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                <title>Environment Day - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Environment Day RSS Feed</description>
                
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                <title>Environment Day: पर्यावरण दिवस पर होगी साइक्लॉथोन एवं राष्ट्रीय काफ्रेंस</title>
                                    <description><![CDATA[Environment Day: जयपुर (सच कहूं न्यूज)। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विज्ञान भारती, राजस्थान द्धारा परिष्कार कॉलेज, शिप्रा पथ, मानसरोवर, जयपुर में साइक्लॉथोन एवं राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में परिष्कार ग्रुप ऑफ कॉलेज, जयपुर, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, सीएसआईआर-सीरी,पिलानी, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग, राजस्थान, डॉ. बीआर अंबेडकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/cyclothon-and-national-conference-will-be-held-on-environment-day/article-58237"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/envirnment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Environment Day: जयपुर (सच कहूं न्यूज)।</strong> विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विज्ञान भारती, राजस्थान द्धारा परिष्कार कॉलेज, शिप्रा पथ, मानसरोवर, जयपुर में साइक्लॉथोन एवं राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में परिष्कार ग्रुप ऑफ कॉलेज, जयपुर, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, सीएसआईआर-सीरी,पिलानी, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग, राजस्थान, डॉ. बीआर अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, जयपुर एवं श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर सहयोगी होंगे। Jaipur News</p>
<h3>साइक्लॉथोन में करीब 250 साइक्लिस्ट हिस्सा लेंगे</h3>
<p style="text-align:justify;">विज्ञान भारती के संगठन सचिव डॉ. मेघेंद्र शर्मा ने बताया कि साइक्लॉथोन में करीब 250 साइक्लिस्ट हिस्सा लेंगे। यह साइकिल रैली परिष्कार कॉलेज से शुरू होकर मानसरोवर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुन: कॉलेज में सम्पन्न होगी। इस दौरान प्रदेश में एक वर्ष के दौरान एक करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया जाएगा। कार्यक्रम में पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विविध गतिविधियों को शामिल किया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के बारे में जनमानस में जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कांफ्रेंस के अंतर्गत प्रसिद्ध वैज्ञानिकों तथा शिक्षाविदों का व्याख्यान होगा। उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण हेतु शपथ दिलाई जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयोजक डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि प्रदेश के सभी 12660 गावों में एक वर्ष के दौरान पौधारोपण किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक गांव में 21-21 सदस्यों की समिति बनाई गयी है जो की अपने गावों में 100 पेड़ लगा कर 5 र्षो तक उनकी समुचित देखभाल करेगी। प्रेस कांफ्रेंस में वी. सरवन कुमार शासन सचिव, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग, राजस्थान, प्रो.एस.के सिंह कुलपति आरटीयू कोटा), प्रो. विष्णु शर्मा पूर्व कुलपति, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर, डॉ. राघव प्रकाश, निदेशक, परिष्कार समूह, डॉ.अतुल गुप्ता, फाउंडर, हैनीमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी, डॉ. सविता पाईवाल, प्राचार्या, परिष्कार कॉलेज, इंजी. शैलेश जैन, संयुक्त सचिव, विज्ञान भारती राजस्थान उपस्थित रहे। Jaipur News</p>
