<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/agricultural/tag-2006" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Agricultural - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/2006/rss</link>
                <description>Agricultural RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खेती में नयी सोच-नयी तकनीक को 19 से किसान कृषि मेला</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (सच कहूं न्यूज)। किसान कृषि मेला जयपुर (Farmers Agricultural Fair Jaipur) का आयोजन 19 से 21 अक्टूबर को आधुनिक प्रदर्शनी केंद्र जेईसीसी-जयपुर (JECC-Jaipur) अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर सीतापुरा, जयपुर में किया जा रहा है। श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के विशेषज्ञ राजस्थान के किसानों की समस्याओं और खेती में समाधान पाने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/kisan-krishi-mela-to-showcase-new-thinking-and-new-technology-in-farming/article-52999"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/krishi-mela.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूं न्यूज)।</strong> किसान कृषि मेला जयपुर (Farmers Agricultural Fair Jaipur) का आयोजन 19 से 21 अक्टूबर को आधुनिक प्रदर्शनी केंद्र जेईसीसी-जयपुर (JECC-Jaipur) अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर सीतापुरा, जयपुर में किया जा रहा है। श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के विशेषज्ञ राजस्थान के किसानों की समस्याओं और खेती में समाधान पाने के लिए किसान गोष्टी का संचालन कर रहे हैं। यह गोष्टी तीनों दिन अलग विषयों पर होगी। श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलपति डॉ. बलराज सिंह ने बताया कि किसान कृषि मेला जयपुर में आयोजित होने वाला सबसे बड़ा कृषि मेला होगा। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">इस मेले में राजस्थान से बीस हजार से ज्यादा किसानों के पधारने की की उम्मीद है। किसान कृषि मेला (Kisan Krishi Mela) जयपुर में उन्नत एवं उपयुक्त प्रौद्योगिकियों की विस्तृत श्रृंखला का प्रदर्शन किया जायेगा। इसके साथ ही कृषि उद्योग और प्राधिकारियों की भागीदारी भी इस किसान कृषि मेला में रहेगी। इस दौरान किसान गोष्ठी का भी आयोजन किया जायेगा जिसका संचालन श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय,जोबनेर के विशेषज्ञ द्वारा किया जायेगा। किसान और उद्योग के बीच सार्थक संवाद में यह किसान मेला बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान एक से एक संवाद के लिए ऍप भी लांच किया जायेगा। किसान ऍप से प्रदर्शनी से पहले और बाद में कृषि उत्पादकों से फ़ोन और व्हाट्सएप पर जुड़े रहने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुदेश कुमार, डायरेक्टर रारी डॉ. अर्जुन सिंह बालोदा, जनसूचना अधिकारी डॉ. योगेश कुमार शर्मा आदि मौजूद थे। Jaipur News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="…यहां जिंदा इंसान की तरह संभालकर रखते हैं शव, नहीं करते अंतिम संस्कार!" href="http://10.0.0.122:1245/here-the-dead-body-is-preserved-like-a-living-person-but-no-last-rites-are-performed/">…यहां जिंदा इंसान की तरह संभालकर रखते हैं शव, नहीं करते अंतिम संस्कार!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/kisan-krishi-mela-to-showcase-new-thinking-and-new-technology-in-farming/article-52999</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/kisan-krishi-mela-to-showcase-new-thinking-and-new-technology-in-farming/article-52999</guid>
                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 19:13:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-09/krishi-mela.jpg"                         length="169604"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Mustard cultivation: सरसों की इन दो किस्मों की करें बिजाई, 40% ज्यादा होगी आपकी कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[Mustard cultivation: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार (Ch.CSHA University, Hisar) के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। अमूमन देश में सरसों की बिजाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है। उससे पहले कृषि वैज्ञानिक को विशेष कर तिलहन वैज्ञानिकों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/sow-these-two-varieties-of-mustard-your-income-will-be-forty-more/article-52367"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/mustard-cultivation.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Mustard cultivation: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार (Ch.CSHA University, Hisar) के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। अमूमन देश में सरसों की बिजाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है। उससे पहले कृषि वैज्ञानिक को विशेष कर तिलहन वैज्ञानिकों ने सरसों की नई किस्म ईजाद कर देश भर के किसानों को सही समय पर फायदा देने का काम किया है। इन नई किस्मों में आरएच 1424 व आरएच 1706 शामिल हैं। Mustard cultivation</p>
