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                <title>Gyanvapi Masjid - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस ने ज्ञानवापी जाने से रोका</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्रीविद्या मठ के महंत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग की पूजा अर्चना करने के लिये पुलिस ने शनिवार को मस्जिद परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। सरस्वती ने गुरुवार को ही घोषणा कर दी थी कि वह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/police-stopped-swami-avimukteshwaranand-from-going-to-gyanvapi/article-34167"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/gyanvapi-mosque-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्रीविद्या मठ के महंत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग की पूजा अर्चना करने के लिये पुलिस ने शनिवार को मस्जिद परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। सरस्वती ने गुरुवार को ही घोषणा कर दी थी कि वह चार जून को मस्जिद परिसर के वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग की पूजा अर्चना के लिये जायेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पिछले महीने स्थानीय अदालत के आदेश पर हुए मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान वजूखाने के पास शिवलिंग मिलने की बात कही गयी थी, जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा है। पुलिस द्वारा सरस्वती को ज्ञानवापी परिसर में प्रवेश करने से रोके जाने के विरोध में वह श्रीविद्या मठ के सामने ही धरने पर बैठ गये। साथ ही उन्होंने शिवलिंग की पूजा अर्चना करने की अनुमति मिलने तक अनिश्चितकालीन उपवास पर भी बैठने की घोषणा कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने वाराणसी के केदार घाट स्थित मठ से मस्जिद परिसर के लिये निकलते ही सरस्वती को कानून व्यवस्था का हवाला देकर रोक दिया। सरस्वती ने सर्वे में मिले शिवलिंग को आदि विश्वेश्वर बताते हुए दलील दी है कि इस विवाद को सुलझाने के लिये अदालत का फैसला आने तक भगवान को बिना पूजा अर्चना किये नहीं रखा जा सकता है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 16:18:32 +0530</pubDate>
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                <title>ज्ञानवापी प्रकरण : जिला अदालत पहले यह तय करेगी कि वाद पर सुनवाई हो या नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (सच कहूँ न्यूज)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर प्रकरण पर सबसे पहले इस बात पर सुनवाई करेगी कि परिसर में मौजूद श्रंगार गौरी की पूजा अर्चना का अधिकार दिये जाने संबंधी वाद पर न्यायालय में सुनवाई हो सकती है या नहीं। इसके लिये गुरुवार 26 मई की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/gyanvapi-masjid-case-the-district-court-will-first-decide-whether-to-hear-the-case-or-not/article-33792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/gyanvapi-masjid4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर प्रकरण पर सबसे पहले इस बात पर सुनवाई करेगी कि परिसर में मौजूद श्रंगार गौरी की पूजा अर्चना का अधिकार दिये जाने संबंधी वाद पर न्यायालय में सुनवाई हो सकती है या नहीं। इसके लिये गुरुवार 26 मई की तिथि तय की गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. अजय कृष्ण विश्वेष ने ज्ञानवापी मामले की सुनवाई करते पर मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में इस न्यायालय के लिये आवश्यक है कि वह प्राथमिकता के आधार पर प्रतिवादी पक्ष के इस आवेदन पर विचार करे कि श्रंगार गौरी संबंधी वाद पर अदालत में सुनवाई हो सकती है या नहीं, अर्थात अदालत में यह वाद पोषणीय है या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायाधीश ने मस्जिद प्रबंधक कमेटी की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 07 नियम 11 संबंधी प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिये 26 मई की तारीख तय की है। इसके साथ ही अदालत ने वीडियोग्राफी सर्वे रिपोर्ट पर विभिन्न पक्षों की आपत्तियों को दर्ज कराने के लिये 07 दिन का समय दिया है। अदालत में मस्जिद प्रबंधन कमेटी की ओर से यह दलील दी गयी थी कि वर्ष 1991 के धार्मिक स्थल (विशेष प्रावधान) कानून के परिप्रेक्ष्य में इस वाद पर अदालत में सुनवाई नहीं हो सकती है। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 07 नियम 11 के तहत इस संबंध में आवेदन दिया गया था। संबंधित कानून में धार्मिक स्थलों का स्वरूप 15 अगस्त 1947 जैसा बनाये रखने का प्रावधान है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला जज के फैसले के अनुसार उच्चतम न्यायालय के 17 मई के आदेश के परिप्रेक्ष्य में सविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर द्वारा सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियां आमंत्रित करने का आदेश वर्तमान में प्रभावी है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि वाद की सुनवाई हो या न हो इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने प्राथमिकता के आधार पर आवेदन के निस्तारण का निर्देश दिया है। इसके बाद अन्य प्रार्थना पत्रों का निस्तारण किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला जज के फैसले में सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत की इस मामले में की गयी कार्यवाही तथा बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में हुयी सुनवाई का ब्यौरा दिया गया है। अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वाद की पोषणीयता पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई किये जाने के साथ ही यह भी कहा है कि उसका गत 17 मई का आदेश बरकरार है। उल्लेखनीय है कि इस आदेश में उच्चतम न्यायालय ने स्थानीय अदालत की ओर से इंगित शिवलिंग स्थल की सुरक्षा का जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया था। जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि वाद की पोषणीयता के बारे में उच्चतम न्यायालय का आदेश आवेदन के निस्तारण के पश्चात भी आठ सप्ताह तक प्रभावी रहेगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 16:34:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ज्ञानवापी पर हिंदू पक्ष का सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब, विवादित स्थल मस्जिद नहीं, मंदिर है</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपराहन तीन बजे वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस विवादित मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी। पीठ ने गुरुवार सुनवाई स्थगित करते हुए शुक्रवार दिन में 3:00 बजे सुनवाई करने का आदेश पारित किया था। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hindu-sides-written-reply-in-supreme-court-on-gyanvapi-the-disputed-site-is-not-a-mosque-it-is-a-temple/article-33635"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/supreme-court-of-india-31.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपराहन तीन बजे वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस विवादित मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी। पीठ ने गुरुवार सुनवाई स्थगित करते हुए शुक्रवार दिन में 3:00 बजे सुनवाई करने का आदेश पारित किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच हिंदू पक्षकार ने शीर्ष अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है, जिसमें दावा किया गया है कि विवादित जगह मस्जिद नहीं, बल्कि भगवान की संपत्ति है। भारत में इस्लामिक शासन से हजारों साल पहले से यह संपत्ति भगवान ‘आदि विश्वेश्वर’ की है तथा इसे किसी को नहीं दी जा सकती। सदियों से उस स्थल पर हिंदू रीतियों का पालन करते हुए लोग परिक्रमा करते आ रहे हैं। हिंदू पक्ष के जवाब में कहा गया है कि औरंगजेब के शासक में उस मंदिर की संपत्ति पर जबरन कब्जा किया था। इस कब्जे से मुसलमानों को संपत्ति पर हक नहीं मिल सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">औरंगजेब ने कोई वक्फ नहीं स्थापित किया। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अंजुमन ए इंतेजामिया मस्जिद वाराणसी की प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई से पूर्व यह तथ्य अदालत में पेश किया। जैन ने एक लिखित जवाब दाखिल कर दावा किया कि मूल मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया था और शेष संरचना तथा सामग्री का उपयोग कर एक निर्माण किया गया था और उसे ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ नाम दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब में दावा किया गया है कि देवता दृश्य और अदृश्य रूप में परिसर के भीतर मौजूद है और यह पुराना मंदिर है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 15 अगस्त, 1947 को विचाराधीन उस संपत्ति का स्वरूप हिंदू मंदिर का था, क्योंकि हिंदू देवताओं और अन्य सहयोगी देवताओं की छवियां वहां मौजूद थीं तथा उनकी पूजा की जा रही थी।</p>
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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 11:22:53 +0530</pubDate>
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                <title>सांप्रदायिक बयानबाजी से बचा जाना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने के वाराणसी कोर्ट के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिसर में जिस जगह शिवलिंग मिला है, उस जगह को सुरक्षित रखा जाए। शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि लोगों को नमाज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/gyanvapi-masjid-communal-rhetoric-should-be-avoided/article-33533"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/gyanvapi-masjid2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने के वाराणसी कोर्ट