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                <title>Diarrhoea - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>पटियाला में डायरिया का कहर, 43 मामले मिले, पातड़ां में मरीजों की संख्या 48 पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। Diarrhoea: पटियाला में डायरिया का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आते गांव झिल्ल में 43 केस डायरिया के पाए गए हैं। जबकि पातड़ां में मरीजों की संख्या 48 पर पहुंच गई है। उल्टी-दस्त का कारण सीवरेज का दूषित पानी बन रहा है व नगर निगम का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/diarrhea-wreaks-havoc-in-patiala-forty-three-cases/article-59865"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/patiala-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। </strong>Diarrhoea: पटियाला में डायरिया का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आते गांव झिल्ल में 43 केस डायरिया के पाए गए हैं। जबकि पातड़ां में मरीजों की संख्या 48 पर पहुंच गई है। उल्टी-दस्त का कारण सीवरेज का दूषित पानी बन रहा है व नगर निगम का प्रशासन इस समस्या को हल करने में नाकाम साबित हो रहा है। इधर स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को मुस्तैदी बरतने के आदेश जारी किए हैं व उन्होंने अधिकारियों के साथ मीटिंग की है। जानकारी के अनुसार पहले महेन्द्रा कॉलोनी में डायरियां के मरीज सामने आए और उसके बाद पातड़ां में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। Patiala News</p>
<p style="text-align:justify;">अब गांव झिल्ल में डायरिया ने अपना कहर बरपाया हुआ है और बड़ी संख्या में मरीज चपेट में आ रहे हैं। इन जगहों पर बीमारी का मुख्य कारण सीवरेज की समस्या माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वह लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन जो सीवेरज की समस्या है, वह स्वास्थ्य विभाग हल नहीं कर सकता। नगर निगम, नगर कौंसिल व प्रबंधों को सही करने में असफल साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को इन क्षेत्रों में तैनात रहने के आदेश दिए हैं। वहीं सिविल सर्जन डॉ. संजय गोयल का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें फील्ड में अपनी ड्यूटी निभा रही हैं। महेन्द्रा कॉलोनी में जो केस सामने आए थे, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अधिकारियों को फील्ड में बने रहने के आदेश | Patiala News</h3>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग सहित नगर निगम, नगर कौंसिलों, जल सप्लाई व सीवरेज बोर्ड के अधिकारियों को फील्ड में बने रहने के आदेश दिए हैं। उन्होंने पातड़ां के वार्ड नम्बर 15, झिल्ल के साथ क्षेत्र व न्यू महेन्द्रा कॉलोनी में उल्टी व दस्त के मरीज आने का भी जायजा लिया व अधिकारियों को इन क्षेत्रों में पूरी मुस्तैदी के साथ काम करने की हिदायत दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तलब करते कहा कि लोगों की सेहत के मामले में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने शिक्षा विभाग को कहा कि स्कूलों में बच्चों को जागरूक किया जाए कि पीने के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल किया जाए व आसपास की साफ सफाई पर जोर दिया जाए व बीमार होने की सूरत में तुरंत नजदीक के आम आदमी क्लीनिक या स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क किया जाए। Patiala News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Telangana Weather: तेलंगाना में अगले 24 घंटे में भारी वर्षा के आसार" href="http://10.0.0.122:1245/heavy-rain-expected-in-telangana-in-next-twenty-four-hours/">Telangana Weather: तेलंगाना में अगले 24 घंटे में भारी वर्षा के आसार</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 20:40:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मोहाली में फैली डायरिया की बीमारी, मरीजों की संख्या बढ़कर हुई 65</title>
