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                <title>Birds - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बेजुबानों की संभाल करने में जुटी ब्लॉक मलोट की साध-संगत</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए साध-संगत निरंतर कर रही मानवता भलाई के कार्य | Malout News 461 के करीब पक्षियों के लिए पानी वाले सकोरे, घौंसले व पशुओं के लिए बांटी पानी वाली मिट्टी की टंकियां मलोट (सच कहूँ/मनोज)। पूज्य गुुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा मानवता भलाई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dera-devotees-of-block-malout-engaged-in-taking-care-of-animals-and-birds/article-53383"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/malout-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए साध-संगत निरंतर कर रही मानवता भलाई के कार्य | Malout News</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>461 के करीब पक्षियों के लिए पानी वाले सकोरे, घौंसले व पशुओं के लिए बांटी पानी वाली मिट्टी की टंकियां</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मलोट (सच कहूँ/मनोज)।</strong> पूज्य गुुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा मानवता भलाई के 159 कार्य चलाए जा रहे हैं, जिनमें 42वें कार्य ‘पक्षी उद्धार’ मुहिम के तहत जहां गर्मियों के दिनों में देश और विदेशों की साध-संगत पक्षियों के लिए पानी व चोगे का प्रबंध करती है, वहीं ब्लॉक मलोट की साध-संगत भी इसी कार्य में जोरों-शोरों से जुटी हुई है, ताकि कोई पक्षी भूखा-प्यासा न रहे और उनके अस्तित्व को बचाया जा सके। Malout News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार 11 मई को जोन नम्बर 6 की साध-संगत ने गर्मियों के दिनोंं में पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए 104 पानी वाले सकोरे बांटे। इसके बाद 13 मई को जोन 3 की साध-संगत द्वारा 100 के करीब पानी वाले सकोरे व 11 जून को ‘सच कहूँ’ की 21वीं वर्षगांठ मौके 31 पानी वाले सकोरे टांगे गए। यहीं बस नहीं 16 जून को जोन 5 की साध-संगत ने 50 पानी वाले सकोरे, 75 पैकेट चोगा और 25 घौंसले बांटे। इसके बाद 24 जून को जोन नम्बर 4 की साध-संगत द्वारा स्वामी राम तीर्थ पार्क, पटेल नगर स्थित राम बाग, श्री हरिकृष्ण पब्लिक हाई स्कूल, प्रिंस मॉडल स्कूल में सकोरे टांगे गए और साध-संगत को कुल 66 पानी वाले सकोरे व 15 बेसहारा पशुओं के लिए मिट्टी की टंकियां बांटी गई। इसके अलावा 3 जुलाई को जोन 2 की साध-संगत ने गुरू पुर्णिमा के शुभ अवसर पर 60 पानी वाले सकोरे, चोगा व 10 घौंसले बांटे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि गर्मियों के दिनोंं में ब्लॉक मलोट की साध-संगत पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लगातार प्रयासरत रहती है और अपने घरों के बाहर, छत्त व सांझी जगहों पर पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए सकोरे व चोगे का प्रबंध करती है और यह मानवता भलाई का कार्य पिछले कई सालों से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं के अनुसार ही कर रही है। Malout News</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी का धन्यवाद, जिनकी बदौलत साध-संगत कर रही मानवता भलाई के कार्य: प्रेमी सेवक</h3>
<p style="text-align:justify;">ब्लॉक मलोट के प्रेमी सेवक अनिल कुमार इन्सां, जोनों के प्रेमी सेवकों मक्खन लाल इन्सां, सुनील इन्सां, रोबिन गाबा इन्सां, डॉ. इकबाल इन्सां, नरेन्द्र भोला इन्सां व बिंटू पाल इन्सां ने कहा कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं के तहत ब्लॉक मलोट की साध-संगत मानवता भलाई के कार्य बढ़चढ़ कर कर रही है और आगे भी यह कार्य इसी तरह जारी रहेंगे। उन्होंने पूज्य गुरु जी का तहेदिल से धन्यवाद किया, जिनकी बदौलत साध-संगत मानवता भलाई के कार्य कर रही है। Malout News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एमए लोक प्रशासन के द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर में छाई शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं" href="http://10.0.0.122:1245/naman-tanwar-topped-the-university-with-eighty-percent-marks/">एमए लोक प्रशासन के द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर में छाई शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं</a></p>
