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                <title>Gyanvapi Masjid Case - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Gyanvapi Masjid Case RSS Feed</description>
                
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                <title>Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Gyanvapi Mosque Case: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के आदेश पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के 20 जुलाई के आदेश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-courts-big-decision-on-gyanvapi-survey/article-50805"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/supreme-court-of-india-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Gyanvapi Mosque Case: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के आदेश पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ सर्वेक्षण करने के जिला अदालत के 20 जुलाई के आदेश के फैसले पर मुहर लगाने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति वाराणसी की याचिका खारिज करते हुए सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। Gyanvapi Survey</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने का उन्हें कोई कारण नजर नहीं आता। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति वाराणसी ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा तीन अगस्त को पारित आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम निजामुद्दीन पाशा ने पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। शीर्ष अदालत के समक्ष पाशा ने सर्वेक्षण पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाते हुए कहा था, “मैंने विशेष अनुमति याचिका ईमेल कर दी है…उन्हें (सर्वेक्षण) जारी न रखने दें।” न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने जवाब दिया था, “हम इस पर तुरंत विचार करेंगे।”</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/seema-haider-news/">Seema Haider News: सीमा हैदर मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“Seema Haider News: सीमा हैदर मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/seema-haider-news/embed/#?secret=o3vK15kyty%23?secret=4lc920pSYF" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">मस्जिद का प्रबंधन करने वाली इस समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के कुछ घंटों के भीतर ही शीर्ष न्यायालय का रुख किया था।‌ उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस फैसले पर मुहर लगा दी थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी गई थी। समिति ने अपनी विशेष अनुमति याचिका में दलील दी थी कि उच्च न्यायालय के आदेश को “इस तरह के अभ्यास से उत्पन्न गंभीर जोखिमों के कारण रद्द किया जा सकता है, जिसके पूरे देश में परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में पिछले साल एक सर्वेक्षण के लिए एक आयुक्त नियुक्त किए जाने पर “पूरे मुद्दे की अत्यधिक मीडिया कवरेज और सांप्रदायिक रंगों” का हवाला दिया गया था। इस आधार पर यह भी दावा किया गया था कि ऐसी यह पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के “बिल्कुल” खिलाफ थी। इस अधिनियम के तहत 15 अगस्त 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थानों के स्वरूप को बनाए रखना अनिवार्य कर दिया था। जिला अदालत ने 21 जुलाई के आदेश में यह पता लगाने के उद्देश्य से सर्वेक्षण का आदेश दिया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 17:42:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Gyanvapi Masjid case : हिंदू प्रतीक चिह्नों की कार्बन डेटिंग कराने की मांग पर कोर्ट का फैसला टला</title>
                                    <description><![CDATA[इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत को लेकर 11 अक्तूबर तय की अगली तारीख वाराणसी (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid case) परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिह्नों की प्राचीनता का पता लगाने के लिए इनकी कार्बन डेटिंग कराए जाने की मांग को लेकर दायर अर्ज़ी पर जिला अदालत ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/gyanvapi-masjid-case/article-38747"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/gyanvapi-masjid-case.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत को लेकर 11 अक्तूबर तय की अगली तारीख</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद <strong>(<span class="VIiyi" lang="en" xml:lang="en"><span class="JLqJ4b ChMk0b"><span class="Q4iAWc">Gyanvapi Masjid case</span></span></span>)</strong> परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिह्नों की प्राचीनता का पता लगाने के लिए इनकी कार्बन डेटिंग कराए जाने की मांग को लेकर दायर अर्ज़ी पर जिला अदालत ने शुक्रवार को सुनाए जाने वाले फैसले को 11 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया है। जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत बताते हुए अगली तारीख 11 अक्टूबर तय की है। वादी पक्ष ने कार्बन डेटिंग सहित अन्य वैज्ञानिक तकनीक की मदद से हिंदू प्रतीकों की प्राचीनता का पता लगाने की अदालत से माँग की है। इस मामले में अदालत द्वारा माँगे गए स्पष्टीकरण पर अगली सुनवाई को मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें अदालत में पेश करेगा। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि अदालत ने फैसला सुनाने से पहले दो बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/mahindra-company/">Mahindra Company ने लॉन्च किया एक्सयूवी 300 टर्बोस्पोर्ट सीरीज</a></p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट के इस सवाल पर ये बोले, अधिवक्ता जैन</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने पक्षकारों से पूछा है कि मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के समय 16 मई को वजूखाने में मिला ‘शिवलिंग’ क्या इस मुकदमे की संपत्ति के रूप में दर्ज है? दूसरा बिंदु पर अदालत ने पूछा कि क्या यह अदालत कार्बन डेटिंग के मुद्दे पर कोर्ट कमीशन नियुक्त कर सकती है? अधिवक्ता जैन ने कहा कि उन्होंने अदालत को बताया कि अर्ज़ी में मस्जिद परिसर में मौजूद दृश्य एवं अदृश्य हिंदू देवी देवताओं की पूजा अर्चना का अधिकार देने की माँग की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए सर्वेक्षण में मिले हिंदू प्रतीकों <strong>(<span class="VIiyi" lang="en" xml:lang="en"><span class="JLqJ4b ChMk0b"><span class="Q4iAWc">Gyanvapi Masjid case</span></span></span>)</strong> को वाद की संपदा में शामिल माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कथित ‘शिवलिंग’ वजूखाने में पानी के अंदर था, इसलिए अदृश्य था, लेकिन सर्वेक्षण के बाद यह अब यह दृश्य संपदा में शामिल हो गया है। अदालत ने इस बिंदु पर मुस्लिम पक्ष को अगली सुनवाई पर अपना प्रतिवादन पेश करने को कहा है। गौरतलब है कि अदालत द्वारा आज इस अर्ज़ी पर फैसला सुनाये जाने की उम्मीद थी।