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                <title>Important - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>महंगाई पर नियंत्रण जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[यहां बात केवल सब्जियों की नहीं बल्कि संपूर्ण कृषि उत्पादों की है। यदि किसान से लेकर उपभोक्ता तक को मुख्य रखकर कृषि नीतियां नहीं बनाई जाएंगी, तब तक खुदरा वस्तुओं में महंगाई की मार से बचा नहीं जा सकता।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/inflation-control-is-important/article-12517"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/on-inflation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">थोक मूल्य सूचकांक दर तेजी से बढ़ रही है और इस माह 8 प्रतिशत दर को पार करने की संभावना है। नि:संदेह आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि चिंताजनक है और आम जनता के लिए बड़ी परेशानी है। प्याज की कीमतें 100 रुपए के करीब टिकी हुई हैं। आलू के भाव में 45 फीसदी महंगे होना भी महंगाई दर को शिखर पर पहुंचा रहा है। केंद्र सरकार लगातार दावा कर रही है कि सरकार महंगाई पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन महंगाई पर नियंत्रण दिख नहीं रहा। इस मामले का समाधान एक मिनट में होने वाला नहीं बल्कि नीतिगत मामला दरअसल कृषि नीतियों व व्यापारिक नीतियों के बीच तालमेल से ही सुलझता है जो नहीं दिख रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि प्रधान देश में कभी प्याज व आलू की भरमार होती है और कभी इनकी कीमतें आसमान को छू जाती हैं। किसान फसलों का वाजिब मूल्य प्राप्त करने के लिए सड़कों पर धरने दे रहा है और सरकारों को ज्ञापन दिए जाते हैं, लेकिन किसान से फसल खरीदने के बाद बिचौलिया उसी वस्तु को किसानों की मांग से कई गुणा ज्यादा कीमत पर खरीददार को बेच रहा है। पिछले दो दशकों से महंगाई की मार आवश्यक वस्तुओं पर ज्यादा पड़ रही है, जिसका सीधा सम्बन्ध कृषि के साथ है। किसानों से खरीदे जाने के बाद व्यापारिक व्यवस्था में वस्तु का भाव दस गुणा बढ़ जाता है, न किसान संतुष्ट होता है और न ही उपभोक्ता की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है। इस कमी को दूर करने के प्रयास केवल छापामारी तक सीमित रह जाते हैं। छापामारी की वास्तविकता भी कुछ और ही होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर राजनीति में भी प्याज जादूगरी का काम करता है जिसने कई बार राजनीतिक घमासान भी मचाया है। तकनीकी भाषा में प्याज प्रशासनिक कर्मियों की कमियां उजागर करने में सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। यहां बात केवल सब्जियों की नहीं बल्कि संपूर्ण कृषि उत्पादों की है। यदि किसान से लेकर उपभोक्ता तक को मुख्य रखकर कृषि नीतियां नहीं बनाई जाएंगी, तब तक खुदरा वस्तुओं में महंगाई की मार से बचा नहीं जा सकता। यह भी तथ्य है कि गेहूँ व धान की फसल खरीदना सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है, लेकिन किसानों को सब्जियों व अन्य फसलों की तरफ प्रोत्साहित करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल महाराष्ट के प्याज की कीमत से किसानों के लागत खर्च भी पूरे नहीं हुए थे अब किसानों से औने-पौने दाम पर ज्यादा खरीदकर महंगे भाव बेचा जा रहा है। किसान ठगा सा महसूस कर रहा है, ऐसे में किसान खेती करने की गलती क्यों करेंगे? कृषि नीतियां व व्यापार संबंधी नीतियों में सुधार किए बिना महंगाई से मुक्ति पाना संभव नहीं।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 20:24:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[12 जनवरी को रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत प्रदेश में होगी मैराथन | Youth power रोहतक (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जनवरी को पूरे हरियाणा में रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत मैराथन का आयोजन किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/youth-power-plays-an-important-role-in-nation-building-chief-minister/article-12055"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/youth-power.jpg" alt=""></a><br /><h2>12 जनवरी को रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत प्रदेश में होगी मैराथन | Youth power</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जनवरी को पूरे हरियाणा में रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत मैराथन का आयोजन किया जाएगा। एक साथ युवा शक्ति (Youth power) नए संकल्प व सकारात्मक ऊर्जा के साथ मैराथन में भागीदार बनेगी। साथ ही राष्ट्र हित की दिशा में बेहतर करने का संकल्प लेगी। मुख्यमंत्री शनिवार को बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 51वें प्रांत अधिवेशन में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की अहम भूमिका है।</p>
<h3>शिक्षा व संस्कारों के आधार पर ही श्रेष्ठ नागरिक बनते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद युवाओं में संस्कारों का समावेश करते हुए अपना दायित्व बखूबी निभा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व संस्कारों के आधार पर ही श्रेष्ठ नागरिक बनते हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थाएं जहां युवा वर्ग को शैक्षणिक माहौल प्रदान कर रहे हैं। वहीं एबीवीपी जैसे सामाजिक संगठन संस्कार देने में अग्रणी हैं। मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरकार की ओर से जल्द ही वोलेंटिरिजम कार्यक्रम शुरू करने की बात भी कही।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये भी बोले सीएम</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>युवा वर्ग के साथ हर वर्ग सामाजिक जिम्मेवारी स्वयंसेवक के रूप में निभाए </strong></li>
<li><strong>बिना लोभ, लालच के कोई भी व्यक्ति राष्ट्र हित की योजनाओं में सुझाव दे। </strong></li>
<li><strong> बेटियों के हितों को सुरक्षित व उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए उठाए जा रहे कदम </strong></li>
<li><strong>सभी छात्र संगठन यदि अनुशासनात्मक स्वरूप के साथ आगे बढ़ें</strong></li>
<li><strong> एबीवीपी जैसे सामाजिक संगठन संस्कार देने में अग्रणी</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">जोश के साथ होश भी रखें युवा : बालक नाथ</h3>
