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                <title>management - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>समय प्रबन्धन अपनाना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. दीपक आचार्य संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के लिए हर काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/time-management-needs-to-be-adopted-2/article-3949"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/time.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> डॉ. दीपक आचार्य</strong></p>
<p style="text-align:justify;">संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के लिए हर काम की समयावधि निश्चित की हुई है। अलग-अलग प्रकार के लोग इनके संपादन में न्यूनाधिक समय लगाते हैं। कुछ लोग तय समय सीमा में काम कर गुजरते हैं और फिर मस्त रहते हैं। कुछ लोग धीरे-धीरे काम करने के आदी होते हैं और जैसे-तैसे काम को कर पाते हैं। बहुत से लोग पड़े-पड़े खाना-पीना और कमाना चाहते हैं और कोई काम नहीं करते। इनसे काम लेना ही बड़ा भारी काम होता है। ये लोग हमेशा अपनी ही मौज-मस्ती और मनोरंजन में रहना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके लिए न कार्यस्थल की साख और काम का कोई महत्व होता है और न ही समाज, अपने क्षेत्र या देश से कोई सरोकार। अपने क्षणिक भोग-विलास और आनंद के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं। इन खुदगर्जों को कभी कोई शर्म नहीं आती। जिन्दगी भर यह महा बेशर्म बने रहते हैं। तीसरे प्रकार के लोग सभी कामों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर सकते हैं मगर उनका समय प्रबन्धन इतना बिगड़ा हुआ होता है कि कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो पाता और इसके लिए इनके पास खूब सारे बहानों का अक्षय भण्डार होता है जिसका वे पूरा-पूरा उपयोग कर लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन लोगों की कार्यस्थलों, काम-धन्धे के स्थलों और दुकानों-कंपनियों में पर्याप्त समय मिलता है और इनकी पूरे कार्यसमय में नियमित बैठक भी होती है लेकिन दायित्व कर्म के समय ये दूसरे कामों, गप्पों और टाईमपास फालतू के लोगों के साथ बिताते हुए मनोरंजन की दुनिया में खोए रहते हैं अथवा अपनी बतरसिया और दुनिया भर की हलचलों को सुनने-जानने व देखने में भटक जाते हैं। इसलिए इनके काम समय पर नहीं हो पाते और विवश होकर दु:खी मन से अतिरिक्त समय निकालना पड़ता है और इसका मलाल रोज इन लोगों को होता भी है लेकिन आदत ही ऐसी पड़ जाती है कि इनका बस नहीं चल पाता और यही क्रम जिन्दगी भर चलता रहता है। इस श्रेणी के लोगों के पास पुराने से पुराने समय का अधूरा काम लम्बित पड़ा हुआ होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये लोग कभी पुराने कामों से मुक्ति पाने का अहसास कर ही नहीं पाते कि नए-नए काम इनके पास आते हुए पुराने कामों की सूची में शामिल हो जाया करते हैंं। हमारे इलाके में समाज-जीवन के सभी क्षेत्रों में ऐसे लोगों की भारी भीड़ विद्यमान है जो समय पर काम नहीं कर पाते। ऐसे लोग अपने निकम्मेपन की वजह से ढेर होते जा रहे लम्बित कामों की वजह से दबावों में जीने के आदी हो जाते हैं और ऐसे में तनावों का उनके साथ ऐसा संबंध स्थापित हो जाता है जो मरने तक साथ बना रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुराने कामों के बोझ से उत्पन्न तनावोें का ही परिणाम है कि ये लोग नए कामों को भी तय समय सीमा में नहीं कर पाते और इसी प्रकार उत्तरोत्तर इनका बोझ बढ़ता रहता है तो आने वाले समय