा है, जो सार्वजनिक जीवन में नहीं हैं। कुछ पत्रकारों और स्कॉलर्स तक भी यह अलर्ट पहुंचा है। यह अलर्ट 150 देशों में भी भेजा गया है, जहां एप्पल के आईफोन इस्तेमाल किए जाते हैं। साफ मायने हैं कि यह चेतावनी वैश्विक है, लिहाजा विपक्षी नेताओं की चीखा-चिल्ली महज सियासत है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद एपल ने कहा कि स्टेट स्पॉन्सर्ड अटैकर्स को बढ़िया फंड मिलता है और वे बहुत सॉफिस्टिकेटेड तरीके से काम करते हैं। उनके अटैक भी समय के साथ बेहतर होते जाते हैं। ऐसे हमलों का पता लगा पाने के लिए हमें थ्रेट इंटेलिजेंस सिग्नल पर निर्भर रहना पड़ता है, जो कि कई बार परफेक्ट नहीं होते या अधूरे रहते हैं। ये संभव है कि एपल के कुछ थ्रेट नोटिफिकेशन फाल्स अलार्म हों या कुछ अटैक को डिटेक्ट न किया जा सके। हम ये जानकारी दे पाने में अक्षम हैं कि किन कारणों से हम थ्रेट नोटिफिकेशन जारी करते हैं, क्योंकि ऐसा करने से स्टेट स्पॉन्सर्ड अटैकर्स अलर्ट हो जाएंगे और फिर वे अटैक करने के अपने तरीके ऐसे बदल लेंगे कि भविष्य में पकड़ में नहीं आ पाएंगे।</p>
<h3>एप्पल ने हैकिंग के ऐसे खतरों से निपटने वाले सिस्टम से इंकार किया</h3>
<p style="text-align:justify;">एप्पल ने अपने बयान में यह स्पष्टीकरण भी दिया है कि खुफिया संकेतों के आधार पर ऐसे अलर्ट आते हैं, जो अधूरे और गलत भी साबित हो सकते हैं। कंपनी ने सरकार द्वारा प्रायोजित हमलावरों की बात तो की है, लेकिन किसी ‘विशेष सरकार’ का खुलासा नहीं किया है। एप्पल ने हैकिंग के ऐसे खतरों से निपटने वाले सिस्टम से इंकार किया है। कंपनी यह भी नहीं बता सकती कि अलर्ट किन हालात में देना पड़ा, क्योंकि यह जानकारी देने से हैकर्स उससे बचने के रास्ते खोज सकते हैं। Mahua Moitra</p>
<p style="text-align:justify;">यानी स्पष्ट है कि फोन हैकर्स चीन, पाकिस्तान या किसी अन्य देश के भी हो सकते हैं! एप्पल ने एक ही समय, एक ही साथ, विपक्षी नेताओं और 150 देशों को यह चेतावनी-संदेश भेजा है, लिहाजा संदेहास्पद और सवालिया लगता है। यदि हैकिंग हुई है या की जा रही है, तो वह अलग-अलग स्थान पर, अलग-अलग समय में की जानी चाहिए। फिर भी मान सकते हैं कि मोदी सरकार ने विपक्ष के कुछ नेताओं और प्रवक्ताओं के फोन हैक कराए हैं, लेकिन 150 देशों और अराजनीतिक चेहरों के फोन हैक कराने में सरकार के सरोकार क्या हो सकते हैं? उनसे हासिल क्या होगा?</p>
<h3>सरकार ने इन आरोपों को पूरी गंभीरता से लिया है | Mahua Moitra</h3>
<p style="text-align:justify;">निश्चित ही किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की ओर से विपक्षी नेताओं की निजता भंग करने का कोई भी मामला सामने आता है, तो स्वाभाविक ही सरकार को घेरा जाना चाहिए एवं जबाव मांगा जाना चाहिए। लेकिन बिना बुनियाद के ऐसे विवाद खड़े करना उचित नहीं है। अच्छी बात इस मामले में यह है कि सरकार ने इन आरोपों को पूरी गंभीरता से लिया है और तत्परता से निर्णय लेते हुए न केवल पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं बल्कि आईफोन कंपनी से भी जांच में शामिल होने को कहा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में 2 करोड़ से अधिक लोग आईफोन का इस्तेमाल करते हैं और दुनिया भर में करीब 146 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। क्या ये सभी मोदी सरकार के निशाने पर हैं अथवा सभी को अलर्ट भेजा गया था? एप्पल को इस संदर्भ में तमाम स्पष्टीकरण देने चाहिए। बहरहाल केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की घोषणानुसार जांच शुरू कर दी गई है। एप्पल भी जांच के दायरे में होगी। एप्पल से कथित ‘राज्य-प्रायोजित हमलों’ पर वास्तविक और सटीक जानकारी मांगी गई है। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम इसकी जांच कर तह तक जाने की कोशिश करेगी। मंत्री ने इसे भारत सरकार को बदनाम करने की साजिश और भटकाने वाली विपक्ष की राजनीति करार दिया है। ‘फोन में सेंधमारी’ कोई नया मुद्दा नहीं है। किसी की निजता और गोपनीयता पर हमला भी नहीं है। Mahua Moitra</p>
<h3>इस तरह का कोई भी काम पूर्ण रूप से असंवैधानिक व गैर कानूनी</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र एक जीवित, निष्पक्ष एवं आदर्श तंत्र है, जिसमें सबको समान रूप से अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार चलने, गतिविधियों को संचालित करने की पूरी स्वतंत्रता है। लोकतंत्र की नींव ही निजता की सुरक्षा करने के सिद्धान्तों पर टिकी है, इस व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक संविधान के दायरे में स्वयंभू होता है। अत: इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं की चिन्ता वाजिब मानी जा सकती है मगर इसके साथ ही सरकार की तरफ से तत्परता से व्यक्त इस मामले में संलिप्त न होने की साफगोई बयान को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सरकार ने इस मामले में तुरन्त कार्रवाई की है तो उसकी नीयत पर भी शक करने की कोई वजह दृष्टिगोचर नहीं होती। सरकार किसी की भी निजता को भंग करने का आरोप स्वयं कर लगता हुआ देख बिन बुलाये संकट को कैसे आमंत्रित कर सकती है? क्योंकि इस तरह का कोई भी काम पूर्ण रूप से असंवैधानिक व गैर कानूनी होती है। ऐसी अराजकता, अव्यवस्था एवं एकाधिपत्य लोकतंत्र का ही विलुप्त कर सकता है। Mahua Moitra</p>
