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                <title>Milch Animals - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं का रखें विशेष ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[टीकाकरण से दुग्ध उत्पादन पर नहीं पड़ता कोई स्थाई असर: डॉ. मनीष ओढां, (राजू)। गर्मी इंसानों के साथ-साथ मवेशियों पर भी पूरा असर डालती है। (Milch Animals) देखने में आता है कि गर्मी के मौसम में पशु की दुग्ध उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। अगर तापमान में बढ़ोत्तरी होती है तो पशु के दुग्ध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/take-special-care-of-milch-animals-in-the-summer-season/article-48356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/milk-product-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">टीकाकरण से दुग्ध उत्पादन पर नहीं पड़ता कोई स्थाई असर: डॉ. मनीष</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां, (राजू)।</strong> गर्मी इंसानों के साथ-साथ मवेशियों पर भी पूरा असर डालती है। (Milch Animals) देखने में आता है कि गर्मी के मौसम में पशु की दुग्ध उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। अगर तापमान में बढ़ोत्तरी होती है तो पशु के दुग्ध उत्पादन में औसतन 3 से 10 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। वहीं अधिक तापमान के कारण पशु हीट के लक्षण कम दिखाता है व उसकी गर्भधारण करने की क्षमता कम हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में पशुओं (Milch Animals) की किस तरह से देखभाल होनी चाहिए और क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इसके लिए सच-कहूँ संवाददाता राजू ओढां ने पशुपालन विभाग कालांवाली के वेटनरी सर्जन डॉ. मनीष कुमार से बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने टीकाकरण के बाद पशु के दुग्ध उत्पादन पर असर, बार-बार रिपीट होने की समस्या तथा प्रजनन संबंधी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मनीष के अनुसार अक्सर देखने में आता है कि दुधारू पशु (Milch Animals) अधिक गर्मी सहन नहीं कर पाते। जिसके चलते उनकी दुग्ध उत्पादन व प्रजनन क्षमता दोनों प्रभावित हो जाती है। जब तापमान 33 डिग्री से अधिक हो जाता है तो पशुओं के दुग्ध उत्पादन में 3 से 10 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है। इसके अलावा गर्मी में पशुओं की प्रजनन क्षमता और गर्भधारण की दर भी कम हो जाती है। अधिक तापमान के कारण पशु गर्भधारण के लिए हीट के लक्षण कम दिखाता है। जिसके परिणामस्वरूप पशु समय पर गर्भधारण नहीं कर पाता।</p>
<h3>दुग्ध काल के शुरू के दिनों में पशु नकारात्मक ऊर्जा में होता है | Milch Animals</h3>
<p style="text-align:justify;">भैंस में ये समस्या अधिक देखी जाती है। डॉ. मनीष बताते हैं कि ताप नियमन एक प्रमुख जैविक प्रक्रिया है। जिसके द्वारा पशु अपने शरीर का तापमान विभिन्न मौसम में सामान्य बनाए रखते हैं। पशु का शरीर चया-पचयन क्रिया तथा आसपास के वातावरण से ऊष्मा प्राप्त करता है। जब वातावरण का तापमान पशु के शरीर के तापमान से कम होता है तब उसके शरीर से विकिरण ऊष्मा निकलकर वातावरण में मिल जाती है। इसके विपरीत जब वातावरण का तापमान पशु के शरीर के तापमान से अधिक होता है तब पशु विकिरण द्वारा वातावरण में अपने शरीर की ऊष्मा नहीं निकाल पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए पशु शरीर द्वारा उत्पन्न ऊष्मा को कम करने की कोशिश करता है। जिससे पशु चारा खाना कम कर देता है और उसकी चयापचयन क्रिया कम हो जाती है। फलस्वरूप पशु की दुग्ध क्षमता घट जाती है। यदि उसके बाद भी पशु अपने शरीर के तापमान को बढ़ने से नहीं रोक पाता तो वह तापमान के दबाव (हीट स्ट्रेस) में आ जाता है। दुग्ध काल के शुरू के दिनों में पशु नकारात्मक ऊर्जा में होता है। तब ये दबाव और अधिक होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये है हीट स्ट्रेस के लक्षण :- | Milch Animals</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर पशु कई दिनों तक हीट स्ट्रेस से ग्रस्त रहता है तो उसकी मृत्यु भी हो सकती है। हीट स्ट्रेस में आने यानी तापमान बढ़ने पर पशु में उपरोक्त लक्षण दिखाई देते हैं।<br />