<p style="text-align:justify;">हकृवि कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने बताया कि सरसों की नई किस्मों से बिजाई करने से किसानों को पहले से बेहतर लाभ मिलेगा। इनकी बिजाई से जहां खेतों में सरसों की पैदावार में बढ़ोतरी होगी, वहीं तेल की मात्रा भी पहले से अधिक मिलेगी। तिलहन वैज्ञानिकों का मानना है कि औसतन रूप से सरसों की फसल के कुल उत्पादन का 40 फीसदी तेल निकलता है, लेकिन इन किस्म के बिजाई करने से 40 प्रतिशत से अधिक तेल की मात्रा मिलेगी। हकृवि द्वारा सरसों की इन दोनों नई किस्मों के अलावा पहले से विकसित सभी प्रकार की किस्मों के बीज विश्वविद्यालय के बिक्री केंद्र के साथ-साथ देशभर के सभी सरकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध हैं। Mustard cultivation</p>
<h3 style="text-align:justify;">5 वर्ष पूर्व विकसित आरएच 725 किस्म आज भी लोकप्रिय</h3>
<p style="text-align:justify;">अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरसों की यह नई किस्में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में बहुत लोकप्रिय होंगी। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के.पाहुजा ने बताया कि सरसों अनुभाग के वैज्ञानिकों की टीम अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर 21 किस्में विकसित कर चुकी हैं। वर्ष 2018 में विकसित की गई किस्म आरएच 725 हरियाणा के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली व बिहार राज्यों में बहुत लोकप्रिय है, जिसकी किसान 25 से 30 मण प्रति एकड़ आसानी से उपज प्राप्त कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर सरसों उत्पादन में तीसरे नंबर पर है भारत</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों, राया/राई व तारामीरा रबी फसल की प्रमुख तिलहनी फसल है। इस फसल का एक तरफ जहां भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है, वहीं सरसों के उत्पादन से मिलने वाले तेल से रसोई में भी तड़का लगता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली व हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में सरसों का तेल प्रमुखता से सब्जियां चटपटे पकवान बनाने के काम में लिया जाता है। सरसों उत्पादन और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में चीन और कनाडा के बाद भारत का तीसरा स्थान है। CCSHAU Hisar</p>
<h3 style="text-align:justify;">मैदानी क्षेत्रों में होता है उत्पादन, पर राजस्थान सबसे आगे</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों का उत्पादन भारत के लगभग सभी राज्यों में होता है, लेकिन सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे है। यहां की जलवायु और मिट्टी सरसों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग आंकड़ों के अनुसार देश में कुल उत्पादित होने वाले सरसों में राजस्थान में अकेले 46.7 प्रतिशत का उत्पादन होता है। राजस्थान सहित मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारत का 88 फीसदी उत्पादन होता है। सरसों के उत्पादन में मध्य प्रदेश की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस फसल की खेती कम सिंचाई और कम लागत में आसानी से हो जाती है। HAU HISAR</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनुसंधान के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवार्ड</h3>
<p style="text-align:justify;">हकृवि को सरसों अनुसंधान एवं विकास कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र अवार्ड से भी नवाजा गया है। कुलपति प्रो. काम्बोज ने बताया कि यह अवार्ड राया-सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा जम्मू में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहायक महानिदेशक तिलहन व दाल डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया। प्रो. कंबोज ने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक टीम ने हाल ही में सरसों की दो नई उन्नत किस्में विकसित कर एक नया आयाम स्थापित किया है। इस उपलब्धि पर तिलहन वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार सहित उनकी टीम को बधाई दी। Mustard Cultivation</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-डॉ संदीप सिंहमार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Tea Cultivation: चाय की खेती से इस तरह दोगुना मुनाफा ले सकते है, जानिए उचित तकनीक" href="http://10.0.0.122:1245/tea-cultivation/">Tea Cultivation: चाय की खेती से इस तरह दोगुना मुनाफा ले सकते है, जानिए उचित तकनीक</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/sow-these-two-varieties-of-mustard-your-income-will-be-forty-more/article-52367</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/sow-these-two-varieties-of-mustard-your-income-will-be-forty-more/article-52367</guid>
                <pubDate>Fri, 15 Sep 2023 14:37:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-09/mustard-cultivation.gif"                         length="95104"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि यंत्रों पर अनुदान से 43 हजार से अधिक किसान हुए लाभान्वित</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (सच कहूँ न्यूज) राज्य सरकार द्वारा राजस्थान कृषि तकनीकी मिशन के तहत हस्त चलित, शक्ति चलित, ट्रैक्टर चलित, स्वचलित जैसे अन्य श्रेणी के कृषि यंत्रों के क्रय पर किसानों को दिए जा रहे अनुदान से गत चार वर्ष में 43 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके है। किसानों को होगा फायदा कृषि आयुक्त […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/more-than-43-thousand-farmers-benefited-from-subsidy-on-agricultural-machinery/article-43677"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/agricultural-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)</strong> राज्य