<p style="text-align:right;"><strong>रोहित माहेश्वरी, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Semi-final World Cup: सेमीफाइनल में भिड़ सकते हैं भारत-पाक! जानें समीकरण" href="http://10.0.0.122:1245/india-pak-can-clash-in-the-semi-finals-learn-the-equation/">Semi-final World Cup: सेमीफाइनल में भिड़ सकते हैं भारत-पाक! जानें समीकरण</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/phone-hacking-market-hot-again/article-54712</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/phone-hacking-market-hot-again/article-54712</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 18:31:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-11/43-mobile-apps-banned.jpg"                         length="13261"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागरिक अधिकार पत्र प्रशासन की पारदर्शिता को सुनिश्चित करता &amp;#8216;हथियार&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[Good Governance: सुशासन प्रत्येक राष्ट्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। सुशासन के लिए यह जरूरी है कि प्रशासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही दोनों तत्व अनिवार्य रूप से विद्यमान हों। सिटिजन चार्टर (नागरिक अधिकार पत्र) एक ऐसा हथियार है जो कि प्रशासन की जवाबदेहिता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करता है। जिसके चलते प्रशासन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/citizens-charter-is-a-weapon-ensuring-transparency-of-administration/article-54550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/good-governance.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Good Governance: सुशासन प्रत्येक राष्ट्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। सुशासन के लिए यह जरूरी है कि प्रशासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही दोनों तत्व अनिवार्य रूप से विद्यमान हों। सिटिजन चार्टर (नागरिक अधिकार पत्र) एक ऐसा हथियार है जो कि प्रशासन की जवाबदेहिता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करता है। जिसके चलते प्रशासन का व्यवहार आम जनता (उपभोक्ताओं) के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील रहता है। दूसरे अर्थों में प्रशासनिक तंत्र को अधिक जवाबदेह और जनकेन्द्रित बनाने की दिशा में किये गये प्रयासों में सिटिजन चार्टर एक महत्वपूर्ण नवाचार है। Citizen’s Charter</p>
<p style="text-align:justify;">दो टूक कहें तो इस अधिकार के मामले में कथनी और करनी में काफी हद तक अंतर रहा है। देश भर में विभिन्न सेवाओं के लिए सिटिजन चार्टर लागू करने के मामले में अगस्त 2018 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई करने से ही इंकार कर दिया था। शीर्ष अदालत का तर्क था कि संसद को इसे लागू करने के निर्देश दे सकते हैं। इस मामले को लेकर न्यायालय ने याचिकाकत्र्ता के लिए बोला कि वे सरकार के पास जायें जबकि सरकारों का हाल यह है कि इस मामले में सफल नहीं हो पा रहीं हैं। यूपी में पहली बार योगी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि सिटिजन चार्टर को कड़ाई से लागू करेंगे पर स्थिति कितनी संतोषजनक है यह पड़ताल का विशय है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में कई वर्शों से आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई। इसके साथ ही साक्षरता दर में पर्याप्त वृद्धि हुई और लोगों में अधिकारों के प्रति जागरुकता आई। नागरिक और अधिकार और अधिक मुखर हो गये तथा प्रशासन को जवाबदेह बनाने में अपनी भूमिका भी सुनिश्चित की। अन्तर्राष्ट्रीय परिदृश्य में देखें तो विश्व का नागरिक पत्र के सम्बंध में पहला अभिनव प्रयोग 1991 में ब्रिटेन में किया गया जिसमें गुणवत्ता, विकल्प, मापदण्ड, मूल्य, जवाबदेही और पारदर्शिता मुख्य सिद्धांत निहित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि सुशासन एक लोक प्रवर्धित अवधारणा है ऐसे में शासन और प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि जनता की मजबूती के लिए हर सम्भव प्रयास करें साथ ही व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह के साथ मूल्यपरक बनाये रखें। इसी तर्ज पर ऑस्ट्रेलिया में सेवा चार्टर 1997 में, बेल्जियम में 1992, कनाडा 1995 जबकि भारत में यह 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में इसे मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया। पुर्तगाल, स्पेन समेत दुनिया के तमाम देश नागरिक अधिकार पत्र को अपनाकर सुशासन की राह को समतल करने का प्रयास किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के मामले में कहीं अधिक गम्भीर दिखाई देते हैं परन्तु सर्विस फर्स्ट के अभाव में यह व्यवस्था कुछ हद तक आशातीत नहीं रही। हालांकि भारत सरकार द्वारा इसे लेकर एक व्यापक वेबसाइट भी तैयार की गई जिसका प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा दशकों पहले लांच की गई थी। वैसे सुशासन को निर्धारित करने वाले तत्वों में राजनीतिक उत्तरदायित्व सबसे बड़ा है। यही राजनीतिक उत्तरदायित्व सिटिजन चार्टर को भी नियम संगत लागू कराने के प्रति जिम्मेदार है। सुशासन के निर्धारक तत्व मसलन नौकरशाही की जवाबदेहिता, मानव अधिकारों का संरक्षण, सरकार और सिविल सेवा सोसायटी के मध्य सहयोग, कानून का शासन आदि तभी लागू हो पायेंगे जब प्रशासन और