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                <title>ISRO - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Shubhanshu Shukla Astronaut: अंतरिक्ष से सकुशल वापस लौटे शुभांशु शुक्ला, माता-पिता खुश</title>
                                    <description><![CDATA[Shubhanshu Shukla Astronaut: लखनऊ। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की सफल अंतरिक्ष यात्रा के पश्चात उनकी सुरक्षित पृथ्वी वापसी से पूरे देश में हर्ष और गौरव का वातावरण है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी शुभांशु के परिवार में भी विशेष उत्साह देखा गया। उनके माता-पिता ने इस ऐतिहासिक क्षण पर गर्व और भावुकता के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/shubhanshu-shukla-returned-safely-from-space-parents-happy/article-73445"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/shubhanshu-shukla-today.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shubhanshu Shukla Astronaut: लखनऊ। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की सफल अंतरिक्ष यात्रा के पश्चात उनकी सुरक्षित पृथ्वी वापसी से पूरे देश में हर्ष और गौरव का वातावरण है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी शुभांशु के परिवार में भी विशेष उत्साह देखा गया। उनके माता-पिता ने इस ऐतिहासिक क्षण पर गर्व और भावुकता के साथ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। Shubhanshu Shukla News</p>
<h3 style="text-align:justify;">“देश का नाम रोशन किया है मेरे बेटे ने” – पिता शंभू दयाल शुक्ला</h3>
<p style="text-align:justify;">शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, “मेरे बेटे की अंतरिक्ष यात्रा मेरे परिवार और पूरे देश के लिए गर्व की बात है। यह सब देशवासियों की शुभकामनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन से ही संभव हो पाया है। जब त्रिवेंद्रम में उसे ‘एस्ट्रोनॉट विंग’ प्राप्त हुआ था, तभी से उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया था।” उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्वयं शुभांशु को शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिए थे, जिससे उसका उत्साह अत्यधिक बढ़ा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">“अब वह केवल मेरा नहीं, पूरे देश का बेटा है” – माता आशा शुक्ला</h3>
<p style="text-align:justify;">शुभांशु की माता आशा शुक्ला ने भावुक स्वर में कहा, “जब त्रिवेंद्रम में हॉल में मेरे बेटे को ‘एस्ट्रोनॉट विंग’ प्रदान किया गया, तो तालियों की गूंज पूरे वातावरण में छा गई थी। वह क्षण मेरे जीवन का सबसे गर्वित क्षण था।” उन्होंने आगे कहा, “शुभांशु अब केवल हमारा बेटा नहीं रहा, वह भारत मां का सपूत बन गया है। देश की हर मां का आशीर्वाद उसे प्राप्त हो रहा है। पिछले चार वर्षों में उसने कठोर प्रशिक्षण और साधना की थी।”</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सिओम-4 मिशन के अंतर्गत शुभांशु ने 60 वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया, जिनमें से सात प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के थे। उनके इस योगदान को भारत ही नहीं, विश्व समुदाय ने भी सराहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सफल वापसी: स्पेसएक्स ने की पुष्टि | Shubhanshu Shukla News</h3>
<p style="text-align:justify;">शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्री 20 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पूरी करने के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। 23 घंटे की यात्रा के उपरांत ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने कैलिफोर्निया के तटवर्ती क्षेत्र में समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग की। स्पेसएक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा: “ड्रैगन के सुरक्षित उतरने की पुष्टि हो गई है। पृथ्वी पर आपका स्वागत है!”</p>
<p><a title="Delhi NCR weather update: दिल्ली-एनसीआर वालों को बारिश होने से मिली हिल स्टेशनों जैसी ताज़ा हवा" href="http://10.0.0.122:1245/great-improvement-in-delhi-ncr-air-quality-aqi-recorded-in-good-category/">Delhi NCR weather update: दिल्ली-एनसीआर वालों को बारिश होने से मिली हिल स्टेशनों जैसी ताज़ा हवा</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jul 2025 16:46:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ISRO: भारत रचेगा नया इतिहास! शुभांशु शुक्ला भरेंगे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष  उड़ान!</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। पहली बार कोई भारतीय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचेगा। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla), चार दशकों के अंतराल के बाद अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय बनेंगे। यह यात्रा एक्सिओम स्पेस मिशन-4 के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-will-create-new-history-shubhanshu-shukla-will-fly-on-an-international-space-flight/article-72555"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/isro-space.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। पहली बार कोई भारतीय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचेगा। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla), चार दशकों के अंतराल के बाद अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय बनेंगे। यह यात्रा एक्सिओम स्पेस मिशन-4 के तहत की जा रही है, जिसकी प्रक्षेपण तिथि बुधवार निर्धारित की गई है। यह प्रक्षेपण फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के प्रक्षेपण स्थल 39ए से होगा। ISRO News</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेसएक्स ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “एक्सिओम-4 मिशन बुधवार को अंतरिक्ष स्टेशन की ओर रवाना होगा। सभी प्रणालियाँ ठीक कार्य कर रही हैं और मौसम 90 प्रतिशत अनुकूल है।” यह अभियान बुधवार, भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे फाल्कन 9 रॉकेट के माध्यम से आरंभ होगा। इसके बाद चालक दल स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से अंतरिक्ष स्टेशन की ओर रवाना होगा। आईएसएस पर डॉकिंग गुरुवार, 26 जून को शाम लगभग 4:30 बजे (भारतीय समयानुसार) होने की संभावना है। Axiom Mission 4</p>
