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                <title>Saint MSG - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;बहुत बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है&amp;#8221;!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) से घर-बार तुड़वाकर और सारा सामान साध-संगत में बंटवा देने के कुछ ही दिनों बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा, सरसा (हरि.) के पंडाल में तीन मंजिला एक अत्यंत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/every-child-in-the-city-should-also-know-what-a-huge-sacrifice-satnam-singh-ji-has-made/article-81711"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-purpul-11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) से घर-बार तुड़वाकर और सारा सामान साध-संगत में बंटवा देने के कुछ ही दिनों बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा, सरसा (हरि.) के पंडाल में तीन मंजिला एक अत्यंत सुंदर गोल तेरावास तैयार करवाया। इस तेरावास के निर्माण में आप जी द्वारा लाया गया सारा सामान, जैसे ईंटें, गार्डर आदि का ही उपयोग किया गया। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह जी ने विशेष संदेश भेजकर पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा से साध-संगत को 28 फरवरी 1960 के दिन डेरा सच्चा सौदा, सरसा बुला लिया। इसके बाद उसी दिन पूजनीय बेपरवाह जी के हुक्मानुसार आप जी को सिर से पांव तक सौ-सौ रुपये के नोटों के हार पहनाए गए। एक अत्यंत सुंदर बिना छत वाली जीप मंगवाई गई, जो चारों ओर से खूब सजाई गई थी।</p>
<h3>”सतनाम सिंह जी बहुत ही बहादुर हैं। इन्होंने इस मस्ताना गरीब के हुक्म को माना है”</h3>
<p>उस गाड़ी के अंदर एक सजी हुई आकर्षक कुर्सी पर आप जी को बिठाकर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने साध-संगत के मुखातिब होकर फरमाया, ”सतनाम सिंह जी बहुत ही बहादुर हैं। इन्होंने इस मस्ताना गरीब के हुक्म को माना है और बहुत बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है। आज से हमने इनको अपना वारिस, कुल मालिक बना दिया है। सारे शहर की हर गली व मोहल्ले में शोभा यात्रा निकालनी है, ताकि शहर के बच्चे-बच्चे को पता चल जाए कि सतनाम सिंह जी ने गरीब मस्ताने के लिए इतनी जबरदस्त कुर्बानी दी है और इनको सच्चे सौदे का वारिस बना दिया गया है।”</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह जी ने डेरे में आई हुई समस्त साध-संगत को शोभा यात्रा के साथ जाने की आज्ञा देते हुए वचन फरमाया, ”भाई, इस यात्रा में ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा जोर-शोर से लगाते हुए यह भी बताना है कि आज से साईं सावन शाह जी के हुक्म से सरदार सतनाम सिंह जी श्री जलालआणा साहिब वालों को डेरा सच्चा सौदा का गद्दीनशीन बना दिया गया है।”  जारी… MSG Maha Rahmokaram Month</p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 09:34:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: पूजनीय सतगुरु जी की &amp;#8216;अनूठी लीला&amp;#8217;!</title>
                                    <description><![CDATA[सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहले वाला नाम) ने शनिवार रात डेरे के बाहर रखे सामान की निगरानी भी की। अगले दिन रविवार को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सत्संग फरमाया। सत्संग में दूर-दूर से साध-संगत बड़ी संख्या में उपस्थित हुई। पूजनीय बेपरवाह शाह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/unique-leela-of-revered-satguru-ji/article-81676"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-feild2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहले वाला नाम) ने शनिवार रात डेरे के बाहर रखे सामान की निगरानी भी की। अगले दिन रविवार को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सत्संग फरमाया। सत्संग में दूर-दूर से साध-संगत बड़ी संख्या में उपस्थित हुई। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के आदेशानुसार आपजी ने वह समस्त सामान अपने पवित्र कर-कमलों से एक-एक करके साध-संगत में वितरित कर दिया। किसी को मोटरसाइकिल दी गई, किसी को ऊंट की काठी, किसी को पानी की टंकी। