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                <title>देश में बढती तेजाब की घटनाएं एक संगीन अपराध: जिम्मेवार कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[देश में तेजाब की संगीन वारदातों ने जनमानस को झझकोर दिया है कि कुछ बीमार मानसिकता के चंद मुठठी भर दरिदें व अपराधी आज भी निडरता से तेजाब जैसे बर्बर हमले कर रहे हैं माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा एंटी रेप विधेयक मे तेजाबी हमला करने वालों को दस साल की सजा का प्रावधान किया गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">देश में तेजाब की संगीन वारदातों ने जनमानस को झझकोर दिया है कि कुछ बीमार मानसिकता के चंद मुठठी भर दरिदें व अपराधी आज भी निडरता से तेजाब जैसे बर्बर हमले कर रहे हैं माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा एंटी रेप विधेयक मे तेजाबी हमला करने वालों को दस साल की सजा का प्रावधान किया गया है। गाहे-बगाहे देश में ऐसे वीभस्त मामले विचलित करते रहते हैं। ऐसे में सवाल यह उठना लाजिमी है कि इन पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है। समाज में घटित इन हादसों से एक भयानकता की तस्वीर दिख रही है दरिदों द्वारा कानून का सरेआम उल्लधन किया जा रहा है। अगर इन दरिदों को सजा दी जाए तों यह मामले रुक सकते है। तेजाब के हमलों में बेतहाशा वृ़िद्ध होती जा रही है। भारत के हर राज्य में ऐसे मामले निरंतर होते रहतें है। अपराधियों को गवाहों के अभाव में जमानतों पर छोड़ दिया जाता है। तेजाब फैकने वाले अपराधियों को उम्रकैद की सजा देनी चाहिए ताकि जेलों में तिल-तिल मर सके। देश में जिस प्रकार महिलाओं व लडकियों पर तेजाब फैंकने की घटनाएं बढ रही हैं बेहद चिन्ताजनक है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। प्रतिदिन देश में संगीन अपराध हो रहे है। आखिर कब इन मामलों पर रोक लगेगी। एक समाचार के अनुसार 9 नवबंर 2018 को बरेली में कोल्हू पर पानी नीने आई तीन महिलाओं पर कोल्हू मालिक ने तेजाब फैंक दिया जिससे तीनों बुरी तरह से झुलस गई। कोल्हू के मालिक ने एक महिला से कथित दुष्कर्म करने का प्रयास किया था तथा महिला के कपड़े फाड़ दिए जब महिला की चीख सुनकर जब दो महिलाओं ने उसे बचाने का प्रयास किया तो दरिदें ने तेजाब फैंक दिया। तेजाब फैंकने वाले बहशी दरिदे को गिरफतार कर लिया है। तेजाब हमले में गंभीर रुप से झुलसी तीनों महिलाओं का बरेली के अस्पताल में इलाज चल रहा है। तेजाबी हमलों को रोकना होगा। गत वर्ष वाराणसी में एक दोस्त के घर ठहरी रुसी युवती पर उसी के दोस्त ने तेजाब फेंक दिया था जिससे युवती 45 प्रतिशत झुलस गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी ही घटना मेरठ में घटित हुई थी जहां एक पति द्वारा अपनी पत्नी, सास-ससुर व सात अन्यो पर तेजाब फैंककर घायल कर दिया था। पत्नी द्वारा दुष्कर्म व दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने से नाराज पति ने तेजाब फैंककर घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। तेजाबी हमले की चपेट में एक छह माह का बच्चा भी झुलस गया था और उसकी तीन बेटियां भी झुलस गई थी जब यह हमला हुआ यह लोग घर की छत पर सोए थे। देश में तेजाबी हमलों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले सैकड़ो मामले हो चुके है पर यह रुकने के बजाए बढ़ते ही जा रहे है। आकड़ों के अनुसार 2 अप्रैल 2013 को पश्चिमी उतरप्रदेश के शामली जिले में दो युवकों द्वारा चार सगी बहनों पर पिचकारी से तेजाब फैंकने की दर्दनाक घटना घटित हुई थी। पेशे से शिक्षक चारों सगी बहनें बोर्ड की डयूटी करके घर लौट रही थी तभी रास्ते में मोटरसाईकल सवार दो युवकों नें उन पर तेजाब फैंक दिया जिससे एक युवती गंभीर रूप से झुलस गई ऐसी ही घटना में छतीसगढ में एक अज्ञात युवक द्वारा चार नाबालिग बहनों पर तेजाब फैक दिया जिससे वे बुरी तरह झुलस गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में भी एक अज्ञात युवक ने एक पत्रकार व उसके परिवार के सदस्यों पर तेजाब फैक कर घायल कर दिया था। इन घटनाओं ने एक बार फिर पूरे में दहशत फैला दी है। लगभग 14 साल पहले वर्ष 2004 में हिमाचल प्रदेश के मण्डी में भी मुजफरनगर के एक युवक ने बस में सवार एक लडकी पर तेजाब फैंक कर बुरी तरह घायल कर दिया था। तेजाब के छींटों से बस में बैठी अन्य सवारियां भी झुलस गई थी।