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                <title>वाहन पंजीकरण शाखा से 2.32 करोड़ रुपए की राशि का गबन, मामला दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सुनील वर्मा)। हरियाणा में सिरसा ऐलनाबाद में वाहन पंजीकरण एवं चालक लाईसेंस शाखा से 2.32 करोड़ रुपए की राशि के गबन के आरोप में ऐलनाबाद एसडीएम डॉ. वेदप्रकाश की शिकायत पर तीन कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जिन कर्मचारियों पर केस दर्ज किया गया है, उनमें जितेन्द्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/embezzlement-of-rs-2-32-crore-from-vehicle-registration-branch-case-registered/article-46795"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/money-ed.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> हरियाणा में सिरसा ऐलनाबाद में वाहन पंजीकरण एवं चालक लाईसेंस शाखा से 2.32 करोड़ रुपए की राशि के गबन के आरोप में ऐलनाबाद एसडीएम डॉ. वेदप्रकाश की शिकायत पर तीन कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जिन कर्मचारियों पर केस दर्ज किया गया है, उनमें जितेन्द्र लिपिक ने 1,02,45,439 रुपए, कुलदीप सिंह मोठसरा लिपिक ने 1,07,49,550 रुपए और विक्रमदीप, लिपिक ने 3,50,000 रुपए शामिल हैं। पुलिस को दिए बयानों में एसडीएम ऐलनाबाद ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्होंने देखा कि वाहन पंजीकरण एवं चालक लाईसेंस से प्राप्त राशि कार्यरत कर्मचारियों द्वारा संबंधित हेड में जमा व ट्रेजरी से वैरीफाई नहीं करवाया जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">जबकि इससे संबंधित सेवाओं को प्रदान करने व उनसे प्राप्त आय को संबंधित सरकारी हेड में प्रतिदिन जमा करवाने की इनकी ड्यूटी थी। तीनों कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी मोहर के सहारे कागजी कार्रवाई करते रहे, लेकिन पैसा जमा नहीं करवाया। किसी को शक न हो, इसके लिए एकाध बार राशि खाते में जमा करवा देते। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया कि उपरोक्त कर्मचारियों ने एक षडयंत्र के तहत राशि जमा न करवाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है। उक्त कर्मचारियों से लिखित व मौखिक में पूछताछ भी की गई, लेकिन उन्होंने कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।</p>
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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 11:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब सीधे जीएसटी खाताधारक के खाते में जाएंगे मिड-डे-मील के पैसे</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। शिक्षा विभाग की ओर से मिड-डे-मील (Mid-Day Meal) वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक नियम शुरू किया हैं। अब मिड-डे-मील का जो सामान खरीदा जाएगा उसका भुगतान स्कूल के खाते की बजाय सीधा विक्रेता के खाते में होगा। इसके लिए राशन विक्रेताओं के जीएसटी नंबर मांगे गए हैं। शिक्षकों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mid-day-meal-money-will-go-directly-to-the-account-of-the-gst-account-holder/article-33803"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/mid-day-meal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शिक्षा विभाग की ओर से मिड-डे-मील (Mid-Day Meal) वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक नियम शुरू किया हैं। अब मिड-डे-मील का जो सामान खरीदा जाएगा उसका भुगतान स्कूल के खाते की बजाय सीधा विक्रेता के खाते में होगा। इसके लिए राशन विक्रेताओं के जीएसटी नंबर मांगे गए हैं। शिक्षकों को विक्रेताओं से जीएसटी नंबर लेकर विभाग को देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">नियम के अनुसार उसी दुकानदार से राशन खरीदा जाएगा जिसके पास जीएसटी नंबर होगा। आदेशों में बताया गया है कि फंड मैनेजमेंट सिस्टम में दुकानदार का नाम जीएसटी नंबर समेत अपलोड किया जाना है। जो बिल दुकानदार राशन के बदले देगा, उसको बीईओ की ओर से प्रमाणित किया जाएगा। ताकि राशन की खरीदारी में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। बीईओ से साइन होने के बाद बिल डीईईओ के पास जाएगा। उसके बाद ही वित्त शाखा से संबंधित दुकानदार के खाते में बिल की राशि डाली जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मिड-डे-मील के नोडल अधिकारी संजय मोंगा ने कहा कि यह मामला प्रगति में हैं। इसके अनुसार वेंडर बनाए जाएंगे, जिनसे सामान खरीदा जाएगा। यह एक उसी प्रकार की प्रक्रिया जैसे एक घर के साथ राशन वाला जुड़ा होता है। हम घर का सारा राशन वहीं से लेते हैं। ठीक उसी प्रकार अब राशन वाले को सीधा स्कूल के साथ जोड़ा जाएगा।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 20:53:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गूगल पे से नहीं पहुंचे पैसे, फिर हुआ एक लाख का फ्रॉड</title>