में पहाड़ की तरह अड़िग रहकर इनके जीवन और कर्मयोग दोनों की राह में आड़े आ जाता है। बात सरकारी क्षेत्र की हो या निजी क्षेत्र की अथवा आधे-आधे सरकारी-गैर सरकारी क्षेत्र की। हर कहीं जमा है ऐसे लोगों की भीड़ जिनके लिए जीवन भर काम का बोझ बना रहता है और इस बोझ के मारे खुद तो परेशान रहते ही हैं, दूसरों के काम भी समय पर नहीं कर पाने की वजह से लोगों की बद्दुआओं के तीर भी इनके जिस्म में चुभते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे लोगों के कामों को देखा जाए तो उन्हें रोजाना इतना समय मिलता ही है कि ये आसानी से अपने रोजमर्रा के कामों को निपटा सकें लेकिन इनकी मानसिक शिथिलता और समय प्रबन्धन की कमी के कारण ये समय का पूरा उपयोग नहीें कर पाते और रोजाना कुढ़ते रहने के आदी हो जाते हैं। समय पर काम नहीं कर पाने वाले इन लोगों को पूछा जाए तो यही बहाना होता है कि काम बहुत है, क्या करें। जबकि उन्हीं की तरह दूसरे लोग भी हैं जिनके पास भी उतना ही काम होता है मगर वे उसी समय सीमा में पूरा कर लिया करते हैं जितना समय निर्धारित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सौंपी गई अवधि में काम नहीं कर पाने वाले लोग फिर अवकाशों के दिनों में या अतिरिक्त समय में अपने कार्यस्थलों में डटे रहने की विवशता या शौक से जुटे रहते हैं और उन सभी बहुमूल्य क्षणोें को यों ही बरबाद करते रहते हैं जो क्षण उन्हें मौज-शौक या घर-गृहस्थी और सामाजिक एवं उत्सवी आनंद के लिए हुआ करते हैंं। इन लोगों के परिवारजन भी इन्हें पसन्द करना छोड़ दिया करते हैं। यह तय मान कर चलना चाहिए कि जो लोग निर्धारित अवधि में सामान्य कार्य नहीं कर पाते हैं वे इस लायक हैं ही नहीं कि उन्हें ये काम सौंपे जाएं। इन लोगों को नालायक नहीं भी कहा जाए तो यह तो मानना ही चाहिए कि इन्हें कोई सा काम सौंपे जाने का अर्थ यही है कि कहीं न कहीं चूक उन लोगों से ही हुई है जिनके द्वारा इन्हें काम सौंपा गया है। वरना इनकी बजाय दूसरे लोग होते तो समय पर और इनसे ज्यादा अच्छा काम करते।</p>
<p style="text-align:justify;">जो जहां कहीं काम कर रहा है उसे चाहिए कि वह अपने कामों के लिए निर्धारित घण्टों का पूरा उपयोग करते हुए काम पूरा करे ताकि किसी भी क्षण अतिरिक्त समय की मांग की कल्पना उसके जेहन में कभी न आए। समय पर काम नहीं करने वालों और आलस्य बरतने वालों के लिए एक ही शब्द काफी है और वह है – दीर्घसूत्री। यह आलसी, प्रमादी, समय प्रबन्धन में विफल हो चुके नाकारा लोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो कि कभी कोई काम समय पर नहीं कर सकते।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jun 2018 23:18:36 +0530</pubDate>
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                <title>बरसाती पानी के भेंट चढ़ी मक्की की दस हजार बोरी</title>
                                    <description><![CDATA[मंडी में नहीं पानी निकासी का ठोस प्रबंध, फसलों को पहुंचा नुकसान मूंगी की फसल भी हुई प्रभावित एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंंडी में प्रबंध अधूरे जगरावां (जसवंत राए)। गत दिवस आए तेज तूफान व बारिश के कारण एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ी मक्की की 10 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/bad-maize-in-mandi-from-rainwater/article-1363"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/18-june-jgn-03.