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार दरियां, खेस, कंबल, गद्दे, सिरहाने, बिस्तर, कोट, जर्सियां, स्वेटर, ट्रंक-पेटियां, संदूक तथा घरेलू और कृषि कार्य में उपयोगी अन्य सामग्री भी प्रेमपूर्वक बांट दी। यह दृश्य अत्यंत भावविभोर कर देने वाला था। अपने पूजनीय सतगुरु जी की इस अनूठी लीला को उनका समस्त परिवार श्रद्धा और प्रेमभाव से निहारता रहा। अपने प्यारे सतगुरु पूजनीय बेपरवाह जी के आदेश पर अपना सर्वस्व अर्पित कर वे उनकी असीम कृपा के अधिकारी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इस महान बलिदान को देखकर पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज अत्यंत प्रसन्न हुए और करुणा से परिपूर्ण वचन फरमाए, ‘सरदार हरबंस सिंह जी ने अपने सतगुरु के नाम पर इतनी बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। इसके उपरांत पूजनीय बेपरवाह जी ने एक दर्जी से आप जी के लिए एक अत्यंत सुंदर कोट मंगवाया और स्वयं अपने हाथों से पहनाया। सतगुरु जी ने फरमाया ‘देखो भाई! सरदार हरबंस सिंह जी कितने सुंदर लगते हैं…’ जारी…..MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:43:46 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो&amp;#8230;&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/it-is-impossible-to-find-such-an-example-of-obedience-to-the-beloved-satguru-ji/article-81639"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी और ठंडी हवाएँ चल रही थीं। ऐसे में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूजनीय माता जी सहित पूरे परिवार ने पूरी रात सामान की निगरानी के लिए खुले आसमान के नीचे बिताई। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<h3>प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव</h3>
<p>अपने प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव है। परीक्षा और सख्त हो गई। सुबह सूरज निकलने के समय पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने तेरावास से बाहर आते ही पूछा, ”भाई श्री जलालआणा साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह जी कहाँ हैं?” साध-संगत ने बताया, ”साईं जी, वे तो आपजी के हुक्मानुसार अपने सामान के पास बाहर बैठे हैं।”</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी को अपने पास बुलाकर फरमाया, ”भाई, यह सामान किसका है?” पूरा परिवार अपने प्यारे सतगुरु जी के चरणों में हाथ जोड़कर इस अलौकिक लीला को देख रहा था। सभी ने नम्रता से विनती की, ”साईं जी, यह सब आपका ही है।” तब पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने हुक्म फरमाया, ”यदि पूरे परिवार में से किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो सतगुरु इस सामान को स्वीकार नहीं करेंगे।”<br />
<strong>क्रमश:  स्रोत: भाग-2 सच्चे रूहानी रहबर | MSG Maha Rahmokaram Month</strong></p>
</div>
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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 09:20:32 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: सतगुरु जी का खेल!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सच्चे साईं शाह मस्ताना जी महाराज (Shah Mastana Ji Maharaj) सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को गुरुगद्दी की बख्शीश के लिए परीक्षा ले रहे थे। साईं जी ने आदेश दिया कि आपने अपनी सारी जमीन बेचनी है। इस पर आप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/satguru-jis-game/article-81569"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: सच्चे साईं शाह मस्ताना जी महाराज (Shah Mastana Ji Maharaj) सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को गुरुगद्दी की बख्शीश के लिए परीक्षा ले रहे थे। साईं जी ने आदेश दिया कि आपने अपनी सारी जमीन बेचनी है। इस पर आप जी ने अति नम्रतापूर्वक विनती की, “साईं जी! आप जी किसी अन्य प्रेमी को गाँव श्री जलालआणा साहिब भेज दीजिए, वो ही सौदा कर आएगा। हमने तो केवल अपने हस्ताक्षर ही करने हैं।” बेपरवाह जी ने आप जी की विनती को स्वीकार करते हुए एक प्रेमी को यह आदेश देकर गाँव श्री जलालआणा साहिब भेजा कि वह गाँव की हर गली में यह मुनादी कर दे कि सरदार हरबंस सिंह जी की जमीन बिकाऊ है। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<h3>”जमीन कोई भी खरीद सकता है”</h3>
