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                <title>God - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बुराईयां छोड़ने पर ही देंगे प्रभु दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम जी दाता रहबर ने लोगों को सच का संदेश दिया और सच के राह पर चलने के लिए लोगों को ऐसा मूलमंत्र दिया जिससे इन्सान के अंदर ताकत आए और वो सच के राह बेहिचक चल सके। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/god-will-give-darshan-only-on-leaving-evils/article-20984"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/precious-words-by-saint-dr.-msg.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा</strong>। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम जी दाता रहबर ने लोगों को सच का संदेश दिया और सच के राह पर चलने के लिए लोगों को ऐसा मूलमंत्र दिया जिससे इन्सान के अंदर ताकत आए और वो सच के राह बेहिचक चल सके। सच की राह पर चलना कोई मामूली बात नहीं होती। इस घोर कलियुग में बुराई का बोलबाला है। झूठ, ठग्गी, बेईमानी, भ्रष्टाचार, काम-वासना, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार, मन व माया में लोग बुरी तरह से लिप्त हैं।</p>
<h4 style="text-align:center;">अहंकार, खुदी और गुरू, पीर के वचनों से उलट चलने वाला कभी खुशियां हासिल नहीं कर सकता</h4>
<p style="text-align:justify;">ऐसे घोर कलियुग में कोई भगवान (God) के नाम का जाप करे, बहुत ही मुश्किल है। सुमिरन करे, सेवा करे और दृढ़ विश्वास बन जाए यह और भी मुश्किल है क्योंकि आदमी हवा में जल्दी आ जाता है। पर भक्त वहीं होता है जितना भी सत्कार मिले, झुक कर रहे और अपने-आप को छुपा कर रखे। अहंकार, खुदी और गुरू, पीर के वचनों से उलट चलने वाला कभी खुशियां हासिल नहीं कर सकता। प्रभु के रास्ते पर चलना ऐसा होता है जैसे बरसात में चिकनी माटी पर चलना।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ऐसे घोर कलियुग में अगर सतगुरू, पीर-फकीर से लिव लगा ली, सतगुरू को ही सबकुछ मान लिया। फिर तो ओड़ निभ सकती है अगर बंदों के चक्र में पड़ गए फिर तो गये। ओड़ निभाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। इसलिए सिर्फ पीर, फकीर की सुनों और उसी से लिव लगाकर रखो। पीर-फकीर कभी किसी को बुरा नहीं कहते। इसलिए एक ही लक्ष्य (Aim) बना कर चलो, अपना गुरू, पीर-फकीर व सतगुरू मौला। दूसरा लक्ष्य तो होना ही नहीं चाहिए। इसलिए अल्लाह, वाहेगुरू, राम को ही अपना बनाओ, जिसको किसी से कोई गर्ज नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:center;">अपने अंदर की बुराइयां, बुरी आदतें छोड़नी होंगी</h4>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सतगुरू मुर्शिद को कहीं ढूंढने नहीं जाना पड़ता। सुमिरन करो, वचनों पर पक्के रहो, तो आपके अंदर से ही उसने प्रकट हो जाना है। प्रतिदिन नियमित घंटा सुबह व घंटा शाम को सुमिरन (Meditation) जरूर करें। प्रभु प्रेम का रास्ता तलवार की तरह तीखा है। अपने अंदर की बुराइयां, बुरी आदतें छोड़नी होंगी। अपने अंदर की बुराइयां छोड़ोगे तभी सतगुरू अल्लाह, वाहेगुरू, राम दर्श-दीदार देंगे। दूसरों की बुराइयां गानाबड़ा ही आसान होता है, खुद कितने पाप किये हैं, उसकी कोई गिनती नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान प्रभु (God) के किये हुए परोपकारों को पल में भूला देता है। इन्सान को कभी भी मालिक के उपकारों को भूलना नहीं चाहिए, मालिक से मालिक को मांगते रहो और हमेशा उस परमात्मा से डर कर रहो। क्योंकि मालिक का अगर इन्सान भय रखेगा तो कोई बुराई नहीं करेगा। प्रभु के नाम का जाप करो, उसकी बनाई औलाद की नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो, किसी को बुरा न कहो, किसी की चुगली निंदा न करो, किसी को गलत न बोलो, कभी किसी का बुरा न सोचो। पीर-फकीर के वचन जो माना करते हैं मालिक उन्हें मालामाल कर दिया करते हैं।</p>
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                                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jan 2021 06:00:15 +0530</pubDate>
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                <title>प्रभु याद में लगाया समय दो जहान में मददगार</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Dr. MSG) फरमाते हैं कि ‘परमात्मा (God) की याद में जितना समय इन्सान लगाता है वो समय दोनों जहान में हर क्षण (Every Moment) इन्सान का साथ देता है। कहते हैं समय कभी किसी का साथ नहीं देता, यह गलत बात है। समय उनका […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/time-spent-in-remembrance-of-god-helps-every-where/article-20938"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/bad-thoughts-weaken-the-power-of-thinking.