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                <title>भारत अपने संविधान की ताकत से आगे बढ़ रहा है: PM</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत हमारा संविधान है, जिसके बल पर देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर उच्चतम न्यायालय परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा आज कि वैश्विक परिस्थितियों में पूरे विश्व की नजर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-is-moving-forward-on-the-strength-of-its-constitution/article-40213"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/modi-1-e16456914208532.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत हमारा संविधान है, जिसके बल पर देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर उच्चतम न्यायालय परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा आज कि वैश्विक परिस्थितियों में पूरे विश्व की नजर भारत पर है। भारत के तेज विकास, तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और मजबूत होती अंतरराष्ट्रीय छवि के बीच दुनिया हमें बहुत बड़ी उम्मीदों से देख रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सब के पीछे हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारा संविधान है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे संविधान के प्रेंबल की शुरूआत में जो ‘वी द पीपुल’ लिखा है। यह सिर्फ तीन शब्द नहीं है। यह एक आह्वान है, एक प्रतिज्ञा है। एक विश्वास है।” मोदी ने कहा कि संविधान में लिखी यह भावना उस भारत की मूल भावना है, जो दुनिया में लोकतंत्र की जननी रहा है। ‘मदर आॅफ डेमोक्रेसी’ रहा है। यही भावना हमें वैशाली के गणराज्य में भी दिखती है वेद की ऋचाओं में भी दिखती है मोदी ने कहा एक ऐसा देश जिसके बारे में कभी आशंका जताई जाती थी कि वह अपनी आजादी बरकरार नहीं रख पाएगा, बिखर जाएगा, आज पूरे सामर्थ से अपनी सभी विविधताओं पर गर्व करते हुए यह देश आगे बढ़ रहा है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 12:22:55 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय संविधान के शिल्पकार डा. अंबेडकर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रवाद के मोर्चे पर डॉ. अंबेडकर बेहद मुखर थे। उन्होंने विभाजनकारी राजनीति के लिए मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग दोनों की कटु आलोचना की। हालांकि शुरूआत में उन्होंने पाकिस्तान निर्माण का विरोध किया किंतु बाद में मान गए। इसके पीछे उनका तर्क था कि हिंदुओं और मुसलमानों को पृथक कर देना चाहिए क्योंकि एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/indian-constitution-architect-dr-ambedkar/article-20362"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/b.-r.-ambedkar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रवाद के मोर्चे पर डॉ. अंबेडकर बेहद मुखर थे। उन्होंने विभाजनकारी राजनीति के लिए मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग दोनों की कटु आलोचना की। हालांकि शुरूआत में उन्होंने पाकिस्तान निर्माण का विरोध किया किंतु बाद में मान गए। इसके पीछे उनका तर्क था कि हिंदुओं और मुसलमानों को पृथक कर देना चाहिए क्योंकि एक ही देश का नेतृत्व करने के लिए जातीय राष्ट्रवाद के चलते देश के भीतर और अधिक हिंसा होगी। वे कतई नहीं चाहते थे कि भारत स्वतंत्रता के बाद हर रोज रक्त से लथपथ हो। वे हिंसामुक्त समानता पर आधारित समाज के पैरोकार थे। उनकी सामाजिक व राजनीतिक सुधारक की विरासत का आधुनिक भारत पर गहरा प्रभाव पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं वह कारण है कि मौजुदा दौर में सभी राजनीतिक दल चाहे उनकी विचारधारा और सिद्धांत कितनी ही भिन्न क्यों न हो, सभी डा0 अंबेडकर की सामाजिक व राजनीतिक सोच को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। डा. अंबेडकर के राजनीतिक-सामाजिक दर्शन के कारण ही आज विशेष रुप से दलित समुदाय में चेतना, शिक्षा को लेकर सकारात्मक समझ पैदा हुआ है। इसके अलावा बड़ी संख्या में दलित राजनीतिक दल, प्रकाशन और कार्यकर्ता संघ भी अस्तित्व में आए हैं जो समाज को मजबूती दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. अंबेडकर समानता