इस हादसे में लडकी की दोनों आखों की रोशनी खत्म हो गई थी। शिमला में भी एक युवक ने एक युवती पर तेजाब फैका था जिससे उसका चेहरा बुरी तरह जल गया था। उतराखंड के देहरादून में भी एक कालेज छा़त्रा पर एक युवक ने मुंह पर तेजाब फैक कर जला दिया था। पंजाब के बठिंडा में भी एक 24 वर्षीय लड़की पर तेजाब फैंक कर बुरी तरह से चेहरा जला दिया था उसका 31 जनवरी 2010 से आज तक इलाज चल रहा है अब तक उसकी 13 सर्जरियां हो चुकी है। अब समय आ गया है कि गहन निद्रां में सोये प्रशासन को अपनी कुम्भकरणी नींद तोडनी होगी । ऐसे लोगों को सबक सिखाना होगा। सरकार को तेजाब पीडिताओं का पूरा इलाज करवाना चाहिए ।जल चुकी व खराब हो चुकी आखों का आपरेशन का प्रावधान करवाना चाहिए ।सर्जरी बगैरा का खर्चा भी देना चाहिए।मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए। अपराधियों पर कानूनी धाराएं लगानी चाहिए ।तेजाब बेचने वालों पर शिकंजा कसना चाहिए। ताकि ऐसे हादसे रूक सकें और मां, बहन, बेटियां सुरक्षित हो सकें। अगर अब भी लापरवाही बरती तो आने वाले कल को फिर से दरिदें जघन्य वारदातों को अंजाम देते रहेगें। वक्त अभी संभलनें का है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>नरेन्द्र भारती</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Nov 2018 13:32:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सड़क पर अराजकता के जिम्मेवार कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में जितने वाहन पंजीकृत हैं प्रतिदिन लगभग उतने ही पड़ोसी राज्यों से आते हैं। कहने को दिल्ली में एक से बढ़कर एक फ्लाइओवर हैं। चौड़ी सड़कें हैं। आउटर रिंग रोड पर ऐलिवेटेड रोड हैं। हर चौराहे पर यातायात नियंत्रित करने के लिए रेड लाइट की व्यवस्था है लेकिन यातायात लगभग अनियंत्रित ही हैं। इसका कारण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/who-is-responsible-for-chaos-on-the-road/article-3465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/traffic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिल्ली में जितने वाहन पंजीकृत हैं प्रतिदिन लगभग उतने ही पड़ोसी राज्यों से आते हैं। कहने को दिल्ली में एक से बढ़कर एक फ्लाइओवर हैं। चौड़ी सड़कें हैं। आउटर रिंग रोड पर ऐलिवेटेड रोड हैं। हर चौराहे पर यातायात नियंत्रित करने के लिए रेड लाइट की व्यवस्था है लेकिन यातायात लगभग अनियंत्रित ही हैं। इसका कारण वाहनों की संख्या अधिक होने से यहां के लोगों में ‘पहले मैं’ की होड़ का होना माना जा सकता है। कहीं भी देख लो, एक इस तरफ तो दो उस तरफ, तीन तीसरी और शेष जहां जगह मिले वहां निकल भागना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यातायात अनुशासन तो लगता है जैसे किसी को मालूम ही नहीं। आश्चर्य तो तब होता है जब इस अराजकता के लिए जिम्मेवार लोग भी दूसरों को कोसते नजर आते हैं कि उसने गलत ढंग से गाड़ी निकालने की कोशिश। जाहिर है चालकों की अनुशासनहीनता जहां स्वयं उन पर भारी पड़ती है, वहीं निर्दोष लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। अनेक लोगों का मत है कि बेलगाम बाइक वाले जब जहां जैसा मौका मिले, निकल भागते हैं। उन्हें लाल बत्ती तो क्या, अपनी और दूसरों की जान की परवाह तक नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिर इसका क्या कारण है। कुछ लोगों का मत है कि ड्राइविंग लाइसेंस मिलना कठिन नहीं है। दलाल के चलते किसी कठिन टेस्ट अथवा पूछताछ की जरूरत नहीं पड़ती। लाइसेंस पाना जैसे बच्चों का खेल सरीखा है। इसलिए वर्षों से गाड़ी चला रहे