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां <strong>(Dr. MSG)</strong> फरमाते हैं कि ‘परमात्मा <strong>(God)</strong> की याद में जितना समय इन्सान लगाता है वो समय दोनों जहान में हर क्षण <strong>(Every Moment)</strong> इन्सान का साथ देता है। कहते हैं समय कभी किसी का साथ नहीं देता, यह गलत बात है। समय उनका साथ देता है जो समय की कद्र किया करते हैं और समय की कद्र अल्लाह, वाहेगुरू के नाम के बिना किसी और तरीके से हो नहीं सकती। क्योंकि जितना समय आप प्रभु की याद में देते हैं, वो समय अनमोल <strong>(Priceless)</strong> बन जाता है। उस समय में मालिक बेइंतहा <strong>(Immoderate)</strong> खुशियां बख्श देते हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कर्तव्य <strong>(Duty)</strong> निर्वाह अति जरूरी है, कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिए। लेकिन यह नहीं कि सारा दिन कोल्हू के बैल की तरह आप दिन-रात धन दौलत कमाने में, ठग्गी, बेईमानी, भ्रष्टाचार में लगे रहें तो यह कोई इन्सानियत नहीं है। बाल-बच्चों का पालन पोषण करना इन्सान का फर्ज है। उनके लिए समय दो। लेकिन अगर परमात्मा के लिये समय दोगे तो की गई भक्ति आपकी कुलों का भला करेगी। इसलिए भक्ति करते रहना चाहिए, सुमिरन करते रहना चाहिए। भक्ति से इन्सान के अंदर वो शक्ति आती है कि वो कभी कोई गलत कार्य नहीं करता। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब कोई इन्सान भक्ति छोड़ देता है मनमते चलने लग जाता है तो उसका हर कार्य मन के अधीन हो जाता है और वो बुरे कर्म करने शुरू कर देता है। इसलिए सेवा व सुमिरन से अपने विचारों का शुद्धिकरण करो, मालिक से मालिक को मांगा करो और पीर-फकीर जो बात कहे उस पर अमल करना अति जरूरी है। लोग मनमते चलते हैं इसलिए दु:खी रहते हैं, गमगीन रहते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर की बात मानो, सुमिरन करो, सेवा करो, मन व मनमते लोगों से जितना हो सके दूर रहो। मन व मनमता यानि जो कोई आपको अंगुली लगाता है, गलत बोलता है, उसकी तरफ ध्यान न दो, जो सच्चे राह पर चलने के लिए मदद करता है उसके अनुसार चलो। संत, पीर-फकीर को कोई गर्ज नहीं होती। कोई इन्सान आपको कोई बात कहता है तो हो सकता है उसको आपसे कोई गर्ज हो। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आपको कोई रोग है, आप परेशान हैं तो अपने कर्मों की वजह से। हर किसी को अपने कर्मों की खेती काटनी पड़ती है। आपजी ने फरमाया कि अगर आपको किसी के लिए दर्द है तो आप उसके लिए सुबह-शाम सुमिरन <strong>(Meditation)</strong> करें व प्रार्थना <strong>(Prayer)</strong> करें कि मालिक वो परेशान है उस पर कृपा करना। ये होती है भक्तों वाली बात। तो एक भक्त को चाहिए कि वह किसी को दु:खी देखता है तो उसके लिए दुआ करे। कोई अपना अगर आपको लगता है कि वो दु:खी परेशान है तो उसके लिए आप सुमिरन के टाईम प्रार्थना करो।</p>
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                <pubDate>Thu, 31 Dec 2020 22:38:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सत्संगी के अनमोल गहने हैं सेवा और सुमिरन</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सेवा और सुमिरन (Humanity) दो ऐसे गहने हंै जो भी मनुष्य इन्हें पहन लेता है, जीते-जी उसके सभी गम, चिंता, परेशानियां दूर हो जाती हंै, और मरणोपरांत आवागमन का चक्कर जड़ से खत्म हो जाता है। इन्सान पूरी तरह से तंदरुस्त […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/humanity-and-meditation-saint-dr-msg/article-4205"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/guruji-7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सेवा और सुमिरन <strong>(Humanity)</strong> दो ऐसे गहने हंै जो भी मनुष्य इन्हें पहन लेता है, जीते-जी उसके सभी गम, चिंता, परेशानियां दूर हो जाती हंै, और मरणोपरांत आवागमन का चक्कर जड़ से खत्म हो जाता है।</p>
<h1 style="text-align:center;">इन्सान पूरी तरह से तंदरुस्त है तो वह खुद की<br />
सेवा कम करवाए | Humanity</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सेवा में सबसे जरुरी बात यह होती है कि अगर इन्सान पूरी तरह से तंदरुस्त है तो वह खुद की सेवा कम करवाए। वह सबसे पहले सेवा की अपने घर से शुरुआत करे। अपनी मां, अपने बुजुर्ग बाप, दादा, परदादा कोई भी है अगर वे असमर्थ हैं तो उनकी मदद करे। यदि आपका तालमेल नहीं बैठता, आपस में लड़ाई-झगड़ा रहता है तथा वे अलग हो जाते हैं तो उनकी कभी निंदा नहीं करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर इन्सान अपने परिवार से अलग हो जाए व उनके आपस में विचार नहीं मिलते तो आप सुमिरन करते रहिए, क्योंकि वे आपके जन्मदाता हैं, उनका ऋण इन्सान कभी नहीं उतार सकता। इसलिए इन्सान को उनकी बुराइयों को नहीं देखना चाहिए। अगर आप अपने मां-बाप की बुराइयों को गाते हैं तो आप कैसे भले इन्सान बन जाएंगे और जो मां-बाप हैं वे भी अपनी संतान की बुराइयों को मत गाएं, क्योंकि वो भी आपका ही खून हैं, वह कहीं बाहर से तो आया नहीं।</p>
<h1 style="text-align:center;">इन्सान को नेक कर्म करते रहने चाहिए | Humanity</h1>
