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                <title>Leprosy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Leprosy: जिले में कुष्ट रोग के सात मरीज, हर माह हो रही 10 हजार की स्क्रीनिंग</title>
                                    <description><![CDATA[जिला नागरिक अस्पताल में होता है मुफ्त इलाज कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Kaithal News: जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुष्ट रोगियों के लिए समय समय पर फ्री कैंप लगाकर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। पिछले महीने भी ये ये कैंप 15 दिनो तक चला था। जिले में इस समय 7 नये मरीज है। पैरा मेडिकल कर्मचारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/seven-leprosy-patients-in-kaithal-district/article-67924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/kaithal-news-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">जिला नागरिक अस्पताल में होता है मुफ्त इलाज</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)।</strong> Kaithal News: जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुष्ट रोगियों के लिए समय समय पर फ्री कैंप लगाकर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। पिछले महीने भी ये ये कैंप 15 दिनो तक चला था। जिले में इस समय 7 नये मरीज है। पैरा मेडिकल कर्मचारी अनिल ने बताया कि समय समय पर कुष्ठ रोगियों की पहचान को लेकर सर्वे होता रहता है। स्लम बस्तियों, ईट भट्ठे व झोपड़ियों में टीमें जाकर जाँच करती है। शहरो और गाँवों में 5-5 स्कूलो में जाकर भी जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि कैंप के जरिए लोगों तक चर्म व कुष्ट रोग के बारे में जानकारी दी जाती है। साथ ही रोगियों की जांच के बाद दवाई भी दी जाती है। Kaithal News</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं कैथल में सिरटा रोड पर कुष्ट आश्रम भी है जिसमे 50 कुष्ट रोगी रहते है जिनकी समय समय पर जाँच की जाती है और उनको वहां सभी प्रकार की सुविधाए दी जाती है। ज्यादातर मरीज बाहर के राज्य से ही होते है जिनमे यूपी बिहार शामिल है , हरियाणा के मरीज कम ही पाए जाते है। जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कुष्ठ रोगियों की पहचान को लेकर टीमे डोर टू डोर जाकर सर्वे करती है। एक टीम में हेल्थ वर्कर व आशा वर्कर शामिल होती। हर महीने करीब 10 हजार लोगो की स्क्रीनिंग की जाती है | शहरी क्षेत्र के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों का टीमें दौरा करती है। कैंप में लोगों को इन रोगों से होने वाले नुकसान व इनसे बचाव से संबंधित जानकारी भी दी जाती है। Kaithal News</p>
<p style="text-align:justify;">बीमारी से संबंधित लक्षण मिलने पर मरीज के सैंपल लेकर जिला नागरिक अस्पताल में भेजे दिए जाते है। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की पुष्टि होने पर डॉ मीनाक्षी द्वारा मरीज का इलाज किया जाता है। जिला नागरिक अस्पताल में यह इलाज फ्री है। महिला को दवाइयों की किट फ्री दी जाती है। जहाँ भी कोई रोगी मिलता है उसके आस पास के 300 घरो में जाँच की जाती है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग की पहचान व उपचार शीघ्र न हो तो यह स्थाई विकलांगता का कारण बन जाता है। Kaithal News</p>
<h3>बीमारी के लक्ष्ण</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अंगुलियों में कमजोरी</li>
<li style="text-align:justify;">आँख बंद करने में परेशानी</li>
<li style="text-align:justify;">पंजो में कमजोरी</li>
<li style="text-align:justify;">गर्दन के पास तंत्रिका में मोटापन</li>
<li style="text-align:justify;">दर्द रहित अल्सर</li>