जनता के अर्न्तसम्बंध पारदर्शी और संवेदनशील होंगे जिसमें सिटिजन चार्टर महत्वपूर्ण पहलू है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को सरकरी दफ्तरों में बिना रिश्वत दिए अपना कामकाज निपटाने के लिए यदि सात दशक तक इंतजार करना पड़े तो शायद यह गर्व का विषय तो नहीं होगा। जिस प्रकार सिटिजन चार्टर के मामले में राजनीतिक भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक संवेदनहीनता देखने को मिल रही है वह भी इस कानून के लिए ही रोड़ा रहा है। सूचना का अधिकार कानून के साथ अगर सिटिजन चार्टर भी कानूनी शक्ल, सूरत ले ले तो यह पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया बेहतरीन कदम होगा और सुशासन की दृष्टि से एक सफल दृष्टिकोण करार दिया जायेगा। जिन राज्यों में पहले से सिटिजन चार्टर कानून अस्तित्व में है वहां कोई नये तरीके की अड़चन देखी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने नागरिक चार्टर का आंतरिक व बाहरी मूल्यांकन अधिक प्रभावी, परिणामपरक और वास्तविक तरीके से करने के लिए मानकीकृत मॉडल हेतु पेशेवेर एजेंसी की नियुक्ति दशकों पहले किया था। इस एजेंसी ने केन्द्र सरकार के पांच संगठनों और आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों के एक दर्जन से अधिक विभागों के चार्टरों के कार्यान्वयन का मूल्यांकन भी कुछ साल पहले किया था। रिपोर्ट में रहा कि अधिकांश मामलों में चार्टर परामर्श प्रक्रिया के जरिये नहीं बनाये गये। इनका पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। नागरिक चार्टर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किसी प्रकार की कोई धनराशि निर्धारित नहीं की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त मुख्य सिफारिशें यह परिलक्षित करती हैं कि सिटिजन चार्टर को लेकर लेकर जितनी बयानबाजी की गई उतना किया नहीं गया। यद्यपि सिटिजन चार्टर प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है तथापि भारत में यह अधिक प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रहा। इसके कारण भी हतप्रभ करने वाले हैं। पहला यह कि सर्वमान्य प्रारूप का निर्धारण नहीं हो पाया, अभी भी कई सरकारी एजेंसियां इसका प्रयोग नहीं करती हैं। स्थानीय भाषा में इसे लेकर बढ़ावा न देना, इस मामले में उचित प्रशिक्षण का अभाव तथा जिसके लिए सिटिजन चार्टर बना वही नागरिक समाज भागीदारी के मामले में वंचित रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी सरकार सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा से युक्त थी तब भी सिटिजन चार्टर को लेकर समस्याएं कम नहीं हुईं। उल्लेखनीय है कि भारत में नागरिक चार्टर की पहल 1997 में की गयी जो कई समस्याओं के कारण बाधा बनी रही। नागरिक चार्टर की पहल के कार्यान्वयन से आज तक के अनुभव यह बताते हैं कि इसकी कमियां भी बहुत कुछ सिखा रही हैं। जिन देशों ने इसे एक सतत् प्रक्रिया के तौर पर अपना लिया है वे सघन रूप से निरंतर परिवर्तन की राह पर हैं। जहां पर रणनीतिक और तकनीकी गलतियां हुई हैं वहां सुशासन भी डामाडोल हुआ है। चूंकि सुशासन एक लोक प्रवर्धित अवधारणा है ऐसे में लोक सशक्तीकरण ही इसका मूल है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुशासन के भीतर और बाहर कई उपकरण हैं। सिटिजन चार्टर मुख्य हथियार है। सिटिजन चार्टर एक ऐसा माध्यम है जो जनता और सरकार के बीच विश्वास की स्थापना करने में अत्यंत सहायक है। एनसीजीजी का काम सुशासन के क्षेत्र में शोध करना और इसे लागू करने के लिए आसान तरीके विकसित करना है ताकि मंत्रालय आसानी से सुशासन सुधार को लागू कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, ई-ऑक्शन को बढ़ावा देना, अर्थव्यवस्था की समस्याओं का हल तलाशना, आधारभूत संरचना, निवेश पर जोर, जनता की उम्मीद पूरा करने पर ध्यान, नीतियों को तय समय सीमा में पूरा करना, इतना ही नहीं सरकारी नीतियों में निरंतरता, अधिकारियों का आत्मविश्वास बढ़ाना और शिक्षा, स्वास्थ, बिजली, पानी को प्राथमिकता देना ये सुशासनिक एजेंण्डे मोदी के सुशासन के प्रति झुकाव को दर्शाते हैं। लोकतंत्र नागरिकों से बनता है और सरकार अब नागरिकों पर शासन नहीं करती है बल्कि नागरिकों के साथ शासन करती है। ऐसे में नागरिक अधिकार पत्र को कानूनी रूप देकर लोकतंत्र के साथ-साथ सुशासन को भी सशक्त बनाया जाना चाहिए। Citizen’s Charter</p>
<p style="text-align:right;"><strong>सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ लेखक एवं प्रशासनिक चिंतक </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Ration Card News: ताऊ खट्टर ने दी राशन कार्ड धारकों को ये बड़ी सौगात!" href="http://10.0.0.122:1245/tau-khattar-gave-this-big-gift-to-the-ration-card-holders/">Ration Card News: ताऊ खट्टर ने दी राशन कार्ड धारकों को ये बड़ी सौगात!