<p><a title="Kota Railway Employee Murder Case: 5 लाख की सुपारी देकर मृतक की पत्नी ने भाई के मार्फ़त करवाई थी हत्या" href="http://10.0.0.122:1245/kota-railway-staff-murder-case-resolved/">Kota Railway Employee Murder Case: 5 लाख की सुपारी देकर मृतक की पत्नी ने भाई के मार्फ़त करवाई थी हत्य…</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jun 2024 17:16:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>World Environment Day 2023: पर्यावरण संरक्षण में हमारा कितना योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[World Environment Day: हम हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं। आने वाले 21 जून को हम विश्व योग दिवस मनाएंगे, पर योग की आवश्यकता क्या एक दिन ही होती है? स्वस्थ रहने के लिए तो नियमित दैनिक योगाभ्यास करना चाहिए। इसी प्रकार से पर्यावरण दिवस एक दिन मनाकर हमारी जिम्मेदारी पूर्ण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/world-environment-day/article-48470"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/environmental.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Environment Day: हम हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं। आने वाले 21 जून को हम विश्व योग दिवस मनाएंगे, पर योग की आवश्यकता क्या एक दिन ही होती है? स्वस्थ रहने के लिए तो नियमित दैनिक योगाभ्यास करना चाहिए। इसी प्रकार से पर्यावरण दिवस एक दिन मनाकर हमारी जिम्मेदारी पूर्ण नहीं होती, अपितु हम अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण का महत्व समझें और पर्यावरण संरक्षण की पूरी कोशिश करें।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/plantation-by-dera-sacha-sauda/">World Environment Day:- MSG ने हरियाली से महकाई धरा</a></p>
<p style="text-align:justify;">केवल औपचारिकता मात्र से हम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते और लक्ष्य है क्या? जहां तक पर्यावरण संरक्षण की बात है तो यह लक्ष्य है कि यह ब्रह्मांड हमें जिस सुन्दर अवस्था में मिला था उससे अधिक सुन्दर बनाकर हम इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़कर जाएं। यदि अधिक सुन्दर न बना सकें तो कम से कम इसे खराब तो न करें। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को देश, विश्व और आने वाली-पीढ़ियों के प्रति अपना सकारात्मक योगदान पर देना होगा। उदाहरण के तौर पर हर कोई मानता है कि पॉलीथीन और प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बड़े घातक हैं। सरकारें कानून तो बना सकती हैं परन्तु उनको लागू करने में व्यक्ति का और समाज का योगदान अति आवश्यक है। World Environment Day</p>
<p style="text-align:justify;">हम अक्सर यह चर्चा करते और सुनते हैं कि आने वाले समय में शुद्ध जल की बड़ी गंभीर समस्या होगी और कई बार तो यह कहा जाता है कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। परन्तु क्या हम अपने दैनिक जीवन में जल बचाने का प्रयास करते हैं? क्या प्रात: ब्रश करते समय या शेव करते हुए हम पानी का नल व्यर्थ में चलता तो नहीं रहने देते? नहाने में या अन्य उपयोग में थोड़ा-थोड़ा पानी बचाना जल संरक्षण के प्रति हमारा योगदान हो सकता है। World Environment Day</p>
<p style="text-align:justify;">जल संरक्षण के लिए वर्षाजल का संचय करना अनिवार्य होना चाहिए। जल संरक्षण कार्यों के अनुश्रवण और मूल्यांकन करने हेतु एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स होनी चाहिए। सरकारी और गैर-सरकारी भवनों, होटलों, उद्योगों में वर्षा जल को संग्रहण करने के लिए टैंक निर्मित होने चाहिए, यह अनिवार्य हो। इसके बिना किसी सरकारी अथवा गैर सरकारी भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं होना चाहिए। पन-विद्युत परियोजनाओं के लिए जब पानी डायवर्ट किया जाता है तब भी मुख्य नदी की पारस्थितिकी का रखरखात ठीक प्रकार से करने के लिए 15 प्रतिशत पानी का बहाव मुख्य नदी में अनिवार्य हो। World Environment Day</p>