<p style="text-align:justify;">ऐसा करने से आप भी तो बुरे बन जाएंगे, क्योंकि वो भी तो आपका ही खून है। इसलिए सबका सत्कार करना सीखें। इन्सान को नेक कर्म करते रहने चाहिए, लेकिन उसको इस बारे में कुछ बताने की जररुरत नहीं, क्योंकि अगर इन्सान कर्म अच्छे करेगा तो वो ऊपर बैठा राम सब कुछ देख रहा है, उसे इसका फल जरुर मिलेगा। पूरी दुनिया में अच्छे कर्म वाले इन्सान को सभी नमस्कार जरूर करते हैं। इसलिए जीव को जितना संभव हो सके यही सेवा करनी चाहिए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 09:26:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वचन मानो तो अंदर-बाहर नहीं रहेगी कोई कमी</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चा सौदा सुख दा राह, सब बंधनां तों पा छुटकारा मिलदा सुख दा साह… | Dera Sacha Sauda संतों के फरमाए हुए वचन जीवन के हर मोड़ पर काम आते हैं। संतों के प्यारे और मीठे संदेश रूपी वचनों को इस श्रृंखला में आप पढ़ रहे हैं। अपने सतगुरु पर दृढ़ विश्वास रखों मार्च 1958 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">सच्चा सौदा सुख दा राह, सब बंधनां तों पा छुटकारा मिलदा सुख दा साह… | Dera Sacha Sauda</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li>संतों के फरमाए हुए वचन जीवन के हर मोड़ पर काम आते हैं। संतों के प्यारे और</li>
<li>मीठे संदेश रूपी वचनों को इस श्रृंखला में आप पढ़ रहे हैं।</li>
<li>अपने सतगुरु पर दृढ़ विश्वास रखों</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मार्च 1958 : स्थान रामपुरिया बागड़ियां (हरि)।</strong> पूजनीय बेपरवाह साईं मस्ताना जी महाराज ज्ञानपुरा धाम, रामपुरिया बागड़ियां आश्रम में पधारे। इस आश्रम की देखरेख की सेवा दादू बागड़ी के हवाले थी। सेवादार सख्त मेहनत द्वारा प्राप्त कमाई करके ही खाते और कल के भोजन की चिंता नहीं करते थे। सतगुुरु पर दृढ़ विश्वास रखते हुए सेवा-सुमिरन में लगे रहते। अचानक पूज्य मस्ताना जी महाराज आश्रम में पधारने पर विचार करने लगे। (Dera Sacha Sauda)</p>
<p style="text-align:justify;">कि सतगुुरु जी के साथ कुछ साध-संगत भी है, और भी साध-संगत दर्शनों के लिए व सत्संग सुनने के लिए आएगी पर आश्रम में तो इस समय मात्र एक पाव गुड़ ही है। सभी भक्त लंगर पानी के प्रबंध के बारे में सोचने लगे तो भोलेपन में ब्रह्मचारी सेवादार दादू ने अपने दिल की बात मुर्शिद के सामने प्रकट कर दी। शहनशाह जी ने फरमाया, ‘‘देखो, पहले इधर एक श्मशान भूमि थी। अब डेरा बन गया है, बहुत से लोग सत्संग में आएंगे और देखेंगे। जो तू कहता है राशन किधर से आएगा तो पुट्टर फिक्र न करो, यहां तो सतगुरु के माल का ढ़ेर लग जाएगा। (Dera Sacha Sauda)</p>
<p style="text-align:justify;">कोई कमी नहीं रहेगी।’’ शहनशाह जी यहां ग्यारह दिन तक ठहरे। हर रोज सत्संग होता व कमाल के नजारे मिलते। दूर-दराज से बहुत साध-संगत आती, रोज खूब मिठाईयां तथा देसी घी का हलवा बनता और साध-संगत को खिलाया जाता। नाम-दान लेने वाले नए जीवों की लाईनें लग जाती। कई-कई बार तो आश्रम में एक दिन में एक से अधिक बार भी आपजी ने नाम-दान की दात बख्शी। (Dera Sacha Sauda)</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत-पाक के मध्य युद्ध और आश्रम का पीला रंग</h3>
<p style="text-align:justify;">दिसम्बर 1971 की बता है। भारत पाकिस्तान के मध्य युद्ध की घोषणा हो चुकी थी। परमपिता जी रूहानी सत्संग यात्रा पर बाहर गए हुए थे। हवाई हमले भी प्रारंभ हो गए थे। सरसा के आस-पास भी कई बम गिरे। सरकारी घोषणा हो गई कि रात को किसी ने प्रकाश नहीं करना और न ही आग जलानी है। आश्रम में अभी कुछ दिन पहले, नवम्बर 1971 में पूजनीय बेपरवाह जी के जन्म-दिन भण्डारे के शुभ अवसर पर ही रंग-रोगन किया गया था और सफेद रंग की वजह से पूरा आश्रम रात को चन्द्रमा की रोशनी में चमक रहा था। (Dera Sacha Sauda)</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परमपिता जी के सत्संग यात्रा में सरसा आश्रम से बाहर जाने के कारण आश्रम के सत् ब्रह्मचारी सेवादारों ने विचार किया कि अब क्या किया जाए?  अंत में ये निर्णय लिया कि आश्रम में जितने भी छायावान हैं, उनसे सारे आश्रम को ढ़क दिया जाए और ऐसा ही किया गया। युद्ध प्रारंभ होने के दो दिन बाद परमपिता जी सुबह लगभग 9 बजे सरसा आश्रम पधारे। जो समस्त सत् ब्रह्मचारी सेवादार उदास थे, वे सभी परमपिता जी के दर्शन करके प्रसन्न हो गए। पूजनीय परमपिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा घबराओ नहीं, इस तरह करो कि सारे छायावान उतार दो। (Dera Sacha Sauda)</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि रात को ओस पड़ती है ये खराब हो जाएंगे। अपने सारे दरबार को पीला रंग करते हैं, तुम तैयारी करो, हम अभी गुफा में होकर आते हैं।’’ परमपिता जी के आदेशानुसार सभी छायावान उतार दिए गए और दूसरी तरफ पीला रंग, ब्रश, कूची व डिब्बे आदि आवश्यक्तानुसार समस्त सामान तैयार कर लिया गया। थोड़े समय के उपरांत ही परमपिता जी गुफा से बाहर आ गए और हुक्म फरमाया,‘‘ बेटा! काम शुरु करो, हमने सारे आश्रम को पीले रंग से रंग देना है।’’ इसके साथ ही सत् ब्रह्मचारी सेवादार भाई कुलवंत सिंह को प्रसाद लेकर आने का हुक्म फरमाया। सभी को प्रसाद दिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘अहंकार, घमंड को हमेशा मार पड़ती है’ | Dera Sacha Sauda</h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सतगुरु, मुर्शिद-ए-कामिल वो संदेश देते हैं, जो जीवोंके दोनों जहानों के काज सवार दे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस धरती पर जब तक इन्सान रहे, तब तक मालिक की दया-मेहर, रहमत बरसे, गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियों से जीव आजाद हो जाए और मरणोपरांत आत्मा आवागमन में न जाकर जन्म-मरण के चक्कर से आजाद हो जाए। इसलिए संत, पीर-फकीर आते हैं, जीवों को समझाते हैं और इन्सानियत का पाठ पढ़ाया करते हैं। (Dera Sacha Sauda)</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो वचन सुनकर मान लेते हैं, वचनों पर अमल करते हैं, उन्हें वो खुशियां नसीब होती हैं, वो रहमो-करम बरसता है, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की होती। संतों का काम रास्ता दिखाना है, चलना इन्सान का काम है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत रास्ता दिखाते हैं कि भाई! ये रास्ता है जो तेरी मंजिल तक जाएगा, तुझे अल्लाह, वाहेगुरु, राम से मिलाएगा। आगे जीव पर निर्भर है, वो उस रास्ते पर चलता है या नहीं चलता। वचन मानता है या नहीं मानता। अगर उस रास्ते पर चले, वचन माने तो अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती और इन्सान खुशियों के काबिल बनता चला जाता है। (Dera Sacha Sauda)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jun 2018 08:27:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालिक का शुक्राना करना कभी ना भूलो</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा हर कण, हर जर्रे में मौजूद है, वो सब देख रहा है। अगर आप सच्चे दिल से, सच्ची भावना से उसकी भक्ति करो, उसकी औलाद की सेवा करो, तो मालिक पहाड़ जैसे कर्मों को भी कंकर में बदल देता है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/never-forgets-to-say-thanks-to-god-saint-dr-msg/article-3905"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/saint-dr.-msg-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा हर कण, हर जर्रे में मौजूद है, वो सब देख रहा है। अगर आप सच्चे दिल से, सच्ची भावना से उसकी भक्ति करो, उसकी औलाद की सेवा करो, तो मालिक पहाड़ जैसे कर्मों को भी कंकर में बदल देता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आदमी उस परमपिता परमात्मा के रहमो-कर्म को जल्दी भुला देता है, उसकी दया-मेहर, रहमत, परोपकारों को भूल जाता है, पर फिर भी परमपिता परमात्मा उसे नहीं भुलाता। इन्सान जैसे-जैसे मालिक से दूर होता है, उसे भुलाता है, अपने पर किए परोपकारों को भूल जाता है, वैसे-वैसे वो अपने लिए और अपने परिवार के लिए दु:ख, मुसीबत का कारण वो बनता जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को मालिक का शुक्राना करते रहना चाहिए। परमपिता परमात्मा का शुक्राना करना इबादत, भक्ति है, क्योंकि वो कभी किसी का शुक्राना आसानी से नहीं लेता। अगर आप उसे तड़प कर बुलाते हैं, सच्ची भावना से आप उसे बुलाते हो, तो वो आपकी सुनता है, आपके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं मिटा देता है और अपनी दया-मेहर, रहमत आप पर बरसा के वो तमाम खुशियां बख्श देता है, जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होती।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए मालिक से मालिक को मांगो, सबका भला करो और जैसे-जैसे आप मालिक के आगे दुआ करोगे, वैसे-वैसे मालिक आप पर दया-मेहर, रहमत की बरसात करते जाएंगे और आप गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियों से आजाद होते जाएंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप मालिक का शुक्राना करो, ना शुक्रगुजार कभी ना करो। वो दया करता है, क्योंकि वो दयावान है। वो रहम करता है, क्योंकि वो रहमत का दाता है। वो कृपा करता है, क्योंकि वो कृपा निधान है और इन्सान को चाहिए कि वो मालिक के परोपकारों को कभी ना भूले।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुत लोगों की बीमारियां कट जाती हैं। बेरोजगारों को रोजगार मिल जाता है। मालिक बेऔलादों को औलाद बख्श देता है। भाग्यशाली को और ज्यादा भाग्यशाली बना देता है, पर फिर भी इन्सान भुलाने में देरी नहीं करता है। यही कलियुग का इन्सान है और फिर आने वाला टाईम उसके लिए दुश्वार हो जाता है, वो दु:खी, परेशान हो जाता है। इसलिए उसके परोपकारों को हमेशा याद रखो। उसकी कृपा-दृष्टि उससे मांगते रहो, ताकि उसकी दया-मेहर, रहमत उस पर मूसलाधार बरसे और आपके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं मिट जाएं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/never-forgets-to-say-thanks-to-god-saint-dr-msg/article-3905</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Jun 2018 08:34:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वचनों पर चलने से होता है अंतकरण का शुद्धिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब हर जगह, हर पल, हर समय रहता है। कोई ऐसी जगह नहीं जहां भगवान न हो। प्रभु