के सच्चे पैरोकार थे। हालांकि उन्हें जब भारत सरकार अधिनियम 1919 तैयार कर रही साउथबोरोह समिति के समक्ष गवाही देने के लिए आमंत्रित किया गया तो उन्होंने सुनवाई के दौरान दलितों एंव अन्य धार्मिक समुदायों के लिए पृथक निर्वाचिका और आरक्षण की मांग की। तब उनकी इस इस मांग की तीव्र आलोचना हुई और उन पर आरोप लगा कि वे भारतीय राष्ट्र एवं समाज की एकता को खंडित करना चाहते हैं। पर सच तो यह है उनका इस तरह का कोई उद्देश्य नहीं था। उनका असल मकसद इस मांग के जरिए ऐसे रुढ़िवादी हिंदू राजनेताओं को सतर्क करना था जो जातीय भेदभाव से लड़ने के प्रति गंभीर नहीं थे। इंग्लैंड से लौटने के बाद जब उन्होंने भारत की धरती पर कदम रखा तो समाज में छुआछुत और जातिवाद चरम पर था।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 06 Dec 2020 09:52:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>संविधान ही है लोक एवं देश का मार्गदशक</title>
                                    <description><![CDATA[संविधान सभा में विभिन्न रियासतों से 389 सदस्य थे लेकिन देश विभाजन के बाद 299 सदस्य ही बचे। उल्लेखनीय है कि हैदराबाद रियासत का कोई भी प्रतिनिधि संविधान सभा का सदस्य नहीं था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे। संविधान निर्माण हेतु पहली बैठक संसद भवन में 9 दिसंबर 1946 को हुई थी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/constitution-is-the-guide-of-public-and-country/article-20145"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/b.-r.-ambedkar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>संविधान सभा में विभिन्न रियासतों से 389 सदस्य थे लेकिन देश विभाजन के बाद 299 सदस्य ही बचे। उल्लेखनीय है कि हैदराबाद रियासत का कोई भी प्रतिनिधि संविधान सभा का सदस्य नहीं था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे। संविधान निर्माण हेतु पहली बैठक संसद भवन में 9 दिसंबर 1946 को हुई थी जिसमें 207 सदस्य शामिल हुए थे। भारत का संविधान हस्तलिखित है जिसे प्रेम बिहारी ने अंग्रेजी एवं हिंदी में विशेष शैली एवं तकनीक से लिखा है। मूल प्रति में 284 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं जिसके प्रत्येक पृष्ठ में देश के प्रसिद्ध चित्रकारों के बनाए हुए आकर्षक मनोहारी पारम्परिक चित्र दृष्टव्य हैं।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">परिवार देश की लघुतम इकाई होती है। परिवार से मिलकर ही एक वृहत्् समाज की रचना सम्भव होती है। प्रत्येक घर-परिवार एवं समाज में सदस्यों के कार्य व्यवहार एवं आचरण हेतु एक अलिखित नियमावली या संहिता होती है। परिवार एवं समाज अपने सदस्यों से अपेक्षा रखता है कि समाज की बेहतरी के लिए सभी इन नियमों का पालन, तालमेल-संगति कर ही कार्य संपादन करेंगे। नियमानुकूल आचरण कर समाज की विकास धारा को गतिशील रखते हुए उसे समृद्धि प्रदान करेंगे। नियमों में आबद्ध लोक अपनी कार्य संस्कृति से सतत ऊर्ध्वगामी यात्रा करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमानुशासित लोकाचरण से समाज में सद्वृत्ति, सद्नीति, शुचिता, सत्यान्वेषण, सहकार, समन्वय, सख्यभाव एवं सद्संस्कारों का बीजवपन, पल्लवन एवं फलन होता है और अराजकता, अनैतिकता, अशौच, अनीति के लिए कोई स्थान शेष नहीं होता। इन नियमों के परिनिष्ठित, परिमार्जित, प्रांजल लिखित स्वरूप को देश के संदर्भ में संविधान संज्ञा से अभिहित किया जाता है जिसमें लोक की शक्ति निहित होती है और जो विधायिका से अनुमोदित होता है। भारत में हम 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाकर न केवल संविधान निमार्ता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान एवं प्रयासों को स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं बल्कि देश में एकता एवं अखंडता के लिए परस्पर बंधुत्वभाव के प्रसार के लिए भी संकल्पित हो कटिबद्ध होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान दिवस को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व में सबसे बड़ा संविधान है। मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां थीं। वर्तमान में 470 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां है जो 25 भागों में विभाजित है। समिति ने भारतीय संविधान