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                <title>Back Pain: पीठ दर्द आम नहीं, जीवन शैली में सुधार कर पा सकते है इससे निजात- डॉ अजय प्रजापति</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ौत (सच कहूँ/संदीप दहिया)। Back Pain: पीठ दर्द आज के समय की सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन गया है, जो लगभग 10 में से 8 लोगों को अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर प्रभावित करता है। चाहे वह डेस्क पर लंबे समय तक काम करने के बाद होने वाला हल्का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/causes-of-back-pain/article-76856"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/baraut-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बड़ौत (सच कहूँ/संदीप दहिया)।</strong> Back Pain: पीठ दर्द आज के समय की सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन गया है, जो लगभग 10 में से 8 लोगों को अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर प्रभावित करता है। चाहे वह डेस्क पर लंबे समय तक काम करने के बाद होने वाला हल्का दर्द हो या पैर में फैलने वाला तेज़ दर्द, पीठ दर्द गतिशीलता को सीमित कर सकता है, उत्पादकता को कम कर सकता है और जीवन की समग्र गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोसर्जन, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, व मेडिसिटी हॉस्पिटल डॉ अजय प्रजापति ने पीठ दर्द के कारण और उसके नियमित उपचार के विषय में आज विशेष बातचीत की। Baraut News</p>
<h3 style="text-align:justify;">पीठ दर्द होने के कारण</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ अजय प्रजापति ने पीठ दर्द के कारणों के विषय में बताते हुए कहा की यह कई कारणों से हो सकता है खराब मुद्रा और कमज़ोर कोर मांसपेशियों से लेकर रीढ़ की हड्डी के विकार जैसे डिस्क प्रोलैप्स, स्पाइनल स्टेनोसिस या स्पोंडिलोलिस्थीसिस तक। जीवनशैली संबंधी कारक जैसे लंबे समय तक बैठे रहना, व्यायाम की कमी, मोटापा और तनाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवा व्यक्तियों में, पीठ दर्द अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव या गलत मुद्रा के कारण होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दर्द के विशेष लक्षण लक्षण, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए | Baraut News</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एक या दोनों पैरों में दर्द फैलना</li>
<li style="text-align:justify;">अंगों में सुन्नता या कमज़ोरी</li>
<li style="text-align:justify;">मूत्राशय या मल त्याग पर नियंत्रण खोना</li>
<li style="text-align:justify;">चोट लगने या गिरने के बाद तेज़ दर्द</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">पीठ दर्द का आधुनिक उपचार</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ अजय प्रजापति ने इसके उपचार के विषय में बताते हुए कहा कि पीठ दर्द के अधिकांश मामलों का इलाज बिना सर्जरी के किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, वज़न नियंत्रण और आरामदायक कार्य व्यवस्था। फ़िज़ियोथेरेपी तथा विशेष परिस्थितियों में सूजन-रोधी दवाओं और मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाओं का अल्पकालिक उपयोग इससे आराम दिला सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि ये उपचार विफल हो जाते है और तंत्रिका संबंधी लक्षण बिगड़ जाते हैं, तो न्यूनतम इनवेसिव स्पाइन सर्जरी दीर्घकालिक राहत प्रदान कर सकती है। माइक्रोडिसेक्टोमी और एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी जैसी तकनीकें तेज़ी से ठीक होने और अस्पताल में कम से कम रहने की सुविधा देती हैं। उन्होंने बताया कि पीठ दर्द आम हो सकता है, लेकिन यह ऐसी चीज़ नहीं है जिसके साथ आपको जीना पड़े। जल्दी निदान, समय पर इलाज और निर्देशित पुनर्वास आपको दर्द-मुक्त, सक्रिय जीवन में वापस लौटने में मदद कर सकते हैं। Baraut News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मान सरकार की ‘इन्वेस्ट पंजाब’ पहल: गंगा एक्रोवूल्स करेगी 637 करोड़ का टेक्सटाइल निवेश" href="http://10.0.0.122:1245/ganga-acrowools-to-invest-in-textiles-in-punjab/">मान सरकार