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                <title>परवान चढ़तें भारत-ब्राजील संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील का मुख्य फोकस सुसुप्त होते व्यापारिक रिश्तों में दोबारा प्राण फूंकने पर रहा। हालांकी व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुए है, दोनों के बीच 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार 8.2 अरब अमरीकी डॉलर का रहा। इसमें 3.8 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात और 4.4 अरब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-brazil-relationship-improved/article-12899"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/india-brazil-relationship.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील का मुख्य फोकस सुसुप्त होते व्यापारिक रिश्तों में दोबारा प्राण फूंकने पर रहा। हालांकी व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुए है, दोनों के बीच 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार 8.2 अरब अमरीकी डॉलर का रहा। इसमें 3.8 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात और 4.4 अरब डॉलर का भारत का आयात शामिल है। बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपना द्विपक्षीय व्यापार 2022 तक 15 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।</h3>
<h3 style="text-align:justify;">एन.के. सोमानी</h3>
<h4 style="text-align:justify;">ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो की भारत यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील के बीच कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैव ऊर्जा, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, खनन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, स्वास्थय, महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। इसके अलावा तेल एवं प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता हुआ। साथ ही दोनों देश निवेश बढ़ाने और आपराधिक मामलों में एक-दूसरे का सहयोग करने पर भी सहमत हुए। बोलसोनारो भारत के 72वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि की हैसियत से भारत आए हुए थे। वे यहां चार दिन रहे। जनवरी 2019 में राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी। 11 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जब पीएम नरेन्द्र मोदी ब्राजील गये थे, उस वक्त उन्होंने बोलसोनारो को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि की हैसियत से भारत आने का न्यौता दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था।<br />
हालांकी इससे पहले साल 1996 में राष्ट्रपति फर्नेंडो हेनरीकुए कार्डोस और 2004 में राष्ट्रपति लुईस इनासिलयो लूला डिसिल्वा गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्यअतिथि के रूप में भारत आ चुके हैं, लेकिन बोलसोनारो की भारत यात्रा इस लिए अहम थी, क्योंकि राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा थी। दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील के साथ भारत के हमेशा से ही अच्छे रिश्ते रहें है। भौगोलिक दूरी होने के बावजूद दोनों अनेक वैश्विक मंचों पर एक साथ खडेÞ दिखते हंै। दोनों देश कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र और उससे बाहर कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सामरिक साझेदार है। ब्रिक्स, जी-20, जी-4, विश्व व्यापार संगठन और अंतरराष्ट्रीय सोलर सहयोग संगठन जैसे मंचों पर दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल देखा गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत-ब्राजील समान दृष्टिकोण रखते हैं। बोलसोनारो के भारत दौरे के दौरान भी दोनों देश बहुस्तरीय मुददों पर अपने सहयोग को और मजबूत करने तथा सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में आवश्यक सुधार के लिए मिलकर काम करने को तैयार हुए है।<br />
साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह चार दिवसीय दौरे पर ब्राजील गए थे। यह 38 वर्ष के बाद किसी भारतीय पीएम की ब्राजील यात्रा थी। इस यात्रा के बाद भारत-ब्राजील संबंधों में निरन्तर घनिष्ठता आयी। डॉ. सिंह की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्वता दोहरायी। साल 2016 में गोवा में आयोजित हुए आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेल में भाग लेने के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल तेमेर ने भारत का दौरा किया था। मिशेल की भारत यात्रा के दौरान भी भारत-ब्राजील के बीच कई अहम मसलों पर सहमति बनी थी। भारत-ब्राजील के बीच 1948 में कूटनीतिक संबंध शुरू हुए, अब सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। साल 2023 दोनों देश के बीच राजनयिक संबंधों की प्लैटिनम जुबली साल होगा।<br />
बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्राजील का मुख्य फोकस सुसुप्त होते व्यापारिक रिश्तों में दोबारा प्राण फूंकने पर रहा। हालांकी व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुए है, दोनों के बीच 2018-19 में द्विपक्षीय व्यापार 8.2 अरब अमरीकी डॉलर का रहा। इसमें 3.8 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात और 4.4 अरब डॉलर का भारत का आयात शामिल है। बोलसोनारो की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपना द्विपक्षीय व्यापार 2022 तक 15 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। गन्ना किसानों के मामले में भी ब्राजील के भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में जाने के मुददे को दोनों पक्षों ने आपसी परामर्श से सुलझाने का निर्णय लिया है।<br />
भारत और ब्राजील के बीच मुक्त वीजा सिस्टम भी लागू है। दोनों देशों के पर्यटक और कारोबारी बिना वीजा के एक-दूसरे के देश में आ जा सकते हैं। अक्टूबर 2019 में राष्ट्रपति बोलसोनारो ने भारतीय नागरिकों को वीजा मुक्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की थी। हालांकी इससे पहले 22 देशों के साथ हमारा मुक्त वीजा समझौता है, लेकिन ब्राजील जैसे बड़े व मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश के साथ मुक्त वीजा समझौता अहम माना जा रहा है। अभी पीछले दिनों ही मोदी सरकार ने भारत और ब्राजील के बीच सामाजिक सुरक्षा के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी है। विदेशों में कम समय के लिए काम करने वाले भारतीयों के हितों की रक्षा करने तथा भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमताओं को बढ़ाने के दृष्टिगत भारत का कई देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता (एसएसए) है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जबकि ब्राजील 21 करोड़ की आबादी और 1800 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश। अर्थव्यवस्था के लिहाज से दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध होना जरूरी भी है।<br />
पूर्व सेना प्रमुख रहे 65 वर्षीय बोलसोनारो ने अक्टूबर 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रचंड जीत हासिल कर पिछले साल जनवरी में राष्ट्रपति पद सभांला था। सत्ता में आने के बाद उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि वह विकासशील देशों के लिए भी अपनी नीतियोें में बदलाव करेंगें। भारत के लिए मुक्त वीजा की घोषणा बोलसोनारो की इन्हीं नीतियों का परिणाम कहा जा रहा है। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि बोलसोनारो के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।<br />
हालांकी बीच के काल खंड में दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाली कुछ घटनाएं भी हुई। गोवा की आजादी और इसके भारत में शामिल किए जाने को लेकर भारत-ब्राजील रिश्तों में कुछ ठहराव आया। इसकी बड़ी वजह यह थी कि ब्राजील गोवा में पुर्तगाल की मौजूदगी को सही बताता था। इसके पीछे उसके पुर्तगाल से ऐतिहासिक रिश्ते थे, ब्राजील मानता था कि भारत ने वहां सैन्य कार्रवाई कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है। इसी तरह साल 2009 में ब्राजील ने भारत की आपत्ती के बावजूद पाकिस्तान को 85 मिलियन यूरो की 100 एंटी विकिरण मिसाइलों की बिक्री का सौदा किया। लेकिन वर्तमान में दोनों देश इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि उनके संबंध अब सामरिक भागीदारी के एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां से वह अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाईयां प्रदान कर सकते है। दोनों यूएन को और अधिक व्यवहारिक व कारगार बनाने के लिए उसमें सुधार करने और इसे आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के मुद्दे पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। यूएन सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के लिहाज से दोनों के बीच मजबूत संबंध काफी जरूरी है, सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता के लिए दोनों वर्षों से दावेदार हैं। दोनों देश आईबीएसए (इब्सा वार्ता मंच) पहल में शामिल है। हाल ही मे ब्राजील और भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विकास, पर्यावरण, संयुक्त राष्ट्र के सुधार और यूएनएससी विस्तार जैसे मुद्दों पर बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग किया है।<br />