<h3>अंतरिक्ष स्टेशन की ओर भेजा जाने वाला चौथा निजी मानव मिशन | ISRO News</h3>
<p style="text-align:justify;">यह एक्सिओम स्पेस द्वारा अंतरिक्ष स्टेशन की ओर भेजा जाने वाला चौथा निजी मानव मिशन है। प्रारंभ में यह मिशन मौसम की प्रतिकूलता और तकनीकी कारणों, जैसे फाल्कन 9 में रिसाव की समस्या, के चलते कई बार स्थगित किया गया था। इन सभी समस्याओं के समाधान के बाद अब मिशन को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अभियान में भारत की ओर से शुभांशु शुक्ला प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जो इसरो का प्रतिनिधित्व करते हुए मिशन के पायलट होंगे। उनके साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की वरिष्ठ अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू शामिल हैं। यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए एक लंबे अंतराल के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान की वापसी का प्रतीक है।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 14 दिनों तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर यह दल विभिन्न वैज्ञानिक परीक्षण करेगा। शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष में भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और नासा के सहयोग से तैयार खाद्य एवं पोषण से संबंधित उन्नत प्रयोग भी संचालित करेंगे। ISRO News</p>
<p><a title="Iran Nuclear Site: ईरान के परमाणु स्थल ‘पूरी तरह नष्ट : डोनाल्ड ट्रंप" href="http://10.0.0.122:1245/irans-nuclear-site-completely-destroyed-donald-trump/">Iran Nuclear Site: ईरान के परमाणु स्थल ‘पूरी तरह नष्ट : डोनाल्ड ट्रंप</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 10:33:50 +0530</pubDate>
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                <title>Space News: जब भारत ने अंतरिक्ष में रचा नया इतिहास: पीएसएलवी-सी9 मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[Space News: 28 अप्रैल 2008 का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए गौरव और उपलब्धि का प्रतीक बन गया। इस दिन श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित हुआ पीएसएलवी-सी9 रॉकेट, जिसने एक साथ 10 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर विश्व स्तर पर भारत की तकनीकी दक्षता का परचम लहरा दिया। Space News यह उपलब्धि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pslv-c9-mission/article-70282"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/space-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Space News: 28 अप्रैल 2008 का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए गौरव और उपलब्धि का प्रतीक बन गया। इस दिन श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित हुआ पीएसएलवी-सी9 रॉकेट, जिसने एक साथ 10 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर विश्व स्तर पर भारत की तकनीकी दक्षता का परचम लहरा दिया। Space News</p>
<p style="text-align:justify;">यह उपलब्धि इसलिए भी अद्भुत थी क्योंकि इससे पहले इतने अधिक उपग्रहों को एक ही मिशन में छोड़ने का कारनामा केवल कुछ विकसित देशों ने ही किया था। पीएसएलवी-सी9 ने भारत का 690 किलोग्राम वजनी काटोर्सैट-2ए उपग्रह भी अंतरिक्ष में पहुँचाया, जो उच्च गुणवत्ता की पृथ्वी की तस्वीरें भेजने में सक्षम था। साथ ही, इसमें आठ विदेशी उपग्रह भी शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर जर्मनी और कनाडा के थे। Space News</p>
<p style="text-align:justify;">यह मिशन न केवल इसरो की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बना, बल्कि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त किया। Space News</p>
<p style="text-align:justify;">पीएसएलवी-सी9 की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अब भारत अंतरिक्ष विज्ञान की दौड़ में किसी से पीछे नहीं है — बल्कि नए कीर्तिमान गढ़ने के लिए तैयार है!</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Pahalgam Terror Attack: भारत सरकार द्वारा लिए जा रहे कठोर निर्णय दे रहे पाकिस्तान के लिए बदहाली बढ़ाने के संकेत" href="http://10.0.0.122:1245/the-tough-decisions-being-taken-by-the-indian-government-are-giving-indications-of-worsening-conditions-for-pakistan/">Pahalgam Terror Attack: भारत सरकार द्वारा लिए जा रहे कठोर निर्णय दे रहे पाकिस्तान के लिए बदहाली बढ़ाने के संकेत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/pslv-c9-mission/article-70282</link>
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                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 14:41:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ISRO Spadex Mission: इसरो ने फिर से रच दिया इतिहास, देखती रह गई दुनिया, जानिये&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु (एजेंसी)। ISRO Spadex Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैडेक्स) के तहत अपना पहला अंतरिक्ष डॉकिंग मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारत इस ऐतिहासिक सफलता से अमेरिका, रूस और चीन के बाद इस तकनीकी मील के पत्थर को हासिल करने वाला विश्व स्तर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-successfully-completed-its-first-space-docking-mission-under-space-docking-experiment/article-66496"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/bengaluru.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)।