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                <title>Land - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Land-Aadhaar Link: अब कोई दबंग नहीं हड़प सकेंगा आपकी जमीन, सरकार ने लागू किया ये नियम, भूमि का भी बनेगा भू-आधार</title>
                                    <description><![CDATA[Land Property Linked With Aadhaar Card: अनु सैनी। क्या आपने भी दूसरे शहर में जमीन खरीद कर रखी है? क्या आपको भी यह चिंता सता रही है की कही कोई आपकी उस भूमि पर कब्जा न कर लें? तो अब आपको इस बात की कोई चिंता नहीं करनी हैं क्योंकि सरकार ने एक नया कानून […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/now-no-bully-will-be-able-to-grab-your-land/article-60505"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/land-aadhaar-link-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Land Property Linked With Aadhaar Card: अनु सैनी।</strong> क्या आपने भी दूसरे शहर में जमीन खरीद कर रखी है? क्या आपको भी यह चिंता सता रही है की कही कोई आपकी उस भूमि पर कब्जा न कर लें? तो अब आपको इस बात की कोई चिंता नहीं करनी हैं क्योंकि सरकार ने एक नया कानून लागू कर दिया है, जिसमें जमीन का भी आधार कार्ड बनेगा अब भूमि को 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान किया जायेगा, जिसे भू-आधार ULPIN कहा जता हैं, इस भू आधार के लागू होने पर जमीन पर मालिक का हक स्पष्ट होगा और जमीन संबंधी विवाद खत्म होंगे, इसमें किसी भी जमीन पर कब्जा करने की समस्या खत्म हो जाएगी। Land-Aadhaar Link</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/use-this-white-water-to-bring-life-to-your-dull-face-know-its-benefits/">Skin Care: मुरझाए चेहरे में जान डालने के लिए करें इस सफेद पानी का इस्तेमाल, जानें इसके फायदे</a></p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि यह नया आदेश केंद्र सरकार ने बजट में पेश किया हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भूमि संबंधी सुधारों पर निर्मला सीता रमन ने घोषणा की है की ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के लिए विशिष्ट पहचान संख्या या भू आधार और शहरी भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण का प्रस्ताव रखा हैं, भू-आधार से जमीन पर मालिक का हक स्पष्ट होगा और भूमि से जुड़े विवाद खत्म होंगे, भूमि का भू-आधार के नाम से कार्ड बनाया जाएगा, जिससे उसकी पहचान आसानी से कर सकते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-you-are-bored-of-eating-dal-and-vegetables-everyday-then-definitely-try-this-tadka-dahi-once/">Dahi Tadka: रोज-रोज दाल सब्जी खाते-खाते ऊब गया है मन, तो एक बार जरूर ट्राई करें ये तड़का लगा दही</a></p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इस योजना का उल्लेख वित्त वर्ष के बजट में किया गया हैं, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में सभी भूमि भूखंडों के लिए विशिष्ट पहचान संख्या प्रदा करने की घोषणा की गई हैं, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भूमि संबंधी सुधार एक कार्यवाई में भूमि प्रशासन, योजना, प्रबंधन एवं शहरी नियोजन, उपयोग, भवन उपनियम शामिल होंगे, इस योदना के अंतर्गत बनने वाले कार्ड को भू आधार का नाम दिया गया हैं। सरकार द्वारा किए जाने वाले भू-आधार की प्रक्रिया जिसमें शहरी भूमि अभिलेख का डिजिटलीकरण 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जायेगा, यानि की वित्तीय सहायता के माध्यम से आने वाले 3 वर्ष की अंदर भू-आधार कार्ड का कार्य राज्य सरकार की सहायता से किया जाएगा, यह नियम ग्रामीण और शहरी दोनों के लिए लागू किया जाता हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भू आधार कैसे काम करता हैं? Land-Aadhaar Link</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले तो भूमि को जीपीएस तकनीक का प्रयोग करके जियोटैग किया जाएगा, जिसकी सहायता से भूखंड का सटीक भौगोलिक स्थिति की पहचान कर सकते हैं, इसके बाद भूखंड की सीमाओं का भौतिक सत्यापन और माप करते है फिर भूखंड के लिए भूमि मालिक का नाम, उपयोग श्रेणी, क्षेत्र आदि विवरण एकत्रित किया जाता हैं, फिर सभी जानकारी भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली में दर्ज करना होगा, सिस्टम स्वचालित के अनुसार भूखंड के लिए 14 अंक का भू-आधार संख्या तैयार करेगा, जो डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ा होता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भू आधार कार्ड में राज्य कोड, जिला कोड, उप जिला कोड, गांव कोड, भूखंड की विशिष्ट आईडी संख्या आदि होते हैं, भू आधार संख्या को डिजिटल और भौतिक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज पर अंकित होता हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भू-आधार से जुड़ी मुख्य बिंदू</h3>
