<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/save-nature/tag-20141" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Save Nature - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/20141/rss</link>
                <description>Save Nature RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हरियाली बचाकर व बढ़ाकर ही गर्मी से मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर भारत सहित पूरा देश भीषण गर्मी की चपेट में है। देश के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। सूरज की तेज किरणें सूखे और पेयजल संकट की मार झेल रहे भारतीयों पर दोहरी मुसीबत साबित हो रही है। इसी बीच खेतों में आग लगाने से जहां धरती का सीना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/relief-from-heat-will-be-given-only-by-saving-and-increasing-greenery/article-33180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/its-time-to-save-nature.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर भारत सहित पूरा देश भीषण गर्मी की चपेट में है। देश के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। सूरज की तेज किरणें सूखे और पेयजल संकट की मार झेल रहे भारतीयों पर दोहरी मुसीबत साबित हो रही है। इसी बीच खेतों में आग लगाने से जहां धरती का सीना तप रहा है वहीं सड़क दुर्घटनाएं भी घट रही हैं। ऐसा ही ताजा मामला पंजाब के बटाला क्षेत्र में सामने आया हैं, जहां गेहूँ के नाड़ को आग लगाने के कारण एक स्कूली बस पलट गई। बस आग पकड़ गई और सात बच्चे झुलस गए। हालांकि जानी नुक्सान से बचाव रहा और अधिकतर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हादसे का कारण बेहद चिंताजनक रहा, क्योंकि खेत में नाड़ को आग लगाने से चारों और धुंआ फैला हुआ था और चालक की आखों में धुंआ पड़ गया, जिसके बाद बस बेकाबू होकर उसी खेत में पलट गई। इसके अलावा कई अन्य घटनाएं भी घट चुकी हैं। इससे पहले भी हर साल पराली और नाड़ को जलाने से जान-माल का भारी नुक्सान होता रहा है लेकिन इनसे सबक लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक पार्टियां भी अपना नफा-नुक्सान देखती हैं, वो फ्री उपचार करवाने और अस्पताल में जाकर हालचाल जानकार सुर्खियों बटोर लेते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई को लेकर सबके मुंह बंद हो जाते हैं। इन घटनाओं के पीछे एक कारण किसानों को जागरूक नहीं करना भी है। जहां तक किसी की जान जाने का मामला है, इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और किसान संगठनों को पहल करनी चाहिए कि गेहूँ के नाड़ व धान की पराली को आग न लगाई जाए। माना कि पराली जलाना किसान की मजबूरी है, लेकिन तपती गर्मी में गेहूँ के नाड़ को जलाना भी मानवता और वातावरण से अन्याय है। पराली को काटना, संभालना या फिर बेचना मुश्किल है। पराली संभालना किसानों के लिए आर्थिक बोझ की तरह है लेकिन गेहूँ का नाड़ तो बेहद लाभप्रद है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार गेहूँ की कम पैदावार होने के चलते तूड़े की किल्लत है, यही कारण है कि पहले 1800 में बिकने वाला तूड़े की ट्राली इस बार 3500 से चार हजार के बीच में बिक रही है। यहां सहकारी क्षेत्रों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि भूसा बनाने वाली मशीनें और अन्य यंत्र छोटे किसानों को सस्ते रेटों पर मुहैया करवाए जाएं। डीजल का रेट बढ़ने के चलते भी किसान माचिस पर एक रुपया खर्च कर नाड़ का काम-तमाम कर देता है दूसरी तरफ नाड़ जलाने से केवल जानी नुक्सान नहीं हो रहा बल्कि अरबों रुपये का हरा सोना भी बर्बाद हो रहा है। इस वर्ष खेतों की आग के कारण जहां वन विभाग के करोड़ों वृक्षों को नुक्सान पहुंचा है वहीं वृक्षों के जलने की गंदी बदबू पक्षियों के लिए संकट बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि परिस्थितियां यूं ही बनी रहीं तब वृक्षों की हरियाली गायब हो जाएगी। वृक्षों को बचाने के लिए पराली और नाड़ को आग की भेंट चढ़ा देने से रोकना होगा। यह मामला केवल कानूनी सख्ती से निपटने वाला नहीं बल्कि किसानों को भी जागरूक करना होगा। वृक्षों और हरियाली के साथ प्यार बढ़ाना होगा। वृक्षों का नुक्सान किसानों का नुक्सान है। वृक्षों और मनुष्य की सांझ ही इस रिश्ते को मजबूत बनाएगी। उबल रहे खेत हमारी केवल मजबूरी नहीं बल्कि अज्ञानता का प्रमाण है। शिक्षा और आधुनिकता के युग में किसानों को वैज्ञानिक और वातावरण हितैषी सोच अपनानी होगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/relief-from-heat-will-be-given-only-by-saving-and-increasing-greenery/article-33180</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/news-brief/relief-from-heat-will-be-given-only-by-saving-and-increasing-greenery/article-33180</guid>
                <pubDate>Tue, 10 May 2022 09:45:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-05/its-time-to-save-nature.gif"                         length="103103"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        