सरकार द्वारा राजस्थान कृषि तकनीकी मिशन के तहत हस्त चलित, शक्ति चलित, ट्रैक्टर चलित, स्वचलित जैसे अन्य श्रेणी के कृषि यंत्रों के क्रय पर किसानों को दिए जा रहे अनुदान से गत चार वर्ष में 43 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>किसानों को होगा फायदा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि आयुक्त कानाराम ने बताया कि राजस्थान कृषि तकनीक मिशन के तहत गत चार वर्षों में 43 हजार 396 किसानों को कृषि यंत्रों के क्रय पर 91 करोड़ 44 लाख रुपये का अनुदान देकर लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कृषि बजट घोषणा 2023-24 के अनुसार एक लाख किसानों को कृषि यंत्रों के क्रय पर 250 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत पावर टिलर्स, स्वचालित यंत्र, विशिष्टिकृत स्वचालित यंत्र जैसे अनेकों उपकरणों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु, सीमांत एवं महिला किसानों को कृषि यंत्र के क्रय पर राज्य सरकार द्वारा लागत राशि का 50 प्रतिशत तक का अनुदान देय है वहीं अन्य किसानों के लिए लागत का 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/more-than-43-thousand-farmers-benefited-from-subsidy-on-agricultural-machinery/article-43677</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/more-than-43-thousand-farmers-benefited-from-subsidy-on-agricultural-machinery/article-43677</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 13:25:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-02/agricultural-1.jpg"                         length="41471"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा की अनाज मंडियों में फसलों की खरीद शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम ने मंडियों में समय पर उठान करने व सीसीटीवी लगाने के दिये निर्देश चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा की अनाज मंडियों में 1 अक्तूबर से फसलों की खरीद शुरू हो गई है। इसको लेकर सीएम मनोहर लाल ने कल प्रशासनिक सचिवों और जिला उपायुक्तों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। सीएम ने कहा कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/procurement-of-paddy-rice-crop-started-in-grain-markets-of-haryana/article-38465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/paddy-rice-crop.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">सीएम ने मंडियों में समय पर उठान करने व सीसीटीवी लगाने के दिये निर्देश</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा की अनाज मंडियों में 1 अक्तूबर से फसलों की खरीद शुरू हो गई है। इसको लेकर सीएम मनोहर लाल ने कल प्रशासनिक सचिवों और जिला उपायुक्तों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। सीएम ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के खरीद कार्यों का निर्बाध और परेशानी मुक्त संचालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीफ फसलों की खरीद आज से होगी, इसलिए उचित परिवहन सुविधाओं के साथ मॉइश्चर मीटर, तौल तराजू, समय पर उठान, सीसीटीवी कैमरे की स्थापना और मंडी के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि खरीद आरंभ होने से एक सप्ताह पूर्व हुई बेमौसम बारिश से उन किसानों को परेशानी हो रही है जो अपनी फसल पहले ही मंडियों में ला चुके हैं, इसलिए संबंधित अधिकारी सुनिश्चित करें कि खरीद से पहले ऐसी फसलें पूरी तरह से सूखी हों।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/cm-ashok-gehlot-reached-hanumangarh-today/">प्रेम-मोहब्बत की राजनीति, दुश्मनी नहीं, पार्टियों में विचारधारा की लड़ाई : गहलोत</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों को 72 घंटे के अंदर होगा भुगतान</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक किसान को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए प्रत्येक संबंधित अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भुगतान 72 घंटों के भीतर हो जाए। आई-फॉर्म के अनुमोदन से 72 घंटों के भीतर भुगतान ऑनलाइन होना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लगभग 55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद करना लक्ष्य</h3>
<p style="text-align:justify;">इस सीजन के लिए सरकार का लक्ष्य लगभग 55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद करना है। खरीफ फसलों की खरीद भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी। धान (सामान्य) के लिए 2040 रुपये प्रति क्विंटल, धान (ग्रेड-ए) के लिए 2060 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरा के लिए 2350 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी तय किया गया है। विपणन सत्र 2022-23 के दौरान धान, बाजरा, मक्का, मूंग, सूरजमुखी, मूंगफली, तिल, अरहर और उड़द आदि फसलों की खरीद की जाएगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/procurement-of-paddy-rice-crop-started-in-grain-markets-of-haryana/article-38465</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/procurement-of-paddy-rice-crop-started-in-grain-markets-of-haryana/article-38465</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Oct 2022 17:44:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-10/paddy-rice-crop.jpg"                         length="72805"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही 1509 धान और कपास</title>