<p style="text-align:justify;">यह मानचित्रण और मैप की सहायता से सटीक भूमि की जानकारी प्रदान करता हैं और भूखंड पहचान में अस्पष्ट दूर होती हैं, भूमि से जुड़ी विवाद के कारण आधार कार्ड से लिंक होने पर भूमि अभिलेख एक ऑनलाइन पहुंचना सक्षम होता है। सबसे बड़ी बात इसकी सहायता से सरकार को सटीक भूमि डाटा मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jul 2024 13:02:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में रजिस्ट्री के साथ ही होगा जमीनों का इंतकाल</title>
                                    <description><![CDATA[इंतकाल किए जाने के दिए निर्देश गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)। जमीनों की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी रोकने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अब किसी भी भूमि व प्लाट इत्यादि की रजिस्ट्री होने पर साथ-साथ ही उसका इंतकाल किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई भूमि अधिग्रहण की जाती है तो संबंधित विभाग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-with-the-registry-there-will-be-a-lot-of-land/article-5145"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/rjistry.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">इंतकाल किए जाने के दिए निर्देश</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)।</strong> जमीनों की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी रोकने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अब किसी भी भूमि व प्लाट इत्यादि की रजिस्ट्री होने पर साथ-साथ ही उसका इंतकाल किए जाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई भूमि अधिग्रहण की जाती है तो संबंधित विभाग की उस भूमि का इंतकाल करवाने की जिम्मेदारी होगी ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत व धोखाधडी न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी भूमि की रजिस्ट्री गलत तरीके या संबंधित दस्तावेजों की कमी के कारण की जाती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित तहसीलदार की होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में ढिलाई न बरतें।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Aug 2018 21:21:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेमनाले में 40 फुट का कटाव आने से सैंकड़ों एकड़ भूमि में भरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रेन के टूटने की चेतावनी दिए जाने के बाद भी नहीं जागा विभाग आधिकारियों ने कटाव में बांध लगाने में जताई असमर्थता, बांध लगाने में अपने स्तर पर जुटे ग्रामीण अबोहर(सुधीर अरोड़ा/सच कहूँ न्यूज)। ड्रेनेज विभाग के आधिकारियों द्वारा समय पर सेमनाला की सफाई नहीं करवाने की लापरवाही पिछले रात दो गांवोंवासियों पर उस समय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/filled-with-hundreds-of-acres-of-land-coming-out-of-the-40-foot-erosion-in-semanala/article-4695"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/samnala-news.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ड्रेन के टूटने की चेतावनी दिए जाने के बाद भी नहीं जागा विभाग</h1>
<h2 style="text-align:center;">आधिकारियों ने कटाव में बांध लगाने में जताई असमर्थता, बांध लगाने में अपने स्तर पर जुटे ग्रामीण</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर(सुधीर अरोड़ा/सच कहूँ न्यूज)।</strong> ड्रेनेज विभाग के आधिकारियों द्वारा समय पर सेमनाला की सफाई नहीं करवाने की लापरवाही पिछले रात दो गांवोंवासियों पर उस समय भारी पड़ी जब किसानों द्वारा अबुलखुराना ड्रेन के टूटने की चेतावनी दिए जाने के बाद भी विभाग नहीं जागा व बीती रात सेमनाले में करीब 40 फुट का कटाव आने से सैंकड़ों एकड़ भूमि पानी के साथ भर जाने से किसानों की फसलें तबाह हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरफ आज सुबह मौके पर पहुंचे आधिकारियों ने कटाव में बाँध लगाने में असमर्थता जताऐ जाने पर किसानों ने अपने स्तर पर सेमनाले में आए कटाव को बांधना शरू कर दिया है।  जानकारी के अनुसार गांव बहादुरखेडा, ढाबा कोकरियां व सरदारपुरा से निकलते अबुल खुराना ड्रेन में सफाई नहीं होने के कारण इसमें जलकुंभी की भरमार थी, जिसे देखते हुए किसानों ने विभाग को सूचित किया कि जलकुंभी के साथ सेमनाले में आ रहे पानी के आगे जाने में अड़चन पैदा हो रही है।</p>
<h2 style="text-align:center;">पानी से भर गई 200 एकड फसल</h2>