</strong> ISRO Spadex Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैडेक्स) के तहत अपना पहला अंतरिक्ष डॉकिंग मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारत इस ऐतिहासिक सफलता से अमेरिका, रूस और चीन के बाद इस तकनीकी मील के पत्थर को हासिल करने वाला विश्व स्तर पर चौथा देश बन गया है। इस डॉकिंग प्रक्रिया में अंतरिक्ष यान को 15-मीटर होल्ड पॉइंट से 3-मीटर होल्ड पॉइंट तक सही तरीके से संचालित करना शामिल था। डॉकिंग प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक क्रियान्वित किया गया, जिससे अंतरिक्ष यान का सफल मिशन सुनिश्चित हुआ। ISRO</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो (ISRO) ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘अंतरिक्ष यान डॉकिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई, एक ऐतिहासिक क्षण। अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इतिहास रचने वाली इसरो की टीम को बधाई दी है। यह अभूतपूर्व सफलता अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में इसरो की विशेषज्ञता को रेखांकित करती है। इसरो के अधिकारियों ने टीम को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इसरो ने कहा, ‘पूरी टीम को बधाई! भारत को बधाई। स्पैडेक्स के साथ भारत ने अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक में एक नया अध्याय खोला है जिससे भविष्य के अंतरग्रहीय मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन सहयोग का मार्ग प्रशस्त हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Humanity: एक ने मरने के लिए गली में फेंका तो एक ने बचाए प्राण" href="http://10.0.0.122:1245/one-threw-him-in-the-street-to-die-while-another-saved-his-life/">Humanity: एक ने मरने के लिए गली में फेंका तो एक ने बचाए प्राण</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/isro-successfully-completed-its-first-space-docking-mission-under-space-docking-experiment/article-66496</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2025 15:43:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Chandrayaan-4: चंद्रयान-3 के बाद अब चंद्रयान-4 की तैयारी, इसरो ने दी बड़ी खुशखबरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुज्जफरनगर (सच कहूं/अनु सैनी)। Chandrayaan-4: 2023 में चंद्रयान-3 ने इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैड किया था, इसके बाद 14 दिनों तक वह चंद्रमा पर एक्टिव रहा और उसके भेजे गए इनपुट्स के आधार पर कई जांच हुई, जो अब भी कभी-कभी हमारे सामने आ जाती हैं। वहीं अब चंद्रयान-4 मिशन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/after-chandrayaan-3-now-preparations-for-chandrayaan-4/article-63073"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/muzaffarnagar-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुज्जफरनगर (सच कहूं/अनु सैनी)।</strong> Chandrayaan-4: 2023 में चंद्रयान-3 ने इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैड किया था, इसके बाद 14 दिनों तक वह चंद्रमा पर एक्टिव रहा और उसके भेजे गए इनपुट्स के आधार पर कई जांच हुई, जो अब भी कभी-कभी हमारे सामने आ जाती हैं। वहीं अब चंद्रयान-4 मिशन पर सबकी नजरें गढ़ी हुई हैं। इसे 2029 में लॉन्च किया जाएगा और इसकी संभावित लागत 2104 करोड़ रुपये हैं, पिछले दिनों इसरो ने खुशखबरी दी थी कि चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) चांद से 2 से 3 किलो मिट्टी का सैंपल लेकर आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि चंद्रयान-4 में 5 तरह के मॉडयूल काम करेंगे, एसेंडर मॉडयूल, डिसेंडर मॉडयूल, री एंट्री मॉडयूल, ट्रांसफर मॉडयूल और प्रपल्शन मॉड्यूल। इन्हें दो अलग-अलग एमवीएम 3 लॉन्च व्हीकल्स में लॉन्च किया जाएगा। इसरो ने बताया है कि चंद्रमा पर लैंड करने के बाद रोबोटिक आर्म जिसे सरफेस सैंपलिंग रोबोट भी कहा जाता हैं, वह लैंडिंग साइट के आसपास से दो से तीन किलो की मिट्टी को निकालेगा और फिर एएम पर लगे हुए कंटेनर में भरेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सैंपल्स वाले कंटेनरों को पृथ्वी की यात्रा के दौरान रिसाव को रोकने के लिए सील कर दिया जाएगा, इसरो ने एक बयान में बताया कि मिट्टी को इकट्ठा करने के लिए विभिन्न चरणों की निगरानी वीडियों कैमरों के माध्यम से की जाएगी, इससे पहले इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा था कि चंद्रयान-3 ने यह करके दिखाया हैं कि हमारे लिए चंद्रमा के किसी भी स्थान पर लैंड करना संभव है और फिर वैज्ञानिक प्रयोग बहुत अच्छे रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दूसरा कदम है जाना और सुरक्षित वापस आना | Chandrayaan-4</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि चंद्रयान-4 का दूसरा कदम वहां जाना और सुरक्षित वापस आना हैं, और ऐसा करने के लिए हमें कई तकनीके विकसित करने की जरूरत हैं। यह सब चंद्रयान-4 का ही हिस्सा हैं। नमूना संग्रह जैसे वैज्ञानिक मिशन भी होंगे, उन्होंने कहा कि अगर भारत चांद पर जाता हैं, तो वे कुछ नया लेकर आएगे। चांद से कुछ वापस लाने मे कई दिक्कतें हैं आपको अलग-अलग जगहों से ड्रिल करके उसे इकट्ठा करना होगा, फिर नमूना लेने और उसे कंटेनर में इकट्ठा करने की रोबोटिक गतिविधि होती हैं, फिर कंटेनर को उस स्थान से लैंडर पर शिफ्ट करने की भी जरूरत होती हैं,जो चंद्रमा से उड़ान भरेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हाफ मैराथन में जिन्द्र पाल काका इन्सां बने चैम्पियन" href="http://10.0.0.122:1245/jinder-pal-kala-insan-became-champion-in-half-marathon/">हाफ मैराथन में जिन्द्र पाल काका इन्सां बने चैम्पियन</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2024 12:19:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>300 सैकंड में 10 सवाल, 1 लाख तक नकद इनाम</title>