                                    <description><![CDATA[कई इलाकों से लिए गए पानी के सैंपल, फॉगिंग और दवाई का छिड़काव मोहाली (सच कहूँ/एम.के. शायना)। मोहाली जिले में लगातार डायरिया (Diarrhoea) के केस बढ़ रहे हैं, जिसको देखते हुए कई इलाकों से मोहाली स्वास्थ्य विभाग ने पानी के सैंपल लिए हैं। रुरका, बाकरपुर, कुरारी, कंबाला, सोहना, बलौंगी और बढ़माजरा गांवों से पानी के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/diarrheal-disease-spread-in-mohali/article-50137"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/mohali-news-5.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कई इलाकों से लिए गए पानी के सैंपल, फॉगिंग और दवाई का छिड़काव</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोहाली (सच कहूँ/एम.के. शायना)।</strong> मोहाली जिले में लगातार डायरिया (Diarrhoea) के केस बढ़ रहे हैं, जिसको देखते हुए कई इलाकों से मोहाली स्वास्थ्य विभाग ने पानी के सैंपल लिए हैं। रुरका, बाकरपुर, कुरारी, कंबाला, सोहना, बलौंगी और बढ़माजरा गांवों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल इन इलाकों में मोहाली नगर निगम द्वारा पानी के टैंकरों से सप्लाई की जा रही है। वाटर सप्लाई एंड सैनिटरी डिपार्टमेंट के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रमनप्रीत सिंह की देखरेख में पानी के सैंपल लिए गए हैं। जिले में डायरिया के उपचाराधीन मरीजों की संख्या 65 पहुंच गई है। Mohali News</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि जुझार नगर से डायरिया के हल्के लक्षण वाले मरीज सामने आए हैं, लेकिन किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। डेराबस्सी में 15 मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं। मोहाली के जिला अस्पताल में 45 मरीज भर्ती हैं। 4 मरीजों का इलाज कुराली में चल रहा है। मोहाली नगर निगम और ग्रेटर मोहाली एरिया डैवल्पमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की टीमों ने भी प्रभावित इलाकों में फॉगिंग की। जिले की अन्य नगर परिषदें भी अपने-अपने क्षेत्रों में मच्छरों के लारवा को मारने के लिए रुके हुए पानी पर रसायनों का छिड़काव करने के अलावा नियमित रूप से फॉगिंग कर रही हैं। मौसमी बीमारियों की जांच के लिए स्वास्थ्य टीमें जिले में, खासकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर लगा रही हैं। Mohali News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सीएम मान द्वारा तस्करी रोकने के लिए ड्रोनों की रजिस्ट्रेशन शुरु करने की ‘वकालत’" href="http://10.0.0.122:1245/cm-mann-advocates-to-start-registration-of-drones-to-stop-smuggling/">सीएम मान द्वारा तस्करी रोकने के लिए ड्रोनों की रजिस्ट्रेशन शुरु करने की ‘वकालत’</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 21:32:56 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8216;डायरिया’ ले रहा छोटे बच्चों को अपनी पकड़ में : डॉ. सिंगला</title>
                                    <description><![CDATA[संगरुर(गुरप्रीत सिंह/नरेश कुमार)। आजकल गर्मी का तेज प्रकोप चल रहा है। बच्चे, अधेड़ उम्र के व्यक्तियों को गर्मी के कारण मौसमी बीमारियों ने अपनी जकड़ में लेना शुरू कर दिया है। खासकर छोटे बच्चों को आजकल डायरिया (उल्टी-दस्त) की बीमारी बहुत ज्यादा हो रही है। छोटी उम्र के लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे डायरियां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/small-children-taking-diarrhoea-in-their-grip-dr-singla/article-33181"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/dr-amit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरुर(गुरप्रीत सिंह/नरेश कुमार)।</strong> आजकल गर्मी का तेज प्रकोप चल रहा है। बच्चे, अधेड़ उम्र के व्यक्तियों को गर्मी के कारण मौसमी बीमारियों ने अपनी जकड़ में लेना शुरू कर दिया है। खासकर छोटे बच्चों को आजकल डायरिया (उल्टी-दस्त) की बीमारी बहुत ज्यादा हो रही है। छोटी उम्र के लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे डायरियां से पीड़ित हैं। डायरिया क्या होता है? इसके क्या लक्षण हैं और इसका इलाज कैसे होता है, आदि सवालों के बारे में संगरुर के प्रसिद्ध डॉक्टर अमित सिंगला एमडी (पीडियाट्रिक) के साथ विशेष तौर पर बातचीत की गई।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : डॉक्टर साहब यह डायरिया क्या है? यह छोटे बच्चों के लिए कितना खतरनाक है?</strong><br />