पशु में बेचैनी रहने के साथ-साथ मुंह खोलकर सांस लेने लग जाता है।<br />
उसकी सक्रियता कम हो जाती है।<br />
दुग्ध उत्पादन में कमी आ जाती है।<br />
पशु पानी की तरफ जाने लगता है।<br />
शरीर का तापमान बढ़ जाता है।<br />
पशु अपना आहार कम कर देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये हैं बचाव के तरीके :-</h3>
<p style="text-align:justify;">पशु को सूर्य की सीधी किरणों से बचाएं।<br />
छायादार वृक्षों के नीचे रखें।<br />
दिन में 3 से 4 बार नहलाएं।<br />
स्वच्छ पानी नियमित उपलब्ध रहे।<br />
पशु को आहार सुबह-शाम को ही डालें।<br />
जिस जगह पशु रखें वहां हो सके तो फव्वारा सिस्टम लगाएं ताकि पशु के आसपास का तापमान ठंडा रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पशु को उपयुक्त खनिज तत्व दें | Milch Animals</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मनीष बताते हैं कि विभाग द्वारा पशुओं को मुंहखुर व गलघोटू से बचाने के लिए एक वर्ष में 2 बार संयुक्त टीकाकरण किया जाता है। अक्सर देखा जाता है कि पशुपालक दुधारू पशुओं को दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ने के चलते टीकाकरण से दूर रखते हैं। डॉ. मनीष ने बताया कि टीकाकरण से पशु के दुग्ध उत्पादन पर कोई स्थाई असर नहीं पड़ता। टीकाकरण के उपरांत 2 से 3 दिन तक थोड़ा-बहुत असर पड़ता है वो भी गर्मी के दिनों में। पशु के खानपान पर उचित ध्यान देने तथा कैल्सियम व गुड़ खिलाने से दुग्ध उत्पादन सामान्य हो जाता है। डॉ. मनीष ने पशुपालकों से आह्वान किया कि अपने पशुओं का टीकाकरण जरूर करवाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बार-बार रिपीट होना (फुरना) कोई स्थाई समस्या नहीं :-</h3>
<p style="text-align:justify;">देखा जाता है कि पशु में बार-बार रिपीट होने (फुरना) की समस्या आ जाती है। ऐसे में कई बार पशुपालक पशु को छोड़ देते हैं। लेकिन ये समस्या कोई स्थाई समस्या नहीं है। डॉ. मनीष के मुताबिक ये समस्या कई बार पशु का समय पर गर्भाधान न होने, खनिज तत्वों की कमी आने, बच्चेदानी के अंदर संक्रमण या हार्माेन का असंतुलन होने के कारण हो सकती है। पशु का इलाज करवाने से ये समस्या दूर हो जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जैर गिरने का इंतजार करें :-</h3>
<p style="text-align:justify;">कई बार पशु बयाने के तुरंत बाद जैर नहीं गिराता। इसके लिए करीब 24 घंटे का इंतजार जरूर करें। इसके अलावा 7-8 घंटे उपरांत जैर गिराने की दवा भी दी जा सकती है। डॉ. मनीष के मुताबिक हाथ से जैर निकलवाना अंतिम विकल्प होना चाहिए। क्योंकि हाथ से जैर निकालने से पशु की बच्चेदानी में संक्रमण हो जाता है। बाद में पशु नया गर्भधारण करने में लंबा समय ले लेता है। गर्भाधान के अंतिम चरण में अगर पशु का गर्भपात होता है तो पशुपालक को बड़ी ही सावधानी से मृत बच्चे एवं जैर को गड्ढा खोदकर दफना देना चाहिए। क्योंकि इससे पशुओं से मनुष्य में ब्रुसेलोसिस नामक बीमारी आने की संभावना उत्पन्न हो जाती है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 15:54:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुधारू पशुओं का रखें खास ख्याल</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले कुछ सालों में अचानक मौसम बदलने और अनियमित तापमान रहने से चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। किसान फसलों में नुकसान को झेल ही रहे हैं। पशुओं (Milch Animals) पर भी इसका बुरा असर हो रहा है। एक बार फिर मौसम ने अपना रुख बदल दिया है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में बढ़त दर्ज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/take-special-care-of-milch-animals/article-46856"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/milch-animals.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सालों में अचानक मौसम बदलने और अनियमित तापमान रहने से चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। किसान फसलों में नुकसान को झेल ही रहे हैं। पशुओं (Milch Animals) पर भी इसका बुरा असर हो रहा है। एक बार फिर मौसम ने अपना रुख बदल दिया है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में बढ़त दर्ज की जा रही है। आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, अप्रैल से दूसरे पखवाड़े से देश के कई इलाकों में अचानक तापमान बढ़ेगा और अगले 2 महीने भीषण गर्मी के आसार हैं। ऐसे में ना सिर्फ किसानों को सावधानी बरतने को कहा गया है, बल्कि अब पशुपालकों के लिए भी एडवायजरी जारी की जा रही है। पशुओं को तपती गर्मी और लू से बचाने के लिए अभी से विशेष इंतजाम करने की सलाह दी जा रही है, ताकि दूध-डेयरी के कारोबार पर बुरा असर ना पड़े।