<p style="text-align:justify;">जमीन कोई भी खरीद सकता है। पूजनीय बेपरवाह जी के आदेशानुसार उस प्रेमी ने श्री जलालआणा साहिब गाँव में जाकर यह मुनादी करवा दी, परन्तु जमीन का कोई भी ग्राहक नहीं आया। उस प्रेमी ने जब यह बात बेपरवाह जी को बताई तो पूजनीय बेपरवाह जी एकदम जोश में बोले, “तुमने कीमत ज्यादा बताई होगी। अब दोबारा जाओ और सारे गाँव वालों को बताओ कि सरदार हरबंस सिंह की जमीन जो भी रेट है उससे आधी कीमत में दी जाएगी, जो कोई खरीदना चाहता है खरीद सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">’’जब प्रेमी ने जमीन को उस कीमत पर बेचने की मुनादी करवाई तो गाँव के समस्त लोग एकत्रित हो गए और उक्त प्रेमी से कहने लगे कि हम जमीन नहीं खरीदेंगे। सरदार हरबंस सिंह जी का परिवार व बच्चे क्या खाएंगे? अत: प्रेमी के बार-बार कहने पर भी आप जी की जमीन को खरीदने के लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ। असल में यह तो सतगुरु जी का खेल था। जब प्रेमी ने इस घटना का उल्लेख पूजनीय बेपरवाह जी के सम्मुख किया तो पूजनीय साईं जी अत्यधिक प्रसन्न हुए और फरमाया, “भाई, सतगुरु जो करता है, भले के लिए ही करता है। ठीक है, इनकी जमीन भी छोड़ो और इनका ट्रैक्टर-ट्राली भी छोड़ो। जमीन को जोतने व सामान आदि ढोने के लिए परिवार को ट्रैक्टर-ट्राली की भी तो जरूरत पड़ेगी। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 09:33:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: जब बेपरवाह साईं जी ने एक कंकर की कीमत लाखों रुपये से भी अनमोल बताई!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन हुक्मानुसार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपना हवेलीनुमा घर गिरा दिया। घर में मौजूद सारा सामान रेडियो, घड़ी, पानी की टंकी, गाड़ी, कपड़ों से भरी पेटियां, संदूक, बिस्तर, मोटरसाइकिल, फर्नीचर तथा अन्य सभी वस्तुएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/when-beparwah-sai-ji-declared-the-value-of-a-pebble-to-be-more-precious-than-lakhs-of-rupees/article-81538"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-jil-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन हुक्मानुसार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपना हवेलीनुमा घर गिरा दिया। घर में मौजूद सारा सामान रेडियो, घड़ी, पानी की टंकी, गाड़ी, कपड़ों से भरी पेटियां, संदूक, बिस्तर, मोटरसाइकिल, फर्नीचर तथा अन्य सभी वस्तुएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा ले आए। उस समय नई ईंटों की कीमत 28 रुपये प्रति हजार थी, लेकिन ट्रक चालक श्री जलालआणा साहिब से सरसा तक ईंटों की ढुलाई के लिए 20 रुपये प्रति हजार किराया मांग रहे थे। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर आप जी ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन चरण कमलों में अर्ज की, ‘‘साईं जी! यदि आप जी की आज्ञा हो तो पुरानी ईंटें गांव में ही किसी को दे दें और यहाँ नई र्ईंटें मंगवा लेते हैं।’’ यह सुनकर पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने फरमाया, ‘‘नहीं भाई! नहीं, तेरे मकान का तो एक कंकर भी एक लाख रुपये में किसी को नहीं दिया जाएगा। सारी ईंटें यहाँ डेरे में ही लेकर आओ।’’इस प्रकार अपने प्यारे सतगुरु जी के हुक्म को सर्वोपरि मानते हुए आप जी अपने मकान का सारा मलबा, र्ईंटें, गार्डर और लकड़ी के बड़े-बड़े शहतीर आदि सब कुछ ट्रकों और ट्रॉलियों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा ले आए। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 09:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Saint MSG के 40 दिन: नहीं गया कोई पल मानवता की सेवा के बिन</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे संत जब भी धरती पर अवतरित हुए, हर परिस्थिति में उनका उद्देश्य एक ही रहा है ”मानवता का भला, इंसानियत की सेवा”। सच्चे संत खुद भी हक़ हलाल की कमाई करने के साथ-साथ इंसानियत की सेवा में अपना पूरा समय लगाते हैं और दूसरों को भी ऐसी ही प्रेरणा देते हैं। बता दें कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/40-days-of-saint-msg-not-a-moment-passed-without-serving-humanity/article-81375"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/humanity-40-days-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे संत जब भी धरती पर अवतरित हुए, हर परिस्थिति में उनका उद्देश्य एक ही रहा है ”मानवता का भला, इंसानियत की सेवा”। सच्चे संत खुद भी हक़ हलाल की कमाई करने के साथ-साथ इंसानियत की सेवा में अपना पूरा समय लगाते हैं और दूसरों को भी ऐसी ही प्रेरणा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि कभी-कभी इतिहास तारीखों से नहीं बनता बल्कि तपस्या और मानवता की निस्वार्थ सेवा करके भी लिखा जाता है। ऐसा ही नजारा देखा गया पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) के सरसा निवास के दौरान 40 दिन का। जिनका हर दिन, हर पल इंसानियत-सृष्टि के कल्याण को समर्पित रहा।</p>