                                    <description><![CDATA[कंप्लेंट को एक नंबर पर भेज दे।
जब उसने अपनी कंप्लेंट नंबर को उस नंबर पर भेजा तो उसके काम से करीब एक लाख रुपए खाते से कट गये।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/money-was-not-reached-through-google-pay-again-a-fraud-of-a-million/article-12657"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/fraud-of-a-million.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ किया मामला दर्ज (fraud)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सोहना (सच कहूँ न्यूज)।</strong> टेक्नोलॉजी जैसे-जैसे एडवांस हो रही है, शातिर लोग इस टेक्नोलॉजी का फायदा उठाकर लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। ऐसा ही मामला सोहना में देखने को मिला, जहां एक बस चालक ने पांच हजार के चक्कर में एक लाख गंवा दिए (fraud) । बस चालक रविंद्र कुमार के मुताबिक वह जीडी गोयनका में बस चालक की नौकरी करता है। उसका अकाउंट एचडीएफसी बैंक धुनेला शाखा में है। उसने 11 जनवरी को अपनी भाभी के अकाउंट में 5000 रुपये गूगल-पे से डाले थे। वह पैसे उसके अकाउंट में नहीं पहुंचे।</p>
<ul>
<li>जिसको लेकर उसने गूगल पर कस्टमर केयर से बात करने का प्रयास किया  लेकिन बात नहीं हो पाई।</li>
<li>उसके पास एक फोन आया, जिसमें उससे कहा कि उसके पास से कंप्लेंट नंबर भेज रहे हैं।</li>
</ul>
<p>कंप्लेंट को एक नंबर पर भेज दे। जब उसने अपनी कंप्लेंट नंबर को उस नंबर पर भेजा तो उसके काम से करीब एक लाख रुपए खाते से कट गये। जब उसके पास मैसेज आया, जब उसे पता चला इस संबंध में साइबर क्राइम को उसने एक शिकायत दी है। थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2020 20:12:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रेरणास्त्रोत : धन के साथ धर्म</title>
                                    <description><![CDATA[           आप धन से मोहब्बत न करें, इसका मतलब यह नहीं है कि आप धन न कमाएँ या धन को एकत्रित न करें। अवश्य कमाइये और अवश्य जमा करिये। इस बात के लिए तो वेदों ने भी मना नहीं किया है फिर हम मना क्यों करें? धन कमाओ जीवन को चलाओ। पर धन को खर्च […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/religion-with-money/article-12540"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/gandhiji.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">           आप धन से मोहब्बत न करें, इसका मतलब यह नहीं है कि आप धन न कमाएँ या धन को एकत्रित न करें। अवश्य कमाइये और अवश्य जमा करिये। इस बात के लिए तो वेदों ने भी मना नहीं किया है फिर हम मना क्यों करें? धन कमाओ जीवन को चलाओ। पर धन को खर्च करते समय केवल भोग का ही नहीं बल्कि धर्म का भी ख्याल होना चाहिये। धन अगर फूल है तो धर्म उसकी खुशबू है। सुगंध के बिना फूल शोभा नहीं पाता। वेद आदेश देते हैं कि ‘‘धर्म में कर्त्तव्य बुद्धि रखो।’’ आप धार्मिक नहीं हैं ऐसा कोई नहीं कह सकता। यदि तुम धार्मिक नहीं होते हैं, ऐसा कोई नहीं कह सकता।<br />
यदि तुम धार्मिक नहीं होते तो सत्संग नहीं सुनते और ज्ञान की पुस्तक नहीं पढ़ते। धार्मिकता में अगर कर्त्तव्य-बुद्धि हो तो आनन्द की वर्षा होने लगती है। धर्म-बुद्धि हमें बताती है कि ‘‘हम क्या हैं?’’ हम सर्वश्रेष्ठ घर में रह रहे हैं। मानव-शरीर उत्तम घर है। ‘‘हमें क्या करना चाहिये।’’ वेद कहते हैं कि धर्म पर चलो। धर्म पर चलना मनुष्य का कर्त्तव्य है। धर्म पर चलने के लिए बुद्धि हमारी सहायता करती है। भगवान ने सबसे उत्तम-बुद्धि मानव को दी है। धर्म-बुद्धि से कर्म का शुद्धिकरण होता है। बुद्धि के प्रकाश से यह शक्ति मिलती है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए? हमारा घर कैसा हो, हमारा परिवार कैसा हो? सबमें उत्तम-संस्कार होने चाहिए।</h4>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2020 20:43:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ठेकेदार द्वारा टैंडरों प्रति नहीं दिखाई गई रुचि</title>
