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                <title>Venom: इन जहरीले जीवों में ज्यादा जहरीला कौन है बिच्छू या सांप? यहां पढ़ें पूरी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[Venom:बिच्छू हो या फिर सांप, दोनों ही जहरीले होते हैं और इन दोनों का ही जहर इंसान की जान ले सकता हैं, ऐसे में सवाल ये उठता है कि दोनों में से किसका जहर सबसे ज्यादा खतरनाक होता हैं और बिच्छु में कितना जहर होता हैं और ये सांप से कितना ज्यादा खतरनाक हो सकता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/which-is-more-poisonous-among-these-poisonous-creatures-scorpion-or-snake-read-full-information-here/article-59550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/venom.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Venom:बिच्छू हो या फिर सांप, दोनों ही जहरीले होते हैं और इन दोनों का ही जहर इंसान की जान ले सकता हैं, ऐसे में सवाल ये उठता है कि दोनों में से किसका जहर सबसे ज्यादा खतरनाक होता हैं और बिच्छु में कितना जहर होता हैं और ये सांप से कितना ज्यादा खतरनाक हो सकता हैं? चलिए इस बारें में जान लेते हैं….</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/these-diseases-are-cured-by-eating-guava-leaves-know-what-those-diseases-are/">Guava leaves Benefits: अमरूद के पत्ते खाने से ठीक होती हैं ये बीमारियां, जानिए क्या हैं वो डिजीज</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">बिच्छू में कितना जहर होता है? Venom</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि बिच्छू कां डंक किसी भी व्यक्ति को पैरालाइज कर सकता है, लेकिन फिर भी सवाल ये ही उठता हैं कि आखिर इनमें जहर कितना होता हैं? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिच्छू से 2 मिलीलीटर जहर निकाला जासकता हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिच्छू और सांप में से किसका जहर होता है खतरनाक?</h3>
<p style="text-align:justify;">ये बात सभी जानते हैं कि बिच्छू और सांप दोनों ही जहरीले जीव हैं, लेकिन यदि इनकी तुलना इस बात से की जाए कि दोनों में सबसे ज्यादा जहरीला कौन होता है तो इसका जवाब बिच्छू और सांप दोनों ही होंगे, क्योंकि बिच्छू का जहर सांप से ज्यादा तेज होता है, लेकिन बिच्छू से निकलने वाले जहर की मात्रा सांप की तुलना में बहुत कम होती हैं, ऐसे में जब बिच्छू किसी व्यक्ति को डंक मारता है तो उसका बहुत कम जहर व्यक्ति के शरीर के अंदर जाता है, वहीं जब सांप डसता है तो वो ज्यादा जहर निकालता है, जिसके कारण सांप का जहर शरीर में ज्यादा मात्रा में पहुंचता है। ऐसे में सांप बिच्छू से ज्यादा जहरीले माने जा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दुनियाभर में बिच्छुओं की प्रजातियां</h3>
<p style="text-align:justify;">बिच्छू का जहर कितना खतरनाक होता है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हंै कि ये अपने जहर का इस्तेमाल कर बड़े से बड़े शिकार को पैरालाइज भी कर सकता हैं, इसके अलावा गर्मियों के मौसम में इनकी सक्रियता ज्यादा बढ़ जाती है, बता दें कि बिच्छू रैतीले इलाकों में ज्यादा पाए जाते हैं, जानकारी के मुताबित दुनियाभर में बिच्छुओं की 2500 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 30 प्रजातियां ऐसी होती हैं, जिनके जहर से इंसान को ज्यादा डरना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिच्छु से ज्यादा खतरनाक हैं सांप?</h3>
<p style="text-align:justify;">सांपों को बिच्छु से ज्यादा खतरनाक माना जा सकता हैं, दरअसल दुनियाभर में सांपों की ऐसी कई प्रजातियां मौजूद हैं जिनके डसने मात्र से इंसान की मौत हो जाती है, गर्मी और बारिश के मौसम में ये ज्यादा एक्टिव नजर आते हैं, दुनियाभर में सांपों की प्रजातियां 3 हजार से ज्यादा हैं, हालांकि भारत में 300 प्रजातियों के ही सांप पाए जाते हैं, जिनमें से सात से आठ प्रजाति के सांप ही खतरनाक होते हैं, दुनियाभर में सापों के डसने से होने वाली मौत का रेशो बहुत ज्यादा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 10:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Chandrayan-3: जानिये भारत के सबसे बड़े अंतरिक्ष मिशन के पीछे की पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3: इसरो ने इस देश के अंदर एक ऐसे मिशन को लॉन्च कर दिया है जो भारत को सुपरपावर बना लेगा। इसमें बड़ी बात ये है कि यह तकनीक केवल भारत के पास ही है। बता दें कि इसरो के इस चंद्रयान ने पूरी दुनिया में धमाल मचा रखा है। इसरो इसी के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/know-the-full-story-behind-indias-biggest-space-mission/article-50591"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/chandrayaan-3-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3: इसरो ने इस देश के अंदर एक ऐसे मिशन को लॉन्च कर दिया है जो भारत को सुपरपावर बना लेगा। इसमें बड़ी बात ये है कि यह तकनीक केवल भारत के पास ही है। बता दें कि इसरो के इस चंद्रयान ने पूरी दुनिया में धमाल मचा रखा है। इसरो इसी के साथ सूर्यान गग्यान जैसे कई मिशन लॉन्च करने वाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि यह वो मिशन है जो सबके सामने है लेकिन इसी दौरान भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने कुछ ऐसी तकनीक डिवेलप कर डाली है, जो भारत के पास ही है। बता दें कि यह वो तकनीकी है जो समय आने पर या जरूरत पड़ने पर किसी महाविनाश हथियार का भी रुप ले सकतीं हैं जो एक ही झटके में युद्ध का पूरा का पूरा नक्शा बदल सकती है। जरुरत पड़ने पर ये रॉकेट लॉन्चर बन सकती है स्पेस में इंसानों को भेज देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जानते ही हैं भारत में इसरो ने 14 जुलाई को chandrayaan-3 मिशन लॉन्च कर दिया था। और 14 जुलाई दोपहर 2: 35 पर रॉकेट LVM3-M4 का इंजन स्टार्ट हुआ और चंद्रयान को हमारा रॉकेट बादलों को चीरते हुए chandrayaan-3 को लेकर चांद की तरफ गया। और जैसे ही रॉकेट chandrayaan-3 को लेकर बढ़ रहा था तो उस समय हर एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि chandrayaan-3 मिशन के 23 अगस्त की शाम 5:00 बजे चंद्रमा चंद्रमा की सतह पर उतरने की संभावना जताई जा रही है। बता दे की लेंडर की सफल लैंडिंग होने के बाद भारत एक नया इतिहास रचेगा।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/pslv-c56-successfully-launched-seven-satellites-of-singapore/">इसरो की नई उड़ान, एक साथ 7 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“इसरो की नई उड़ान, एक साथ 7 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/pslv-c56-successfully-launched-seven-satellites-of-singapore/embed/#?secret=WHtN8pnAZa%23?secret=uSLWM3UFWl" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<p style="text-align:justify;">लैंडर की सफल लैंडिंग होने के बाद भारत दुनिया का पहला ऐसा देश होगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करेगा। वहीं अगर सफल लैंडिंग हो जाती है तो ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। क्योंकि अब तक ये उपलब्धि सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास है। इसके साथ ही लैंडर की सफल लैंडिंग होने के बाद भारत दुनिया का पहला ऐसा देश होगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करेगा। वहीं अब सवाल ये उठता है कि चंद्रयान चंद्रमा तक अपना रास्ता कैसे खोजेगा। तो चलिए बताते हैं कि चंद्रमा तक अपना रास्ता कैसे खोजेगा चंद्रयान।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चंद्रयान-3 इस समय 40 हजार 400 किमी प्रतिघंटा की गति से धरती के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है। दरअसल अब 1 अगस्त 2023 की मध्य रात्रि 12 से साढ़े बारह बजे के बीच इसे लूनर ट्रांसफर ट्रैजेक्टरी में डाला जाएगा। यानी चंद्रयान-3 लंबी यात्रा पर निकलेगा। बता दें कि करीब पांच दिन की यात्रा के बाद यानी 5 अगस्त को यह चंद्रमा की पहली बाहरी कक्षा में जाएगा। यानी यह लूनर ब्राउंड नेविगेशन शुरू होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि chandrayaan-3 में किसी तरह का जीपीएस सिस्टम नहीं लगा है। असल में अंतरिक्ष में कोई जीपीएस सिस्टम काम नहीं करता। तो फिर सैटेलाइट्स और स्पेसक्राफ्ट कैसे अपना रास्ता जानते हैं। ऐसे में उन्हें कैसे पता होगा कि किस रास्ते पर किस दिशा में जाना है। वहां तो कोई सड़क भी नहीं बनी है। ऐसे में स्पेसक्राफ्टस में लगे स्टार सेंसर्स