जवाब : डायरिया आमतौर पर उल्टी-दस्त की बीमारी है जो खासकर गर्मी के मौसम में खासकर छोटे बच्चों को अपनी पकड़ में लेती है। डायरिया होने की सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इसके साथ बच्चे का शरीर अंदरुनी पानी कम हो जाता है और वह गंभीर अवस्था में चला जाता है, यह एक गंभीर बीमारी है, घरेलू नुस्खे अपनाने की जगह इसे जल्द डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : यह पता कैसे लगता है कि बच्चे को डायरिया हो चुका है?</strong><br />
जवाब : बिल्कुल, डायरिया ज्यादातर 2 से 6 साल के बच्चे को अधिक प्रभावित करता है। इस उम्र के बच्चे को डायरिया होने उपरांत सबसे पहले उल्टियां लगेगी। उसके बाद उसका मुँह सूखने लगेगा और बच्चा बार-बार पानी मांगेगा और इसके बाद बच्चे को दस्त शुरु हो जाएंगे और लगातार उल्टी-दस्त के कारण बच्चा सुस्त हो जाएगा। कई बच्चे बेहोश भी हो<br />
जाते हैं। यदि इस तरह के लक्षण लगते हैं तो तुरंत बच्चे को नजदीक के अस्पताल लेकर जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : यदि रात के समय बच्चे को उल्टी-दस्त लगे तो पहला उपचार कैसे करना चाहिए?</strong><br />
जवाब : बहुत बढ़िया सवाल किया, यदि रात के समय में ऐसी स्थिति आ जाए कि उसे अस्पताल ले जाना काफी कठिन हो तो बच्चे को जीवन रक्षक घोल (ओआरएस का घोल) देना आरंभ करना चाहिए। इसके साथ उसका पानी नहीं घटेगा। मैं छोटे बच्चों के माँ-बाप को यह भी कहना चाहूँगा कि वह गर्मियाँ के इस मौसम में अपनी अपने घर पर ओआरएस के घोल के कुछ पेकेट जरुर रखें, इनकी कभी भी जरुरत पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : डायरिया होने के कारण क्या हैं?</strong><br />
जवाब : आज के मशीनीकरण के युग में हम डिब्बा बंद खाने और बाहर वालों चीजें पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं। छोटे बच्चों को माताएं अपना दूध पिलाने की जगह बोतल के द्वारा दूध पिलाती हैं। यही कारण ये रोग गंभीर हो जाता है। इसका कारण बच्चों के माँ-बाप की लापरवाही भी है। गर्मियाँ के मौसम में बच्चों को बाहर वालों चीजें बिल्कुल खानी बंद करवानी चाहिए। घर के बने खाने दही, लस्सी, दलिया, खिचड़ी, दाल-रोटी आदि खाने की बच्चों को आदत डालनी चाहिए। कोल्ड ड्रिंक्स की जगह नींबू पानी या नारियल पानी ही देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : स्कूल पढ़ते छोटे बच्चों के लिए कैसे बचत करनी चाहिए?</strong><br />
जवाब : यह बहुत महत्वपूर्ण है, हमें छोटे बच्चे नर्सरी, केजी और एलकेजी में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। कई बार देखने में आया है कि बच्चे को सुबह समय उल्टी आने के बाद माता-पिता कोई घरेलू दवा देकर स्कूल भेज देते हैं। इस तरह हरगिज नहीं करना चाहिए क्योंकि स्कूल में जाकर बच्चा और बीमार हो सकता है। इसके अलावा स्कूल वालों को भी चाहिए कि इस गर्मी के प्रकोप को देखते हुए छोटे बच्चों को छुट्टियाँ कर दीं जाए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : इसका इलाज क्या है?</strong><br />
जवाब : जिस तरह हमने पहले बताया कि डायरिया एक मौसमी बीमारी है। इन दो महीनों में बच्चों को बाहर नहीं जाएँ देना चाहिए। क्योंकि छोटे बच्चों की इम्यूनिटी कम होने के कारण कोई भी वायरस की लपेट में आने का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। उल्टी-दस्त लगने पर बॉल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से इसकी जांच करवाई जाए। इसके अलावा बीसवीं सदी की सबसे बड़ी खोज ओआरएस घोल इन दो-तीन महीनों में सभी घरों में मौजूद होना बहुत जरुरी है। छोटे बच्चों को हाथों को साबुन या सैनेटाईजर के साथ साफ रखने की आदत डालनी चाहिए। नाखुन वगैरा काटकर रखने चाहिए। प्रदूषित इलाकों में बच्चों को नहीं जाने देना चाहिए। बच्चों को घर का खाना खाने की आदत डालनी चाहिए। सावधानी में ही इसका बचाव है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 09:56:04 +0530</pubDate>
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