                                    <description><![CDATA[दो करोड़ की राशि के बावजूद नहीं हो सके विकास कार्य लुधियाना/रायकोट(राम गोपाल रायकोटी)। रायकोट शहर की मुख्य सड़को व गलियों की हालत दयनीय बनी हुई है। शहर के विकास कामों में लम्बे समय से रुकावट आई हुई है। कुछ समय पहले नगर कौंसिल विकास के कामों में आई रुकावट के संबंध में बुरी वित्तीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/contractors-did-not-get-money-stop-development-work/article-4863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/tender.jpg" alt=""></a><br /><h1>दो करोड़ की राशि के बावजूद नहीं हो सके विकास कार्य</h1>
<p style="text-align:justify;">
<strong>लुधियाना/रायकोट(राम गोपाल रायकोटी)।</strong> रायकोट शहर की मुख्य सड़को व गलियों की हालत दयनीय बनी हुई है। शहर के विकास कामों में लम्बे समय से रुकावट आई हुई है। कुछ समय पहले नगर कौंसिल विकास के कामों में आई रुकावट के संबंध में बुरी वित्तीय हालत का हवाला दिया जाता था परंतु पिछले छह माह से कौंसिल के पास विकास कामों के लिए दो करोड़ की राशि अनुदान राशि के तौर पर आई हुई है फिर भी शहर में किसी भी नए विकास काम को अब तक शुरू नहीं करवाया जा सका है। जिक्रयोग्य है कि पंजाब सरकार द्वारा शहर के विकास के लिए नगर कौंसिल रायकोट को आज से करीब छह माह पहले दो करोड़ रुपये की अनुदान राशि का चैक भेजा गया था, परंतु अब तक नगर कौंसिल इस दो करोड़ की रकम के साथ शहर में किसी भी विकास काम को शुरू नहीं करवा सकी है।</p>
<h1>ठेकेदार द्वारा इन टैंडरों प्रति अपनी रुचि नहीं दिखाई</h1>
<p style="text-align:justify;">
बेशक नगर कौंसिल द्वारा शहर के अलग-अलग विकास कामों के लिए कई बार अखबारों में विज्ञापन देकर कामों के लिए टैंडरों की मांंग की गई है, परंतु अब तक किसी भी ठेकेदार द्वारा इन टैंडरों प्रति अपनी रुचि नहीं दिखाई गई है, जिस कारण शहर के विकास काम पूरी तरह ठप्प हो चुके हैं। जब इस संबंधी एक ठेकेदार के साथ बात की गई तो उसने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार ने टैंडर डालने के लिए नियम ही ऐसे बना दिए हैं कि कोई भी ठेकेदार काम के लिए आगे नहीं आ रहा। नियमों अनुसार एक काम के लिए तीन टैंडर डाले जाने जरूरी हैं। उस के अलावा काम लेने वाले ठेकेदार की कुल रकम का 30 प्रतिशत सरकार की तरफ से अपने के पास रिजर्व रखा जाता है, जिसकी अदायगी काम मुकम्मल होने के बाद भी आसानी के साथ नहीं होती है।</p>
<h1>कई सालों से नगर कौंसिल की तरफ बकाया पड़े हैं ठेकेदारों के लाखों रुपये</h1>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य कारण नगर कौंसिल द्वारा किए जाने वाले कामों की अदायगी में देरी होना भी है। उन्होंने बताया कि अब तक ठेकेदारों द्वारा किए कामों के लाखों रु पये पिछले कई सालों से नगर कौंसिल की तरफ बकाया पड़े हैं, जिनकी अदायगी नहीं की जा रही है, जिस कारण ठेकेदारों को काम चलाने काफी कठिन हो गए हैं। अगर विकास काम शुरू न हुए तो विकास कामों के लिए आई दो करोड़ की रकम वापिस भी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी जब नगर कौंसिल के अध्यक्ष सलिल जैन से बात की गई तो उनका कहना था कि ठेकेदारों की 30 प्रतिशत रकम की अदायगी सरकारी नियमों कारण ही कौंसिल द्वारा रोकी जाती है, जो कि ठेकेदारों को काम मुकम्मल होने के बाद सारी कागजी कार्रवाई व किये कामों प्रति संतुष्टि के बाद ही की जाती है। विकास कामों में आई रुकावट संबधी उन्होंने कहा कि कामों के टैंडर डाले जा चुके हैं जो कुछ दिनों में खुल जाएंगे, जिस के बाद शहर के विकास काम शुरू हो जाएंगे।ठेकेदारों की रोकी गई अदायगी के संबंध में जब नगर कौंसिल के कार्य कारी अधिकारी बलवीर सिंह गिल के साथ बात की तो उनका कहना था कि अदायगी उन कुछ ठेकेदारों की रोकी गई है जिनके कामों के सम्बन्ध कोई आपत्ति जताई गई है, उन्होंने कहा कि ठेकेदार आपत्तियों का निपटारा कर दें, कौंसिल उनकी अदायगी साथ ही कर देगी।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jul 2018 04:50:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्विस बैंकों में जमा सारा पैसा कालाधन नहीं: जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[बैंकों में राशि जमा करने वाले च्यादातर भारतीय मूल के लोग Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley नई दिल्ली (एजेंसी)। स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष के हमलों का वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तर्को के साथ जवाब दिया है Swiss banks deposit all […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/swiss-banks-deposit-all-money-do-not-black-money-arun-jaitley/article-4568"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jatly.