की ‘इन्वेस्ट पंजाब’ पहल: गंगा एक्रोवूल्स करेगी 637 करोड़ का टेक्सटाइल निवेश</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 18:58:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सरकार को किसान बनकर किसान की पीड़ा जाननी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[जंतर-मंतर, महाराष्ट, मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में किसान आन्दोलन कर रहे हैं। देशभर में किसान कर्ज व आत्महत्याओं का सिलसिला दिन-ब-दिन जटिल होता जा रहा है। भारत में अभी भी एक बहुत बड़ी आबादी कृषि क्षेत्र से न केवल जीविकोपार्जन कर रही है, बल्कि उनकी भावी पीढ़ियों का निर्वाह एवं विकास भी कृषि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">जंतर-मंतर, महाराष्ट, मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में किसान आन्दोलन कर रहे हैं। देशभर में किसान कर्ज व आत्महत्याओं का सिलसिला दिन-ब-दिन जटिल होता जा रहा है। भारत में अभी भी एक बहुत बड़ी आबादी कृषि क्षेत्र से न केवल जीविकोपार्जन कर रही है, बल्कि उनकी भावी पीढ़ियों का निर्वाह एवं विकास भी कृषि पर टिका हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले बीस वर्षों में करोड़ों एकड़ भूमि सड़कों, पुलों, औद्योगिक क्षेत्रों, शहरी विकास की खातिर केन्द्र व राज्य सरकारों ने अधिगृहित कर किसानों से ले ली है। इतना ही नहीं, धरती के ऊपरी स्तर पर व भूमिगत जल की भी भयंकर कमी खड़ी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतनी सब समस्याओं के बावजूद भी करोड़ों किसान बची हुई जमीन व बचे हुए पानी के सहारे न केवल अपना पेट भर रहे हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी कच्चा माल उपलब्ध करवा रहे हैं और पूरी शहरी आबादी के लिए धान, गेहूं, सब्जी, फलों का उत्पादन कर रहे हैं। इस पर यदि वह कर्ज एवं आत्महत्या एवं आन्दोलनों में पिस रहे हैं, तब नि:संदेह सरकार कहीं न कहीं किसानों के साथ बहुत बड़ी हेराफेरी में लिप्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान की मांग यही है कि उसे उसकी फसल का लागत मूल्य देकर 20 से 50 प्रतिशत तक लाभांश दे दिया जाए। जो उपज सरकार खरीद करे, उसका दाम तत्काल या एक-आध हफ्ते में उसे दे दिया जाए। यह कोई ज्यादा बड़ी मांग नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि इस देश में नकली कीटनाशकों, नकली बीजों, नकली दूध, मसालों, चीनी, गुड़ में मिलावट का अरबों रुपए का कारोबार चल रहा है। इसके अलावा देशभर में लोकसेवकों के वेतन भत्ते, यहां तक कि रिटायर कर्मियों की पेंशन तक के लिए सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों-अरबों की वेतन वृद्धि कर देती है, लेकिन किसान की उपज के मूल्य बढ़ाने में उसे सालों लग रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर से तुर्रा यह है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश में कृषि एवं कृषकों की कोई प्रधानता नहीं है। यह महज एक भावनात्मक जुमला है, जो वोटों के वक्त अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जाता है। देश में केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर अभी तक जो कृषि नीतियां बनाई या चलाई जा रही हैं, इनमें व्यवहारिकता का अभाव है। सरकार की योजनाएं एवं कृषि नीतियां जमीनी स्तर पर फुस्स हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि से जुड़ी योजनाओं एवं रियायती कर्ज में देश का व्यापारी वर्ग नकली किसान बनकर बहुत बड़ी सेंध लगा रहा है और सरकार यही समझ रही है कि उसने कृषि में हजारों करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लिहाजा किसान राजनेताओं या विरोधी दलों के इशारों पर शोर मचा रहे हैं, जोकि एक गलत धारणा है। अफसोस, हर सरकार इन धारणाओं का शिकार होती आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कृषि विकास में देश को विकसित व सम्पन्न बनाने की अपार संभावनाएं हैं। सरकार को स्वयं किसान की तरह सोचना व कार्य करना होगा, अन्यथा किसानों के साथ ठीक ऐसा ही होता रहेगा कि कोई पेड़ काटकर कागज बनाए, फिर उस पर लिखे व दूसरों को समझाए कि पेड़ हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 23:20:30 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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