                                    <description><![CDATA[जींद (सच कहूँ/जसविंद्र)। इस बार धान 1509 किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है। इन दिनों जो भाव किसानों को मिल रहे हैं वो बीते साल से काफी अधिक है। मार्केट कमेटी में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 28 सितंबर को सबसे अधिक भाव धान 1509 का 3740 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। बीते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/1509-paddy-and-cotton-becoming-profitable-deal-for-farmers/article-38395"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/paddy-and-cotton.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जींद (सच कहूँ/जसविंद्र)।</strong> इस बार धान 1509 किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है। इन दिनों जो भाव किसानों को मिल रहे हैं वो बीते साल से काफी अधिक है। मार्केट कमेटी में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 28 सितंबर को सबसे अधिक भाव धान 1509 का 3740 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। बीते साल सबसे अधिक भाव इन दिनों 2043 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा था। इस बार बीते साल से अधिक भाव किसानों को प्राइवेट बोली पर मिल रहे हैं। धान 1509 के साथ-साथ कपास के भाव भी बीते साल से अधिक किसानों को इन दिनों मिल रहे है। इस बार हालांकि कपास की आवक कम होने की संभावना है क्योंकि कपास की बिजाई कम होने के साथ-साथ कपास की फसल भी बारिश का पानी खेतों में भरने से खराब हुई है। कपास का भाव 8812 रुपये प्रति क्विंटल सबसे अधिक रहा। बीते साल इन दिनों भाव 6905 रुपये प्रति क्विंटल कपास के किसानों को मिल रहे थे।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/twinkle-vij-made-her-parents-name-roshan-by-becoming-a-doctor/">ट्विंकल विज ने डॉक्टर बन किया अपने माता पिता और कस्बे का नाम रोशन</a></p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/1509-paddy-and-cotton-becoming-profitable-deal-for-farmers/article-38395</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/1509-paddy-and-cotton-becoming-profitable-deal-for-farmers/article-38395</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 20:20:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/paddy-and-cotton.jpg"                         length="40033"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घग्घर में आए पानी से कर सकेंगे रबी फसलों की बुवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ गुल्ला चिक्का पर घटी आवक, नाली बेड में चार हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हनुमानगढ़। (सच कहूँ न्यूज़) घग्घर नदी में लगातार प्रवाहित हो रहे पानी के कारण घग्घर के आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर बढऩे की उम्मीद के बीच किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। इसके साथ ही रबी फसलों की बुवाई हो सकेगी। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sowing-of-rabi-crops-can-be-done-with-the-water-coming-in-ghaggar/article-38389"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/ghaggar-river-3.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"> गुल्ला चिक्का पर घटी आवक, नाली बेड में चार हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़। (सच कहूँ न्यूज़)</strong> घग्घर नदी में लगातार प्रवाहित हो रहे पानी के कारण घग्घर के आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर बढऩे की उम्मीद के बीच किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। इसके साथ ही रबी फसलों की बुवाई हो सकेगी। नाली बेड में गुरुवार को चार हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा था। हालांकि बुधवार की अपेक्षा गुरुवार को गुल्ला चिक्का हैड पर प्रवाहित पानी करीब साढ़े तीन हजार क्यूसेक कम हुआ। गुरुवार को गुल्ला चिक्का हैड पर 39325 क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी। इसी तरह खनौरी हैड पर 11500, चांदपुर हैड 10500, ओटू हैड पर 7200, घग्घर साइफन में 6650, नाली बेड में 4000, आरडी 42 जीडीसी में 2700 क्यूसेक, आरडी 133 जीडीसी में 900, एसओजी ब्रांच में 1780 व आरडी 158 जीडीसी में 800 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा था। घग्घर नदी में पानी की आवक में बढ़ोतरी के कारण टाउन के नजदीक माता भद्रकाली मंदिर के पास बना काजवे गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बंद रहा। पानी काजवे के ऊपर से गुजर रहा है। मौके पर टाउन थाना के पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong> <a href="http://10.0.0.122:1245/karwa-chauth/">अगर पत्नी करवा चौथ का व्रत रख सकती है तो पति क्यों नहीं? | Karwa Chauth</a></p>