का रहमो-कर्म हर कोई हासिल कर सकता है, बस…, वचनों को मानें। आप वचनों पर चलें तो अंत:करण शुद्ध हो जाता […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब हर जगह, हर पल, हर समय रहता है। कोई ऐसी जगह नहीं जहां भगवान न हो। प्रभु का रहमो-कर्म हर कोई हासिल कर सकता है, बस…, वचनों को मानें। आप वचनों पर चलें तो अंत:करण शुद्ध हो जाता है, विचारों पर काबू आ जाता है और मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन अंदर-बाहर से होने शुरू हो जाते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान, अल्लाह, राम को किसी से कोई दुश्मनी नहीं होती। इन्सान अपने कर्मों को हल्का नहीं करना चाहता। इसलिए वो दर्शन नहीं देता। हर जगह भगवान तो है, पर आप उसे नहीं देख पा रहे, क्योंकि आप अपने अंत:करण का शुद्धिकरण नहीं कर रहे। जरा सोचिए, क्या आप अपने शरीर के लिए खाते-पीते नहीं हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">आपको मालूम है कि अगर नहीं खाएंगे तो चल नहीं पाएंगे, कामधंधा नहीं कर पाएंगे। इसलिए आप खाते-पीते हैं। उसी तरह अंत:करण की शुद्धि के लिए सुमिरन क्यों नहीं करते? दूसरों को दोष देते रहते हैं। कभी अपने-आपके बारे में सोचा है कि आपके खुद के विचार कैसे हैं? अगर बुरे विचार आ जाते हैं तो सुमिरन करें, बुरे विचारों पर न चलो, तो यकीनन आपका पाप-कर्म उसी समय खत्म हो जाएगा और मालिक की दया मेहर रहमत से आप मालामाल होते जाएंगे। इसलिए अपने विचारों का शुद्धिकरण करना अति जरूरी है। जो विचारों का शुद्धिकरण नहीं करते, वो खुशियों से खाली रह जाते हैं। इसलिए वचनों पर अमल किया करो ताकि आपको मालिक की दया-मेहर, रहमत मूसलाधार बरसती नजर आए और आप खुशियों से मालामाल हो जाएं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Mar 2018 03:28:36 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमात्मा को पाने के लिए मन का शुद्धिकरण करें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में, उसके प्यार-मोहब्बत में जो खुशी मिलती है, वो कहीं से नहीं खरीदी जा सकती। इन्सान की भावना जब प्रबल हो जाती है, उस परमपिता परमात्मा के लिए अंत: करण तड़प उठता है, जब इन्सान अपने परमपिता परमात्मा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/purify-the-mind-to-get-god-saint-dr-msg/article-3491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/pita-ji-blessing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक की याद में, उसके प्यार-मोहब्बत में जो खुशी मिलती है, वो कहीं से नहीं खरीदी जा सकती। इन्सान की भावना जब प्रबल हो जाती है, उस परमपिता परमात्मा के लिए अंत: करण तड़प उठता है, जब इन्सान अपने परमपिता परमात्मा के दर्श-दीदार हेतू व्याकुल हो जाता है, और उसका दर्श-दीदार होता है, तो ऐसा आभास होता है, ऐसा आनन्द आता है, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक नशा, एक नूर, एक लज्जत दिलो-दिमाग पे छा जाता है, कण-कण, जर्रे-जर्रे में परमपिता परमात्मा नजर आने लगते हैं, शरीर का रोम-रोम नशिया जाता है और इन्सान मालिक के दर्श-दीदार से निहाल हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान को उस परमानन्द की प्राप्ति होती है, जो इस जहान में भी खत्म नहीं होता और अगले जहान में भी ज्यों का त्यों बना रहता है, लेकिन उसको पाने के लिए अपनी भावना का शुद्धिकरण करना होगा। आप जी फरमाते हैं आप सुमिरन, भक्ति, इबादत करें, ताकि आपके अंदर जो बुरे, गलत विचार आते हैं, उन पर काबू हो जाए। चलो…, मन गलत विचार दे भी देता है, तो उस पर अमल न करो, उसके अनुसार न चलो, तो भी मालिक के कृपा-पात्र एक-न-एक दिन आप जरूर बन जाएंगे। जब बुरे विचारों को आप फोलो करने लगते हैं, मन की कही बातों पे अमल करने लगते हैं, तो आप दु:खी, परेशान रहते हैं, टेंशन में रहते हैं और अपने कर्मों का बोझ उठाते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए आप वचन सुनो, सुमिरन करो और अपने अंत:करण की सफाई करो। जब अंदर की सफाई हो जाएगी, जब आप अंदर से पाक-पवित्र हो जाएंगे, तो मालिक की कृपा-दृष्टि जरूर बरसेगी, उसकी दया-मेहर, रहमत से आपके जन्मो-जन्मो के पाप-कर्म धुल जाएंगे। आप जी फरमाते हैं कि आप चलते, बैठते, लेटते, काम-धंधा करते हुए सुमिरन करो। मालिक के नाम को सलाम है। ये कभी न सोचो कि आप बहुत बड़े गुणवान बन गए हो, आपकी वाह-वाह हो रही है, शायद इसलिए मालिक, अल्लाह, राम आपको मोहब्बत करते हैं! नहीं, उसको आपकी मान-बढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप वचनों पर पक्के रहो, भावना मालिक के लिए बनाकर रखो। ये न हो कि आपकी भावना हर किसी के लिए गिरती, पड़ती हो, आप हर किसी के आशिक हो जाते हो। नहीं, आप उस परमपिता परमात्मा के आशिक बनो, तो वो खुशियां देता है, दोनों जहान का परमानन्द पिला देता है। इसलिए जरूरी है सुमिरन के पक्के बनना। घंटा सुबह-शाम या आधा घंटा सुबह-शाम मालिक का नाम जपो, मालिक से मालिक को मांगो, बुरे कर्म ना करो। क्योंकि दो कश्ती पे सवार कोई वैसे ही नहीं बचता और एक कश्ती होती ही नहीं तो बचेगा कैसे? इसलिए परमपिता परमात्मा से आप आनन्द चाहते हैं, तमाम