अनेक लोग भी बिना नियम कानून के ज्ञान के काम चला रहे हैं। बसें, आटो, टैक्सी, ट्रक, टैम्पों जैसे व्यवसायिक वाहनों की संख्या भी लाखों में है जिनके ड्राइवर अक्सर बदलते रहते हैं। अनेक बार तो बहुत कम पढ़े लिखे पहली बार महानगर में आये युवा के हाथ में स्टेरिंग पकड़ा दिया जाता है जो यातायात व्यवस्था पर भारी पड़ता है। ऐसे ही लोग न तो लेन में चलते हैं, न कानून से डरते है, ओवरस्पीडिंग, रेड लाईट जम्प, तेज आवाज में लगातार हार्न बजाकर दूसरों को आतंकित करते हैं जबकि नियमानुसार चौराहे के 100 मीटर दूर तक हार्न बजाना अपराध है।</p>
<p style="text-align:justify;">रात के समय पर बाइक सवार युवक सड़कों पर स्टंट करते देखे जा सकते हैं, जबकि बच्चों को अनधिकृत रूप से वाहन सौंपना भी एक अपराध है। हमारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि सड़क पर पैदल चलने वाले की किसी को परवाह नहीं। पहले तो फुटपाथ बहुत कम है। है भी तो उन पर कब्जे हैं। कहीं रेहड़ी पटरी तो कहीं निर्माण सामग्री वाले ‘ले दे’ कर कमा-खा रहे हैं। हर चौराहे पर जेबरा क्रासिंग तो हैं लेकिन वाहन उस पर भी कब्जा जमा लेते हैं, जैसे सड़क केवल और केवल उन्हीं के लिए हो। हम बात करेंगे पश्चिमी देशों की लेकिन उनसे यातायात अनुशासन सीखने को तैयार ही नहीं हैं। वहां जाकर हर कानून का पालन करने वाले भारत आते ही अपने रंग में आ जाते हैं। कहीं भी गाड़ी रोकना, तेज आवाज में होर्न बजाना, मनमानी करना।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों का मत है कि हमारे महानगरों में यातायात के लिए पुलिस कर्मी बहुत कम हैं जबकि हमने अपने मॉरिशस प्रवास में 15 दिन में केवल एक बार सड़क पर पुलिस को देखा। वहां आत्मअनुशासन है तो यहां क्यों नहीं? बात स्पष्ट है कि एक बार सख्ती नहीं, बहुत सख्ती से नियम कानून का पालन कराया जाये तो दूसरी ओर स्कूली स्तर पर यातायात अनुशासन का प्रतिदिन ज्ञान दिया जाए, तभी दुबई, पोर्टलुईस जैसे वातावरण की अपेक्षा की जा सकती है। हर चौराहे पर कैमरे लगाये जायें जो हर छोटी से छोटी गलती पर भी चालान करें। बार-बार ऐसा होने पर वाहन तथा लाइसेंस रद्द कर दिया जाये। पुलिस केवल यातायात नियंत्रण करे । बाकी काम दूर से नियंत्रित कैमरे को सौंपा जाये जो जनता से दूर हो।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक डा़ विनोद बब्बर</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2017 03:33:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जिम्मेवार रवैया अपनाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से 50 से अधिक बच्चों की मौत का मामला दिल को झकझोर देने वाला है। चाहे सरकार आॅक्सीजन की सप्लाई न होने को नकार रही है लेकिन घटना को सिरे से नकार देना मामले पर मिट्टी डालने जैसा है। यह सच है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/government-adopt-attitude-responsible-for-health-services/article-3092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/gorkhpur1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से 50 से अधिक बच्चों की मौत का मामला दिल को झकझोर देने वाला है। चाहे सरकार आॅक्सीजन की सप्लाई न होने को नकार रही है लेकिन घटना को सिरे से नकार देना मामले पर मिट्टी डालने जैसा है। यह सच है कि बच्चों की मौतें हुई हैं। सरकार को इस संबंधी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि मामला कुछ और है तो भी उसका स्पष्टीकरण तुरंत देना चाहिए। मीडिया में इस बात की चर्चा है कि आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने 63 लाख रुपए बकाया खड़ा होने के कारण डीएम को सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी थी। स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के लिए अधिकारी व विभाग जिम्मेदार है। इस संबंधी खुलासा होने पर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल सरकारी व्यवस्था में लापरवाही शब्द ऐसा जुड़ गया है जो हटने का नाम ही नहीं ले रहा। केंद्र व राज्य सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हजारों करोड़ों का बजट आरक्षित रखती हैं। सरकारों के पास इतनी क्षमता भी मौजूद है कि वह कर्ज माफी जैसे कदम उठाने के प्रयास कर रही हैं। स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में पैसे की कमी के कारण मासूमों की मौत होना प्रबंधों पर सवाल उठाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सरकारें मुफ्त इलाज सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवा सकती है, तब आक्सीजन के सिलैंडर मंगवाने में केवल औपाचारिकता ही पूरी करनी होती है। यह कहना कोई गलत नहीं होगा कि यहां गड़बड़ी केवल संदेश पहुंचाने में ढील का परिणाम है। जिस व्यक्ति के पास निजी अस्पताल जाने के लिए पैसे होते हैं वह सरकारी अस्पताल नहीं जाता। सबके दिल में बड़ा डर लापरवाही का होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण सरकारी अस्पताल गरीबों के अस्पताल बनते जा रहे हैं। उधर मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों के दौरे करने तक सीमित रह गए हैं। सत्तापक्ष के नेता व्यवस्था में सुधार तो लाना चाहते हैं, लेकिन अधिकारी अपनी पुरानी आदत छोड़ने या बदलने के लिए तैयार नहीं। मंत्री के दौरे का असर कुछ दिनों तक ही दिखता है। बाद में फिर पहले वाले हालात बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल सरकारी व्यवस्था में काम करने की रिवायत पैदा करने की जरूरत है। कुछ अधिकारी जिम्मेदारी से काम करते हैं जिनका हौसला बढ़ाने की जरूरत है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। व्यवस्था में सुधार ही समस्या का समाधान है। स्वास्थ्य सेवाएं सबसे अहम क्षेत्र है जिसमें कार्य के प्रति संवेदनशील एवं गंभीर बने रहने की सदैव आवश्यकता रहती है। अस्पतालों के प्रशासनिक अधिकारी लोगों के स्वास्थ्य को संवेदनशीलता से लें, ताकि दोबारा ऐसी घटनाएं घटित न हों।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 22:04:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>कुत्ते ने काटा, तीन इंजेक्शन लगवाए फिर भी मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मृतका के पति ने स्वास्थ्य विभाग को ठहराया जिम्मेवार सरसा (सच कहूँ न्यूज)। वैदवाला स्थित भट्ठा में रहने वाली एक महिला की रेबिज की वजह से मौत का मामला सामने आया है। इस घटना से टीकाकरण और स्वास्थ्य विभाग की असंवेदनशीलता भी उजागर हुई है। जानकारी के अनुसार वैदवाला स्थित भट्ठा में परिवार सहित काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/death-of-a-woman-due-to-rabies/article-2631"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/rabies.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मृतका के पति ने स्वास्थ्य विभाग को ठहराया जिम्मेवार</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वैदवाला स्थित भट्ठा में रहने वाली एक महिला की रेबिज की वजह से मौत का मामला सामने आया है। इस घटना से टीकाकरण और स्वास्थ्य विभाग की असंवेदनशीलता भी उजागर हुई है। जानकारी के अनुसार वैदवाला स्थित भट्ठा में परिवार सहित काम करने वाले काला सिंह की पत्नी ओमी को लगभग दो माह पूर्व किसी कुत्ते ने काट लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">काला सिंह ने बताया कि उसने नागरिक अस्पताल से अपनी पत्नी को तीन बार रेबिज का टीका लगाया और हर बार 100 रुपये की अदायगी की। टीकाकरण के बाद बीमारी से निश्चित हो गए लेकिन कुछ दिन पूर्व उसकी पत्नी की हालत बिगड़ गई और वह पागलों जैसी हरकतें करने लगी। जब उसे अस्पताल लाया गया तो चिकित्सकों ने बताया कि उसे रेबिज है। उसका बचना मुश्किल है और मरीज को घर भेज दिया। घर जाने पर महिला की मौत हो गई। काला सिंह ने टीकाकरण के बाद भी उसकी पत्नी की रेबिज से मौत होने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेवार ठहराया