मदद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल chandrayaan-3 धरती के चारों तरफ पांचवें ऑर्बिट में चक्कर लगा रहा है। इसके बाद फिर ये लंबी यात्रा पर निकलेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि chandrayaan-3 में कई सारे कैमरे लगाए गए हैं,यानी स्टार सेंसर्स लगे हैं। जिनके माध्यम से वह अंतरिक्ष में दिशा पता करता है। इसके लिए वह धुव्र तारा और सूरज की मदद लेता है। बता दें कि चंद्रयान रात में ध्रुव तारा और दिन में सूरज से रास्ते और दिशा का ज्ञान लेता है। असल में ध्रुव तारा जिसे पोल स्टार भी कहते हैं, वो उत्तर की दिशा की ओर इशारा करता है। यानी आप उसकी तरफ जा रहे हैं तो आप उत्तर दिशा में जा रहे हैं। इसी तरह विपरीत तो दक्षिण, और इसी तरह पूर्व और पश्चिम का पता चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप केवल chandrian 3 के बारे में जानकर ही खुश हो रहे हैं तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं। क्योंकि इसरो ने साइलेंटली एक ऐसा स्पेस मिशन लॉन्च कर दिया है जो भारत को सुपरपावर बना देगा। दरअसल इसरो के साइलेंटली प्रोजेक्ट TSTO ने चीन और अमेरिका की नींद उड़ा दी है। कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को लॉन्च करने के बाद इसरो को अब कोई रॉकेट लांच नहीं करना पड़ेगा। इसरो का ये प्रोजेक्ट जरूरत पड़ने पर विनाशकारी हथियार का रूप भी ले सकता है। इसरो के इस लॉन्च से अमेरिका भी हक्का बक्का रह गया है। बता दें कि ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो भारत के दुश्मनों के लिए काल साबित तो होगा ही साथ ही साथ यह अंतरिक्ष के खर्चे को भी कम करेगा।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/these-things-will-melt-bad-cholesterol-from-the-veins-and-separate-it-from-the-blood/">नसों से Bad cholesterol को पिघलाकर खून से अलग कर देंगी ये चीजें</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“नसों से Bad cholesterol को पिघलाकर खून से अलग कर देंगी ये चीजें” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/these-things-will-melt-bad-cholesterol-from-the-veins-and-separate-it-from-the-blood/embed/#?secret=L4XcdtHV0v%23?secret=moBdT3THRk" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2023 13:08:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Earth: पृथ्वी संकट में? अंतरिक्ष से गिर रहे 3-3 एस्टरॉयड का जानें कैसा होगा असर?</title>
                                    <description><![CDATA[Earth: अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि आज 3 बड़े एस्टरॉयड जोकि लघु ग्रह के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है, धरती की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। ये एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसा हाल ही में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earth-in-trouble-know-what-will-be-the-effect-of-3-3-asteroids-falling-from-space/article-49542"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/earth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earth: अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि आज 3 बड़े एस्टरॉयड जोकि लघु ग्रह के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है, धरती की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। ये एस्टरॉयड धरती के बहुत करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसा हाल ही में नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIS) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है। रिपोर्ट की मानें तो अंतरिक्ष से तीन विशालकाय एस्टेरॉइड धरती की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि इनमें से एक एस्टेरॉइड MT-1 का आकार इंडिया गेट जितना बड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान का कहना है कि ये तीनों एस्टेरॉइड पृथ्वी के काफी करीब से गुजरने वाले हैं जिसे लेकर संस्थान के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने जानकारी दी है। इसे लेकर उन्होंने पब्लिक आउटरीच प्रोग्राम में बात की। हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि इन तीनों एस्टेरॉइड से पृथ्वी को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।</p>