                                    <description><![CDATA[100 प्रतिभागी मुफ्त करेंगे इसरो की यात्रा | ISRO News श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। ISRO News: इसरो द्वारा भारत की अद्भूत अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा के सम्मान में नेशनल स्पेस डे क्विज का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में विज्ञान और खोज के प्रति हमारे प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए कोई भी भारतीय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ten-questions-in-three-hundred-seconds-cash-prize-up-to-rs-one-lakh/article-61387"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">100 प्रतिभागी मुफ्त करेंगे इसरो की यात्रा | ISRO News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। </strong>ISRO News: इसरो द्वारा भारत की अद्भूत अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा के सम्मान में नेशनल स्पेस डे क्विज का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में विज्ञान और खोज के प्रति हमारे प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए कोई भी भारतीय नागरिक 10 सितंबर तक भाग ले सकता है। उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और उसकी टीम के असाधारण समर्पण और अटूट दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। ISRO News</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल प्रत्येक भारतवासी के लिए 23 अगस्त का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गया है क्योंकि इसी दिन चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की गई थी। इतना ही नहीं इस मिशन में सफलता के साथ भारत, दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपने चंद्रयान को पहुंचाने में सफलता पाई। अब, इस सफलता के बाद भारत सरकार विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रही है। ISRO News</p>
<h3 style="text-align:justify;">इनका कहना है | ISRO News</h3>
<p style="text-align:justify;">‘नेशनल स्पेस डे क्जि में किसी भी बोर्ड के विद्यार्थी आॅनलाइन भाग ले सकते हैं। इसके लिए नाम, मोबाइल, ईमेल, जन्मतिथि आदि सामान्य जानकारियों के साथ क्विज डॉट माइग व डॉट इन नेशनल स्पेस डे पर आवेदन करना होगा। क्विज में 10 प्रश्नों का उत्तर 5 मिनट में देना है। जिसमें नकारात्मक अंकन नहीं होगा।’’ -भूपेश शर्मा, जिला समन्वयक, विद्यार्थी परामर्श केन्द्र, श्रीगंगानगर</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस तरह से कर सकेंगे भागीदारी</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">क्विज सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुला है।</li>
<li style="text-align:justify;">पोर्टल पर प्रतिभागी द्वारा सही ओटीपी दर्ज करने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करते ही क्विज शुरू हो जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रतिभागियों को यह सुनिश्वित करना होगा कि आगे के संचार के लिए उनकी माईगव प्रोफाइल अपडेट की गई है। अधूरी प्रोफाइल विजेता बनने के योग्य नहीं होगी।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रश्नों को स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से प्रश्न बैंक से यादृच्छिक रूप से चुना जाएगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">इनाम की राशि का गणित | ISRO News</h3>
<p style="text-align:justify;">1. शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विजेता = 100000 रुपए<br />
2. द्वितीय विजेता प्रतिभागी= 75,000 रुपए<br />
3. तृतीय विजेता प्रतिभागी= 50,000 रुपए<br />
4. अगले 100 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को= 2000 रुपए<br />
5. अगले 200 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को= 1000 रुपए</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Earthquake: हरियाणा में भूकंप के झटके, लोग अपने मकानों और दुकानों और आफिस से निकले बहार" href="http://10.0.0.122:1245/haryana-earthquake/">Haryana Earthquake: हरियाणा में भूकंप के झटके, लोग अपने मकानों और दुकानों और आफिस से निकले बहार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Aug 2024 14:53:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO: अब इसरो के वैज्ञानिकों को राम सेतु पर मिली बड़ी सफलता!</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO Ram Setu Research: नई दिल्ली (एजेंसी)। इसरो जोकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है, ने एडम ब्रिज – जिसे कि राम सेतु के नाम से भी जाना जाता है, का सबसे विस्तृत मानचित्र तैयार किया है, जोकि इस बात की पुष्टि करता है कि डूबी हुई यह रिज भारत के धनुषकोडी से लेकर श्रीलंका के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/now-isro-scientists-have-got-a-big-success-on-ram-setu/article-59717"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/isro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ISRO Ram Setu Research: नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> इसरो जोकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है, ने एडम ब्रिज – जिसे कि राम सेतु के नाम से भी जाना जाता है, का सबसे विस्तृत मानचित्र तैयार किया है, जोकि इस बात की पुष्टि करता है कि डूबी हुई यह रिज भारत के धनुषकोडी से लेकर श्रीलंका के तलाईमन्नार द्वीप तक एक निर्मित है। रामसेतु जिसका वर्णन रामायण में वानर सेना द्वारा तैयार किए पुल के रूप में मिलता है, जोकि वानर सेना द्वारा रावण की लंका में माता सीता को वापिस लाने के लिए बनाया गया था। इसरो के जोधपुर और हैदराबाद राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्रों के शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन (नासा) उपग्रह ICESat-2 के साथ मानचित्रण अभ्यास किया, जिसने समुद्र तल से लेजर किरणों को उछालकर यह स्थापित किया कि एडम ब्रिज का 99.8 प्रतिशत हिस्सा उथले पानी में डूबा हुआ था। <strong>ISRO</strong></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-you-dont-have-a-place-to-walk-in-the-rain-then-do-this-yoga-at-home-you-will-get-many-benefits/">Yoga Benefits: बरसात में नहीं है वॉक करने की जगह, तो घर में करें ये योगा, मिलेगे अनेकों फायदें</a></p>
