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                <title>Sedition Law - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Supreme Court: राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मची हलचल!</title>
                                    <description><![CDATA[Supreme Court Hearing On Sedition Law: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता के तहत राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को मंगलवार को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को विचार के लिए भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-decision-of-supreme-court-on-treason-law-created-a-stir/article-52247"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/supreme-court-of-india2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Supreme Court Hearing On Sedition Law: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता के तहत राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को मंगलवार को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को विचार के लिए भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इसके साथ ही नए प्रस्तावित दंड संहिता में राजद्रोह प्रावधान को संशोधित करने वाला नया कानून लागू होने तक मामले की जांच स्थगित करने की केंद्र की याचिका भी खारिज कर दी। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत की इस पीठ के समक्ष कहा कि नए प्रस्तावित दंड संहिता में राजद्रोह प्रावधान को संशोधित किया गया है। प्रस्तावित कानून फिलहाल संसदीय स्थायी समिति के समक्ष विचाराधीन है। इस बीच वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी समेत अन्य ने पीठ के समक्ष कहा कि नया कानून बनने से आईपीसी की धारा 124ए की संवैधानिकता को चुनौती खत्म नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नये कानून को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। Supreme Court</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने 124ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टालने के केंद्र के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा, “कई कारण हैं-धारा 124ए कानून की किताब में बनी हुई है और दंडात्मक कानून में नए कानून का केवल संभावित प्रभाव होगा और अभियोजन की वैधता 124ए तक बनी रहेगी और चुनौती का मूल्यांकन इस प्रकार किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">” सिब्बल ने कहा कि केदारनाथ सिंह मामले (पांच सदस्यी संविधान पीठ का फैसला, जिसने प्रावधान की संवैधानिकता को बरकरार रखा था) पर पुनर्विचार करने के लिए मामले को पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है या तीन न्यायाधीशों की मौजूदा पीठ ही इस पर फैसला कर सकती है। उन्होंने कहा कि नया कानून बहुत खराब है। इसके रहते मुकदमा चलता रहेगा। पीठ ने कहा कि उसे पांच न्यायाधीशों की पीठ का गठन करना होगा, क्योंकि पांच न्यायाधीशों की पीठ का फैसला उस पर बाध्यकारी है। शीर्ष अदालत के 11 मई, 2022 के आदेश के कारण राजद्रोह कानून फिलहाल स्थगित है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Sep 2023 15:50:18 +0530</pubDate>
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                <title>Sedition Law: गृह मंत्री ने किया काले कानून का खात्मा</title>
                                    <description><![CDATA[Sedition Law: लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता 2023 को पेश किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजद्रोह अधिनियम की धारा 124-ए को समाप्त करने का ऐलान किया। यह वास्तव में एक एतिहासिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल राजद्रोह कानून की धारा 124-ए पर रोक लगा दी थी और सरकार से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/home-minister-abolished-the-black-law/article-51116"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/amit-shah1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sedition Law: लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता 2023 