<h3>वहीं वैज्ञानिकों ने किया खुलासा | Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि तीनों एस्टेरॉयड जुलाई में पृथ्वी के पास से गुजरेंगे। हालांकि, तीनों घटना अलग-अलग तारीखों पर देखने को मिलेंगी। डॉ. यादव का कहना है कि 2023 MT-1 एस्टेरॉयड और ME-4 एस्टेरॉयड 8 जुलाई को पृथ्वी से 1.36 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेंगे। ये एस्टेरॉइड पृथ्वी के करीब से 12 किलोमीटर प्रति सेकेंड से गुजरेंगे। अमेरिका और यूरोप के ऊपर से गुजरते हुए नजर आएंगे। वहीं तीसरा यूक्यू 3 एस्टेरॉयड 18 जुलाई को पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरेगा जो करीब 18 से 20 मीटर व्यास का होगा। डॉ. यादव ने बताया कि हर साल पृथ्वी की ओर आते हैं एस्टेरॉइड।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. यादव ने आगे बताया कि एस्टेरॉइड हर साल पृथ्वी (Earth) की ओर आते हैं। कुछ एस्टेरॉइड का पृथ्वी से टकराने का खतरा बना रहता जिन्हें खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, ये तीनों एस्टेरॉइड पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरने वाले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एस्टेरॉयड का व्यास 524 फीट के आसपास होगा जबकि इसकी रफ्तार 11.8 किमी प्रति सेकंड है। ये एस्टेरॉयड एक घंटे में 26 हजार मील से ज्यादा की दूरी तय कर रहे हैं, जो ध्वनि की गति से भी 34 गुना ज्यादा रफ्तार है।</p>
<p style="text-align:justify;">एस्टेरॉयड 2013 WV44 हमारे ग्रह से 2.1 मिलियन मील दूरी से गुजरने वाला है जो अंतरिक्ष के हिसाब से सुरक्षित दूरी मानी जाती है। एक एक्सपर्ट के अनुसार ये दूरी चंद्रमा से लगभग 9 गुना ज्यादा है, फिर भी ये एस्टेरॉयड को नियर अर्थ आॅब्जेक्ट के रूप में वगीर्कृत किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन एस्टेरॉयड का पृथ्वी पर कोई असर नहीं होगा। अगर एक छोटा एस्टेरॉयड हमारे ग्रह से टकराया तो वो वायुमंडल में ही जलकर राख हो जाएगा। हालांकि, अगर कोई बड़ा एस्टेरॉयड टकराया तो उससे नुकसान होने का खतरा हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 12:05:08 +0530</pubDate>
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                <title>Stone River: ऐसी नदी जिसमें पानी नहीं सिर्फ पत्थर ही पत्थर! वैज्ञानिकों के लिए बनी पहेली</title>
                                    <description><![CDATA[अनोखी स्टोन रिवर की ये है अजब कहानी, जानिए कहां बहती है Stone River:नदी! नाम सुनते ही ख्यालों में आने लगता है, जैसे पानी ही पानी तेज बहाव में एक ओर बहता जा रहा है और खासकर होता भी ऐसा ही है। नदियों में तो सिर्फ और सिर्फ पानी ही बहता है। यूं तो नदी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/a-river-in-which-there-is-no-water-only-stones/article-49510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/stone-river.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">अनोखी स्टोन रिवर की ये है अजब कहानी, जानिए कहां बहती है</h3>
<p style="text-align:justify;">Stone River:नदी! नाम सुनते ही ख्यालों में आने लगता है, जैसे पानी ही पानी तेज बहाव में एक ओर बहता जा रहा है और खासकर होता भी ऐसा ही है। नदियों में तो सिर्फ और सिर्फ पानी ही बहता है। यूं तो नदी में आपने पानी के साथ पत्थर भी देखे होंगे। लेकिन क्या कभी आपने सिर्फ पत्थरों वाली नदी देखी है जिसमें पानी की एक बूंद भी ना हो सिर्फ पत्थर ही पत्थर हों। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह नदी रूस में है। वैज्ञानिकों के लिए ये नदी एक पहेली बनी हुई है, जिसे सुलझाना उनके लिए चुनौती बनी हुई है। Stone River</p>
<p style="text-align:justify;">और बता दें कि प्रकृति के इस अजीबोगरीब रहस्य का नाम ‘स्टोन रिवर’ या ‘स्टोन रन’ है। नदी में लगभग 6 किलोमीटर तक आपको सिर्फ पत्थर ही पत्थर दिखाई देंगे और पत्थर भी ऐसे पड़े मिलेंगे जैसे नदी की धारा बह रही है। 20 मीटर छोटी धाराओं से लेकर कहीं-कहीं यह नदी 200 से 700 मीटर की बड़ी धाराओं का रूप भी ले लेती है। इसमें करीब 10 टन तक वजनी पत्थर 4 से 6 इंच तक जमीन के अंदर धंसे हुए हैं। इस नदी के आसपास देवदार के वृक्षों के घने जंगल भी हैं और इसके पास एक वन क्षेत्र है, जिसमें विविध प्राणियों की एक अद्वितीय जीवन-पद्धति है। Stone River</p>