<p style="text-align:justify;">‘‘हमारे शोध के परिणाम इस बात की पुष्टि करते हैं कि, पूरी तरह से, एडम ब्रिज धनुषकोडी और तलाईमन्नार द्वीप का एक पनडुब्बी विस्तार है। वैज्ञानिकों द्वारा साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि एडम ब्रिज की शिखर रेखा के दोनों ओर लगभग 1.5 किमी का हिस्सा अत्यधिक उथली जलराशि के भीतर अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाला है, जिसमें अचानक गहराई की घटनाएँ होती हैं। एडम ब्रिज, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में राम सेतु के नाम से अधिक जाना जाता है, श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट से दूर मन्नार द्वीप और भारत के दक्षिण-पूर्वी तट से दूर रामेश्वरम द्वीप के बीच उथले पानी की एक श्रृंखला है। मौजूदा भूवैज्ञानिक साक्ष्यों ने सुझाव दिया है कि यह पुल भारत और श्रीलंका के बीच एक पूर्व भूमि कनेक्शन का प्रतिनिधित्व करता है। <strong>ISRO</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के वैज्ञानिकों अब इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि एडम ब्रिज के दोनों ओर आधार पर अनुप्रस्थ ढलानों की विषमता है, जो पाक जलडमरूमध्य की तुलना में मन्नार की खाड़ी के पानी से भौतिक ऊर्जा के प्रमुख उल्लंघन का संकेत देती है। अध्ययन में लिखा है, हमारे शोध में गणना की गई एडम ब्रिज की मात्रा लगभग 1 किमी 3 थी। दिलचस्प बात यह है कि इस आयतन का केवल 0.02 प्रतिशत ही औसत समुद्र तल से ऊपर है, और सामान्य तौर पर, आॅप्टिकल सैटेलाइट इमेजरी में भी यही दिखाई देता है – कुल मिलाकर, एडम्स ब्रिज का लगभग 99.98 प्रतिशत हिस्सा उथले और बहुत उथले पानी में डूबा हुआ है।’’ <strong>ISRO</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इससे पहले उपग्रह अवलोकनों ने डूबी हुई संरचना की उपस्थिति की पुष्टि की है, लेकिन ये उन हिस्सों पर केंद्रित थे जो पानी से ऊपर थे। इस तरफ समुद्र की उथली गहराई ने जहाजों से इस पुल का नक्शा बनाने के पिछले प्रयासों में भी बाधा डाली है। इस बार, शोधकर्ताओं ने ICESat-2 के हरे रंग के लेजर से निकलने वाले फोटॉन का इस्तेमाल किया, जिसमें लगभग 40 मीटर की गहराई तक समुद्र तल का पता लगाने की क्षमता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन में कहा गया है, ‘‘इस संभावना से संकेत लेते हुए, हमारे शोध में, हमने गहराई की जानकारी का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 0.2 मिलियन फोटॉन एकत्र किए हैं और एडम्स ब्रिज की सीमा के लिए 10 मीटर रिजॉल्यूशन का बाथिमेट्रिक डेटा तैयार किया है।’’ एडम्स ब्रिज की वर्तमान भौतिक विशेषताओं की पुष्टि करने के लिए, वैज्ञानिकों ने 3D-व्युत्पन्न मापदंडों के माध्यम से बाथिमेट्रिक डेटा से दृश्य व्याख्याओं का उपयोग किया, जिसमें आकृति, ढलान और वॉल्यूमेट्रिक विश्लेषण शामिल थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/now-isro-scientists-have-got-a-big-success-on-ram-setu/article-59717</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 12:52:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO News: &amp;#8230; तो हम सब मारे जाएंगे, इसरो चीफ सोमनाथ ने धरती वासियों को दी बड़ी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO Chief Somnath: इसरो का कहना है कि 370 मीटर व्यास वाला एक खतरनाक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के निकट से गुजरने वाला हैं, इसके पृथ्वी से टकराने की भी प्रबल संभावना हैं, इससे पहले 30 जून 1908 को साइबेरिया के एक सुंदूर स्थान तुंगुस्का में एक क्षुद्रग्रह के टकराने के कारण हुए विशाल हवाई विस्फोट ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/then-we-will-all-be-killed-isro-chief-somnath-gave-a-big-warning-to-the-people-of-the-earth/article-59576"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO Chief Somnath: इसरो का कहना है कि 370 मीटर व्यास वाला एक खतरनाक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के निकट से गुजरने वाला हैं, इसके पृथ्वी से टकराने की भी प्रबल संभावना हैं, इससे पहले 30 जून 1908 को साइबेरिया के एक सुंदूर स्थान तुंगुस्का में एक क्षुद्रग्रह के टकराने के कारण हुए विशाल हवाई विस्फोट ने लगभग 2200 वर्ग किलीमीटर घने जंगल को तहस-नहस कर दिया था, इसके कारण 8 करोड़ पेड़ नष्ट हो गए थे, अभी जो क्षुद्रग्रह धरती के नजदीक आ रहा है, उसके 13 अप्रैल 2029 को पास से गुजरने की संभावना हैं। ISRO News</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा कहा जता है कि जब-जब यह धरती से टकराती हैं तो कई प्रजातियां विलुप्त हो जाती हैं, इस बात की भी परिकल्पना है कि इसी के कारण धरती से डायनासोर विलुप्त हो गए थे। आपको बता दें कि दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां पृथ्वी को क्षुद्रग्रहों से बचाने के लिए ग्रह रक्षा क्षमताओं का निर्माण करने की दिशा में काम कर रही हैं, इसरो ने भी अपने मजबूत कंधों पर इसकी जिम्मेदारी ले ली हैं, इसरो प्रमुख एक सोमनाथ ने इसकी ताजा जानकारी भी दी है। ISRO News</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-you-are-dreaming-of-living-abroad-then-this-country-is-offering-good-jobs-and-full-benefits-of-living-abroad/">Job Opportunities In Foreign: अगर आप देख रहे हैं विदेश में जाकर रहने का सपना, तो ये देश दे रहा है अच्छी नौकरी और रहने का पूरा फायदा</a></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हमारा जीवनकाल 70-80 साल का होता हैं और हम अपने जीवनकाल में ऐसी कोई आपदा नहीं देखते हैं, इसलिए हम यह मानकर चलते हैं कि ऐसा होने की संभावना नहीं हैं, अगर आप दुनिया और ब्रह्मांड के इतिहास को देखें तों ग्रहों की ओर क्षुद्रग्रह के पहुंचने की घटना अक्सर होती रहती हैं, उन्होंने गुरुवार से टकराने वाले क्षुद्रग्रह को शूमेकर-लेवी से टकराते देखा है, अगर पृथ्वी पर ऐसी कोई घटना होती हैं तो सभी विलुप्त हो जाएंगे।