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Oct 2022 17:34:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट : ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा अनुमति की याचिका जिला जज को स्थानांतरित</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने विवादित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Case) के अंदर ‘श्रृंगार गौरी’ की पूजा की अनुमति संबंधी याचिकाओं को वाराणसी के सिविल न्यायालय (सीनियर डिवीजन) से जिला न्यायाधीश के पास शुक्रवार को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। न्यायालय ने स्थानांतरण आदेश के साथ-साथ इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर फैसला लेने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-petition-for-permission-to-worship-in-gyanvapi-masjid-transferred-to-district-judge/article-33646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/gyanvapi-masjid-case.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने विवादित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Case) के अंदर ‘श्रृंगार गौरी’ की पूजा की अनुमति संबंधी याचिकाओं को वाराणसी के सिविल न्यायालय (सीनियर डिवीजन) से जिला न्यायाधीश के पास शुक्रवार को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। न्यायालय ने स्थानांतरण आदेश के साथ-साथ इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर फैसला लेने को कहा है। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाओं को स्थानांतरित करने के साथ-साथ विवादित स्थल की सुरक्षा संबंधी अपने पूर्व के अंतरिम आदेश को बरकरार रखने का आदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ-साथ नमाज पढ़ने वालों के लिए समुचित इंतजाम करने का जिला अधिकारी को निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित पक्षों से विचार विमर्श कर नमाजियों के लिए व्यवस्था करने का निर्देश दिया। पीठ ने गत मंगलवार को जारी अपने अंतरिम आदेश में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में उस क्षेत्र की रक्षा करने का राज्य सरकार को निर्देश दिया था, जहां हिंदू पक्ष के अनुसार एक ‘शिवलिंग’ पाया गया था। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी मुसलमान को ज्ञानवापी मस्जिद में ‘नमाज’ अता करने से न तो रोका जाएगा और न ही कोई बाधा उत्पन्न की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मस्जिद पक्ष के वकील एच. अहमदी ने निचली अदालत में पेश की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने सर्वे के बाद इलाके को सील करने के कारण नमाज पढ़ने में आ रही मुश्किलों का जिक्र करते हुए मस्जिद में 500 वर्षों से चली आ रही स्थिति बरकरार रखने का अनुरोध सर्वोच्च अदालत से किया। अदालत ने उनकी दलीलें सुनने के बाद जिला अधिकारी को आदेश दिया संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद नमाज करने वालों के लिए समुचित व्यवस्था करें। याचिकाकर्ता राखी सिंह के नेतृत्व में पांच महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पूजा करने की अनुमति के लिए निचली अदालत में याचिका दायर की थी। इन महिलाओं ने वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी मंदिर होने की मान्यता का हवाला देते हुए वहां पूजा की अनुमति के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। शीर्ष अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद करेगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 18:10:15 +0530</pubDate>
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                <title>वाराणसी : ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे रिपोर्ट अदालत में पेश</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Case) परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे रिपोर्ट वीरवार को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने अदालत में पेश कर दी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में पेश की गई रिपोर्ट पर जल्द ही फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने आज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/varanasi-videography-survey-report-of-gyanvapi-mosque-complex-presented-in-court/article-33599"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/gyanvapi-masjid3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Case) परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे रिपोर्ट वीरवार को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने अदालत में पेश कर दी।<br />
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में पेश की गई रिपोर्ट पर जल्द ही फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने आज वाराणसी की स्थानीय अदालत में इस मामले की सुनवाई पर शुक्रवार तक के लिए रोक लगा दी है। इससे पहले मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के लिए अदालत द्वारा नियुक्त किए गए अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने बुधवार को वीडियोग्राफी सर्वे की शुरूआती रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर दी थी। गौरतलब है कि अदालत ने 17 मई को मिश्रा को दायित्व निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में एडवोकेट कमिश्नर के पद से मुक्त करने का आदेश दिया था। विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने अदालत में मिश्रा द्वारा सर्वे रिपोर्ट के तथ्यों की जानकारी मीडिया में देने की शिकायत करते हुए उन पर सर्वे के काम में सहयोग न करने का आरोप लगाया था। अदालत ने सिंह को सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह की मदद से वीडियोग्राफी सर्वे रिपोर्ट 19 मई तक अदालत में पेश करने का आदेश दिया था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 May 2022 11:58:22 +0530</pubDate>
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