बोलसोनारो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आतंक के वित्तपोषण एवं राज्य प्रायोजित आतंकवाद की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए एफएटीएफ में साथ मिलकर काम करने का निश्चय किया है। दोनों देशों ने सभी देशों से आतंकवाद के शरणस्थली को खत्म करने, उनके नेटवर्क एवं वित्तपोषण के मार्गों को अवरूद्व कर देने तथा आतंकवादियों को सीमा के आर-पार, आने-जाने पर रोक देने की दिशा में मिलकर काम करने की अपील की।<br />
सच तो यह है कि भारत के साथ ब्राजील के बहुआयामी संबंध है। यह द्विपक्षीय संबंध साल 2014 में उस वक्त और गहरे हुए जब सत्ता में आने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार ब्राजील के उत्तर-पूर्वी शहर फोटार्लेजा में आयोजित ब्रिक्स देशों की छठी शिखर बैठक में भाग लेने के लिए ब्राजील गए थे। उसके बाद से दोनों देशों के संबंध कमोबेश अपनी गति से आगे बढ़ते रहें है। हालांकि इस बीच भारत-ब्राजील व्यापारिक संबंधों में जरूर गिरावट आई है। मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले साल 2011 में दोनों देशों के बीच 11 बिलियन से अधिक का व्यापार था, जो साल दर साल घटते हुए साल 2016 में 5.6 बिलियन रह गया है। भारत ब्राजील से चीनी, कपास, सोया, पैट्रोलियम उत्पाद और सोना आयात करता है, जबकि भारत ब्राजील को दवाइयां, केमिकल और फार्मा स्यूटिक्लस, आटोमोबाइल पार्टस और कपड़ों का निर्यात करता है। जनसंख्या के लिहाज से जहां भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, वही ब्राजील क्षेत्रफल की दृष्टि से पांचवा बड़ा देश है। दोनों देशों के पास एक बड़ा बाजार है, जो एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था को साधने और गति देने में कारगर हो सकते है।</h4>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 21:39:58 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान न सुधरा तो होगा सबसे बड़ा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पूरी दुनिया ईरान और अमेरिका से शांति बनाये रखने की अपील कर रही है। ट्रम्प ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ‘उन्होंने (ईरान) हम पर हमला किया और हमने उसका जवाब दिया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/if-iran-does-not-improve-then-the-biggest-attack-will-happen/article-12250"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/biggest-attack.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">अमेरिकी राष्टपति ट्रम्प ने दी सख्त चेतावनी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)</strong>। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अमेरिका को दोबारा निशाना बनाता है, तो उस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पूरी दुनिया ईरान और अमेरिका से शांति बनाये रखने की अपील कर रही है। ट्रम्प ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ‘उन्होंने (ईरान) हम पर हमला किया और हमने उसका जवाब दिया। यदि वे फिर से हमला करते हैं, तो मैं उन्हें सख्त हिदायत देना चाहता हूँ कि वे ऐसा न करें, वरना हम उन (ईरान) पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करेंगे।’</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> अमेरिका ने सैन्य उपकरण पर 20 खरब डॉलर खर्च किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">अमेरिका के पास दुनिया में सबसे अधिक और अब तक के सबसे अच्छे सैन्य उपकरण हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘यदि ईरान अमेरिकी अड्डे या किसी अमेरिकी नागरिक पर हमला करता है,</li>
<li style="text-align:justify;">तो हम बेझिझक उसके खिलाफ कुछ नए और अच्छे उपकरणों का इस्तेमाल करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">अमेरिका ईरान की कार्रवाई का तीव्र गति से मुंहतोड़ जवाब देगा।</li>
<li style="text-align:justify;">अमेरिका अब और खतरा नहीं चाहता है।’</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">उल्लखनीय है कि अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमले में ईरानी कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी तथा कई उसके सहयोगियों के मारे जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी देश चीन, रूस तथा फ्रांस अमेरिकी हमले से उत्पन्न स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत की अमेरिका को भारी कीमत चुकानी होगी। ईरान क्षेत्र में किसी तरह का तनाव नहीं चाहता है लेकिन इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने और अस्थिरता का कारण अमेरिका का यह गलत कार्य है।</em></strong><br />
<strong><em>-हसन रूहानी, ईरान के राष्ट्रपति</em></strong></p>
<p> </p>