<p style="text-align:justify;">काजवे के दोनों तरफ अवरोधक लगाकर रास्ता बंद किया गया है। उल्लेखनीय है कि 26 सितम्बर को हरियाणा के ओटू हैड से राजस्थान क्षेत्र के लिए पानी प्रवाहित करने के बाद उसी दिन शाम पांच बजे घग्घर नदी का पानी टाउन के नजदीक माता भद्रकाली मंदिर को पार कर गया था। घग्घर के नाली बेड में 4000 क्यूसेक पानी प्रवाहित करने के बाद जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी अलर्ट मोड पर आ गए हैं। अधिकारियों की मानें तो पानी आने से घग्घर के आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर बढ़ेगा। इससे आगामी रबी सीजन में किसान ट्यूबवैल चलाकर खेतों को सिंचित कर सकेंगे।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sowing-of-rabi-crops-can-be-done-with-the-water-coming-in-ghaggar/article-38389</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/sowing-of-rabi-crops-can-be-done-with-the-water-coming-in-ghaggar/article-38389</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 18:59:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/ghaggar-river-3.jpg"                         length="29434"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हड़ताली आढ़तियों पर भड़के हरियाणा के कृषि मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[हड़ताल खत्म हो या न हो, एक अक्तूबर से हर हाल में होगी खरीद भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने हरियाणा ने आढ़तियों की हड़ताल पर तल्ख तेवर दिखाते हुए खरीद के समय हड़ताल को गलत करार दिया है। जेपी दलाल ने कहा कि आढ़ती हड़ताल खत्म करें या नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-agriculture-minister-furious-over-the-striking-arhtiyas/article-38258"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/jp-dalal.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">हड़ताल खत्म हो या न हो, एक अक्तूबर से हर हाल में होगी खरीद</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने हरियाणा ने आढ़तियों की हड़ताल पर तल्ख तेवर दिखाते हुए खरीद के समय हड़ताल को गलत करार दिया है। जेपी दलाल ने कहा कि आढ़ती हड़ताल खत्म करें या नहीं एक अक्तूबी से हर हाल में खरीद शुरू होगी। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के कोहराम व तीसरे मोर्चे के गठन पर निशाना साधा। बता दें कि सोमवार सुबह कृषि मंत्री जेपी दलाल अपने आवास पर जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए हरियाणा में आढ़तियों की हड़ताल पर सख्त तेवर दिखाये। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से ही आढ़तियों का व्यापार चलता है। आज बेमोसमी बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। जो फसल बची है उसकी खरीद के समय आढ़ती हड़ताल पर हैं। जेपी दलाल ने कहा प्रकृति की मार झेल रहे किसानों को आढ़ती परेशान ना करें। साथ ही उन्होंने विपक्ष व किसान संगठनों पर भी निशाना साधा और कहा आज किसान राजनीति कर रहे आढ़तियों की हड़ताल से परेशान हैं जबकि विपक्ष तथा किसान संगठन चुप हैं। उन्होंने दावा किया की आढ़ती माने या ना माने, एक अक्तूबर से फसलों की खरीद हर हाल में होगी। इसके लिए चाहे गाँवों में या खेल स्टेडियमों में एफपीओ या पंचायतों के माध्यम से खरीद करनी पड़े।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong> <a href="http://10.0.0.122:1245/old-ways-of-teaching-mathematics-will-be-seen-again-in-school/">बदलाव। स्कूल में फिर देखने को मिलेंगे गणित पढ़ाने के पुराने तरीके</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">कांग्रेस पर साधा निशाना:</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>‘थोड़े दिनों बाद देश में कांग्रेस नाम की कोई चीज नहीं बचेगी’</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस पर बरसते हुए मंत्री ने कहा कि अब चंद लोग एक परिवार की भक्ति करने वाले हैं, वो भी कांग्रेस से निकल जाएंगे और थोड़े दिनों बाद देश में कांग्रेस नाम की कोई चीज नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस डमी अध्यक्ष बनाना चाहती थी, लेकिन अशोक गहलोत ने अपना असली रंग दिखा दिया। जेपी दलाल ने विपक्ष द्वारा तीसरे मोर्चे के गठन की कोशिश पर कहा कि चुनावों के साम्य ये हर बार होता है। उन्होंने नीतीश कुमार द्वारा 2024 में भाजपा को 50 सीटों पर समेटने पर कहा कि देश की जनता ने अपना आशीर्वाद पीएम मोदी व उनके कामों को दिया है। समेटने का काम नीतीश की नहीं, जनता का है, जो भाजपा की बजाय विपक्ष को समेटेगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-agriculture-minister-furious-over-the-striking-arhtiyas/article-38258</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-agriculture-minister-furious-over-the-striking-arhtiyas/article-38258</guid>
                <pubDate>Mon, 26 Sep 2022 19:17:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/jp-dalal.jpg"                         length="34851"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक अक्तूबर से शुरू होगी खरीफ फसलों की खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा में खरीफ फसलों की खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी। इस दौरान मूंग, मूंगफली, अरहर, उड़द और तिल की खरीद होगी। फसलों की खरीद के लिए प्रदेश में सौ से अधिक मण्डियों की व्यवस्था की गई है। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने आज यहां अधिकारियों को निर्देश दिए कि विपणन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/purchase-of-kharif-crops-will-start-from-october-1/article-37963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/kharif-crops.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा में खरीफ फसलों की खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी। इस दौरान मूंग, मूंगफली, अरहर, उड़द और तिल की खरीद होगी। फसलों की खरीद के लिए प्रदेश में सौ से अधिक मण्डियों की व्यवस्था की गई है। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने आज यहां अधिकारियों को निर्देश दिए कि विपणन सत्र-2022-23 के दौरान खरीफ फसलों की खरीद के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी न हो। वह विपणन सत्र – 2022-23 के दौरान खरीफ फसलों की खरीद के संबंध में तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। श्री कौशल ने निर्देश देते हुए कहा कि फसलों की समयबद्ध तरीके से खरीद, उसकी स्टोरेज तथा मंडियों में गनी बैग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की समस्या न आए।</p>