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/citizens-charter-is-a-weapon-ensuring-transparency-of-administration/article-54550</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/citizens-charter-is-a-weapon-ensuring-transparency-of-administration/article-54550</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Nov 2023 16:24:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-11/good-governance.jpg"                         length="32374"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिजनों को औपचारिक जानकारी न देना उठा रहा कतर की मंशा पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[Death penalty in Qatar Indian marines: अरब देश कतर द्वारा भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को सजा-ए-मौत के फैसले से पूरा देश स्तब्ध है। सभी सैन्य अधिकारी कतर की राजधानी दोहा में ग्लोबल टेक्नालॉजी एंड कंसल्टेंसी नाम की निजी कंपनी में काम करते थे। यह कंपनी कतर की सेना को ट्रेनिंग और टेक्निकल कंसल्टेंसी सर्विस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/death-penalty-in-qatar-indian-marines/article-54522"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/qatar-marin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Death penalty in Qatar Indian marines: अरब देश कतर द्वारा भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों को सजा-ए-मौत के फैसले से पूरा देश स्तब्ध है। सभी सैन्य अधिकारी कतर की राजधानी दोहा में ग्लोबल टेक्नालॉजी एंड कंसल्टेंसी नाम की निजी कंपनी में काम करते थे। यह कंपनी कतर की सेना को ट्रेनिंग और टेक्निकल कंसल्टेंसी सर्विस प्रोवाइड कराती है। ओमान एयरफोर्स के रिटायर्ड स्क्वॉड्रन लीडर खमिस अल अजमी इसके प्रमुख है। कतर की इंटेलिजेंस के स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरों ने इनको 30 अगस्त, 2022 को गिरफ्तार किया था।</p>
<h3>कई बार जमानत याचिकाएं लगाई लेकिन जमानत नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">कतर का आरोप है कि भारत के पूर्व सैन्य अधिकारी कतर के हाइटेक सबमरीन प्रोगाम की गोपनीय जानकारी इजरायल को दे रहे थे। इस मामले में कंपनी के मालिक को भी गिरफ्तार किया गया था जिसे बाद में रिहा कर दिया गया। दोहा में भारतीय दूतावास को करीब एक माह बाद सिंतबर के मध्य में पहली बार इनकी गिरफ्तारी के बारे में बताया गया। इसी साल मार्च में लीगल एक्शन शुरू हुआ। गिरफ्तार अधिकारियों ने कई बार जमानत याचिकाएं लगाई लेकिन जमानत नहीं मिली। अब पिछले गुरूवार को अचानक इनको दोषी मानते हुए मृत्यु दंड की सजा का ऐलान कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय दूतावास के अधिकारियों के संपर्क के बाद जिस तरह से इन अधिकारियों को काउंसलर एक्सेस (परिजनों से बात करने की सुविधा) प्रदान की तो ऐसा लग रहा था कि कतर इस मामले में नरम रुख अपना रहा है। लेकिन अब यकायक मौत की सजा का ऐलान कर भारत को सकते में डाल दिया। कतर सरकार ने आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है। न ही परिवारजनों को आरोपों की कोई औपचारिक जानकारी दी गई है। ऐसे में कतर की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। कतर का दावा है कि उसके पास पर्याप्त सबूत हैं। जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए प्राप्त किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर कतर के पास गिरफ्तार भारतीय अधिकारियों के खिलाफ कोई सबूत हैं, तो वह उसे भारत सरकार के साथ साझा क्यों नहीं कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर वास्तव में कतर सरकार के पास कोई सबूत है, तो वह इन सबूतों को विश्व समुदाय के सामने रखकर अपने खिलाफ बन रहे परसेप्शन को क्यों नहीं रोक रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमास पर भारत के रूख से क्षुब्ध होकर कतर ने यह फैंसला लिया हो। कहा तो यह भी जा रहा है कि भारत के पूर्व नौसैनिक अधिकारियों की फांसी का ऐलान कर कतर भारत के साथ सौदे-बाजी के मनसुबे पाल रहा है। कतर की ओर से पूरे मामले में जिस तरह से भारत सरकार को अंधरे में रखकर हीलाहवाली की गई उससे भी सजा के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे फैंसले के विस्तृत ब्यौरे का इंतजार हैं। और वह सभी कानूनी रास्ते तलाश रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को कतर के अधिकारियों के सामने उठाने व गिरफ्तार अधिकारियों को काउंसलर एक्सेस मिलते रहने की बात भी कही है। लेकिन अहम सवाल यह है कि भारत इस मामले में क्या कर सकता है। हालांकि, गिरफ्तार अधिकारियों को छुड़ाने के लिए भारत के पास अभी बहुत सारे कानूनी और कूटनीतिक विकल्प है, लेकिन सवाल यही है कि भारत कतर पर दबाव बना पाने में कितना सफल होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर सरकार ने चाहे भारत के पूर्व सैन्य अधिकारियों के लिए मृत्यु दंड की सजा का ऐलान कर दिया हो लेकिन सजा को लागू करना उसके लिए आसान नहीं है। भारत के पास कई विकल्प हैं। प्रथम, निचली अदालत के फैसले को भारत के राजनयिकों द्वारा वहां की ऊपरी अदालत मे चुनौती दी जा सकती हैं। राष्ट्रद्रोह के कई मामलों में कतर की सर्वोच अदालत ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला है। साल 2014 में फिलिपींस के एक नागरिक को भी इसी तरह से मौत की सजा सुनाई गई थी। फिलिपींस सरकार द्वारा कतर की सर्वोच अदालत में अपील किए जाने पर अदालत ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।</p>
<h3>खाद्य आपूर्ति मामले में कतर काफी हद तक भारत पर निर्भर</h3>