<p style="text-align:justify;">अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि इस जगह पर इतने सारे पत्थर कहां से आए और कैसे इन्होंने एक नदी का रूप धारण कर लिया? वैसे तो इन सवालों का सटीक जवाब आज तक किसी को नहीं मिल पाया है। मगर कुछ वैज्ञानिकों का अंदाजा है कि करीब 10 हजार साल पहले ऊंची चोटियों से ग्लेशियर टूटकर गिरे होंगे, जिन्होंने इस अजीबोगरीब नदी का रूप ले लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपने भी देखा होगा कि कुछ नदियाँ विशाल हैं, जबकि कुछ नदियाँ छोटी होती हैं। हर नदी का अपना महत्वपूर्ण इतिहास और महत्व होता है। बहरहाल, आपको दुनिया की इस अनोखी पत्थरों से भरी नदी के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इस लेख के माध्यम से इस नदी के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी आपको दी जा रही है। यह नदी अन्य नदियों से अलग है और इसकी लंबाई भी बताई कि 6 किलोमीटर तक फैली हुई है। वैसे दुनियाभर के देशों में बहुत-सी नदियां बहती हैं। भारत की बात करें, तो यहां प्रमुख नदियों की संख्या 200 के लगभग हैं। इसके अलावा, देश के विभिन्न राज्यों में छोटी से लेकर बड़ी नदियाँ बहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग 6 किलोमीटर लंबी इस अनोखी नदी में मौजूद पत्थरों का वजन 10 टन तक होता है और इन पत्थरों का आकार भी अलग-अलग होता है। इसलिए, लोग इस नदी को देखने के लिए विभिन्न भूभागों से यहां पहुंचते हैं। कई वैज्ञानिकों ने भी इस नदी के बारे में अध्ययन किए हैं, लेकिन उन्होंने भी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कुछ शोधकर्ता के विचारों के लिहाज से करीब 10,000 साल पहले पर्वतों की ऊंचाइयों से टूटे ग्लेशियर के पत्थर पानी के साथ यहां बहकर जमा हो गए हैं और उन्होंने इस नदी का रूप ले लिया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/punjab-haryana-uttarakhand-himachal-rajasthan-weather-news/">Weather News: पहाड़ों की यात्रा रोक दें! बारिश मचाने जा रही तबाही? मौसम विभाग का अलर्ट</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 12:35:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Earth: पूर्व की ओर झुकी पृथ्वी, जिम्मेदार कौन, क्या होगा असर! जानें क्या है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[Earth: कहने को तो ‘जल ही जीवन है’, ‘जल है तो कल है’, ‘जल बिना जीवन नहीं’ ऐसे-ऐसे श्लोगन है पर क्या जल सुरक्षित है? बता दें कि पृथ्वी पर जीवन है तो उसमें सबसे बड़ा योगदान पानी का है। पानी की वजह से ही प्लैनेट जिंदा है। लेकिन अभी एक अध्ययन के अनुसार पानी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/earth-tilted-towards-east-who-is-responsible-what-will-be-the-effect-know-what-is-the-matter/article-49241"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/earth-sun.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Earth: कहने को तो ‘जल ही जीवन है’, ‘जल है तो कल है’, ‘जल बिना जीवन नहीं’ ऐसे-ऐसे श्लोगन है पर क्या जल सुरक्षित है? बता दें कि पृथ्वी पर जीवन है तो उसमें सबसे बड़ा योगदान पानी का है। पानी की वजह से ही प्लैनेट जिंदा है। लेकिन अभी एक अध्ययन के अनुसार पानी को पृथ्वी से निकाल-निकाल कर इंसानों ने इसे पूर्व की ओर झुका दिया है। सोचिए जिस पृथ्वी का एक तिहाई भाग पानी से ढका है, उसी पृथ्वी को इंसानों की एक हरकत ने एक तरफ ज्यादा झुका दिया है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको एक ऐसी जानकारी प्रदान करेंगे जिसको जानकार आप हैरान हो जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है अध्ययन? Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंसानों ने पृथ्वी से इतना ज्यादा ग्राउंडवॉटर पंपिंग किया जिससे कि 20 सालों से भी कम समय में पृथ्वी 4.36 सेंटीमीटर/प्रतिवर्ष की स्पीड से लगभग 80 सेंटीमीटर पूर्व की ओर झुक गई है। दरअसल, जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स एजीयू की पत्रिका है जो पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान में फैले प्रभावों के साथ लघु-प्रारूप और उच्च-प्रभाव अनुसंधान पर रिपोर्ट प्रकाशित करती है। जलवायु मॉडल के आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया ािा कि लोगों ने 2150 गीगाटन भूजल निकाल लिया था जोकि 1993 से 2010 तक समुद्र के स्तर में 6 मिलीमीटर यानि 0.24 इंच से अधिक वृद्धि के बराबर था। Earth</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन के अनुसार पृथ्वी एक बिंदु के समान घूमने वाले ध्रुव के साथ बनी हुई है पृथ्वी इसी के चारों ओर घूमती है। यह एक धु्रवीय गति है जो तब होती है जब पृथ्वी के घुर्णी धु्रव की स्थिति क्रस्ट के सापेक्ष अलग होती है। ग्रह पर पानी का बंटवारा इसे प्रभावित करता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पानी की भारी मात्रा को कैसे वितरित किया जाता है। पृथ्वी थोड़ा विभिन्न तरीके से घूमती है क्योंकि इसके चारों और पानी घूमता है ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कितना पानी निकाल लिया बाहर? Earth</h4>
<p style="text-align:justify;">इस रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राउंड वाटर का सबसे ज्यादा दोहन अमेरिका के पश्चिम इलाके और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र और उत्तर पश्चिमी भारत में हुआ। यहां ना सिर्फ पानी का निकाला गया बल्कि रिडिस्ट्रिब्यूट किया गया। इससे पृथ्वी के रोटेशनल पोल के बहाव पर प्रभाव पड़ा है। मध्य अंकाक्षों से पानी के दोबारा विभाजन का घूमने वाले ध्रुव पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। मध्य अक्षांश पर पश्चिमी उत्तरी अमेरिका और उत्तर पश्चिमी भारत में सबसे ज्यादा पानी का पुनर्वितरण किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों का मानना है कि जमीन से निकालकर जो पानी उपयोग में लिया जाता है और रिडिस्ट्रिब्यूट होता है, वह आखिर में समुद्र में पहुंच जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि वो पानी गंदा होता है और हमारी नंदियों को भी प्रदूषित करता है। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के एक भूभौतिकीविद् की-वैन सेओ ने कहा कि पृथ्वी का घूर्णन धु्रव वास्तव में बहुत कुछ बदलता है। हमारे अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु से संबंधित कारणों में भूजल का दोबारा विभाजन वास्तव में घूर्णी धु्रव के बहाव पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। Earth</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि 2016 में पृथ्वी के घूमने की स्थिति बदलने की पानी की क्षमता की खोज की गई थी। अब तक इन घूमने वाले बदलावों में भूजल के अहम योगदान की खोज नहंी की गई थी। अब एक नए अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के घूमने वाले ध्रुव के बहाव और पानी की गतिविधि में देख गए बदलावों को दर्ज किया। पहले तो सिर्फ बर्फ की चादरों और ग्लेशियरों पर इसे लागू किया जाता था। अब भूतल के दोबारा विभाजन के विभिन्न परिदृश्यों को भी इसमें जोड़ा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">रिसर्चकर्ताओं के मुताबिक भूजल के दोबारा विभाजन के लिए 2150 गीगाटन पानी को शामिल गया गया है। इसके बाद मॉडल में उन चीजों को शामिल गया गया जो केवल देखे गए घु्रवीय बहाव से मल खाता था। इसके बिना मॉडल प्रति वर्ष 78.5 सेंटीमीटर यानि 31 इंच या 4.3 सेंटी मीटर यानि 1.7 इंच बहाव से दूर था। सेओं ने कहा कि मैं अजीब तरीके से घूमने के इस अस्पष्ट कारण को देखकर बहुत खुश हूँ। वहीं दूसरी ओर पृथ्वी का निवासी होने के नाते मैं यह देखकर चिंतित और हैरान हूँ कि भूजल को निकालने से समुद्र के स्तर में वृद्धि का यह एक मुख्य स्रोत है। Earth</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि दुनियाभर में जिस तेजी से ग्राउंडवाटर का उपयोग बढ़ा है, उससे पता चलता है कि तालाबों और झीलों को पुनर्जीवित करने में कोई भी पक्ष दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। शहरों में तो पोखरों को पाटकर वहां कालोनियों को बसा दिया गया है। बारिश के पानी को सहेजने का काम भी बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा। जिससे भूजल का स्तर लगातार कम हो रहा है। Earth</p>