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/which-is-more-poisonous-among-these-poisonous-creatures-scorpion-or-snake-read-full-information-here/#google_vignette">Venom: इन जहरीले जीवों में ज्यादा जहरीला कौन है बिच्छू या सांप? यहां पढ़ें पूरी जानकारी</a></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि ये वास्तविक संभावनाएं हैं, हमें खुद को तैयार करना चाहिए, वे नहीं चाहते कि ये धरती के साथ हो, वे चाहते है कि मानव और सभी जीव इस धऱती पर रहे। लेकिन वे इसे रोक नहीं सकते, उन्हें इसके लिए विकल्प खोजने होंगे। इससे आगे उन्होंने कहा कि उनके पास एक तरीका है जिससे वे इसे विक्षेपित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे पृथ्वी के निकट आने वाले क्षुद्रग्रह का पता लगा सकते हैं और उसे दूर ले जा सकते हैं। कभी-कभी यह असंभव भी हो सकता हैं। इसलिए प्रौद्योगिकी विकसित करने की आवश्यकता हैं, भविष्यवाणी करने की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता हैं, इसे विक्षेपित करने के लिए वहां भारी प्रॉप्स भेजने की क्षमता, अवलोकन में सुधार और एक प्रोटोकॉल के लिए अन्य देशों के साथ संयुक्त रूप से काम करने की आवश्यकता हैं। ISRO News</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो प्रमुख ने कहा कि यह आने वाले दिनों में आकार लेगा, जब खतरा वास्तविक हो जाएगा, तो मानवता एक साथ मिलकर इस पर काम करेगी, एक अग्रणी अंतरिक्ष राष्ट्र के रूप में हमें जिम्मेदारी लेने की जरूरत हैं, यह केवल भारत के लिए ही नहीं हैं, यह पूरी दुनिया के लिए हैं कि हमें तकनीकि क्षमता, प्रोग्रामिंग क्षमता और अन्य एजेंसियों के साथ काम करने की क्षमता तैयार करने और विकसित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। आपको बता दें कि वह विश्व क्षुद्रग्रह दिवस 30 जून पर इसरो द्वारा आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/then-we-will-all-be-killed-isro-chief-somnath-gave-a-big-warning-to-the-people-of-the-earth/article-59576</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 17:21:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO: चंद्रयान मिशन-3 की कामयाबी के 8 माह बाद वैज्ञानिकों को मिला बड़ा सरप्राइज&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO: डॉ. संदीप सिंहमार। चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग का डंका आठ महीने बाद भी पूरे विश्व में बज रहा है। टेक्नोलॉजी में माहिर जापान अमेरिका रूस भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों की सोच को सलाम करते आए हैं। यही एक वजह है कि 8 महीने बाद भारत की चंद्रयान-3 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/8-months-after-the-success-of-chandrayaan-mission-3-scientists-got-a-big-surprise/article-56263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/isro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO: <strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग का डंका आठ महीने बाद भी पूरे विश्व में बज रहा है। टेक्नोलॉजी में माहिर जापान अमेरिका रूस भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों की सोच को सलाम करते आए हैं। यही एक वजह है कि 8 महीने बाद भारत की चंद्रयान-3 मिशन टीम को अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित 2024 जॉन एल जैक स्विगरट जुनियर पुरस्कार से नवाजा गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलोरोडो में वार्षिक अंतरिक्ष कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्य दूत डीसी मंजूनाथ ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के वैज्ञानिकों को मिले इस अवॉर्ड से इसरो का कद पूरे विश्व में एक बार फिर बढ़ा है। स्पेस फाउंडेशन में एक विशेष प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाले पहले देश के रूप में भारत इसरो द्वारा विकसित मिशन चंद्रयान-3 मानवता की अंतरिक्ष अन्वेषण आकांक्षाओं को समझ और सहयोग के लिए नए क्षेत्रों तक विस्तारित करता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/another-good-news-after-increase-in-central-employees-and-stuck-da/">8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ोतरी और अटका डीए के बाद एक और खुशखबरी, पढ़े पूरी खबर</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">हीदर पिंगल ने जनवरी में की थी अवॉर्ड की घोषणा | ISRO</h3>
<p style="text-align:justify;">स्पेस फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीदर पिंगल ने जनवरी में इस पुरस्कार की घोषणा की थी। तब उन्होंने अपनी घोषणा के समय कहा था कि अंतरिक्ष में भारत का नेतृत्व दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा संपूर्ण चंद्रयान 3 टीम के अग्रणी कार्य ने अंतरिक्ष खोज के स्तर को फिर से बढ़ा दिया है उनकी उल्लेखनीय चंद्र लैंडिंग हम सभी के लिए एक मॉडल है। उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि हम यह देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकते कि आप आगे क्या करते हैं ? ज्ञात रहे कि पिछले वर्ष अगस्त में भारत के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मिशन चंद्रयान-3 के तहत चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था। दुनिया में पहली बार हुआ था इससे पहले साउथ पोल पर कोई भी देश सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Apr 2024 17:17:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Prizes on Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3 पर सवालों के जवाब दो और लाखों के इनाम पाओ! साथ ही इसरो घूमने का मौका!</title>
                                    <description><![CDATA[Prizes on Chandrayaan-3 : श्रीगंगानगर (सच कहूँ/लखजीत) इसरो द्वारा भारत की अद्भुत अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा के सम्मान में चंद्रयान -3 महाक्विज़ का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में विज्ञान और खोज के प्रति हमारे प्यार को प्रदर्शित करने के लिए कोई भी भारतीय नागरिक 31 अक्टूबर तक भाग ले सकता है। उल्लेखनीय है […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/answer-questions-on-chandrayaan-3-and-get-prizes-worth-lakhs-along-with-a-chance-to-visit-isro/article-54294"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/bhupesh-sharma2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Prizes on Chandrayaan-3 : <strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ/लखजीत) </strong>इसरो द्वारा भारत की अद्भुत अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा के सम्मान में चंद्रयान -3 महाक्विज़ का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में विज्ञान और खोज के प्रति हमारे प्यार को प्रदर्शित करने के लिए कोई भी भारतीय नागरिक 31 अक्टूबर तक भाग ले सकता है। उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और