<p style="text-align:justify;">बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं अलवर से सांसद महंत बाबा बालक नाथ ने भी युवाओं को पूरे जोश के साथ होश रखते हुए सामाजिक रूप से अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया। एबीवीपी की राष्ट्र महामंत्री निधि त्रिपाठी ने हरियाणा सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की। इस अवसर पर सांसद डॉ. अरविंद शर्मा, मेयर मनमोहन गोयल, सांसद संजय भाटिया, संगठन मंत्री सुरेश भट्ट, भूपेंद्र मलिक, राजेंद्र धीमान, सुमित जागलान, डा.लखविंद लोहानी, सीताराम व्यास, एलपीएस बोसार्ड के चेयरमैन राजेश जैन, विजय, डॉ. लाकेश शेखावत, राजेश गहलावत, डा.रीटा शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 07:00:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक 3 जनवरी को</title>
                                    <description><![CDATA[कॉमन मिनीमम प्रोग्राम पर हो सकती है चर्चा | Haryana Cabinet चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार ने आगामी 3 जनवरी को कैबिनेट (Haryana Cabinet) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस संबंध में मंत्री परिषद की सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने एक पत्र जारी किया है। सूत्रों की मानें तो इस बैठक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/important-meeting-of-haryana-cabinet-on-3-january/article-12048"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/haryana-cabinet.jpg" alt=""></a><br /><h2>कॉमन मिनीमम प्रोग्राम पर हो सकती है चर्चा | Haryana Cabinet</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)।</strong> हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार ने आगामी 3 जनवरी को कैबिनेट <strong>(Haryana Cabinet)</strong> की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस संबंध में मंत्री परिषद की सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने एक पत्र जारी किया है। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में भाजपा और जजपा के बीच कॉमन मिनीमम प्रोगाम पर चर्चा हो सकती है। वहीं कई महत्वपूर्ण विभागों को लेकर अहम फैसला लिया जा सकता है। बैठक में जन नायक जनता पार्टी में मचे घमासान पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर आमजन को जागरूक करने पर भी मंथन की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा विपक्ष की घेरेबंदी को लेकर भी व्यूह रचना पर गौर हो सकता है।</p>
<h3>मुख्यमंत्री के समक्ष चुनौतियां</h3>
<p>पहले के मुकाबले मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने इस कार्यकाल में कई बड़ी चुनौतियां हैं। एक तरफ तो गठबंधन सरकार के चलते उन्हें मंत्रियों और विधायकों को खुश रखना होगा। दूसरी ओर जनता की उम्मीदों पर भी खरा उतरना है। अब ऐसे हालात में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने हैं। जिनको लेकर गठबंधन दल के साथ सहमति बनानी होगी। वहीं महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से भी पारा पाना होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये है जजपा का विवाद</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>नारनौंद से जजपा विधायक रामकुमार गौतम के तेवर हैं तीख </strong></li>
<li><strong>उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल </strong></li>
<li><strong>जजपा में आना ही बता दिया सबसे बड़ी भूल </strong></li>
<li><strong>विधायकों को धोखा देने का लगाया आरोप</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार पर हुड्डा भी साध चुके हैं निशाना</h3>
<p style="text-align:justify;">ढीली कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भी भाजपा-जजपा सरकार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार बनने के इतने दिनों बाद तक कॉमन मिनीमम प्रोग्राम तक पर निर्णय नहीं हो पाया है। अब आम आदमी खुद ही अंदाजा लगा सकता है कि आगे इनका कार्य कैसा रहेगा। उन्होंने सरकार पर किमी. स्कीम में अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के भी आरोप जड़े थे।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/important-meeting-of-haryana-cabinet-on-3-january/article-12048</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 06:06:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>चीन से सटी सीमा पर 44 सड़कें बनाएगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(एजेंसी)। भारत सरकार चीन से सटी सीमा के पास 44 सड़कें बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा सरकार पाकिस्तान से लगे पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 2100 किमी लंबे मुख्य और संपर्क मार्ग का भी निर्माण करेगी। ये सड़कें भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम होंगी। सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/govt-44-strategically-important-roads-along-india-china-border/article-7344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/china-india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> भारत सरकार चीन से सटी सीमा के पास 44 सड़कें बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा सरकार पाकिस्तान से लगे पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 2100 किमी लंबे मुख्य और संपर्क मार्ग का भी निर्माण करेगी। ये सड़कें भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम होंगी।</p>
<h2>सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट में सड़कें बनाए जाने की बात</h2>
<p>केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन सीमा पर रणनीतिक तौर पर अहम 44 सड़कों को बनाने के लिए कहा गया है, जिससे संघर्ष की स्थिति में सेना की तुरंत तैनाती हो सके। भारत और चीन के बीच करीब 4,000 किमी की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के इलाकों से गुजरती है। सीपीडब्ल्यूडी की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब चीन भारत से सटे इलाकों में विभिन्न परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा।</p>
<h2>4 सड़कों को बनाने में करीब 21 हजार करोड़ की लागत आएगी</h2>
<p>पिछले साल डोकलाम में सड़क निर्माण को लेकर भारत और चीन के सैनिक आमने सामने आ गए थे। 73 दिनों चला यह विवाद 28 अगस्त को समझौते के बाद खत्म हुआ था। इसके बाद चीन ने यहां सड़क निर्माण का काम रोक दिया था।रिपोर्ट के मुताबिक, 44 सड़कों को बनाने में करीब 21 हजार करोड़ की लागत आएगी। ये सड़कें पांच राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में बनेंगी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीएसएस) से मंजूरी मिलना बाकी है।</p>