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                                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 21:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पक्षियों के रहने के लिए लगवाए रैन बसेरे</title>
                                    <description><![CDATA[अबोहर (सच कहूँ न्यूज)। गांव किल्लियांवाली में वीरवार को उपकार सिंह जाखड़ के नेतृत्व में नवजोत सिंह जाखड़ व उनकी टीम द्वारा पक्षियों के रहने के लिए रैन बसेरे लगवाए गए। इस मौके पर उन्होंने बताया कि गांवों में पुराने मकान खत्म होने के कारण पक्षियों के घौसलें बनाने के लिए जगह नहीं बची और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/rain-basera-installed-for-birds-to-live/article-49451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/abohar-news-6.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गांव किल्लियांवाली में वीरवार को उपकार सिंह जाखड़ के नेतृत्व में नवजोत सिंह जाखड़ व उनकी टीम द्वारा पक्षियों के रहने के लिए रैन बसेरे लगवाए गए। इस मौके पर उन्होंने बताया कि गांवों में पुराने मकान खत्म होने के कारण पक्षियों के घौसलें बनाने के लिए जगह नहीं बची और पेड़ भी दिनों-दिन कटते जा रहे हैं। जहां पर पक्षी अपना रैन बसेरा बना सकें। इस कारण अनेक पक्षियों की प्रजातियां अलोप हो रही है। प्रकृति के इस कीमती तोहफे को बचाने के लिए हमने अपने गांव मे आज एक हजार घौसलें लगाने की मुहिम गुरूद्वारा साहिब से शुरू की है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Earthquake: विनाशकारी भूकंप से कैसे बचा जा सकता है?" href="http://10.0.0.122:1245/how-can-a-devastating-earthquake-be-avoided/">Earthquake: विनाशकारी भूकंप से कैसे बचा जा सकता है?</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 16:28:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>इन पशु पक्षियों को दाना पानी खिलाने के बहुत फायदा होता हैं | MSG</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। गर्मी का आगाज हमें देखने को मिल रहा है। ऐसे हालात में न सिर्फ मनुष्य बल्कि पशु-पक्षी भी बेहाल है। इस गर्मी में भी पुण्य लाभ कमाया जा सकता है। गर्मी के इस मौसम में घर के बाहर, छत पर या बालकनी में पक्षियों के लिए पानी जरूर रखना चाहिए, ताकि उन बेजुबान पक्षियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/there-are-many-benefits-of-feeding-grains-and-water-to-these-animals-and-birds-msg/article-46423"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/msg-13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> गर्मी का आगाज हमें देखने को मिल रहा है। ऐसे हालात में न सिर्फ मनुष्य बल्कि पशु-पक्षी भी बेहाल है। इस गर्मी में भी पुण्य लाभ कमाया जा सकता है। गर्मी के इस मौसम में घर के बाहर, छत पर या बालकनी में पक्षियों के लिए पानी जरूर रखना चाहिए, ताकि उन बेजुबान पक्षियों को भी पानी मिल सके। लेकिन क्या आप जानते हैं पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अनुसार भी पक्षियों को पानी पिलाने के बहुत से फायदे हैं। पशु पक्षियों को दाना और पानी पिलाने से भविष्य में आपके ऊपर आने वाली परेशानियां ये बेजुबान जानवर अपने ऊपर ले लेते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आइयें पढ़ते है पूज्य गुरु जी के वचन….</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि पक्षी आएं और चोगा चुग जाएं, पानी पी लें वाह। पता नहीं कबसे प्यासे पक्षी आके पानी पिएंगे। मई-जून के महीने में तो खास करके। दाना नहीं मिलता, सब सूख जाता है और आप उन्हें दाना डालते हैं। पता नहीं वो कौन सी दुआएं दे जाएं और पता नहीं कौन सी दुआ भगवान जी सुन लें। ये है अगर आपने दान करना है तो इस तरह का किया करो।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="und" dir="ltr" xml:lang="und">MSG <a href="https://t.co/yEF3R2d7aN">pic.twitter.com/yEF3R2d7aN</a></p>