<p style="text-align:justify;">विपणन सत्र 2022-23 के दौरान मूंग की खरीद एक अक्टूबर से शुरू होगी और यह 15 नवंबर तक जारी रहेगी। मूंगफली की खरीद एक नवंबर से 31 दिसंबर तक की जाएगी। अरहर, उड़द और तिल की खरीद एक दिसंबर से शुरू होगी और 31 दिसंबर तक जारी रहेगी। खरीफ फसलों की खरीद केन्द्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/supreme-court-refuses-to-hear-ashutosh-taploo-plea/"><strong>सुप्रीम कोर्ट ने आशुतोष टपलू की याचिका सुनने से किया इनकार</strong></a></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्य खरीद एजेंसियों जैसे हरियाणा राज्य भंडारण निगम और हेफेड के अलावा नेफेड द्वारा खरीफ फसलों की खरीद की जाएगी। खरीफ फसलों की निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में मण्डियों की व्यवस्था की गई है। मूंग की खरीद के लिए 16 जिलों में 38 मंडियां, अरहर की खरीद के लिए 18 जिलों में 22 मंडियां, उड़द की खरीद के लिए 7 जिलों में 10 मंडियां, मूंगफली की खरीद के लिए तीन जिलों में सात मंडियां तथा तिल की खरीद के लिए 21 जिलों में 27 मंडियां खोली गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि इस वर्ष मूंग की 41,850 टन उत्पादन की संभावना है। इसी प्रकार अरहर की 1044 टन, उड़द का 364 टन, तिल का 425 टन तथा मूंगफली का 10,011 टन उत्पादन होने की संभावना है। बैठक में कृ?षि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आयुक्त एवं सचिव पंकज अग्रवाल, कृ?षि विभाग के महानिदेशक हरदीप सिंह, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक सुजान सिंह, हरियाणा राज्य भंडारण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. शालीन और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/purchase-of-kharif-crops-will-start-from-october-1/article-37963</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/purchase-of-kharif-crops-will-start-from-october-1/article-37963</guid>
                <pubDate>Mon, 19 Sep 2022 16:22:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-09/kharif-crops.jpg"                         length="57368"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेत के टिब्बों पर लहलहा रहे मौसमी व किन्नू के बाग, कमा रहे लाखों</title>
                                    <description><![CDATA[परंपरागत खेती को छोड़कर गाँव देवसर के धरतीपुत्रों ने लिखी नई इबारत राज्य सरकार का बागवानी विभाग दे रहा 15 हजार से 50 हजार तक सब्सिडी भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। भिवानी जिला के गाँव देवसर में कभी रेत के टिब्बे थे। इन टिब्बों पर सिर्फ घास होती थी, वो भी जंगली। यहां खेती तो दूर-दूर तक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/mosambi-and-kinnow-gardens-are-running-on-the-sand-dunes-earning-lakhs/article-37002"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/mosambi-and-kinnow-garden.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>
<h3 style="text-align:justify;">परंपरागत खेती को छोड़कर गाँव देवसर के धरतीपुत्रों ने लिखी नई इबारत</h3>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h3>राज्य सरकार का बागवानी विभाग दे रहा 15 हजार से 50 हजार तक सब्सिडी</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> भिवानी जिला के गाँव देवसर में कभी रेत के टिब्बे थे। इन टिब्बों पर सिर्फ घास होती थी, वो भी जंगली। यहां खेती तो दूर-दूर तक सम्भव नहीं थी। लेकिन आज यहां किसान खेती की पुरानी पद्धति को छोड़कर मौसमी और किन्नू के बाग लगाकर लाखों रुपये कमाने लगे हैं। इन्हीं किसानों में शुमार हैं राकेश, संजय व रमेश यादव। किसान राकेश कहते हैं कि किसानों को अब परम्परागत खेती को छोड़कर दूसरी उन्नत किस्म की खेती करनी चाहिए, ताकि वह लाभ कमा सकें। उन्नत खेती से वो लाखों रुपये की कमाई करेगा, वहीं सरकार भी उसे फायदा देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं अधिकारी ?</h3>
<p style="text-align:justify;">जिला बागवानी अधिकारी देवीलाल ने बताया कि आज बागवानी प्रगतिशील किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है, जो उनकी आय को दोगुना करने में सहायक है। सरकार द्वारा 43 हजार रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी किसानों को उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके अलावा जो किसान धान छोड़कर बागवानी लगाते हैं, उन्हें 7 हजार रुपए अतिरिक्त सब्सिडी मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत दी जा रही है। इसी प्रकार हाईब्रीड सब्जी उगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी के साथ सात हजार रुपए धान की खेती छोड़ने पर सब्सिडी के रूप में अतिरिक्त उपलब्ध करवाई जा रही है। इससे इन योजनाओं से इस क्षेत्र के किसान काफी लाभ कमा रहे हैं तथा अपनी आय को तीन से चार गुणा तक बढ़ा पा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जहरमुक्त उत्पादों को दे रहे बढ़ावा, मंडी की दरकार</h3>