को पेश किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजद्रोह अधिनियम की धारा 124-ए को समाप्त करने का ऐलान किया। यह वास्तव में एक एतिहासिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल राजद्रोह कानून की धारा 124-ए पर रोक लगा दी थी और सरकार से इस कानून को खत्म करने के लिए कहा था। यह अच्छी बात है कि सरकार ने जनभावना का सम्मान करते हुए इस काले कानून को खत्म कर दिया है। दरअसल, कोई भी कानून जनभावनाओं से ऊपर नहीं हो सकता। यह भी सच है कि निरंकुश ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को लूटने के लिए देश की जनता पर राजद्रोह का कानून थोपा था। Section 124A</p>
<p style="text-align:justify;">कानून की आड़ में देशभक्तों को देश का गद्दार की भांति पेश किया गया। लाखों भारतीय अंग्रेजों के इस काले कानून का शिकार हुए। वास्तव में किसी भी प्रकार की देश विरोधी गतिविधि को अंजाम देना, जिससे देश की एकता व अखंडता को खतरना हो यही देशद्रोह होता है, परंतु देश में लोकतंत्र व मानवीय विचारधारा की बदौलत ही ऐसे हालात बहुत कम पैदा हुए हैं जिससे देश को कोई खतरा हो। आजादी की पौनी सदी के बाद भी देश मजबूत है और मजबूत हो रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। Sedition Law</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय संविधान का मान-सम्मान बढ़ा है। इन परिस्थितियों में देश को किसी किसी भी तरह के खतरे की बात कोरी कल्पना है। राजद्रोह कानून के मुताबिक सरकार के खिलाफ बोलना, उंगली उठाना या लिखना भी राजद्रोह है। यह अवधारणा पूर्णतया गलत है। वास्तव में सरकार और देश अलग-अलग हैं। सरकार के किसी भी फैसले का विरोध देश का विरोध नहीं हो सकता। संविधान कुछ शर्तों के तहत लिखने, बोलने, विरोध करने और जुलूस निकालने की आजादी देता है। इसी तरह के व्यवहार को राष्ट्रविरोधी मानना ​​गलत है, लेकिन यह सरकार और संविधान की महानता है जो अपने नागरिकों को आजादी देता है। Amit Shah</p>
<p style="text-align:justify;">यदि बोलना और लिखना देश के खिलाफ होता तो सूचना का अधिकार एक्ट जैसा कानून बनाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। केंद्र सरकार और संसद का राजद्रोह कानून को खत्म करना एक स्वागत योग्य निर्णय है और इस कदम से देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी। देश विरोधी ताकतों और आतंकवाद विरोधी सख्त कानून पहले से ही मौजूद हैं, जो देश की एकता और अखंडता को बरकरार बनाए हुए हैं। Sedition Law</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Tiranga Hoisting: घर पर तिरंगा फहराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियम" href="http://10.0.0.122:1245/tricolour-hoisting-rules/">Tiranga Hoisting: घर पर तिरंगा फहराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े न…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2023 15:48:08 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं हटेगा राजद्रोह कानून</title>
                                    <description><![CDATA[(Sedition law) राजद्रोह या देशद्रोह कानून को लेकर विधि आयोग की अनुशंसा ने तय कर दिया है कि फिलहाल इस कानून का अस्तित्व बना रहेगा। पिछले साल मई में सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-124-ए पर रोक लगा दी थी। इसी धारा के अंतर्गत देशद्रोह का कानून परिभाषित है। देश के 22वें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/sedition-law-will-not-be-removed/article-48810"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/sedition-law.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">(Sedition law) राजद्रोह या देशद्रोह कानून को लेकर विधि आयोग की अनुशंसा ने तय कर दिया है कि फिलहाल इस कानून का अस्तित्व बना रहेगा। पिछले साल मई में सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-124-ए पर रोक लगा दी थी। इसी धारा के अंतर्गत देशद्रोह का कानून परिभाषित है। देश के 22वें विधि आयोग ने इसे आवश्यक बताते हुए केंद्र सरकार से अनुसंशा की है कि इसका और कढ़ाई से पालन तो किया ही जाए, साथ ही सरकार इसे जरूरी बदलावों के साथ लागू रहने दे।</p>