<p>सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान और पंजाब में 5,400 करोड़ की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। राजस्थान में 945 किलोमीटर मुख्य और 533 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे। जबकि पंजाब में 482 किलोमीटर मुख्य और 219 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jan 2019 01:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सीबीआइ घमासान: वर्मा ने सील बंद लिफाफे में SC को सौंपा अपना जवाब, आज होगी अहम सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली,(एजेंसी)। भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की ओर से दायर रिपोर्ट पर सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सील बंद लिफाफे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया। इससे पहले सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ और वक्त की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/alok-verma-submitted-his-reply-to-the-sc-today-will-be-the-important-hearing/article-6663"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/alok-verma.jpg" alt=""></a><br /><p>न<strong>ई दिल्ली,(एजेंसी)।</strong> भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की ओर से दायर रिपोर्ट पर सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सील बंद लिफाफे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया। इससे पहले सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ और वक्त की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए वर्मा को आज ही जवाब देने को कहा था। बता दें इस मामले पर आज अहम सुनवाई होनी है।</p>
<h2>सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को सीवीसी से फिलहाल पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिली</h2>
<p>गौरतलब है कि इससे पहले हुई सुनवाई में सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को सीवीसी से फिलहाल पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिली है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने वर्मा पर लगे आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जांच रिपोर्ट में कुछ पहलुओं पर आगे जांच की जरूरत बताई है, जिसके लिए और समय की मांग की है।</p>
<p>सीवीसी ने रिपोर्ट में कुछ पहलुओं पर सराहना और कुछ की निंदा की है। जिसके बाद कोर्ट ने सीवीसी रिपोर्ट की प्रति आलोक वर्मा को देने का आदेश दिया था और उनसे रिपोर्ट पर सीलबंद लिफाफे में सोमवार दोपहर तक जवाब मांगा था। अब वर्मा का कहना है कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए और समय चाहिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Nov 2018 08:33:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/knowledge-and-ill-development-with-literacy-are-also-important/article-5794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/artical-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर में मनाया जाएगा। साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी है। ज्ञान एवं कौशल विकास के लिए साक्षर बनकर आगे बढ़ा जा सकता है। साक्षर, नवसाक्षर व असाक्षरों को साक्षर करने के बाद उन्हें कौशल उन्नयन से जोड़ा जाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने की महती आवश्यकता है। शिक्षा चाहे जैसी भी हो वह अपने और परिवार के प्रति काम आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कौशल उन्नयन के क्षेत्र में और भी अधिक काम करने की आवश्यकता है कौशल प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा जाना नितांत आवश्यक है। साक्षरता और कौशल विकास का चोली दामन का साथ है। साक्षरता की सफलता रोजगार से जुड़ी है। हम साक्षर व्यक्ति को रोजी रोटी की सुविधा सुलभ करा कर देश से निरक्षरता के अँधेरे को भगा सकते हंै। हालाँकि केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न स्तरों पर कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित कर रही हैं मगर जब तक ऐसे व्यक्ति अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे तब तक साक्षरता अभियान को पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">
साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है। यह लोगों में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है। इसका सामाजिक एवं आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। साक्षरता का कौशल मानव में आत्मविश्वास का संचार करता हैै। गरीबी उन्मूलन में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। महिलाओं एवं पुरुषों के बीच समानता के लिए जरूरी है कि महिलाएं भी साक्षर बनें।<br />
जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्ति, समुदाय तथा समाज के हर वर्ग को साक्षरता का महत्व बताकर उन्हें साक्षर करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">
साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर है। साक्षरता का आधार शिक्षा अर्जित करना होता है और शिक्षा का आधार ज्ञान। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी शिक्षित हो सकता है। साक्षरता एक मानव अधिकार है, सशक्तिकरण का मार्ग है और समाज तथा व्यक्ति के विकास का साधन है। लोकतंत्र की सुनिश्चितता के लिए साक्षरता आवश्यक है। वर्ष 2010 में जब बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का कानून 2009 लागू हुआ, यह देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। सभी के लिए प्रारंभिक शिक्षा की दिशा में देश के प्रयासों को इस कानून के लागू होने से जबरदस्त बढ़ावा मिला। आज शिक्षा का अर्थ केवल साक्षरता से लिया जाता है, आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी है साक्षरता नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षित व्यक्ति अपनी आय का साधन बढ़ा सकता है और आये हुए धन को सहेज कर अमीर भी बन सकता है परन्तु साक्षर व्यक्ति ये काम नहीं कर सकता। यहाँ शिक्षा और साक्षरता का अंतर समझना बहुत जरुरी है. शिक्षा का अर्थ है किसी उपयोगी कल को सीखना जबकि साक्षरता केवल मात्र अक्षर ज्ञान है।<br />
साक्षरता दक्षता और व्यवहार वे शक्तिशाली साधन है, जो स्वास्थ्य की बेहतर संभावनाएँ निर्मित करने के लिए महिलाओं और पुरुषों में आवश्यक क्षमताओं तथा आत्मविश्वास को विकसित करती है। साक्षरता और स्वास्थ्य में भी गहरा संबंध है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाकर शिशु और मातृ मृत्युदर में कमी लाना, लोगों को जनसंख्या विस्फोट के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना इसके उद्देश्यों में शामिल है। साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ने-लिखने और हिसाब-किताब करने की योग्यता प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि हमें नवसाक्षरों में नैतिक मूल्यों के प्रति आदरभाव रखने की भावना पैदा करना होगी।</p>