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">बैंकों में राशि जमा करने वाले च्यादातर भारतीय मूल के लोग</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष के हमलों का वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तर्को के साथ जवाब दिया है Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley। उन्होंने इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया। कहा, जरूरी नहीं है कि स्विस बैंकों में जमा सारा पैसा कालाधन ही हो। फिर भी अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।स्विस बैंकों में चार साल में भारतीयों के जमा धन में 50 फीसद की बढ़ोतरी को कालेधन से जोड़ने संबंधी खबरों को जेटली ने भ्रामक करार दिया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">40 फीसद रकम तो एलआरएस से गई</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley</h3>
<p style="text-align:justify;">कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस बीच मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि इसमें से करीब 40 फीसद राशि रुपये बाहर भेजने की उदार योजना (लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम-एलआरएस) की वजह से वहां पहुंची है। एलआरएस पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में लागू हुई थी। इसमें कोई भी व्यक्ति प्रतिवर्ष 2.50 लाख डॉलर तक बाहर भेज सकता है। उन्होंने भी कहा कि यदि कोई दोषी पाया गया तो उस पर  कार्रवाई होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कांग्रेस ने सरकार को घेरा</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley</h3>
<p style="text-align:justify;">रुपये के मूल्य में रिकॉर्ड गिरावट के साथ स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा रकम में एक साल में 50 फीसद उछाल पर कांग्रेस ने राजग सरकार पर जमकर निशाना साधा। पार्टी प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि 70 साल में केवल दूसरी बार एक साल में रिकॉर्ड 50 फीसद से ज्यादा उछाल आया।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Jun 2018 08:24:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काले धन पर हवाई वायदे हो रहे फुस्स</title>
                                    <description><![CDATA[स्विटजरलैंड के बैंकों में काले धन में 50 फीसदी वृद्धि हो जाना हमारे देश के सरकारी तंत्र की नाकामी के साथ सत्ताधारी पार्टी के वादों और दावों पर सवालिया निशान लगाता है। पहले आम नागरिक की यह आशा थी कि मोदी सरकार काला धन भले ही वापस नहीं ला सकती परंतु इसके अलावा धन बाहर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/air-futures-fusible-on-black-money/article-4567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/black-money1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्विटजरलैंड के बैंकों में काले धन में 50 फीसदी वृद्धि हो जाना हमारे देश के सरकारी तंत्र की नाकामी के साथ सत्ताधारी पार्टी के वादों और दावों पर सवालिया निशान लगाता है। पहले आम नागरिक की यह आशा थी कि मोदी सरकार काला धन भले ही वापस नहीं ला सकती परंतु इसके अलावा धन बाहर भी नहीं जाने देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा रिपोर्ट ने इस आशा पर भी पानी फेर दिया तथा काला धन छलांग लगाता हुआ स्विटजरलैंड पहुंच रहा है। 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले आम भारतीयो को लग रहा था कि ‘कालाधन’ वापस आया कि आया, ‘अच्छे दिन आए कि आए।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के हर मंच पर जनता को आकर्षित करने के लिए यह नारा बड़े जोरदार तरीके से लगाया था कि ‘अच्छे दिन आएंगे’ पर सरकार बनने के बाद सरकार या पार्टी के किसी प्रोग्राम में यह नारा नहीं दोहराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन तेल कीमतों में वृद्धि व मँहगाई को मुद्दा बनाकर भाजपा सत्ता में आई वह मँहगाई व तेल कीमतों ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। काला धन ना तो देश में पैदा होना बंद हुआ तथा ना ही बाहर जाने से रुका। काले धन के खिलाफ सात वर्षों की सजा का कानून बनाने के बावजूद जिनकी पहुंच है उन व्यापारियों का काला धंधा अभी भी चालू है। आम आदमी के दिल में यह धारणा बन चुकी है कि सरकार बदली लेकिन व्यवस्था नहीं बदली।</p>