<p style="text-align:justify;">द्वितीय, कतर की अदालत के इस फैंसले को भारत इंटरनेशन कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में चैलेंज कर सकता है। कुलभुषण जाधव के मामले में भी भारत ने पाकिस्तान की अदालत के निर्णय के विरूद्ध आईसीजे में गुहार लगाई थी। कोर्ट ने जाधव की सजा पर रोक लगा दी थी। तृतीय, व्यापार संबंधों के जरिए भी भारत कतर को झुकने के लिए मजबूर कर सकता है। 2021-22 में दोनों देशों के बीच 15.03 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। भारत को स्पेशल करोबारी दोस्त के तौर पर ट्रीट करने वाला कतर भारत को 13.19 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है। जबकि कतर भारत से महज 1.83 बिलियन डॉलर का आयात करता है। कारोबारी पलड़ा कतर के पक्ष में झुका हुआ है। इसके अलावा भारत अपनी कुल आवश्यकता की 90 फीसदी गैस कतर से आयात करता है। दूसरी ओर खाद्य आपूर्ति के मामले में कतर काफी हद तक भारत पर निर्भर है। लिहाज भारत कतर पर दबाव बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चतुर्थ, पूरे मामले को भारत कूटनीति के जरिए भी हल कर सकता है। कतर के साथ भारत के अच्छे संबंध है। साल 2017 में जब गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल ने कतर पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाकर काउंसिल से बाहर कर दिया था उस वक्त भारत ने बिना किसी शर्त कतर को अनाज भेजा था। मिडिल ईस्ट के कई देशों से भरत के संबंध अच्छे है। भारत इनके जरिए भी कतर पर दबाव बना सकता है। पंचम, कतर की कुल 25 लाख की आबादी में से 6.5 लाख भारतीय है। 6000 से ज्यादा छोटी-बड़ी भारतीय कंपनियां कतर में कारोबार कर रही हैं। कतर के विकास और उसकी इकॉनमी में भारतीयों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में भारत कतर के साथ रिश्तों का उपयोग कर सकता है। व्यक्तिगत तौर पर कतर के अमीर के साथ हमारे प्रधानमंत्री के अच्छे संबंध है। जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। Death Penalty In Qatar</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक कतर-भारत संबंधों का सवाल है तो वर्ष 1973 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की शुरूआत हुई। दोहा में भारत का दुतावास है। जबकि कतर का नई दिल्ली में दुतावास और मुंबई में वाणिज्य दूतावास है। मार्च 2015 में कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी भारत यात्रा पर आए थे। इसके बाद जून 2016 में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी कतर गए थे। राजनयिक दृष्टि से दोनों देशों के संबंध हमेशा से मधुर रहे हैं, ऐसा भी नहीं है। जाकिर नायिक व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के मामले में दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट घुलती दिखाई दी। कुल मिलाकर कतर के साथ हमारे रिश्ते अच्छे हैं। ऐसे में भारत को कानूनी दांव पेंच से अधिक कूटनीतिक कौशल से समाधान का मार्ग तलाशना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एन.के. सोमानी, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Coconut Oil for Wrinkles: ऐसी चीज, जो रातों-रात गायब कर देगी झुर्रियां! हमेशा खिली-खिली और जवां दिखेगी त्वचा !" href="http://10.0.0.122:1245/such-a-thing-which-will-make-wrinkles-disappear-overnight/">Coconut Oil for Wrinkles: ऐसी चीज, जो रातों-रात गायब कर देगी झुर्रियां! हमेशा खिली-खिली और जवां दिखे…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/death-penalty-in-qatar-indian-marines/article-54522</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/death-penalty-in-qatar-indian-marines/article-54522</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 17:50:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-11/qatar-marin.jpg"                         length="40479"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>First time Use war room in elections: यह कैसा वॉर रूम? जाने कितनी हाइटैक हुई भारतीय राजनीति&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[First time Use war room in elections: जब भी किन्हीं दो देश के बीच युद्ध होता है तो उस वक्त संबंधित देशों में वॉर रूम बनाया जाता है। इसका मकसद जहाँ आमजनमानस को मदद देने होता है,वहीं जनसंचार के विभिन्न माध्यमों पर चलने वाली खबरों को ट्रैक करना होता है। किस चैनल या न्यूज़ पेपर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/what-kind-of-war-room-is-this-how-high-tech-has-indian-politics-become/article-54313"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/sandeep-singhmar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">First time Use war room in elections: जब भी किन्हीं दो देश के बीच युद्ध होता है तो उस वक्त संबंधित देशों में वॉर रूम बनाया जाता है। इसका मकसद जहाँ आमजनमानस को मदद देने होता है,वहीं जनसंचार के विभिन्न माध्यमों पर चलने वाली खबरों को ट्रैक करना होता है। किस चैनल या न्यूज़ पेपर में किस प्रकार की खबरें दिखाई जा रही है। यदि खबरें संबंधित देश की संप्रभुता या आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को खतरा दिखाने वाले समाचार हो तो सरकार जनसंचार के माध्यम पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध भी लगा सकती है। ताकि देश में माहौल बिगड़ने से बच सके। ऐसा पहले भी होता आया है। युद्ध या संघर्ष वाले स्थान पर आजकल इंटरनेट बंद करना भी इसका एक नया उदाहरण है। Assembly Election 2023</p>
<h3>चुनाव में वॉर रूम का प्रयोग पहली बार | Assembly Election 2023</h3>