<h3>सरसा की पावन धरा पर सेवा का महाकुंभ दिन रात चला</h3>
<p style="text-align:justify;">गत 40 दिनों के दौरान सरसा की पावन धरा पर न केवल सेवा का महाकुंभ दिन रात चला बल्कि न जाने कितनी तड़पती रूहों को सुकून भी मिला। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने 40 दिनों के रूहानी सफर के दौरान बिना विश्राम, बिना थकान की परवाह किए, सेवा का ऐसा महाकुंभ चलाया जोकि अध्यात्म और करुणा का जीवंत संगम बन गया। इन 40 दिनों में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहाँ हर सुबह मानवता के नाम और हर शाम समाज के उत्थान के संकल्प के साथ ढली। ये सेवा का महाकुंभ केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं थी, बल्कि संवेदनाओं का प्रवाह था… दर्द को राहत देने का, निराशा को आशा में बदलने का और नशों में डूबे घर के चिरागों को फिर से रौशन करने का।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी के इन 40 दिनों का सबसे मार्मिक दृश्य वे चेहरे थे, जो कभी नशे की गिरफ्त में अपनी पहचान खो चुके थे। किसी मां की आंखों में बेटे को बचाने की अंतिम आस थी, किसी पत्नी ने वर्षों बाद पति को सुधरते देखा और किसी बच्चे ने पहली बार अपने पिता को होश में मुस्कुराते देखा।</p>
<h3>ऐसे-ऐसे युवक-युवतियों ने नशा छोड़ दिया जो जिंदा लाश की तरह थे</h3>
<p style="text-align:justify;">नशे की गहरी खाई में गिर चुके इन लाखों लोगों को केवल पूज्य गुरु की पावन शिक्षा ही नहीं मिली बल्कि सहारा भी मिला। डेप्थ कैंपेन के तहत ऐसे-ऐसे युवक-युवतियों ने नशा छोड़ दिया जो जिंदा लाश की तरह थे। जिनके ठीक होने की उम्मीद परिवार छोड़ चुका था। लेकिन पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन और पावन वचनों के साथ राम नाम से जुड़कर लाखों घर इन 40 दिनों में नशों की गिरफ्त से आजाद हो गए। और इतना ही नहीं इस सेवा के महाकुंभ के दौरान लगातार आयोजित नि:शुल्क मेडिकल कैंपों में एलोपैथी, नेचुरोपैथी और आयुर्वेद के माध्यम से 10 हजार से अधिक गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिली। देशभर से 100 से अधिक स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर और शिमला सहित विभिन्न महानगरों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूज्य गुरु जी द्वारा आयोजित इन शिविरों को देश के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए इसकी सराहना की। विशेष बात यह रही कि इन कैंपों का समस्त खर्चां पूज्य गुरु जी ने अपनी मेहनत और हक-हलाल की कमाई से वहन किया। इन कैंपों में गरीब मरीजों की नि:शुल्क जांच के साथ-साथ सी टी स्कैन और एमआरआई जैसे महंगे परीक्षण भी मुफ्त किए गए। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए हजारों महिलाओं को स्वयं जांच (सेल्फ एग्जामिनेशन) का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव हो सके।</p>
<h3>अपनी नेक कमाई में से किसान के खेत में डूयूबलेब लगवाकर भी दिया</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर पूज्य गुरु जी ने इस दौरान मानवता भलाई कार्यों की श्रृंखला को भी गति दी। गरीब किसानों के दर्द को महसूस करते हुए पूज्य गुरु जी ने गरीब किसानों के लिए ट्यूबवेल लगाने की मुहिम का आगाज ही नहीं किया बल्कि सबसे पहले स्वयं अपनी नेक कमाई में से किसान के खेत में डूयूबलेब लगवाकर भी दिया। पूज्य गुरु जी की इस मदद से किसान की सूखी धरती को पानी मिला तो उम्मीद भी हरी हुई। यह सहायता केवल आर्थिक नहीं थी—यह आत्मनिर्भरता का संकल्प थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही आप जी ने जरूरतमंद पत्रकारों, पुलिस कर्मचारियों और अन्य वर्गों को हर संभव सहायता देने का जो बीड़ा उठाया वो सराहनीय रहा। आप जी के आह्वान पर करोड़ों की साध संगत से इस मुहिम को सार्थक करने का सकंल्प भी लिया। इतना ही नहीं आप जी ने गरीब कन्याओं के विवाह करवाकर अपनी नेक कमाई से कन्यादान किया। और इन 40 दिनों में जो सबसे अलग दिखाई दिया, वह था कि एक संत, पीर फकीर ने अपनी सेहत की प्रवाह किये बिना दिन रात सृष्टि, समाज व हर वर्ग का उद्धार किया।</p>