<p style="text-align:justify;">और तो और कुछ ठग हमारे देश के बैंकों को ही दिन दिहाड़े लूटकर ले गए, सरकार चुपचाप इस तमाशे को देखती रही। होना तो यह चाहिए था कि विजय माल्या लूटकर भागा उसके बाद ना कोई भागता लेकिन नीरव मोदी भाग गया। कानून पटरी पर नहीं आया जबकि इनसे दूर दोनों के भागने के बीच में काफी समय अंतराल है। ठग्गों को इस बात का पता है कि भारतीय शासन तंत्र में भागना बड़ा आसान है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्षों से चल रही जांचों में कुछ भी हाथ नहीं आया। शासन प्रबंध में ऐसा चल रहा है लेकिन आम जन दुखी है राजनेताओं के भाषणों व सच्चाई में अंतर बहुत चौड़ा है। वैसे आम आदमी को यह समझना चाहिए कि चुनावी वायदे किसी नीति का हिस्सा नहीं, यह सब चुनावों की रणनीति है। राजनीति में ईमानदारी की चर्चा लोगों को भरमाने का काम करती है। आम आदमी को मिलने वाली सब्सिडी में कटौती करने वाली सरकार के लिए टैक्स चोरी रोकने के लिए जागने का वक्त है।</p>
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                <pubDate>Sat, 30 Jun 2018 08:02:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्विस बैंकों में फिर बढऩे लगा भारतीयों का काला धन</title>
                                    <description><![CDATA[ डेढ़ साल में 50 प्रतिशत  की वृद्धि Indians in Swiss banks get black money again नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन चार साल में पहली बार बढ़ कर पिछले साल एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपए) के दायरे में पहुंच गया(Indians in Swiss banks get black money again)जो एक साल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indians-in-swiss-banks-get-black-money-again/article-4556"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ubs.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;"> डेढ़ साल में 50 प्रतिशत  की वृद्धि</h2>
<h2 style="text-align:justify;">Indians in Swiss banks get black money again</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन चार साल में पहली बार बढ़ कर पिछले साल एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपए) के दायरे में पहुंच गया(Indians in Swiss banks get black money again)जो एक साल पहले की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। स्विटजरलैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों में यह बात सामने आई है। इसके अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में रखा गया धन 2017 में 50 फीसदी से अधिक बढ़कर 7000 करोड़ रुपए (1.01 अरब फ्रेंक) हो गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पहले तीन सालों में लगातार आई थी गिरावट</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी। अपनी बैंकिंग गोपनीयता के लिए पहचान बनाने वाले इस देश में भारतीयों के जमाधन में ऐसे समय दिखी बढ़ोतरी हैरान करने वाली है जबकि भारत सरकार विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाए हुए है। स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के सालाना आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.6 करोड़ फ्रेंक (लगभग 4500 करोड़ रुपए) रह गया। यह राशि 1987 से इस आंकड़े के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से सबसे कम थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">2017 में भारतीयों के धन में 50 फीसदी की हुई वृद्धि</h2>
<p style="text-align:justify;">ताजा आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीयों के धन में ग्राहक जमाओं के रूप में 3200 करोड़ रुपए , अन्य बैंको के जरिए 1050 करोड़ रुपए शामिल है। इन सभी मदों में भारतीयों के धन में आलोच्य साल में बढ़ोतरी हुई। स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12 फीसदी , 2013 में 43 फीसदी , 2017 में इसमें 50.2 फीसदी की वृद्धि हुई। इससे पहले 2004 में यह धन 56 फीसदी बढ़ा था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भारत स्विटजरलैंड में सूचना आदान प्रदान की नई व्यवस्था शुरू</h2>
<p style="text-align:justify;">एसएनबी के ये आंकड़े ऐसे समय में जारी किए गए हैं जबकि कुछ महीने पहले ही भारत व स्विटजरलैंड के बीच सूचनाओं के स्वत : आदान प्रदान की एक नई व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य काले धन की समस्या से निजात पाना है। इस बीच स्विटजरलैंड के बैंकों का मुनाफा 2017 में 25 फीसदी बढ़कर 9.8 अरब फ्रेंक हो गया। हालांकि इस दौरान इन बैंकों के विदेशी ग्राहकों की जमाओं में गिरावट आई। इससे पहले 2016 में यह मुनाफा घटकर लगभग आधा 7.9 अरब फ्रेंक रह गया था।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/indians-in-swiss-banks-get-black-money-again/article-4556</link>
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                <pubDate>Fri, 29 Jun 2018 09:33:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार की अनुठी पहल: पेड़ लगाओ, पैसा पाओ</title>