<p>Environment Day: जहां भी प्रोजेक्ट निर्माण हो, भवन निर्माण हो या सड़क निर्माण हो वहां पर पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए डंपिंग साइट चयन का काम शुरू होने से पहले हो और पर्यावरण संरक्षण के लिए बताए गए कदमों को लागू करवाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों की हो तथा लापरवाही के मामले में उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानी जाए। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कोयले व अन्य र्इंधन, जीवाशम र्इंधन के जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध हो। कुछ छोटे-छोटे सुझाव हैं जो हम व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक तौर पर सहयोग कर के पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। World Environment Day</p>
<p style="text-align:justify;">5 june environment day: जैसे हम स्वयं पॉलीथीन और प्लास्टिक के कैरी बैगज का उपयोग पूर्ण रूप से बन्द कर दें। ‘पॉलीथीन हटाओ, पर्यावरण बचाओ’ अभियान को राष्ट्रीय स्तर तक गंभीरता ता से लागू करके हम बड़ा योगदान कर सकते हैं। हमने हिमाचल प्रदेश में सत्ता में रहते हुए यह करके दिखाया था। पॉलीथीन और प्लास्टिक के कचरे को एकत्रित करके सड़क निर्माण के कार्य में उपयोग किया था। इसके लिए 21 अप्रैल 2011 को लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार हिमाचल प्रदेश को हमारी उत्कृष्ट पहल पर ‘हिमाचल प्रदेश में प्लास्टिक कचरे का स्थाई प्रबंध, संकल्पना से नीति तक’ मिला था। World Environment Day</p>
<p style="text-align:justify;">Environment: हमने शुरुआत की थी बच्चों में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाले पत्रकारों, लेखकों, मैगजीनों (पत्रिकाओं) समाचार-पत्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार और सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए। हमने बच्चों में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने हेतु पर्यावरण संरक्षण संहिता बनाई थी। प्रात:काल विद्यालय में प्रार्थना के बाद भी पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जाती थी। पर्यटन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने हेतु एक पर्यटक आचार संहिता लागू की जानी चाहिए ताकि उनका योगदान भी सुनिश्चित हो सके। World Environment Day</p>
<p style="text-align:justify;">हर व्यक्ति अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए अधिक से अधिक धन संसाधन छोड़ कर जाना चाहता है। जिस प्रकार से पर्यावरण दूषित हो रहा है ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, तथाकथित विकसित देश प्रदूषण फैला रहे हैं उन परिस्थितियों को देखते हुए आने वाली पीढ़ी के लिए हमारी सबसे बड़ी विरासत एक सुन्दर, स्वच्छ, कार्बन न्यूट्रल पर्यावरण उसके लिए छोड़ कर जाना होगा। महात्मा गांधी ने कहा था कि प्रकृति ने हमारी आवश्यकता अनुसार उपयोग के लिये पर्याप्त दिया है पर लोभ के लिए नहीं। इसलिए आवश्यकता के अनुसार प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करें, शोषण नहीं।<br />
कार्बन तटस्थता के लिए हमारा नारा हो :-<br />
हर नागरिक बने पर्यावरण प्रहरी प्रखर,<br />
पर्यावरण संरक्षण में विकास की डगर।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 12:51:46 +0530</pubDate>
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                <title>संपादकीय : सभ्य होना है तो प्रकृति के साथी बनो</title>