<p><iframe title="Ram Rahim ने 40 दिनों में बदल दी लाखों जिन्दगियां | Dera Sacha Sauda | Saint MSG | Drug  Free India" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/1B6UAv6pgJI?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 11:52:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Saint MSG: आया दिन खुशियों भरा</title>
                                    <description><![CDATA[Saint MSG: सच्चे सतगुरु के पावन अवतार माह में श्रद्धालु जहाँ खुशी मना रहे हैं, वहीं शुक्राना भी कर रहे हैं—क्योंकि सतगुरु ने उनकी सोच बदल दी, जीवन जीने का ढंग बदल दिया और जीवन जीने का असली उद्देश्य सिखा दिया। पाप और अज्ञान के अंधकार से निकालकर, सतगुरु ने उन्हें ऐसा मार्ग दिखाया कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/aaya-din-khushiyon-bhara/article-74658"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/saint-dr.-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint MSG: सच्चे सतगुरु के पावन अवतार माह में श्रद्धालु जहाँ खुशी मना रहे हैं, वहीं शुक्राना भी कर रहे हैं—क्योंकि सतगुरु ने उनकी सोच बदल दी, जीवन जीने का ढंग बदल दिया और जीवन जीने का असली उद्देश्य सिखा दिया। पाप और अज्ञान के अंधकार से निकालकर, सतगुरु ने उन्हें ऐसा मार्ग दिखाया कि श्रद्धालु समाज सेवा को ही अपने जीवन का परम उद्देश्य मानने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब उनकी यह सोच बन चुकी है कि कोई भी अवसर बिना भलाई किए हाथ से न जाने दें। यह सतयुग की निशानी नहीं तो और क्या है? बच्चे के जन्मदिन, विवाह, विवाह की वर्षगाँठ, नौकरी मिलने, पदोन्नति, सेवानिवृत्ति अथवा किसी दुख के समय भी जरूरतमंदों को राशन देना, पौधे लगाना और रात के ढाई बजे भी किसी मरीज की जान बचाने व रक्तदान करने के लिए दौड़ पड़ना, यदि यह चमत्कार नहीं तो और क्या है? ऐसे चमत्कार लाखों-करोड़ों बार आँखों के सामने हो रहे हैं। ऐसी आदर्श जीवनशैली का वरदान देने वाले सच्चे रूहानी रहबर प्यारे सतगुरु जी को लाख-लाख प्रणाम और उनके पावन अवतार दिवस की करोड़ों बधाइयाँ।                                                               –<strong>संपादक</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="आप आए, बहार आई…" href="http://10.0.0.122:1245/dera-sacha-sauda-aap-aye-bahaar-ayee/">आप आए, बहार आई…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Aug 2025 09:53:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी सिरसा पधारे</title>
                                    <description><![CDATA[सिरसा (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां आज, मंगलवार को शाह सतनाम-शाह मस्ताना जी धाम डेरा सच्चा सौदा सिरसा (हरियाणा) में पधारे। पूज्य गुरु जी के सिरसा आगमन की सूचना जैसे ही साध-संगत को मिली तो साध-संगत में खुशी की लहर दौड़ गई। साध-संगत एक-दूसरे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/respected-guru-ji-came-to-sirsa/article-74297"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/saint-msg-sirsa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सिरसा (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां आज, मंगलवार को शाह सतनाम-शाह मस्ताना जी धाम डेरा सच्चा सौदा सिरसा (हरियाणा) में पधारे। पूज्य गुरु जी के सिरसा आगमन की सूचना जैसे ही साध-संगत को मिली तो साध-संगत में खुशी की लहर दौड़ गई। साध-संगत एक-दूसरे को बधाई देते नजर आयी। Ram Rahim</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/respected-guru-ji-came-to-sirsa/article-74297</link>
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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 09:49:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>‘इस घोर कलियुग में मन-इंद्रियां बड़े फैलाव पर हैं’</title>