लज्जतें चाहते हैं और अपने अवगुण, पाप-गुनाह खत्म करना चाहते हैं, तो सुमिरन करो, सेवा करो और अपना प्यार-मोहब्बत मालिक के लिए दृढ़ करो, सिर्फ उसी से प्यार करो, बाकी फर्ज, कर्त्तव्य का निर्वाह करते रहो, यकीनन मालिक की कृपा-दृष्टि होगी। जो लोग सुनते हैं, मानते हैं, मालिक उन पर रहमो-कर्म जरूर बरसाते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 04:25:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालिक के दर्श दीदार के काबिल बनाती है भक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा की भक्ति इबादत इन्सान को वो रूतबा बख्श देती है जिसके चलते इंसान बुलंदियों को छू लेता है और परम पिता परमात्मा के दर्श दीदार के लायक बन जाता है। इन्सानियत हर किसी के अंदर है, पर शैतान इतना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा की भक्ति इबादत इन्सान को वो रूतबा बख्श देती है जिसके चलते इंसान बुलंदियों को छू लेता है और परम पिता परमात्मा के दर्श दीदार के लायक बन जाता है। इन्सानियत हर किसी के अंदर है, पर शैतान इतना हावी है कि जिसके चलते लोग इन्सानियत को भूल चुके हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि काम, वासना, क्रोध, लोभ, मोह, माया ऐसे शैतान हैं, शैतान के नुमाइंदे हैं, जो इन्सान के अंदर रहते हैं पर दिखते नहीं और इन्सान की हर अच्छी सोच पर ऐसा पहरा देते हैं, उसकी सोच को रोक लेते हैं। इनको हटाने के लिए सुमिरन, सेवा से बड़ी चीज इस दुनिया में कोई नहीं है। जिसने अपने विचारों पर काबू पा लिया वो इंसान सुखी है। जिसके ऊपर विचार हावी हो गए वो अपने विचारों से ही दुखी हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि आपके अंदर कैसे विचार आ रहे हैं, कैसी सोच आ रही है। उसका मूल्यांकन अगर आप करते हैं और आपको लगता है कि आपके अंदर नैगेटिविटी ज्यादा है। बुरी सोच ज्यादा चलती है तो टेंशन मत लो। घण्टा सुबह-शाम या जब भी विचार आए 4-5 मिनट सुमिरन कर लो। यकीनन उस सोच का फल आपको नहीं मिलेगा और आप उस पाप से रहित हो जाएंगे। इससे आसान तरीका इस कलयुग में नहीं हो सकता, पर यह जरूरी है कि सुमिरन के पक्के बनो सुबह-शाम थोड़ा-थोड़ा समय मालिक की याद में लगाना सीखो।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अगर आप समय नहीं देते तो आप मालिक से दूर रहते हैं। समय अगर मालिक के लिए देते हो और सुमिरन नहीं होता, सेवा किसी वजह से नहीं कर पाते पर अंदर मालिक की तार हमेशा बजती रहती है और वो अंदर चलने वाली तार ये इंसान को मालिक के प्यार से नवाजती है, मालिक का प्यार बढ़ाती है। इसलिए कभी ये मत सोचा करो कि सुमिरन नहीं करना, कभी ये मत सोचा करो कि भक्ति, इबादत चलते-फिरते करने से क्या फायदा? क्योंकि चलते फिरते रहने से की गई भक्ति भी इंसान को सुखों की तरफ ले जाती है और गम, दुख, दर्द चिंताओं से आजाद कर देती है। इसलिए सुमिरन करो चलते, उठते-बैठते, काम-धंधा करते वो मालिक की दरगाह में मंजूर कबूल जरूर होता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/good-devotion-to-see-the-god-saint-dr-msg/article-3471</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2017 03:53:49 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनियादारी में खोकर भगवान को मत भूलो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि  दुनिया के प्यार की शुरुआत स्वार्थ से होती है। दुनियादारी में लोग खो जाते हैं और अल्लाह, मालिक, राम, कायदे-कानून सब भूल जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि जब उस राम की मार पड़ती है तो आदमी को कोई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/do-not-forget-god-by-losing-in-the-world-saint-dr-msg/article-3467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/guruji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि  दुनिया के प्यार की शुरुआत स्वार्थ से होती है। दुनियादारी में लोग खो जाते हैं और अल्लाह, मालिक, राम, कायदे-कानून सब भूल जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि जब उस राम की मार पड़ती है तो आदमी को कोई रास्ता नजर नहीं आता। इसलिए सेवा-सुमिरन करो, भक्ति की चाह करो। उससे सब कुछ मांगो और वो देगा, अंदर-बाहर से मालामाल कर देगा। इसलिए उस परमपिता परमात्मा से कभी भी मुंह न मोड़ो। मालिक का सुमिरन, भक्ति-इबादत करते रहो तो अंदर-बाहर से लबरेज हो जाओगे और एक बार उसने आपकी बांह पकड़ ली तो सदा सुहागन हो जाओगे।   उसकी याद में तड़प कर तो देखो, वो क्या नहीं कर सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान धन-दौलत, नौकरी, बेटा-बेटी, बहन-भाई के लिए आंसू बहाता है। यही आंसू कभी उस अल्लाह, राम के लिए बहाकर देखो तो एक-एक आंसू हीरे-मोती जवाहरात बन जाएगा, दुनियादारी में…लेकिन हैरानी की बात यह है कि लोग मालिक के लिए नहीं बल्कि दुनियावी साजो-सामान के लिए पागल हो जाते हैं और वो पागलपन बता देता है कि आप किसमें, कितनी हद तक खोए हुए हैं। जिसे आदमी अपना पक्का साथी समझता है वो पता नहीं कब साथ छोड़ जाए। इसलिए अगर साथी ही बनाना है तो उस दोनों जहान के मालिक, अल्लाह, वाहेगुरु, राम को बनाइए।