उसकी टीम के असाधारण समर्पण और अटूट दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। Sri Ganganagar News</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल प्रत्येक भारतवासी के लिए 23 अगस्त का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गया है क्योंकि इसी दिन चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की गई थी। इतना ही नहीं इस मिशन में सफलता के साथ भारत, दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपने चंद्रयान को पहुंचाने में सफलता पाई। अब, इस सफलता के बाद भारत सरकार विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रही है। उल्लेखनीय है कि 29 अक्टूबर शाम तक 38.75 लाख से ज्यादा प्रतिभागी ने इस महाक्विज में हिस्सा ले चुके हैं। Sri Ganganagar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस तरह से कर सकेंगे भागीदारी | Sri Ganganagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">1.क्विज सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुला है।<br />
2.पोर्टल पर प्रतिभागी द्वारा सही ओटीपी दर्ज करने के बाद ‘सबमिट’ बटन पर क्लिक करते ही क्विज शुरू हो जाएगी।<br />
3.प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे के संचार के लिए उनकी माईगव प्रोफ़ाइल अपडेट की गई है। अधूरी प्रोफाइल विजेता बनने के योग्य नहीं होगी।<br />
4.प्रश्नों को स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से प्रश्न बैंक से यादृच्छिक रूप से चुना जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इसरो और माईगव कर्मचारी और रिश्तेदार अपात्र</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रतियोगिता में प्रतिभागी के मोबाइल नंबर को मान्य करने के लिए वन टाइम पासवर्ड भेजा जाएगा जबकि अंतर्राष्ट्रीय उपयोगकर्ता वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के रूप में एक वैध ईमेल आईडी का उपयोग कर सकते हैं। क्विज में भाग लेने के लिए एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का एक से अधिक बार उपयोग नहीं किया जा सकता है। क्विज़ की मेजबानी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े इसरो और माईगव कर्मचारी और उनकी संबद्ध एजेंसियां या कर्मचारी क्विज़ में भाग लेने के लिए पात्र नहीं हैं। यह अपात्रता उनके निकटतम परिवार के सदस्यों पर भी लागू है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यह रहेगी पुरस्कार की राशि | Sri Ganganagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">1.शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विजेता = 100000 रुपए<br />
2.द्वितीय विजेता प्रतिभागी= 75,000 रुपए<br />
3.तृतीय विजेता प्रतिभागी= 50,000 रुपए<br />
4.अगले 100 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को= 2000 रुपए<br />
5.अगले 200 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को= 1000 रुपए</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक्सपर्ट व्यू</h3>
<p style="text-align:justify;">“चंद्रयान-3 महाक्विज़ में किसी भी बोर्ड के विद्यार्थी भाग ले सकतें हैं। इसके लिए isroquiz.mygov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण और मायगव प्रोफाइल को पूर्ण करना होगा। चयनितों को ईनाम के साथ इसरो चेयरमैन द्वारा हस्ताक्षरित ई-प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा। क्विज में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी।” Sri Ganganagar News</p>
<p style="text-align:right;"><strong>भूपेश शर्मा, जिला समन्वयक, विद्यार्थी परामर्श केंद्र, श्रीगंगानगर</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="IMD Rainfall Alert: इन दो राज्यों में भारी बारिश के आसार, जानें हरियाणा, दिल्ली का भी हाल" href="http://10.0.0.122:1245/heavy-rain-expected-in-tamil-nadu-and-kerala/">IMD Rainfall Alert: इन दो राज्यों में भारी बारिश के आसार, जानें हरियाणा, दिल्ली का भी हाल</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/answer-questions-on-chandrayaan-3-and-get-prizes-worth-lakhs-along-with-a-chance-to-visit-isro/article-54294</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Oct 2023 19:25:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 को लेकर इसरों ने किया बड़ा खुलासा, पूरी दुनिया सकते में&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3: 23 अगस्त का वो दिन जब चंद्रयान-3 ने संसार में इतिहास रच दिया था। वहीं आज इसरों ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि जब 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, तो उसने चंद्रमा की धूल और चट्टानों का एक गुच्छा उड़ा दिया था, जिससे लैंडर के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-made-a-big-revelation-regarding-chandrayaan-3-the-whole-world-is-shocked/article-54216"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/chandrayaan-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3: 23 अगस्त का वो दिन जब चंद्रयान-3 ने संसार में इतिहास रच दिया था। वहीं आज इसरों ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि जब 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, तो उसने चंद्रमा की धूल और चट्टानों का एक गुच्छा उड़ा दिया था, जिससे लैंडर के चारों ओर एक उज्ज्वल क्षेत्र बन गया, जैसा कि अपेक्षित था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/dont-throw-away-onion-peels-considering-them-as-garbage-make-onion-shampoo-and-toner-your-hair-will-become-long-till-knees/">Hair Growth: कचरा समझ कर न फेके प्याज के छिलके…बनाए Onion Shampoo और Toner, घुटनों तक हो जाएंगे लंबे बाल</a></p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही विक्रम नीचे उतरा और बाद में चंद्रमा की सतह पर उतरा, उसने अपने अवतरण चरण के थ्रस्टर्स को सक्रिय कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पर्याप्त मात्रा में चंद्र सतही एपि-रेगोलिथ (चंद्र मिट्टी या रेजोलिथ) सामग्री का उत्सर्जन हुआ, जिससे निर्माण हुआ। जिसे वैज्ञानिक अब “परावर्तन विसंगति” या ‘इजेक्टा हेलो’ कह रहे हैं। इसरो ने शुक्रवार को कहा कि ‘23 अगस्त को उतरते समय, चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल ने चंद्र सामग्री का एक शानदार ‘इजेक्टा हेलो’ उत्पन्न किया। एनआरएससी (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 2.06 टन चंद्र एपि-रेजोलिथ को लैंडिंग साइट के आसपास 108.4 वर्ग मीटर के क्षेत्र में विस्थापित और विस्थापित किया गया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Results:<br />