                                    <description><![CDATA[Saint MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं। इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/in-this-terrible-kali-yuga-the-mind-and-senses-are-on-a-great-expansion/article-74075"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/saint-msg-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Saint MSG: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं। इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते हैं, कुछ देर ही सुमिरन कर पाते हैं और बाद में होश ही नहीं रहता कि मन आपको कहां से कहां ले गया। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मन-इंद्रियां बड़े फैलाव पर हैं। मन इन्सान को सुमिरन नहीं करने देता, मालिक की तरफ नहीं चलने देता।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां मालिक की चर्चा होती हो, वहां मीन-मेख (कमियां) निकालता रहता है, हालांकि उसकी खुद की कमियों का कोई अंदाजा ही नहीं होता। आप जी फरमाते हैं कि मन बड़ा ही जालिम, शातिर है। आप जब तक सुमिरन नहीं करेंगे, यह काबू में नहीं आएगा। सुमिरन करने से मन काबू में आता है। अगर सुमिरन, भक्ति-इबादत की जाए तो मन काबू में आ सकता है अन्यथा मन बढ़ता चला जाता है और जीव गुमराह हो जाता है। जैसे टायर में हवा भरते हैं तो वह फूलता चला जाता है उसी तरह मन गंदे, बुरे विचारों की हवा देता है और इन्सान फूलता चला जाता है। उसमें अहंकार, घमंड अपने आप आने लगता है। उसे पीर-फकीर के वचन अच्छे नहीं लगते। Saint MSG</p>
<p style="text-align:justify;">उसे सिर्फ अपनी बातें सही लगती हैं और दूसरे सभी गलत लगते हैं। इस तरह से मन इन्सान को भटकाता, गुमराह करता है, मालिक से दूर करता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन से लड़ने का एकमात्र उपाय प्रभु का नाम है। आपको घर में, काम-धन्धे में कोई भी परेशानी, दु:ख-तकलीफ है तो आप घर में खाना वगैरह सुमिरन करके बनाओ। चलते, फिरते सुमिरन करो। दो-तीन महीने लगातार सुमिरन करो, मेहनत करो तो यकीनन मालिक अंदर से ख्याल देंगे और आपको परेशानी से निकलने का रास्ता जरूर मिल जाएगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Roadways News: दिल्ली-चंडीगढ़ और गुरुग्राम रूट पर आज से सरसा से चलेगी रोडवेज की आठ एसी बसें" href="http://10.0.0.122:1245/eight-ac-buses-of-roadways-will-run-from-sirsa-on-delhi-chandigarh-and-gurugram-route/">Haryana Roadways News: दिल्ली-चंडीगढ़ और गुरुग्राम रूट पर आज से सरसा से चलेगी रोडवेज की आठ एसी बसें</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 12:38:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘अगर आप सुमिरन करते हैं तो सतगुरु आपकी जायज मांग सुनते भी रहेंगे और पूरा भी करते रहेंगे’</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आम तौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करूंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/if-you-do-sumiran-then-satguru-will-keep-listening-to-your-legitimate-demands-and-will-also-keep-fulfilling-them/article-73704"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/saint-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आम तौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करूंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो मालिक आपकी जायज मांग सुनते भी रहेंगे और पूरी भी करते रहेंगे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हमेशा अपने दिल में ये श्रद्धा-भावना बैठा कर रखनी चाहिए कि मालिक का रहमो-कर्म तो बरसेगा ही बरसेगा। जब लोग चहूं ओर मालिक का रहमो-कर्म बरसते देख रहे हैं, तो नाम लेवा जीव को यह सोचना चाहिए कि मुझ पर मालिक का रहमो-कर्म क्यों बरस रहा। फिर जीव को सोचना चाहिए कि मेरा काम है कि मैं नाम का सुमिरन करूं, भक्ति करूं। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान निंदा-चुगली, बुराइयों व झूठ-फरेब से जितना बच सके, उतना ही अच्छा है। बेपरवाह सच्चे दाता-रहबर (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज व बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज) फरमाया करते कि निंदक की तो परछाई भी बुरी होती है, और लोग अपनी बुराइयां छुपाने के लिए ही दूसरों की निंदा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर आप जी एक वाक्या सुनाते हुए फरमाते हैं कि अकबर-बीरबल के समय में एक बार किसी दरबारी ने कोई सामान चुरा लिया। बीरबल ने लोगों को इकट्ठा किया और बादशाह से कहा कि मुझे पता चल गया है कि चोर कौन है। बादशाह ने पूछा कि बताओ कौन है? तो बीरबल ने कहा कि बादशाह! आप निगाह मारो, चोर की दाढ़ी में तिनका है। इतने कहते ही जो चोर था, वो पहले ही अपनी दाढ़ी में हाथ मारकर देखने लगा कि कहीं मेरी दाढ़ी में तिनका तो नहीं लगा। बीरबल ने कहा कि ये रहा चोर।</p>