<p style="text-align:justify;">जलकुंभी पुलों में अटक रही है, जिससे सेमनाले के किनारे कमजोर हो रहे हैं, और किसी भी समय यह ड्रेन टूटकर भारी तबाही मचा सकती है लेकिन इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने जलकुंभी निकलवाने की तरफ ध्यान नहीं दिया, जिसके फलस्वरूप पिछले दिन हुई भारी बरसात के चलते रात करीब 11 बजे उक्त ड्रेन में 40 फुट का कटाव आ गया, जिससे गांव बहादुरखेड़ा व ढाबा कोकरियां में 200 एकड फसल पानी से भर गई।</p>
<h2 style="text-align:center;">किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जताया रोष</h2>
<p style="text-align:justify;">किसान नगेंदर, दर्शन,गुरचरण सिंह और सीता ने जिला प्रशासन के इस मामले में उदासीनता दिखाए जाने पर रोष जाहिर किया। गांववासियों ने प्रशासनिक आधिकारियों से जल्द पुलों के नीचे रुकी जलकुंभी को निकालने की अपील करते हुए कहा कि अगर जल्द इस ड्रैन की सफाई नहीं हुई तो यह ड्रेन किसी और जगह से टूटकर अन्य गांवों को भी नुक्सान पहुंचा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरफ गांव दुतांरावाली के लोगों ने बताया कि गांव के 5किलोमीटर क्षेत्र में जलकुंभी भरी हुई है, जिस कारण यह ड्रेन दुतारांवाली के नजदीक से भी टूट सकता है। गांववासियों ने दुतारांवाली व आसपास के अन्य गांवों के लोगों द्वारा ड्रेनेज विभाग के खिलाफ एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि यह ड्रेन फिर से टूटी तो वह विभाग के खिलाफ सघर्ष करने को मजबूर होंगे व इसकी पूरी जिम्मेवारी विभाग की होगी। गांववासियों ने ड्रेन विभाग के आधिकारियों व स्थानीय उपमंडल अधिकारी व जिला डिप्टी कमिशनर को इस तरफ ध्यान देने की मांग की है।</p>
<h2 style="text-align:center;">संबंधित विभाग ने समस्या का हल करने किए हाथ खडे</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी सूचना मिलने पर आज सुबह ड्रेनेज विभाग के एक्सईयन अमरजीत गुप्ता, एसडीओ अर्शदीप सिंह व जेई हरप्रीत सिंह मौके पर पहुुंचे व किसानों के साथ हमदर्दी जताते हुए ड्रेन में आए कटाव को भरने के लिए योजना बनानी शुरू की लेकिन विभाग के पास फंड नहीं होने की बात कहकर उन्होंंने भी इस कटाव को भरने पर अपने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद किसानों ने खुद फंड इकठ्ठा कर ड्रेन में आए कटाव को भरने का कार्य शुरू कर दिया ताकि सेमनाले का पानी अधिक गांवों को अपनी चपेट में न ले सके।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jul 2018 04:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब विलेज लैंड नियम बना मजाक</title>
                                    <description><![CDATA[पंचायतों द्वारा कुम्हारदाने के लिए 5 एकड़ शामलाती भूमि देने का स्पष्ट प्रावधान प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हीला हवाली सच कहूँ/देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। स्वदेशी का ढ़ोल पीटने वाली सरकार के जन प्रतिनिधि और अधिकारी पंजाब विलेज कॉमन लैंड रूल 1964 का मजाक बना रहे हैं। नियम के अनुसार प्रत्येक गांव में जहां पर भी पंचायतों के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/punjab-village-land-rules-make-fun/article-4480"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/fun.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पंचायतों द्वारा कुम्हारदाने के लिए 5 एकड़ शामलाती<br />
भूमि देने का स्पष्ट प्रावधान</h1>
<ul>
<li><strong>प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हीला हवाली </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/देवीलाल बारना/</strong><strong>कुरुक्षेत्र।</strong> स्वदेशी का ढ़ोल पीटने वाली सरकार के जन प्रतिनिधि और अधिकारी पंजाब विलेज कॉमन लैंड रूल 1964 का मजाक बना रहे हैं। नियम के अनुसार प्रत्येक गांव में जहां पर भी पंचायतों के पास शामलाती भूमि हो वहां पर कुम्हारदाने के लिए 2 से 5 एकड़ तक जमीन दिए जाने का प्रावधान है। इसको लेकर दर्जनों बार उपायुक्त स्तर पर पत्र भी लिखे जा चुके हैं और हायर अथोरिटी द्वारा इन आदेशों को जल्द से जल्द लागू करवाने को लेकर स्थानीय प्रशासन व संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी समय-समय पर जारी किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल वितरीत रही है। इन आदेशों को अमलीजामा पहनाने की जहमत न तो जन प्रतिनिधि उठाने को तैयार हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी पंचायतों को कुम्हारों को बर्तन बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की दिशा मे कोई कदम उठा रहे हैं। इसको लेकर दशकों से कुम्हार समाज के प्रतिनिधि आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी यह आवाज केवल पत्र व्यवहार के बीच फंस कर रह जाती है। अभी तक इस दिशा मे सरकार या प्रशासन ढ़ाई कदम भी नही चल पाया है।</p>
<h1 style="text-align:center;">एक्ट के तहत जमीन को लेकर ये है प्रावधान</h1>