<p style="text-align:right;">बाल मुकंद ओझा</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/knowledge-and-ill-development-with-literacy-are-also-important/article-5794</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 08:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा से बड़ी हुई पद की लालसा</title>
                                    <description><![CDATA[कभी समय था जब पार्टी की ओर से गुरमुख सिंह मुसाफिर को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया लेकिन मुसाफिर यह पद लेने से पीछे हट गए। बड़ी मुश्किल से उनके साथी नेताओं ने उन्हें मनाया। अब हालात यह हैं कि पद के लिए पार्टी ही तोड़ दी जाती है। पद व राजनीति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-desire-for-position-became-greater-than-service/article-5149"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/chair-is-more-important-then-service-for-govt-employee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी समय था जब पार्टी की ओर से गुरमुख सिंह मुसाफिर को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया लेकिन मुसाफिर यह पद लेने से पीछे हट गए। बड़ी मुश्किल से उनके साथी नेताओं ने उन्हें मनाया। अब हालात यह हैं कि पद के लिए पार्टी ही तोड़ दी जाती है। पद व राजनीति एक दूसरे में इतने घुलमिल गए हैं कि पद शब्द एक तरफ कर दें तो राजनीति शब्द का कोई अर्थ नहीं रह जाता। ताजा मिसाल आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैहरा की है। खैहरा ने बठिंडा के अपने 7 विधायकों के सहयोग से कनवैंशन कर ली हालांकि उनके साथ दो अन्य विधायक तो इस कनवैंशन में नहीं आए। लोगों को एकत्रित करने के लिए जोर लगाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे वह किसी लोक मामले में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हों। कनवैंशन का बड़ा मुद्दा यह था कि खैहरा को उनसे छीना गया विपक्ष के नेता का पद वापिस किया जाए। कनवैंशन में पहुंचे विधायकों ने भी मांग पर जोर दिया। इस घटना से शुरु से ही विवादों में उलझी आम आदमी पार्टी और भी घिर गई है। पार्टी के अंदर लोकतंत्र नहीं है क्योंकि नेता विपक्ष को बदलने के लिए विधायकों की बैंठकें नहीं हुई, फिर नेताओं को अनुशासन पसंद नहीं क्यों वह मीडिया में जाने की बजाए पार्टी मंच पर अपनी बात नहीं रख सके। खास पदों की दौड़ में आदर्श भटकते नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जनता के हितों की बात करने की बजाए सभी राज्यों की लीडरशिप को पद की लालसा ने अपनी चपेट में ले लिया है। कांग्रेस व अकाली-भाजपा दलों को ‘आप’ की दुर्दशा फायदेमंद साबित होगी। इस पार्टी के राष्टÑीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनते समय लोगों के सामने आदर्श रखा था कि वह सरकारी बंगला नहीं लेंगे। खैहरा की ओर से सरकारी कोेठी खाली करवाने के लिए कु छ दिनों की मोहलत मांगी गई थी। पंंजाब को इस समय जरूरत है सार्वजनिक मुद्दों की आवाज उठाने वाले नेताओं व पार्टियों की।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू हैं जो भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए अपनी ही पार्टी के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इस तरह भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सिद्धू की लड़ाई सरकार के साथ हो रही है। नवजोत सिद्धू के परिवार ने विरोध होने के कारण सरकार में दो अहम पद भी ठुÞकरा दिए। पदों के त्याग के लिए सिद्धू पूरे पंजाब के लिए मिसाल बन चुके हैं। राजनीति को सेवा मानना बड़ी बात है जो कहीं-कहीं पूरी होती भी दिख रही है। सिद्धू व खैहरा की मिसाल राजनीति के दो पहलुओं को प्रदर्शित करती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Aug 2018 10:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह अध्यात्म-जगत की सबसे बड़ी घटना के रूप में जाना जाता है। पश्चिमी देशों में गुरु का कोई महत्व नहीं है, वहां विज्ञान और विज्ञापन का महत्व है परन्तु भारत में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। यहां की माटी एवं जनजीवन में गुरु को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/important-role-of-guru-in-indian-culture/article-5024"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/guru-punima.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह अध्यात्म-जगत की सबसे बड़ी घटना के रूप में जाना जाता है। पश्चिमी देशों में गुरु का कोई महत्व नहीं है, वहां विज्ञान और विज्ञापन का महत्व है परन्तु भारत में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। यहां की माटी एवं जनजीवन में गुरु को ईश्वरतुल्य माना गया है, क्योंकि गुरु न हो तो ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग कौन दिखायेगा? गुरु ही शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और वे ही जीवन को ऊर्जामय बनाते हैं। जीवन विकास के लिए भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरु की सन्निधि, प्रवचन, आशीर्वाद और अनुग्रह जिसे भी भाग्य से मिल जाए उसका तो जीवन कृतार्थता से भर उठता है। क्योंकि गुरु बिना न आत्म-दर्शन होता और न परमात्म-दर्शन। इन्हीं की प्रेरणा से आत्मा चैतन्यमय बनती है। गुरु भवसागर पार पाने में नाविक का दायित्व निभाते हैं। वे हितचिंतक, मार्गदर्शक, विकास प्रेरक एवं विघ्नविनाशक होते हैं। उनका जीवन शिष्य के लिये आदर्श बनता है। उनकी सीख जीवन का उद्देश्य बनती है। अनुभवी आचार्यों ने भी गुरु की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए लिखा है- गुरु यानी वह अर्हता जो अंधकार में दीप, समुद्र में द्वीप, मरुस्थल में वृक्ष और हिमखण्डों के बीच अग्नि की उपमा को सार्थकता प्रदान कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