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">मंडी में नहीं पानी निकासी का ठोस प्रबंध, फसलों को पहुंचा नुकसान</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>मूंगी की फसल भी हुई प्रभावित</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंंडी में प्रबंध अधूरे</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जगरावां (जसवंत राए)।</strong> गत दिवस आए तेज तूफान व बारिश के कारण एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ी मक्की की 10 हजार के करीब बोरियों के नुक्सान होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। बारिश के कारण जहां मूंग की दाल की फसल प्रभावित हुई वहीं धान की रोपाई ने भी तेजी पकड़ ली।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी देते हुए अनाज खरीद एसोसिएशन जगरावां के प्रधान कन्हैया लाल ने बताया कि जगरावां की मंडी का बहुत बुरा हाल है क्योंकि यहां न तो शैड सही हैं और न ही तरपालों की व्यवस्था, जिस कारण खुले आसमान के नीचे पड़ी किसानों की फसलों को भारी नुक्सान होता है।<br />
मायूसी से घर वापिस लेकर गए फसल</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जब तेज आंधी आई तो मक्की पर पड़ी तरपालें उड़ गई और बारिश के कारण 10 हजार के करीब बोरियों का नुक्सान हो गया। उन्होेंने बताया कि यह मंडी व्यापारियों के लिए नहीं बनी, जहां कोई प्रबंध नहीं, जिस कारण किसानों सहित व्यापारियों का भी भारी नुक्सान होता है। मंडी में मक्की की फसल बहुत ज्यादा आने कारण सारी मंडी फसल के साथ भरी पड़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जगरावां की मंडी में जो किसान घर से मक्की और मूंग की दाल की सूखी फसल बेचने के लिए लेकर गए थे शाम के समय बारिश के साथ भीगी फसल को घर को बहुत मायूसी और उदास चेहरो के साथ ट्रालियों में लोड कर वापिस ले गए। किसान प्रितपाल सिंह ने बताया कि सोचा था कि आज मक्की की फसल बेचकर लोगों का कर्ज उतार देंगे, लेकिन उल्टा बारिश के साथ मक्की की फसल भीग कर खराब हो गई जिस के हजारों रुपए मिलने थे अब सैंकड़े भी मिलेंगे मुश्किल हो गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पानी निकासी का कोई प्रबंध नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">मींह के पानी में मक्की की डूबी फसल को मजदूरों की मदद से बहार निकालते प्रितपाल सिंह ने बताया कि 100 क्विंटल के करीब मक्की की फसल बेचने प्रात:काल मंडी आए थे। बारिश के पानी ने सारी फसल का नुकसान कर दिया। उन्होंने कहा कि मार्केट समिति जगरावां द्वारा पानी की निकासी का कोई ठोस प्रबंध न होने के कारण मक्की की फसल का ज्यादा नुक्सान हुआ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसान रुककर फसल लाएं: प्रधान कलेर</h3>
<p style="text-align:justify;">आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरजीत सिंह कलेर ने कहा कि उन्होंने दो तीन दिन पहले भी किसान भाइयों से अपील की थी कि वह रुक-रूककर अपनी फसल लाएं, क्योंकि मंडी में फसल रखने की कोई जगह नहीं थी लेकिन किसानों ने अपील के ध्यान न दिया जिस कारण फसल का नुकसान ज्यादा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jun 2017 08:18:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>स्टोर मैनेजमेंट में बन सकता है आपका करियर</title>