<p style="text-align:justify;">राजेश बताते हैं कि वो दवाई भी देशी बनाते हैं और उससे ही किन्नू व मौसमी की फसलों का उपचार करते हैं। इस दवाई में गुड़, गोमूत्र का इस्तेमाल होता है, जोकि खाने वाले की सेहत के लिए भी नुक्सानदेह नहीं होता। वहीं किसान संजय देवसरिया का कहना है सरकार मंडी का इंतजाम कर दे तो किसानों की ओर अधिक फायदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि वे बिना रसायनिक खाद के फसले बोते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार अलग मंडी बनवाये ताकि फसलो के उचित दाम भी मिल सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रति एकड़ एक लाख तक का फायदा</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान राजेश कहते हैं कि यहां उन्होंने 17 एकड़ में किन्नू व मौसमी का बाग लगाया था। अब वह बाग किसान राकेश व संजय के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। उनका कहना है कि वे 1 लाख रुपये प्रति एकड़ उससे फायदा ले रहे हैं, जबकि परम्परागत खेती में 30 से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ फायदा किसान को मिलता है। राजेश का कहना है कि सरकार ऐसी फसलों पर शुरूआत में ही सब्सिडी देती है ताकि किसान इस ओर अग्रसर हो सके। चाहे बात टैंक बनाने की हो या टपका सिंचाई के लिए तार या दवाई की।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/mosambi-and-kinnow-gardens-are-running-on-the-sand-dunes-earning-lakhs/article-37002</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/mosambi-and-kinnow-gardens-are-running-on-the-sand-dunes-earning-lakhs/article-37002</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Aug 2022 21:29:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-08/mosambi-and-kinnow-garden.jpg"                         length="46224"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर जांचा फसलों का स्वास्थ्य</title>
                                    <description><![CDATA[धान में जिंक की कमी को पूरा करें किसान : प्रद्युमन थानेसर। (सच कहूँ ब्यूरो)। चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र के वैज्ञानिकों ने विभिन्न गांवों में जाकर धान में पनप रही बीमारियों के बारे में किसानों को जागरूक किया। इस दौरान वे गांव बलाही, दबखेड़ी अमीन, ज्योतिसर, सलपानी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-scientists-went-to-the-fields-and-checked-the-health-of-crops/article-36783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/agriculture.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">धान में जिंक की कमी को पूरा करें किसान : प्रद्युमन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>थानेसर। (सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र के वैज्ञानिकों ने विभिन्न गांवों में जाकर धान में पनप रही बीमारियों के बारे में किसानों को जागरूक किया। इस दौरान वे गांव बलाही, दबखेड़ी अमीन, ज्योतिसर, सलपानी कलां, दीवाना, बीबीपुर, यारी, संघौर, धुराला व बपदी में गए। केविके के वरिष्ठ समन्वयक व कीट विशेषज्ञ डा. प्रद्युमन भटनागर, पौध रोग विशेषज्ञ डा. फतेह सिंह व जिला विस्तार विशेषज्ञ डा. सरिता ने किसानों को विभिन्न बीमारियों के बारे में किसानों को जागरूक किया।</p>
<p style="text-align:justify;">डा. प्रद्युमन भटनागर ने बताया कि कई स्थानों पर धान में जिंक की कमी पाई गई, कई जगहों धान में बकानी रोग पाया गया जिसमें धान में झंडे प्रकार के पौधे बन गए हैं। इसके निदान के लिए किसानों को चाहिए कि 500 ग्राम जिंक सल्फेट व ढाई किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। पांच पांच दिन के अंतराल में दो बार छिड़काव करने से पौधों की बढोतरी को गति मिलेगी। उन्होने बताया कि धान में जिंक की कमी होने से जंग जैसे लाल धब्बे दिखने लग जाते हैं जिन्हे स्वस्थ पौधों के मुकाबले ज्यादा आसानी से तोड़ा जा सकता है। वहीं बकानी रोग में पनपे लंबे पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-scientists-went-to-the-fields-and-checked-the-health-of-crops/article-36783</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-scientists-went-to-the-fields-and-checked-the-health-of-crops/article-36783</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 16:06:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-08/agriculture.jpg"                         length="107060"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि संकट का समाधान जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने विवादित कृषि कानून वापिस लेने के बाद दिल्ली बार्डर पर बैठे किसानों में जश्न का माहौल है। साथ ही किसानों ने ऐलान किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने तक संघर्ष जारी रहेगा। वास्तव में यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बन भी जाए फिर भी कृषि संकट का स्थायी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/need-to-solve-agricultural-crisis/article-28671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/agricultural-science-fair.