<p style="text-align:justify;">नियम की बात करें तो नियम 3(4) पंजाब विलेज कॉमन लैंड रैगुलेशन 1964 यह शक्ति प्रदान करता है कि जिला के उपायुक्त पंचायत विभाग के माध्यम से गांवों के सरपंचों को शामलाती भूमि में से संख्या के अनुसार 2 से 5 एकड़ तक कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन बनाने व आवे-पंजावे के लिए दी जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसको लेकर पत्र व्यवहार तो डायरेक्टर पंचायत विभाग हरियाणा व अतिरिक्त मुख्य सचिव हरियाणा सरकार द्वारा कई बार जिला उपायुक्तों को जारी किए गए हैं, लेकिन पंचायती स्तर पर इस नियम को आज तक भी लागू करने में सरकार व उसके नुमाईंदे नाकाम साबित हुए हैं। ऐसे मे जहां बेरोजगारी की मार के चलते कुम्हार समाज की अगली पीढ़ी पुस्तैनी धंधे को छोड़ती जा रही है, वहीं बर्तन बनाने के लिए मिट्टी की उपलब्धधा न होने के चलते भी कुम्हार समाज मिट्टी के बर्तन बनाने के व्यवसाय से विमुक्त होता जा रहा है।</p>
<h1 style="text-align:center;">कब-कब किस स्तर पर जारी हुए आदेश</h1>
<p style="text-align:justify;">वैसे तो 1964 में बनाए गए एक्ट के बाद से कुम्हारों को पंचायतों द्वारा जमीन देना सुनिश्चित किया गया था। समय-समय पर इस आदेश को लागू करवाने के लिए निर्देश भी जारी होते रहे हैं। 23 नवंबर 1997 को जारी पत्र क्रमांक 97/73194-250 आयुक्त एवं सचिव हरियाणा सरकार विकास तथा पंचायत विभाग द्वारा हरियाणा के सभी खंड़ विकास एवं पंचायत अधिकारियों को जारी किया गया था। जिसमें 24 जनवरी 1985 के पत्र क्रमांक एस01-85/2998-3093 व 19 नवंबर 1991 के पत्र क्रमांक एस01-91/16582-690 का हवाला दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव हरियाणा सरकार विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा द्वारा हरियाणा के सभी जिला उपायुक्तों को 3 जुलाई 2014 को फिर से पत्र जारी किया गया, जिसमें सख्ती से आदेश जारी किए गए थे कि पंचायत द्वारा कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए व कुम्हारदाने के लिए 2 से 5 एकड तक जमीन उपलब्ध करवाने की बात सुनिश्चित की जाए। लेकिन हकीकत में आज तक भी कुम्हारों को जमीन मिलना तो दूर इस दिशा में स्थानीय स्तर पर कोई भी प्रयास नही किया गया।</p>
<h1 style="text-align:center;">राजनीति से उपर उठकर काम करें जनप्रतिनिधि</h1>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा मिट्टी कला बोर्ड़ के सदस्य एवं प्रजापति जागरूक सभा के प्रदेशाध्यक्ष रामकुमार रंबा ने इस बात पर कडा अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि असल मे कुम्हारों को आवे-पंजावे के लिए जमीन न मिलने का सबसे बडा कारण स्थानीय स्तर पर राजनीति है। उपर के स्तर से तो कई बार आवे-पंजावे की जमीन देने के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन बात स्थानीय स्तर पर आकर रूक जाती है। उन्होने कहा कि समाज के लोगों के साथ और एकजुटता के चलते बडी लंबी जद्दोजहद के बाद हरियाणा मिट्टी कला बोर्ड का गठन 2014 में हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">तब से लेकर अब तक मिट्टी कला बोर्ड लगातार कुम्हार समाज के लोगों के उत्थान के लिए सरकार और प्रशासन के बीच काम कर रहा है। मौजूदा समय में कुम्हार समाज की सबसे बडी समस्या मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए मिट्टी की उपलब्धता है। उन्होने कहा कि उनका लगातार प्रयास रहता है कि इस समस्या को सरकार के माध्यम से जल्द से जल्द पूरा करवाया जाए ताकि कुम्हार समाज के समाने आ रही बेरोजगारी की समस्यों को कम किया जा सके और नई पीढ़ी के युवाओं को मिट्टी के बर्तनों के साथ-साथ मिट्टी से बनी नायाब और बहुमूल्य आकृतियां बनाने के लिए प्रेरित किया जाए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jun 2018 09:20:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>ऐ मेरे वतन के लोगो&amp;#8230; जरा याद करो कुर्बानी</title>
                                    <description><![CDATA[आजादी की लड़ाई में त्याग और बलिदान की भावना से शिरकत करने वाले ऐसे कितने ही वीर-जवान हुए हैं, जिन्हें देश ने भूलने में जरा-सा समय नहीं लगाया। जंग-ए-आजादी के कुछ शहीदों को हम भले ही याद करते रहे हों, लेकिन ऐसे कितने ही सेनानी हैं, जिन्हें न तो याद करते है और न ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/article-on-freedom-fight/article-3524"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/vatan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजादी की लड़ाई में त्याग और बलिदान की भावना से शिरकत करने वाले ऐसे कितने ही वीर-जवान हुए हैं, जिन्हें देश ने भूलने में जरा-सा समय नहीं लगाया। जंग-ए-आजादी के कुछ शहीदों को हम भले ही याद करते रहे हों, लेकिन ऐसे कितने ही सेनानी हैं, जिन्हें न तो याद करते है और न ही सम्मान। भले ही उन्होंने किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा ना लिया हो, लेकिन एक देश के रूप में हमारी जिम्मेदारी से हमें बरी तो नहीं किया जा सकता। हाशिये का जीवन जीते हुए वे हमसे विदा हो गए। लेकिन आजादी के रूप में जो सौगात उन्होंने अपना सब कुछ न्यौछावर करके हमें दी, उसका कुछ तो देय बनता ही है। जिन सेनानियों के योगदान को हमने भुलाया है, उनमें महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का नाम भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बटुकेश्वर का जन्म 18 नवंबर 1910 में गांव ओएरी, जिला बर्दमान (बंगाल) में हुआ था। उनकी स्नातक स्तरीय शिक्षा पी.