आषाढ़ की समाप्ति और श्रावण के आरंभ की संधि को आषाढ़ी पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा कहते हैं। गुरु पूर्णिमा आत्म-बोध की प्रेरणा का शुभ त्योहार है। यह त्योहार गुरु-शिष्य के आत्मीय संबंधों को सचेतन व्याख्या देता है। काव्यात्मक भाषा में कहा गया है- गुरु पूर्णिमा के चांद जैसा और शिष्य आषाढ़ी बादल जैसा। गुरु के पास चांद की तरह जीए गये अनुभवों का अक्षय कोष होता है। इसीलिये इस दिन गुरु की पूजा की जाती है इसलिए इसे ‘गुरु पूजा दिवस’ भी कहा जाता है। प्राचीन काल में विद्यार्थियों से शुल्क नहीं वसूला जाता था अत: वे साल में एक दिन गुरु की पूजा करके अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें दक्षिणा देते थे। महाभारत काल से पहले यह प्रथा प्रचलित थी लेकिन धीरे-धीरे गुरु-शिष्य संबंधों में बदलाव आ गया। कहा गया है कि अगर आप गुरु की ओर एक कदम बढ़ाते हैं तो गुरु आपकी ओर सौ कदम बढ़ाते हैं। कदम आपको ही उठाना होगा, क्यों यह कदम आपके जीवन को पूर्णता प्रदत्त करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत ऊंचा और आदर का स्थान है। माता-पिता के समान गुरु का भी बहुत आदर रहा है और वे शुरू से ही पूज्य समझे जाते रहे हैं। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश के समान समझ कर सम्मान करने की पद्धति पुरातन है। ‘आचार्य देवोभव:’ का स्पष्ट अनुदेश भारत की पुनीत परंपरा है और वेद आदि ग्रंथों का अनुपम आदेश है। ऐसी मान्यता है कि हरिशयनी एकादशी के बाद सभी देवी-देवता चार मास के लिए सो जाते हैं। इसलिए हरिशयनी एकादशी के बाद पथ प्रदर्शक गुरु की शरण में जाना आवश्यक हो जाता है। परमात्मा की ओर संकेत करने वाले गुरु ही होते हंै। गुरु एक तरह का बांध है जो परमात्मा और संसार के बीच और शिष्य और भगवान के बीच सेतु का काम करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन गुरुओं की छत्रछाया में से निकलने वाले कपिल, कणाद, गौतम, पाणिनी आदि अपने विद्या वैभव के लिए आज भी संसार में प्रसिद्ध हंै। गुरुओं के शांत पवित्र आश्रम में बैठकर अध्ययन करने वाले शिष्यों की बुद्धि भी तद्नुकूल उज्ज्वल और उदात्त हुआ करती थी। सादा जीवन, उच्च विचार गुरुजनों का मूल मंत्र था। तप और त्याग ही उनका पवित्र ध्येय था। लोकहित के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देना और शिक्षा ही उनका जीवन आदर्श हुआ करता था। प्राचीन काल में गुरु ही शिष्य को सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों तरह का ज्ञान देते थे लेकिन आज वक्त बदल गया है। आजकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा देने वाले शिक्षक को और लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले को गुरु कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक कई हो सकते हैं लेकिन गुरु एक ही होते हैं। हमारे धर्मग्रंथों में गुरु शब्द की व्याख्या करते हुए लिखा गया है कि जो शिष्य के कानों में ज्ञान रूपी अमृत का सींचन करे और धर्म का रहस्योद्घाटन करे, वही गुरु है। यह जरूरी नहीं है कि हम किसी व्यक्ति को ही अपना गुरु बनाएं। योग दर्शन नामक पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण को जगतगुरु कहा गया है क्योंकि महाभारत के युद्ध के दौरान उन्होंने अर्जुन को कर्मयोग का उपदेश दिया था। माता-पिता केवल हमारे शरीर की उत्पत्ति के कारण हंै लेकिन हमारे जीवन को सुसंस्कृत करके उसे सर्वांग सुंदर बनाने का कार्य गुरु या आचार्य का ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
पहले गुरु उसे कहते थे जो विद्यार्थी को विद्या और अविद्या अर्थात आत्मज्ञान और सांसारिक ज्ञान दोनों का बोध कराते थे लेकिन बाद में आत्मज्ञान के लिए गुरु और सांसारिक ज्ञान के लिए आचार्य-ये दो पद अलग-अलग हो गए। भारत के महान दार्शनिक ओशो ने जब यह कहा कि हमारी शिक्षण संस्थाएं अविद्या का प्रचार कर रही हैं तो लोगों ने आपत्ति की लेकिन वे बात सही कह रहे थे। आज हमारे विद्यालयों में ज्ञान का नहीं बल्कि सूचनाओं का हस्तांतरण हो रहा है। विद्यार्थियों का ज्ञान से अब कोई वास्ता नहीं रहा इसलिए आज हमारे पास डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, न्यायाधीश, वैज्ञानिक और वास्तुकारों की तो एक बड़ी भीड़ जमा है लेकिन ज्ञान के अभाव में चरित्र और चरित्र के बिना सुंदर समाज की कल्पना दिवास्वप्न बन कर रह गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">
शिक्षा का संबंध यदि चरित्र के साथ न रहा तो उसका परिणाम यही होगा। परंतु इस मूल प्रश्न की ओर कौन ध्यान दे? सत्ताधारी लोग अपने पद को बनाये रखने के लिए शिक्षा का संबंध चरित्र की बजाय रोजगार से जोड़ना चाहते हैं। जो लोग शिक्षा का संबंध रोजगार से जोड़ने की वकालत करते हैं वे वस्तुत: शताब्दियों तक अपने लिए राज करने की भूमिका तैयार कर रहे हैं और उनके तर्क इतने आकट्य हैं कि सामान्य व्यक्ति को महसूस होता है कि समाज के सबसे अधिक हिंतचिंतक यही लोग हैं। यही कारण है कि देश में आज जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है, अनैतिकता और अराजकता फैलती जा रही है, हिंसा और आतंक बढ़ता जा रहा है, भ्रष्टाचार और अपराध जीवनशैली बन गयी है। इसका मूल कारण गुरु को नकारकर, चरित्र को नकारकर हमने केवल भौतिकता को जीवन का आधार बना लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
पिछले सात दशक से हम उल्टी गिनती गिन रहे हैं। उसी का परिणाम है कि न पानी की समस्या सुलझी न रोजी-रोटी की। न उन्नत चिकित्सा सुलभ हो पा रही है न शिक्षा को उन्नत बना पाये है। चंद लोगों की भव्य अट्टालिकाएं अवश्य खड़ी हो गई हैं। यदि हमें भारत में लोकतांत्रिक पद्धति को सफल बनाना है तो चरित्र उसकी पहली शर्त है। महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हम हिंदुस्तान में कौन-सी पद्धति लागू करें बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम चरित्रवान व्यक्ति पैदा करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
पाठ्य पुस्तकों में कुछ नीतिपरक श्लोकों को जोड़ने अथवा बच्चों को तोते की तरह गायत्री मंत्र रटाने या अंग्रेजी शैली में योग को ‘योगा’ करने से न तो चरित्र निर्माण होता है और न भावी पीढ़ी में ज्ञान का हस्तांतरण ही संभव है। ज्ञान तो गुरु से ही प्राप्त हो सकता है लेकिन गुरु मिलें कहां? अब तो ट्यूटर हैं, टीचर हैं, प्रोफेसर हैं पर गुरु नदारद हैं। गुरु के प्रति अविचल आस्था ही वह द्वार है जिससे ज्ञान का हस्तांतरण संभव है। हमें इन तथ्यों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सच है कि आज हम जिस सामाजिक और आर्थिक परिवेश में सांस ले रहे हैं वहां इन पुरानी व्यवस्थाओं की चर्चा निरर्थक है परंतु इनके सार्थक और शाश्वत अंशों को तो हम ग्रहण कर ही सकते हैं।सिर्फ धन कमाने या रोजी-रोटी चला लेने से मनुष्य जीवन में सुखी नहीं रह सकता। यह सुखी रहने का बाहरी भौतिक उपाय है।</p>