<p style="text-align:justify;">जब भी किसी स्थान पर जब कोई ऐसा आंदोलन होता है, जिससे दंगा भड़काने की उम्मीद हो तो सरकार तुरंत प्रभाव से संबंधित क्षेत्र में डोंगल/मोबाइल आधारित इंटरनेट व्यवस्था को बंद करवा देती है। क्योंकि आंदोलन करने वाले इसी इंटरनेट के माध्यम से अफवाह फैला सकते हैं। ऐसा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में भारतीय निर्वाचन आयोग राजस्थान सहित भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव करवाने जा रहा है। पर जिस वॉर रूम का प्रयोग युद्ध के दौरान होता आया है। Assembly Election 2023</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति में इसका प्रयोग पहली बार देखा जा रहा है। राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने इस बार अपने-अपने निगरानी कक्ष बनाए हैं, उन्हें वॉर रूम की संज्ञा दी गई है। ऐसा भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस दोनों ने किया है। हालांकि इस वॉर रूम का मकसद किसी भी घटना को ट्रैक करना नहीं है, बल्कि राजनीतिक भाषणबाजी पर निगरानी रखना है। खास बात यह है कि इन वॉर रूम में कई- कई स्मार्ट टीवी लगाकर प्रत्येक छोटे से बड़े चैनल पर नजर रखी जा रही है। किस राजनीतिक पार्टी ने अपनी रैली में दूसरी पार्टी के खिलाफ क्या बोला, यह नोट किया जा रहा है।</p>
<h3>राजनीतिक वॉर रूम में इंटेलिजेंस एक्सपर्ट काम कर रहे हैं | Assembly Election 2023</h3>
<p style="text-align:justify;">इस पर आधारित फिर दूसरी राजनीतिक पार्टी अपनी रणनीति तय करते हुए अगली रैली में इसका जवाब आम जनता के देती है। विशेष बात यह है कि जिस प्रकार वॉर रूम में इंटेलिजेंस ब्यूरो काम करती है, ठीक उसी प्रकार से इन राजनीतिक वॉर रूम में भी इंटेलिजेंस एक्सपर्ट काम कर रहे हैं। लेकिन यह सरकारी तंत्र नहीं बल्कि निजी तौर पर काम किया जा रहा है। पर उसमें उन सभी तौर तरीकों का प्रयोग हो रहा है जो विभिन्न प्रकार के खुफिया एजेंसी करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने की वजह से सरकारी मशीनरी का प्रयोग नहीं किया जा सकता। एक ओर खास बात,हो सकता है किसी भी आंदोलन या जंग में खुफिया तंत्र से किसी भी प्रकार की चूक हो जाए लेकिन राजनीतिक खुफिया तंत्र में पूरी टीम 24 घंटे काम कर रही है। वॉर रूम बैठकर विभिन्न सर्च इंजन के माध्यम से विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के पिछले वीडियो निकल जा रहे हैं कि पिछले दिनों में आम जनता के हित में किसने क्या बोला था? क्या पूरा किया क्या-क्या अधूरा है, ताकि इस बात को आधार बनाकर रैली के दौरान दूसरी राजनीतिक पार्टी को घेरा जा सके। लेकिन बड़े ही गुप्त तरीके से चलने वाले इन वॉर रूम के बारे में आम जनता को नहीं पता है।</p>
<h3>अचानक सामने आई 10 या 15 साल पुरानी यह वीडियो | Assembly Election 2023</h3>
<p style="text-align:justify;">आम जनता तो सिर्फ यही सोचती है कि पिछले 10 या 15 साल पुरानी यह वीडियो अचानक से किस प्रकार सामने आ गई। पर यह सब राजनीतिक वॉर रूम से किया जा रहा है। इस वह रूम में तैनात निजी कंपनियों का या राजनीतिक कार्यकर्ताओं का काम सोशल मीडिया पर भी नजर रखना है। अपनी पार्टी के संबंध में पॉजिटिव वीडियो को तुरंत सोशल मीडिया पर अपलोड करना व दूसरी राजनीतिक पार्टी ने जो अपलोड किया है, उस पर नजर बनाए रखना भी इनकी ड्यूटी लगाई गई है। यह राजनीति है,इसमें कुछ भी संभव है। सत्ता की कुर्सी हासिल करने के लिए नेता कुछ भी कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">साम, दाम,दंड-भेद नीति का प्रयोग हमेशा राजनीति में ही होता है। एक बार राज मिलने के बाद जनता से किए गए वादे पूरे हो या ना हो इसका राजनीतिक लोगों को कोई लेना-देना नहीं होता। ना ही उन पर किसी प्रकार का कोई फर्क पड़ता। लेकिन जिस बात से सत्तासीन सरकार को नुकसान होता दिखाई दे, उसको तुरंत पूरा करने का काम भी राजनीति में कर दिया जाता है। ताकि आम जनता को एक बार दोबारा फिर लुभाया जा सके। केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधारो के लिए लाए गए तीन कृषि कानूनों का उदाहरण सबके सामने है। इनको रद्द करवाने के लिए देशभर के किसानों ने दिल्ली में करीब 13 महीने तक आंदोलन किया था। Assembly Election 2023</p>
<h3>राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार बनाएगी?</h3>
<p style="text-align:justify;">लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही गुरु नानक जयंती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तीन कृषि कानून को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। पर उसके बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में कोई सहानुभूति नहीं मिली व आम आदमी पार्टी सरकार बनाने में कामयाब हो गई। हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस का भी सुपड़ा साफ हुआ था। यहाँ यह जानना भी उचित होगा की राजस्थान की राजनीति का इतिहास रहा है कि यहां हर विधानसभा चुनाव में सरकार बदलती है। एक बार कांग्रेस सत्ता में आती है तो दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार बनाती है। इस बार देखना होगा राजस्थान की जनता इसी रीत को निभाएगी या फिर कोई उलट फेर होगा। यह भविष्य में देखने वाला सवाल है? Assembly Election 2023</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ संदीप सिंहमार। वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="How to get black hair naturally: यदि करना चाहते हैं सफेद बाल काले तो नाभि में रोज रात को ये तेल लगा लें!" href="http://10.0.0.122:1245/if-you-want-to-turn-white-hair-black-then-apply-this-oil-in-the-navel-every-night/">How to get black hair naturally: यदि करना चाहते हैं सफेद बाल काले तो नाभि में रोज रात को ये तेल लगा …</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/what-kind-of-war-room-is-this-how-high-tech-has-indian-politics-become/article-54313</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/what-kind-of-war-room-is-this-how-high-tech-has-indian-politics-become/article-54313</guid>