                                    <description><![CDATA[आज के प्रतियोगी युग में हर अभ्यर्थी ऐसा पाठ्यक्रम चुनना चाहता है जिसे पूरा करते ही पैसा कमा सके। स्टोर मैनेजमेंट या मैटेरियल मैनेजमेंट ऐसा ही एक पाठ्यक्रम है जिसे पूरा करने के बाद रोजगार मिलना लगभग तय होता है। अगर आपने बारहवीं कक्षा पास कर ली है तो आप भी इस पाठ्यक्रम में दाखिला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/store-management-can-become-your-career/article-667"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/management.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज के प्रतियोगी युग में हर अभ्यर्थी ऐसा पाठ्यक्रम चुनना चाहता है जिसे पूरा करते ही पैसा कमा सके। स्टोर मैनेजमेंट या मैटेरियल मैनेजमेंट ऐसा ही एक पाठ्यक्रम है जिसे पूरा करने के बाद रोजगार मिलना लगभग तय होता है। अगर आपने बारहवीं कक्षा पास कर ली है तो आप भी इस पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकते हैं। इसमें भंडारण में संबंधित विभिन्न गुर सिखाए जाते हैं। यह तीन वर्षीय पाठ्यक्रम है, जो डिग्री कोर्स के बराबर है। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत खरीद−फरोख्त, स्टॉक का लेखा−जोखा रखने के लिए सांख्यिकी आदि विषयों का विस्तृत अध्ययन और अभ्यास कराया जाता है। स्टॉक इंचार्ज का काम बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। इसलिए छात्रों को कोर्स के दौरान ऐसी विधियों की जानकारी दी जाती है कि वो अपनी जिम्मेदारी कम मेहनत में ज्यादा से ज्यादा कुशलता से निभा सकें। प्रथम वर्ष में उन्हें हिंदी, अंग्रेजी दो भाषाओं के साथ एकाउंट्स बिजनेस, लॉ और स्टोर मैनेजमेंट पार्ट−1 पढ़ाया जाता है। दूसरे साल में हिंदी, अंग्रेजी, एकाउंट्स और स्टोर मैनेजमेंट पार्ट−2 की शिक्षा दी जाती है। वहीं तीसरे वर्ष हिंदी, अंग्रेजी एवं व्यावसायिक कानून और मैनेजमेंट पार्ट−3 पढ़ाया जाता है। इसके अलावा एक प्रोजेक्ट पर काम होता है, जिसमें प्रायोगिक अभ्यास के बाद रिपोर्ट बनानी होती है। इसमें क्रय−विक्रय उत्पादन का रिकार्ड रखने संबंधी काम करना होता है। वोकेशनल कालेज से इस पाठ्यक्रम को पास करने के बाद डिग्री के साथ वोकेशनल ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र दिया जाता है। इस पाठ्यक्रम की डिग्री बीए के समकक्ष होती है। अनुभव प्राप्त अभ्यर्थी को नियुक्ति के दौरान विशेष तरजीह दी जाती है। पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में पंद्रह−बीस दिन के व्यावहारिक प्रशिक्षण हेतु अभ्यर्थियों को विभिन्न कंपनियों में भेजा जाता है, जहां उन्हें अपने आंतरिक गुणों को निखारने का मौका मिलता है। यहां उन्हें काम के दौरान होने वाली परेशानियों और दूसरे अनुभवों से अवगत होने का मौका मिलता है। आज जहां व्यवसायिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो गए हैं, वहीं इस क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर हैं। आज लगभग हर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनी में ब्रिकी, खरीददारी, उत्पादन भण्डारण आदि का काम होता है, वहां कच्चे माल स्टॉक आदि के रखरखाव और हिसाब−किताब के स्टॉक कीपर्स और स्टॉक इंचार्ज की नियुक्ति की जाती है। वहीं सरकारी−गैर सरकारी कंपनियों, सेना तथा राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी स्टॉक प्रबंधक की काफी मांग है। जहां उन्हें आठ से दस हजार तक वेतनमान के साथ−साथ अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। इस संस्थानों में इस पाठ्यक्रम से संबंधित ज्यादा जानकारी ले सकते हैं− − भारतीय विद्या भवन, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली। − कालेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, शेख सराय, नई दिल्ली।