के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिसर में जिस जगह शिवलिंग मिला है, उस जगह को सुरक्षित रखा जाए। शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि लोगों को नमाज अदा करने से रोका न जाए। निर्णय जो भी आए, उसका संयम और सद्भावना से इंतजार करने की आवश्यकता है। इन परिस्थितियों में विशेष तौर पर भड़काऊ बयानबाजी करने से बचा जाना चाहिए। यह बात भारतीय समाज और मीडिया का दुखांत है कि कोई भी निर्णय आने से दो-चार दिन पूर्व ही फैसला से जुड़ी खबरें पेश करने लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इलेक्ट्रॉनिकस मीडिया में खबर को चिल्ला-चिल्लाकर खबरों को यूं पेश किया जाता है जैसे युद्ध छिड़ गया हो। देश के संविधान में न्याय प्रक्रिया की व्यवस्था है। एक न्यायालय के बाद ऊपरी न्यायालय में मामलों पर विचार किया जाता है, लेकिन मीडिया कर्मी किसी मामले की सुनवाई के शुरूआती दौर को बिना किसी तथ्य के भड़काऊ अंदाज में पेश करते हैं, जिससे कई बार निर्दोष लोगों की इज्जत को ठेस पहुंचती है। दूसरी तरफ टीवी चैनलों पर तीखी बहस छेड़ दी जाती है, जो कई बार तूं-तड़ाक और लड़ाई तक पहुंच जाती है। बहस में भाग लेने वाले वक्ताओं में एक-दूसरे के प्रति सहजता और कोई सम्मान नहीं देखा जाता। आजकल लोग भी चिल्लाने वाली बहसों से ऊब चुके हैं। मीडिया में खबरों का बढ़ता व्यापारीकरण सोशल मीडिया, विशेष तौर पर यूट्यूब के बढ़ने का बड़ा कारण है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों में सोशल मीडिया के प्रति रूझान तो बढ़ रहा है लेकिन उतनी ही विश्वसनीयता भी घट रही है। यूट्यूब पर बहस की बजाय खबरों में सरलता, सादगी और तथ्यों पर आधारित होने के कारण यूजर बढ़ रहे हैं। एकतरफा खबरों का रुझान मीडिया और देश के लिए घातक है साथ ही भड़काऊ बयानबाजी करने वाले राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को संयम और धैर्य से काम लेना चाहिए। विचारों की प्रबलता के लिए तर्क और तथ्य आवश्यक हैं। न्याय देने का काम अदालतों पर छोड़ देना चाहिए, उन्हें ऐसे मामलों में घटिया राजनीति से बचा जाना चाहिए। बेहतर हो यदि सभी पक्ष धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक सीढ़ी बनाने की बजाए विकास के मुद्दों पर काम करें। इस वक्त महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्या पर गंभीरता से आवाज उठाने की जरूरत है। सुरक्षा और भाईचारा कायम रखना ही देश की बड़ी ताकत है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 10:14:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने के बाद अदालत ने उस स्थल को किया सील</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद स्थानीय अदालत ने जिला प्रशासन को उस स्थान को तत्काल प्रभाव से सील करने के आदेश दिये हैं जहां शिवलिंग मिला है। सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/after-finding-shivling-in-gyanvapi-masjid-the-court-sealed-the-place/article-33473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/gyanvapi-masjid1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद स्थानीय अदालत ने जिला प्रशासन को उस स्थान को तत्काल प्रभाव से सील करने के आदेश दिये हैं जहां शिवलिंग मिला है। सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने सोमवार को जारी आदेश में वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि वह उस स्थान को सील कर दें, जहां शिवलिंग मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में सील किये गये स्थान पर किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है। अदालत ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वाराणसी स्थित कमांडेंट को आदेश दिया है कि जिस स्थान को सील किया गया है, उसको संरक्षित और सुरक्षित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पूर्ण रूप से उनके ऊपर है। न्यायाधीश ने हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन के आवेदन पर यह फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया है कि प्रशासन द्वारा जो कदम उठाये गये हैं, उनके पर्यपेक्षण (सुपरवीजन) की जिम्मेदारी उप्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक पर होगी। न्यायालय में वीडियोग्राफी सर्वे की रिपोर्ट पर कल सुनवाई होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है माजरा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे का काम सोमवार को पूरा हो गया। जिसके तुरंत बाद हिंदू पक्ष की ओर से उसके वकील हरिशंकर जैन ने अदालत में प्रार्थना पत्र पेश गया। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि मस्जिद परिसर में 16 मई, सोमवार को सर्वे के दौरान शिवलिंग पाया गया है। यह महत्वपूर्ण साक्ष्य है। आवेदन में न्यायालय से अनुरोध किया गया कि वह सीआरपीफ के कमांडेंट को आदेश दे कि इस स्थान को सील कर दिया जाये, साथ ही वाराणसी के जिलाधिकारी को आदेश दिया जाये कि वहां मुसलमानों का प्रवेश वर्जित कर दे।</p>