पी.एन. कॉलेज कानपुर में हुई। 1924 में कानपुर में उनकी भगत सिंह से भेंट हुई। इसके बाद उन्होंने हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के लिए कानपुर में कार्य करना शुरू कर दिया। उन्होंने बम बनाना भी सीखा। 8 अप्रैल, 1929 को केन्द्रीय असेंबली नई दिल्ली में पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिसप्यूट बिल पेश होने के दौरान भगत सिंह और बटुकेश्वर ने बम फेंक कर ब्रिटिश तानाशाही का विरोध किया। बम का उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं, बल्कि गूंगी-बहरी सरकार तक देश की जनता की आवाज पहुंचाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">भगत सिंह के साथ वहां पर बटुकेश्वर ने नारा लगाया था-इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद का नाश हो, दुनिया के मजदूरों एक हो। उन्होंने वहां से भागने की बजाय गिरफ्तार होना बेहतर समझा, ताकि अदालत में अपने बयान के माध्यम से अपनी आवाज को बुलंद किया जा सके। असेंबली बम कांड के बाद अदालत से बटुकेश्वर को काला पानी की सजा मिली। इस सजा के लिए उन्हें अंडमान द्वीप समूह (बंगाल की खाड़ी) भेज दिया गया। जेल में ही उन्होंने 1933 और 1937 में भूख हड़ताल की। 1937 में उन्हें पटना जेल में लाया गया और 1938 में उन्हें रिहा कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन को देखते हुए दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। फिर 1945 में उन्हें रिहा किया गया। आजादी के बाद नवम्बर 1947 में अंजली दत्त से शादी करने के बाद वे पटना में रहने लगे। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित अनिल वर्मा की किताब -बटुकेश्वर दत्त, भगत सिंह के सहयोगी से खुलासा हुआ है कि देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन के 15 वर्ष जेल में बिताने वाले क्रांतिकारी का जीवन स्वतंत्रता के बाद भी पीड़Þाओं और संघर्षों से भरा रहा। उन्हें वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें आजाद भारत में रोजगार नहीं मिला, जिसके लिए वह पटना की सड़कों की खाक छानते रहे। बाद में उन्होंने बिस्कुट और डबलरोटी का एक छोटा-सा कारखाना खोला। भारी नुकसान के कारण कारखाने को भी बंद करना पड़ा। कुछ समय तक टूरिस्ट एजेंट एवं बस परिवहन का काम भी किया, परंतु एक के बाद एक कामों में असफलता ही उनके हाथ लगी। एक बार पटना में बसों के लिए परमिट मिल रहे थे तो इसके लिए बटुकेश्वर दत्त ने भी आवेदन किया। परमिट के लिए जब पटना के कमिश्नर के सामने पेशी हुई तो कमिश्नर ने उनसे स्वतंत्रता सेनानी होने का प्रमाण पत्र लाने को कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बाद में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को जब यह बात पता चली तो कमिश्नर ने बटुकेश्वर जी से माफी मांगी। बटुकेश्वर का बस इतना ही सम्मान हुआ कि उन्हें एक बार कुछ समय के लिए विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया। 20 जुलाई, 1965 में दिल्ली के अस्पताल में उनका देहांत हो गया था। उनकी इच्छा के अनुसार मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार फिरोजपुर में उसी जगह किया जाए जहां पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधि बनी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक अरुण कुमार कैहरबा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Nov 2017 04:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंगी विधवाओं को जमीन व नकद राशि देने पर लगी मोहर</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सैनिकों की कुशलक्षेम जानने के लिए निजी तौर पर पत्र लिख रहे हैं कैप्टन चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जंगी विधवाओं की मांग को स्वीकार करते जमीन की जगह पर नकद राशि देने की मंजूरी दे दी है। इस नीति में किया गया बदलाव 1962 की भारत-चीन जंग और 1965 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/land-and-cash-approval-for-widows-of-martyrs/article-2422"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/captain1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पूर्व सैनिकों की कुशलक्षेम जानने के लिए निजी तौर पर पत्र लिख रहे हैं कैप्टन</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जंगी