को पूर्ण करने में 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन समय लिया और 166 दिन बैठक कर 114 दिन बहस किया था। संविधान सभा की पहली बैठक दिसम्बर 1946में हुई थी। भारत का संविधान लचीला है और कठोर भी। लचीला इस संदर्भ में कि संसद कुछ कानूनों में सामान्य बहुमत से संशोधन कर सकती है लेकिन कुछ प्रावधानों में संशोधन हेतु राज्य सरकारों की सहमति एवं दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। संविधान में पहला संशोधन 1951 में हुआ था और अब तक 100 से अधिक संशोधन हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान की प्रस्तावना न केवल संविधान का परिचयात्मक खंड है बल्कि दार्शनिक आधार भी। प्रस्तावना का आरंभ वाक्यांश ‘हम भारत के लोग’ से होता है अर्थात संविधान लोक के शक्ति का प्रतिबिंब है। भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है। समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त है। संविधान सभी नागरिकों को प्रतिष्ठा और अवसर की समता भी देता है। व्यक्ति की गरिमा एवं राष्ट्र की अखंडता हेतु वह बंधुत्वभाव को महत्वपूर्ण मानते हुए तदनुकूल आचरण की अपेक्षा करता है। नीति निर्देशक तत्व को संविधान की आत्मा कहा गया है। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को, मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत 2006 विक्रमी को अंगीकृत किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन को स्मरण रखने और डॉ भीमराव अंबेडकर के योगदान के प्रचार प्रसार हेतु भारत सरकार द्वारा 2015 में अंबेडकर की 125 वी जयंती के अवसर पर मुंबई में उनकी स्टैचू आफ इक्वलिटी मेमोरियल की आधारशिला रखने के दौरान घोषणा की गई थी। और तब से प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संपूर्ण देश में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर संविधान दिवस मना कर देश भीमराव अंबेडकर को स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है। हालांकि अंबेडकर के प्रयासों को सामान्य जनमानस तक पहुंचाना एवं देश में भाईचारे की भावना बढ़ाने के उद्देश्य से यह दिवस हम पहले भी मनाते रहे हैं। संविधान बनाने हेतु संविधान सभा की मांग सर्वप्रथम 1934 में की गई थी जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1940 में मान लिया था। 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने की समिति की स्थापना की गई थी और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर चुने गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय संविधान से जुड़े रोचक तथ्यों पर नजर डालें तो हमारे संविधान की सबसे बड़ी रोचक बात यही है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। सर्वप्रथम सन् 1895 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने मांग की थी कि अंग्रेजों के अधीनस्थ भारत का संविधान स्वयं भारतीयों द्वारा बनाया जाना चाहिए लेकिन भारत के लिए स्वतंत्र संविधान सभा के गठन की मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा ठुकरा दिया गया था। 1922 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मांग की कि भारत का राजनैतिक भाग्य भारतीय स्वयं बनाएंगे लेकिन अंग्रेजों द्वारा संविधान सभा के गठन की लगातार उठती मांग को ठुकराया जाता रहा। आखिरकार 1939 में कांग्रेस अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि स्वतंत्र भारत के संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा ही एकमात्र उपाय है और सन् 1940 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत का संविधान भारत के लोगों द्वारा ही बनाए जाने की मांग को स्वीकार कर लिया गया। 1942 में क्रिप्स कमीशन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में निर्वाचित संविधान सभा का गठन किया जाएगा, जो भारत का संविधान तैयार करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा संविधान लोक के लिए स्वतंत्रता, न्याय, समानता, बंधुता का लक्ष्य लेकर चल रहा है जिसे प्राप्त करने का उपाय लोकतांत्रिक समाजवादी राज्य रचना है। राजनीतिक न्याय के लिए एक व्यक्ति के एक वोट निश्चित है। उसका एक वोट सरकार के निर्माण में सहायक है और देश के विकास में भी। एक वोट का क्या महत्व है इसको हम प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की सरकार का 1 वोट से गिर जाने से समझ सकते हैं। लोक की समृद्धि में ही राष्ट्र की समृद्धि है और समृद्धि के लिए आवश्यक है परस्पर प्रेम, सद्भाव। जहां गैर बराबरी के लिए कोई जगह ना हो, जहां एक धरातल पर अवस्थित हो सभी अपनी पात्रता, क्षमता एवं रुचि-सुविधानुसार कार्य कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां मानव मानव में कोई भेदभाव की दीवार न हो। इसीलिए अस्पृश्यता एवं उपाधियों का उन्मूलन किया गया है। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को पूर्ण स्वतंत्रता देता है। लेकिन एक नागरिक की स्वतंत्रता एवं अधिकार दूसरे नागरिक की स्वतंत्रता एवं अधिकार के उल्लंघन का निषेध करता है। हमारी स्वतंत्रता अन्य की स्वतंत्रता में बाधक नहीं बन सकती। हम कल्याणकारी समतामूलक समाज रचते हुए देश को संपूर्ण विश्व में प्रेम, सद्भाव, अहिंसा, शांति, समृद्धि का ध्वजवाहक सिद्ध कर सकने में यथासामर्थ्य कटिबद्ध होकर कर्मरत होंगे, यही हम सबका शुभसंकल्प होगा।</p>
<p>–<strong>प्रमोद दीक्षित मलय</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 26 Nov 2020 10:15:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब विस के मुख्य गेट पर भी हरियाणा ने जड़े अपने बोर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[-पंजाब-हरियाणा के दोनों सदनों के आज है विशेष सेशन सच कहूँ/अश्वनी चावला चंडीगढ़। संविधान दिवस के मौके हरियाणा विधानसभा की तरफ से हरियाणा के साथ ही पंजाब विधानसभा के मुख्य गेट पर भी अपना बोर्ड जड़ दिया है। दोनों सदनों के मुख्य गेट की प्रमुखता से सजावट करने के साथ ही हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/constitution-day/article-11291"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/haraya-01.jpeg" alt=""></a><br /><h2>-पंजाब-हरियाणा के दोनों सदनों के आज है विशेष सेशन</h2>
<p><strong>सच कहूँ/अश्वनी चावला</strong><br />
<strong>चंडीगढ़।</strong> संविधान दिवस के मौके हरियाणा विधानसभा की तरफ से हरियाणा के साथ ही पंजाब विधानसभा के मुख्य गेट पर भी अपना बोर्ड जड़ दिया है। दोनों सदनों के मुख्य गेट की प्रमुखता से सजावट करने के साथ ही हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता की फोटो लगे फ्लेक्स बोर्ड लगे हुए हंै। जहां पर संविधान दिवस की बधाई के साथ ही हरियाणा विधान सभा सेक्रे टेरिएट लिखा हुआ है। जिस से यह प्रतीत होता है जैसे दोनों सदन ही हरियाणा विधान सभा के हों। हरियाणा विधान सभा की तरफ से लगाये गए इन बोर्ड को देख कर पंजाब विधानसभा के अधिकारी ही हैरान है कि यह बोर्ड कैसे लगा दिए गए है, परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जिसके चलते इस बात को लेकर पंजाब सख्त आपत्ति भी जाहिर कर सकता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2019 13:57:58 +0530</pubDate>
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                <title>क्यों जरुरी है &amp;#8216;निजता का अधिकार&amp;#8217;?</title>
                                    <description><![CDATA[सर्वोच्च न्यायालय के नौ न्यायाधीशों की पीठ इन दिनों नागरिकों के ‘राइट टू प्राइवेसी’ यानी निजता के अधिकार के संबंध में दायर की गई एक याचिका पर अहम सुनवाई कर रही है। संभव है, आगामी 27 अगस्त को आने वाले फैसले से स्पष्ट हो जाए कि निजता का अधिकार वास्तव में नागरिकों का मौलिक अधिकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-need-right-to-privacy/article-2786"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/need-of-privacy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय के नौ न्यायाधीशों की पीठ इन दिनों नागरिकों के ‘राइट टू प्राइवेसी’ यानी निजता के अधिकार के संबंध में दायर की गई एक याचिका पर अहम सुनवाई कर रही है। संभव है, आगामी 27 अगस्त को आने वाले फैसले से स्पष्ट हो जाए कि निजता का अधिकार वास्तव में नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं?गौरतलब यह है कि भारत सरकार इसकी संवैधानिक वैधता से पहले से ही इंकार करती आई है, जबकि दायर याचिका में कहा गया गया है कि यह प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21) का ही एक उपबंध है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पिछले कुछ समय में आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली करीब बीस याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई हैं। याचिकाकतार्ओं का कहना है कि आधार कार्ड बनाये जाने के दौरान बायोमेट्रिक पद्धति द्वारा शारीरिक चिन्हों जैसे ऊंगलियों के निशानों अथवा आँखों की पुतलियों की ली जाने वाली निजी जानकारी नागरिकों की निजता का उल्लंघन है। जबकि, सरकार आधार के माध्यम से अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए नागरिकों से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं को इकट्ठा करना उनकी निजता का उल्लंघन नहीं मानती।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत में केंद्र सरकार की तरफ से दलील पेश करने वाले महान्यायवादी केके वेणुगोपाल ने पीठ के समक्ष कहा, ‘निजता का कोई मूलभूत अधिकार नहीं है और यदि इसे मूलभूत अधिकार मान भी लिया जाए तो इसके कई आयाम हैं। हर आयाम को मूलभूत अधिकार नहीं माना जा सकता। ‘याचिकाकतार्ओं की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम, श्याम दीवान और सोली सोराबजी ने जिरह की है। इस संदर्भ में गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 को अगर एक साथ देखा जाए तो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का दायरा बहुत बड़ा हो जाता है। अगर यह कहा जाए कि निजता कोई अधिकार नहीं है तो यह बेमतलब है। हालांकि, दोनों पक्षों को सुनकर अब यह सुप्रीम कोर्ट को निर्धारित करना है कि निजता, नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में ‘निजता का अधिकार’ को लेकर हो रही बहस वर्षों पुरानी है, लेकिन आजतक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि यह अधिकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आती है नहीं?आजादी के बाद जब संविधान बना तब भी नागरिकों की निजता संबंधी अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई। फलस्वरुप 1950 के दशक से ही निजता के अधिकार को परिभाषित करने की मांग होती रही है। इस संबंध में, सर्वोच्च न्यायालय ने 1954 में एमपी शर्मा तथा 1962 के खड़ग सिंह केस में क्रमश: 8 और 6 जजों की बेंच द्वारा दिये गये फैसले के तहत निजता के अधिकार की संवैधानिक अस्तित्वता को स्वीकार नहीं किया। लेकिन, उसके बाद भी इस तरह की अनेक याचिकाएं दायर की गईं और सुप्रीम कोर्ट ने सदैव नपा-तुला फैसला ही दिया, जिसकी वजह से यह अस्पष्टता बनी रही। सुप्रीम कोर्ट कभी यह कहती रही कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है, तो कभी यह कि यह संपूर्ण मौलिक अधिकार नहीं है, इसलिए कुछ मामलों में राज्य नागरिकों की निजता में दखल दे सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर, भारतीय संविधान की बात करें, तो उसमें ‘निजता का अधिकार’ का स्पष्ट लिखित उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय समाज में वर्षों से इसे नैसर्गिक अधिकार माना जाता रहा है। दरअसल, निजता हर मानव-व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है और इसके बिना अन्य मौलिक अधिकारों की कोई प्रासंगिकता नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे अनेक अवसर आते हैं, जहां हमें निजता चाहिए होती है। हम किसी को चिट्ठी लिखते हैं, तो नहीं चाहते कि उसे कोई दूसरा पढ़े। हम अपना बैंक, फेसबुक, ईमेल अकाउंट की निजी जानकारी किसी से साझा नहीं करते, क्योंकि इससे हमारी गोपनीयता खत्म होती है। जाहिर है, निजता को मौलिक अधिकार से अलग नहीं किया जा सकता। इसे अलग करने का अर्थ, किसी शरीर से आत्मा को अलग करने की तरह होगा। निजता का प्राकृतिक अधिकार नागरिकों की गोपनीयता सुनिश्चित व सुरक्षित करती है। बिना निजता के जीवन का आनंद भी तो नहीं लिया जा सकता!