<p><span style="text-align:justify;">अपनी आत्मा को जानना और भगवान को पाना ही सच्चा सुख है। यद्यपि गुरुओं के महागुरु भगवान स्वयं प्रत्येक व्यक्ति के हृदय-गुहा में विराजमान हैं तथापि बिना किसी बाहर के योग्य गुरु की मदद के हम अपनी आत्मा को नहीं जान सकते। यह आध्यात्मिक गुरु ही अन्तरात्मा के बंद द्वार खोलता है और हमें भगवान से साक्षात्कार कराता है।</span><span style="text-align:justify;">माँ का ज्ञान और शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान बाहर का ज्ञान है, वस्तुओं का ज्ञान है परन्तु आध्यात्मिक गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान आंतरिक ज्ञान है। वह भीतर के अंधकार को दूर कर उसे प्रकाशित करता है। बाहर की वस्तुओं का कितना भी हमें ज्ञान प्राप्त हो जाए हम कितने भी बड़े पद पर हों, कितना भी हमारे पास पैसा हो परन्तु बिना भीतर के ज्ञान सब कुछ व्यर्थ है। बाहरी ज्ञान, मन-बुद्धि का ज्ञान-विज्ञान है परन्तु आध्यात्मिक ज्ञान मन से परे भगवान का ज्ञान है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">परन्तु विडम्बना यह है कि जिस प्रकार गुरु रूपी माँ की महिमा और सम्मान में गिरावट आई है, रोजगार दिलाने वाले शिक्षकों का अवमूल्यन हुआ है। उसी प्रकार भगवान से मिलाने वाले आध्यात्मिक गुरुओं का भी अवमूल्यन हो रहा है। आज नकली, धूर्त, ढोंगी, पाखंडी, साधु-संन्यासियों और गुरुओं की बाढ़ ने असली गुरु की महिमा को घटा दिया है। असली गुरु की पहचान करना बहुत कठिन हो गया है। भगवान से मिलाने के नाम पर, मोक्ष और मुक्ति दिलाने के नाम पर, कुण्डलिनी जागृति के नाम पर, पाप और दु:ख काटने के नाम पर, रोग-व्याधियां दूर करने के नाम पर और जीवन में सुख और सफलता दिलाने के नाम पर हजारों धोखेबाज गुरु पैदा हो गये हैं जिनको वास्तव में कोई आध्यात्मिक उपलब्धि नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">
जो स्वयं आत्मा को नहीं जानते वे दूसरों को आत्मा पाने का गुर बताते हैं। तरह-तरह के प्रलोभन देकर धन कमाने के लिए शिष्यों की संख्या बढ़ाते हैं। जिसके बाड़े में जितने अधिक शिष्य हों वह उतना ही बड़ा और सिद्ध गुरु कहलाता है। मूर्ख भोली-भाली जनता इनके पीछे-पीछे भागती है और दान-दक्षिणा देती है। ऐसे धन-लोलुप अज्ञानी और पाखंडी गुरुओं से हमें सदा सावधान रहना चाहिए। कहावत है कि ‘पानी पीजै छान के और गुरु कीजै जान के।</p>
<p style="text-align:justify;">’ सच्चा गुरु ही भगवान तुल्य है। इसीलिए कहा गया है कि ‘गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपनो जिन गोविंद दियो मिलाय।’ यानी भगवान से भी अधिक महत्व गुरु को दिया गया है। यदि गुरु रास्ता न बताये तो हम भगवान तक नहीं पहुंच सकते। अत: सच्चा गुरु मिलने पर उनके चरणों में सब कुछ न्यौछावर कर दीजिये। उनके उपदेशों को अक्षरश: मानिये और जीवन में उतारिये। सभी मनुष्य अपने भीतर बैठे इस परम गुरु को जगायें। यही गुरु-पूर्णिमा की सार्थकता है तथा इसी के साथ अपने गुरु का भी सम्मान करें।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/important-role-of-guru-in-indian-culture/article-5024</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Jul 2018 03:23:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सफलता पाने के लिए दूरदर्शिता अति जरूरी: प्रो सोलंकी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल ने राजकीय महिला स्नातकोत्तर कॉलेज में बोर्ड आफ स्टडीज, आईसीएआई द्वारा आयोजित नेशनल कान्फ्रेंस में चार्टर्ड अकाऊंटेड के छात्रों को किया संबोधित चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। जिस व्यक्ति के पास मूल्य, गुण और दूरदर्शिता ये चीजें नहीं हैं वह समाज को सही दिशा नहीं दे सकता। व्यक्ति के अंदर का मूल्य दिखाई नहीं देता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/foresight-is-very-important-for-achieving-success-pro-solanki/article-4482"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/solnki.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">राज्यपाल ने राजकीय महिला स्नातकोत्तर कॉलेज में बोर्ड आफ स्टडीज, आईसीएआई द्वारा आयोजित नेशनल कान्फ्रेंस में चार्टर्ड अकाऊंटेड के छात्रों को किया संबोधित</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिस व्यक्ति के पास मूल्य, गुण और दूरदर्शिता ये चीजें नहीं हैं वह समाज को सही दिशा नहीं दे सकता। व्यक्ति के अंदर का मूल्य दिखाई नहीं देता लेकिन जब वह गुण के साथ कोई कार्य करता है तो उसका मूल्य भी दिखाई दे जाता है। इसी प्रकार, जीवन में सफलता पाने के लिए दूरदर्शिता भी अति जरूरी है। उक्त बात राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि रविवार को चण्डीगढ़ में सैक्टर 42 के राजकीय महिला स्नातकोत्तर कॉलेज में बोर्ड आफ स्टडीज, आईसीएआई द्वारा आयोजित नेशनल कान्फ्रेंस में चार्टर्ड अकाऊंटेड के छात्रों को संबोधित करते हुए कही।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उपस्थित छात्रों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आपके चमकते हुए चेहरे देकर उन्हें प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि आज भारतवर्ष महत्वपूर्ण धूरी आया हैं और पूर्व राष्टÑपति अब्दुल कलाम ने कहा था कि युवा देश के ‘बिल्डर्स आफ नेशनस’ हैं। इसी प्रकार से आप भी राष्टÑ का एक चमकता हुआ भविष्य है।</p>
<h1 style="text-align:center;">देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम करना है।</h1>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उपस्थित छात्रों से सवाल करते हुए कहा कि देश की सेना की संख्या कितनी है तो इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की सेना की संख्या लगभग 28 लाख हैं और जिस प्रकार से सेना का कर्तव्य देश व जनता को सुरक्षा प्रदान करना है ठीक उसी प्रकार से चार्टर्ड अकाऊटेंडों भी सेना के समान आर्थिक क्षेत्र में सैनिक है और देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम करना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक क्षेत्र में आप लोगों की ईमानदारी होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि किसी भी देश को सोहार्द और शांति चाहिए तो उसके नागरिकों की सोच कैसी है, इस पर निर्भर करता है। इसी प्रकार, संपर्क के तहत विश्व को बदलने के लिए संपर्क अति आवश्यक है और हमारे पास अभी हाल ही में एक नया उदाहरण अमेरिका और नार्थ कोरिया के बीच हुई वार्ता का है, जिसके तहत विश्व की परिस्थिति ही बदल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मानव कल्याण के लिए संपर्क और सहयोग भी आवश्यक है, नहीं तो सभी यही सोच रहे थे कि नार्थ कोरिया की वजह से विश्व युद्घ होगा लेकिन संपर्क और सहयोग के माध्यम से विश्व की इस परिस्थिति को बदला गया। राज्यपाल ने कहा कि जब हम संपर्क करेंगें तो सहयोग की भावना भी जागृत होगी और इस आत्मीयता से संस्कार पैदा होगें। उन्होंने संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि आज हमारे मन में पूरे विश्व को एक करने का संकल्प होना चाहिए अर्थात मनुष्य में मूल्यों का होना अति आवश्यक है।</p>