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि मालिक को अपना साथी बनाना है तो यह जरूरी है कि आप नेकी-भलाई के रास्ते पर चलो, उस परमपिता परमात्मा का नाम जपो। तड़प कर उस अल्लाह, मालिक को अपना बना लो और एक बार वह आपका हो गया तो वह कभी भी बिछोड़ा नहीं करता। इसलिए आप ऐसा साथी बनाओ जो पक्का हो। जिसे आप साथी समझ बैठते हैं उसका तो भगवान जानता है कि किसको, कितने श्वास दिए हैं। इसलिए उसको साथी बनाओ जो श्वास देता है। जब वो आपका अपना हो जाएगा तो आप दुनिया में बहार की तरह जीवन गुजारेंगे वरना पतझड़ का मौसम आ जाता है। आप जी फरमाते हैं कि दुनिया के प्यार की शुरुआत स्वार्थ से होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनियादारी में लोग खो जाते हैं और अल्लाह, मालिक, राम, कायदे-कानून सब भूल जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि जब उस राम की मार पड़ती है तो आदमी को कोई रास्ता नजर नहीं आता। इसलिए सेवा-सुमिरन करो, भक्ति की चाह करो। उससे सब कुछ मांगो और वो देगा, अंदर-बाहर से मालामाल कर देगा। इसलिए उस परमपिता परमात्मा से कभी भी मुंह न मोड़ो। मालिक का सुमिरन, भक्ति-इबादत करते रहो तो अंदर-बाहर से लबरेज हो जाओगे और एक बार उसने आपकी बांह पकड़ ली तो सदा सुहागन हो जाओगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2017 03:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्रभु को पाने के लिए भक्ति जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग का अर्थ है सच का साथ। सच उसे कहते हैं जिसे कहा जा सकता है कि जो सच था, सच है और सच ही रहेगा। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब ही इस दुनिया में एकमात्र सच है। भगवान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा। </strong>पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग का अर्थ है सच का साथ। सच उसे कहते हैं जिसे कहा जा सकता है कि जो सच था, सच है और सच ही रहेगा। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब ही इस दुनिया में एकमात्र सच है। भगवान के अनेक नाम हंै, लेकिन वो सुप्रीम पॉवर यानी सबसे बड़ी ताकत एक ही है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानी जनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है। कोई भी जगह उससे खाली नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">हर जगह, कण-कण, जर्रे-जर्रे में उसकी मौजूदगी का अहसास होता है। जहां तक हमारी निगाह जाती है वहां तक वो मालिक, परमात्मा है और जहां तक निगाह नहीं जाती वो वहां तक भी है। दोनों जहानों यानी त्रिलोकी, जहां आत्मा जाती है और जहां शरीर नहीं जाता है, वहां भी वो है। ऐसा मालिक, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा, सुप्रीम पावर जो सारी सृष्टि को बनाने वाला है।  उसे देखा, महसूस किया जा सकता है लेकिन उसके लिए भक्ति करनी अति आवश्यक है। आप जी फरमाते हैं कि आप कोई भी काम-धन्धा करते हैं तो उसके लिए मेहनत भी जरूर करते हैं, क्योंकि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिल सकती। प्रभु को पाने के …किसान भाई अपने खेत में अच्छी फसल पैदा करने के लिए जमीन को साफ-सुथरा करते हैं, बुआई, निराई, गुड़ाई, बिजाई, खाद, स्प्रे हर तरह से उसे संभालते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीज डालते समय भी संभाल जरूरी है, क्योंकि ऐसी बीमारियां हैं जो धरती में ही लग जाती हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि यदि पेड़-पौधे की अच्छी तरह से संभाल की जाए तो वो बहुत जल्दी लहलहाने लगता है। इसी तरह इन्सान को मनुष्य शरीर रूपी धरती तो मिल चुकी है, लेकिन  इसमें पाप-कर्म, ठगी, बेईमानी, रिश्वतखोरी, नशों रूपी खरपतवार भी बहुत उगे हुए हैं। इस तरह यह धरती उपजाऊ होते हुए भी झाड़, फूस से भर गई है। धरती को साफ करने के लिए हल चलाना पड़ता है, उसी तरह इस शरीर रूपी धरती में भी जो घास-फूस, बुराई पैदा हो गई है उसे राम-नाम रूपी हल से साफ करना होगा। जैसे-जैसे घास-फूस साफ होता जायेगा, वैसे-वैसे राम-नाम का बीज फलता-फूलता जायेगा। जिस धरती रूपी शरीर में पहले से पाप-कर्म कम होते हैं या होते ही नहीं, उस धरती में बीज पड़ते ही पौधा जल्दी ही फलने-फूलने लग जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि बहुत-सी सत्संगों में ऐसा हुआ कि जिन लोगों ने नाम लिया उन्होंने बाद में बताया कि उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे उनकी आत्मा उड़ारी मार रही हो। ऐसा लगता है कि वो जहां बैठे हैं वहां नहीं, बल्कि आसमान में उड़ रहे हों। उनकी तरंगें उनसे उड़ते हुए बहुत दूर तक जा रही हों। वो लोग दुनियावी छल-कपट और विषय-विकार से बहुत दूर होते हैं। ऐसे लोगों पर राम-नाम का बीज जल्दी असर करता है, लेकिन आज इन्सान बहुत छली-कपटी हो चुका है। बेशक वह दूसरों के सामने कुछ भी जाहिर नहीं होने देता लेकिन उसे खुद तो पता ही होता है कि वह क्या है? इन्सान जब एकांत में बैठकर सोचता है तो उसे पता चलता है कि उसकी धरती में कितने पाप-कर्म के कांटे हैं। तो इसके लिए राम-नाम का स्प्रे करो