<p style="text-align:justify;">कहने का मतलब है कि जो निंदा-चुगली करते हैं, असल में वो खोखले होते हैं। वो अपने तिनके छुपाने के लिए दूसरों पर तिनकों की बौछार करते रहते हैं। इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए। जो भी निंदा करता है, बुराई गाता है, उससे जितना कन्नी कतरा कर रहोगे, उतने की सुखी रहोगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि आज घोर कलियुग का समय है। अपने मुंह से खुद अपनी बुराइयां, अपनी कमियां कोई नहीं गाता और जो लोग बुराई करने वालों के पीछे लगते हैं, उनका भी बुरा हाल होता है। इसलिए इन्सान को अपने गिरहेबान में निगाह मारनी चाहिए और अपने अंत:करण में जो कमियां नजर आती हैं, उन्हें राम-नाम के सुमिरन, परमार्थ के द्वारा निकाल डालो, तो यकीनन मालिक की दया-रहमत आप पर मूसलाधार बरसेगी ही बरसेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 10:44:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Saint MSG: पूज्य गुरु जी ने बताया, इस तरह बुराइयों पर जीत हासिल हो सकती है</title>
                                    <description><![CDATA[Saint MSG: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर एक ही संदेश देते हैं कि प्रभु, परमात्मा की भक्ति-इबादत करो। हर समय एक ही चर्चा करते हैं कि अच्छे-नेक कर्म करो, सुमिरन करो। सुमिरन करने से इन्सान अपने अंदर की बुराइयां, अंदर के बुरे विचारों, पाप-कर्मों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-way-we-can-win-over-evil/article-71548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/saint-msg.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">Saint MSG: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर एक ही संदेश देते हैं कि प्रभु, परमात्मा की भक्ति-इबादत करो। हर समय एक ही चर्चा करते हैं कि अच्छे-नेक कर्म करो, सुमिरन करो। सुमिरन करने से इन्सान अपने अंदर की बुराइयां, अंदर के बुरे विचारों, पाप-कर्मों पर जीत हासिल कर सकता है और फिर बुरे विचार इन्सान को अपने साथ चलने पर मजबूर नहीं करते। Saint MSG</p>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि हर इन्सान को सुख मिले, शांति मिले और हर इन्सान परमपिता परमात्मा की दया-मेहर, रहमत के लायक बने, इसीलिए ही पीर-फकीर सबको प्रभु के नाम से जोड़ते हैं, प्रभु का नाम लेने के लिए प्रेरणा देते हैं। संतों ने किसी से प्रभु का नाम जपवाकर खुद के लिए कोई करोड़ों रुपये इकट्ठे नहीं करने होते। उनका तो एक ही मकसद, एक ही उद्देश्य होता है कि किसी भी तरह से हर प्राणी को सुख मिले। जैसे गृहस्थी-दुनियावी लोगों की एक ही इच्छा होती है कि उनका घर, उनकी औलाद, उनका परिवार ऐशो-आराम की जिन्दगी जीए, दूसरे से कोई मतलब नहीं।</p>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">इंसान कहता है कि मेरे वाले सुखी बसें, उनको पैसा मिले, उन्हें किसी चीज की कमी ना रहे। 99 प्रतिशत लोगों का, जो गृहस्थी हैं, जीने का यही मकसद होता है। आप जी फरमाते हैं कि संत-फकीरों का लक्ष्य कोई औैर होता है। जिस तरह एक घर, परिवार में रहने वाले मुखिया का सारा ध्यान अपने भाई-बहन, बेटा-बेटी, परिवार पर होेता है कि उनको सब कुछ अच्छा मिले, वे अच्छा बनें, उसी तरह संत, पीर-फकीरों का भी लक्ष्य होता है कि मालिक की जितनी भी औलाद है वो भी प्रभु की दया-मेहर, रहमत से मालामाल जरूर हों। Saint MSG</p>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">वो पीर-फकीर सबके लिए सोचते हैं, क्योंकि जो त्यागी, तपस्वी हैं उनका फर्ज यही होता है कि वो दूसरों का भला सोचें। खुद बेशक थोड़ा दु:ख उठाएं लेकिन दूसरों को सुख पहुंचाएं। जो ऐसा सोचते हैं, अमल करते हैं यकीनन वो मालिक के बहुत प्यारे भक्त होते हैं। तो संत, पीर-फकीरों का यह लक्ष्य, निशाना होता है कि सृष्टि का भला हो और हर प्राणी मालिक की दया-दृष्टि से, दया-मेहर, रहमत से खुशियां हासिल करे। गम, चिंता-परेशानियां लोगों को न हों, उनमें बर्दाश्त-शक्ति बढ़े ताकि आपसी झगड़े न हो, ईर्ष्या-नफरत न हो, कोई किसी की टांग खिंचाई न करे। उनकी सोच सर्वव्यापक, सबके लिए होती है, सर्व-सांझी होती है।</p>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि हर इन्सान को सुमिरन करना चाहिए और सुमिरन पर कोई जोर भी नहीं लगता। लेटकर, बैठकर, काम-धंधा करते हुए और आप यकीन मानो कि जो सेवा-सुमिरन लगन से करता है, जिसके अंदर मालिक के खजाने हैं वो जरा-जरा सी बात पर कभी पारा ऊपर-नीचे लेकर नहीं जाते। वह अपनी जिन्दगी को एक रस बना लेता है। न ही उसे गमों की मार तोड़ सकती है और न ही खुशियां, बहारेें उसे मालिक से दूर कर पाती हैं यानि खुशियों में बहकता नहीं और गम या कोई चिंता आती है तो उसमें वह टूटता नहीं। मालिक की दया-दृष्टि से, रहमो-करम से वह हमेशा आगे बढ़ता रहता है। वह प्रभु से प्रभु को मांगता हुआ, प्रभु से प्रभु की खलकत का भला मांगता हुआ कदम आगे बढ़ाता है और एक दिन यहां-वहां दोनों जहानों में खुशियों का हकदार बन जाता है।</p>