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2016 14:53:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>करियर मैनेजमेंट क्यों है जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सफल प्रोफेशनल्स और एम्प्लॉयर्स के अनुसार फोकस जॉब पर नहीं, करियर पर करना चाहिए। इसके बावजूद सच यह है कि करियर मैनेजमेंट अक्सर लोगों के लिए एक उलझाऊ वाक्य बन कर रह जाता है। वह इसे हल्के तौर पर लेते हैं, जिसका कोई मतलब नहीं होता। सच्चाई यह है कि करियर मैनेजमेंट बहुत जरूरी और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/career-management-why-important/article-278"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/carrerrn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सफल प्रोफेशनल्स और एम्प्लॉयर्स के अनुसार फोकस जॉब पर नहीं, करियर पर करना चाहिए। इसके बावजूद सच यह है कि करियर मैनेजमेंट अक्सर लोगों के लिए एक उलझाऊ वाक्य बन कर रह जाता है। वह इसे हल्के तौर पर लेते हैं, जिसका कोई मतलब नहीं होता। सच्चाई यह है कि करियर मैनेजमेंट बहुत जरूरी और विशिष्ट प्रक्रिया है और जब उस पर विधिवत कार्य किया जाता है तो उसके दीर्घकालिक लाभ जरूर मिलते हैं। लिहाजा किसी भी संस्थान के हितों को ध्यान में रखते हुए वहां काम करने वालों की समग्र तरक्की से जुड़ी योजना ही करियर मैनेजमेंट कहलाती है, जो करियर की शुरुआत में भी अमल में लाई जाती है और मध्य में भी। दरअसल एक अनुशासित वित्तीय निवेश की ही तरह करियर मैनेजमेंट द्वारा करियर में बेहतरी की दिशा में लगातार किए गए प्रयास अच्छा फल देते हैं। वहीं दूसरी ओर मजबूत करियर मैनेजमेंट प्लान के बिना आप खुद को सतह पर ही पाएंगे। आपको यह भी दिखेगा कि आपके मौजूदा क्रियाकलाप आपकी भविष्य की योजनाओं को फलीभूत नहीं कर सकते और जल्दी ही वह समय आएगा, जब आपका करियर आपको चला रहा होगा।<br />
<strong>उद्देश्य और लक्ष्य:</strong> जीवन में काम के उद्देश्य के बारे में एक धारणा कहती है कि कार्य से ही किसी भी व्यक्ति के अस्तित्व की पूर्ति होती है। वही अभिव्यक्ति का स्रोत भी होता है। इसके विपरीत एक अन्य मत के अनुसार व्यक्ति के करियर और उसके जीवन के बीच बहुत अंतर होता है। जो भी हो, करियर क्योंकि जीवन का महत्वपूर्ण अंग होता है, इसीलिए उसे व्यवस्थित करने की जरूरत पड़ती है। करियर मैनेजमेंट की शुरुआत उद्देश्यों और लक्ष्यों से होती है। इस प्रक्रिया में शॉर्ट टर्म को जल्दी व लॉन्ग टर्म उद्देश्यों व लक्ष्यों को एक निश्चित अवधि में प्राप्त किया जाना चाहिए। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि करियर मैनेजमेंट आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए रास्ते में किसी रुकावट को देख कर अपना मार्ग न बदलें। साथ ही यह एक सक्रिय अभ्यास है। आप अलग-थलग बैठ कर दूसरों को अपने लिए काम करने को नहीं कह सकते। आपको खुद सक्रिय भूमिका निभानी होगी। करियर मैनेजमेंट के आपके प्रयास तभी सफल होते हैं, जब इसका एक निश्चित ढांचा बनाया जाए। इसके बिना अधिकांश लोग इस ओर से तब तक आंखें फेरे रहते हैं, जब तक कोई आपात स्थिति नहीं आती। एक विशिष्ट ढांचागत आकार इसे हर परिस्थिति में लगातार चलाए रखता है। स्थापना, जांच और त्रुटि निवारण करियर मैनेजमेंट की असली समझ इस आधार पर तय होती है कि व्यक्ति इस क्षेत्र में क्या प्राप्त करना चाहता है। यह पक्ष समझना अपने आप में बहुत कठिन भी होता है। यहां प्रत्येक लक्ष्य से जुड़े काम अलग करके उनके आधार पर लक्ष्य तय करना चाहिए। इसके बाद अपने कार्य की तरक्की की जांच करें। यहां मतलब आपके लक्ष्यों और उन्हें हासिल करने के लिए किए गए प्रयासों से है। इस जांच से रुकावट दूर होती है और आपके जीवन में करियर लक्ष्य विधिवत आ मिलते हैं। करियर के लक्ष्य भी समय के साथ-साथ बदलते और बढ़ते हैं। इसमें प्रत्येक कदम पर आपको उस तक पहुंचने से जुड़ी समझ विकसित करनी होती है।<br />