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Arjun ki Chhal: इस पेड़ की छाल, किसानों को करेगी मालामाल, विदेशों में बढ़ी डिमांड" href="http://10.0.0.122:1245/arjun-ki-chhal-the-bark-of-this-tree-will-make-farmers-rich-increased-demand-abroad/">Arjun ki Chhal: इस पेड़ की छाल, किसानों को करेगी मालामाल, विदेशों में बढ़ी डिमांड</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">गर्मी में परेशान हो जाते पशु</h3>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती गर्मी में पशुओं को लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। कई बार तेज गर्मी में पशुओं की त्वचा सिकुड़ने और दूध की मात्रा कम होने के मामले देखे जाते हैं। यदि पशुओं की देखभाल में जरा सी लापरवाही उन्हें गंभीर बीमारियों का शिकार बना देती है, जिससे पशुओं की जान चली जाती हैं। इस समस्याओं से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालकों को पहले से ही कुछ सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। पशुओं के लिए तबेला या शेड डालकर पशु बाड़ा तैयार करना होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन बातों का रखें खास ध्यान</h3>
<p style="text-align:justify;">इंसान की तरह पशुओं को भी डीहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। पानी की कमी होने से पशु सही दूध नहीं दे पाते। गर्मी के दिनों में पशुओं को प्रतिदिन 2-3 बार पानी पिलाना चाहिए। इसके अलावा पशुओं (Milch Animals) को पानी में आटा और नमक मिलाकर पिलाने से लू लगने का खतरा नहीं रहता और पशुओं में एनर्जी कायम रहती है। तेज गर्मी पड़ने पर पशुओं में बुखार की संभावना बढ़ जाती है। इस दौरान पशुओं की जीभ बाहर निकल आती है और पशु झाग छोड़ने लगते हैं। पशुओं में सांस की दिक्कत भी पैदा हो जाती है और वे हांफने लगते हैं। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, ये सभी लक्षण दिखने पर बीमार पशुओं को सरसों का तेल पिला सकते हैं। इसमें मौजूद वसा से पशुओं में एनर्जी बढ़ जाती है और वे स्वस्थ-एनर्जेटिक महसूस करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खान-पान का रखें खास ध्यान</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों के दौरान बेहतर दूध उत्पादन के लिए पशुओं को एक्स्ट्रा केयर और फीड की आवश्यकता होती है। इस दौरान पशुओं (Milch Animals) को हरा और पौष्टिक चारा खिलाएं। बता दें कि हरे चारे में 70 से 90 प्रतिशत पानी होता है, जिससे पशु हाइड्रेटिड रहते हैं।</p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/take-special-care-of-milch-animals/article-46856</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Apr 2023 17:54:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अब इंसानों के साथ-साथ दुधारू पशुओं के भी आधार कार्ड!</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए पशुओं के लिए जारी हो रही 12 अंक की विशेष आईडी नई दिल्ली। (सच कहूँ न्यूज) केंद्र सरकार ने हर आम आदमी की पहचान के लिए आधार कार्ड और पहचान पत्र जारी किए हैं। हर आधार कार्ड पर 12 अंक का एक नंबर अंकित होता है, जो व्यक्ति विशेष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/now-also-an-aadhaar-card-for-milch-animals/article-41904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/milch-animals.