विधवाओं की मांग को स्वीकार करते जमीन की जगह पर नकद राशि देने की मंजूरी दे दी है। इस नीति में किया गया बदलाव 1962 की भारत-चीन जंग और 1965 की भारत-पाक जंग के शहीदों की विधवाओं और उनके आश्रितोंं और पूरी तरह नाकारा हो चुके सैनिकों के अलावा 1971 की भारत-पाक जंग की विधवाओं पर लागू होने योग्य होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक प्रवक्ता ने बताया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने व्यक्तिगत योग्यता मुताबिक एक एकड़ जमीन के एवज में पांच लाख रुपए और 10 एकड़ के लिए अधिक से अधिक 50 लाख रुपए की राशि देने के लिए हरी झंडी दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वचनबद्धता दोहराई</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने सैनिक कल्याण विभाग को जंगी विधवाओं को अति अपेक्षित राहत देने के लिए यह नकद राशि इनको शीघ्र अति शीघ्र बांटने के आदेश दिए हैं। कैप्टन ने जंगी विधवाओं और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए अपनी वचनबद्धता को दोहराया हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैप्टन हुए सक्रिय</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री द्वारा अर्ध-सरकारी पत्रों के द्वारा निजी स्तर पर भी राज्य में सभी जंगी विधवाएं और पूर्व सैनिकों के साथ संपर्क बनाना शुरू किया गया है। सत्ता की बागडोर संभालने वाले दिन से लेकर मुख्यमंत्री की तरफ से जंगी विधवाएं और पूर्व सैनिकों की कुशलता पूछने के लिए ऐसे पत्र लिखे जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2017 07:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैप्टन का माझा को तोहफा, बागवानी संस्था के लिए रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय सहायता से स्थापित संस्था के लिए जमीन देने की स्वीकृति अमृतसर के गांव धौलकलां में दस एकड़ जमीन होगी अलॉट चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने माझा को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की सहायता से स्थापित की जाने वाली बागवानी की उच्च दर्जे की पोस्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/captain-amarinder-gave-the-theoretical-clearance-of-allotting-ten-acres-of-land/article-2292"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/amrinder-singh-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">केन्द्रीय सहायता से स्थापित संस्था के लिए जमीन देने की स्वीकृति</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर के गांव धौलकलां में दस एकड़ जमीन होगी अलॉट</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने माझा को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की सहायता से स्थापित की जाने वाली बागवानी की उच्च दर्जे की पोस्ट ग्रेजुऐट संस्था के लिए अमृतसर जिले में गांव धौलकलां में दस एकड़ जमीन अलाट करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित संस्था के लिए जमीन की पहचान करने व अंतिम रूप देने के लिए कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में बागवानी विभाग की बैठक के बाद एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बागवानी की खोज के लिए और 100 एकड़ जमीन की पहचान पहले ही दिसंबर 2015 में अटारी में की जा चुकी है। अब अतिरिक्त जमीन की पहचान शैक्षणिक संस्था को विकसित करने के रूप में प्रयोग करने के लिए की गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फसल विभिन्नता को मिलेगा बढ़ावा</h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा पंजाब सरकार की सांझेदारी से कायम की जाने वाली यह संस्था फसली विभिंनता का उत्साहित करने में मददगार साबित होगी। जो कैप्टन अमरेन्द्र सिंह का मुख्य एजेंडा है और वह फसली विभिंनता को किसानों की आय बढ़ाने व राज्य के कृषि संकट के स्थाई हल के रूप में उत्साहित करने के लिए सरगर्मी से कार्य कर रहे है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आईसीएआर का सहयोग करने के निर्देश</h3>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने अतिरिक्त मुख्य सचिव बागवानी हिम्मत सिंह को आईसीएआर के अधिकारियों के साथ जमीन के बारे में जानकारी सांझी करने के निर्देश देते हुए जगह का निरीक्षण करने के लिए आईसीएआर की टीम को निमंत्रण देने के लिए भी कहा। उन्होंने डिप्टी कमीशनर अमृतसर को जमीन का कब्जा आईसीएआर को सौंपने के लिए आवश्यक रस्मों / स्वीकृतियां पूरी करने के लिए कहा ताकि इस प्रोजैक्ट को शीघ्र अति शीघ्र शुरू किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><strong>संस्था स्थापित करने की घोषणा केंन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेतली ने की थी</strong></p>
<ul>
<li>बागवानी विभाग ने बैठक में बताया कि पहचान की जमीन गुरूनानक देव विश्वविद्यालय और रामतीर्थ के बीच क्षेत्र में स्थित है।</li>