है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Jul 2017 08:39:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अनंतनाग हमले के पीछे लश्कर का हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[5 महिलाओं समेत 7 यात्रियों की मौत श्रीनगर: कश्मीर के IG मुनीर खान ने कहा कि अनंतनाग हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। मुनीर खान ने कहा कि हमले का मास्टर माइंड लश्कर का पाकिस्तानी टेररिस्ट इस्माइल है। उधर, भारत ने अनंतनाग में टेररिस्ट अटैक का जिम्मेदार पाकिस्तान को ठहराया है। केंद्रीय मंत्री वेंकैया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/pakistan-responsible-for-terrorism-attack-in-anantnag/article-2210"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/attack.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">5 महिलाओं समेत 7 यात्रियों की मौत</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर:</strong> कश्मीर के IG मुनीर खान ने कहा कि अनंतनाग हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। मुनीर खान ने कहा कि हमले का मास्टर माइंड लश्कर का पाकिस्तानी टेररिस्ट इस्माइल है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, भारत ने अनंतनाग में टेररिस्ट अटैक का जिम्मेदार पाकिस्तान को ठहराया है। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा हमले के दोषियों को बख्शने का सवाल ही नहीं है। हमारा पड़ोसी आतंकवाद को प्रमोट कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच दिल्ली में राजनाथ के आवास पर हाईलेवल मीटिंग बुलाई गई है। बता दे कि कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर सोमवार रात आतंकियों ने हमला कर दिया। इसमें 5 महिलाओं समेत 7 यात्रियों की मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">19 तीर्थयात्री जख्मी भी हुए हैं। मरने वालों में 5 महिलाएं हैं। हमले के शिकार 3 यात्री गुजरात, 2 दमन और 2 महाराष्ट्र के थे। ये हमला सोमवार रात करीब 8.20 बजे हुआ। हमले में 19 श्रद्धालु जख्मी हुए हैं, जिन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 23:43:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध का जिम्मेदार कौन?</title>
                                    <description><![CDATA[जब-जब अपराध बढ़ता है, तब-तब अंगुलियां पुलिस पर उठती है। सच में अगर देखा जाय, तो पुलिस अपनी आदत और पूर्व से चली आ रही परिपाटियों की वजह से बदनाम होती जा रही है। जो भी हो, पुलिस महकमा कभी अपनी छवि नहीं बदल पाएगा, क्योंकि कुछ दाग ऐसे होते हैं जो अच्छे लगते हैं। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-who-is-responsible-for-increasing-crime-in-uttar-pardesh/article-900"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/crime1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जब-जब अपराध बढ़ता है, तब-तब अंगुलियां पुलिस पर उठती है। सच में अगर देखा जाय, तो पुलिस अपनी आदत और पूर्व से चली आ रही परिपाटियों की वजह से बदनाम होती जा रही है। जो भी हो, पुलिस महकमा कभी अपनी छवि नहीं बदल पाएगा, क्योंकि कुछ दाग ऐसे होते हैं जो अच्छे लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक समरसता, शांति, कानूनराज कायम करने अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगाकर नागरिकों को सुरक्षा का अहसास कराने में पुलिस की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस की कार्यशैली का सीधा प्रभाव सरकार की छवि पर पड़ता है। चुनाव के समय पुलिस की कार्यशैली ही चुनावी मुद्दा बनती है। अगर पुलिस न्यायप्रिय अपराध नाशक होती है तो रामराज्य की कल्पना साकार होने लगती है। पुलिस जब राग द्वेष से ग्रस्त होकर स्वार्थ में कार्य करती है तो खाकी वर्दी दागदार होने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव के बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि हर स्तर पर बदलाव परिलक्षित होगा। बदलाव तो हर स्तर पर दिखाई देने लगा लेकिन पुलिस में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। योगी सरकार का असर हर तरफ दिख रहा है लेकिन अपराधों में कमी नहीं आ पा रही है जो चिंता का विषय है। जनवरी से अबतक जो आंकड़े सामने आये हैं, उनसे स्पष्ट होता है कि हमारी पुलिस अपराधों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आँकड़ों पर नजर डाली जाय तो जनवरी में डकैती की 16 घटनाएँ हुयी थीं, किन्तु मार्च में यह बढ़कर 23 हो गयी जबकि अप्रैल में छलाँग मारकर 33 हो गयी है। इसी तरह जनवरी में लूट की 249 तो मार्च में बढ़कर 421 हो गयी तथा अप्रैल में 412 हो गयी है। जनवरी में हत्या की 286 घटनाएँ हुई थी, लेकिन मार्च इनकी संख्या बढ़कर 396 हो गयी। अप्रैल में हत्या की घटनाएँ बढ़कर 399 हो गयी।</p>
<p style="text-align:justify;">संगीन अपराधों की श्रेणी में आने वाले दुराचार की घटनाओं पर अगर नजर दौड़ाई जाय तो जनवरी में 240 घटनाएँ हुई थी, जबकि मार्च में इनकी संख्या बढ़कर 318 हो गयी और अप्रैल में संख्या छलाँग लगाकर 396 पहुँच गयी है। पुलिस की कार्यशैली में अन्य विभागों की अपेक्षा सुधार नजर नहीं आ रहा है, जबकि पुलिस को भी दूसरे विभागों की तरह योगी के रंग में रंग जाना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">योगी जी के शपथ लेने के बाद चलाये गये पहले एन्टी रोमियो अभियान की आड़ में जो तमाशा पुलिस ने शुरू किया था, उससे रोमियो का कम, भले लोगों का पार्को व अन्य सार्वजनिक जगहों पर बैठना जरूर दूभर हो गया था। कुशल तो यह था कि योगी जी को समय रहते इसका पता चल गया और उन्होंने समय रहते नकेल कस दी।</p>
<p style="text-align:justify;">योगी सरकार के गठन के बाद यह सही है कि अराजकता की घटनाओं में थोड़ी वृद्धि हुई है, जिन पर योगी जी सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुये कठोर कार्यवाही करने के निर्देश दे चुके हैं। पुलिस प्रशासन में व्यापक फेरबदल भी किया जा रहा है, किन्तु फेरबदल समस्या का निदान नहीं है। सरकार की मंशा के अनुरूप पुलिस को भी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
जब भी कोई नयी सरकार आती है, तब समाज विरोधी तत्व सरकार के रंग में रंगकर रंगबाजी या अपराधिक कार्यवाही करने लगते हैं। इसका सीधा असर सरकार पर पड़ता है और सरकार के साथ साथ पार्टी बदनाम होने लगती है और विरोधियों को विरोध करने का अवसर मिल जाता है। पुलिस अगर न्यायप्रिय हो जाय तो समाज की तमाम समस्याओं का निराकरण स्वत: हो जाय क्योंकि पुलिस लोकतांत्रिक प्रणाली के सभी अंगों से जुड़ी होती है और उसका हस्तक्षेप होता है। पुलिस की कार्यशैली पर अगुंली उठाने से पहले यह भी देख लेना उचित होगा कि पुलिस अपने उत्तरदायित्यों का निर्वहन अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं कर पा रही है? पुलिस रातदिन काम करती है और उसे आराम करने का अवसर तक ठीक से नहीं मिल पाता है। पुलिस का कार्य अगर अपने मूल उद्देश्यों तक सीमित रहे तब तो पुलिस से शांति व्यवस्था अमनचैन भय अपराध व अपराधीमुक्त समाज बनाने की उम्मीद की जा सकती है।ब-जब अपराध बढ़ता है, तब-तब अंगुलियां पुलिस पर उठती है। सच में अगर देखा जाय, तो पुलिस अपनी आदत और पूर्व से चली आ रही परिपाटियों की वजह से बदनाम होती जा रही है। जो भी हो, पुलिस महकमा कभी अपनी छवि नहीं बदल पाएगा, क्योंकि कुछ दाग ऐसे होते हैं जो अच्छे लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
सामाजिक समरसता, शांति, कानूनराज कायम करने अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगाकर नागरिकों को सुरक्षा का अहसास कराने में पुलिस की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस की कार्यशैली का सीधा प्रभाव सरकार की छवि पर पड़ता है। चुनाव के समय पुलिस की कार्यशैली ही चुनावी मुद्दा बनती है। अगर पुलिस न्यायप्रिय अपराध नाशक होती है तो रामराज्य की कल्पना साकार होने लगती है। पुलिस जब राग द्वेष से ग्रस्त होकर स्वार्थ में कार्य करती है तो खाकी वर्दी दागदार होने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