</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक, हमारे संविधान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय संविधान की तरह अमेरिकी संविधान में भी ‘निजता का अधिकार’ का उल्लेख नहीं है लेकिन, वहां की सुप्रीम कोर्ट इसके अस्तित्व को स्वीकारती है। अमेरिकी सरकार निजता के अधिकार को काफी गंभीरता से लेती है और नीति-निर्माण के समय नागरिकों की निजता का विशेष ख्याल रखा जाता है। वहीं जापान की बात करें, तो वहां के नागरिकों के पास भी ऐसा कोई अधिकार नहीं है, लेकिन निजी जानकारियों की सुरक्षा के लिए वहां, ‘एक्ट आॅन द प्रोटेक्शन आॅफ पर्सनल इन्फोर्मेशन’ नाम से एक ठोस कानून जरुर है, जिसके मुताबिक व्यक्ति की अनुमति के बिना सरकार या कोई संस्था उसकी निजी जानकारियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती। इसी तरह, विश्व में पहली बार नागरिकों को व्यक्तिगत पहचान संख्या जारी करने वाले स्वीडन में भी एक ठोस कानून बनाकर नागरिकों से जुड़े गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। मौजूदा समय में, इंटरनेट प्रयोग के तौर पर भारत एक विशाल बाजार के रुप में परिणत हो चुका है। लेकिन, यहां की सरकार ने एक ठोस डेटा प्रोटेक्शन लॉ पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई!</p>
<p style="text-align:justify;">‘निजता के अधिकार’ पर हो रही बहस मुख्य रुप से ‘आधार’ पर आकर ठहर जा रही है। दरअसल, बैंक से लेकर मोबाइल-सिम तक बहुत सारी सेवाओं में आधार को अनिवार्य किया जा रहा है। ऐसे में अगर देश में ठोस डेटा प्रोटेक्शन एक्ट ना हो, तो नागरिकों की निजी सूचनाओं के हैक होने तथा उसके दुरुपयोग की संभावनाओं को बल मिल सकता है। याद हो, बीते साल के अक्तूबर महीने में भारत के 32 लाख ग्राहकों के डेबिट कार्ड की गोपनीय जानकारी अचानक से हैक हो जाने से सनसनी फैल गई थी। वहीं, पिछले दिनों ‘रैनसमवेयर’ वायरस ने एक साथ विश्वभर के सौ से अधिक देशों के दो लाख से ज्यादा कम्प्यूटरों को नुकसान पहुंचाया था। आधार को अन्य सेवाओं जैसे कि बैंक, सिम आदि से जोड़ने से बायोमेट्रिक प्रणाली से ली गई नागरिकों की निजी सूचनाओं की गोपनीयता खत्म होने तथा साइबर क्राइम के मामलों में वृद्धि की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि भारत में इंटरनेट से जुड़ी अधिकांश कंपनियां मसलन, गूगल, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप इत्यादि विदेशी हैं, इसलिए संभव है कि ये कंपनियां भविष्य में हमारी निजी सूचनाओं का दुरुपयोग करे!अत: निजता के अधिकार के साथ-साथ देश में एक ठोस डेटा प्रोटेक्शन कानून भी होना चाहिए;ताकि इन कंपनियों की गतिविधि तथा अनियंत्रित आजादी को नियंत्रित किया जा सके। फिर, कानून का उल्लंघन करने वाली देशी या विदेशी सभी कंपनियों के लिए कठोर दंड की व्यवस्था भी हो। पुनश्च, सरकार को नागरिकों की निजी सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित करने पर जोर देना चाहिए, ताकि तकनीकी रुप से भारत का वर्तमान और भविष्य सशक्त तथा उज्ज्वल बन सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-सुधीर कुमार</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 04:04:52 +0530</pubDate>
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                <title>संविधान की शपथ याद रखे नई युवा पीढ़ी: महानिदेशक</title>
                                    <description><![CDATA[छह टुकड़ियों ने दी महानिदेशक पुलिस श्री भट्ट को सलामी जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। पुलिस महानिदेशक मनोज भट्ट के सम्मान में सोमवार को राजस्थान पुलिस अकादमी परिसर स्थित परेड ग्राउण्ड में एक सेरेमोनियल परेड का आयोजन किया गया। श्री भट्ट को आरएसी, हाडीरानी महिला बटालियन, जयपुर पुलिस आयुक्तालय, जयपुर यातायात पुलिस, जयपुर ग्रामीण एवं ईआरटी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/remember-oath-of-constitution-youth-generation/article-2749"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/police-16.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">छह टुकड़ियों ने दी महानिदेशक पुलिस श्री भट्ट को सलामी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पुलिस महानिदेशक मनोज भट्ट के सम्मान में सोमवार को राजस्थान पुलिस अकादमी परिसर स्थित परेड ग्राउण्ड में एक सेरेमोनियल परेड का आयोजन किया गया। श्री भट्ट को आरएसी, हाडीरानी महिला बटालियन, जयपुर पुलिस आयुक्तालय, जयपुर यातायात पुलिस, जयपुर ग्रामीण एवं ईआरटी की 6 टुकड़ियों ने परेड कमाण्डर श्रीमती मोनिका सेन, आईपीएस के नेतृत्व में राजस्थान पुलिस अकादमी के सेन्ट्रल बैण्ड की मधुर स्वर लहरियों के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च पास्ट कर सलामी दी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">संविधान की शपथ हमेशा याद रखें</h2>