<p>— Sach Kahoon (@Sachkahoon) <a href="https://twitter.com/Sachkahoon/status/1635607739073437696?ref_src=twsrc%5Etfw">March 14, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Apr 2023 13:46:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेजुबानों का भी दुश्मन हैं ‘मोबाइल रेडिएशन’</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय मेहरा)। आपकी जेब में रहने वाला मोबाइल और इसके लिए नेटवर्क देने वाले मोबाइल टावर सिर्फ हम इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों, पक्षियों के लिए भी खतरनाक हैं। इन टावर्स से निकलने वाली रेडिएशन बेजुबानों में कई बीमारियां पैदा करके उनकी जीवनलीला खत्म कर देती है। यह बात सिर्फ हम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-enemy-of-birds-is-mobile-radiation/article-35413"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/cheating-of-1-lakh-18-thousand-rupees-in-the-name-of-applying-a-tower-of-a-mobile-company.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय मेहरा)।</strong> आपकी जेब में रहने वाला मोबाइल और इसके लिए नेटवर्क देने वाले मोबाइल टावर सिर्फ हम इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों, पक्षियों के लिए भी खतरनाक हैं। इन टावर्स से निकलने वाली रेडिएशन बेजुबानों में कई बीमारियां पैदा करके उनकी जीवनलीला खत्म कर देती है। यह बात सिर्फ हम नहीं कह रहे, बल्कि भारत का पर्यावरण मंत्रालय भी इस बात से इत्तेफाक रखता है। मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन वन्य प्राणियों के लिए घातक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषकर चिड़िया और मधुमक्खियां इससे अधिक प्रभावित होती हैं। पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इस विषय पर टेलिकॉम विभाग को एडवाइजरी भी दी गई है कि वर्तमान में लगे हुए मोबाइल टावर्स के एक किलोमीटर के दायरे में नया टावर लगाने की अनुमति ना दी जाए। यानी एक किलोमीटर के दायरे में एक ही टावर हो। इसके अलावा इन टावर्स से निकलने वाली खतरनाक रेडिएशन को रोकने के लिए अन्य विकल्प भी तलाशने व उन्हें लागू करने की सलाह भी दी गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर लिया संज्ञान</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण मंत्रालय की एडवाइजरी के अनुसार नए टावर बहुत सावधानी और सुरक्षा के साथ लगाए जाने चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि ये मोबाइल टावर चिड़ियों के उड़ने के रास्ते में न आएं। मोबाइल टावर से निकली रेडिएशन का वन्य प्राणियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर हुई रिसर्च में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरों से गौरैया चिड़िया के गायब होने में मोबाइल टावर से निकलने वाली खतरनाक रेडिएशन मुख्य रूप से जिम्मेदार है। पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पूर्व में यह सलाह भी दी गई थी कि मोबाइल टावर्स को पब्लिक प्लेस में लगाने से बचना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अब कम ही नजर आती है गौरैया चिड़िया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में अभी तक घरों में घोंसले बनाकर रहने वाली चिड़िया गौरैया अब कम ही नजर आती है। शहरी क्षेत्रों में तो गौरैया को देखने के लिए आंखें तरस जाती हैं। हां, खेतों में बने घरों में कुछ हद तक गौरैया चहचहाती दिख जाती है। गौरैया की संख्या में आ रही कमी का सही कारण पता नहीं है, क्योंकि भारत में ऐसी कोई रिसर्च नहीं की गई है। विशेषज्ञों की राय है कि 2.0 फिल्म के जरिए एक सही मुद्दे को बहस का विषय बनाया गया है। अभी भी इस पर और अधिक रिसर्च की जरूरत है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मोबाइल व टावर से निकलती