                                    <description><![CDATA[आज पर्यावरण का सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि पृथ्वी की चिंता किसी को नहीं है। हालात की भयावहता की ओर किसी का ध्यान नहीं है। (Environment Day) राजनीतिक दलों से तो उम्मीद करना ही बेमानी है, क्योंकि पृथ्वी और पर्यावरण उनके वोट बैंक नहीं हैं। पृथ्वी और पर्यावरण आज जिस स्थिति में हैं, उसके लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/if-you-want-to-be-civilized-then-be-a-companion-of-nature/article-24175"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/world-environment-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज पर्यावरण का सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि पृथ्वी की चिंता किसी को नहीं है। हालात की भयावहता की ओर किसी का ध्यान नहीं है। <strong>(Environment Day</strong>) राजनीतिक दलों से तो उम्मीद करना ही बेमानी है, क्योंकि पृथ्वी और पर्यावरण उनके वोट बैंक नहीं हैं। पृथ्वी और पर्यावरण आज जिस स्थिति में हैं, उसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं। पृथ्वी मानव जीवन के साथ-साथ लाखों-लाख वनस्पतियों, जीव-जंतुओं की आश्रय स्थली है। इसके लिए किसी खास वर्ग को दोषी ठहराना उचित नहीं है, बल्कि सभी जिम्मेदार हैं। हम प्रकृति-प्रदत्त संसाधनों का अपनी सुविधा की खातिर बेतहाशा इस्तेमाल कर रहे हैं। पर्यावरण विनाश ही बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का मूल है। इन हालातों ने ही पर्यावरण के खतरों को चिंता का विषय बना दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल वार्मिंग का खतरनाक प्रभाव अब साफ तौर पर दिखने लगा है। देखा जा सकता है कि गर्मियां आग उगलने लगी हैं और सर्दियों में गर्मी का अहसास होने लगा है। इसकी वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघलकर समुद्र का जलस्तर तीव्र गति से बढ़ा रहे हैं। हिमालय में ग्लेशियर का पिघलना कोई नई बात नहीं है। सदियों से ग्लेशियर पिघलकर नदियों के रूप में लोगों को जीवन देते रहे हैं। लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में पर्यावरण के बढ़ रहे दुष्परिणामों के कारण इनके पिघलने की गति में जो तेजी आई है, वह चिंताजनक है। पर्यावरण के निरंतर बदलते स्वरूप ने नि:संदेह बढ़ते दुष्परिणामों पर सोचने पर मजबूर किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक गैसों के लगातार बढ़ते उत्सर्जन और वन आवरण में तेजी से हो रही कमी के कारण ओजोन गैस की परत का क्षरण हो रहा है। हाल के दिनों में हिमालयी राज्यों में जंगलों में आग की जो घटनाएं घटीं, वे ग्लेशियरों के लिए नया खतरा हैं। वनों में आग तो पहले भी लगती रही हैं, पर ऐसी भयानक आग काफी खतरनाक है। आग के धुएं से ग्लेशियर के ऊपर जमी कच्ची बर्फ तेजी से पिघलने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके व्यापक दुष्परिणाम होंगे। काला धुआं कार्बन के रूप में ग्लेशियरों पर जम जाएगा, जो भविष्य में उस पर नई बर्फ को टिकने नहीं देगा। केन्या की पर्यावरणविद् और नोबेल पुरस्कार विजेता बंगारी मथाई ने एक समय कहा था कि सभ्य होना है, तो जंगलों का साथी बनो, प्रकृति से जुड़ो, उससे प्रेम करो। असल में बंगारी मथाई ने अपने कहे को जिया भी। उन्होंने लाखों पेड़ लगाये. अपने आसपास जंगल को बरकरार रखने की भरपूर कोशिश की। ग्लोबल वार्मिंग के खतरों को नजरअंदाज करना बहुत बड़ी भूल होगी, इसलिए अब भी चेतो। अगर अब भी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब मानव अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jun 2021 05:02:56 +0530</pubDate>
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                <title>औपचारिकता न बने पर्यावरण दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[प्रकृति हो या मानव जीवन, समाज हो अथवा देश, सभी की उचित स्थिति सुख-समृद्धि तभी तक रह सकती है, जब तक उनमें पर्याप्त संतुलन बना रहे। लेकिन कुछ सालों से पर्यावरण पूरी तरह से असंतुलित हो गया है। पर्यावरण दिवस मनाने के मायने क्या हैं? इसको समझना अब इसलिए भी जरूरी हो गया है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-on-environment-day/article-901"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/eath.