                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 14:29:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-10/sandeep-singhmar.jpg"                         length="28791"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Israel Hamas War Impact: जिधर देखो चीख पुकार, क्रूरता के लिए कौन जिम्मेदार?</title>
                                    <description><![CDATA[Israel Hamas War Impact: राकेट, मिसाइल व बमबारी…जिधर देखो चीख पुकार, खून से सनी सड़के व लोग, मलबे में दबी जिंदगी। जहाँ तक नजर जा रही है वहीं पर लाशों के अंबार। कोई अपनों से बिछुड़ा हुआ है तो कोई अपनों को खो चुका है। कुछ ऐसे हालात है इजराइल व फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/everywhere-you-look-there-are-screams-and-cries-who-is-responsible-for-this-cruelty/article-53933"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/israel-hamas-war1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Israel Hamas War Impact: राकेट, मिसाइल व बमबारी…जिधर देखो चीख पुकार, खून से सनी सड़के व लोग, मलबे में दबी जिंदगी। जहाँ तक नजर जा रही है वहीं पर लाशों के अंबार। कोई अपनों से बिछुड़ा हुआ है तो कोई अपनों को खो चुका है। कुछ ऐसे हालात है इजराइल व फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन हमास के बीच जंग के। इतना तो सब जानते हैं कि किसी भी जंग के बीच खून खराब होता ही है। लेकिन जितना खून खराबा पिछले 24 घंटो के दौरान गाजा पट्टी में देखने को मिला, इतना पिछले 12 दिनों के दौरान भी एक साथ देखने को नहीं मिला था। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि दोनों देशों के बीच जंग जारी है। 7 अक्टूबर को जब फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन हमास ने इसराइल के ठिकानों पर अचानक हमला बोला था, तब से ही बेकसूर लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं। पर इसी बीच बुधवार सुबह होते ही दुनिया के सामने जो खबर व खून-खराबे की तस्वीर सामने आई वह न सिर्फ गाजा पट्टी के लोगों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंतननीय स्थिति है। 1945 में यूनाइटेड नेशन की जेनेवा संधि के अनुसार विश्व में शांति बहाली जारी रहेगी। लेकिन जब कभी किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध की स्थिति बन भी जाए तो तब वहां मानवीय अत्याचार नहीं होगा। पर ऐसा नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">गाजा पट्टी के सबसे बड़े अस्पताल पर रॉकेट गिराया या मिसाइल। पर इस आसमानी हमले से पूरा अस्पताल जहां खंडहर में तब्दील हो गया। वहीं सैकड़ो की संख्या में उपचार की आस में दाखिल हुए घायल या मरीज लाश बन गए।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को गाजा पट्टी के अस्पताल पर हुए हमले को एक तरफ जहां मानवीय अत्याचार कहा जा सकता है तो वहीं यह हमला युद्ध अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है। इस हमले की दुनिया भर में चौतरफा आलोचना जारी है। इस आलोचना के बीच अमेरिका ने इस हमले की जांच के भी आदेश दिए हैं। पर यह हमला इसराइल ने किया या फिर हमास ने। इस बात को कोई भी स्वीकार नहीं कर रहा है। इजराइल व फिलिस्तीन की तरफ से अब तक इस हमले की किसी ने भी जिम्मेदारी नहीं ली। इजराइल का कहना है कि उसने अस्पताल पर किसी भी प्रकार का रॉकेट नहीं दागा और न ही उसने मिसाइल छोड़ी। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">इजराइल का आरोप है यह हमास के अपने रॉकेट कि गलत दिशा में जाने से ऐसा हमला हुआ। दूसरी तरफ हमास भी अस्पताल पर हुए इस हमले की जिम्मेदारी से भाग रहा है। इसराइल हो या फिर हमास। जिसने भी यह हमला किया है, उस पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध का आरोप लग सकता है और लगना भी चाहिए। युद्ध अपराध एक संगीन अपराध है। जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून अपना काम करता है। मंगलवार को गांजा पट्टी पर हुए हवाई हमले की जिम्मेदारी इजरायली वायु सेवा ने नहीं ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईडीएफ ने तो इस हमले के लिए फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद सैन्य समूह के असफल रॉकेट लॉन्च को जिम्मेदार ठहराया है। इजरायली वायु सेवा ने व इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है ‘आईडीएफ की परिचालन प्रणालियों के विश्लेषण के अनुसार इजरायल की तरफ रॉकेट श्रृंखला छोड़ी गई थी, जो अस्पताल के आसपास से गुजरी और वहीं फट गई। इस हमले के लिए इस्लामी जिहाद आतंकी संगठन जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर अब हमले की जिम्मेदारी से दोनों पक्ष बच रहे हैं। लेकिन उससे पहले चिंतनीय स्थिति है कि इस अस्पताल में जो भी बीमार व घायल अपने जीवन की संजीवनी की आस में भर्ती हुए थे। अब उनका जीवन खत्म हो चुका है। उनके अपने रोते-बिलखते हुए आरोप लगाते हुए इजराइल व हमास को दोष दे रहे हैं। लेकिन कुछ भी हो जिनके अपने अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए थे। वे अपनी बीमारी से नहीं मरे, बल्कि उन्हें आसमानी अटैक से मरना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह उनके लिए मृत्यु दंड से काम नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी ऐसा मान चुका है कि यदि अस्पताल में भर्ती किसी मरीज पर हमला किया जाता है तो वह मृत्युदंड के बराबर होगा। पर अब इस मामले में होगा क्या? यह सोचने का सवाल है। पिछले 12 दिनों से जारी इस युद्ध में हमास और इजरायल दोनों पर ही अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराध कानून के उल्लंघन का आरोप लगता आ रहा है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में यूनाइटेड नेशन दोनों पक्षों के उल्लंघनों की जांच तो कर रहा है। पर जब तक यह जांच पूरी होगी तब तक इजराइल व हमास खंडहर में तब्दील हो चुका होगा, युद्ध अपराध की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कर उसे लागू करना इतना आसान काम नहीं है। यह सबसे जटिल काम है। हमेशा युद्धों के बाद ऐसे अपराधों की जांच और अपराधियों को सजा के मुकाम तक पहुँचा पाना बहुत जटिल प्रणाली का हिस्सा है। ऐसा आज तक कभी हुआ भी नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट जब किसी भी राजनेता के खिलाफ गैर जमानती वारंट तक जारी कर देता है तो भी उसे गिरफ्तार कर पाना अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के लिए सबसे मुश्किल कार्य होता है। जैसा रूस व यूक्रेन युद्ध में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ऐसा हुआ है। पर अभी तक गिरफ्तारी की तो बात ही दूर व्लादिमीर पुतिन तक पहुंचना भी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट, यूनाइटेड नेशन व मानवाधिकार संगठनों के लिए असंभव रहा है। आधुनिक सभ्यता के जन्म के साथ या ये कहे कि विज्ञान के बढ़ते कदमों के साथ ही सभी देश हथियारों से लैस हैं और यही एक वजह है कि यही विज्ञान जहां एक वरदान है तो वहां पूरी दुनिया के लिए अभिशाप भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस यूक्रेन युद्ध इजराइल फिलिस्तीन युद्ध का उदाहरण सभी के समक्ष है। इससे पहले भी युद्ध में बेकसूर जनता मरती रही है। पर याद होगा हजारों वर्ष पहले एक ऐसी सभ्यता भी थी जिनके पास औजार तो थे पर कोई हथियार नहीं था। यहां हम बात कर रहे हैं सिंधु सभ्यता की। संयुक्त भारत एवं वर्तमान में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता बसी थी। वर्तमान समय में इसे मोहनजोदड़ो के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘मुर्दों का टीला’।</p>
<p style="text-align:justify;">पर यहां मुर्दों का टीला प्राकृतिक आपदा के कारण बना था, ना कि किसी हथियारों के प्रयोग से। इतिहासकार ओम थानवी ने अपने लेख ‘अतीत में दबे पाँव’ में इस सभ्यता के बारे में खुलकर लिखा है। हालांकि जिस स्थान पर सिंधु सभ्यता विकसित थी। आज वहां सिर्फ एक अजायबघर घर बना हुआ है। ओम थानवी ने अजायबघर में तनात पुरातात्विक विद्वान अली नवाज के माध्यम से लिखा है कि समूची सिंधु सभ्यता में हथियार कहीं नहीं मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे किसी आजकल के राजतंत्र में होते हैं। उन्होंने लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र शब्द का प्रयोग किया है। सिंधु सभ्यता में कहीं पर भी भव्यता का आडंबर नहीं था यानी कि किसी को किसी का डर नहीं था। पर वर्तमान में पूरी दुनिया रूपी आईने में झांककर देखा जाए तो आज चारों तरफ भव्यता का ही आडंबर है। चाहे लोग खुद अपनों से डर रहे हो या किसी विदेशी हमले से। इतना ही नहीं देश के अंदरूनी हिस्सों में हो रहे दंगों से भी लोग इतने भयभीत हैं कि अपने घर-स्थान छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अभी भी समय बचा है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">यूनाइटेड नेशन की सुरक्षा परिषद को पहल करते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध व फिलिस्तीन-इजरायल युद्ध को किसी तरह रुकवाना चाहिए ताकि मानवता पर किसी भी प्रकार का कोई संकट न बने। हम सबको मिलकर या सभी देशों को मिलकर एक ऐसी समाज की स्थापना करनी चाहिए, जो राज-पोषित न होकर समाज-पोषित हो। यानी समाज में समाज में ही रहने वाले व्यक्तियों से किसी भी प्रकार का कोई डर ना हो। यदि युद्ध में शामिल लोग या देश अपने अहं के सवाल को छोड़ दें तो ऐसा संभव भी है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/everywhere-you-look-there-are-screams-and-cries-who-is-responsible-for-this-cruelty/article-53933</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/everywhere-you-look-there-are-screams-and-cries-who-is-responsible-for-this-cruelty/article-53933</guid>
                <pubDate>Fri, 20 Oct 2023 18:12:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-10/israel-hamas-war1.jpg"                         length="36529"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        