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने विवादित कृषि कानून वापिस लेने के बाद दिल्ली बार्डर पर बैठे किसानों में जश्न का माहौल है। साथ ही किसानों ने ऐलान किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने तक संघर्ष जारी रहेगा। वास्तव में यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बन भी जाए फिर भी कृषि संकट का स्थायी समाधान नहीं समझा जा सकता। धान के कारण भू-जल का स्तर गिरना, कीटनाशकों और खादों का बढ़ रहा प्रयोग जैसी कई जटिल समस्याएं हैं जिनके समाधान के बिना कृषि संकट का समाधान नहीं हो सकता। वास्तव में न तो कृषि कानूनों की वापिसी से किसानों की समस्या हल हुई और न ही सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है। मुद्दों की जड़ तक भी पहुंचना होगा। वास्तव में केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और किसान तीनों ही पक्षों को कृषि संकट का समाधान निकालने के लिए मिल-बैठकर रणनीति बनानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारों को कृषि समस्याओं संबंधी किसानों, कृषि विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों की मदद लेनी चाहिए। भले ही कृषि संबंधी फैसलों में सरकारी तंत्र की अहम भूमिका होती है लेकिन इसके पीछे कृषि का ज्ञान भी महत्वपूर्ण होता है। वास्तव में चंद ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने पारंपरिक खेती को छोड़कर कर आधुनिक तकनीक से खेती कर सफल किसान बने। किसानों को नई फसलों, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कृषि के हालातों और मंडीकरण पर नजर रखनी होगी। समय कभी भी एक जैसा नहीं रहा। बदलाव प्रकृति का नियम है। वैकल्पिक फसलों की कृषि से जहां सरकारें को निवेश करने की आवश्यकता है वहीं केवल निजी क्षेत्र में निवेश को छोड़कर देश की जनसंख्या बहुत कृषि क्षेत्र के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास करने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब किसान वैकल्पिक फसलों की तरफ ध्यान देगा तब गेहूँ धान की पैदावार भी संतुलित होगी जिससे अनाज भंडार का खर्च घटेगा और वही पैसा कृषि तकनीकों को विकसित करने पर खर्च हो। फिलहाल देश में न तो सिंचाई की समस्या हल हुई है और न ही पानी की बचत के लिए कोई नीति लाई गई है। वास्तविक्ता यह है कि भू-जल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है जिसे बचाने के लिए औपचारिक बैठकें व कार्रवाईयों के सिवाय कुछ भी नहीं हो रहा। कीटनाशक और खाद का बढ़ रहा प्रयोग और इसका खाद्य पदार्थों पर बुरा प्रभाव कैंसर और अन्य बीमारियों के रूप में किसान परिवार को आर्थिक और शारीरिक रूप से बर्बाद कर रहा है। जश्न के दौर में कृषि संकट के खतरों को याद रखना होगा, यह सबकी जिम्मेदारी है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/need-to-solve-agricultural-crisis/article-28671</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/need-to-solve-agricultural-crisis/article-28671</guid>
                <pubDate>Sat, 27 Nov 2021 11:22:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-11/agricultural-science-fair.jpg"                         length="18838"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एपीडा ने किए कृषि निर्यात बढ़ाने के उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने कोरोना महामारी के दौरान कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यूरोप, पूर्वी एशिया और पूर्व के अन्य देशों से लगातार विचार विमर्श किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एपीडा ने अप्रैल से अक्टूबर 2020 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/apeda-took-measures-to-increase-agricultural-exports/article-20047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/agricultural-education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने कोरोना महामारी के दौरान कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यूरोप, पूर्वी एशिया और पूर्व के अन्य देशों से लगातार विचार विमर्श किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एपीडा ने अप्रैल से अक्टूबर 2020 तक अपने सभी उत्पादों के प्रचार के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) , दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, कुवैत और ईरान जैसे संभावित आयातक देशों के साथ कई वर्चुअल क्रेता-विक्रेताओं की बैठकें आयोजित कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त सिंगापुर, रूस, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और लातविया जैसे देशों के साथ विशिष्ट उत्पादों से जुड़ी वर्चुअल नेटवर्किंग बैठकें भी आयोजित की गईं। इन उत्पादों में ताज़ा फल और सब्ज़ियां शामिल थे। कनाडा के साथ ऑर्गेनिक उत्पादों, जबकि अमेरिका और यूएई के साथ जीआई उत्पादों को लेकर बैठकें हुईं। मंत्रालय के अनुसार इन वर्चुअल बैठकों ने भारत के आयातकों और निर्यातकों को बासमती चावल, गैर-बासमती चावल, अंगूर, आम, केला, अनार, ताज़ा सब्ज़ियां और ऑर्गेनिक उत्पादों आदि के निर्यात में भारतीय क्षमता से अवगत कराने के लिए बातचीत का मंच प्रदान किया। इस तरह के आयोजन निर्यात को सुगम बनाने के संदर्भ में भारतीय कृषि उत्पादों में आयातकों के विश्वास को और अधिक बढ़ाएंगे।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/apeda-took-measures-to-increase-agricultural-exports/article-20047</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/agriculture/apeda-took-measures-to-increase-agricultural-exports/article-20047</guid>
                <pubDate>Sun, 22 Nov 2020 12:20:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-11/agricultural-education.jpg"                         length="45473"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        