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</span></span></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Sun, 05 Jan 2020 16:40:06 +0530</pubDate>
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                <title>क्या यूपी में कांग्रेस की स्थिति सुधरेगी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपनी संभावनाओं को तलाशते हुए दिखाई देने लगे हैं। खासकर केन्द्रीय भूमिका में विपक्षी दलों की इस बात के लिए कवायद की जाने लगी है कि कैसे भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी भाजपा नीत सरकार बनने से इस बार रोका जाए। मात्र इसीलिए उत्तरप्रदेश में पिछली बार लगभग मात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपनी संभावनाओं को तलाशते हुए दिखाई देने लगे हैं। खासकर केन्द्रीय भूमिका में विपक्षी दलों की इस बात के लिए कवायद की जाने लगी है कि कैसे भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी भाजपा नीत सरकार बनने से इस बार रोका जाए। मात्र इसीलिए उत्तरप्रदेश में पिछली बार लगभग मात खा चुके बसपा, सपा और कांग्रेस नए सिरे से योजनाएं बनाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। इस तैयारी के अंतर्गत जहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक दूसरे के समीप आने की घोषणा कर चुके हैं, वहीं कांग्रेस इस प्रदेश में अपनी स्वयं की नाव पर सवारी करके पार करने के लिए जतन कर रही है। उत्तरप्रदेश में यह बात यकीनन तौर पर सही सही राजनीतिक आंकलन करने के लिए काफी है कि सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो स्वाभाविक ही है कि वह भाजपा के लिए परेशानी खड़ी करेंगे ही, लेकिन जिस प्रकार से कांग्रेस ने सभी लोकसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, वह एक दिवास्वप्न की भांति ही दिखाई दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहा जाता है कि उत्तरप्रदेश में कांग्रेस का जनाधार पूरी तरह से सिमट जा रहा है। मात्र रायबरेली और अमेठी की बात को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस कितना भी जोर लगा ले अपनी स्थिति में व्यापक सुधार नहीं कर सकती। इसके पीछे मात्र यही कारण माना जा रहा है कि जिस वर्ग के आधार पर कांगे्रस पूर्व में सफलता के पायदान चढ़ती रही है, वह उसके पास से पूरी तरह से खिसक गए हैं।इसके लिए जहां एक तरफ महागठबंधन जैसी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिसकी शुरूआत उत्तरप्रदेश से हो चुकी है, लेकिन इस राजनीतिक दोस्ती को महागठबंधन का नाम देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसमें मात्र दो ही दल हैं। और फिर इन दोनों दलों के बीच जिस तरह से संख्यात्मक सीटों का वितरण हुआ है, वैसा ही भौगोलिक स्तर पर हो जाएगा, इस बात की गुंजाइश कम ही दिखाई देती है। निश्चित रुप से दोनों ही राजनीतिक दल अपनी पसंद के लोकसभा क्षेत्रों का चुनाव करेंगे। यही एक ऐसा मुद्दा है, जब दोनों दलों में तलवारें खिंच सकती हैं। दोनों दलों में क्या होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन इन सबमें एक बात खुलकर सामने आई है, वह यही कि इन दलों ने कांग्रेस को ठेंगा दिखाया है। यानी इन दोनों के लिए कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति क्या है? इसका भी खुलासा हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भले ही विपक्षी राजनीतिक दलों में कांग्रेस के लिए यह बात संजीवनी का काम कर रही है कि उसकी अभी हाल ही में देश के तीन बड़े राज्यों में सरकार बन गई है, लेकिन फिर भी वह विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए प्रमुखता में नहीं आ पाया है। गठबंधन की दिशा में प्रयास करने वाले सभी दल अपने-अपने तरीके से स्वयं के महत्व को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। और ऐसा वह कांग्रेस के साथ आकर नहीं कर सकते। क्योंकि जिसने भी कांग्रेस के साथ दोस्ती की है, वह डूबते हुए जहाज का यात्री ही प्रमाणित हुआ। हम जानते हैं कि लगभग तीन वर्ष पहले तमिलनाडु में द्रमुक भी कांग्रेस के साथ आई थी, उसकी सरकार बनते बनते रह गई, उसी प्रकार उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों की दास्तान भी ऐसी ही कहानी बयान करती हुई दिखाई देती है। सपा के अखिलेश यादव ने कांग्रेस के राहुल गांधी से दोस्ती का हाथ बढ़ाया, परिणाम क्या हुआ विकास पुरुष के रुप में प्रचारित किए गए अखिलेश यादव न घर के रहे और न घाट के यानी कांग्रेस के चक्कर में राज्य की सरकार चली गई। बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पहले से ही तीसरे स्थान पर रखा गया, जिसको कांग्रेस ने भी स्वीकार किया। इसके बाद अभी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस के लिए मात्र दो सीटें ही दी गई हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि आज कांग्रेस किस स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">गठबंधन के दिशा में भले ही कुछ राजनीतिक दलों की ओर से कवायद की जा रही है, लेकिन इसके चलते कुछ दलों की ओर से बेसुरे राग भी निकाले जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो स्पष्ट तौर पर कहा है कि वे लोकसभा के चुनाव में प्रधानमंत्री उम्मीदवार की घोषणा नहीं चाहतीं। इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि कहीं वे स्वयं प्रधानमंत्री तो बनना नहीं चाह रहीं। खैर… जो भी हो विपक्षी एकता के नाम पर जो भी खेल चल रहा है, वह अभी तो ठीक स्थिति में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी और बीजू जनता दल की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वह गठबंधन में शामिल नहीं होंगी। फिर भी वर्तमान राजनीति में किसी भी बात पर विश्वास करना ठीक नहीं होगा। क्योंकि स्थितियां बनेंगी भी और बिगड़ेंगी भी। कुल मिलाकर विपक्षी दलों की यह सारी कवायद केवल भाजपा को रोकने के लिए ही है, इसके अलावा और कोई एजेंडा नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी भूमिका में शामिल दलों में इस बात का डर दिखाई दे रहा है कि कहीं आगामी समय में होने वाले लोकसभा के चुनाव में पहले जैसी स्थिति न बन जाए। जो बसपा प्रमुख मायावती 2014 के चुनाव के समय अपने बिना केन्द्र सरकार के नहीं बनने की बात कह रही थीं, उस बसपा की एक भी लोकसभा सीट नहीं आई थी। इसी बात के डर से मायावती ने समाजवादी पार्टी की ओर अपने कदम बढ़ाकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि वह आज भी अपने अकेले दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है। कुछ इसी प्रकार की स्थिति समाजवादी पार्टी की भी है। इन दोनों दलों के गठबंधन को देखकर यह भी कहा जा रहा है कि उत्तरप्रदेश में अब कांग्रेस को सहारा देने वाला कोई भी नहीं है यानी कांग्रेस अपने दम पर ही चुनाव मैदान में उतरेगी। कांग्रेस का यह हाल केवल उत्तरप्रदेश में ही है, ऐसा नहीं है। अन्य प्रदेशों में कांग्रेस के साथ केवल उसी स्थिति में छोटे दल आने के लिए तैयार हैं, जब कांग्रेस अपने आपको दूसरे नंबर की स्थिति में रखने को तैयार करे। आखिर उनके भी अस्तित्व का सवाल है। ऐसा संकेत पहले भी मिल चुका है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jan 2019 13:41:55 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कहानी प्रतियोगिता से निखरेंगी बाल-प्रतिभाएं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेशभर के 8695 प्राथमिक विद्यालयों केलिए भेजी गई राशि सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बच्चों को पढ़ने-लिखने में कोई परेशानी न आए इसके लिए हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ‘पढ़े भारत-बढ़े भारत’ कार्यक्रम के तहत अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन करने जा रहा है। हरियाणा स्कूल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/child-talents-will-improve-the-story-competition/article-4995"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/child-talents.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">प्रदेशभर के 8695 प्राथमिक विद्यालयों केलिए भेजी गई राशि</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा</strong><br />
<strong>सरसा</strong>। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बच्चों को पढ़ने-लिखने में कोई परेशानी न आए इसके लिए हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ‘पढ़े भारत-बढ़े भारत’ कार्यक्रम के तहत अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन करने जा रहा है। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद् के तत्वाधान में आयोजित हो रहे ‘पढ़े भारत-बढ़े भारत’ कार्यक्रम के तहत प्रदेशभर के 8695 प्राथमिक विद्यालयों की दूसरी व तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में कहानी पढ़ना, कहानी सुनाना व कहानी लिखना आदि की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।</p>
<h2>प्रतियोगिता स्कूल लेवल, ब्लॉक स्तर व जिलास्तर पर आयोजित की जाएगीं</h2>
<p style="text-align:justify;">उक्त प्रतियोगिता स्कूल लेवल, ब्लॉक स्तर व जिलास्तर पर आयोजित की जाएगीं। वहीं प्रतियोगिता के मद्देनजर विभाग ने प्रदेश के सभी प्राथमिक स्कूलों में बरखा सीरिज कहानियां वाली किताबें भी भिजवा दी गई हंै। इतना ही नहीं प्रतियोगिता के लिए विभाग ने प्रदेश के 21 जिलों के लिए करीब 6 लाख 52 हजार 920 का बजट भी जारी किया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">किस कक्षा के बच्चे किस में देंगे प्रस्तुती</h2>