                                    <description><![CDATA[पौधा लगा उसकी संभाल करने वाले विद्यार्थी को मिलेंगे हर 6 माह में मिलेंगे ‌50 रुपए | Environmental protection Campaign चंडीगढ़ (एजेंसी):  पर्यावरण संरक्षण अभियान (Environmental protection Campaign) में सरकार अब स्कूली बच्चों काे जोड़ेगी। पौधा जीवित रहने की सूरत में बच्चे को हर छह महीने पर 50 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">पौधा लगा उसकी संभाल करने वाले विद्यार्थी को मिलेंगे हर 6 माह में मिलेंगे ‌50 रुपए | Environmental protection Campaign</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (एजेंसी): </strong> पर्यावरण संरक्षण अभियान <strong>(Environmental protection Campaign)</strong> में सरकार अब स्कूली बच्चों काे जोड़ेगी। पौधा जीवित रहने की सूरत में बच्चे को हर छह महीने पर 50 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि 3 साल तक दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को भावानात्मक रूप से भी जोड़ा जाएगा। यानि बच्चा चाहे तो उस पौधे को अपने पूर्वजों का नाम भी दे सकेगा। यदि सरकार की यह योजना सफल रहती है तो प्रदेश में लाखों पौधे पेड़ बन जाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:center;">पौधा रोपण अभियान को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से बैठक आयोजित, 10 से शुरू होगा अभियान | Environmental protection Campaign</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">यह योजना कक्षा छठी से 12वीं तक के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए रहेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">बच्चे स्कूल, घर या अन्य किसी भी जगह एक-एक पौधा कम से कम लगा सकेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">सरकार की ओर से 15 जुलाई से पौधा रोपण अभियान प्रदेश में शुरू किया जाएगा।</li>
<li style="text-align:justify;">पौधा रोपण अभियान को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से बैठक भी आयोजित की गई।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसमें यह निर्णय लिया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">10 जुलाई से शुरू होने वाले पौधारोपण अभियान के लिए वन विभाग से कहा गया है कि वह पर्याप्त पौधे उपलब्ध कराए।</li>
<li>मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इस संबंध में हर सप्ताह प्राग्रेस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:center;">हर सप्ताह प्राग्रेस रिपोर्ट देने का दिया निर्देश | Environmental protection Campaign</h1>
<p style="text-align:justify;">स्कूलों में कक्षा इंचार्ज और इको क्लब के इंचार्ज को शनिवार और रविवार को पौधारोपण कार्यक्रम आयोजन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इस संबंध में हर सप्ताह प्राग्रेस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा सिविल सचिवालय में एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की पानी की बोतलों के विकल्प के रूप में दोबारा प्रयोग में लाई जा सकने वाली कांच की पानी की बोतलों का उपयोग किया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:center;">वृक्षारोपण के फायदे | Environmental protection Campaign</h2>
<ul>
<li>सर्वप्रथम लाभ तो ‘वृक्ष’ शब्द से ही लगने लगता है, क्योकि वृक्ष से केवल और केवल लाभ ही होता है।</li>
<li>वृक्ष, वातावरण मे फैली दूषित वायु को शुद्ध करता है ।</li>
<li>वर्षा ऋतु में वर्षा वायु को रोकता है, जिससे वर्षा की सम्भावना अधिक होती है ।</li>
<li>वृक्ष अपने जड़ों मे मिट्टी को बांधकर रखता है, जिससे मृदा अपरदन नहीं होता है ।</li>
<li>वृक्ष अपने आसपास के वातावरण (दूषित वायु की स्वच्छता) के साथ साथ भूमि को भी ठंडा रखता है।</li>
<li>वर्तमान मे सबसे बड़ी मुसीबत ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से कम से कम थोड़ी ही सही पर राहत जरुर दिलायेगा।</li>
<li>वृक्षारोपण यदि एक क्रम मे किया जाये तो सुन्दरता की झलक प्रदर्शित करता है ।</li>