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए पशुओं के लिए जारी हो रही 12 अंक की विशेष आईडी</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। (सच कहूँ न्यूज)</strong> केंद्र सरकार ने हर आम आदमी की पहचान के लिए आधार कार्ड और पहचान पत्र जारी किए हैं। हर आधार कार्ड पर 12 अंक का एक नंबर अंकित होता है, जो व्यक्ति विशेष की आइडेंटिटी पेश करता है। इसी कड़ी में पशुओं के लिए भी आधार कार्ड जारी किए जा रहे हैं और इन पशुओं की पहचान के लिए 12 अंक का टैग भी बनाया जा रहा है, जिसके लिए पशु के मालिक से 5 रुपये चार्ज किए जाते हैं। आपको बता दें कि 12 नंबर का इस आइडेंटीफिकेशन टैग के जरिए पशुओं की पहचान और समय पर उनका टीकाकरण करवाना आसान हो गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जयपुर में मिला नए वैरिएंट का मरीज, इसकी रफ्तार पहले के वैरिएंट से 104 गुना तेज" href="http://10.0.0.122:1245/no-patient-died-of-corona-in-the-last-24-hours-in-the-country/">जयपुर में मिला नए वैरिएंट का मरीज, इसकी रफ्तार पहले के वैरिएंट से 104 गुना तेज</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">पशुपालन विभाग की पहल</h3>
<p style="text-align:justify;">यह पशुपालन विभाग की पहल है, जो राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत सभी पशुओं की टैगिंग करने और उनका पहचान पत्र बनाने के लिए शुरू हुई है। देश में अकसर मवेशियों को बीमारियों या दुर्घटनाओं से जान-माल का खतरा रहता है। कई बार पशुओं की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पशुओं की टैगिंग करके पहचान पत्र (12 अंकों का नंबर) प्रदान किया जा रहा है, जिससे अब मवेशियों की सारी जानकारी आॅनलाइन उपलब्ध होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यहां जारी टीकाकरण अभियान</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि राजस्थान के कोटा जिले में केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुओं में खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पशुओं को एफएमड़ी वैक्सीनेशन किया जाना है। साथ ही मिशन पशु आरोग्य योजना के तहत पशुओं की पहचान के लिए कान में पीले रंग का 12 अंको का टैग लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। अब हर पशुपालक को अपने पशु की यूआईडी टैगिंग करवानी होगी। पशु चिकित्सक के पास जाकर अपना आधार कार्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर देना होगा, जिसके बाद पशु का रजिस्ट्रेशन कर दिया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिना टैगिंग के नहीं लगेगी वैक्सीन</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार अब पशुपालन के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव कर रही है। लंपी जैसी बीमारियों से सबक लेकर अब पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। सरकार की गाइडनाइन्स के अनुसार, अब से उन्हीं मवेशियों का टीकाकरण किया जाएगा, जिनके पास आधार कार्ड (12 अंकों का यूआईडी टैग) होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पशुओं को मिलेगा ऐसे लाभ</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के आम नागरिक की पहचान उसका आधार कार्ड है। इसी आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। अब उसी तरह मवेशियों की यूआईडी टैगिंग करके 12 अंक का आधार नंबर जारी किया जा रहा है, जिसके आधार पर पशुपालक को अपने मवेशियों का कृत्रिम गभार्धान यानी आर्टिफिशियल इसेमिनेशन की सुविधा दी जाती है। इतना ही नहीं, इस टैगिंग से पशुओं के अगले-पिछले टीकाकरण की जानकारी पशुपालक के फोन ही उपलब्ध हो जाएगी और पशुपालन से जुड़ी तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ लेना भी आसान हो जाएगा।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jan 2023 16:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब दुधारू पशुओं का सिर्फ 100 रूपए में होगा बीमा</title>
                                    <description><![CDATA[अब गौशालाओं में भी होगा पशुओं का बीमा अनुसूचित जाति के पशुपालकों को फ्री बीमा मिलेगा सच कहूँ/भगत सिंह, सरसा। पशुपालकों के लिए खुशखबरी है कि पंडित दीन दयाल उपाध्यक्ष सामूहिक पशुधन बीमा योजना फिर से शुरू हो गई है। योजना के तहत अब पशुपालक 25 रुपए से लेकर 300 रुपए का प्रीमियम देकर अपने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-milch-animals-will-be-insured-for-only-rs-100/article-31318"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/milch-animals.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>अब गौशालाओं में भी होगा पशुओं का बीमा</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>अनुसूचित जाति के पशुपालकों को फ्री बीमा मिलेगा</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/भगत सिंह, सरसा।