On August 23, 2023, as it descended, the Chandrayaan-3 Lander Module generated a spectacular ‘ejecta halo’ of lunar material.</p>
<p>Scientists from NRSC/ISRO estimate that about 2.06 tonnes of lunar epiregolith were ejected and displaced over an area of 108.4 m²…</p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1717797476403646918?ref_src=twsrc%5Etfw">October 27, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/this-vegetable-will-solve-your-uric-acid-problem-in-a-jiffy/">How To Reduce Uric Acid: ये सब्जी चुटकियों में दूर कर देगी आपकी यूरिक एसिड की समस्या!</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना की जांच करने के लिए, वैज्ञानिकों ने चंद्रयान -2 आॅर्बिटर पर आॅर्बिटर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) का रुख किया। उन्होंने विक्रम की लैंडिंग से कुछ घंटे पहले और बाद में प्राप्त उच्च-रिजॉल्यूशन पंचक्रोमैटिक इमेजरी की तुलना की। परिणाम ‘इजेक्टा हेलो’ का एक विस्तृत लक्षण वर्णन था, जो लैंडर को घेरने वाले एक अनियमित उज्ज्वल पैच के रूप में दिखाई दिया। यह खोज ऐसी घटनाओं के दौरान चंद्र सामग्रियों के व्यवहार पर प्रकाश डालती है और चंद्र भूविज्ञान पर शोध और समझ के लिए नए रास्ते खोलती है। इसके अलावा, अनुभवजन्य संबंधों का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लैंडिंग घटना के दौरान लगभग 2.06 टन चंद्र एपिरेगोलिथ को बाहर निकाला गया था। यह जानकारी चंद्र लैंडिंग में शामिल बलों और गतिशीलता और चंद्र सतह पर उनके प्रभाव के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/cardamom-is-very-beneficial-in-controlling-high-blood-pressure-know-its-benefits/">High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी फायदेमंद है यह मसाला</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2023 16:20:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Aditya L1 Mission: आदित्य एल 1 ने इसरो को भेजा कुछ खास, वीडियो देख आप भी कहेंगे वाह क्या बात है&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO Solar Mission:  भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल1 ने ऐसा कमाल कर दिया है जिससे पूरी दुनिया तारीफ कर रही है। दरअसल आदित्य एल 1 ने पृथ्वी व चंद्रमा की सेल्फी और तस्वीरें भी ली है। इस बात की जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधार संगठन इसरों ने ट्वीट कर दी है। गौरतलब है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/aditya-l1-sent-something-special-to-isro/article-52072"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/aditya-l1-mission-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO Solar Mission:  भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल1 ने ऐसा कमाल कर दिया है जिससे पूरी दुनिया तारीफ कर रही है। दरअसल आदित्य एल 1 ने पृथ्वी व चंद्रमा की सेल्फी और तस्वीरें भी ली है। इस बात की जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधार संगठन इसरों ने ट्वीट कर दी है। गौरतलब है कि इससे पहले आदित्य एल 1 ने मंगलवार को पृथ्वी की कक्षा से सम्बधित दूसरी प्रक्रिया सफलता पूर्वक पूरी की थी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Aditya-L1 Mission:<br />
👀Onlooker!</p>
<p>Aditya-L1,<br />
destined for the Sun-Earth L1 point,<br />
takes a selfie and<br />
images of the Earth and the Moon.<a href="https://twitter.com/hashtag/AdityaL1?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#AdityaL1</a> <a href="https://t.co/54KxrfYSwy">pic.twitter.com/54KxrfYSwy</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1699663615169818935?ref_src=twsrc%5Etfw">September 7, 2023</a></p></blockquote>
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<h4 style="text-align:justify;">क्या है Aditya L – 1 मिशन? Aditya L1 Mission</h4>
<p style="text-align:justify;">Aditya L – 1 सूर्य के लिए अध्ययन के लिए पहली भारतीय अंतरिक्ष आधारित ऑब्जर्वेटरी (वेधशाला) होगी। इसका काम सूरज पर 24 घंटे नजर रखना होगा। धरती और सूरज के सिस्टम के पांच Lagrangian point है। सूर्यान Lagrangian point 1(L 1) के चारों ओर एक हेली ऑर्बिट में तैनात रहेगा। L 1 पॉइंट की धरती से दूरी 1.5 मिलियन किमी है जबकि सूर्य की पृथ्वी से दूरी 150 मिलियन किमी है। एल 1 पॉइंट इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां से सूर्य पर सातों दिन 24 घंटे नजर रखी जा सकती है, ग्रहण के दौरान भी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/alien-seen-roaming-on-chandrayaan-3/">Aliens in Moon: Chandryan-3 पर घूमते नज़र आया ऐलियन?</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">सूर्य की स्टडी से क्या हासिल होगा? Aditya L1 Mission</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल अंतरिक्ष यान 7 पेलोड लेकर जाएगा यह पेलोड और फोटोस्फेयर (प्रकाशनगर), क्रोमोस्पेयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की सबसे भारी परत (कोरोना) का जायजा लेंगे। सूर्य में होने वाली विस्फोटक प्रक्रियाएं पृथ्वी के नजदीकी स्पेस एरिया में दिक्कत कर सकती है और बहुत से उपग्रह को नुकसान हो सकता है। ऐसी प्रक्रियाओं का पता पहले चल जाए तो बचाव के कदम उठा सकते हैं, लेकिन तमाम स्पेस मशीनों को चलाने के लिए स्पेस के मौसम को समझना जरूरी है। इस मिशन से स्पेस के मौसम को भी समझने में मदद मिल सकती है और इससे सौर हवाओं की भी स्टडी की जाएगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 15:59:50 +0530</pubDate>
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