<p style="text-align:justify;">इस रिसर्च से दुनिया के भविष्य के लिए नए दरवाजे खुल गए हैं। आने वाले वर्षों में वैज्ञानिकों के लिए यह समझ पाना और भी आसान होगा कि भूजल के दोहन के कारण पृथ्वी किस तरह से रिएक्ट कर रही है। अभी तक पृथ्वी के 80 सेंटीमीटर पूर्व की ओर झुकने का पता चला है, क्या यह झुकाव भविष्य में और वृद्धि कर सकता है ऐसे कई सवालों के जवाब आने वाले समय में हमारे सामने आ सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 13:20:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>World&amp;#8217;s Largest Roti: यहां बनती है दुनिया की सबसे बड़ी रोटी, छा रहा भारत का नाम</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनाने वाला भारत का ये शहर गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज World’s Largest Roti:भारत एक ऐसा देश है जो तरह-तरह के पकवान बनाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। भारत में कोस-कोस पर बदले पानी, 4 कोस पर बाणी। यहां हर सौ किलोमीटर पर खाना बनाने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/worlds-largest-roti/article-48763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/roti.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनाने वाला भारत का ये शहर</li>
<li style="text-align:justify;">गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">World’s Largest Roti:भारत एक ऐसा देश है जो तरह-तरह के पकवान बनाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। भारत में कोस-कोस पर बदले पानी, 4 कोस पर बाणी। यहां हर सौ किलोमीटर पर खाना बनाने के तरीके से खाने का स्वाद बदला नजर आता है, लेकिन एक रोटी ही ऐसी चीज है जो पूरे भारत में एक जैसी, एक ही साइज की बनाई जाती है। लेकिन दुनिया में एक जगह ऐसी भी जहां सबसे बड़ी रोटी बनाई जाती है और वो जगह भारत में ही है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनाई जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोटी भी इतनी बड़ी कि एक रोटी से पूरा एक गांव पेट भर सकता है। इस रोटी ने गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है। आइये जानते हैं भारत का वो शहर जहां दुनिया की सबसे बड़ी और अनोखी बनती है:- World’s Largest Roti</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का वो शहर कोई दूसरा नहीं बल्कि पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात का जामनगर है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये रोटी यहां हर रोज नहीं बनाई जाती बल्कि कुछ खास मौकों पर ही इसे बनाया जाता है। जैसे दगड़ू सेठ गणपति सार्वजनिक महोत्सव या फिर जलाराम बापा की जयंती हो। इस रोटी को जलाराम मंदिर के जीर्णोद्धार कमेटी द्वारा बनवाया जाता है और जिसे मंदिर में आए भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। लोग उस खास दिन को ही इस रोटी को खाने दूर-दूर से जामनगर आते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोटी बनाने का तरीका | World’s Largest Roti:</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको पता होना चाहिए कि दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनाने के लिए कितनी महिलाओं की जरूरत पड़ सकती है। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक दो नहीं बल्कि कई महिलाएं एक साथ इस रोटी को बनाने के लिए जुटती हैं और घंटों की कड़ी मेहनत के बाद इस रोटी को तैयार कर पाती हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रोटी को बनाने में ढेर सारे गेहूं के आटे का प्रयोग होता है और जब यह रोटी बनकर तैयार होती है तो 145 किलो की एक रोटी बन जाती है। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि इसे बनाने के लिए तवा कितना बड़ा होता होगा तो इसके बारे में सबसे खास बात यह कि इस रोटी को पकाने के लिए मंदिर के पास एक बड़ा सा विशेष तवा है। इसी तवे पर इस खास रोटी को पकाया जाता है। रोटी बनाते समय रोटी जले ना, इसके लिए रोटी सेंकने के लिए कई लोग लगाए जाते हैं और आंच को भी धीमा रखा जाता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2023 16:17:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Property Knowledge: बात पते की ! आपके हितों की !! प्रॉपर्टी के पेपर खो जाने पर क्या करें?