<p style="text-align:justify;">समग्र शिक्षा अभियान सरसा के सहायक परियोजना अधिकारी नरेन्द्र सिंह ने बताया कि सर्वप्रथम ‘पढ़े भारत-बढ़े भारत’ कार्यक्रम के तहत स्कूल स्तर पर उक्त प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में प्राथमिक विद्यालय से कक्षा द्वितीय के विद्यार्थी दो कैटेगरी में भाग लेंगे। उनमें एक कहानी सुनाना व दूसरा कहानी पढ़ना शामिल है। जबकि कक्षा तीसरी के विद्यार्थी तीन कैटगरी में भाग लेंगे। इनमें कहानी सुनाना, कहानी पढ़ना व कहानी लिखना शामिल है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">119 ब्लॉकों के 1785 विद्यार्थी जिला स्तर  पर देंगे प्रस्तुती</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रतियोगिता के द्वितीय चरण में स्कूलों से जीतकर आए प्रतिभागी ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रस्तुती देंगे। जिलास्तर के लिए ब्लॉक से कक्षा दूसरी में कहानी सुनाना व कहानी पढ़ना के लिए 3-3 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। वहीं कक्षा तीसरी से कहानी सुनाना, कहानी पढ़ना व कहानी लिखना में भी 3-3 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। यानि ब्लॉक से जिला के लिए 15 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। वहीं प्रदेश के 119 ब्लॉकों के 1785 विद्यार्थी जिलास्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। वहीं जिला स्तर पर तीनों प्रतियोगिता में 15 प्रतिभागी विजेता घोषित किया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">8695 स्कूलों के 43,475 विद्यार्थी ब्लॉक स्तर पर दिखाएंगे हुनर</h2>
<p style="text-align:justify;">समग्र शिक्षा अभियान द्वारा करवाई जा रही उक्त प्रतियोगिता में सबसे पहले इसका आयोजन स्कूल स्तर पर होगा। ब्लॉक स्तर के लिए स्कूल से कक्षा द्वितीय में कहानी सुनाना व कहानी पढ़ना में एक-एक विद्यार्थी का चयन किया जाएगा। जबकि तीसरी कक्षा से कहानी सुनाना, कहानी पढ़ना व कहानी लिखना में एक-एक यानि 3 विद्यार्थियों का चयन एक स्कूल से ब्लॉक स्तर के लिए किया जाएगा। एक स्कूल से 5 विद्यार्थी ब्लॉक स्तर पर भाग लेंगे। इस तरह पूरे प्रदेश से 8695 स्कूलों के 43,475 विद्यार्थी ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jul 2018 04:09:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>क्या उच्च शिक्षा में होगा सुधार?</title>
                                    <description><![CDATA[देश में उच्च शिक्षा में सुधार के बारे में व्यापक बहस चल रही है। शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी और अन्य विशेषज्ञों ने शिक्षा के स्तर के बारे में चिंता व्यक्त की है और उसमें बदलाव की मांग की है। हमारे देश में शिक्षा प्रणाली में निश्चित रूप से बदलाव की आवश्यकता है और यह बदलाव केवल आईआईटी, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-will-improve-in-higher-education/article-4903"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/study.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में उच्च शिक्षा में सुधार के बारे में व्यापक बहस चल रही है। शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी और अन्य विशेषज्ञों ने शिक्षा के स्तर के बारे में चिंता व्यक्त की है और उसमें बदलाव की मांग की है। हमारे देश में शिक्षा प्रणाली में निश्चित रूप से बदलाव की आवश्यकता है और यह बदलाव केवल आईआईटी, आईआईएम या विश्वविद्यालयों में ही नहंी अपितु ग्रामीण और पिछडे़ जिलों में स्थित उच्च शिक्षा संस्थानों में भी किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव के बारे में भी चर्चा चल रही है और उसे अधिक व्यावहारिक और प्रासंगिक बनाने की मांग की जा रही है। विभिन्न संस्थानों ने इस बारे में प्रक्रिया शुरू कर दी है और कुछ संस्थानों ने अपने यहां गुणवत्ता में सुधार के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एक बड़ी मांग है और इस संबंध में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों ने कुछ प्रगति की है जबकि राज्य विश्वविद्यालय अभी भी राज्यों के पूर्ण नियंत्रण में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व में भारत की स्थिति के मद्देनजर शिक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है। वर्तमान में न केवल विश्व स्तर पर अपितु एशियाई देशों में भी शिक्षा के मामले में भारत की स्थिति अच्छी नहंी है। इसलिए इस बारे में चर्चा चल रही है कि हमें शिक्षा में सुधार करना चाहिए अन्यथा हमारा देश चीन और सिंगापुर जैसे देशों से