चुनाव के बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि हर स्तर पर बदलाव परिलक्षित होगा। बदलाव तो हर स्तर पर दिखाई देने लगा लेकिन पुलिस में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। योगी सरकार का असर हर तरफ दिख रहा है लेकिन अपराधों में कमी नहीं आ पा रही है जो चिंता का विषय है। जनवरी से अबतक जो आंकड़े सामने आये हैं, उनसे स्पष्ट होता है कि हमारी पुलिस अपराधों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
अगर आँकड़ों पर नजर डाली जाय तो जनवरी में डकैती की 16 घटनाएँ हुयी थीं, किन्तु मार्च में यह बढ़कर 23 हो गयी जबकि अप्रैल में छलाँग मारकर 33 हो गयी है। इसी तरह जनवरी में लूट की 249 तो मार्च में बढ़कर 421 हो गयी तथा अप्रैल में 412 हो गयी है। जनवरी में हत्या की 286 घटनाएँ हुई थी, लेकिन मार्च इनकी संख्या बढ़कर 396 हो गयी। अप्रैल में हत्या की घटनाएँ बढ़कर 399 हो गयी।</p>
<p style="text-align:justify;">
संगीन अपराधों की श्रेणी में आने वाले दुराचार की घटनाओं पर अगर नजर दौड़ाई जाय तो जनवरी में 240 घटनाएँ हुई थी, जबकि मार्च में इनकी संख्या बढ़कर 318 हो गयी और अप्रैल में संख्या छलाँग लगाकर 396 पहुँच गयी है। पुलिस की कार्यशैली में अन्य विभागों की अपेक्षा सुधार नजर नहीं आ रहा है, जबकि पुलिस को भी दूसरे विभागों की तरह योगी के रंग में रंग जाना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">
योगी जी के शपथ लेने के बाद चलाये गये पहले एन्टी रोमियो अभियान की आड़ में जो तमाशा पुलिस ने शुरू किया था, उससे रोमियो का कम, भले लोगों का पार्को व अन्य सार्वजनिक जगहों पर बैठना जरूर दूभर हो गया था। कुशल तो यह था कि योगी जी को समय रहते इसका पता चल गया और उन्होंने समय रहते नकेल कस दी। योगी सरकार के गठन के बाद यह सही है कि अराजकता की घटनाओं में थोड़ी वृद्धि हुई है, जिन पर योगी जी सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुये कठोर कार्यवाही करने के निर्देश दे चुके हैं। पुलिस प्रशासन में व्यापक फेरबदल भी किया जा रहा है, किन्तु फेरबदल समस्या का निदान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की मंशा के अनुरूप पुलिस को भी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा।<br />
जब भी कोई नयी सरकार आती है, तब समाज विरोधी तत्व सरकार के रंग में रंगकर रंगबाजी या अपराधिक कार्यवाही करने लगते हैं। इसका सीधा असर सरकार पर पड़ता है और सरकार के साथ साथ पार्टी बदनाम होने लगती है और विरोधियों को विरोध करने का अवसर मिल जाता है। पुलिस अगर न्यायप्रिय हो जाय तो समाज की तमाम समस्याओं का निराकरण स्वत: हो जाय क्योंकि पुलिस लोकतांत्रिक प्रणाली के सभी अंगों से जुड़ी होती है और उसका हस्तक्षेप होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की कार्यशैली पर अगुंली उठाने से पहले यह भी देख लेना उचित होगा कि पुलिस अपने उत्तरदायित्यों का निर्वहन अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं कर पा रही है? पुलिस रातदिन काम करती है और उसे आराम करने का अवसर तक ठीक से नहीं मिल पाता है। पुलिस का कार्य अगर अपने मूल उद्देश्यों तक सीमित रहे तब तो पुलिस से शांति व्यवस्था अमनचैन भय अपराध व अपराधीमुक्त समाज बनाने की उम्मीद की जा सकती है।ब-जब अपराध बढ़ता है, तब-तब अंगुलियां पुलिस पर उठती है। सच में अगर देखा जाय, तो पुलिस अपनी आदत और पूर्व से चली आ रही परिपाटियों की वजह से बदनाम होती जा रही है। जो भी हो, पुलिस महकमा कभी अपनी छवि नहीं बदल पाएगा, क्योंकि कुछ दाग ऐसे होते हैं जो अच्छे लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