<p style="text-align:justify;">हिंदू पक्ष के आवेदन में यह भी अनुरोध किया गया है कि मस्जिद में केवल 20 मुसलमानों को नमाज अता करने की इजाजत दी जाये तथा उन्हें वजू करने से तत्काल रोका जाये। न्यायाधीश दिवाकर ने इस आवेदन के संबंध में कहा कि मस्जिद परिसर में अदालत के आदेश से ही वीडियोग्राफी सर्वे का काम हुआ है। परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद उसे संरक्षित किया जाना अतिआवश्यक है। न्यायालय ने कहा,‘न्याय हित में वादी पक्ष का आवेदन स्वीकार किये जाने योग्य है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 15:20:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम शुरू हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के बीच शनिवार को सुबह आठ बजे से वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम शुरू हो गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पूरे मस्जिद परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर नाकेबंदी कर दी गयी है। सर्वे वाले इलाके में सिर्फ अदालत द्वारा नियुक्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/videography-survey-work-started-in-gyanvapi-masjid-premises/article-33373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/gyanvapi-masjid.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के बीच शनिवार को सुबह आठ बजे से वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम शुरू हो गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पूरे मस्जिद परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर नाकेबंदी कर दी गयी है। सर्वे वाले इलाके में सिर्फ अदालत द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर, दोनों पक्षों के वकील, वादी और प्रतिवादी पक्ष तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को ही जाने की इजाजत दी गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया था कि न्यायालय के निर्देश के अनुसार सर्वेक्षण का काम शनिवार को सुबह आठ बजे शुरू होकर दिन में 12 बजे तक चलेगा। जिलाधिकारी ने शनिवार को इस मामले से जुड़े दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक बैठक भी बुलायी है। प्रशासन ने सर्वेक्षण के काम में सभी से सहयोग करने तथा नगर में शांति व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण मामले में शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम फिर शुरू करने का आदेश दिया था। न्यायालय द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर दल को सर्वेक्षण रिपोर्ट को 17 मई से पहले न्यायालय में पेश करना है। न्यायालय में इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 17 मई है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 12:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वेक्षण पर तत्काल रोक की मांग पर कोई आदेश देने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में वाराणसी के काशी-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण रोकने की मांग संबंधी याचिका पर शुक्रवार को तत्काल कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हमे मामले की जानकारी नहीं है। हम आदेश कैसे पारित कर सकते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-refuses-to-pass-any-order-on-demand-for-immediate-ban-on-survey-in-gyanvapi-masjid/article-33342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/supreme-court-of-india-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में वाराणसी के काशी-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण रोकने की मांग संबंधी याचिका पर शुक्रवार को तत्काल कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हमे मामले की जानकारी नहीं है। हम आदेश कैसे पारित कर सकते हैं?” सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि, कहा , “संबंधित दस्तावेज देखने के बाद हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।”</p>
<p style="text-align:justify;">निचली अदालत के आदेश से पूर्व की यथास्थिति बनाए रखने की मांग कर रहे वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि आज सर्वेक्षण हो रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि वह अभी कोई आदेश पारित नहीं कर सकती। वह मामले को सूचीबद्ध करेगी। हिंदू याचिकाकर्ताओं का मानना है कि काशी- ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर श्रृंगार गौरी मंदिर है। पांच हिंदू महिलाओं ने दैनिक पूजा की अनुमति के लिए निचली अदालत में याचिका दायर की थी। संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पिछले माह सर्वेक्षण का आदेश दिया था। अदालत ने गुरुवार को कहा था कि बेसमेंट और बंद कमरों समेत पूरी ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वेक्षण जारी रहेगा। मुस्लिम पक्षकारों ने इस सर्वेक्षण का विरोध किया था।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 13:27:27 +0530</pubDate>
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