पिछड़ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बात को ध्यान में रखते हुए केन्द्र ने भरतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है। जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 का निरस्तन किया जाएगा। सरकार की अनेक समितियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के स्थान पर नए विनियामक की स्थापना की सिफारिश की है। किंतु सरकार द्वारा यकायक उठाए गए इस कदम पर कुछ अध्यापकों ने आशंकाएं व्यक्त की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्रीय विश्वविद्यालय अध्यापक एसोसिएशन ने इस विधेयक के द्वारा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम होने की आशंका व्यक्त की है। ऐसा समझा जाता है कि भारतीय उच्च शिक्षा आयोग को उच्च शिक्षा के गुणवत्ता नियंत्रण और बेहतर मानदंड सुनिश्चित करने हेतु निगरानी की शक्तियां प्राप्त होंगी। किंतु उसके पास अनुदान देने की शक्ति नहीं होगी। अनुदान मानव विकास संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा दिए जाएंगे और आयोग केवल शैक्षिक विनियामक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को नया पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए आयोग से अनुमति लेनी होगी। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार किसी नए पाठ्यक्रम को शुरू करने से पहले विश्वविद्यालयों को अनुमति लेनी होगी। आयोग को यदि प्रतिकूल रिपोर्ट प्राप्त होती है तो वह नए पाठ्यक्रम को शुरू करने की अनुमति वापस ले सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च शिक्षा संस्थानों के वार्षिक मूल्यांकन से शिक्षा क्षेत्र में सुधार आएगा और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। इस विधेयक की आलोचनाएं की जा रही हैं किंतु किसी नई बात को करने पर ऐसी आलोचना होती रहती हैं। आयोग को पाठ्यक्रम विनियमित करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने, खराब प्रदर्शन कर रहे उच्च शिक्षा संस्थानों को बंद करने और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक और शीर्ष पदों की पात्रता शर्तें निर्धारित करने की शक्ति होगी। इसके चलते आगामी वर्षों में उच्च शिक्षा में सुधार होगा और यह उच्च शिक्षा के वर्तमान विनियामक ढ़ांचे से अलग होगा और वैश्विक मानदंडों के अनुरूप होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही भारतीय उच्च शिक्षा आयोग राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त होगा। यह एक 14 सदस्यीय निकाय होगा जो पूर्णत: पेशेवर निकाय के रूप में कार्य करेगा। हाल ही में एआईसीटीई के अध्यक्ष ने उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता में गिरावट के लिए उपकुलपतियों के गलत चयन को दोषी बताया है। जिसके चलते कोलकाता, मंबई और मद्रास जैसे सुस्थापित विश्वविद्यालयों का कार्यकरण प्रभावित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय उच्च शिक्षा आयोग को धीरे-धीरे और अधिक शक्तियं दी जानी चाहिए और नए संस्थानों को मान्यता देने के मामले में उसे विशेष शक्तियां दी जानी चाहिए क्योंकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों की अत्यधिक संख्या अच्छा नहंी है। आयोग को अनुदान देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सिफारिश करने की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए। किसी अन्य निकाय को ऐसी शक्ति देने से मामले उलझ सकते हैं और भारतीय उच्च शिक्षा आयोग का महत्व कम होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य महतवपूर्ण पहलू आयोग को उन्हें अंतर संकाय अध्ययन की अनुमति भी देनी चाहिए जैसे बायो इन्फोर्मेटिक्स, मैरीन इंजीनियरिंग, जलचर, नैनो टेक्नोलोजी, पर्यावरण विज्ञान और प्रबंधन आदि। हाल ही में कुछ विश्वविद्यालयों को शैक्षिक स्वायत्तता देने का निर्णय स्वागत योग्य है और गत वर्षों में जिन विश्वविद्यालयों के कार्य निष्पादन में सुधार आया है उन्हें भी स्वात्तता दी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक में अनुसंधान के पहलू पर बल नहीं दिया गया है। क्या आयोग इस पहलू की भी जांच करेगा या इसके लिए किसी अन्य राष्ट्रीय निकाया का गठन किया जाएगा? किंतु अधिक संस्थाओं का गठन अच्छा नहंी है और उच्च शिक्षा के लिए एक स्वतंत्र और सक्षम निकाय बनाया जाना चाहिए। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गत कुछ वर्षों में वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में भारत का योगदान केवल 3.5 से 3.7 प्रतिशत तक रहा है और वह चीन से बहुत पीछे है जिसका योगदान 21 प्रतिशत है। भारतीय संस्थानों में शिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता अच्छी नहंी है। जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां भारतीय संस्थानों को अच्छी रैकिंग नहंी देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस नए विधेयक से आशा की जाती है कि भारतीय संस्थान विश्व के 150 से 200 शीर्ष संस्थानों में आ पाएंगे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पूणे विश्वविद्यालय रैकिंग के मामले में बहुत पीछे है और उनकी रैकिंग लगभग 800 के आसपास है। जबकि चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, और दक्षिण अफ्रीका के दर्जनों विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन भारत से कहीं अच्छा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा सरकार को उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए अधिक धन राशि आवंटित करनी चाहिए ताकि हमारा देश तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करा सके और अंतर्राष्ट्रीय जगत में अपनी पहचान बना सके। इस संबंध में प्रोफेसर यशपाल समिति द्वारा 2009 में की गयी सिफारिशें प्रासंगिक हैं जिसमें उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अधिक धन राशि आवंटित करने और निजी निकायों पर कड़ा विनियमन और निगरानी रखने की सिफारिश की थी। समय आ गया है कि इन सिफारिशों को जल्दी से जल्दी लागू किया जाए<strong>। </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>धुर्जति मुखर्जी (इंफा)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Jul 2018 06:32:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>क्षेत्ररक्षण में सुधार करना होगा: विराट</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय कप्तान ने बल्लेबाजों और गेंदबाजों के प्रदर्शन को सराहा बर्मिंघम (एजेंसी)। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के अपने पहले मुकाबले में चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को करारी शिकस्त देने के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने अपने बल्लेबाजों और गेंदबाजों की जमकर तारीफ की लेकिन साथ ही उन्होंने क्षेत्ररक्षण में सुधार करने पर भी जोर दिया। भारत ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">भारतीय कप्तान ने बल्लेबाजों और गेंदबाजों के प्रदर्शन को सराहा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बर्मिंघम (एजेंसी)।</strong> आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के अपने पहले मुकाबले में चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को करारी शिकस्त देने के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने अपने बल्लेबाजों और गेंदबाजों की जमकर तारीफ की लेकिन साथ ही उन्होंने क्षेत्ररक्षण में सुधार करने पर भी जोर दिया। भारत ने 48 ओवर में तीन विकेट पर 319 रन का विशाल स्कोर बनाने के बाद वर्षा बाधित मुकाबले में पाकिस्तान को 33.4 ओवर में 164 रन पर ढेर कर 124 रन से मैच अपने नाम कर लिया। विराट ने कहा, ‘हमने गेंद और बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। इसके लिए मैं टीम को 10 में से नौ अंक दूंगा, लेकिन क्षेत्ररक्षण में हम छह अंक के बराबर ही थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तीन आसान कैच टपकाए</h3>
<p style="text-align:justify;">टूर्नामेंट में मजबूत टीमों के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए हमें अपने क्षेत्ररक्षण में सुधार करना होगा। भारतीय फील्डरों ने इस महामुकाबले में कम से कम तीन आसान कैच टपकाए। विराट ने अपने बल्लेबाजों की जमकर तारीफ करते हुए कहा, ‘शिखर और रोहित ने टीम को ठोस शुरुआत दिलाई। पिछली बार हम जब यहां खिताब जीते थे तो हमारे ओपनरों ने अह्म योगदान दिया था। रोहित ने कुछ समय लिया लेकिन वह चोट के बाद वापसी कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आईपीएल से अलग है। भारतीय कप्तान ने कहा, ‘शिखर के अलावा युवराज भी काफी अच्छी लय में थे और उनके सामने मैं क्लब क्रिकेटर लग रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरी ओवर में हार्दिक का प्रदर्शन भी कमाल का था। निश्चित रुप से इस जीत से टीम का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी कप्तान सरफराज अहमद ने हार पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि अंतिम आठ ओवरों ने हमें मैच से दूर कर दिया। सरफराज ने कहा, ‘40 ओवर के बाद भी हम मैच में थे। लेकिन अंतिम आठ ओवर में हमने मौका गंवा दिया। इसका श्रेय भारतीय बल्लेबाजों को जाता है जिन्होंने अंतिम आठ ओवर में 124 रन बनाए और वहीं लय भारत के पास चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 08:20:25 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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