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Property Knowledge इस भागदौड़ भरी जिंदगी में ना जानें दिमाग कहां-कहां घूमता रहता है, कहीं की चीजें कहीं ओर ही रख दी जाती हैं या फिर कहीं सफर के दौरान खो जाती हैं, जिससे जिंदगी संकटों से भर जाती है। जरूरी कागजात जैसे कि पढ़ाई के सर्टिफिकेट, मार्कशीट, प्रॉपर्टी के पेपर यदि गुम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/property-knowledge/article-48298"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/property-knowledge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Property Knowledge इस भागदौड़ भरी जिंदगी में ना जानें दिमाग कहां-कहां घूमता रहता है, कहीं की चीजें कहीं ओर ही रख दी जाती हैं या फिर कहीं सफर के दौरान खो जाती हैं, जिससे जिंदगी संकटों से भर जाती है। जरूरी कागजात जैसे कि पढ़ाई के सर्टिफिकेट, मार्कशीट, प्रॉपर्टी के पेपर यदि गुम हो जाएं तो बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती है। कई बार ध्यान इतना भटका होता है कि जरूरी कागजात तक गुम हो जाते हैं। आज हम आपको इन्हीं मुसीबतों से बाहर निकालने की बात करेंगे। बात है प्रॉपर्टी के पेपर्स गुम होने पर क्या करें? यदि किसी के प्रॉपर्टी के पेपर गुम हो जाएं तो उन्हें क्या करना चाहिए?</p>
<p style="text-align:justify;">अगर किसी के प्रॉपर्टी (Property Knowledge)  के पेपर खो जाते हैं तो इंसान परेशान हो जाता है और प्रॉपर्टी के पेपर खो जाने का मतलब है कि व्यक्ति के पास उस संपत्ति पर अधिकार होने का कोई उपाय नहीं है। बेशक सब-रजिस्ट्रार के आॅफिस में आपके या आपके घर में किसी के नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड होगी, लेकिन अचानक जरूरत पड़ने पर उसे एकदम से ला पाना असंभव होता है। इसलिए बेहतर यही होगा कि कागज गुम होने पर डुप्लीकेट कागजात बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। यह कोई बहुत कठिन प्रक्रिया नहीं है। केवल 3 स्टेप्स उठाकर आप प्रॉपर्टी के डुप्लीकेट पेपर हासिल कर सकते हैं। बता दें कि पेपर खो जाने के साथ-साथ चोरी होने या जल जाने पर भी आप डुप्लीकेट पेपर्स ले सकते हैं। आइए जानते हैं प्रक्रिया:-</p>
<h3 style="text-align:justify;">सबसे पहले करें एफआईआर | Property Knowledge</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको जैसे ही यह पता चलता है कि आपके प्रॉपर्टी के कागजात कहीं खो गए हैं या किसी ने चोरी कर लिए हैं तो आपको तुरंत पास के पुलिस थाने में जाकर इसकी रिपोर्ट लिखवानी चाहिए। एफआईआर में बताएं कि आपकी प्रॉपर्टी के कागज खो गए हैं और उस एफआईआर की कॉपी अपने पास जरूर रखें। अगर संभव हो सके तो इसकी जानकारी इंस्पेक्टर जनरल आॅफ रजिस्ट्रेशन या सब-रजिस्ट्रार को भी लिखित में दे सकते हैं। इस लिखित जानकारी में यह जरूर बताएं कि कब, कैसे और कहां पर आपके पेपर गुम हुए हैं, पूरी डिटेल लिखित में दें ताकि उन्हें समस्या की जानकारी अच्छे से समझ आ सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कानूनी रास्ता अपनाएं | Property Knowledge</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरे स्टेप में आप स्टांप पेपर पर एक अंडरटेकिंग भी जरूर बनवा लें, जिसमें प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी लिखी होगी। इसमें गुम हुए कागज, एफआईआर और अखबार के नोटिस के बारे में जरूर लिखा होना चाहिए। इसके बाद आपको इस अंडरटेकिंग को रजिस्टर कराना होगा, नोटरी से पास कराना होगा और रजिस्ट्रार के आॅफिस में जमा भी कराना होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रॉपर्टी के डुप्लीकेट कागजात लें | Property Knowledge</h3>
<p style="text-align:justify;">तीसरे स्टेप में अपनी प्रॉपर्टी के डुप्लीकेट कागज के लिए रजिस्ट्रार आॅफिस में डुप्लीकेट सेल डीड के लिए अप्लाई करना होगा। इसके लिए आपको एफआईआर की फोटोकॉपी, अखबार में दिए गए विज्ञापन की कॉपी, डुप्लीकेट शेयर सर्टिफिकेट और नोटरी से अटेस्टेड कराया हुआ अंडरटेकिंग और कुछ प्रोसेसिंग फीस रजिस्ट्रार आॅफिस में जमा कराने होंगे, जिसके बाद आपके नाम डुप्लीकेट सेल डीड जारी कर दिया जाएगा। ये सभी प्रोसेस करके आप अपनी प्रॉपर्टी के कागजात यानि अपने अधिकार ले सकते हैं।</p>
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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 12:21:36 +0530</pubDate>
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