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                <title>Dairy Farming - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Dairy Farming RSS Feed</description>
                
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                <title>Dairy Farming: 6 देसी गायों से शुरू किया व्यवसाय, आज दूध के उत्पादों से कमा रहे लाखों</title>
                                    <description><![CDATA[Dairy Farming: चोपटा सच कहूँ/भगत सिंह। हरियाणा के सरसा जिले के गांव माखोसरानी के दो किसान भाइयों ने 8 साल पहले 6 देसी गायों को पालकर शुरू किया काम, आज 60 देशी गायों के दूध से बने उत्पाद और केंचुआ खाद बनाकर मालामाल हो रहे हैं। दोनों भाइयों दिनेश कुमार और पवन कुमार पुत्र धर्मपाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/they-started-their-business-with-indigenous-cows-and-are-now-earning-millions-from-dairy-products/article-79972"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/dairy-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Dairy Farming: चोपटा सच कहूँ/भगत सिंह।</strong> हरियाणा के सरसा जिले के गांव माखोसरानी के दो किसान भाइयों ने 8 साल पहले 6 देसी गायों को पालकर शुरू किया काम, आज 60 देशी गायों के दूध से बने उत्पाद और केंचुआ खाद बनाकर मालामाल हो रहे हैं। दोनों भाइयों दिनेश कुमार और पवन कुमार पुत्र धर्मपाल पूनिया द्वारा घर में ही पूर्णतया देसी और बिना मिलावट के तैयार किए गए देसी गायों के दूध से बने उत्पाद पनीर, खोया, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, कलाकंद, बिलोना घी के साथ-साथ केंचुआ खाद की डिमांड देश के दूसरे राज्यों में भी हो रही है। डॉ. पवन ने बताया कि उनके द्वारा तैयार किये गए अधिकतर खाद्य उत्पाद उनके प्रतिष्ठान से ही बिक जाते हैं। हालांकि दोनों भाई नौकरी करते हैं और परंपरागत खेती के साथ-साथ गायों को पालकर एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आईए जानते हैं दिनेश कुमार और पवन कुमार पुनियां की सफलता की कहानी। हरियाणा के सरसा जिले के अंतिम छोर पर पड़ने वाले राजस्थान की सीमा से सटे गांव में किसान परंपरागत खेती करते हैं। पिछले कई सालों से सिंचाई पानी की कमी, बारिश की अनियमितता, प्राकृतिक आपदाओं आदि के कारण परंपरागत खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। ऐसे में किसानों ने खेती के साथ-साथ अन्य व्यवसायों को अपनाना शुरू कर दिया है। अधिकतर किसान खेती के साथ-साथ बागवानी और पशुपालन कर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहे हैं। इसी कड़ी में गांव माखोसरानी के दो किसान भाई दिनेश कुमार और पवन कुमार पूनियां दोनों ही सरकारी नौकरी करते हैं। दिनेश कुमार बीटेक की पढ़ाई के बाद एयरफोर्स में सर्विस करते हैं और पवन कुमार पशुपालन की डिग्री लेकर पशु चिकित्सक के तौर पर कार्य कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ-साथ घर की परंपरागत खेती में भी हाथ बटाते हैं और 6 साल पहले पांच देसी गायों से नया कार्य शुरू किया। जिसके तहत देसी गायों के दूध से बने उत्पाद घी, खोया, पनीर इत्यादि बेचना शुरू किया। दिनेश और पवन ने बताया कि उन्होंने गायों की रक्षा और पूर्णतया शुद्ध देसी उत्पाद बनाकर लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए खेती और नौकरी के साथ-साथ कार्य शुरू किया। जिसमें उन्हें दिन प्रतिदिन सफलता मिलती गई और वर्तमान में 70 साहीवाल नस्ल राठी और अन्य देसी गायों की को पालते हैं और उनके दूध से बने पनीर, खोया, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, कलाकंद व पेड़े इत्यादि की अच्छी बिक्री हो रही है। उन्हें सालाना करीब 2 लाख से अधिक की बचत हो रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">गायों की नस्ल सुधार में कर रहे सराहनीय कार्य | Dairy Farming</h4>
<p style="text-align:justify;">पशु चिकित्सक डॉ. पवन कुमार ने बताया कि गायों की नस्ल सुधार के लिए कार्य किया जाता है। इस दौरान कृत्रिम गर्भाधान के द्वारा गायों की साहीवाल नस्ल के बच्छे व बच्छियाँ तैयार की जाती है। जो आगे चलकर अधिक दूध देती है। इन्होंने बताया कि गोविंदम देसी गाय फार्म के नाम से गांव माखोसरानी में अपना व्यवसाय शुरू कर रखा है। जिसमें सभी परिजनों के साथ-साथ खुद मेहनत करके देसी और बिना मिलावट के दूध के बने उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। इनका कहना है कि लोकल का स्वर के सिद्धांत पर चलते हुए सरसा जिले के आसपास के गांव के साथ-साथ उनके उत्पाद दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब सहित कई राज्यों में खूब पसंद किया जा रहे हैं। इनका कहना है कि गायों के गोबर से देसी खाद बनाई जाती है और इसके साथ-साथ केंचुआ खाद का भी व्यवसाय शुरू कर रखा है। जिससे फसलों में डालने पर रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं करना पड़ता। इस कारण दूध के साथ-साथ अन्न भी बढ़िया पैदा होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2018 में शुरू किया था व्यवसाय</h4>