<h3>राजद्रोह कानून से जुड़ी धारा में सजा बढ़ाने की भी सिफारिश</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल न्यायालय ने कहा था कि सरकार की निंदा या आलोचना करने के लिए किसी व्यक्ति पर राजद्रोह या मानहानि का आरोप नहीं लगाया जा सकता। इस कथन से साफ होता है कि देश की न्यायपालिका लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ है। यह बात राजद्रोह एवं मानहानि को परिभाषित करने वाली धारा 124 और 124-ए के परिप्रेक्ष्य में कही गई थी। इसी क्रम में न्यायालय ने धारा 124-ए को निष्क्रिय कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन आयोग ने राजद्रोह कानून से जुड़ी धारा 124-ए को बहाल रखने की सिफारिश करते हुए, सजा भी बढ़ाने की सिफारिश कर दी है। इन धाराओं में दर्ज मामलों की जांच पुलिस निरीक्षक या इसके ऊपर की श्रेणी के अधिकारी राज्य या केंद्र सरकार की बिना अनुमति के कर सकेंगे। धारा 124-ए के अंतर्गत लिखित या मौखिक शब्दों, चिन्हों प्रत्यक्ष या अप्रत्क्ष तौर से नफरत फैलाने या असंतोश जाहिर करने पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया जा<br />
सकता है।</p>
<h3>भारत तेरे टुकड़े होंगे हजार, जैसे नारे राजद्रोह भी, राष्ट्रद्रोही भी</h3>
<p style="text-align:justify;">इस धारा के तहत दोशी पर आरोप साबित हो जाए तो उसे तीन साल के कारावास तक की सजा हो सकती है। 1962 में शीर्ष न्यायालय के सात न्यायाधीशों की खंडपीठ ने ह्यकेदारनाथ बनाम बिहार राज्यह्य प्रकरण में, राजद्रोह के संबंध में ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि ह्यविधि द्वारा स्थापित सरकार के विरुद्ध अव्यवस्था फैलाने या फिर कानून या व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा करने या फिर हिंसा को बढ़ावा इेने की प्रवृत्ति या मंशा हो तो उसे राजद्रोह माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी परिभाषा की परछाईं में हार्दिक पटेल बनाम गुजरात राज्य से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति अपने भाषण या कथन के मार्फत विधि द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ हिंसा फैलाने का आह्वान करता है तो उसे राजद्रोह माना जाएगा। अदालत के इन फैसलों के अनुक्रम में किसी अन्य देश की प्रशंसा, परमाणु संयंत्रों का विरोध, राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े नहीं होना, जैसे आचरण जरूर राजद्रोह नहीं कहे जा सकते हैं, लेकिन भारत तेरे टुकड़े होंगे हजार, जैसे नारे न केवल राजद्रोह हैं, बल्कि राष्ट्रद्रोही भी है।</p>
<h3>राष्ट्रविरोधी तत्वों से निपटने में धारा-124-ए जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">इस परिप्रेक्ष्य में यह समझ लेना भी जरूरी है कि संविधान का अनुच्छेद 19-1 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी जरूर देता है, लेकिन इस पर युक्तियुक्त प्रतिबंध भी लगाया गया है। इस संदर्भ में एके गोपालन बनाम मद्रास राज्य से जुड़े फैसले में साफतौर से कहा गया है कि ‘बेहतर होगा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सामाजिक हित व अन्य बृहत्तर सामाजिक हितों के अधीन हों।’ (Sedition law)</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में यही बृहत्तर सामाजिक हित राज्य को भारत की संप्रभुता, अखंडता तथा राज्य की सुरक्षा से जोड़ते हैं। अत: आयोग की सिफारिशों में स्पष्ट है कि राष्ट्रविरोधी और अलगाववादी तत्वों से निपटने में धारा-124-ए जरूरी है। भारत के विरुद्ध सांप्रदायिक कट्टरता फैलाने और सरकार के लिए नफरत के हालात बनाने में भारत विरोधी विदेशी ताकतें सोशल मीडिया का मनचाहा एवं गलत दुरुपयोग करती हैं, इसलिए इस धारा का अस्तित्व बने रहना जरूरी है।</p>
<h3>ब्रिटेन ने इस तरह के कानून को 2009 में खत्म कर दिया</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रत्येक देश की विधि प्रणाली उस देश की सच्चाइयों और विसंगतियों के अनुसार काम करती है। दूसरे देशों की कानूनी संहिताओं को आदर्श मानकर भारत में 124-ए को प्रतिबंधित करना घातक होगा। दरअसल मानवाधिकार हितों के कथित पैरोकार उदाहरण देते हैं कि ब्रिटेन ने इस तरह के कानून को 2009 में खत्म कर दिया। जबकि अमेरिका में स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के मामलों में इस प्रावधान को डर पैदा करने वाला बताया है। आॅस्ट्रेलिया में विधि आयोग ने राजद्रोह शब्द को विलोपित करने की सिफारिश की है। (Sedition law)</p>