तो सारे पाप-कर्म दूर हो जाएंगे और शरीर रूपी धरती पाक-पवित्र हो जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Oct 2017 05:21:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सबके अंदर है परमात्मा</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सतगुरु, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम जिसके करोड़ों नाम हैं। जो भी कोई उसे सच्चे दिल से याद करता है, चाहे वो कहीं भी हो वो सतगुरु मौला दर्श-दीदार जरुर देते हैं। इन्सान की भावना शुद्ध हो इन्सान के विचार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सतगुरु, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम जिसके करोड़ों नाम हैं। जो भी कोई उसे सच्चे दिल से याद करता है, चाहे वो कहीं भी हो वो सतगुरु मौला दर्श-दीदार जरुर देते हैं। इन्सान की भावना शुद्ध हो इन्सान के विचार शुद्ध हों, कहीं जाने की जरुरत नहीं पड़ती, क्योंकि वो परम पिता परमात्मा सबके अंदर मौजूद है।</p>
<p>पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वो अंदर ही नजारे दिखा देता है, अंदर ही दर्श-दीदार से नवाज देता है। वो रहमो-कर्म का मालिक है, दया का सागर है, किसी चीज की उसके पास कोई कमी नहीं है। बहुत ही भागों वाले, नसीबों वाले जीव होते हैं जो इस कलियुग में मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन करते हैं या मालिक के किसी भी रूप में दर्श-दीदार कर लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान जैसे-जैसे भक्ति करता जाता है वैसे-वैसे मालिक का रहमो-कर्म बरसता है। अगर इन्सान अंदर बाहर भावना शुद्ध कर लेता है, वचनों पर पक्का रहता है, कम से कम घंटा सुबह-शाम सुमिरन करता है, व्यवहार का सच्चा है तो एक न एक दिन उसे नूरी स्वरूप के दर्शन होते हैं, जरुर उसका दसवां द्वार खुल जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान वचनों का पक्का है, थोड़ा सुमिरन करता है, सेवा करता है, व्यवहार का भी ठीक-ठाक है तो कभी न कभी जरुर दर्श दीदार होते हैं, चाहे वे नूरी न हों लेकिन दर्शन होते हैं। जिनको दृढ़ यकीन है, बहुत ही पक्का विश्वास है, वचनों पर पक्के हैं उनको भी मालिक के नजारे कभी कभार नजर आ जाया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इस कलियुग में अगर नूरी स्वरूप को देखना हो, दृढ़ यकीन हो वचनों पर पक्के हो, सुमिरन के पक्के हो, सेवा करते हो, व्यवहार के सच्चे हो अंदर शुद्ध बाहर भी शुद्ध भावना के आप स्वामी हो तो यकीन मानिये नूरी स्वरूप ही नहीं, पहले दसवां द्वार खुलेगा, फिर नूरी स्वरूप नजर आएगा और मालिक की अनहद नाद आपको मालिक तक जरुर ले जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कितना समय लगता है? समय सीमा कोई नहीं है, कुछ कहा नहीं जा सकता कितने समय तक आप मालिक के नूरी स्वरूप के दर्श-दीदार कर सकते हैं। पर यह सच है कि एक दिन वो नजर जरुर आता है। इसलिए सुमिरन कीजिए, भक्ति-इबादत कीजिए, वचनों के पक्के, व्यवहार के सच्चे बनें। इन्सान हमेशा यह ध्यान रखें कि उसके व्यवहार से कभी कोई दुखी न हो, कभी कोई परेशान न हो। व्यवहार के सच्चे बन कर जो वचनों पर चला करते हैं, वो मालिक की दया-दृष्टि के काबिल एक दिन जरुर बना करते हैं।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2017 01:08:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परमात्मा को पाने के लिए लगन से सेवा-सुमिरन करो</title>
                                    <description><![CDATA[मालिक को देखने के लिए ध्यान एकाग्र करना होगा सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। इन्सान हर समय दुनियादारी में मशगुल, मस्त रहता है, जिस कारण इन्सान को मालिक अंदर होते हुए भी दूर लगता है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">मालिक को देखने के लिए ध्यान एकाग्र करना होगा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। इन्सान हर समय दुनियादारी में मशगुल, मस्त रहता है, जिस कारण इन्सान को मालिक अंदर होते हुए भी दूर लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मालिक इन्सान की आंखों के सबसे नजदीक है और इन्सान उसे सबसे दूर किए बैठा है, लेकिन मालिक को देखने के लिए ध्यान एकाग्र करना होगा और एकाग्र होने के लिए, ध्यान जमाने के लिए सुमिरन, भक्ति-इबादत करना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्ति किए बिना मालिक नजर नहीं आता। सबसे पहले यह जरूरी है कि इन्सान मालिक को अपने अंदर देखे और जैसे ही मालिक अंदर से महसूस होगा, तो वो कण-कण, जर्रे-जर्रे में नजर आने लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए अगर आप उस परमपिता परमात्मा को पाना चाहते हो और उसे कण-कण में देखना चाहते हो तो आपको सेवा-सुमिरन में ध्यान जरूर लगाना होगा।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/only-meditation-is-the-way-to-meet-with-god-saint-dr-msg/article-2225</link>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 04:10:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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