<p style="text-align:justify;">दिनेश और पवन ने बताया कि साल 2018 में उन्होंने यह व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे व्यवसाय में गायों की सेवा के साथ-साथ कमाई का जरिया भी बढ़ता गया। उन्होंने बताया कि त्यौहार तीज व दीवाली इत्यादि के अवसर पर पूर्णतया देसी और बिना मिलावट के दूध के बने उत्पादों की डिमांड बहुत ज्यादा होती है तथा आसपास के बाजारों में स्टाल लगाकर उत्पादक बेचे जाते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक सरकार से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं ली है लेकिन सरकार को खेती के साथ-साथ अन्य प्रकार के व्यवसाय जैसे बागवानी, पशुपालन, डेयरी इत्यादि पर लोन व अन्य सुविधाओं को देने के लिए योजनाओं का सरलीकरण करना चाहिए, ताकि नए किसान खेती, पशुपालन और बागवानी के जरिए अपने आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सके।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 11:21:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हरियाणा के 25 हजार परिवारों को डेयरी पालन से जोड़ेगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी में 38वीं राज्यस्तरीय पशुधन प्रदर्शनी का शुभारंभ राज्यपाल ने किया शुभारंभ हरियाणा के किसानों को के्रडिट कार्ड के 924 करोड़ रूपये बांटे सच कहूँ/इन्द्रवेश, भिवानी। मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान कार्यक्रम के दौरान हरियाणा प्रदेश के 25 हजार जरूरतमंद परिवारों की आमदनी में वृद्धि के लिए पशुपालन विभाग व कृषि विभाग (Dairy Farming) की डेयरी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/government-will-connect-25-thousand-families-of-haryana-with-dairy-farming/article-31113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/dairy-farming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>भिवानी में 38वीं राज्यस्तरीय पशुधन प्रदर्शनी का शुभारंभ राज्यपाल ने किया शुभारंभ</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>हरियाणा के किसानों को के्रडिट कार्ड के 924 करोड़ रूपये बांटे</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/इन्द्रवेश, भिवानी।</strong> मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान कार्यक्रम के दौरान हरियाणा प्रदेश के 25 हजार जरूरतमंद परिवारों की आमदनी में वृद्धि के लिए पशुपालन विभाग व कृषि विभाग (Dairy Farming) की डेयरी पालन से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ने पशुधन क्रेडिट कार्ड व किसान के्रडिट कार्ड में अब तक 924 करोड़ की राशि वितरित कर दी है। केंद्र व प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में किसानों की उन्नति व खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">भिवानी के हुडा सेक्टर-13 के सामने मैदान में कृषि, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, पशुधन विकास बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित 38वीं राज्यस्तरीय पशुधन प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने ये शब्द कहे। जय हिंद, जय किसान और जय हरियाणा के उद्धघोष से राज्यपाल ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में 65 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र का है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रदेश को दूध उत्पादन में पहले स्थान लाया जाएगा</h4>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि प्रदेश में 1142 ग्राम प्रति व्यक्ति के हिसाब से दूध का उत्पादन हो रहा है। पंजाब के बाद हरियाणा सबसे अधिक दूध का उत्पादन करता है। वह दिन दूर नहीं, जब विकासशील व वैज्ञानिक सोच के साथ प्रदेश को दूध उत्पादन (Dairy Farming) में पहले स्थान पर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुधारू पशुओं की नस्ल को और बेहतर बनाने के लिए कृषि एवं पशुपालन विभाग की ओर से प्रदेश स्तर पर यह शानदार आयोजन किया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि यहां पर पशुओं की उत्तम नस्ल प्रदर्शित की गई हैं, मनोरंजन के लिए प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकारों को बुलाया गया है और किसानों को नवीनतम जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पशु चिकित्सा के लिए चलेंगी 70 और मोबाइल वैन</h4>
<p style="text-align:justify;">पशुपालन विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा के पशुओं की नस्ल में सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने कृत्रिम गर्भाधान का शुल्क 500 रूपए से घटाकर दो सौ रूपए निर्धारित कर दिया है। मुंहखुर व गलघोटू बीमारी का एक ही टीका लगाने वाला हरियाणा देश का प्रथम राज्य है। राज्य में 52 लाख पशुओं को मुंहखुर व ब्रूसेला रोग की 48 लाख वैक्सीन दी गई है। पशुपालन विभाग के महानिदेशक डॉ. बीरेंद्र सिंह लौरा ने कहा कि पशुचिकित्सा सुलभ करवाने के लिए 70 और मोबाइल वैन चलाई जाएंगी।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 19:48:32 +0530</pubDate>
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