<p style="text-align:justify;">इन देशों के कानूनों को हम इसलिए भारत के परिप्रेक्ष्य में आदर्श नहीं मान सकते हैं, क्योंकि वहां न तो सांप्रदायिक धार्मिकता है और न ही भारत जैसी जातीय विसंगतियां? इस्लामिक आतंकवाद, अलगाववाद और जबरन मतांतरण भी विकसित देशों में लगभग नहीं है। भारत में नक्सलवाद और उग्रवाद भी सिर उठाते रहते हैं। ऐसे में राजद्रोह कानून यदि समाप्त कर दिया जाता है तो भारत को विखंडित होने में समय नहीं लगेगा? यह तब और आवश्यक है, जब चीन और पाकिस्तान जैसे देश भारत को तोड़ने में लगे हों। कनाडा में बैठे अलगाववादी खालिस्तान को हवा दे रहे हों ? (Sedition law)</p>
<h3>नए विचार का पुलिसिया दमन तानाशाही प्रवृत्ति का प्रतीक</h3>
<p style="text-align:justify;">बावजूद जनतंत्र में सरकार से असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अनिवार्य पहलू है। बशर्ते उसमें राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती नहीं हो, साथ ही हिंसा और अराजकता के लिए भी कोई जगह न हो ? इस दृष्टि से यदि कोई नागरिक सामाजिक समूह या विपक्षी दल सरकार की आलोचना या नीतिगत बदलाव की बात करता है तो सरकार को उसकी बात न केवल सुनने की जरूरत है, बल्कि यदि कोई नया विचार आता है, तो उस परिप्रेक्ष्य में नीतिगत बदलाव किए जाने की जरूरत है। (Sedition law)</p>
<p style="text-align:justify;">नए विचार का पुलिसिया दमन तानाशाही प्रवृत्ति का प्रतीक है। इसीलिए किसी कानून की न्यायालय व्याख्या और पुलिसिया परिभाषा में अंतर है। पुलिस जहां कानून को लागू करने के बहाने क्रूरता अपना लेती है, वहीं न्यायालय विधिशास्त्र का ख्याल रखती है। इस लिहाज से कानून के जहां संतुलित उपयोग की जरूरत है, वहीं राज या राजद्रोह जैसे कानून को अपवाद स्वरूप ही अमल में लाने की जरूरत है। (Sedition law)</p>
<h3>समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों के विरुद्ध भी मामले दर्ज किए गए</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सालों में देखने में आया कि परमाणु संयंत्र का विरोध करने, फेसबुक पोस्ट लाइक करने, प्रतिद्वंद्वी क्रिकेट टीम की हौसला अफजाई करने, किसी दूसरे देश की तारीफ करने, कार्टून बनाने या फिर सिनेमा घर में राष्ट्रगान के समय खड़ा न हो पाने के लिए भी देशद्रोह के मामले या तो दर्ज किए जाने लगे? (Sedition law)</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे समाजसेवियों, लेखकों औा बुद्धिजीवियों के विरुद्ध भी मामले दर्ज किए गए, जो सरकार की राय से अलग विचार रखने वाले थे, या फिर सरकार की नीतियों व कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे थे। इस प्रकृति के ज्यादातर मामलों में आरोप सिद्ध नहीं हो पाते हैं, लेकिन अदालत की लंबी और महंगी प्रक्रिया से गुजरना किसी सजा से कम नहीं है, क्योंकि व्यक्ति हर दिन एक नई शंका-कुशंका से प्रताड़ित होता है। (Sedition law)</p>
<h3>आपत्तिजनक तरीकों में धारा 124-ए हो सकती है प्रभावी</h3>
<p style="text-align:justify;">यह सब जानते हुए भी तत्कालीन संप्रग की मनमोहन सिंह की सरकार ने धारा 124-ए को ‘आतंकवाद, उग्रवाद और सांप्रदायिक हिंसा जैसी देशद्रोही समस्याओं से निपटने के लिए आवश्यक और संविधान सम्मत’ बताया था। सरकार ने इस समय संसद में यह भी स्पष्ट किया था कि समुचित दायरे में रहकर सरकार की आलोचना करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन जब आपत्तिजनक तरीकों का सहारा लिया जाए, तब यह धारा प्रभावी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">तब बहस में भाजपा समेत कई दलों को सांसदों ने मौजूदा सरकार के इस रुख का समर्थन किया था। इस धारा के आतंकवाद और उग्रवाद के परिप्रेक्ष्य में चले आ रहे महत्व के चलते ही, इसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी नहीं हटा पाए थे, जबकि वे इसे हटाए जाने के पक्ष में थे। बहरहाल राजद्रोह कानून मनमोहन सिंह सरकार के समय प्रासंगिक था, तब अब इसे कैसे अप्रासंगिक मान लिया जाए। जहां तक फिरंगी हुकूमत द्वारा इस दमनकारी कानून को अस्तित्व में लाया गया, इसलिए इसकी समाप्ति आवश्यक है तो फिर वर्तमान भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता भी अंग्रेजी शासन की देन है। अत: स्वतंत्र भारत में इसका भी अस्तित्व किसलिए? (Sedition law)</p>