<h1 style="text-align:center;">प्रत्येक व्यक्ति को स्वावलंबन होना चाहिए</h1>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने चार्टर्ड अकाऊटेंड के छात्रों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि नया भारत बनाने में आप लोगों के कंधों पर अहम जिम्मेदारी है। उन्होंने महात्मा गांधी के एक वक्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी जी कहते थे कि हर नागरिक के मन में यह सोच होनी चाहिए कि ये देश मेरा है, सरकार मेरी है। यह सपना व्यक्ति के मन में होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें आर्थिक स्वतंत्रता भी चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को स्वावलंबन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती आयोजित की जानी है और तब तक भारत में पूरा भारत स्वच्छ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में कोई गरीब न हो, भाईचारा हो, जातियता न हो, हिंसा न हो, जिसे महात्मा गांधी जी चाहते थे। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन नए भारत के निर्माण में काम आना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सभी में एक क्षमता होती है सिर्फ उस क्षमता को जानने की आवश्यकता है और उसका उपयोग करना आना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व, बोर्ड आफ स्टडीज के उपाध्यक्ष श्री विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि आईसीएआई के 2.85 लाख चार्टर्ड अकाऊंटेड हैं और वर्तमान में आठ लाख से अधिक छात्र है। उन्होंने कहा कि उनका संस्थान मूल्य, गुण ओर सोच की धारा छात्रों में डालता है ताकि देश की आर्थिक उन्नति हो।</p>
<h1 style="text-align:center;">कार्यक्रम के दौरान स्मृति चिन्ह देकर राज्यपाल<br />
को किया गया सम्मानित</h1>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर चण्डीगढ ब्रांच के चेयरमैन मस्तान सिंह ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और छात्रों को संबोधित किया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के ब्रिज भूषण शर्मा ने किया। इस अवसर पर नवीन कुमार सोनी, उमाकांत मेहता, अमितोयोज सिंह कम्बोज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jun 2018 09:24:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पूर्वी एशिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण: सुनौरी</title>
                                    <description><![CDATA[टोक्यो (एजेंसी)। जापान के रक्षा मंत्री सुनौरी ओनोदेरा ने दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और संयुक्त सैन्य अभ्यास को पूर्वी एशिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है।श्री ओनोदेरा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि इस संयुक्त सैन्य अभ्यास के मुद्दे पर जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच आपसी समझ की जरूरत है। जापानी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-military-presence-important-for-east-asia-security-japan/article-4131"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/japan-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टोक्यो (एजेंसी)। </strong>जापान के रक्षा मंत्री सुनौरी ओनोदेरा ने दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और संयुक्त सैन्य अभ्यास को पूर्वी एशिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है।श्री ओनोदेरा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि इस संयुक्त सैन्य अभ्यास के मुद्दे पर जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच आपसी समझ की जरूरत है। जापानी रक्षा मंत्री का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दक्षिण कोरिया के साथ किए जाने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को समाप्त करने की घोषणा करने के बाद आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री ओनोदेरा ने कहा कि जापान अमेरिका के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करना जारी रखेगा और उत्तर कोरिया से संभावित बैलिस्टिक मिसाइल हमले के खतरे के मद्देनजर अपनी सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की योजना पर काम करेगा। इससे पहले मंगलवार को सिंगापुर में सेंटोसा द्वीप के केपेला होटल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच एक ऐतिहासिक मुलाकात हुई। श्री ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ किए जाने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को समाप्त करने की घोषणा की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच हुए शिखर सम्मेलन में उत्तर कोरिया ने अमेरिका के साथ एक ऐतिहासिक समझौता कर कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियार समाप्त करने की दिशा में काम करने और दोनों देशों के बीच शांति एवं समृद्धि की प्रतिबद्धता जतायी है। श्री ट्रंप ने उत्तर कोरिया को सुरक्षा गारंटी प्रदान करने का भी आश्वासन दिया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 09:02:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेल में खेल की भावना व ईमानदारी बेहद महत्वपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[आस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर व प्रशिक्षक डेविड लेहमैन ने गेंद के साथ छेड़छाड़ के मामले में जिस प्रकार रो-रोकर माफी मांगी है और उम्र भर का पछतावा रहने का जिक्र किया है उससे उम्मीद की किरण दिखाई पड़ती है कि खेल भावना अभी भी जिंदा है। विश्व भर में लोकप्रिय इन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-games-spirit-and-integrity-are-very-important/article-3686"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/sports-mab.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर व प्रशिक्षक डेविड लेहमैन ने गेंद के साथ छेड़छाड़ के मामले में जिस प्रकार रो-रोकर माफी मांगी है और उम्र भर का पछतावा रहने का जिक्र किया है उससे उम्मीद की किरण दिखाई पड़ती है कि खेल भावना अभी भी जिंदा है। विश्व भर में लोकप्रिय इन खिलाड़ियों ने केवल ‘सोरी’ कहकर ही गलती नहीं मानी बल्कि खेल में भारी भूल गलती करने का दर्द भी छलका।</p>