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रकृति हो या मानव जीवन, समाज हो अथवा देश, सभी की उचित स्थिति सुख-समृद्धि तभी तक रह सकती है, जब तक उनमें पर्याप्त संतुलन बना रहे। लेकिन कुछ सालों से पर्यावरण पूरी तरह से असंतुलित हो गया है। पर्यावरण दिवस मनाने के मायने क्या हैं? इसको समझना अब इसलिए भी जरूरी हो गया है कि इस दिवस के मौके पर केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की ओर से पर्यावरण को बचाने के लिए तमाम योजनाओं की शुरुआत की जाती है। लेकिन, दूसरे ही दिन भुला दी जाती हैं, जिसके चलते इस मुहिम का नतीजा कुछ नहीं निकलता और सभी योजनाएं दम तोड़ देती हैं। यह सब देखकर तो लगता है कि पर्यावरण दिवस सिर्फ परम्परा के तौर पर ही मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकृति ने पृथ्वी पर जीवन के लिये प्रत्येक जीव की सुविधानुसार उपभोग संरचना का निर्माण किया है, परन्तु मनुष्य ऐसा समझता है कि इस पृथ्वी पर जो भी पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीट-पतंगे, नदी, पर्वत व समुद्र आदि हैं, वे सब उसके उपभोग के लिये हैं और वह पृथ्वी का मनमाना शोषण कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यद्यपि इस महत्वाकांक्षा ने मनुष्य को एक ओर उन्नत और समृद्ध बनाया है, तो दूसरी ओर कुछ दुष्परिणाम भी प्रदान किये हैं, जो आज विकराल रूप धारण कर हमारे सामने खडे हैं। वर्षाजल के भूमि में न समाने से जलस्रोत सूख रहे हैं। नतीजतन, सैकड़ों की संख्या में गांवों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है, तो सिंचाई के अभाव में हर साल परती भूमि का रकबा बढ़ रहा है। नमी के अभाव में जंगलों में हर साल ही बड़े पैमाने पर लगने वाली आग से वन संपदा तबाह हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जल ही जीवन है और इसके बगैर जिंदगी संभव नहीं, लेकिन इसके अथाह दोहन ने जहां कई तरह से पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ कर रख दिया है। कुछ साल पहले कई विशाल जलाशय बनाए गए थे। इनको सिंचाई, विद्युत और पेयजल की सुविधा के लिए हजारों एकड़ वन और सैंकड़ों बस्तियों को उजाड़कर बनाया गया था, मगर वे भी अब दम तोड़ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय जल आयोग ने इन तालाबों में जल उपलब्धता के जो ताजा आंकड़े दिए हैं, उनसे साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में पानी और बिजली की भयावह स्थिति सामने आने वाली है। इन आंकड़ों से यह साबित होता है कि जलापूर्ति विशालकाय जलाशयों (बांध) की बजाए, जल प्रबंधन के लघु और पारंपरिक उपायों से ही संभव है, न कि जंगल और बस्तियां उजाड़कर। बड़े बांधों के अस्तित्व में आने से एक ओर तो जल के अक्षय स्रोत को एक छोर से दूसरे छोर तक प्रवाहित रखने वाली नदियों का बर्चस्व खतरे में पड़ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के 76 विशाल और प्रमुख जलाशयों की जल भंडारण की स्थिति पर निगरानी रखने वाले केंद्रीय जल आयोग द्वारा कुल वर्ष पहले तालाबों की जल क्षमता के जो आंकड़े दिए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक 20 जलाशयों में पिछले दस वर्षों के औसत भण्डारण से भी कम जल का भण्डारण हुआ है। गौरतलब है कि दिसंबर 2005 में केवल 6 जलाशयों में ही पानी की कमी थी, जबकि फरवरी की शुरूआत में ही 14 और जलाशयों में पानी की कमी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन 76 जलाशयों में से जिन 31 जलाशयों से विद्युत उत्पादन किया जाता है। पानी की कमी के चलते विद्युत उत्पादन में लगातार कटौती की जा रही है। जिन जलाशयों में पानी की कमी है, उनमें उत्तर प्रदेश के माताटीला बांध व रिहन्द, मय प्रदेश के गांधी सागर व तवा, झारखंड के तेनूघाट, मेथन, पंचेतहित व कोनार, महाराष्ट्र के कोयना, ईसापुर, येलदरी व ऊपरी तापी, राजस्थान का राणा प्रताप सागर, कर्नाटक का वाणी विलास सागर, ओडिशा का रेंगाली, तमिलनाडु का शोलायार, त्रिपुरा का गुमटी और पश्चिम बंगाल के मयुराक्षी व कंग्साबती जलाशय शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चार जलाशय तो ऐसे हैं, जो पिछले कुछ साल से लगातार पानी की कमी के कारण लक्ष्य से भी कम विद्युत उत्पादन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के रिहंद जिले के जलाशय की स्थापित क्षमता 399 मेगावाट है। इसके लिए अप्रैल 2005 से जनवरी 2006 तक 938 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वास्तविक उत्पादन 847 मिलियन यूनिट ही हो सका।