<strong>क्या करें:</strong> सेल्फ असेस्मेंट करियर मैनेजमेंट का एक बहुत जरूरी पक्ष है। इसके आधार पर आप अपने हुनर, क्षमताओं, अपने मजबूत पक्षों और लक्ष्य प्राप्ति करने की अपनी क्षमता का आकलन करते हैं। इन पक्षों के आधार पर आप अपनी भावी योजना भी तैयार करते हैं। भावी योजना से मतलब प्रोफेशन या करियर के रूप में वह रास्ता चुनना है, जिस पर आप भविष्य में चलना चाहते हैं। यहां जरूरी होता है कि करियर से जुड़ी अपनी पहली पसंद के अलावा भी अन्य कुछ रास्ते खुले रखे जाएं। यदि करियर के रूप में अपनी पहली पसंद से आप संतुष्ट नहीं हैं या कुछ समय बाद आपको उसकी सीमा का अंदाजा होता है तो आपके पास बैकअप प्लान तैयार रहना चाहिए। इसके बाद बारी आती है सेल्फ डेवलपमेंट की। यहां आपको उपरोक्त योजना की कमियों को दूर करना होता है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी क्षेत्र विशेष में काम करना चाहते हैं तो उससे जुड़े प्रशिक्षण आदि को प्राप्त करने के लिए आपके पास समुचित जानकारी होनी चाहिए। अपने लिए करियर्स की सूची बनाने के बाद उनसे जुड़े हुनर प्राप्त करने के लिए जरूरत होती है उन क्षेत्रों में व्यापक रिसर्च करने की। आपके शोध का आधार होना चाहिए चुने गए करियर क्षेत्र की सीमाओं को जानना। यह जानना कि क्या आपके कार्य क्षेत्र की भविष्य में मांग रहेगी? क्या इस कार्य क्षेत्र में विस्तार की गुंजाइश भी होगी?<br />
<strong>एक्शन:</strong> उपरोक्त आधार पर काम शुरू करने के बाद अगला कदम स्वत ही एक कार्यकारी पद्धति का विकास करना होता है। कागज पर अपनी भावी योजना को उकेरें। कार्यकारी पद्धति या एक्शन प्लान को अमल में लाने का सबसे कारगर तरीका होता है अपने लिए छोटे-छोटे लक्ष्य तय करना। एक बार छोटे लक्ष्य तय करने के बाद हमारे सामने अपने वृहद लक्ष्य को प्राप्त करने से जुड़ी तस्वीर साफ होती जाती है। छोटे लक्ष्य बड़े मकसद का आधार बनते हैं। यहां जरूरी है अपनी गतिविधियों पर नजर रखना और यह जानना कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं।<br />
<strong>युवा कर्मचारी:</strong> युवा कर्मियों के लिए करियर मैनेजमेंट को करियर डेवलपमेंट के विचार से जोड़ कर देखा जा सकता है। उन्हें स्पष्ट करना होता है कि वह एक जॉब की उम्मीद कर रहे हैं या करियर की नींव डाल रहे हैं। इसके लिए उन्हें कुछ तैयारियों की जरूरत होती है। जैसे कि उन्हें अपनी जॉब का कौन-सा पक्ष नापसंद है या अपने करियर के किस हिस्से को वह सबसे अधिक पसंद करते हैं? शुरुआत में यह पहेली सुलझाना आसान नहीं होता। अधिकांश व्यक्ति इस पहेली में मार्ग से भटक जाते हैं। सिर्फ एक स्पष्ट योजना इस सवाल का जवाब बन सकती है। यहां आशय करियर गाइडेंस से भी है, जो अन्य बातों के साथ-साथ करियर और निजी जीवन में भी संतुलन स्थापित करने में भूमिका निभाती है।<br />
<strong>परिभाषा करियर की:</strong> आधुनिक संदर्भ में करियर की परिभाषा को समझना जरूरी है। दरअसल करियर के दायरे में रोजगार के सभी पक्ष आते हैं। सेमी-स्किल्ड से लेकर स्किल्ड तक और सेमी-प्रोफेशनल से लेकर पूर्ण प्रोफेशनल तक। साथ ही करियर के दायरे में किसी व्यक्ति का अपने समूचे कार्यकाल में किसी एक प्रोफेशन, बिजनेस फर्म या किसी हुनर पर काम करना भी आता है। हालांकि पिछले कुछ समय में करियर की कथित परिभाषा में विस्तार करते हुए निकट व सुदूर भविष्य रोजगार में परिवर्तन या स्थानांतरण को भी शामिल किया गया है। <em>एजेंसी </em></p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2016 13:03:00 +0530</pubDate>
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