<p style="text-align:justify;">खेलों में विवादों का इतिहास पुराना है लेकिन अधिकतर मामलों में खिलाड़ी न तो अपनी गलती मानते हैं न ही अपने पर लगाए गए आरोपों को मानते है, उलटा किसी साजिश का हिस्सा बताकर कई-कई वर्षों तक मामले को लटकाए रखते हैं, जिससे खेल संस्थाओं का जहां समय खराब होता है वहीं कई प्रकार के भ्रम बने रहते हैं। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि खेलों का व्यापारीकरण हो चुका है। पैसे के लिए खिलाड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। क्रिकेट में मैच फिक्सिंग लंबे समय तक विवादों का कारण बनी रही। अंडर वर्ल्ड के हाथों की कठपुतली बनकर कई खिलाड़ियों ने खेल को बदनाम किया। इन परिस्थितियों में आॅस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों ने विनम्रता से गलती को स्वीकार किया व खेल प्रति गैर-जिम्मेवार व्यवहार के लिए खुद को जिम्मेवार ठहराया।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही यह खिलाड़ी सजा के हकदार हैं लेकिन सामाजिक तौर पर उन्होंने अपना पक्ष मजबूत कर लिया है। भारतीय खिलाड़ी गौतम गंभीर ने स्टीवन स्मिथ के खिलाफ पाबंदी को जरूरत से ज्यादा सख्त करार दिया है। गंभीर स्मिथ को भ्रष्ट कहने के हक में नहीं हैं। दूसरी तरफ आॅस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड की कार्रवाई को भी गलत नहीं ठहराया। खेल को किसी भी उद्देश्य से नुक्सान पहुंचाना खेल भावना को ठेस पहुंचाना है। बोर्ड ने निष्पक्षता व नियमों को कायम रखा व किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया। आॅस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड और इन खिलाड़ियों ने जिस प्रकार से प्रतिक्रिया व्यक्त की है, वह विश्वसनीय है। इस घटनाक्रम से प्रतीत होता है कि खेल को सच्चाई व ईमानदारी के साथ ही खेला जा सकता है। इन मूल्यों से ही खेल का सम्मान है जिससे दर्शकों व खेल प्रेमियों का विश्वास रोमांच बना रह सकता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Mar 2018 01:33:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मीडिया की परीक्षा : विश्वसनीय सूचना महत्वपूर्ण</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/media-exam-reliable-information-important/article-3665"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/media.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मीडिया के बारे में उच्चतम न्यायालय की हाल में की गयी टिप्पणी को पत्रकारों को सही परिप्रेक्ष्य में लेना चाहिए। मुख्य न्यायधीश मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा हमें यह कहते हुए खेद है कि कुछ पत्रकार मानते हैं कि वे किसी मंच पर बैठे हुए हैं और कुछ भी लिख सकते हैं। यह पत्रकारिता से जुड़ी स्वतंत्रता या संस्कृति नहीं है। वे सोचते हैं कि वे कुछ भी कर साफ बच निकल सकते हैं। यह पत्रकारों का भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। प्रेस की ज्यादतियों के बारे में बुहत कुछ लिखा जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया कोर्ट और प्रेस कानूनों के बावजूद पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता जारी है और प्रेस कानूनों के बावजूद पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता जारी है। प्रेस को व्यापक स्वतंत्रता प्राप्त है। यहां पर चिंता कानूनों के अतिक्रमण की नहीं अपितु नैतिक जिम्मेदारी की भी है। अपने पाठकों या इतिहास के प्रति पत्रकारों की क्या जिम्मेदारी है? यदि उन्होंने जनता की राय या सरकार को गलत सूचना या गलत निष्कर्षों से गुमराह किया है तो क्या हमने कभी ऐसा पाया है कि पत्रकारों ने उसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया हो या उसी पत्रकार या उसी समाचार पत्र द्वारा भूल में सुधार किया गया हो। ऐसा नहीं होता है क्योंकि इससे उनकी बिक्री प्रभावित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्र को ऐसी गलतियों का खामियाजा उठाना पड़ सकता है किंतु पत्रकार बच निकलता है। यह माना जाता है कि वह फिर से ऐसी बातें लिखना शुरू कर देता है। समाचार पत्र उसके मालिकों को एक नरम शक्ति प्रदान करता है और वह एक राजनीतिक हथियार भी बन सकता है। सामान्य धारणा यह है कि जनता को लोक महत्व के मुद्दों पर सभी प्रकार की राय देने के लिए तथा घटनाओं का वास्तविक वर्णन करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता अपरिहार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्रकारों में उपदेशक बनने की प्रवृति पाई जाती है। कुछ संपादक मानते है कि वे देश को चलाते हैं या कम से कम देश का एजेंडा तय करते हैं। वाल्टर लिकमैन ने एक बार लिखा था आत्म महत्व से शराब से अधिक पत्रकार बर्बाद हुए हैं। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री स्टेनले वार्डविंग ने 1921 में कहा था कि पत्रकार बिना जिम्मेदारी के शक्तियों का प्रयोग करते हैं। यह युगों से वेश्याओं का विशेषाधिकार रहा है। इनमें से कुछ टिप्पणियां अप्रिय हैं क्योंकि कई बार पत्रकारों ने अपनी लेखनी से जनता को जागृत किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं ऐसे कई युवा पत्रकारों को जानता हूं जिन्हें अपने और अपने कार्य के बारे में विश्वास है और इसका कारण उनका आत्मविश्वास नहीं अपितु यह भावना है कि वे ऐसे व्यवसाय में हैं जिससे वे चकाचैंध की दुनिया से जुड़ जाते हैं। अपने संगठन के लिए मीडिया मैनेजर के रूप में लंबे समय तक कार्य करने के दौरान मैंने पाया कि पत्रकारिताओं में नकारात्मक खबरों के प्रति अधिक लगाव होता है क्योंकि उससे वे सुर्खियों में आते हैं। जबकि सकारात्मक विकास से जुड़ी खबरें सुर्खियों में नहीं रहती।</p>
<p style="text-align:justify;">एक समय ऐसा भी था जब अन्वेषक रिपोर्टिंग को अच्छा नहीं माना जाता था। इस मामले में ईमानदार रिपोर्टिंग को भी पीत पत्रकारिता माना जाता था। किंतु धीरे-धीरे ऐसी रिपोर्टिंग पत्रकार की अपने व्यवसाय और समाज के प्रति सर्वोच्च जिम्मेदारी बन गयी। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी रिपोर्टिंग के आधार पर अनेक उल्लेखनीय निर्णय दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शक्तिशाली स्तंभकारों से लेकर छोटे-छोटे ब्लॉगरों तक सबको इस बात पर ध्यान देना होगा कि वे जो कुछ भी खबर देते हैं वह सही हो। आज हमारी खबरें शक्तिशाली बन गयी हैं। हमारे मीडिया के लोग भी हमारे लोगों की मानसिकता से नकारात्मकता दूर करने में सहयोग नहीं करते हैं। क्या हम प्रत्येक नकारात्मक समाचार को बड़े उत्साह से पेश नहीं करते हैं? इसका कारण यह है कि तुरंत और विश्वसनीय सूचना दी जानी चाहिए और इसके लिए अटकल, अफवाह आदि का सहारा भी लिया जाता है और उसके कारण उत्पन्न भूलों को दूर नहीं किया जाता है और ऐसे समाचार पाठकों के मन पर छा जाते हैं। कई बार पाठक भ्रमित हो जाते हैं। समाचार व्यवसाय से जुडे़ लोग आज ऐसे समाचारों को प्रमुखता देते हैं जो भावनाओं को भड़काते हैं हालांकि पत्रकारों की एक और पीढी भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पत्रकारों की पुरानी पीढ़ी है जिन्होंने न्यूज रूम के मूल्यों को परिभाषित किया था। सच्चाई और निष्पक्षता के लिए कोई भी कीमत बड़ी नहीं है। हमें अतिरिक्त प्रयास करने होंगे और तब तक यह प्रयास जारी रखने होंगे जब तक हमें विश्वास न हो कि हमारा समाचार सही और निष्पक्ष है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोइन काजी</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Mar 2018 02:59:48 +0530</pubDate>
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