हैं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2011 में पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई थी। इसके अनुसार पक्षियों की संख्या घटने के पीछे मोबाइल रेडिएशन की भी एक बड़ी भूमिका है। इतना ही नहीं, ईएमआर की वजह से मधुमक्खियों में अंडे देने की क्षमता में भी कमी पाई गई। इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली नेचर फोरएवर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद दिलावर ने कहा है कि ईएमआर को हमेशा ही नुकसानदायक बताया जाता है। चीन व स्विट्जरलैंड जैसे देशों में ईएमआर को लेकर अलग नियम हैं, जबकि भारत के नियम अलग हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट से यह साफ हो चुका है कि जब किसी इलाके में मोबाइल और मोबाइल टावर बढ़े हैं, वहां गौरैया चिड़िया में कमी आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गौरैया की संख्या में कमी की वजह मोबाइल टावर भी एक वजह है। इसके अलावा खाना और घोंसला बनाने के लिए जगह नहीं मिल पाना भी गौरैया का अस्तित्व खतरे में डाल चुका है। पंजाब के सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड वोकेशनल स्टडीज में बताया गया है कि घरों में घूमने वाली गौरैया के 50 अंडों को 5 से 10 निमट तक ईएमआर में रखा गया। इसके बाद तथ्य सामने आए कि सभी अंडों को ईएमआर की वजह से नुकसान पहुंचा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2.0 में भी दिखाया गया है रेडिएशन का खतरा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फिल्म 2.0 में पक्षीराजन नाम का एक शख्स पक्षियों से बहुत प्यार करता है। पक्षियों का जीवन बचाने को वह सदा भटकता रहता है। वह जागरुक करता है लेकिन उसकी बातों को किसी पर कोई असर नहीं होता। अंत में वह खुद की ही जान दे देता है। इसके बाद पैदा होता है मोबाइल रेडिएशन से मारे गए हजारों पक्षियों की आत्मा खुद में समा लेने वाले विलेन।</p>
<p style="text-align:justify;">पक्षी के रूप में विलेन लोगों की जान लेने लगता है। यहां से फिल्म में आपको एक पक्षी नहीं, बल्कि हीरो रजनीकांत से लड़ता हुआ विलेन दिखा। पक्षीराजन और मारे गए पक्षियों ने हर उस शख्स को अपना दुश्मन मान लिया, जो स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि 2.0 फिल्म के जरिए एक सही मुद्दे को बहस के विषय के रूप में लिया गया है। हालांकि बहुतेरे लोग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। फिल्म में दिखाया गया है कि मोबाइल रेडिएशन की वजह से पक्षी मर रहे हैं। इस फिल्म में दिखाई गई कहानी से अभी तक सरकार और मोबाइल कंपनियों ने कोई ध्यान नहीं दिया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>रेडिएशन से पक्षियों में आती हैं कई बीमारियां: डॉ. राजकुमार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">गुरुग्राम में पक्षियों के अस्पताल के डॉक्टर्स की मानें तो मोबाइल टावर्स के नजदीक रहने वाले पक्षियों को अधिक नुकसान होता है। डॉ. राजकुमार बताते हैं कि मोबाइल टावर रेडिएशन एक धीमा जहर है। यानी यह धीरे-धीरे नुकसान देता है। बहुत से पक्षी अंधे हो जाते हैं तो बहुतों को ट्यूमर हो जाती है। इसके अलावा लकवा, स्किन एलर्जी भी होती है। अरावली क्षेत्र में पक्षी जितने सुरक्षित हैं, उससे कहीं अधिक असुरक्षित शहरी आबादी में हैं। क्योंकि यहां मोबाइल टावर की रेडिएशन ज्यादा रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डा. राजकुमार का कहना है कि लॉकडाउन में पक्षियों को बहुत फायदा हुआ। बीमारियां कम हुई। क्योंकि प्रदूषण नहीं था। यहां तक कि उनकी ब्रिडिंग यानी प्रजनन अधिक हुआ। पक्षी अस्पताल के सीनियर डॉक्टर सतबीर बताते हैं कि रेडिएशन से होने वाली बीमारियों से ग्रसित सालाना काफी पक्षी यहां अस्पताल में लाए जाते हैं। इन पक्षियों की औसतन आयु जो होती है, वह कम हो जाती है। अगर रेडिएशन ज्यादा निकलती हैं तो उससे प्रभावित पक्षियों की मौत जल्दी हो जाती है।</p>
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                <pubDate>Tue, 12 Jul 2022 16:34:52 +0530</pubDate>
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