<li style="text-align:justify;">नाक का दब जाना</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">कुष्ठ रोगियों की पहचान को लेकर एमपीएचडब्ल्यू आशा वर्करो की टीमे लगातार सर्वे करती रहती है। हर महीने करीब 10 हजार लोगो की स्क्रीनिंग की जाती है। सर्वे के दौरान रोग के लक्ष्ण व् इससे बचाव के बारे में जानकारी भी दी जाती है। रोगियों की जांच के बाद दवाइयां भी दी जाती है। कुष्ठ रोग एक सामान्य त्वचा रोग है। कुष्ठ रोग छूत की बीमारी नहीं है। मरीज से भेदभाव न करें।                                                      <strong>-डॉ. रेनू चावला सिविल सर्जन कैथल</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बिजली की पुरानी व कम लोड वाली तारों को भी बदला जाएगा: विज" href="http://10.0.0.122:1245/anil-vij-said-that-old-and-low-load-electricity-wires-will-also-be-replaced/">बिजली की पुरानी व कम लोड वाली तारों को भी बदला जाएगा: विज</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 19:47:02 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व के कुष्ठ रोग का सर्वाधिक बोझ भारत पर,कोविड के कारण कुष्ठ उन्मूलन में बाधा: विशेषज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[जालंधर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया भर में लगभग 208,000 लोग कुष्ठ से संक्रमित हैं, उनमें से ज्यादातर अफ्रीका और एशिया में हैं। यह एक पुरानी संक्रामक बीमारी है जो शरीर के चारों ओर हाथ, पैर और त्वचा घावों के साथ ही तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर देती है। राष्ट्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-has-the-highest-burden-of-leprosy-in-the-world/article-30393"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/who2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर।</strong> विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया भर में लगभग 208,000 लोग कुष्ठ से संक्रमित हैं, उनमें से ज्यादातर अफ्रीका और एशिया में हैं। यह एक पुरानी संक्रामक बीमारी है जो शरीर के चारों ओर हाथ, पैर और त्वचा घावों के साथ ही तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर देती है। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने विश्व कुष्ठ दिवस के अवसर पर बताया कि भारत में दुनिया के कुष्ठ रोग (नये मामलों का 57 प्रतिशत) का सबसे अधिक बोझ है और वर्तमान महामारी कोविड-19 रोग उन्मूलन हस्तक्षेपों में बाधा डाल रही है। डॉ पुरोहित ने बताया कि कोविड-19 महामारी के कारण कुष्ठ रोग के मामलों का पता लगाने और उपचार सहित उपाय बाधित हो गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर पांच से सात साल और शायद 20 साल तक, भारत को कुष्ठ मुक्त बनाने में समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग के कारण होने वाली विकलांगता के मामले भी देश में सबसे ज्यादा हैं। डॉ पुरोहित के अनुसार, एम लेप्राई नामक धीमी गति से बढ़ने वाला जीवाणु कुष्ठ रोग का कारण बनता है।“ यदि किसी व्यक्ति की जीवाणु के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कमजोर है या बिल्कुल नहीं होती है-एम लेप्री त्वचा, परिधीय नसों और कभी-कभी गहरे ऊतकों में फैल सकता है। ” डॉ पुरोहित ने खुलासा किया कि दुनिया भर में 95 प्रतिशत से अधिक लोग स्वाभाविक रूप से एम लेप्री से प्रतिरक्षित हैं, जिससे कुष्ठ रोग एक दुर्लभ बीमारी है। राष्ट्रीय एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के प्रधान अन्वेषक डॉ पुरोहित ने कहा कि कोविड के बीच इलाज कर रहे कुष्ठ रोगी अपने मूल स्थानों पर चले गए और प्रतिबंधों और लॉकडाउन के कारण इलाज बंद कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ अस्पतालों ने मामलों की वृद्धि के दौरान कोविड समर्पित वार्डों में परिवर्तित कर दिया, जिससे प्रबंधन में और बाधा उत्पन्न हुई। इसने घर-घर की सक्रिय खोज को भी प्रभावित किया क्योंकि नियंत्रण क्षेत्र और लोगों को घर से अलग रखा गया था। उन्होंने कुष्ठ नियंत्रण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए परिवार के सदस्यों, समाज और उनके अपने परिवार के सदस्यों के बीच संक्रमण के संचरण को रोकने के लिए कोविड स्थितियों के दौरान सक्रिय मामले की खोज पर स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के प्रशिक्षण, जागरुकता और बैठकों के लिए डिजिटल मीडिया के उपयोग और टेली-परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबरों के प्रसार की योजना बनाने का सुझाव दिया।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jan 2022 13:15:40 +0530</pubDate>
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