</strong> पशुपालकों के लिए खुशखबरी है कि पंडित दीन दयाल उपाध्यक्ष सामूहिक पशुधन बीमा योजना फिर से शुरू हो गई है। योजना के तहत अब पशुपालक 25 रुपए से लेकर 300 रुपए का प्रीमियम देकर अपने बड़े पशुओं जैसे गाय, भैंस (Milch Animals) के साथ-साथ छोटे पशुओं का भी बीमा करवा सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं गौशालाएं भी 5 पशुओं का बीमा करवा सकती हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन व प्रदेश सरकार के सांझा कार्यक्रम के अनुसार पूर्व में चलाई गई। इस योजना में पिछले 3 वर्षों में 3 लाख से अधिक पशुपालकों ने 6.43 लाख पशुओं का बीमा करवाया था, जो एक रिकार्ड है। पशुओं की अचानक मौत होने पर मिलने वाली आर्थिक मदद के रूप में अब तक 42 करोड़ रुपए की राशि बीमा क्लेम में दी जा चुकी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दो वर्गों में होगा बीमा</h4>
<p style="text-align:justify;">नई बीमा पॉलिसी के अनुसार पशुओं का दो प्रकार से वर्गीकरण किया गया है, जिसमें बड़े व छोटे पशु शामिल रहेंगे। बड़े पशुओं में गाय, भैंस, झोटा, सांड, घोड़ा, ऊंट, खच्चर, बैल इत्यादि शामिल हैं, जबकि छोटे पशुओं में भेड़, बकरी व खरगोश का बीमा किया जाएगा। हर परिवार 5 पशुधन यूनिट का बीमा करवा सकता है। एक यूनिट में एक बड़ा पशु और 10 छोटे जानवर शामिल होंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसे पाए योजना का लाभ</h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा पशुधन (Milch Animals) विकास बोर्ड व न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी की ओर से पशुओं का एक वर्ष का बीमा होगा, जिसमें बीमा राशि का 1.49 प्रतिशत की दर से प्रीमियम लिया जाएगा। अनुसूचित जाति के पशुपालकों के लिए फ्री बीमा रहेगा। बड़े पशुओं के लिए 100 रुपए से लेकर 300 रुपए तक प्रीमियम राशि देकर श्रेणी अनुसार बीमा होगा, जबकि छोटे जानवरों के लिए मात्र 25 रुपए खर्च करने होंगे। यदि पशुपालक चाहे तो आगामी 3 वर्ष के लिए बीमा करवा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दुर्घटना में मिलेगा बीमा क्लेम</h4>
<p style="text-align:justify;">योजना के अनुसार पशु की आकस्मिक या दुर्घटना में हुई मौत को कवर किया जाता है। बीमा होने के 21 दिन बाद यह योजना लागू होती है। हालांकि पशु चोरी होने पर कोई क्लेम नहीं होगा। एक पालक बड़े पशुओं की दूध क्षमता एवं आयु के आधार पर 50000 से लेकर अधिकतम 88000 रुपए तक, जबकि छोटे पशुओं या जानवरों की मौत पर अधिकतम 10 से 20 हजार रुपए तक क्लेम राशि का दावा कर सकेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसे करें आवेदन</h4>
<p style="text-align:justify;">बीमा कराने के लिए पालक को सरल पोर्टल या ई-सेवा केंद्र (कॉमन सर्विस सेंटर, अंत्योदय केंद्र, अटल सेवा केंद्र व ई-दिशा केंद्र) के माध्यम से आॅनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए परिवार पहचान पत्र, मतदाता या राशन कार्ड की कॉपी, पशु चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाण पत्र, बैंक डिटेल की मुहैया करवानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले करीब एक वर्ष से यह योजना बंद थी, लेकिन प्रदेश सरकार के प्रयास से इसे दोबारा शुरू किया गया है, जिसका पशुपालकों को बहुत फायदा मिलेगा। इससे पूर्व पशु डेयरी संचालकों व घरों में पशु पालने वाले लोगों को पशुओं का बीमा करवाने के लिए 4 से 5 हजार रुपए प्रति पशु तक खर्च करने पड़ रहे थे, लेकिन अब 100 से 300 रुपये के मात्र खर्च से जोखिम कवर हासिल किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ी बात यह भी है कि मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार कल्याण योजना में शामिल गरीब परिवारों के लिए तो यह योजना और भी सहायक सिद्ध होगी। योजना में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सागर बंसल, उपनिदेशक पशुपालन विभाग सिरसा।</strong></p>
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                <pubDate>Sun, 06 Mar 2022 13:20:47 +0530</pubDate>
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