<li>एक ओर वायु को स्वच्छ बनाता है तो दूसरी ओर इन वृक्षों को देवताओ का निवास बताया गया है।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/environmental-protection-campaign/article-4342</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Jun 2018 17:14:32 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेबिट कार्ड से पेमेंट पर पैसा वसूल रहे बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार के डिजिटल इंडिया को पलीता लगा रहे बैंक मुंबई (एजेंसी)। सरकार डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के प्रयास में है, लेकिन बैंक न्यूनतम राशि के अभाव में पैसे नहीं निकलने जैसे वाकयों पर ग्राहकों से गैर-वाजिब शुल्क वसूल रहे हैं। अपने बैंक अकाउंट में पर्याप्त रकम नहीं रहने पर ग्राहक जितनी बार कार्ड […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/banks-charging-money-on-payments-with-debit-cards/article-3635"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/card.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सरकार के डिजिटल इंडिया को पलीता लगा रहे बैंक</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>सरकार डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के प्रयास में है, लेकिन बैंक न्यूनतम राशि के अभाव में पैसे नहीं निकलने जैसे वाकयों पर ग्राहकों से गैर-वाजिब शुल्क वसूल रहे हैं। अपने बैंक अकाउंट में पर्याप्त रकम नहीं रहने पर ग्राहक जितनी बार कार्ड से पैसे निकालने या पेमेंट करने की कोशिश करता है, उतनी बार 17 से 25 रुपये तक चार्ज कर दिया जाता है। देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक आॅफ इंडिया (एसबीआई) आॅटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) या पॉइंट आॅफ सेल (पीओएस) टर्मिनल पर डेबिट कार्ड स्वाइप करने के बाद ट्रांजैक्शन डिक्लाइन होने पर 17 रुपये वसूलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी बॉम्बे में गणित के प्रफेसर आशीष दास ने कहा, ‘खरीदारी के बाद नकदी रहित भुगतान (नॉन-कैश मर्चेंट ट्रांजैक्शन) के लिए डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर इतने बड़े जुमार्ने का कोई मतलब नहीं है और इससे कार्ड या डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को कहीं से भी बल नहीं मिलता।’ दास ने बैंक के विभिन्न शुल्कों पर कई रिसर्च रिपोर्ट्स तैयार की हैं। अतीत में वह कानूनी नीतियां करने में भी बड़ी भूमिका निभा चुके हैं। ट्रांजैक्शन डिक्लाइन नहीं होने पर बैंक तब भी वसूली कर रहे हैं जबकि सरकार ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर की सीमा तय कर रखी है। एमडीआर वह फी है जो बैंक भुगतान स्वीकार करनेवाले मर्चेंट्स से वसूलते हैं। दूसरी तरफ, बैंक ग्राहकों को शाखा या एटीएम से पैसे निकालकर खरीदारी करने की जगह डेबिट कार्ड से भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान भी चला रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Mar 2018 06:51:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आॅनलाइन धोखाधड़ी हो तो तीन दिन में शिकायत पर वापस मिलेगा पैसा</title>
                                    <description><![CDATA[ रिजर्व बैंक ने नियमों में किया बदलाव नई दिल्ली। अगर आप आॅनलाइन, एटीएम या क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के शिकार होते हैं तो आपको आपका पैसा वापस मिल सकता है, लेकिन इसके लिए आपको तीन दिन के अंदर शिकायत दर्ज करवानी होगी। दरअसल रिजर्व बैंक ने नियमों में बदलाव करते हुए ग्राहकों को आॅनलाइन ठगी और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;"> रिजर्व बैंक ने नियमों में किया बदलाव</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> अगर आप आॅनलाइन, एटीएम या क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के शिकार होते हैं तो आपको आपका पैसा वापस मिल सकता है, लेकिन इसके लिए आपको तीन दिन के अंदर शिकायत दर्ज करवानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल रिजर्व बैंक ने नियमों में बदलाव करते हुए ग्राहकों को आॅनलाइन ठगी और दूसरे मामलों से बचाने के लिए कदम उठाया है। इसके तहत अगर आपकी जानकारी और अनुमति के बगैर नेट बैंकिंग के जरिए आपके बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं तो तीन दिन के भीतर इसकी जानकारी बैंक को देने पर आपको नुकसान नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार ऐसी स्थिति में आपके खाते में फ्रॉड के चलते निकाली गई धनराशि दस दिन के भीतर वापस जमा कर दी जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चार दिन बाद शिकायत दी तो खुद की जिम्मेदारी</h3>