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के गांधी सागर में भी इसी अवधि के लक्ष्य 235 मिलियन यूनिट की तुलना में मात्र 128 मिलियन यूनिट और राजस्थान के राणा प्रताप सागर में 271 मिलियन यूनिट के लक्ष्य की तुलना में सिर्फ 203 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन हो सका। अगर इस समस्या पर समय रहते गौर नहीं किया गया, तो पूरे राष्ट्र को जल, विद्युत और न जाने कौन-कौन सी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ेगा, जिनसे निपटना सरकार और प्रशासन के सामर्थ्य की बात नहीं रह जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दैवीय पृथ्वी पर प्रकृति की शोभा के लिये पर्यावरण की सुरक्षा विकास का एक अनिवार्य भाग है। पर्यावरण की समुचित सुरक्षा के अभाव में विकास की क्षति होती है। इस क्षति के कई कारण हैं। यांत्रिकीकरण के फलस्वरूप कल-कारखानों का विकास हुआ। उनसे निकलने वाले उत्पादों से पर्यावरण का निरन्तर पतन हो रहा है। कारखानों से निकलने वाले धुएं से कार्बन मोनो अक्साइड और कार्बन डाई अक्साइड जैसी गैसें वायु में प्रदूषण फैला रही हैं, जिससे आंखों में जलन, जुकाम, दमा तथा क्षयरोग आदि हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिसम्बर 1984 की भोपाल गैस रिसाव त्रासदी के जख्म अभी भी भरे नहीं हैं। वर्तमान में भारत की जनसंख्या एक अरब से ऊपर तथा विश्व की छ: अरब से अधिक पहुंच गई है, इस विस्तार के कारण वनों का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है, 10 साल में लगभग 24 करोड़ एकड़ वन क्षेत्र समाप्त हो गया है। नाभिकीय विस्फोटों से उत्पन्न रेडियोएक्टिव पदार्थों से पर्यावरण दूषित हो रहा है। अस्थि कैंसर, थायरइड कैंसर, त्वचा कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो रही हैं। उपयुक्त विवेचना से स्पष्ट है कि पर्यावरण सम्बन्धी अनेक मुद्दे आज विश्व की चिन्ता का विषय हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए पूरे विश्व के देश अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। साथ ही सामाजिक संस्थाएं भी अपना भरपूर सहयोग दे रही हैं। इसी कड़ी में विश्व प्रसिद्ध संस्था डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन रहनुमाई में यहां के श्रद्धालु समय-समय पर लगातार पौधारोपण करते हैं और सार-संभाल भी करते हैं। पौधारोपण के क्षेत्र के डेरा सच्चा सौदा का नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां पर अस्थियों पर पौधे लगाने की परम्परा शुरु की गई, जिसके अंतर्गत हजारों पौधे लगाए जा चुके हैं। पूज्य गुरु जी ने स्वयं पानी को फिर से इस्तेमाल करने की तकनीक विकसित की है, जिससे यहां के खेतों में सिंचाई की जाती है। वैज्ञानिक तरीके से कृषि कार्य कर पानी की बचत व अधिक फसल लेने की तकनीक अपनाई जाती है और इसके लिए किसानों को भी जागरूक किया जाता है। फसल कटाई के बाद अवशेषों को न जलाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाता है और अवशेषों को जलाने की बजाए इसके इस्तेमाल पर बल दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: आमजन, सामाजिक संस्थाएं, राज्य सरकारें व केन्द्र सरकार को चाहिए कि अपने-अपने स्तर पर प्रयावरण को प्रदूषित करने की बजाय इसे बचाने के प्रयास करें। इसके लिए आवश्यक है कि अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाए जाएं, बिजली व पानी का कम से कम प्रयोग किया जाए, प्राकृतिक संसाधनों का बेजा दोहन न किया, एसी, फ्रिज, मोटर वाहनों इत्यादि का प्रयोग कम से कम किया जाए। इस तरह हर किसी को प्रयास करने होंगे, अन्यथा आने वाले भीषण समय के लिए हर कोई तैयार रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रमेश ठाकुर </strong></p>
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 03:39:48 +0530</pubDate>
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