<p style="text-align:justify;">पुलिस महानिदेशक ने अपने विदाई परेड समारोह में विचार प्रकट करते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस की अपनी एक खास परम्परा एवं गौरवशाली इतिहास रहा है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि पुलिस की इस परम्परा को पुलिस की आने वाली नई युवा पीढी और आगे बढ़ाने में अपना पूर्ण योगदान देगी। भट्ट ने पुलिस के नये जवानों का आह्वान करते हुए कहा कि पुलिस के जवान को संविधान की जो शपथ देश व देश की जनता के लिये दिलाई जाती है, उसे हमेशा याद रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने वर्दी को पुलिस की शान बताते हुए कहा कि आप सबको इसके सम्मान को बनाये रखने के लिये हर संभव कोशिश करनी चाहिये। उन्होंने अपनी 36 साल की सेवा में सभी से मिले भरपूर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने मुझे एक अच्छे दोस्त की तरह सहयोग और प्यार दिया है। राजस्थान पुलिस का इतिहास हमेशा गौरवशाली रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस कानून एवं व्यवस्था एन.आर.के.रेड्डी, अतिरिक्त महानिदेशक अपराध पंकज कुमार सिंह, अतिरिक्त महानिदेशक प्रशिक्षण नन्द किशोर, अतिरिक्त महानिदेशक इंटेलिजेंस यू.आर.साहू, अतिरिक्त महानिदेशक मानव अधिकार एम.एल.लाठर, अतिरिक्त महानिदेशक हाउसिंंग पोन्नूचामी, अतिरिक्त महानिदेशक सतर्कता डी.सी.जैन, अतिरिक्त महानिदेशक एटीएस उमेश मिश्रा, अतिरिक्त महानिदेशक आर्म्ड बटालियन ओ.पी.गल्होत्रा, अतिरिक्त महानिदेशक वायर लेस सुनील कुमार मेहरोत्रा सहित अनेक पुलिस अधिकारी व पुलिस कर्मचारी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 06:02:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>गीता-कुरान एक समान, पर देश में चलेगा संविधान: राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पार्टी के अल्पसंख्यक नेताओं के साथ बैठक में कहा कि गीता, कुरान और आस्था की सभी चीजों का सम्मान है, लेकिन देश संविधान से चलेगा। बता दें कि डीएमके नेता करूणानिधि के 94वें जन्मदिन के मौके पर चेन्नई पहुंचे राहुल गांधी ने कहा था कि राष्ट्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/gita-quran-is-the-same-but-constitution-run-in-country-rahul/article-919"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/rahul-gandhi-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पार्टी के अल्पसंख्यक नेताओं के साथ बैठक में कहा कि गीता, कुरान और आस्था की सभी चीजों का सम्मान है, लेकिन देश संविधान से चलेगा। बता दें कि डीएमके नेता करूणानिधि के 94वें जन्मदिन के मौके पर चेन्नई पहुंचे राहुल गांधी ने कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा का मुकाबला करने के लिए आजकल उपनिषद और भगवद् गीता पढ़ रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा  कि</h2>
<p style="text-align:justify;">पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, ‘इन दिनों मैं उपनिषद और गीता पढ़ रहा हूँ, क्योंकि मैं आरएसएस और बीजेपी से लड़ रहा हूँ।’ पार्टी सूत्रों ने राहुल के हवाले से कहा, ‘मैं उनसे (आरएसएस के लोगों से) पूछता हूँ, मेरे दोस्त, आप ऐसा कर रहे हैं, आप लोगों को दबा रहे हैं, लेकिन उपनिषद में लिखा है कि हर व्यक्ति समान है, तो फिर आप अपने ही धर्म में कही गई बात को कैसे झुठला रहे हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बुनियादी तौर पर भारत को समझती ही नहीं है, उसे सिर्फ नागपुर (आरएसएस मुख्यालय) समझ आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरएसएस-भाजपा पर देश में एक ही तरह का विचार थोपने का आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि हर व्यक्ति, चाहे वह तमिलनाडु में हो या उत्तर प्रदेश में, असहमति जाहिर करने का अधिकार सबको है और किसी एक विचार को थोपना स्वीकार्य नहीं है। राहुल गांधी के गीता और उपनिषद पढ़ने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने तंज कसते हुए कहा कि एनडीए सरकार के 15 साल पूरे होने तक वह योगा वगैरह भी करना शुरू कर देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 09:09:20 +0530</pubDate>
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