<li>गेहूं धान के चक्कर में फंसे और कर्जे में जकड़े किसानों के लिए राज्य सरकार द्वारा कृषि की वातावरण प्रणाली सजृना के उदेश्य के रूप में बागवानी सहित फसली विभिंनता को जोर शोर से अमल में लाया जा रहा है।</li>
</ul>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2017 07:49:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनाडा में दावानल से 14 हजार लोग बेघर</title>
                                    <description><![CDATA[93,900 एकड़ जमीन तबाह कैलगरी। कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया इलाके में दावानल (जंगल में आग) के कारण लगभग 14 हजार लोगों को अपने घरों को छोडना पड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में दावानल की दो सौ से ज्यादा घटनाएं हुई है जिसमें से दस रिहाइशी इलाके के पास है। आग के कारण 93,900 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/14000-people-homeless-in-canada-by-fire-in-forest/article-2228"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/caneda.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">93,900 एकड़ जमीन तबाह</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैलगरी।</strong> कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया इलाके में दावानल (जंगल में आग) के कारण लगभग 14 हजार लोगों को अपने घरों को छोडना पड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में दावानल की दो सौ से ज्यादा घटनाएं हुई है जिसमें से दस रिहाइशी इलाके के पास है। आग के कारण 93,900 एकड़ जमीन पूरी तरह तबाह हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे किसी के हताहत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन 14,000 लोगों को अपने घरों को छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ा है। जंगल में भीषण आग ने लकड़ी और खनन उद्योग के कार्यों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। आग की चपेट में आने से एक क्षेत्रीय बिजलीघर के उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 05:47:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जमीन पर गिरी हाईवोल्टेज तार, हादसे का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[लापरवाहीबिजली विभाग लोगों के स्वास्थ्य के प्रति नहीं गंभीर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाने के बावजूद भी संबंधित विभाग नहीं दे रहा ध्यान गुरदासपुर (सरबजीत)। इस शहर के कोठे भीमसेन में करीब डेढ़ माह पहले पोल गिरने के कारण जमीन पर पड़ी बिजली की हाई वोल्टेज तार न उठाए जाने के कारण बड़े हादसे को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/high-voltage-wire-on-the-land-danger-of-accident/article-1317"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/wire.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">लापरवाहीबिजली विभाग लोगों के स्वास्थ्य के प्रति नहीं गंभीर</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>उच्च अधिकारियों को अवगत करवाने के बावजूद भी संबंधित विभाग नहीं दे रहा ध्यान</strong></li>
</ul>
<p><strong>गुरदासपुर (सरबजीत)।</strong> इस शहर के कोठे भीमसेन में करीब डेढ़ माह पहले पोल गिरने के कारण जमीन पर पड़ी बिजली की हाई वोल्टेज तार न उठाए जाने के कारण बड़े हादसे को न्योता दे रही है। इस संबंधी स्थानीय लोगों की ओर से उच्च अधिकारियों को बार-बार अवगत करवाने के बावजूद भी बिजली कर्मचारियों की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। नीचे पड़ी इस तार के कारण मोहल्ले में पड़ते दो दर्जन के करीब घरों के लोग भय का साये में जीवन व्यतीत कर रहे हैं और बरसात आने पर लोग उस ओर जाने से डरते हैं।</p>
<h2><strong>संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के विरुद्ध लोगों में रोष</strong></h2>
<p>मोहल्ला निवासी और इंटरनेशनल मानवीय अधिकार कमीशन हलका दीनानगर के प्रधान रणजीत सिंह, कामरेड कुलदीप सिंह , कामरेड अजीत सिंह, बलजीत कौर, आशा रानी और अमृतपाल ने बताया कि करीब डेढ़ माह पहले आंधी के कारण बिजली का पोल नीचे आ गिरा था, जिसके कारण बिजली की हाई वोलटेज तार भी घरों के नजदीक जमीन पर आ गिरी थी। इस तार को उचित जगह पर बांधने के लिए कई दिनों तक बिजली कर्मियों को विनती की गई परंतु कोई नहीं पहुंचा।</p>
<h2><strong>डेढ़ माह पहले बिजली का पोल गिरने से नीचे आ गिरी थी तार</strong></h2>