<p style="text-align:justify;">रिजर्व बैंक का कहना है कि अगर ग्राहक अनधिकृत रूप से निकाली गई राशि की जानकारी चार से सात दिन के भीतर देता है तो उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी। बशर्ते, यह राशि 25000 रुपए तक हो। इससे ज्यादा नुकसान की भरपाई बैंक करेंगे। लेकिन ग्राहक की लापरवाही जैसे अपने खाते की जानकारी किसी दूसरे को बताने के कारण नुकसान होता है तो इसका नुकसान उसे खुद उठाना पड़ेगा। रिजर्व बैंक के अनुसार अनधिकृत ट्रांजैक्शन की जानकारी देने के बाद अगर कोई नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी बैंक की होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> बैंक की गलती पर भुगतान भी बैंक ही करेगा</h3>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई ने कहा है कि अगर बैंक की गलती यानी फ्रॉड, लापरवाही या गड़बड़ी के चलते नुकसान होता है तो भी ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। इस मामले में यह शर्त भी लागू नहीं होगी कि ग्राहक ने इसकी जानकारी दी है या नहीं। बचत खाते में ग्राहकों की अधिकतम जिम्मेदारी दस हजार रुपए की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंकों को ग्राहकों को अनिवार्य रूप से एसएमएस अलर्ट के लिए पंजीकृत करना चाहिए और जहां उपलब्ध हो, ईमेल पर भी अलर्ट भेजना चाहिए।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/if-you-complain-of-fraud-in-three-days-then-you-will-get-back-money/article-2055</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 06:47:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्विस बैंकों में जमा धन: भारत 88वें स्थान पर फिसला</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन शीर्ष पर बरकरार ज्यूरिख (एजेंसी)। स्विट्जरलैंड के बैंकों में रखे धन के मामले में भारत फिसलकर 88वें स्थान पर आ गया है। वहीं ब्रिटेन पहले पायदान पर बना हुआ है। स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार भारतीयों द्वारा रखा गया धन विदेशी ग्राहकों के स्विस बैंकों में रखे कोष […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-88th-position-on-swiss-bank-deposits/article-1877"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/swiss-bank.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">ब्रिटेन शीर्ष पर बरकरार</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>ज्यूरिख (एजेंसी)।</strong> स्विट्जरलैंड के बैंकों में रखे धन के मामले में भारत फिसलकर 88वें स्थान पर आ गया है। वहीं ब्रिटेन पहले पायदान पर बना हुआ है। स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार भारतीयों द्वारा रखा गया धन विदेशी ग्राहकों के स्विस बैंकों में रखे कोष का केवल 0.04 प्रतिशत है।<br />
भारत 2015 में 75वें स्थान पर जबकि इससे पूर्व वर्ष में यह 61वें स्थान पर था। वर्ष 2007 तक स्विस बैंकों में विदेशियों के जमा धन के मामले में शीर्ष 50 देशों में शामिल था।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2004 में भारत इस मामले में 37वें स्थान पर था। काले धन की समस्या के समाधान के लिए स्विट्जरलैंड और भारत के बीच सूचना के स्वत: आदान-प्रदान के लिए नए मसौदे से पहले ज्यूरिख स्थित एसएनबी ने यह आंकड़ा जारी किया। एसएनबी के इन आंकड़ों में इस बात का जिक्र नहीं है कि भारतीयों, प्रवासी भारतीयों या विभिन्न देशों की इकाइयों के नाम पर अन्य ने कितना-कितना धन जमा किया हुआ है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> रिकार्ड न्यूनतम स्तर पर</h2>
<p style="text-align:justify;">दुनिया भर के विदेशी ग्राहकों का स्विस बैंकों में जमा धन मामूली रूप से बढ़कर 2016 में 1,420 अरब स्विस फ्रैंक (सीएचएफ) हो गई, जो इससे पूर्व वर्ष में 1,410 अरब स्विस फ्रैंक थी। देश के हिसाब से देखा जाए तो स्विस बैंकों में जमा धन के मामले में ब्रिटेन सबसे आगे है। वहां के नागरिकों की जमा राशि 359 अरब स्विस फ्रैंक (25 प्रतिशत) हैं। अमेरिका 177 अरब स्विस फ्रैंक (14 प्रतिशत) के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा किसी अन्य देश की हिस्सेदारी दहाई अंक में नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष 10 देशों में वेस्ट इंडीज, फ्रांस, बहमास, जर्मनी, गुएर्नसे, जर्सी, हांगकांग तथा लक्जमबर्ग हैं। भारत 67.6 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 4,500 करोड़ रुपये) के साथ 88वें स्थान पर है। लगातार तीन साल गिरावट के बाद यह रिकार्ड न्यूनतम स्तर पर आ गया है, प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो यह 0.04 प्रतिशत रहा जो 2015 में 0.08 प्रतिशत था। पाकिस्तान 1.4 अरब स्विस फ्रैंक के साथ 71वें स्थान पर है। ब्रिक्स देशों में रूस 19वें स्थान (15.6 अरब स्विस फ्रैंक), चीन 25वें (9.6 अरब डालर), ब्राजील 52वें (2.7 अरब डालर) तथा दक्षिण अफ्रीका 61वें (2.2 अरब स्विस फ्रैंक) स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/india-88th-position-on-swiss-bank-deposits/article-1877</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 07:23:45 +0530</pubDate>
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