सामाजिक समरसता, शांति, कानूनराज कायम करने अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगाकर नागरिकों को सुरक्षा का अहसास कराने में पुलिस की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस की कार्यशैली का सीधा प्रभाव सरकार की छवि पर पड़ता है। चुनाव के समय पुलिस की कार्यशैली ही चुनावी मुद्दा बनती है। अगर पुलिस न्यायप्रिय अपराध नाशक होती है तो रामराज्य की कल्पना साकार होने लगती है। पुलिस जब राग द्वेष से ग्रस्त होकर स्वार्थ में कार्य करती है तो खाकी वर्दी दागदार होने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
चुनाव के बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि हर स्तर पर बदलाव परिलक्षित होगा। बदलाव तो हर स्तर पर दिखाई देने लगा लेकिन पुलिस में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। योगी सरकार का असर हर तरफ दिख रहा है लेकिन अपराधों में कमी नहीं आ पा रही है जो चिंता का विषय है। जनवरी से अबतक जो आंकड़े सामने आये हैं, उनसे स्पष्ट होता है कि हमारी पुलिस अपराधों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
अगर आँकड़ों पर नजर डाली जाय तो जनवरी में डकैती की 16 घटनाएँ हुयी थीं, किन्तु मार्च में यह बढ़कर 23 हो गयी जबकि अप्रैल में छलाँग मारकर 33 हो गयी है। इसी तरह जनवरी में लूट की 249 तो मार्च में बढ़कर 421 हो गयी तथा अप्रैल में 412 हो गयी है। जनवरी में हत्या की 286 घटनाएँ हुई थी, लेकिन मार्च इनकी संख्या बढ़कर 396 हो गयी। अप्रैल में हत्या की घटनाएँ बढ़कर 399 हो गयी।<br />
संगीन अपराधों की श्रेणी में आने वाले दुराचार की घटनाओं पर अगर नजर दौड़ाई जाय तो जनवरी में 240 घटनाएँ हुई थी, जबकि मार्च में इनकी संख्या बढ़कर 318 हो गयी और अप्रैल में संख्या छलाँग लगाकर 396 पहुँच गयी है। पुलिस की कार्यशैली में अन्य विभागों की अपेक्षा सुधार नजर नहीं आ रहा है, जबकि पुलिस को भी दूसरे विभागों की तरह योगी के रंग में रंग जाना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">
योगी जी के शपथ लेने के बाद चलाये गये पहले एन्टी रोमियो अभियान की आड़ में जो तमाशा पुलिस ने शुरू किया था, उससे रोमियो का कम, भले लोगों का पार्को व अन्य सार्वजनिक जगहों पर बैठना जरूर दूभर हो गया था। कुशल तो यह था कि योगी जी को समय रहते इसका पता चल गया और उन्होंने समय रहते नकेल कस दी। योगी सरकार के गठन के बाद यह सही है कि अराजकता की घटनाओं में थोड़ी वृद्धि हुई है, जिन पर योगी जी सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुये कठोर कार्यवाही करने के निर्देश दे चुके हैं। पुलिस प्रशासन में व्यापक फेरबदल भी किया जा रहा है, किन्तु फेरबदल समस्या का निदान नहीं है। सरकार की मंशा के अनुरूप पुलिस को भी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
जब भी कोई नयी सरकार आती है, तब समाज विरोधी तत्व सरकार के रंग में रंगकर रंगबाजी या अपराधिक कार्यवाही करने लगते हैं। इसका सीधा असर सरकार पर पड़ता है और सरकार के साथ साथ पार्टी बदनाम होने लगती है और विरोधियों को विरोध करने का अवसर मिल जाता है। पुलिस अगर न्यायप्रिय हो जाय तो समाज की तमाम समस्याओं का निराकरण स्वत: हो जाय क्योंकि पुलिस लोकतांत्रिक प्रणाली के सभी अंगों से जुड़ी होती है और उसका हस्तक्षेप होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की कार्यशैली पर अगुंली उठाने से पहले यह भी देख लेना उचित होगा कि पुलिस अपने उत्तरदायित्यों का निर्वहन अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं कर पा रही है? पुलिस रातदिन काम करती है और उसे आराम करने का अवसर तक ठीक से नहीं मिल पाता है। पुलिस का कार्य अगर अपने मूल उद्देश्यों तक सीमित रहे तब तो पुलिस से शांति व्यवस्था अमनचैन भय अपराध व अपराधीमुक्त समाज बनाने की उम्मीद की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-who-is-responsible-for-increasing-crime-in-uttar-pardesh/article-900</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 02:05:19 +0530</pubDate>
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