<p class="ai-optimize-7"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Type 2 Diabetes: स्पोर्ट्स ड्रिंक या फलों का जूस पीना पसंद है, तो हो जाइए सावधान, डायबिटीज (मधुमेह) का बढ़ सकता है खतरा" href="http://10.0.0.122:1245/type-2-diabetes/">Type 2 Diabetes: स्पोर्ट्स ड्रिंक या फलों का जूस पीना पसंद है, तो हो जाइए सावधान, डायबिटीज (मधुमेह) का बढ़ सकता है खतरा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-way-we-can-win-over-evil/article-71548</link>
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                <pubDate>Thu, 29 May 2025 15:25:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Saint Dr MSG Insan: मनमते लोगों का संग न करें</title>
                                    <description><![CDATA[Anmol Vachan: सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/precious-words-of-saint-dr-msg-insan/article-67997"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Anmol Vachan: सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते लोगों का टोला उस इन्सान को मालिक से ओड़ नहीं निभाने देते। वह उसकी राह में रुकावटें व परेशानियां खड़ी कर देते हैं। इन्सान पर मन इतना हावी हो जाता है कि वह सतगुरु, मौला जिसके लिए वो अपनी जान कुर्बान कर सकता है व जिसके लिए वह यह सोचता है कि सारी दुनिया एक तरफ और मेरा मालिक एक तरफ मनमते लोगों व मन की बातों में आकर वह एक पल में उससे मन मोड़ लेता है। Saint Dr MSG Insan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन बड़ी जालिम ताकत है और उसको मनमते लोग हवा देने के लिए तैयार बैठे हैं। जैसा कि देखा है और किया करते थे कि खेतों में आमतौर पर पड़ी लकड़ियों को जलाते व कई बार जो लकड़ी गीली होती वह जलने में काफी समय लेती। उसको जलाने के लिए मुंह से फूंक मारते और वह लकड़ी सुलगती रहती। बार-बार फूंक मारने से कई बार आंखों में धुआं भी चला जाता लेकिन अंत में हारकर वो जल पड़ती थी। इसी तरह पहले तो इंसान को उसका मन हवा देता है लेकिन वह सुमिरन व भक्ति करता है जिस कारण सतगुरु का प्यार उसको यह करने से रोकता है। फिर मतमते लोग आ जाते हैं जिनका खुद का कोई ईमान व कोई आधार नहीं होता।</p>
<h3>मन ने भ्रम में डाला हुआ है</h3>
<p style="text-align:justify;">वो तो केवल बिन पैंदे के लौटे होते हैं। वो न किसी के परोपकार को मानते हैं और न ही मालिक का अहसान मानते हैं। तो वो भी उस इन्सान के कान भरना (फूंक मारना) शुरू कर देते हैं। इसलिए उस इन्सान को जो आग पहले से ही लगी होती है, उसके मन ने उसको पहले से ही भ्रम में डाला हुआ है, धीरे-धीरे उसके मन की आग को और भी बढ़ा देता है और एक दिन जीव उससे जल उठता है। फिर वह सारी जिंदगी उस आग में जलता रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस जालिम मन से लड़ो। मालिक का प्यार पाना आसान है लेकिन उससे ओड़ निभाना काफी मुश्किल है क्योंकि ओड़ निभाने में काफी समय होता है। इन्सान का पता नहीं कब वह इस संसार से चला जाए लेकिन वह जब तक इस नश्वर संसार को त्यागकर नहीं जाता तब तक मतमते लोग उस इन्सान को टोकते रहते हैं। फिर भी जो लोग उस मालिक का दर पकड़े हुए हैं और उस मालिक के प्यार में चलते रहते हैं, वो खुद और उनके मां-बाप धन्य होते हैं व उनकी कुलें भी धन्य हो जाती हैं क्योंकि मां-बाप के संस्कार ही बताते हैं कि आपके अंदर कैसी आदतें हैं। Saint Dr MSG Insan</p>
<p><a title="Eye Donation: आंखों को उजियारा देने में भिवानी ब्लॉक ने निभाई अहम भूमिका" href="http://10.0.0.122:1245/bhiwani-block-played-an-important-role-in-giving-light-to-the-eyes/">Eye Donation: आंखों को उजियारा देने में भिवानी ब्लॉक ने निभाई अहम भूमिका</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 09:50:03 +0530</pubDate>
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