<p style="text-align:right;"><strong>प्रमोद भार्गव , वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2023 16:22:44 +0530</pubDate>
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                <title>देशद्रोह कानून पर इस नेता ने दिया बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[राजद्रोह कानून पर सरकार की सक्रियता चौंकाने वाली : थरूर नई दिल्ली। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राजद्रोह कानून को (Sedition Law) लेकर विधि आयोग के प्रस्तावों को उच्चतम न्यायालय की भावना के प्रतिकूल बताते हुए कहा है कि इस कानून पर सरकार की सक्रियता चौंकाने वाली है। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य ने कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/this-leader-gave-a-big-statement-on-sedition-law/article-48431"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/shashi-tharoor.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">राजद्रोह कानून पर सरकार की सक्रियता चौंकाने वाली : थरूर</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राजद्रोह कानून को (Sedition Law) लेकर विधि आयोग के प्रस्तावों को उच्चतम न्यायालय की भावना के प्रतिकूल बताते हुए कहा है कि इस कानून पर सरकार की सक्रियता चौंकाने वाली है। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य ने कहा कि इस कानून का बार-बार दुरुपयोग होता रहा है इसलिए वह लोकसभा में निजी विधेयक लाकर इस कानून में संशोधन की बात कर चुके हैं। कांग्रेस ने भी 17वीं लोकसभा के चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में इस कानून को बदलने की बात कही थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देशद्रोह कानून के दुरुपयोग को रोका जा सकता है | Sedition Law</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस कानून को लेकर सरकार के कदम को चौंकाने वाला बताया और कहा, ‘यह चौंकाने वाला है और इसका विरोध किया जाना चाहिए। इस कानून का अक्सर दुरुपयोग किया जाता रहा है। इस कानून में सुधार होगा तो देशद्रोह कानून के दुरुपयोग को रोका जा सकता है। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘राजद्रोह को लेकर मेरा 2014 का निजी विधेयक और काँग्रेस पार्टी का 2019 का घोषणापत्र इसमें संशोधन को लेकर समर्थन देते हैं ताकि इसे उच्चतम न्यायालय की भावना के अनुरूप बनाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के शीर्ष न्यायालय ने 2022 में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह कानून को ठंडे बस्ते में रखने और केंद्र तथा राज्य सरकारों से इस कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से परहेज करने को कहा था। गौरतलब है की कांग्रेस पार्टी ने भी इस कानून को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और सरकार की इस कदम को विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2023 11:37:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>देशद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अब जुलाई में होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को झटका देते हुए देशद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। अब इसके तहत नए मामले दर्ज नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा पुराने मामलों में भी लोग अदालत में जाकर राहत की अपील कर सकते हैं। अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-stays-sedition-law/article-33244"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/sedition-law1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को झटका देते हुए देशद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। अब इसके तहत नए मामले दर्ज नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा पुराने मामलों में भी लोग अदालत में जाकर राहत की अपील कर सकते हैं। अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में सुनवाई होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>देशद्रोह का आरोपी जमानत की अर्जी दे सकता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जुलाई के तीसरे हफ्ते में फिर से होगी सुनवाई।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>देशद्रोह का कोई नया केस दर्ज न हो।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नागरिकों की रक्षा ज्यादा जरूरी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लंबित मामलों को अभी स्थगित रखा जाए।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>केन्द्र की ओर से राज्यों को निर्देश जारी किया जाएगा।</strong></li>