<p>अंत मोहल्ला निवासियों ने तार का एक सिरा ख़ुद ही एक घर के साथ बांध दिया जबकि बाकी तार पिछले डेढ़ महीने से जेÞमीन पर पड़ी हादसे को न्योता दे रही है, जिसको बिजली कर्मचारी उठाने की कष्ट नहीं कर रहे। रणजीत सिंह ने बताया कि वह ख़ुद कई चक्कर बिजली कार्यालय के लगा चुके हैं परन्तु कहने के बावजूद भी कोई कर्मचारी नहीं आता। जिस कारण मोहल्ला निवासियों में बिजली विभाग के प्रति भारी रोष पाया जा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नुकसान के जिम्मेदार होंगे अधिकारी: क्षेत्रवासी</h2>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई जानी नुकसान हो गया तो इसके लिए पॉवरकाम सब डिविजÞन दीनानगर के एसडीओ व अन्य अधिकारी जिम्मेवार होंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">समस्या का जल्द होगा समाधान: एसडीओ</h2>
<p style="text-align:justify;">पॉवरकाम सब डिविजÞन दीनानगर के एसडीओ इन्द्रजीत सिंह चीमा ने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से छुट्टी पर थे जिस कारण मामला उनके ध्यान में नहीं है परन्तु वह जल्द ही इसका हल करवां देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jun 2017 00:08:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्वास्थ्य सेंटरों के लिए जमीन देगी पंचायतें</title>
                                    <description><![CDATA[प्रत्येक ब्लॉक में पौधे तैयार करने के लिए एक-एक नर्सरी बनाने का प्रयास किया: अध्यक्ष एडीसी ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक ली पटियाला (खुशवीर तूर)। जिला परिषद अधीन पटियाला के विभिन्न गांवों में प्राथमिक हैल्थ सैंटर अधीन चल रहे 73 स्वास्थ्य सब-सेंटरों को पंचायतों द्वारा जमीन देने की तैयारी शुरू कर दी गई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/panchayat-will-provide-land-for-health-centers/article-906"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/patiala-photo-08.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रत्येक ब्लॉक में पौधे तैयार करने के लिए एक-एक नर्सरी बनाने का प्रयास किया: अध्यक्ष</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>एडीसी ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक ली</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (खुशवीर तूर)।</strong> जिला परिषद अधीन पटियाला के विभिन्न गांवों में प्राथमिक हैल्थ सैंटर अधीन चल रहे 73 स्वास्थ्य सब-सेंटरों को पंचायतों द्वारा जमीन देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में जिला परिषद कंपलैक्स में स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के साथ मीटिंग की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला परिषद के अध्यक्ष जसपाल सिंह कल्याण व अतिरिक्त उपायुक्त विकास शौकत अहमद परे की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में चर्चा की गई जो सब सैंटर धर्मशाला, गुरुद्वारा, पंचायती कार्यालय, आंगनबाड़ी सेंटर या फिर अन्य गैर सरकारी जमीन में चल रहे हैं। उन 73 सेंटरों को 1 से 2 एकड़ जमीन दी जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">42 पंचायतों ने दी सहमति</h3>
<p style="text-align:justify;">कल्याण ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा सब-सेंटरों के लिए जमीन दान देने के लिए अपेक्षित कार्रवाई करनी बनती है ताकि इन सब सेंटरों के लिए नेशनल हैल्थ मिशन के अंतर्गत फंडज प्राप्त कर बिल्डिंग का निर्माण करवायाजा सके। मीटिंग में बताया कि अब तक 42 पंचायतों ने अपने तरफ से सहमति प्रकट कर दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नर्सरी बनाने के लिए जगह का चयन</h3>
<p style="text-align:justify;">चेयरमैन ने बताया कि 22 मार्च की मीटिंग में लिए गए फैसले अनुसार जिला परिषद ने प्रत्येक ब्लॉक में पौधे तैयार करने के लिए एक-एक नर्सरी बनाने का प्रयास कर लिया है। इस संबंध में ब्लॉक विकास व पंचायत अधिकारियों द्वारा एक-एक गांव में जगह का चयन कर लिया है और नर्सरी में पौधे तैयार किए जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पंचायती जमीन का चयन</h3>
<p style="text-align:justify;">यह काम मनरेगा स्कीम के अधीन किया जाना है। पौधे तैयार होने उपरांत स्कीम के अंतर्गत गांवों की खाली स्थानों पर लगाया जाएगा। इससे जहां मनरेगा स्कीम के अंतर्गत रोजगार मुहैया करवाया जा सकेगा। वहीं वातावरण में सुधार लाने में सहायक होगा। उन्होंने बताया कि एक नर्सरी के लिए 4 से 5 एकड़ पंचायती जमीन चुनी गई है, जहां पानी का प्रबंध पहले से ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">नर्सरी में वन विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से इस सीजन में पौधे तैयार किए जाएंगे। अगले सीजन में हर ब्लॉक में एक-एक लाख पौधा लगाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इस मौके जिला परिषद के सचिव चरनजोत सिंह वालिया, भूपेन्द्र सिंह, मैंबर जिला परिषद, बलविन्दर सिंह, सुखविन्दर सिंह, लाल सिंह, कर्म सिंह, सवरनजीत कौर उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 05:57:53 +0530</pubDate>
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