</ul>
<h3><strong>क्या है देशद्रोह</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि देशद्रोह क्या है? सरकार का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना या बदलाव की मांग करना हर नागरिक का अधिकार है लेकिन देश की सत्ता को गैरकानूनी तरीके से चुनौती देना देशद्रोह की कैटिगरी माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के वकील डी. बी. गोस्वामी ने बताया कि देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठन को बैन कर दिया जाता है। इसके तहत ही माओवादी और दूसरे अलगाववादी संगठनों को बैन किया गया है। आमतौर पर ऐसे संगठनों से संबंध रखनेवालों के खिलाफ देशद्रोह या इससे संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज होता है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आरोपी का अपराध किस तरह का है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईपीसी की धारा-121 में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने वालों (आतंकवादी गतिविधियों में शामिल) को सजा दिए जाने का प्रावधान है। अगर कोई शख्स भारत के खिलाफ युद्ध करता है या ऐसी कोशिश करता है या ऐसे लोगों को बढ़ावा देता है तो उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है। वहीं ऐसे किसी अपराध के लिए साजिश रचने पर धारा-121 ए के तहत सजा दी जाती है, जो 10 साल या अधिकतम उम्रकैद हो सकती है। यह जानना जरूरी है कि अनजाने में भी किसी को ऐसे संगठन या ऐसी विचारधारा वाले लोगों से संपर्क नहीं रखना चाहिए। ऐसे लोगों के साथ किसी भी तरह की सांठगांठ रखनेवालों को इस मामले में दोषी करार दिया जा सकता है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 May 2022 12:02:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>देशद्रोह कानून में बदलाव चाहता है केन्द्र</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राजद्रोह कानून (Sedition Law) पिछले काफी सालों से विवादों में रहा है। आरोप लगता आया है कि सरकारें बदले की कार्रवाई करने के लिए इस कानून का इस्तेमाल करती हैं। इस कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है। अब केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/center-wants-change-in-sedition-law/article-33165"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/sedition-law.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राजद्रोह कानून (Sedition Law) पिछले काफी सालों से विवादों में रहा है। आरोप लगता आया है कि सरकारें बदले की कार्रवाई करने के लिए इस कानून का इस्तेमाल करती हैं। इस कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है। अब केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि वो राजद्रोह कानून में बदलाव को लेकर जांच के लिए तैयार है। लेकिन इससे पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का बचाव किया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सरकार ने कही समीक्षा करने की बात</h4>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की तरफ से अपने नए हलफनामे में बताया गया है कि, हम राजद्रोह कानून (Sedition Law) के प्रावधानों की फिर से जांच करने और उन पर पुनिर्विचार करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में ये अपील की गई है कि जब तक सरकार इस कानून की जांच करती है, तब तक इस मामले को नहीं उठाया जाए।</p>
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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 19:59:29 +0530</pubDate>
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